झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद्, राँची (झारखंड)
प्रथम & द्वितीय सावधिक परीक्षा - 2021-2022 मॉडल प्रश्न पत्र
मॉडल प्रश्न-पत्र सेट-1
1. दो वस्तुओं X तथा Y के लिए उत्पादन संभावनाएँ इस प्रकार दी हुई हैं,
वस्तु-X | 0 | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 |
वस्तु-Y | 10 | 8 | 6 | 4 | 2 | 0 |
तो उत्पादन संभावना वक्र का आकार कैसा होगा?
(A)ऋणात्मक ढाल तथा मूल बिन्दु की ओर अवतल(Concave)
(B) ऋणात्मक ढाल तथा मूल बिन्दु की ओर उत्तल(Convex)
(C) ऋणात्मक ढाल तथा एक सरल रेखा
(D) धनात्मक ढाल तथा एक सरल रेखा
2. निम्नलिखित में से कौन अर्थव्यवस्था की एक केन्द्रीय समस्या है?
(A) क्या बचत हो?
(B) क्या उपभोग हो?
(C) क्या निवेश हो?
(D) किसके लिए उत्पादन हो?
3. अर्थशास्त्र में शब्द व्यष्टि और समष्टि का प्रयोग सर्वप्रथम किस अर्थशास्त्री ने किया था?
(A) एडम स्मिथ
(B) रैग्नर फ्रिश
(C) माल्थस
(D) अल्फ्रेड मार्शल
4. एक किसान खेतों की जुताई के लिए ट्रैक्टर और हल-बैल के बीच किसी एक तकनीक का चयन करता है। उसका यह चयन अर्थव्यवस्था की किस केन्द्रीय समस्या से मेल खाता है?
(A) क्या उत्पादन करें?
(B) कैसे उत्पादन करें?
(C) किसके लिए उत्पादन करें?
(D) कितनी मात्रा में उत्पादन करें?
5. किस अर्थशास्त्री के अनुसार उपयोगिता को मुद्रा में मापा जा सकता है?
(A) लियोनल रॉबिन्स
(B) अल्फ्रेड मार्शल
(C) एडम स्मिथ
(D) वालरस
6. एक व्यक्ति 4 गोलगप्पे का उपभोग करता है। उसे प्रत्येक व्यक्तिगत इकाई से क्रमशः 15 यूटिल्स, 12 यूटिल्स, 10 यूटिल्स तथा 8 यूटिल्स उपयोगिता मिलती है, तो उसे 4 गोलगप्पे के उपभोग से कुल उपयोगिता कितनी प्राप्त होगी?
(A) 15 यूटिल्स
(B) 30 यूटिल्स
(C) 45 यूटिल्स
(D) 37 यूटिल्स
7. दो वस्तुओं रसगुल्ला और गुलाब जामुन के लिए बजट रेखा AB को निम्न रेखाचित्र से दर्शाया गया
है। इन दो वस्तुओं की कीमतें क्रमशः Pr एवं Pg हैं, बजट रेखा की ढाल क्या होगी?
(A) `\frac{P_r}{P_g}`
(B) `\frac{P_g}{P_r}`
(C) Pr x Pg
(D) Pr + Pg
8. निम्नलिखित में से कौन किसी वस्तु की माँग को प्रभावित करने वाला एक कारक नहीं है?
(A) वस्तु की कीमत
(B) संबंधित वस्तु की कीमत
(C) उपभोक्ता की आय
(D) साधनों की कीमतें
9. यदि वस्तु X की कीमत कम होने से वस्तु Y की माँग कम हो जाती है, तो इन दो वस्तुओं को
क्या कहा जाएगा?
(A) प्रतियोगी वस्तुएँ
(B) पूरक वस्तुएँ
(C) असंबंधित वस्तुएँ
(D) घटिया वस्तुएँ
10. यदि किसी वस्तु की कीमत में 5% की कमी होने से उसकी माँग मात्रा में 8% की वृद्धि होती है तो माँग की कीमत लोच का मान क्या होगा?
(A) 1.6
(B) 40
(C) 0.67
(D) 13
11.निम्न में से किस वस्तु की माँग लोचदार होगी?
(A) जीवन रक्षक दवाएं
(C) माचिस
(B) नमक
(D) रेफ्रीजरेटर
12. निम्न रेखाचित्र में माँग रेखा AB के बिन्दु G पर माँग की लोच क्या होगी?
(A) 0
(B) 1
(C) 1 से कम
(D) 1 से अधिक
13. किस प्रकार की वस्तु की कीमत बढ़ने पर उपभोक्ता उस वस्तु की अधिक मात्रा खरीदना चाहता है?
(A) जीवन रक्षक दवाएँ
(B) विलासिता वस्तु
(C) आवश्यक वस्तु
(D) गिफिन वस्तु
14. यदि एक उपभोक्ता एक वस्तु पर अपनी आय का एक बड़ा हिस्सा खर्च करता है, तो उस वस्तु की माँग क्या होगी?
(A) बेलोचदार
(B) पूर्णतया बेलोचदार
(C) पूर्णतया लोचदार
(D) सापेक्षिक लोचदार
15.औसत स्थिर लागत वक्र का आकार होता है-
(A) ऋणात्मक ढाल की एक सरल रेखा
(B) धनात्मक ढाल की एक सरल रेखा
(C) आयताकार परवलीय
(D) गोलाकार
16.परिवर्ती साधन का औसत उत्पाद बढ़ता है, जब
(A) सीमांत उत्पाद औसत उत्पाद से अधिक होता है।
(B) सीमांत उत्पाद औसत उत्पाद से कम होता है।
(C) सीमांत उत्पाद औसत उत्पाद के बराबर होता है।
(D) सीमांत उत्पाद शून्य होता है।
17. कुल उत्पादन अधिकतम होता है, जब सीमांत उत्पादन का मान होता है-
(A) 0
(B) ऋणात्मक
(C) धनात्मक
(D) अधिकतम
18. यदि कुल उत्पाद TP तथा परिवर्ती साधन की मात्रा Q है, तो औसत उत्पाद का सूत्र होगा-
(A) `\frac{TP}Q`
(B) `\frac{\Delta TP}{\Delta Q}`
(C) TP X Q
(D) TP + Q
19. यदि कुल उत्पाद TP तथा परिवर्ती साधन की मात्रा Q है, तो सीमांत उत्पाद का सूत्र होगा-
(A)
(B)
(C) TP X Q
(D) TP + Q
20. जब औसत लागत सीमांत लागत से कम होती है, तब औसत लागत
(A) बढ़ती है
(B) स्थिर रहती है
(C) घटती है
(D) न्यूनतम होती है।
21. परिवर्तनशील अनुपातों का नियम उत्पादन के कितने स्तर की व्याख्या करता है?
(A) 1
(B) 2
(C) 3
(D) 4
22.अल्पकालीन औसत लागत वक्र का आकार होता है-
(A) उल्टा U आकार
(B) U आकार
(C) एक सरल रेखा
(D) आयताकार परवलीय
23. निम्नलिखित में से कौन स्थिर लागत का एक उदाहरण है?
(A) स्थायी कर्मचारी का वेतन
(B) प्रति इकाई बिजली बिल
(C) दैनिक मजदूर की मजदूरी
(D) कच्चे माल पर व्यय
24.औसत लागत और सीमांत लागत आपस में बराबर होती है, जब औसत लागत -
(A) बढ़ती है।
(B) घटती है।
(C) अधिकतम होती है।
(D) न्यूनतम होती है।
25.किसी वस्तु की प्रति इकाई बिक्री से एक उत्पादक को प्राप्त राशि क्या कहलाती है?
(A) कुल आगम
(B) औसत आगम
(C) सीमांत आगम
(D) औसत लागत
26. कुल लागत (TC), कुल स्थिर लागत (TFC) और कुल परिवर्तनशील लागत (TVC) के संबंध में कौन सा कथन सत्य है?
(A) TFC = TC+TVC
(B) TVC = TFC+TC
(C) TC = TFC-TVC
(D) TFC = TC-TVC
27. जब किसी वस्तु की माँग में वृद्धि होती है लेकिन पूर्ति में कोई परिवर्तन नहीं होता है, तब संतुलन कीमत में
(A) कमी होती है।
(B) वृद्धि होती है।
(C) कोई परिवर्तन नहीं होता।
(D) इनमें से कोई नहीं।
28.यदि किसी वस्तु की माँग (D) तथा पूर्ति (S) हो तो बाजार संतुलन की शर्त होगी-
(A) D = S
(B) D – S = 0
(C) `\frac{D}S` = 1
(D) इनमें से सभी
29.किसी वस्तु का न्यूनतम समर्थन मूल्य बाजार मूल्य से/के
(A) कम होता है।
(B) अधिक होता है।
(C) बराबर होता है।
(D) दुगुना कम होता है।
30. निम्नलिखित में से कौन सा फलन पूर्ति के नियम को प्रदर्शित करता है?
(A) S = ⨍ (P)
(B) S = ⨍ (Q)
(C) D = ⨍ (P)
(D) S = ⨍`\left(\frac1P\right)`
31 मुक्त प्रवेश और निकास की स्थिति में एक पूर्ण प्रतियोगी बाजार में संतुलन कीमत …… के बराबर होती है।
(A) न्यूनतम कुल लागत
(B) न्यूनतम औसत लागत
(C) न्यूनतम सीमांत लागत
(D) अधिकतम लागत
32. एक उत्पादक का उद्देश्य क्या होता है?
(A) लाभ अधिकतम करना
(C) आगम अधिकतम करना
(B) लागत अधिकतम करना
(D) लाभ न्यूनतम करना
33.अल्पकाल में एक पूर्णप्रतियोगी फर्म हानि प्राप्त करने के बावजूद उत्पादन जारी रखती है, जब वस्तु की कीमत
(A) सीमांत लागत के बराबर होती है।
(B) औसत लागत के बराबर होती है।
(C) औसत परिवर्तनशील लागत से अधिक या इसके बराबर होती है।
(D) न्यूनतम औसत लागत के बराबर होती है।
34.निम्नलिखित में से कौन पूर्ण प्रतियोगिता की एक विशेषता नहीं है।
(A) क्रेताओं और विक्रेताओं की अधिक संख्या
(B) मुक्त प्रवेश और निकास की सुविधा
(C) सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं
(D) वस्तु की माँग बेलोचदार
35.किस प्रकार की बाजार संरचना में किसी वस्तु का एक और केवल एक उत्पादक होता है?
(A) एकाधिकार
(B) अपूर्ण प्रतियोगिता
(C) पूर्ण प्रतियोगिता
(D) द्वयाधिकार
36. निम्नलिखित में कौन सा कथन पूर्ण प्रतियोगिता और एकाधिकार में स्पष्ट अंतर को व्यक्त करता है?
(A) एकाधिकार में पूर्ण प्रतियोगिता की तुलना में फ़र्मों की संख्या अधिक होती है।
(B) एकाधिकारी पूर्ण प्रतियोगी फर्म की तुलना में अधिक कीमत तय करता है और कम मात्रा की बिक्री करता है।
(C) एकाधिकार में फर्म के प्रवेश और निकास की स्वतंत्रता होती है जबकि प्रतियोगिता में नहीं।
(D) एकाधिकार में वस्तुएं समरूप होती हैं जबकि पूर्णप्रतियोगिता में निकट प्रतिस्थापक वस्तु उपलब्ध नहीं होती।
37. एकाधिकार के अंतर्गत कीमत (P) और सीमांत लागत (MC) के बीच क्या संबंध होता है?
(A) P - MC >0
(B) P > MC
(C) `\frac P{MC}` > 1
(D) इनमें से सभी
38.निम्नलिखित में से किस बाजार संरचना में कीमत और सीमांत लागत में समानता पायी जाती है।
(A) एकाधिकार
(B) अपूर्ण प्रतियोगिता
(C) पूर्ण प्रतियोगिता
(D) द्वयाधिकार
39. एक विक्रेता को ₹5 प्रति इकाई कीमत पर किसी वस्तु की 60 इकाई की बिक्री से प्राप्त कुल आगम की राशि क्या होगी?
(A) ₹65
(B) ₹12
(C) ₹300
(D) ₹55
40. उत्पादन कर में वृद्धि से किसी वस्तु की पूर्ति
(A) में स्थिरता होगी।
(B) में वृद्धि होगी।
(C) में कमी होगी।
(D) में कोई परिवर्तन नहीं होगा।
Term-2 Exam -2021-2022
वर्ग- 12 (Class-12) | विषय-अर्थशास्त्र। (Sub-Economics) | पूर्णांक-40 (F.M-40) | समय-1:30 घंटे (Time-1:30 hours) |
सामान्य निर्देश (General Instructions) -
» परीक्षार्थी यथासंभव अपने शब्दों में उत्तर दें।
» कुल प्रश्नों की संख्या 19 है।
» प्रश्न संख्या 1 से प्रश्न संख्या 7 तक अति लघूत्तरीय प्रश्न हैं। इनमें से किन्हीं पाँच प्रश्नों के उत्तर अधिकतम एक वाक्य में दीजिए। प्रत्येक प्रश्न का मान 2 अंक निर्धारित है।
» प्रश्न संख्या 8 से प्रश्न संख्या 14 तक लघूतरीय प्रश्न हैं। इनमें से किन्हीं 5 प्रश्नों के उत्तर अधिकतम 50 शब्दों में दीजिए। प्रत्येक प्रश्न का मान 3 अंक निर्धारित है।
» प्रश्न संख्या 15 से प्रश्न संख्या 19 तक दीर्घ उत्तरीय प्रश्न हैं। इनमें से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर अधिकतम 100 शब्दों में दीजिए। प्रत्येक प्रश्न का मान 5 अंक निर्धारित है।
खंड- A अति लघु उत्तरीय प्रश्न
निम्नलिखित में से किन्हीं पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
1. समष्टि अर्थशास्त्र को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
समष्टि अर्थशास्त्र वह आर्थिक प्रणाली है जिसमें आर्थिक समस्याओं का अध्ययन एवं
विश्लेषण अर्थव्यवस्था के स्तर पर किया जाता है। जैसे – सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था,
समग्र उत्पादन, समग्र विनियोग आदि।
2. विनियोग को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: विनियोग – विनियोग का आशय उम
व्ययों से होता है जिनके करने से पूँजीगत वस्तुओं; जैसे – मशीन, कारखाना, मकान,
फर्नीचर आदि में वृद्धि होती है। निवेश में उत्पादन कार्य हेतु आवश्यक मशीनों तथा
यन्त्रों के साथ-साथ, नये निर्माण तथा स्टॉक में होने वाली वृद्धि को भी शामिल
किया जाता है।
3. भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना कब की गई थी?
उत्तर:
भारत
का केंद्रीय बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया है जिसकी स्थापना 1 अप्रैल 1935 ई. को की गई।
4. प्रत्यक्ष कर क्या है?
उत्तर: जिस कर के भुगतान में कर भार तथा कर दायित्व एक ही व्यक्ति पर
पड़ते हैं उसे प्रत्यक्ष कर कहते हैं।
जैसे – आयकर, सम्पत्ति कर आदि।
5. ऋणों का भुगतान पूँजीगत व्यय क्यों है?
उत्तर:
ऋणों का भुगतान पूँजीगत व्यय इसलिए कहलाता है क्योंकि ऋणों का भुगतान करने से सरकार
की देयताओं में कमी आती है।
6. यदि MPC का मान 0.3 है तो MPS का मान क्या
होगा?
उत्तर: MPC = 0.3
MPC + MPS =
1
⸫ MPS = 1 – MPC = 1 – 0.3 = 0.7
7. बंद अर्थव्यवस्था से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: वह अर्थव्यवस्था जिसका अन्य किसी राष्ट्र से कोई व्यापार या परिसंपत्तियों का लेन देन नहीं होता। बंद अर्थव्यवस्था कहलाती है।
खंड-B लघु उत्तरीय प्रश्न
निम्नलिखित में से किन्हीं पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
8. पूँजीवादी अर्थव्यवस्था की किन्हीं तीन विशेषताओं को लिखिए।
उत्तर-
पूँजीवादी अर्थव्यवस्था, वह आर्थिक प्रणाली है, जहाँ उत्पादन के साधनों का निजी स्वामित्व
होता है, वस्तु का उत्पादन लाभ-प्राप्ति की दृष्टि से किया जाता है तथा आर्थिक क्रियाओं
सरकारी हस्तक्षेप नहीं होता है।
विशेषताएँ-
पूँजीवादी अर्थव्यवस्था की प्रमुख विशेषताएँ निम्नानुसार हैं-
(1)
पूँजीवाद में निजी सम्पत्ति का अधिकार होता है, प्रत्येक व्यक्ति को सम्पत्ति प्राप्त
करने, रखने, प्रयोग करने तथा उसका क्रय-विक्रय करने का पूर्ण अधिकार होता है।
(2)
पूँजीवादी व्यवस्था में आर्थिक स्वतंत्रता होती है, व्यक्ति अपनी इच्छानुसार किसी भी
व्यवसाय को चुन सकता है।
(3)
पूँजीवाद में लाभ उद्देश्य प्रमुख होता है, व्यक्ति केवल उन कार्यों को सम्पादित करता
है, जिसमें उसे अधिकतम लाभ प्राप्ति होती है।
(4)
पूँजीवादी अर्थव्यवस्था का संचालन एवम् समन्वय कीमत, यंत्र द्वारा होता है, अर्थात्
उत्पादन उपभोग एवं विनियोग सभी कीमतों द्वारा निर्धारित होते हैं।
(5)
इसके अन्तर्गत उपभोक्ता अपनी राय को इच्छानुसार विभिन्न वस्तुओं पर व्यय कर सकता है।
9. व्यावसायिक बैंक के किन्हीं तीन कार्यों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
:- "व्यावसायिक बैंक व वित्तीय संस्था है जो लोगों के
रुपये को अपने पास जमा के रूप में स्वीकार करती हैं और उनको
उपभोग अथवा निवेश के लिए उधार देती है।"
व्यवसायिक बैंकों के मुख्य कार्य
निम्नलिखित हैं -
1.
जमा प्राप्त करना :- व्यवसायिक बैंकों का एक मौलिक कार्य जनता से जमा प्राप्त करना
है। जनता से प्राप्त जमा पर बैंक कुछ ब्याज भी देते हैं तथा
इसी जमा की रकम को अधिक ब्याज की दरों पर कर्ज दे कर मुनाफा
प्राप्त करते हैं।
व्यवसायिक
बैंक तीन प्रकार के खातों में रकम जमा करते हैं
(क)
स्थायी जमा खाता (ख) चालू खाता (ग) बचत बैंक खाता
2.
ऋण देना :- व्यवसायिक बैंक खातों में जो जमा की रकम प्राप्त करते हैं उसे विभिन्न उत्पादक
कार्यों के लिए अपने ग्राहकों को ऋण के रूप में देते हैं। विभिन्न खातों में जमा रकम
पर चुकाई गई ब्याज की राशि एवं ऋणों से प्राप्त ब्याज की राशि
का अंतर ही बैंक का मुनाफा होता है। बैंक निम्न प्रकार से ऋण देते
हैं -
(a)
अधिविकर्ष (b) नकद साख (c) ऋण एवं अग्रिम (d) विनिमय बिलों अथवा हुण्डियो का बट्टा करना तथा (e) याचना तथा अल्प सूचना ऋण
3.
सामान्य उपयोगिता सम्बन्धी कार्य :- बैंक के सामान्य उपयोगिता
संबंधी कार्य निम्न है - (a) विदेशी विनिमय का क्रय विक्रय
(b) बहुमूल्य वस्तुओं की सुरक्षा (c) साख
प्रमाण पत्र एवं अन्य साख पत्रों को जारी करना (d) ग्राहकों
को दूसरे की साख के बारे में जानकारी देना (e) व्यावसायिक
सूचना तथा आर्थिक आंकड़े एकत्रित करना (f) वित्तीय मामलों के संबंध में सलाह
देना (g) मुद्रा को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजने की सुविधा।
4.
एजेन्सी के कार्य :- बैंक अपने ग्राहकों के एजेंट के रूप में
कार्य करते हैं जिन्हें एजेन्सी के कार्य कहा
जाता है। इसमे निम्नलिखित प्रमुख है - (a) प्रतिभूतियों का क्रय विक्रय (b) ग्राहकों की ओर
से भुगतान का काम करना (c) ग्राहकों के लिए भुगतान प्राप्त करना (d) चेक एवं अन्य साख पत्रों के भुगतान को इकट्ठा
करना (e) प्रतिनिधि के समान कार्य करना (f) ग्राहकों की ओर से विनिमय बिलों को स्वीकार
करना।
10. मध्यवर्ती वस्तु और अंतिम वस्तु में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
(ब) मध्यवर्त्ती वस्तुएं तथा अन्तिम वस्तुएं
|
अन्तिम वस्तुएं |
मध्यवर्त्ती
वस्तुएं |
|
अन्तिम
वस्तुएं
वे वस्तुएं हैं जिन्होंने उत्पादन की सीमा
रेखा को पार कर लिया है। |
मध्यवर्त्ती
वस्तुएं वे वस्तुएं हैं जो अभी उत्पादन
की सीमा रेखा में ही है। |
|
इनमें
कोई मूल्य जोड़ना शेष नहीं है। |
मध्यवर्त्ती
वस्तुओ में मूल्य जोड़ना शेष रहता
है। |
|
अंतिम
उपभोग
करने वालों (जिनमें उपभोक्ता तथा उत्पादक सम्मिलित होते
हैं) के लिए तैयार होती है। |
अंतिम
उपभोग
करने के लिए तैयार नहीं रहती। |
|
राष्ट्रीय
आय
का अनुमान लगाने के लिए अंतिम वस्तुओं को सम्मिलित किया जाता है। |
राष्ट्रीय
आय
का अनुमान लगाने के लिए सम्मिलित नहीं किया जाता है। |
11. उपभोग की सीमांत प्रवृत्ति क्या है? यह बचत की सीमांत प्रवृत्ति
से किस प्रकार संबंधित है?
उत्तर:
सीमांत उपभोग प्रवृत्ति (MPC) तथा सीमांत बचत प्रवृत्ति (MPS) के सम्बंध को निम्नलिखित
समीकरण की सहायता से स्पष्ट किया जा सकता है।
MPC `=\frac{\Delta C}{\Delta Y}`
MPS `=\frac{\Delta S}{\Delta Y}`
हम जानते हैं कि ΔY = ΔC + ΔS
⸫ MPC+MPS`=\frac{\Delta C}{\Delta Y}+\frac{\Delta S}{\Delta Y}=\frac{\Delta C+\Delta S}{\Delta Y}=\frac{\Delta Y}{\Delta Y}`=1
⸫ MPC + MPS = 1
MPC =
1 - MPS
MPS =
1 - MPC
समीकरण से स्पष्ट है कि सीमांत बचत प्रवृत्ति तथा सीमांत
उपभोग प्रवृत्ति का योग सदैव 1 के बराबर होता है।
MPS तथा MPC के उपर्युक्त संबंध से स्पष्ट
है कि आय के दो मुख्य कार्य है - उपभोग तथा बचत। उपभोग और बचत मिलकर आय के बराबर होते हैं।
12. आर्थिक एजेंट से आप क्या समझते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
एक एजेंट उसे कहा जाता है जो किसी वस्तु को उत्पन्न करने या कार्य करने की क्षमता रखता हो । आर्थिक एजेंट, इस तरह से,
एक बाजार में निर्णय लेने वाले अभिनेता
हैं। इन कार्यों से विभिन्न परिणाम उत्पन्न होते हैं जो सामान्य रूप से आर्थिक
प्रणाली को प्रभावित करते हैं।
परिवार (उपभोक्ता), कंपनियां (निर्माता
और बाजार), और राज्य (जो, विभिन्न तंत्रों के
माध्यम से, बाजार के कामकाज को विनियमित करते हैं) सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक एजेंट
हैं। आर्थिक एजेंटों का यह वर्गीकरण एक कथित बंद अर्थव्यवस्था के
मॉडल पर आधारित है, अर्थात इसका विदेशी बाजारों से कोई
संबंध नहीं है।
यह ध्यान में रखना चाहिए कि आर्थिक एजेंट अक्सर दोहरी भूमिका निभाते हैं । परिवार जो उत्पाद मांगते हैं और उपभोक्ताओं के रूप में कार्य करते हैं, वे भी अपने काम में उत्पादक होते हैं। एक कंपनी जो मशीनरी और विभिन्न इनपुट खरीदते हुए, भोजन बनाती और बेचती है। यहां तक कि राज्य भी एक साथ निर्माता और उपभोक्ता है।
13. राजस्व लेखा की व्याख्या कीजिए।
उत्तर
:- राजस्व लेखा एक वित्तीय वर्ष ( अप्रैल 1 से मार्च 31 तक
) की अवधि के दौरान सरकार की प्राप्तियों ( आय ) तथा सरकार के व्यय के अनुमानों का
विवरण होता है।
राजस्व
लेखा के
दो मुख्य तत्व ( घटक ) है
(1)
बजट प्राप्तियां :- बजट प्राप्तियों से अभिप्राय एक वित्तीय वर्ष में सरकार को सभी
साधनों से प्राप्त होने वाली अनुमानित मौद्रिक आय से है। बजट प्राप्तियों का विस्तृत
रूप से दो भागों में वर्गीकरण किया जाता है।
(a)
राजस्व प्राप्तियां :- सरकार की राजस्व प्राप्तियां वे मौद्रिक प्राप्तियां हैं जिनके
फलस्वरूप न तो कोई देयता उत्पन्न होती है और न ही परिसंपत्तियों में कमी होती है।
(b)
पूंजीगत प्राप्तियां :- पूंजीगत प्राप्तियां वे मौद्रिक प्राप्तियां हैं जिनसे सरकार
की देयता उत्पन्न होती है या परिसंपत्ति कम होती है।
(2)
बजट व्यय :- बजट व्यय से अभिप्राय सरकार द्वारा एक वित्तीय वर्ष में 'विकास तथा विकासेतर'
या 'योजना' तथा 'योजनेतर' कार्यक्रमों पर अनुमानित व्यय से है।
बजट
व्यय को निम्न दो भागों में वर्गीकरण किया जाता है -
(a)
राजस्व व्यय :- राजस्व व्यय से अभिप्राय सरकार द्वारा एक वित्तीय वर्ष में किये जाने
वाले उस अनुमानित व्यय से है जिसके फलस्वरूप न तो सरकार की परिसंपत्ति का निर्माण होता
है न ही देयता में कमी होती है।
(b)
पूंजीगत व्यय :- पूंजीगत व्यय से अभिप्राय एक वित्तीय वर्ष में सरकार के उस अनुमानित
व्यय से है जो परिसंपत्तियों में वृद्धि करता
है या देयता को कम करता है।
14. खुली अर्थव्यवस्था को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: खुली अर्थव्यवस्था को अगर उसके शाब्दिक अर्थ से समझें तो इसका मतलब होता है एक ऐसा देश या समाज जहाँ किसी को किसी से भी व्यापार करने की छूट होती है और ऐसा भी नही कि इस व्यापार पे कोई सरकारी अंकुश या नियंत्रण नही होता। पर सरकार ऐसी नीतियाँ बनाती है जिससे आम लोग उद्योग और अन्य प्रकार के व्यापार आसानी से शुरू कर सकें। ऐसी अर्थव्यवस्था मे व्यापारों को स्वतंत्र रूप से फलने-फूलने दिया जाता है। सरकारी नियंत्रण ऐसे बनाये जातें है जिनमें व्यापारों को किसी भी प्रकार की बेईमानी से तो रोका जाता है पर नियंत्रण को इतना भी कड़ा नही किया जाता है कि ईमान्दार व्यापार मे असुविधा हो। खुली अर्थव्यवस्था न केवल उस समाज य देश के अंदरूनी व्यापार के लिये होती है बल्कि बाहरी व्यापार को भी उसी दृष्टि से देखा जाता है।
खंड-दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
निम्नलिखित में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
15. राष्ट्रीय आय की गणना की उत्पाद विधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर: इस विधि के अन्तर्गत राष्ट्रीय आय का आकलन करने के लिए वर्ष भर के उत्पादन के बाजार मूल्य में से प्रयुक्त साधनों के मूल्य को घटा दिया जाता है। जो शेष बचाता है वही राष्ट्रीय आय कहलाती है। दूसरे शब्दों में, इस विधि के अन्तर्गत उत्पादित सभी अन्तिम उपभोग्य वस्तुओं एवं सेवाओं के मूल्य को जोड़ा जाता है। इस प्रकार सकल राष्ट्रीय उत्पाद की गणना की जाती है।
उत्पादित कुछ वस्तुओं एवं सेवाओं की प्रकृति अन्तरिम या मध्यवर्ती होती है जिन्हें बाद में उत्पादन कार्य में प्रयोग किया जाता है। इनका उपभोक्ता द्वारा आवश्यकता पूर्ति हेतु उस अवस्था में प्रयोग नहीं होता है। ऐसी वस्तुओं एवं सेवाओं का मूल्य राष्ट्रीय आय की गणना में शामिल नहीं किया जाता है।
इस विधि से राष्ट्रीय आय का अनुमान लगाने में दोहरी गणना की सम्भावना रहती है। इससे बचने के लिए उत्पादन विधि की मूल्य सम्वर्धन विधि का प्रयोग करते हैं। इसके अन्तर्गत उत्पादन के प्रत्येक चरण पर उत्पादन का सही-सही मूल्य ज्ञात कर लिया जाता है। उत्पादन का सही-सही मूल्य ज्ञात करने के लिए उत्पादन के मूल्य में से उत्पादन साधनों पर होने वाला खर्च घटा देते हैं। इस प्रकार प्राप्त राशि ही राष्ट्रीय आय कहलाती है।
उदाहरण द्वारा स्पष्टीकरण-
यदि कोई फर्म ₹ 500 मूल्य का उत्पादन करती है इसमें वह ₹ 200 मूल्य की मध्यवर्ती वस्तु का प्रयोग करती है तो फर्म के उत्पादन का सकल मूल्य के ₹ 500 – 200 =
300 होगा। शुद्ध मूल्य ज्ञात करने के लिए इसमें से साधनों पर होने वाले ह्रास की राशि को और घटाया जाता है। यदि ह्रास की राशि के 50 हो तो शुद्ध उत्पाद मूल्य ₹ 300 – 50 = 250 होगा।
16. निम्नलिखित ऑकड़ा से शुद्ध मूल्य वृद्धि की गणना कीजिए।
|
|
(लाख रुपये में) |
|
a) विक्रय |
200 |
|
b) कच्चे माल का क्रय |
50 |
|
c) अंतिम स्टॉक |
15 |
|
d) प्रारम्भिक स्टॉक |
10 |
|
e) अचल पूँजी का उपभोग |
10 |
उत्तर:
शुद्ध मूल्य वृद्धि = सकल मूल्य वृद्धि - मूल्यह्रास -(अप्रत्यक्ष
कर- आर्थिक सहायता)
सकल
मूल्य वृद्धि = उत्पादन का मूल्य - अन्य फर्मों से कच्चे माल की खरीद
उत्पादन
का मूल्य = कुल बिक्री + स्टॉक में परिवर्तन (अंतिम स्टॉक - प्रारंभिक स्टॉक)
उत्पादन
का मूल्य = 200 + (15-10) = 200+5= ₹205
सकल
मूल्य वृद्धि = 205 - 50 = ₹155
⸫ शुद्ध
मूल्य वृद्धि = 155-10 = ₹145
17. सट्टा उद्देश्य प्रयोजन के लिए मुद्रा की माँग की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
सट्टा उद्देश्य- व्यक्ति अपने पास नकद मुद्रा इसलिए भी रखना चाहता है ताकि भविष्य में
व्याज दर, बॉण्ड तथा प्रतिभूतियों की कीमतों में होने वाले परिवर्तन का लाभ उठा सके।
प्रो.
कीन्स के अनुसार, "भविष्य के सम्बन्ध में बाजार की तुलना में अधिक जानकारी द्वारा
लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य को सट्टा उद्देश्य कहा जाता है।"
व्यक्ति
सट्टा उद्देश्य के अन्तर्गत नकद मुद्रा की मांग इस इच्छा से करता है जिससे व्यक्ति
बॉण्डों, आदि की कीमतों में होने वाले परिवर्तनों का लाभ उठा सके।
सट्टा
उद्देश्य के लिए रखी जाने वाली नकद मुद्रा की मात्रा ब्याज की दर पर निर्भर करती है।
बॉण्ड की कीमतों तथा ब्याज की दर में विपरीत सम्बन्ध पाया जाता है। कम बॉण्ड कीमतें
ऊंची ब्याज दरों को तथा ऊंची बॉण्ड कीमतें कम ब्याज दरों को प्रकट करती हैं। बॉण्ड
कीमतों में वृद्धि (अर्थात् ब्याज दर में कमी) की सम्भावना दशा में लोग अधिक बॉण्ड
खरीदेंगे ताकि भविष्य में उनकी कीमतें बढ़ने पर उन्हें बेचकर लाभ कमाया जा सके। इस
स्थिति में सट्टा उद्देश्य के अन्तर्गत रखी गयी नकद मुद्रा की मात्रा में कमी हो जाती
है। इसके विपरीत, यदि भविष्य में बॉण्ड की कीमतें गिरने की
सम्भावना होती है (अर्थात् ब्याज की दर बढ़ने की सम्भावना होती है) तब ऐसी दशा में
सट्टा उद्देश्य के अन्तर्गत अधिक मुद्रा की मात्रा रखी जाएगी। इस प्रकार, ब्याज की
दर जितनी ऊंची होगी सट्टा उद्देश्य के लिए मुद्रा की मांग उतनी ही कम होगी तथा ब्याज
की दर जितनी कम होगी सट्टा उद्देश्य के लिए मुद्रा की मांग उतनी ही अधिक होगी।
यदि
सट्टा उद्देश्य के लिए नकद मुद्रा मांग को L2 द्वारा प्रदर्शित किया जाए,
तब
L2
=f(r)
अर्थात् सट्टा उद्देश्य के लिए नकद मुद्रा की मात्रा ब्याज की दर (r) पर निर्भर करती है। L2 तथा r में विपरीत सम्बन्ध होने के कारण सट्टा उद्देश्य के लिए मुद्रा की मांग का वक्र बाएं से दाएं नीचे गिरता हुआ होता है।
इस
प्रकार मुद्रा की कुल मांग के अन्तर्गत सौदा, दूरदर्शिता तथा सट्टा उद्देश्यों के लिए
मांगी गई मुद्रा की मांगें सम्मिलित हैं।
कुल
मुद्रा की मांग (L) (अर्थात् तरलता पसन्दगी)
= L1 + L2
L
= f(Y)+f(r)
L = f(Y,r)
उपर्युक्त
विश्लेषण से स्पष्ट है कि आय स्थिर होने के कारण सौदा तथा दूरदर्शिता उद्देश्यों के
लिए मुद्रा की मांग का ब्याज की दर पर प्रत्यक्ष रूप से प्रभाव नहीं पड़ता किन्तु सट्टा
उद्देश्य के लिए मुद्रा की मांग व्यक्ति की प्रत्याशा तथा मनोवैज्ञानिक स्थिति पर निर्भर
करती है। अतः कहा जा सकता है कि ब्याज की दर का परिवर्तन ही सट्टे के लिए मुद्रा की
मांग उत्पन्न करता है।
18. मुद्रा की पूर्ति से क्या तात्पर्य है? भारतीय रिजर्व बैंक के द्वारा
प्रकाशित मुद्रा की पूर्ति की वैकल्पिक मापों को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
किसी भी समय पर मुद्रा की आपूर्ति का अर्थ है अर्थव्यवस्था में
विद्यमान मुद्रा का कुल परिमाण
23
जून 1998 में डाॅ. वाई. वी. रेड्डी की अध्यक्षता में गठित कार्यदल ने मुद्रा आपूर्ति
के संकेतकों ( M1 , M2 , M3 , M4 ) की
सिफारिश की।
1.
M1 = जनता के पास ( करेन्सी,
नोट तथा सिक्के) + बैंको की मांग जमाऐ
( चालू और बचत खातों की ) + रिजर्व बैंक
के पास अन्य जमाये
2.
M2 = M1 + डाकघरों की बचत बैंक जमाये
3.
M3 = M1 + बैंकों की सावधि जमाये
4.
M4 = M3 + डाकघर की कुल जमाये
मुद्रा
की पूर्ति मुद्रा अधिकारियों द्वारा स्वतंत्र रूप से निर्धारित की जाती है। मुद्रा
की पूर्ति के दो निर्धारक तत्व हैं - व्यावसायिक बैंकों की जमा राशि तथा लोगों द्वारा
रखी जाने वाली मुद्रा की मात्रा
सूत्र से ,
M = D + C ------------------------(1)
जहां , M = मुद्रा की मात्रा
,
D = बैंको
की मांग जमा राशि,
C = लोगों
के पास मुद्रा की मात्रा।
शक्तिशाली मुद्रा तीन तत्त्वो
से निर्धारित होती है - लोगों द्वारा नकद मुद्रा की मांग
(C) बैंकों द्वारा रिजर्व अनुपात की मांग (RR), एवं बैंको द्वारा अतिरिक्त रिजर्व की मांग (ER)
सूत्र से,
H = C + RR + ER
--------------------(2)
`\frac MH=\frac{D+C}{C+RR+ER}`
`\frac MH=\frac{{\frac DD}+{\frac CD}}{{\frac CD}+{\frac{RR}D}+{\frac{ER}D}}`
`\frac MH=\frac{{\frac 1}+{\frac CD}}{{\frac CD}+{\frac{RR}D}+{\frac{ER}D}}`
यदि हम `\frac CD` को Cr ,`\frac{RR}D`को RRr तथा `\frac{ER}D`को ERr से प्रतिस्थापित कर दे तो सूत्र निम्न प्रकार होगा -
`M=\frac{1+C_r}{C_r+RR_r+ER_r}.H`
19. किसी रेखा में पैरामेट्रिक शिफ्ट की व्याख्या चित्र की सहायता से कीजिए।
उत्तर: एक सरल रेखा का समीकरण b = ma + e के रूप में दर्शाया जिसमें a और b दो परिवर्त/चर हैं। m > 0 को सरल रेखा की प्रवणता कहा जाता है और e > 0 उर्ध्वाधर अक्ष पर अन्त:खण्ड है। जब u में 1 इकाई से वृद्धि होती तो b के मूल्य में m इकाइयों से वृद्धि हो जाती है। इसे आलेख पर परिवर्तों का संचलन कहते हैं। परन्तु जब m या e में परिवर्तन होता है तो इसे आलेख का पैरामिट्रिक शिफ्ट कहते हैं, क्योंकि m और e को आलेख का पैरामीटर कहा जाता है। अन्य शब्दों में आलेख की प्रवणता अथवा अन्त:खण्ड में परिवर्तन के कारण जो परिवर्तन होते हैं उसे आलेख का पैरामिट्रिक शिफ्ट कहते हैं। इसे उपभोग फलन द्वारा समझा जा सकता है।
यदि y में परिवर्तन से C में परिवर्तन हों तो इसे आलेख पर परिवर्तनों का संकलन कहेंगे। परन्तु यदि C या है में परिवर्तन हों तो इसे आलेख का पेरामिट्रिक शिफ्ट कहा जायेगा। इसे दो भागों में बाँटा जा सकता है
(क) प्रवणता में परिवर्तन-प्रवणता में परिवर्तन होने पर वक्र इस प्रकार खिसकता है कि प्रवणता बढ़ने पर वक़ अधिक ढाल वाला हो जाता है और प्रवणता के घटने पर वक्र कम ढाल वाला हो जाता है।
(ख) अन्तखण्ड में परिवर्तन-अन्तखण्ड बढ़ने पर वक्र उतनी ही मात्रा से समान्तर रूप से (क्योंकि प्रवणता समान है) ऊपर की ओर खिसक जाता है और इसके विपरीत अन्त:खण्ड घटने पर उतनी ही मात्रा से समान्तर रूप से नीचे की ओर खिसक जाता है।
(i) जब रेखा की ढाल घटती है तो रेखा पहले से कम ढाल वाली हो जाती है। उदाहरण के लिए यदि C = C + by में C = 100 + 0.84 था b घटकर 0.6 हो गया तो नया C = 100 + 0.6y हो जायेगा। यह वक्र पिछले C वक्र से कम ढाल वाला होगा। क्योंकि पहले आय 100 बढ़ने पर उपभोग 80 बढ़ रहा था, परन्तु अब आय 100 बढ़ने पर उपभोग 60 बढ़ेगा।
(ii) जब रेखा के अन्त:खण्ड आय में वृद्धि होती है तो रेखा समान्तर रूप से ऊपर की ओर खिसक जाती है, क्योंकि दो समान्तर रेखाओं की प्रवणता समान होती है।
मॉडल प्रश्न-पत्र सेट-2 Term-1
1. आदर्शक अर्थशास्त्र (NORMATIVE ECONOMICS) के संबंध में क्या सत्य है?
(A) आदर्शक अर्थशास्त्र का संबंध 'क्या है?' से है।
(B)आदर्शक आर्थशास्त्र तथ्यों पर आधारित होता है।
(C) आदर्शक अर्थशास्त्र का उद्देश्य आर्थिक क्रियाओं का वास्तविक विवरण है।
(D) आदर्शक अर्थशास्त्र का कार्य परामर्श देना है।
2. किस अर्थव्यवस्था में केन्द्रीय समस्याओं का समाधान बाजार शक्तियों के द्वारा होता है?
(A) समाजवादी अर्थव्यवस्था
(B) केंद्रीयकृत योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था
(C) पूँजीवादी अर्थव्यवस्था
(D) साम्यवादी अर्थव्यवस्था
3. उत्पादन संभावना वक्र का दाहिनी ओर विवर्तित होने का क्या कारण है?
(A) बाढ़
(B) संसाधनों का ह्रास
(C) तकनीकी विकास
(D) पुरानी तकनीक का प्रयोग
4. एक किसान 100 टन धान उत्पादन करने के लिए 120 क्विंटल गेहूँ के उत्पादन का त्याग करता है। धान उत्पादन के लिए अवसर लागत क्या होगी?
(A) 100 क्विंटल गेहूँ
(B) 120 टन धान
(C) 120 क्विंटल गेहूँ
(D) 220 क्विंटल गेहूँ
5. एक विवेकशील उपभोक्ता के लिए दो वस्तुओं (रसगुल्ला और गुलाब जामुन) के निम्न बंडलों का सही अधिमान क्रम क्या होगा?
A (4, 5), B (3,5) तथा C (5,6)
(A) A>B>C
(B) A>C>B
(C) B>A>C
(D) C>A>B
6. निम्नलिखित में किसका अध्ययन समष्टि अर्थशास्त्र के अंतर्गत किया जाता है?
(A) एक उपभोक्ता संतुलन
(B) एक फर्म के संतुलन
(C) एक वस्तु के कीमत निर्धारण
(D) सामान्य कीमत स्तर का निर्धारण
7. किसी वस्तु के उपभोग में एक अतिरिक्त इकाई से परिवर्तन करने पर कुल उपयोगिता में होने वाले परिवर्तन को क्या कहा जाता है?
(A) औसत उपयोगिता
(B) कुल उपयोगिता
(C) सीमांत उपयोगिता
(D) उपभोक्ता का अधिमान
8. कुल उपयोगिता अधिकतम होगी जब सीमांत उपयोगिता का मान होगा।
(A) 0
(B) 1
(C) 1 से अधिक
(D) ऋणात्मक
9. उदासीनता वक्र के संबंध में कौन स कथन गलत है?
(A) उदासीनता वक्र की ढाल ऋणात्मक होती है।
(B) उदासीनता वक्र मूल बिन्दु की ओर उत्तल (CONVEX) होता है।
(C) उदासीनता को सम-सन्तुष्टि वक्र भी कहा जाता है।
(D) दो उदासीनता वक्र एक दूसरे को प्रतिच्छेद करते हैं।
10. यदि किसी वस्तु की कीमत में 4% की वृद्धि होने से उसकी माँग मात्रा में 8% की कमी होती है तो माँग की कीमत लोच का मान क्या होगा?
(A) 1.6
(B) 2
(C) 0.67
(D) 13
11.एक बजट रेखा अपनी दाहिनी ओर विवर्तित होगी जब-
(A) वस्तु x की कीमत में कमी होगी
(B) वस्तु x की कीमत में वृद्धि होगी।
(C) वस्तु Yकी कीमत में कमी होगी।
(D) उपभोक्ता की आय में वृद्धि होगी।
12. निम्न रेखाचित्र में माँग रेखा AB के बिन्दु G पर माँग की लोच क्या होगी?
(A) 0
(B) 1
(C) 1 से कम
(D) 1 से अधिक
13. उदासीनता वक्र विश्लेषण एक उपभोक्ता संतुलन की शर्त क्या है?
(A) उदासीनता वक्र बजट रेखा को स्पर्श करे।
(B) उदासीनता वक्र और बजट रेखा की ढाल समान हो।
(C) MRS =`\frac{P_x}{P_Y}`
(D) इनमें से सभी।
14. यदि उपभोक्ता की आय में वृद्धि से वस्तु X की माँग कम हो जाती है, तो वस्तु X होगी-
(A) जीवन रक्षक वस्तु
(B) आवश्यक वस्तु
(C) विलासिता वस्तु
(D) घटिया वस्तु
15. निम्नलिखित में से दो वस्तुओं का कौन सा संयोग पूरक वस्तु का एक संयोग है?
(A) चाय औ कॉफी
(B) पेप्सी और मिरिंडा
(C) लक्स साबुन और डव साबुन
(D) चाय और चीनी
16. किसी वस्तु की उत्पादन मात्रा और उत्पत्ति के साधनों के बीच भौतिक संबंध को कहा जाता है-
(A) लागत फलन
(B) आगम फलन
(C) माँग फलन
(D) उत्पादन फलन
17. औसत उत्पाद और सीमांत उत्पाद दोनों बराबर होते हैं, जब
(A) सीमांत अधिकतम होता है।
(B) सीमांत उत्पाद शून्य होता है।
(C) सीमांत उत्पाद ऋणात्मक होता है।
(D) औसत उत्पाद अधिकतम होता है।
18. यदि कुल लागत TC, उत्पादन की मात्रा Q तो सीमांत लागत का सूत्र होगा-
(A) `\frac{TC}Q`
(B) `\frac{\Delta TC}{\Delta Q}`
(C) TC X Q
(D) TC + Q
19. पैमाने का प्रतिफल' का संबंध किस काल से है?
(A) अल्पकाल
(B) अति-अल्पकाल
(C) दीर्घकाल
(D) शीतकाल
20. किस काल में उत्पादन के साधनों को स्थिर और परिवर्ती साधनों में विभक्त किया जाता है?
(A) दीर्घकाल
(B) अतिदीर्घकाल
(C) अल्पकाल
(D) ग्रीष्मकाल
21. परिवर्तनशील अनुपातों के नियम के अनुसार एक विवेकशील उत्पादक उत्पादन के किस स्तर पर उत्पादन करना चाहता है?
(A) 1
(B) 2
(C) 3
(D) 4
22. निम्नलिखित में से कौन औसत उत्पाद की विशेषता नहीं है?
(A) औसत उत्पाद को परिवर्ती साधन की प्रति इकाई उत्पाद कहा जाता है।
(B) परिवर्ती साधन की इकाई को बढ़ाने से औसत उत्पाद बढ़ता है, अधिकतम होने के बाद घटने लगता है।
(C) औसत उत्पाद वक्र का आकार उल्टा 'U'आकार का होता है।
(D) औसत उत्पाद का मान शून्य अथवा ऋणात्मक भी हो सकता है।
23.जब सीमांत उत्पाद औसत उत्पाद से कम होती है, तब औसत उत्पाद में
(A) वृद्धि होती है।
(B) कोई परिवर्तन नहीं होता है।
(C) तीव्र गति वृद्धि होती है।
(D) कमी होती है।
24.यदि उत्पत्ति के सभी साधनों को दुगुना करने पर उत्पादन में तीन गुना की वृद्धि होती है, तो इसे कहा जाता है-
(A) उत्पत्ति का समता नियम
(B) पैमाने का ह्रासमान प्रतिफल
(C) पैमाने का वृद्धिमान प्रतिफल
(D) उत्पत्ति का वृद्धिमान नियम
25. उत्पादन के सापेक्ष कुल आगम में परिवर्तन की दर क्या कहलाती है?
(A) कुल आगम
(B) औसत आगम
(C) सीमांत आगम
(D) औसत लागत
26. कुल लागत (TC), कुल स्थिर लागत (TFC) और कुल परिवर्तनशील लागत (TVC) में क्या संबंध होता है?
(A) TFC = TC+TVC
(B) TVC = TFC+TC
(C) TC = TFC-TVC
(D) TC = TFC+TVC
27. जब किसी वस्तु की माँग तथा पूर्ति में समान दर से वृद्धि होती है तो संतुलन कीमत में
(A) कमी होती है।
(B) वृद्धि होती है।
(C) कोई परिवर्तन नहीं होता।
(D) तीव्र गति से वृद्धि होती।
28.किसी वस्तु की माँग (D) तथा पूर्ति (S) हो तो माँग आधिक्य की स्थिति को दर्शाया जा सकता है-
(A) D>S
(B) D-S >0
(C) D=S
(D) A तथा B दोनों
29. किसी वस्तु की माँग की तुलना में पूर्ति में अधिक वृद्धि होने से साम्य मात्रा में -
(A) कमी होगी।
(B) वृद्धि होगी।
(C) कोई परिवर्तन नहीं होगा।
(D) तीव्र गति से कमी होगी।
30. किसी वस्तु की कीमत में 5% की वृद्धि करने से उसकी पूर्ति की मात्रा में 4% की वृद्धि हो जाती है तो पूर्ति की कीमत लोच का मान क्या होगा?
(A) 1.25
(B) 20
(C) 0.8
(D) 0.2
31.मुक्त प्रवेश और निकास की स्थिति में माँग में वृद्धि का बाजार संतुलन पर क्या प्रभाव होगा?
(A) साम्य कीमत और मात्रा दोनों में वृद्धि होगी।
(B) केवल संतुलित कीमत में वृद्धि होगी।
(C) केवल संतुलित मात्रा में वृद्धि होगी
(D) साम्य कीमत और मात्रा दोनों में कमी होगी।
32.माँग आधिक्य की स्थिति में साम्य कीमत में -
(A) कमी होगी
(B) वृद्धि होगी
(C) कोई परिवर्तन नहीं होगा
(D) तीव्र गति से कमी होगी।
33. एक पूर्ण प्रतियोगी फर्म के लिए अल्पकालीन पूर्ति वक्र होता है-
(A) न्यूनतम AVC से ऊपर SMC का बढ़ता भाग
(B) SMC का घटता भाग
(C) AC का बढ़ता भाग
(D) AC का घटता भाग
34.पूर्ण प्रतियोगी फर्म के लिए AR और MR में क्या संबंध होता है?
(A) AR>MR
(B) MR=2*MR
(C) AR=MR
(D) AR<MR
35.समरूप वस्तुओं की उपलब्धता किस प्रकार की बाजार संरचना की विशेषता है?
(A) एकाधिकार
(B) अपूर्ण प्रतियोगिता
(C) पूर्ण प्रतियोगिता
(D) द्वयाधिकार
36. TR (कुल आगम) वक्र की ढाल को क्या कहा जाता है?
(A) AR
(B) MR
(C) AC
(D) MC
37.किस प्रकार की बाजार संरचना में कीमत सीमांत लागत से अधिक होती है?
(A) पूर्ण प्रतियोगिता
(B) शुद्ध प्रतियोगिता
(C) एकाधिकार
(D) इनमें से कोई नहीं
38.जब सीमांत आगम का मान 0 होती है तब वस्तु माँग की कीमत लोच का मान …. होता है।
(A) 0
(B) 1
(C) 1 से कम
(D) 1 से अधिक
39.एकाधिकार के अंतर्गत AR वक्र और MR वक्र में क्या संबंध है?
(A) AR = MR
(B) AR < MR
(C) AR > MR
(D) MR = 2 * AR
40.एक एकाधिकारी के लिए उत्पादन के विभिन्न स्तर पर MR और MC को निम्न तालिका से दर्शाया गया है। संतुलन की अवस्था मे वह वस्तु की कितनी इकाई का उत्पादन करेगा?
उत्पादन | 0 | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 |
MR | - | 44 | 34 | 18 | 10 | 6 | 4 |
MC | - | 60 | 30 | 10 | 2 | 3 | 4 |
(A) 1
(B) 5
(C) 6
(D) 4
मॉडल प्रश्न-पत्र सेट-2 Term-2
खंड- A अति लघु उत्तरीय प्रश्न
निम्नलिखित में से किन्हीं पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
1. आर्थिक एजेंट कौन होते हैं?
उत्तर: परिवार (उपभोक्ता), कंपनियां (निर्माता और बाजार), और राज्य (जो, विभिन्न तंत्रों के माध्यम से, बाजार के कामकाज को विनियमित करते हैं) सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक एजेंट हैं।
2. राष्ट्रीय आय को परिभाषित कीजिए।
उत्तर :- राष्ट्रीय आय का अर्थ है एक देश के सभी निवासियों द्वारा एक वर्ष की अवधि में अर्जित कुल साधन ( कारक ) आय का जोड़।
NY =`\sum_{i=1}^nFY_i`
यहां NY = राष्ट्रीय आय , ∑ = कुल जोड़ , FY = कारक आय ( मजदूरी ,लगान , व्याज , लाभ ) , n = एक देश के सभी सामान्य निवासी।
3. नगद निधि अनुपात (CRR) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: व्यापारिक बैंकों को कानूनी तौर पर अपनी जमाओ का एक निश्चित प्रतिशत केन्द्रीय बैंक के पास नकद निधि के रुप में रखना पड़ता है।
4. सरकारी बजट से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: सरकारी बजट एक वित्तीय वर्ष ( अप्रैल 1 से मार्च 31 तक ) की अवधि के दौरान सरकार की प्राप्तियों ( आय ) तथा सरकार के व्यय के अनुमानों का विवरण होता है।
5. राजस्व प्राप्ति से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: सरकार की राजस्व प्राप्तियां वे मौद्रिक प्राप्तियां हैं जिनके फलस्वरूप न तो कोई देयता उत्पन्न होती है और न ही परिसंपत्तियों में कमी होती है।
6. समग्र माँग क्या है?
उत्तर: आय व रोजगार के स्तर पर एक साल में अर्थव्यवस्था में जो वस्तुओं और सेवाओं की माँग की जाती है उसे समग्र माँग कहते हैं।
7. व्यापार संतुलन क्या है?
उत्तर: व्यापार संतुलन के अंतर्गत आयातो और निर्यातो का विस्तृत विवरण रहता है। जब एक देश के आयातो की तुलना में उसके निर्यात अधिक होते हैं तो उसे अनुकूल व्यापार संतुलन कहते हैं और जब निर्यात की तुलना में आयात अधिक होते हैं तो उसे प्रतिकूल व्यापार संतुलन कहते हैं।
खंड-B लघु उत्तरीय प्रश्न
निम्नलिखित में से किन्हीं पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
8. 1929 ई. की विश्व की महामंदी का वर्णन कीजिए।
उत्तर: 1929 की महामंदी:
1. 1929 में विश्व में एक गंभीर स्थिति 'महामंदी' ने जन्म लिया। यह महामंदी 1933 तक बनी रही। इस विश्व्यापी महामंदी की घटना ने परंपरावादी मान्यता को चूर-चूर कर दिया। इस महामंदी के कारण अमरीका के देशों में निर्गत और रोजगार के स्तरों में भारी गिरावट आयी।
2. इसका प्रभाव दुनिया के अन्य देशों पर भी पड़ा। बाजार में वस्तुओं की माँग में भारी गिरावट के कारण कई कार खाने बंद हो गए तथा श्रमिकों को काम से निकाल दिया गया था।
3. संयुक्त राज्य अमरीका में 1929 से 1933 तक बेरोज़गारी की दर 3 प्रतिशत से बढ़कर 25 प्रतिशत हो गई थी। इस अवधि के दौरान संयुक्त राज्य अमरीका में समस्त निर्गत में लगभग 33 प्रतिशत की गिरावट आई।
4. मंदी की ऐसी गंभीर स्थिति ने अर्थशास्त्रियों को 'व्यष्टि' के स्थान पर 'समष्टि' स्तर पर सोचने को बाध्य कर दिया।
5. इन परिस्थितियों में जे.एम .केन्ज की पुस्तक 'रोज़गार, ब्याज और मुद्रा का सामान्य सिद्धांत' 1936 में प्रकाशित हुई जिससे समष्टि अर्थशास्त्र जैसे विषय का उद्भव हुआ।
9. वस्तु विनिमय प्रणाली के किसी एक दोष का वर्णन कीजिए।
उत्तर: वस्तु विनिमय प्रणाली के दोष
1. दोहरे संयोग का अभाव – वस्तु विनिमय तभी सम्भव हो सकता है जबकि दो ऐसे व्यक्ति आपस में मिल जायें जो उनकी आवश्यकता की वस्तु को आपस में बदलने के लिए तैयार हों। ऐसा संयोग मिलना बहुत कठिन होता है।
2. मूल्य मापन में कठिनाई – यदि दोहरा संयोग मिल भी जाता है तो भी विनिमय तब तक सम्भव नहीं हो सकता जबकि वस्तु अदला-बदली की मात्रा पर सहमति न हो। किस वस्तु के बदले कितनी दूसरी वस्तु दी जाए। इसका निर्धारण करना बहुत कठिन कार्य है।
10.प्रत्यक्ष कर को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: जिस कर के भुगतान में कर भार तथा कर दायित्व एक ही व्यक्ति पर पड़ते हैं उसे प्रत्यक्ष कर कहते हैं।
जैसे – आयकर, सम्पत्ति कर आदि।
11.स्टॉक और प्रवाह चर को परिभाषित कीजिए।
उत्तर :-
स्टॉक | प्रवाह |
स्टॉक का अर्थ किसी एक विशेष समय बंदु पर मापी जाने वाली आर्थिक चर की मात्रा है। | प्रवाह का अर्थ एक आर्थिक चर की वह मात्रा है जिसे किसी समय अवधि के दौरान मापा जाता है। |
स्टॉक का कोई समय परिमाप नहीं होता। | प्रवाह का समय परिमाण होता है जैसे प्रति घंटा, प्रतिदिन,प्रतिमास |
स्टॉक एक स्थैतिक अवधारणा है। | प्रवाह एक गत्यात्मक अवधारणा है। |
उदाहरण- मुद्रा का परिमाण,धन,गोदाम में रखे गेहूं की मात्रा,टंकी में रखा पानी। | उदाहरण - उपभोग, निवेश,आय,नदी में जल। |
12. समष्टि अर्थशास्त्र के अर्थ को समझाइए।
एम. एच. स्पेन्सर के अनुसार," समष्टि अर्थशास्त्र का संबंध अर्थव्यवस्था अथवा उसके बड़े-बड़े हिस्सों से है। इसके अंतर्गत ऐसी समस्याओं का अध्ययन किया जाता है जैसे बेरोजगारी का स्तर, मुद्रास्फीति की दर राष्ट्र का कुल उत्पादन आदि जिनका संपूर्ण अर्थव्यवस्था के लिए महत्व होता है"।
13.समग्र माँग के घटकों को लिखिए।
उत्तर :- कुल ( समग्र) मांग, वह कुल व्यय है जो लोग एक वित्तीय वर्ष की अवधि के दौरान वस्तुओं और सेवाओं के खरीदने पर खर्च करने की योजना बनाते हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि समग्र मांग (AD) को मापने समय हम सदा लोगों द्वारा किए जाने वाले आयोजित व्यय या प्रत्याशित व्यय के संदर्भ में बात करते हैं।
कुल मांग के प्रमुख घटक निम्नलिखित हैं -
1. निजी उपभोग व्यय (C) :- इसमें देश के गृहस्थो/परिवारो द्वारा एक लेखा वर्ष में, सभी वस्तुओं तथा सेवाओं के लिए की गई मांग को शामिल किया जाता है।
2. निजी निवेश मांग (I) :- इससे अभिप्राय निजी निवेशकर्ताओं द्वारा पूंजी पदार्थों की खरीद पर करने वाले व्यय से है।
3 सरकारी व्यय (G) :- इसमें सरकारी उपभोग में व्यय तथा सरकारी निवेश व्यय दोनों शामिल होते हैं। सरकारी उपभोग व्यय से अभिप्राय है सैन्य/सुरक्षा प्रयोग के लिए वस्तुओं के उपभोग की खरीद पर खर्च/सरकारी निवेश व्यय से अभिप्राय है सड़कों,डैमो तथा पुलो के निर्माण पर किया जाने वाला व्यय।
4. शुद्ध निर्यात (X - M ) :- विदेशियों द्वारा हमारी वस्तु के लिए किए गए व्यय को अर्थव्यवस्था में कुल व्यय (समग्र मांग) मे जोड़ा जाता है, जबकि आयात पर किए जाने वाले व्यय को घटाया जाता है। अतः X - M (शुद्ध निर्यात) को समग्र मांग (AD) में जोड़ा जाता है।
अतः समग्र मांग के प्रमुख तत्त्व है -
AD = C + I + G + ( X- M) [ खुली अर्थव्यवस्था में ]
or, AD = C + I [ बन्द अर्थव्यवस्था में ]
जहां , AD = समग्र मांग , C = निजी उपभोग व्यय , I = निजी निवेश व्यय , G = सरकारी व्यय, X - M = शुद्ध निर्यात
चित्र में, AD वक्र का बारे से दाये ऊपर की ओर बढ़ना इस बात को दर्शाता हैं कि जैसे-जैसे आय / रोजगार की मात्रा बढ़ती जाती है, कुल मांग भी बढ़ती जाती है।
14.भुगतान शेष के चालू खाते के घटकों को लिखिए।
उत्तर :- चालू खाता
चालू खाता वह खाता है जिसमें वस्तुओं और सेवाओं के आयात और निर्यात एवं एकपक्षीय भुगतानो का हिसाब किताब रखा जाता है।
चालू खातों के निम्नलिखित घटक है
1. वस्तुओं का निर्यात तथा आयात (अथवा दृश्य मदे)
2. सेवाओं का निर्यात तथा आयात (अथवा अदृश्य मदे)
3. एक देश से दूसरे देश को एकपक्षीय अंतरण
खंड-C दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
निम्नलिखित में से किन्हीं तीन प्रश्नों का उत्तर दीजिए।
15. वास्तविक प्रवाह और मौद्रिक प्रवाह में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: सन् 1758 में क्वीने ने आय और उत्पादन की चक्रीय प्रवाह की रचना की थी। 19वी शताब्दी के मध्य में कार्ल मार्क्स ने आय और उत्पादन के चक्रीय प्रवाह के बारे में चर्चा की। आय के प्रवाह से अभिप्राय है मुद्रा का प्रवाह जबकि उत्पाद के प्रवाह से अभिप्राय वस्तुओं और सेवाओं के प्रवाह से है। इसलिए आय के प्रवाह को मौद्रिक प्रवाह तथा वस्तुओं एवं सेवाओं के प्रवाह को वास्तविक प्रवाह कहा जाता है
वास्तविक प्रवाह – आय के वास्तविक प्रवाह से अभिप्राय है कि परिवार क्षेत्र द्वारा प्रदान की गई उत्पादन के कारकों की सेवाओं का प्रवाह उत्पादक क्षेत्र की ओर से होता है तथा उत्पादक क्षेत्र द्वारा उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं का परिवार परिवार क्षेत्र की ओर होता है।
मान लीजिए एक सरल अर्थव्यवस्था में केवल दो क्षेत्र हैं:(a) उत्पादक क्षेत्र और (b) परिवार क्षेत्र
ये दोनों क्षेत्र निम्न प्रकार से परस्पर निर्भर है:
(क) उत्पादक क्षेत्र वस्तुओं एवं सेवाओं की आपूर्ति परिवार क्षेत्र को करता है।
(ख) परिवार क्षेत्र (उत्पादन के कारकों के स्वामियों के रूप में) उत्पादन के कारकों ( या कारक सेवाओं) की आपूर्ति उत्पादक क्षेत्र को करता है
ऊपर के चित्र द्वारा वास्तविक प्रवाहों को (1) उत्पादक क्षेत्र से परिवार क्षेत्र की ओर वस्तुओं और सेवाओं के रूप में होने वाले प्रवाह एवं (2) परिवार क्षेत्र से कारक सेवाओं जैसे श्रम, पूंजी, भूमि और उद्यम को उत्पादक क्षेत्र की ओर होने वाले प्रभाव के रूप में प्रकट किया गया है।
मौद्रिक प्रवाह- से अभिप्राय कारक आय अर्थात् लगान, ब्याज, लाभ और मजदूरी का उत्पादक क्षेत्र से परिवार क्षेत्र की ओर उनकी कारक सेवाओं के मौद्रिक पुरस्कारों के रूप में होने वाले प्रभाव से है। परिवार क्षेत्र अपनी आय को उत्पादक क्षेत्र द्वारा उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं पर व्यय करता है। इस प्रकार मुद्रा का प्रवाह परिवारिक व्यय के रूप में परिवार क्षेत्र से उत्पादक क्षेत्र की ओर वापस हो जाता है।
चक्रीय प्रवाह मॉडल मुद्रा प्रवाहों को प्रकट करते हैं। अपनी कारक सेवाओं के लिए परिवार क्षेत्र को कारक भुगतान/ अदायगी (लगान, ब्याज, लाभ और मजदूरी) उत्पादक क्षेत्र से प्राप्त होते हैं। परिवार क्षेत्र वस्तुओं और सेवाऐ खरीदने के लिए जो व्यय करता है वह उत्पादक क्षेत्र को प्राप्त होता है।
16. निम्नलिखित आँकड़ो से आय विधि से साधन लागत पर सकल घरेलू उत्पाद की गणना कीजिए।
| (करोड़ रुपये में) |
a) कर्मचारियों का पारिश्रमिक | 13300 |
b) ब्याज | 1500 |
c) लगान | 1000 |
d) लाभ | 1500 |
e) स्वरोजगार से मिश्रित आय | 16100 |
f) अप्रत्यक्ष कर | 800 |
g) सहायता | 300 |
उत्तर: साधन लागत पर सकल घरेलू उत्पाद (GDPFC) = कर्मचारियों का पारिश्रमिक +ब्याज + लगान + लाभ + स्वरोजगार से मिश्रित आय + सहायता - अप्रत्यक्ष कर
GDPFC = 13300 + 1500 + 1000 + 1500 + 16100 + 300 - 800
GDPFC = 33700 - 800 = 32900
17.मुद्रा के कार्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: मुद्रा के कार्यों को निम्न शीर्षकों में बाँटकर देखा जा सकता है –
(अ) मुद्रा के प्रमुख या प्रधान कार्य (Primary Functions of Money) – मुद्रा के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं। इन कार्यों को मुद्रा प्रत्येक प्रकार की अर्थव्यवस्था में आवश्यक रूप से सम्पन्न करती है –
(i) विनिमय का माध्यम (Medium of Exchange) – मुद्रा विनिमय के माध्यम का कार्य करती है। आजकल सभी लेन-देन मुद्रा के माध्यम से किए जाते हैं। यह मुद्रा का महत्वपूर्ण कार्य है। उत्पादक, विक्रेता अपनी वस्तुओं के मूल्य स्वरूप मुद्रा प्राप्त करते हैं तथा क्रेता मुद्रा के रूप में खरीदी गई वस्तु अथवा सेवा का मूल्य चुकाते हैं।
(ii) मूल्य का मापक (Measure of Value) – मुद्रा का यह दूसरा महत्वपूर्ण कार्य हैं। मुद्रा के चलन के बाद सभी वस्तुओं एवं सेवाओं का मूल्य मुद्रा में ही निर्धारित होता है। इस कारण वस्तुओं का लेन-देन बहुत सरल हो गया है।
(ब) मुद्रा के सहायक या गौण कार्य (Secondary Functions of Money) – मुद्रा के सहायक कार्यों से आशय ऐसे कार्यों से लगाया जाता है जिन्हें मुद्रा प्राथमिक कार्यों को सम्पन्न करने में सहायता प्रदान करने के लिए करती है। ये कार्य निम्नलिखित हैं –
(i) मूल्य संचय का साधन (Means of Store of Value) – वस्तु विनिमय प्रणाली में वस्तुएँ नाशवान होने के कारण मूल्य का संचय सम्भव नहीं था लेकिन मुद्रा के चलन ने इस कार्य को सरल बना दिया है। मुद्रा में टिकाऊपन होता है। अतः मुद्रा के रूप में मूल्य का संचय आसानी से किया जा सकता है।
(ii) भावी भुगतान का आधार (Basis of deferred Payment) – मुद्रा ने भुगतान भविष्य में करना सम्भव बना दिया है क्योंकि मुद्रा के मूल्य में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं होते हैं। वर्तमान समय में अधिकांश व्यापारिक लेन-देन उधार पर आधारित होते हैं। मुद्रा के माध्यम से भविष्य में उधारी की रकम को आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।
(iii) क्रय शक्ति हस्तांतरण (Transfer of purchasing Power) – मुद्रा के द्वारा क्रय शक्ति को एक स्थान से दूसरे स्थान पर तथा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को आसानी से हस्तांतरित किया जा सकता है। ऐसा करने से कोई आर्थिक नुकसान भी नहीं होता है। उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्ति भरतपुर से जयपुर जाकर बसना चाहता है तो वह आसानी से अपनी भरतपुर की सम्पत्तियों को बेचकर मुद्रा प्राप्त कर सकता है तथा उस मुद्रा से जयपुर में सम्पत्ति खरीद सकता है। मुद्रा एक तरल सम्पत्ति हैं। इसलिए इसे लाने ले जाने में कोई कठिनाई नहीं होती है।
(स) मुद्रा के आकस्मिक कार्य (Contingent functions of Money) – मुद्रा कुछ आकस्मिक कार्य भी सम्पादित करती है। इन कार्यों से मुद्रा और भी सुविधाजनक व उपयोगी माध्यम बन जाती है। ये कार्य निम्नलिखित हैं –
(i) सामाजिक आय का वितरण (Distribution of Social Income) – मुद्रा सामाजिक आय के न्यायपूर्ण वितरण को सरल बनाती है। आजकल उत्पादन कार्य बड़े पैमाने पर किया जाता है जिसमें उत्पत्ति के विभिन्न साधनों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। इन सभी साधनों में उत्पादन से प्राप्त आय को न्यायपूर्ण ढंग से वितरित करने में मुद्रा हमारी सहायता करती है।
(ii) साख का आधार (Basis of Credit) – मुद्रा ही साख का आधार है। आज बैंकिंग संस्थाएँ बड़े पैमाने पर अनेक प्रकार के ऋण उपलब्ध कराती है तथा साख पत्रों के प्रयोग की सुविधा प्रदान करती है। यह कार्य भी मुद्रा के द्वारा ही सम्भव हुआ है।
(iii) सम्पत्ति की तरलता (Liquidity of Property) – मुद्रा पूँजी एवं सम्पत्ति को तरलता प्रदान करती है। तरल रूप में मुद्रा का किसी भी कार्य में आसानी से प्रयोग किया जा सकता है।
(द) मुद्रा के अन्य कार्य (Other functions of Money) – मुद्रा द्वारा उपरोक्त कार्यों के अतिरिक्त और भी कुछ कार्य किए जाते हैं। इन कार्यों को अन्य कार्यों की श्रेणी में रखा जाता है। अन्य कार्य निम्न प्रकार हैं –
(i) शोधन क्षमता का सूचक (Basis of Solvency) – किसी भी व्यक्ति के पास मुद्रा की उपलब्धता के आधार पर ही उसकी शोधन क्षमता का मूल्यांकन किया जाता है। इससे ही उस व्यक्ति की ऋण चुकाने की क्षमता का अनुमान लगाया जाता है। किसी व्यक्ति के पास मुद्रा की मात्रा जितनी ज्यादा होती है उसकी ऋण चुकाने की क्षमता अर्थात् शोधन क्षमता भी उतनी ही ज्यादा होती है।
(ii) निर्णय की वाहक (Bearer of option) – मुद्रा व्यक्ति को अपने धन को विभिन्न कार्यों में विनियोजित करने के सम्बन्ध में निर्णय लेने में सहायता करती है। यह मनुष्य द्वारा आर्थिक निर्णय लेने में सहायता प्रदान करती है।
18.व्यावसायिक बैंक और केन्द्रीय बैंक में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: केन्द्रीय एवं व्यापारिक बैंक में अन्तर – केन्द्रीय बैंक तथा व्यापारिक बैंक दोनों की ही देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका होती है लेकिन इन दोनों के उद्देश्य एवं कार्य भिन्न होते हैं। इन दोनों में निम्न अन्तर पाए जाते हैं –
19. उपभोग की सीमांत प्रवृत्ति (MPC) में परिवर्तन का समग्र माँग पर पड़ने वाले प्रभाव की व्याख्या एक उपयुक्त रेखाचित्र से कीजिए।
उत्तर: समग्र मांग (AD) = Y= C+I
C = a+bY और I = I
सीमांत उपभोग प्रवृत्ति (MPC) में परिवर्तन
Case(1):- जब MPC बढ़ती है
MPC बढ़ने से गुणक का मूल्य बढ़ जाएगा और निवेश का प्रभाव कई गुणा बढ़ जाएगा,जिससे राष्ट्रीय आय में बढ़ोतरी होगी और समग्र मांग बढ़ेगा।
Case(2):- जब MPC घटती है
MPC घटने से गुणक का मूल्य घट जाता है जिससे निवेश का प्रभाव कई गुणा घट जाता है।,इससे राष्ट्रीय आय में कमी होगी और समग्र मांग घटेगा।
मॉडल प्रश्न-पत्र सेट-3 Term-1
1. शब्द 'Economics' की उत्पत्ति किस भाषा से हुई है?
(A) संस्कृत
(B) ग्रीक
(C) अंग्रेजी
(D) फ्रेंच
2. एक उत्पादन संभावना वक्र का प्रत्येक बिंदु क्या प्रदर्शित करता है?
(A) संसाधनों का विकास
(B) संसाधनों का अपव्यय
(C) आर्थिक रूप से दक्ष उत्पादन
(D) आर्थिक विकास
3. अर्थशास्त्र का जनक किस अर्थशास्त्री को कहा जाता है?
(A) मनमोहन सिंह
(B) रघुराम राजन
(C) अल्फ्रेड मार्शल
(D) एडम स्मिथ
4. निम्नलिखित में से भारत का अर्थशास्त्री कौन है?
(A) मोहम्मद यूनुस
(B) महबूब-उल-हक
(C) रघुराम राजन
(D) एडम स्मिथ
5. "अर्थशास्त्र मानव कल्याण का अध्ययन है।" यह कथन किस अर्थशास्त्री का है?
(A) अल्फ्रेड मार्शल
(B) एडम स्मिथ
(C) लियोनल रॉबिन्स
(D) आर. जी. डी. एलेन
6. निम्नलिखित में किसका अध्ययन व्यष्टि अर्थशास्त्र के अंतर्गत किया जाता है?
(A) राष्ट्रीय आय का निर्धारण
(B) एक फर्म के संतुलन
(C) बेरोजगारी का अध्ययन
(D) सामान्य कीमत स्तर का निर्धारण
7. किसी वस्तु का माँग फलन q= 20-2P, जहाँ P
(A) 20+2P
(B) 400-40P
(C) 400-P
(D) 20-40P
8. अर्थशास्त्र में उपयोगिता से क्या तात्पर्य है?
(A) सुख
(B) आनंद
(C) आवश्यकताओं की संतुष्टि
(D) दुःख
9. निम्नलिखित में से किसका मान ऋणात्मक हो सकता है?
(A) औसत उपयोगिता
(B) औसत लागत
(C) कुल उपयोगिता
(D) सीमांत उपयोगिता
10. संतुलन की अवस्था में एक उपभोक्ता वस्तुओं के उपभोग से …….उपयोगिता प्राप्त करता है।
(A) अधिकतम
(B) शून्य
(C) न्यूनतम
(D) कम
11. एक बजट रेखा पर अवस्थित किसी बंडल के क्रय करने पर एक उपभोक्ता की ….. आय खर्च होती है।
(A) शून्य
(B) आधी
(C) सम्पूर्ण
(D) एक तिहाई
12. निम्न रेखाचित्र में माँग रेखा AB के मध्य बिन्दु G पर माँग की लोच क्या होगी?
(A) 0
(B) 1
(C) 1 से कम
(D) 1 से अधिक
13. निम्नलिखित में से उदासीनता वक्र विश्लेषण की एक मान्यता कौन नहीं है?
(A) उपयोगिता को गिनती की संख्या में मापा जा सकता है।
(B) उपभोक्ता एक विवेकशील प्राणी होता है।
(C) उपभोक्ता का अधिमान एकदिष्ट होता है।
(D) उपयोगिता का क्रमवाचक माप संभव है।
14. एक उपभोक्ता अपनी आय 20 रुपये को दो वस्तुओं रसगुल्ला और गुलाबजामुन पर खर्च करने को इच्छुक है। दोनों वस्तुओं की कीमतें क्रमशः 4 रुपये और 5 रुपये तथा मात्राएँ क्रमशः x एवं y हैं तो बजट रेखा का समीकरण क्या होगा?
(A) 4x+5y>20
(B) 5x+4y>20
(C) 4x+5y=20
(D) 5x+4y=20
15. निम्नलिखित में से दो वस्तुओं का कौन सा संयोग प्रतियोगी वस्तुओं का एक संयोग है?
(A) चाय और चीनी
(B) ब्रेड और बटर
(C) कार और पेट्रोल
(D) पेप्सी और कोका-कोला
16.यदि किसी वस्तु की माँग रेखा कीमत अक्ष (Y-अक्ष) के समांतर है तो वस्तु की माँग की कीमत लोच का मान क्या होगा?
(A) 1
(B) 1 से कम
(C) 1 से अधिक
(D) 0
17. उत्पादन से क्या तात्पर्य है?
(A) आगत का निर्गत में रूपांतरण
(B) नई उपयोगिता का सृजन
(C) साधनों की सहायता से वस्तुओं और सेवाओं का निर्माण
(D) इनमें से सभी
18. परिवर्ती साधन के सापेक्ष कुल उत्पाद मे परिवर्तन की दर को क्या कहा जाता है?
(A) औसत उत्पाद
(B) सीमांत उत्पाद
(C) कुल उत्पाद
(D) प्रति इकाई उत्पाद
19.उत्पादक कौन होता है?
(A) साधनों की सहायता से वस्तुओं और सेवाओं का निर्माण करने वाला व्यक्ति
(B) अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए वस्तुओं का उपयोग करने वाला व्यक्ति
(C) वस्तुओं का क्रय और विक्रय करने वाला व्यक्ति
(D) किसी कंपनी का शेयर खरीदने वाला व्यक्ति
20. उत्पत्ति के साधनों की 5 इकाइयों के प्रयोग से किसी वस्तु की 24 तथा उत्पत्ति के 6 इकाइयों के प्रयोग से 30 इकाइयों का उत्पादन होता है तो सीमांत उत्पादन का मान क्या होगा?
(A) 24 इकाई
(B) 30 इकाई
(C) 24 इकाई
(D) 6 इकाई
21.किसी वस्तु की एक अतिरिक्त इकाई के विक्रय से प्राप्त आगम को क्या कहा जाता है?
(A) औसत आगम
(B) सीमांत आगम
(C) कुल आगम
(D) लाभ
22.उत्पादन की मात्रा में परिवर्तन के साथ किस प्रकार की लागत में परिवर्तन होता है?
(A) कुल स्थिर लागत
(B) अवसर लागत
(C) कुल परिवर्तनशील लागत
(D) इनमें से सभी
23.किसी वस्तु का पूर्ति वक्र मूल बिन्दु से गुजरता है तो पूर्ति की कीमत लोच का मान क्या होगा?
(A) 0
(B) 1
(C) 1 से अधिक
(D) 1 से कम
24.मान लिया जाए कि एक बाजार में 3 एक जैसे फर्म हैं तथा वस्तु की कीमत 5 रुपये प्रति इकाई पर एक फर्म वस्तु की 50 इकाई की पूर्ति करता है, तो वस्तु की बाजार पूर्ति क्या होगी?
(A) 50 इकाई
(B) 250 इकाई
(C) 15 इकाई
(D) 150 इकाई
25. एक उत्पादक किसी वस्तु की 5 इकाई बेचकर 50 रुपये तथा उसी वस्तु की 6 इकाई बेचकर 70 रुपये प्राप्त करता है तो सीमांत आगम का मान क्या होगा?
(A) 50 रुपये
(B) 70 रुपये
(C) 120 रुपये
(D) 20 रुपये
26. लाभ- अलाभ बिन्दु की प्राप्ति होती है, जब
(A) MR तथा MC बराबर होता है।
(B) AR और AC बराबर होता है।
(C) TR और TC बराबर होता है।
(D) TR और MC बराबर होता है।
27. अल्पकाल में एक उत्पादक उत्पादन बंद करता है जब कीमत
(A) न्यूनतम AC के बराबर होती है।
(B) न्यूनतम MC के बराबर होती है।
(C) न्यूनतम AVC से अधिक होती है।
(D) न्यूनतम AVC से कम होती है।
28. दीर्घकाल में एक पूर्णप्रतियोगी फर्म को किस प्रकार का लाभ प्राप्त होता है?
(A) ऋणात्मक लाभ
(B) असामान्य लाभ
(C) सामान्य
(D) हानि
29. एक वस्तु की माँग और पूर्ति वक्र क्रमशः Q = 10 – 2P तथा Q = 5 + 3P है तो साम्य कीमत क्या होगी?
(A) 1
(B) 5
(C) 3
(D) 1.5
30.किसी वस्तु की कीमत में 5% की वृद्धि करने से उसकी पूर्ति की मात्रा में 4% की वृद्धि हो जाती है तो पूर्ति की कीमत लोच का मान क्या होगा?
(A) 1.25
(B) 20
(C) 0.8
(D) 0.2
31.किसी फर्म के लाभ को इनमें से किसके द्वारा प्रदर्शित किया जाता है?
(A) TR-TC
(B) TC-TR
(C) TR+TC
(D) TR/TC
32. एक फर्म के संतुलन के लिए किस शर्त का पूरा होना आवश्यक है?
(A) MR=MC
(B) MR>MC
(C) MR की ढाल MC की ढाल से अधिक हो
(D) MR<MC
33. एक पूर्णप्रतियोगी बजार में वस्तु की संतुलन कीमत में वृद्धि हो सकती है, जब
(A) माँग में कमी होती है।
(B) पूर्ति में वृद्धि होती है।
(C) पूर्ति में कमी होती है।
(D) माँग और पूर्ति में समान दर से वृद्धि होती है।
34.श्रम से क्या तात्पर्य है?
(A) कुशल श्रमिकों की संख्या
(B) अकुशल श्रमिकों की संख्या
(C) श्रमिकों की संख्या
(D) एक व्यक्ति के द्वारा किया गया कार्य घंटा
35.यदि श्रम का सीमांत उत्पाद MPL तथा वस्तु का मूल्य P है तो श्रम के सीमांत उत्पाद का मूल्य ज्ञात करने का सूत्र है।
(A) Px MPL
(B) P
(C) P + MPL
(D) P - MPL
36. एक एकाधिकारी वस्तु की माँग की लोच एक से अधिक होती है,जब
(A) सीमांत आय शून्य होती है।
(B) सीमांत आय धनात्मक होती है।
(C) सीमांत आय, औसत आय के बराबर होती है।
(D) सीमांत आय ऋणात्मक होती है।
37.दीर्धकाल में संतुलनावस्था में एकाधिकार की तुलना में पूर्ण प्रतियोगी बाजार में उत्पादन की मात्रा.............. होती है।
(A) कम
(B) अधिक
(C) शून्य
(D) बराबर
38.विभेदीकृत कीमत किस बाजार की विशेषता होती है
(A) पूर्णप्रतियोगिता
(B) एकाधिकार
(C) एकाधिकृत प्रतियोगिता
(D) अल्पाधिकार
39.दीर्घकाल में असामान्य लाभ की प्राप्ति किस बाजार में होती है?
(A) पूर्ण प्रतियोगिता
(B) शुद्ध प्रतियोगिता
(C) एकाधिकार
(D) स्थानीय बाजार
40. एकाधिकार में क्रेताओं की संख्या होती है?
(A) 1
(B) 0
(C) कम
(D) अधिक
मॉडल प्रश्न-पत्र सेट-3 Term-2
खंड- A अति लघु उत्तरीय प्रश्न
निम्नलिखित में से किन्हीं पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
1. आधुनिक अर्थशास्त्र का जनक किसे कहा जाता है?
उत्तर: एडम स्मिथ को आधुनिक अर्थशास्त्र का जनक कहा जाता है।
2. राष्ट्रीय आय मापने की तीन विधियों के नाम लिखिए।
उत्तर: राष्ट्रीय आय की गणना की तीन विधियाँ हैं –
1. उत्पादन विधि 2. आय विधि 3. व्यय विधि
3. आय के चक्रीय प्रवाह में अंतक्षेपण या भरण क्या है?
उत्तर: अंतक्षेपण या क्षरण या वापसी वे प्रवाह चर है जिनका उत्पादन की प्रक्रिया (आय सृजन प्रक्रिया ) या ऋणात्मक प्रभाव पड़ता है। इसमें बचत, आयात, सरकार द्वारा लगाए गए कर हैं। यह सभी चर अर्थव्यवस्था में आए प्रवाह को कम करते हैं।
भरण या समावेश वे प्रवाह चर है जो अर्थव्यवस्था में उत्पादन की प्रक्रिया में वृद्धि करते हैं। इसमें निवेश, निर्यात, सरकारी एवं परिवार क्षेत्र द्वारा किया गया उपभोग व्यय है। इसके फलस्वरूप विकास प्रक्रिया में वृद्धि होती है।
4. मुद्रा की परिभाषा दीजिए।
उत्तर: कानूनी तौर पर मुद्रा कोई भी ऐसी वस्तु हो सकती है जिसे कानून द्वारा विनिमय का माध्यम घोषित किया जाए। कागजी नोट तथा सिक्के (जिन्हें सामूहिक रूप से करेंसी कहा जाता है) कानूनी तौर पर मुद्रा है। कोई व्यक्ति इन्हें विनिमय माध्यम के रूप में स्वीकार करने से इनकार नहीं कर सकता।
5. स्वायत्त उपभोग को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: स्वायत्त उपभोग को उन खर्चों के रूप में परिभाषित किया जाता है जो उपभोक्ताओं को तब भी करना चाहिए जब उनके पास कोई डिस्पोजेबल आय न हो । किसी भी समय किसी उपभोक्ता के पास कितनी आय या धन है, इसकी परवाह किए बिना, कुछ सामान खरीदने की आवश्यकता है। जब कोई उपभोक्ता के पास साधन कम होता है, तो इन आवश्यकताओं के लिए भुगतान उन्हें उधार लेने या उन धन तक पहुंचने के लिए मजबूर कर सकता है जो वे पहले बचत कर रहे थे।
6. पूँजीगत प्राप्ति से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: पूंजीगत प्राप्तियां :- पूंजीगत प्राप्तियां वे मौद्रिक प्राप्तियां हैं जिनसे सरकार की देयता उत्पन्न होती है या परिसंपत्ति कम होती है।
7. आयात की संकल्पना को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: आयात जिसे अंग्रेजी में इम्पोर्ट कहते हैं इसका सामान्य अर्थ होता है किसी भी अन्य देश से अपने देश में कुछ मंगाना। विश्व के सभी देश एक दूसरे से व्यापार करते हैं। इस व्यापार में एक देश दूसरे देश से या तो कुछ खरीदता है या उस देश को कोई वस्तु बेंचता है। कई बार अपने देश में किसी वस्तु की कमी को पूरा करने के लिए या कई बार किसी वस्तु के निर्माण के लिए कच्चा माल के लिए दूसरे देशों से उन वस्तुओं की खरीदारी की जाती है। तो कई बार विदेशों से सर्विस के लिए भी एक देश दूसरे देश को मूल्य चुकाना पड़ता है। अतः वे सारी क्रियाएं जिनके द्वारा हम किसी दूसरे देश से सेवाएं, कच्चा माल, वस्तुएं या अन्य कोई भी सामान पैसे चुकाकर प्राप्त करते हैं अर्थात खरीदारी करते हैं आयात या इम्पोर्ट कहलाता है।
M = M(Y); `\frac{dM}{dY}` > 0
खंड-B लघु उत्तरीय प्रश्न
निम्नलिखित में से किन्हीं पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
8. समष्टि अर्थशास्त्र की दृष्टि से अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक 'बाह्य क्षेत्र' का वर्णन कीजिए।
उत्तर :- चार क्षेत्रकीय चक्रीय प्रवाह में विदेशी क्षेत्र का समावेश किया गया है। विदेशी क्षेत्र अर्थव्यवस्था में अन्य क्षेत्रो से निम्न प्रकार से सम्बन्धित है -
1. हमारा उत्पादक क्षेत्र शेष विश्व को वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात करता है। इसके फलस्वरूप निर्यात प्राप्तियों के रुप में मौद्रिक प्रवाह विदेशी क्षेत्र से उत्पादक क्षेत्र की ओर होता है।
2. हमारे उत्पादक विदेशी क्षेत्र से वस्तुओं और सेवाओं का आयात करते हैं इसके फलस्वरूप आयात भुगतान के रूप में मौद्रिक प्रवाह उत्पादकों से शेष विश्व की ओर होता है।
3. हमारे निवासी विदेशी क्षेत्र से उपहार या हस्तांतरण भुगतान प्राप्त करते हैं इसी प्रकार वे विदेशी क्षेत्र के निवासियों को उपहार या हस्तांतरण भुगतान प्रदान करते हैं।
4. हमारे निवासी विदेशी क्षेत्र से जो साधन सेवाएं प्रदान करते हैं उसके बदले में ये साधन भुगतान प्राप्त करते हैं। इसी प्रकार हम विदेशी क्षेत्र को उसकी साधन सेवाओं के बदले में साधन भुगतान प्रदान करते हैं।
9. व्यापार आधिक्य और व्यापार घाटा में क्या अंतर है।
उत्तर: व्यापार संतुलन एक निश्चित अवधि में निर्यात और आयात के प्रवाह को मापता है। व्यापार संतुलन की धारणा का अर्थ यह नहीं है कि निर्यात और आयात एक दूसरे के साथ "संतुलन में" हैं।
यदि कोई देश आयात से अधिक मूल्य का निर्यात करता है, तो उसके पास व्यापार आधिक्य या सकारात्मक व्यापार संतुलन होता है , और इसके विपरीत, यदि कोई देश निर्यात से अधिक मूल्य का आयात करता है, तो उसका व्यापार घाटा या नकारात्मक व्यापार संतुलन होता है।
10.पूँजीगत वस्तु की धारणा को उदाहरण से स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: एक पूंजीगत वस्तु व्यापार या सरकार में संपत्ति का एक टुकड़ा है जो कई वर्षों तक चलेगी, और संभवत: वर्षों के दौरान भी वित्तपोषित होगी। जबकि नकदी के आधार पर पूंजीगत वस्तुओं को खरीदना संभव है, संभावना है, उन वस्तुओं की बचत समय के साथ हुई। पूंजीगत वस्तुओं के कुछ सामान्य उदाहरणों में इमारतों और अविकसित अचल संपत्ति शामिल हैं, खासकर व्यवसायों या सरकारों के लिए। सड़कें और पुल भी पूंजीगत वस्तुएं हैं, जो आमतौर पर सरकार के पास होती हैं।
11. 'आवश्यकता के दोहरे संयोग' से आप क्या समझते हैं? उदाहरण से स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: आवश्यकताओं का दोहरा संयोग वस्तु विनिमय प्रणाली की एक पूर्व-शर्त है। आवश्यकताओं के दोहरे संयोग से अभिप्राय यह है कि किसी एक व्यक्ति की वस्तु दूसरे की आवश्यकता को और दूसरे व्यक्ति की वस्तु पहले की आवश्यकता को पूरा करती है। किंतु यह एक दुर्लभ घटना है। वास्तव में यह बहुत ही कठिन है कि आपको कोई ऐसा व्यक्ति मिले जिसे आपके घोड़े की आवश्यकता हो और उसके पास देने के लिए गाय हो जिसकी आपको आवश्यकता है। अतः वस्तु विनिमय प्रणाली में विनिमय बहुत ही सीमित स्तर पर हुआ करता था। विनिमय के माध्यम के रूप में मुद्रा के आविष्कार का उद्देश्य वस्तु के विनिमय के अंतर्गत विनिमय को बंधनमुक्त करना था।
12. प्रत्याशित उपभोग और यथार्थ उपभोग में क्या अंतर है।
उत्तर: आय का वह भाग जिसे वस्तुओं व सेवाओं पर व्यय किया जाता है उसे उपभोग कहते हैं। उपभोग आय पर निर्भर करता है
C = f(Y)
जब कोई उपभोक्ता दिए गए समय में जितना उपभोग करने का आशा करता है उसे हम प्रत्याशित उपभोग कहते हैं जबकि उपभोक्ता को भिन्न भिन्न परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है जिससे उसका उपभोग प्रभावित हो जाता है। कहने का तात्पर्य है कि वास्तविक उपभोग उस उपभोग को कहते हैं जो वास्तव में उपभोक्ता द्वारा उपभोग किया जाता है। वास्तविक उपभोग प्रत्याशित उपभोग से भिन्न हो सकता है। वास्तविक उपभोग प्रत्याशित उपभोग से ज्यादा कम या बराबर हो सकता है। मान लिया कोई उपभोक्ता उपभोग्य पदार्थों पर ₹100 खर्च करने का इच्छा रखता है जो इसका प्रत्याशित उपभोग है, लेकिन परिस्थितियों के कारण वह उतना राशि उस वस्तु पर खर्च नहीं कर पाता जिससे उसका वास्तविक उपभोग कम हो जाता है।
13.सार्वजनिक वस्तु क्या है? यह निजी वस्तु से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर: सामाजिक वस्तुओं को परिभाषित करते हुए डॉ. मसग्रेव ने कहा है कि "सामाजिक वस्तुएँ ऐसी विशिष्ट वस्तुएँ होती हैं जो उपभोग में गैर-प्रतियोगी हों, ताकि इनसे समाज के सभी सदस्यों द्वारा समान लाभ उठाए जा सकते हों। इनवस्तुओं के सन्दर्भ में उपभोक्ता की पृथकता सामान्यतया वांछनीय नहीं होती और अनेक परिस्थितियों में सम्भव भी नहीं होती है।"
निजी वस्तुओं का उपभोग सामूहिक नहीं होता अर्थात् जो व्यक्ति निजी" वस्तुओं के मूल्य का भुगतान नहीं करता, वह वस्तु के उपभोग से भी वंचित रहता है। इसके विपरीत सामाजिक वस्तुओं का प्रयोग सामूहिक होता है अर्थात् इन वस्तुओं का लाभ सभी को समान रूप से प्राप्त होता है और मूल्य का भुगतान न करने वाले व्यक्ति को भी इसके उपभोग से वंचित नहीं किया जा सकता है।
14. व्यापार संतुलन किसे कहते हैं? इसके कितने प्रकार होते हैं?
उत्तर: दो या दो से अधिक देशों के मध्य निश्चित समय मे होने वाले आयात-निर्यात के अंतर को व्यापार संतुलन या व्यापार शेष कहते है। इस प्रकार व्यापार संतुलन मे आयात-निर्यात मे केवल दृश्य मदों को ही शामिल किया जाता है। दृश्य मदें वे वस्तुएं है जिनका लेखा-जोखा बन्दरगाहो, हवाई अड्डों, सीमा चौकियों आदि पर रखा जाता है।
बेन्हम के अनुसार," किसी देश का व्यापार संतुलन वह संबंध है जो एक निश्चित समयावधि मे उसके आयातों तथा निर्यातों के मूल्यों के बीच पाया जाता है।"
व्यापार संतुलन की तीन स्थितियां हो सकती है, यथा- अनुकूल व्यापार संतुलन, प्रतिकूल व्यापार संतुलन और साम्य व्यापार संतुलन। इनका विवेचना इस प्रकार है--
1. अनुकूल व्यापार संतुलन - अनुकूल व्यापार संतुलन से आशय उस स्थिति से है, जब आयातों की तुलना मे निर्यात अधिक हो। दूसरे शब्दों मे, वस्तुओं के निर्यात से प्राप्त होने वाली राशि, वस्तुओं के आयात के लिए किए गए भुगतानो से अधिक हो।
2. प्रतिकूल व्यापार संतुलन - प्रतिकूल व्यापार संतुलन से आशय उस स्थिति से है जब निर्यातों की तुलना मे आयात अधिक हो। दूसरे शब्दों मे, वस्तुओं के आयात के लिए किए गए भुगतान, वस्तुओं के निर्यात से प्राप्त राशि से अधिक हो।
3. साम्य व्यापार संतुलन - साम्य व्यापार संतुलन से अभिप्राय विदेशी व्यापार की उस दशा से है जिसमे किसी बर्ष मे देश के आयातों का मूल्य, निर्यातों से प्राप्त राशि के बराबर हो। प्रायः ऐसी स्थिति देखने मे नही आती जब आयात एवं निर्यात दोनों बराबर हो।
खंड-C दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
निम्नलिखित में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
15. निम्नलिखित को परिभाषित कीजिए-
(a) सकल घरेलू उत्पाद
उत्तर: एक वर्ष में एक देश की घरेलू अर्थव्यवस्था में उत्पादित समस्त अन्तिम वस्तुओं एवं सेवाओं के बाजार मूल्यों के योग को सकल घरेलू उत्पाद कहते हैं। इसमें विदेशी नागरिकों द्वारा घरेलु अर्थव्यवस्था में कमाई गई आय को सम्मिलित किया जाता है लेकिन देश के नागरिकों द्वारा विदेशों में कमाई गई आय को सम्मिलित नहीं किया जाता है।
GDP = GNP - शुद्ध विदेशी साधन आय
(b) मूल्यह्रास
उत्तर: एक वित्तीय वर्ष में उत्पादन प्रक्रिया के दौरान पूँजीगत वस्तुओं के मूल्यों में सामान्य टूट-फूट, घिसावट तथा प्रत्याशित अप्रचलन के कारण आने वाली कमी को मूल्यह्रास कहते हैं।
किसी संपत्ति का मौद्रिक मूल्य उपयोग, पहनने और अप्रचलन के कारण समय के साथ कम हो जाता है। इस कमी को मूल्यह्रास के रूप में मापा जाता है।
(c) उपभोक्ता वस्तु
उत्तर: जिन वस्तुओं से प्रत्यक्ष रूप से उपभोक्ता की आवश्यकताओं की तुष्टि की जाती है उन्हें उपभोक्ता वस्तु कहते हैं । उदाहरण के लिये डबल रोटी, फल, दूध, वस्त्र आदि।
16.निम्नलिखित आँकड़ों से व्यय विधि से राष्ट्रीय आय की गणना कीजिए।
(करोड़ रुपये में) | |
a) निजी अंतिम उपभोग | 500 |
b) सरकारी अंतिम व्यय | 50 |
c) निजी निवेश व्यय | 50 |
d) शुद्ध निर्यात | 2 |
e) शुद्ध अप्रत्यक्ष कर | (-) 10 |
f) विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय | (-) 50 |
g) मूल्यह्रास | 20 |
उत्तर: व्यय विधि द्वारा राष्ट्रीय आय = निजी अंतिम उपभोग + सरकारी अंतिम व्यय + निजी निवेश व्यय + शुद्ध निर्यात + विदेशों से शुद्ध कारक आय – शुद्ध अप्रत्यक्ष कर – मूल्यह्रास
= 500 + 50+ 50 + 2 + (-)50 - (-) 10 – 20
= 500 + 50+ 50 + 2 - 50 + 10 – 20
= 612 – 70
व्यय विधि द्वारा राष्ट्रीय आय = ₹ 542 करोड़
17.व्यावसायिक बैंक किस प्रकार साख का सृजन करते हैं? व्याख्या कीजिए।
उत्तर:- प्रो. वाइटहैड के अनुसार ," बैंक एक ऐसी संस्था है जो जनता की फालतू राशि एकत्रित करती है, उसकी सुरक्षा करती है। जब वास्तविक जमाकर्ता को आवश्यकता होती है तो उसे उसकी जमा वापिस कर देती है ; तथा उस राशि को जिसकी वास्तविक जमाकर्ता को आवश्यक नहीं होती है उन्हें रुपया उधार देती है जो जमानत दे सकते हैं।" व्यापारिक बैंक मांग जमाओ के रूप में मुद्रा पूर्ति का एक महत्वपूर्ण साधन होते हैं। व्यापारिक बैंकों की मांग जमाए उनके नगद कोषो से कई गुणा अधिक होती है। यदि मान लो नकद कोष 100 रुपये है और यदि मांग जमाए ( चेक द्वारा निकाली जाने वाली जमाए ) मान लो 1000 रुपये है तो इसका अर्थ यह है कि अर्थव्यवस्था में मुद्रा की पूर्ति में 1000 रुपये मूल्य के मांग जमाओ के रूप में परिवर्तित कर लेता है। यह निम्न प्रकार से होता है।
1. यदि एक बैंक के पास 1000 रुपये की जमा राशि पड़ी है तो बैंक अधिकारियों को अपने अनुभव के आधार पर यह ज्ञात होता है कि सभी जमाकर्ता : एक ही समय इस राशि को निकलवाने के लिए नहीं आएंगे।
2. यदि बैंक का अनुभव या कहता है कि, सामान्यता जमाकर्ता अपनी जमा राशियों का लगभग 10% ही निकालवाते हैं तो बैंक को उनकी मांग पूरी करने के लिए कुल जमा का केवल 10% ही अपने पास नकद कोष के रूप में रखना होगा।
3. यदि बैंक अपने पास 10% (अर्थात 100 रु.) नगद कोष में रखता है तो वह 1000 रुपये मूल्य के ऋण दे सकता है। ये ऋण नकदी के रूप में नहीं दिए जाएंगे बल्कि इन्हें ऋणी के खाते में जमा के रूप में दिखाया जाएगा। तदनुसार बैंक की जमाएं नकद कोष से 10 गुणा अधिक हो जाएगी।
4. अपने पास कुल जमाओ का केवल 10% नकद कोष के रूप में रखने से बैंक इस प्रकार का कोई जोखिम नहीं उठाता कि यदि जमाकर्ता अपनी जमा राशि वापस लेने आएगा तो वह कहां से देगा क्योंकि बैंक ने अपने पास कुल जमा का 10% नकद कोष के रूप में इस वापसी के लिए सुरक्षित रखा हुआ है।
5. जबकि बैंक के पास नकद कोष में केवल 100 रु. हैं किंतु इसने 1000 रु. मूल्य की साख का निर्माण कर रखा है। फलस्वरूप
18.आरबीआई की खुली बाजार कार्रवाई नीति की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: देश में साख के नियमन हेतु भारतीय रिजर्व बैंक खुले बाजार की क्रियाओं का सहारा भी लेता है। खुले बाजार की क्रियाओं से तात्पर्य केन्द्रीय बैंक द्वारा मुद्रा बाजार में ग्राह्य प्रतिभूतियों (Eligible securities) के क्रय-विक्रय से है। अन्य शब्दों में खुले बाजार की क्रियाओं से तात्पर्य खुले बाजार में सरकारी प्रतिभूतियों तथा प्रथम श्रेणी के बिलों व प्रतिज्ञा पत्रों, आदि के क्रय-विक्रय से है। ऐसी अर्थव्यवस्थाएं जिनमें सुविकसित मुद्रा बाजार विद्यमान है, केन्द्रीय बैंक खुले बाजार की क्रियाओं का प्रयोग वाणिज्य बैंक के पास नकद आरक्षण (Cash Reserve) को प्रभावित करने के लिए करते हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया अधिनियम की धारा 17 के अनुसार, रिजर्व बैंक को यह अधिकार प्राप्त है कि वह सरकारी व अर्द्ध-सरकारी संस्थाओं द्वारा जारी की गई प्रतिभूतियों के क्रय-विक्रय के अतिरिक्त ऐसे व्यापारिक बिलों व प्रतिज्ञा-पत्रों को खरीद व बेच अथवा बट्टा कर सकता है जिनका भुगतान 90 दिन के भीतर भारत में होने वाला हो तथा जिन पर कम-से-कम दो प्रतिष्ठित हस्ताक्षर (इनमें से एक हस्ताक्षर अनुसूचित अथवा सहकारी बैंक का होना चाहिए) हों। रिजर्व बैंक 15 माह तक की अवधि के लिए लिखे गए कृषि बिलों को भी खरीद, बेच व पुनः भुना सकता है। भारत में रिजर्व बैंक की मुद्रा बाजार में प्रतिभूतियों को क्रय-विक्रय करने सम्बन्धी क्रियाएं मुख्यतः सरकारी बॉण्डों के क्रय-विक्रय से सम्बन्धित हैं।
वर्ष 1951 तक बैंक रिजर्व बैंक को असीमित मात्रा में सरकारी प्रतिभूति बेचकर नकदी प्राप्त कर लेते थे जिसके आधार पर साख का प्रसार कर लेते थे। इस काल में रिजर्व बैंक की खुले बाजार की क्रियाओं का उद्देश्य साख मुद्रा वितरण के लिए बैंक की नकदी आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए ऋण पत्रों को क्रय करना था। नवम्बर 1951 में रिजर्व बैंक ने बैंकों से उदारतापूर्वक प्रतिभूतियां खरीदने की नीति में परिवर्तन कर दिया तथा यह घोषणा की कि बैंकों की सामयिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए रिजर्व बैंक इन प्रतिभूतियों को खरीदेगा नहीं, बल्कि इनके आधार पर ऋण देगा। यह नीति 1956 तक प्रचलित रही।
19. गुणक क्या है? गुणक तथा MPC में संबंध की व्याख्या कीजिए।
उत्तर :- 1936 में केन्स ने ," The General Theory of Employment Interest and Money" में गुणक सिद्धांत की विस्तृत व्याख्या की।
केन्स के अनुसार," गुणक, विनियोग में हुए परिवर्तन के फलस्वरुप आय में होने वाले परिवर्तन का अनुपात है।"
गुणक `K=\frac{\Delta Y}{\Delta I}`
गुणक सीमांत उपभोग प्रवृत्ति पर निर्भर करता है। सीमांत उपभोग प्रवृत्ति (MPC ) या सीमांत बचत प्रवृत्ति (MPS) का ज्ञान होने पर गुणक का अनुमान लगाया जा सकता है। MPC और गुणक में प्रत्यक्ष तथा MPS और गुणक में विपरीत संबंध होता है। जब MPC शुन्य होता है तो गुणक एक होगा। इसी प्रकार यदि MPC एक हो गुणक अनन्त होगा। यदि MPC = 0 है जो कि दुर्लभ स्थिति है, तब गुणक का मान
`K=\frac1{1-0}=1`
यदि MPC, एक के बराबर है तो गुणक का मान
`K=\frac1{1-1}=\frac1{0}=`∞
मॉडल प्रश्न-पत्र सेट-4 Term-1
1. निम्नलिखित में से आर्थिक क्रिया का एक उदाहरण है-
(A) मित्र की शादी में शामिल होना
(B) पूजा करना
(C) दान करना
(D) वस्तुओं का विनिमय
2. संसाधनों के वितरण की समस्या का संबंध किस केन्द्रीय समस्या से है।
(A) क्या उत्पादन करें?
(B) कितनी मात्रा में उत्पादन करें?
(C) कैसे उत्पादन करें?
(D) किसके लिए उत्पादन करें?
3. साधनों की मितव्ययिता से क्या तात्पर्य है?
(A) साधनों का उपयोग नहीं करना
(C) साधनों का कंजूसी से प्रयोग करना
(B) साधनों का अपव्यय करना
(D) साधनों का उत्तम उपयोग करना
4. किस प्रकार की अर्थव्यवस्था में संसाधनों पर सरकार तथा निजी व्यक्तियों दोनों का स्वामित्व होता है?
(A) पूंजीवादी अर्थव्यवस्था
(B) समाजवादी अर्थव्यवस्था
(C) मिश्रित अर्थव्यवस्था
(D) केन्द्रीकृत योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था
5. अर्थशास्त्र का दुर्लभता संबंधी विचार किसने दिया?
(A) अल्फ्रेड मार्शल
(B) एडम स्मिथ
(C) लियोनल रॉबिन्स
(D) आर. जी. डी. एलेन
6. उपभोक्ता कौन है?
(A) वस्तुओं और सेवाओं का निर्माण करने वाला
(B) विद्यार्थियों को पढ़ाने वाला
(C) दूसरों को कानूनी सलाह देने वाला
(D) अपनी आवश्यकताओं को पूर्ति करने के लिए वस्तुओं और सेवाओं का उपयोग करने वाला
7. माँग का नियम लागू होने का कारण है-
(A) सीमांत उपयोगिता ह्रास नियम
(B) आय प्रभाव
(C) प्रतिस्थापन प्रभाव
(D) इनमें से सभी
8. यदि एक वस्तु की कीमत कम होने से उस वस्तु पर उपभोक्ता का व्यय अधिक हो जाता है, तो माँग की कीमत लोच होगी-
(A) 1
(B) 1 से अधिक
(C) 1 से कम
(D) 0
9. यदि एक वस्तु की माँग रेखा कीमत अक्ष (Y-अक्ष) के समांतर खींची गई है तो इसका तात्पर्य है कि उस वस्तु की माँग की कीमत लोच का मान है
(A) 0
(B) 1
(C) 1 से कम
(D) 1 से अधिक
10. यदि किसी वस्तु की माँग वक्र का समीकरण Q = 10-P है, तो वस्तु की प्रति इकाई कीमत 2 रुपये होने पर वस्तु की माँग मात्रा क्या होगी?
(A) 10
(B) 12
(C) 20
(D) 8
11.एक सरल रेखा माँग वक्र के प्रत्येक बिन्दु पर माँग की कीमत लोच का मान
(A) स्थिर रहता है।
(B) 0 होता है।
(C) बदलता है।
(D) 1 से कम होता है।
12. माना कि एक बाजार में केवल दो उपभोक्ता हैं तथा एक वस्तु के लिए जिनकी माँग को निम्न तालिका से दिखाया गया है-
P | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 |
D1 | 9 | 8 | 7 | 6 | 5 | 4 | 3 |
D2 | 24 | 20 | 18 | 16 | 14 | 12 | 10 |
वस्तु की कीमत 4 पर वस्तु की बाजार माँग मात्रा क्या होगी?
(A) 16
(B) 6
(C) 22
(D) 96
13. उपभोक्ता संतुलन की व्याख्या में उदासीनता वक्र का प्रयोग सर्वप्रथम किसने किया था?
(A) अल्फ्रेड मार्शल
(B) जे. आर. हिक्स
(C) एडम स्मिथ
(D) लियोनल रॉबिन्स
14.रसगुल्ला की कीमत कम होने से गुलाबजामुन की माँग
(A) शून्य होगी
(B) कम होगी
(C) तीव्र गति से बढ़ेगी
(D) बढ़ेगी
15. निम्नलिखित में से किस वस्तु-संयोग की माँग संयुक्त माँग होगी?
(A) चाय और कॉफी
(B) चावल और रोटी
(C) कार और पेट्रोल
(D) कॉलगेट और क्लोजअप
16.यदि किसी वस्तु की माँग रेखा मात्रा अक्ष (X-अक्ष) के समांतर है तो वस्तु की माँग की कीमत लोच का मान क्या होगा?
(A)
(B) 1 से कम
(C) 1 से अधिक
(D) 0
17. किस साधन की कीमत को ब्याज कहा जाता है?
(A) श्रम
(B) पूंजी
(C) भूमि
(D) साहस
18. दो साधन श्रम (L) और पूँजी (K) के लिए उत्पादन फलन का स्वरूप होगा-
(A) Q = f(L, K)
(B) L = f(Q. K)
(C) Q = L(f, K)
(D) K = f(Q, L)
19.एक उत्पादन फलन में साधनों के किस संयोग को शामिल किया जाता है?
(A) तकनीकी रूप से दक्ष
(B) तकनीकी रूप से अदक्ष
(C) आर्थिक रूप से अदक्ष
(D) किसी भी संयोग को
20.उस वक्र को क्या कहा जाता है जो समान उत्पादन करने वाले दो साधनों के विभिन्न संयोगों को दर्शाता है?
(A) उदासीनता वक्र
(B) उपयोगिता वक्र
(C) समोत्पाद वक्र
(D) समलागत वक्र
21.दो साधनों (L) तथा (K) के लिए उत्पादन फलन Q=ALaKb है तो श्रम की 0 इकाई के रोजगार से कुल उत्पादन क्या होगा?
(A) 0
(B) Q
(C) Q से कम
(D) Q से अधिक
22. निम्नलिखित में से किस वक्र का आकार उत्पाद अक्ष (X-अक्ष) के समांतर होता है?
(A) कुल स्थिर लागत
(B) औसत परिवर्तनशील लागत
(C) कुल परिवर्तनशील लागत
(D) इनमें से सभी
23. कॉब डगलस उत्पादन फलन Q=ALaKb में पैमाने का वृद्धिमान प्रतिफल प्राप्त होगा, जब
(A) a+b =0
(B) a+b>1
(C) a+b<1
(D) a+b=1
24.एक लागत फलन के संबंध में कौन सा कथन सत्य है?
(A) यह आगतों का अधिकतम लागत संयोगों को व्यक्त करता है।
(B) यह उत्पादन और साधनों के बीच का संबंध है।
(C) यह लागत और आगतों के बीच का संबंध है।
(D) एक लागत फलन में न्यूनतम लागत आगतों के संयोग को सम्मिलित किया जाता है।
25. एक उत्पादक दो साधनों श्रम (L) तथा पूँजी(K) के भिन्न तीन संयोगों X(L=6,K=3), Y(L=4,K=4) तथा Z(L=3,K=6) से किसी वस्तु की 40 इकाई का उत्पादन कर सकता है। यह मानते हुए कि श्रम और पूँजी पर उसे प्रति इकाई लागत क्रमशः 2 रुपये तथा 3 रुपये है तो वह उत्पादन के लिए किस साधन संयोग का चयन करेगा
(A) X
(B) Y
(C) Z
(D) X तथा Z में से कोई एक
26. अल्पकाल में एक उत्पादक को 50 रुपये की लागत का वहन करना ही पड़ता है चाहे वह उत्पादन न करे तथा वस्तु की 10 इकाई उत्पादन करने के परिवर्तनशील साधनों पर 60 रुपये खर्च करना होता है। औसत कुल लागत का मान क्या होगा?
(A) 5 रुपये
(B) 6 रुपये
(C) 11 रुपये
(D) 110 रुपये
27. एक पूर्णप्रतियोगिता बाजार में सभी फ़र्मे किस प्रकार की वस्तुओं का उत्पादन करती हैं?
(A) निकट प्रतिस्थापक
(B) घटिया
(C) समरूप
(D) विभेदित
28. एक पूर्णप्रतियोगिता बाजार में कीमत स्वीकारक कौन होता है?
(A) केवल विक्रेता
(B) केवल क्रेता
(C) क्रेता और विक्रेता दोनों
(D) कोई नहीं।
29.एक पूर्णप्रतियोगी फर्म के लिए कुल आगम वक्र का आकार कैसा होता है?
(A) उल्टा U आकार का
(B) धनात्मक ढाल वाली एक सरल रेखा
(C) आयताकार परवलीय
(D) U आकार
30. यदि किसी वस्तु की कीमत में 4 % की कमी करने से उसकी पूर्ति की मात्रा में 5% की वृद्धि हो जाती है तो वस्तु की पूर्ति …………….होगी
(A) पूर्णतया बेलोचदार
(B) पूर्णतया लोचदार
(C) सापेक्षिक लोचदार
(D) सापेक्षिक बेलोचदार
31. यदि दीर्घकाल में एक पूर्णप्रतियोगी फर्म के लिए वस्तु की कीमत औसत लागत से कम है तो फर्म वस्तु की कितनी इकाई का उत्पादन करेगा?
(A) 0
(B) 10
(C) 100
(D) उत्पादन का निर्धारण नहीं हो सकता
32. यदि एक बाजार में यदि फर्मो की संख्या बढ़ जाए, तो वस्तु की पूर्ति
(A) कम हो जाएगी
(B) बढ़ जाएगी
(C) शून्य हो जाएगी
(D) अप्रभावित होगी।
33. बाजार में पूर्ति आधिक्य की स्थिति उत्पन्न होती है, जब
(A) वस्तु का उत्पादन अधिक हो
(B) वस्तु की पूर्ति अत्यधिक हो
(C) वस्तु के स्टॉक मे वृद्धि हो
(D) वस्तु की माँग की तुलना में पूर्ति अधिक हो।
34.दीर्घकाल में वस्तु की माँग बढ़ने से साम्य कीमत में
(A) वृद्धि होगी।
(B) कमी होगी
(C) तीव्र गति से वृद्धि होगी
(D) कोई प्रभाव नहीं होगा।
35.बाजार संरचना में प्रातियोगिता बढ़ने से फ़र्मों के बीच प्रतियोगिता के व्यवहार में
(A) कमी होगी
(B) वृद्धि होगी
(C) तीव्र गति से वृद्धि होगी
(D) कोई परिवर्तन नहीं होगा
36. एक एकाधिकारी वस्तु की माँग की लोच एक से कम होती है, जब
(A) सीमांत आय शून्य होती है।
(B) सीमांत आय धनात्मक होती है।
(C) सीमांत आय, औसत आय के बराबर होती है।
(D) सीमांत आय ऋणात्मक होती है।
37. एक एकाधिकारी बाजार में फर्म की कुल संप्राप्ति अधिकतम होगी जब सीमांत संप्राप्ति का मान ……….. होगा।
(A) 0
(B) धनात्मक
(C) ऋणात्मक
(D) अधिकतम
38.एक एकाधिकार निम्न में से किसका निर्धारण कर सकता है?
(A) केवल कीमत का
(B) केवल मात्रा का
(C) एक साथ कीमत और मात्रा दोनों का
(D) कीमत तथा मात्रा में किसी एक का
39.एक फर्म संतुलन की अवस्था में होगी, जब
(A) कुल लागत और कुल संप्राप्ति समान होंगी
(B) कुल लागत सीमांत संप्राप्ति के बराबर होगी
(C) कुल संप्राप्ति सीमांत लागत के बराबर होगी
(D) कुल संप्राप्ति और कुल लागत के बीच का अंतर आधिकतम होगा।
40. नीचे दिए एक फर्म के लिए सीमांत आगम अनुसूची से वस्तु की 5 इकाई उत्पादन से कुल आगम क्या होगा ?
मात्रा | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 |
सीमांत आगम | 10 | 8 | 6 | 4 | 2 | 0 | -2 | -4 |
(A) 2
(B) 10
(C) 30
(D) 0
मॉडल प्रश्न-पत्र सेट-4 Term-2
खंड- A अति लघु उत्तरीय प्रश्न
निम्नलिखित में से किन्हीं पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
1. पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में आर्थिक निर्णय किसके द्वारा लिए जाते हैं?
उत्तर: आर्थिक एजेंट ये वे व्यक्ति या संस्थाएं हैं जो आर्थिक निर्णय लेते हैं। इनमें उपभोक्ता, उत्पादक तथा सरकार शामिल है।
2. विनियोग को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: प्रो. कीन्स के अनुसार, “विनियोग से अभिप्राय पूँजीगत वस्तुओं में होने वाली वृद्धि से है।”
3. सकल घरेलू उत्पाद (GDP) और सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) में क्या अंतर है?
उत्तर :-(अ) घरेलू उत्पाद तथा राष्ट्रीय उत्पाद
सकल घरेलू उत्पाद (GDP) देश के घरेलू क्षेत्र के उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं तथा सेवाओं के मौद्रिक मूल्य को बताता है। जबकि सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) देश के सामान्य निवासियों द्वारा उत्पादित अंतिम वस्तुओं तथा सेवाओं का बाजार मूल्य होता है।
GDP = GNP - शुद्ध विदेशी साधन आय
GNP = GDP + शुद्ध विदेशी साधन आय
4. साख सृजन किसके द्वारा किया जाता है?
उत्तर: साख मुद्रा का सृजन देश के व्यावसायिक बैंकों के द्वारा किया जाता है।
5. यदि सीमांत उपभोग प्रवृत्ति (MPC) का मान 1 है तो सीमांत बचत प्रवृत्ति (MPS) का मान क्या होगा?
उत्तर: MPS = 1- MPC = 1-1 = 0
6. अप्रत्यक्ष कर को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: डाल्टन के अनुसार, “अप्रत्यक्ष कर एक व्यक्ति पर लगाया जाता है, परन्तु इसका भुगतान पूर्णतया या अंशतया दूसरे व्यक्ति द्वारा किया जाता है।"
7. विदेशी निवेश से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: किसी एक देश की कंपनी का दूसरे देश में किया गया निवेश विदेशी निवेश (फॉरेन डाइरेक्ट इन्वेस्टमेन्ट) कहलाता है।
खंड-B लघु उत्तरीय प्रश्न
निम्नलिखित में से किन्हीं पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
8. समष्टि अर्थशास्त्र की दृष्टि से अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक 'फर्म क्षेत्रक' का वर्णन कीजिए।
उत्तर: परिवार उत्पादन के क्षेत्र(फार्म) को अपनी सेवाऐं प्रदान करता है और उत्पादक क्षेत्र द्वारा वस्तुओं एवं सेवाओं का उपभोग करता है।
उत्पादक क्षेत्र वस्तुओं एवं सेवाओं को उत्पन्न करता है। यह क्षेत्र उत्पादन के साधनों को प्रतिफल देता है।
इसका प्रयोग एक बंद अर्थव्यवस्था में होता है। सरकार का आर्थिक क्रियाओं पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
9. आर्थिक विचार की क्लासिकी परंपरा को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :- प्रतिष्ठित अर्थशास्त्रियों ने पूर्ण रोजगार को एक स्वतंत्र अर्थव्यवस्था की सामान्य स्थिति माना। उनके अनुसार," अर्थव्यवस्था में सदैव श्रम एवं अन्य साधनों को पूर्ण रोजगार प्राप्त रहता है : जो कि एक सामान्य स्थिति है। यदि कभी रोजगार से विचलन होता है तो यह एक असामान्य स्थिति होती है तथा अर्थव्यवस्था की प्रवृत्ति सदैव पूर्ण रोजगार की ओर जाने की होती है , इसे ही रोजगार का परम्परावादी सिद्धांत कहते हैं।
मान्यताऐ
1. अर्थव्यवस्था में कोई सरकारी है हस्तक्षेप नहीं होता।
2. वस्तु और साधन बाजार दोनों में पूर्ण प्रतियोगिता होती है।
3. मुद्रा विनिमय का माध्यम है।
आलोचना
1. कोई भी अर्थव्यवस्था में पूर्ण रोजगार अर्थात शुन्य बेरोजगारी की स्थिति नहीं पाई जाती
2. बेरोजगारी की स्थिति का समाधान केवल सरकार के प्रत्यक्ष हस्तक्षेप द्वारा ही संभव हो सकता है।
10. एक उदाहरण से स्पष्ट कीजिए कि चाय अंतिम तथा मध्यवर्ती दोनों वस्तु हो सकती है।
उत्तर: अन्तिम वस्तु को हम अंतिम वस्तु क्यों कहते हैं? क्योंकि एक बार इनका विक्रय होने के बाद यह सक्रिय आर्थिक प्रवाह से बाहर हो जाता है। अब किसी भी उत्पादक के द्वारा इसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। यद्यपि अंतिम क्रेता के द्वारा रूपांतरण किया जा सकता है। वस्तुतः कई अंतिम वस्तुएँ ऐसी होती हैं, जिनका उपभोग के दौरान रूपांतरण होता है। जैसे चाय पत्ती का उपभोग हम उसी रूप में नहीं करते, जैसाकि हम खरीदते हैं बल्कि इसका उपयोग पेय चाय के रूप में होता है, जिसका उपभोग किया जाता है। इस तरह हमारे रसोईघर में प्रायः भोजन पकाने के प्रक्रम के माध्यम से कच्चे खाद्य पदार्थ को खाने योग्य बनाया जाता है। किंतु घर में भोजन पकाने का कार्य आर्थिक कार्यकलाप के अंतर्गत नहीं आता है, यद्यपि उत्पाद के रूप में इसमें परिवर्तन होता है। घर में बनाया गया भोजन बाज़ार में विक्रय हेतु नहीं जाता है, यद्यपि यदि इसी प्रकार के भोजन बनाने या चाय बनाने का काम किसी जलपान-गृह में किया जाये, जहाँ कि इन पकाए गए पदार्थों का विक्रय उपभोक्ताओं को किया जाता है, तब वही मदें जैसे कि चाय पत्ती, अंतिम वस्तु कहलायेंगी तथा आगतों के रूप में गिनी जायेगी, जिससे कि आर्थिक मूल्यवद्धर्न होता है। अत: कोई वस्तु अपनी प्रकृति के कारण नहीं बल्कि उपयोग की आर्थिक प्रकृति के दृष्टि से अंतिम वस्तु बनती है।
11. 'मुद्रा को लेखे की इकाई कहा जाता है।' इस कथन से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: मुद्रा का मौलिक कार्य यह है कि यह लेखे की इकाई अथवा मूल्य के सामान्य माप के रूप में कार्य करती है। किसी वस्तु का मूल्य, इसकी कीमत को बाजार में बेची गई मात्रा से गुणा करके ज्ञात किया जाता है। क्योंकि कीमत मौद्रिक इकाई के रूप में व्यक्त की जाती है, किसी वस्तु के मूल्य को मुद्रा के रूप में भी व्यक्त किया जाता है।
उदाहरण : मान लो चावल की कीमत 20 रु. प्रति कि.ग्रा. है। चावल से भरे एक बोरे का भार 25 कि.ग्रा. है तो चावल के बोरे का मूल्य रु. 20 x 25 = 500 रु.।
12. प्रत्याशित निवेश और यथार्थ निवेश में क्या अंतर है?
उत्तर: प्रत्याशित अथवा इच्छित निवेश वह निवेश है जो निवेशकर्ता किसी विशेष उद्देश्य की प्राप्ति के लिए आय तथा रोजगार के विभिन्न स्तरों पर करने की इच्छा रखते हैं।
यथार्थ अथवा वास्तविक निवेश वह निवेश है, जो निवेशकर्ता किसी विशेष उद्देश्य की प्राप्ति के लिए आय तथा रोजगार के विभिन्न स्तरों पर वास्तव में करते हैं।
उदाहरण-मान लीजिए कि एक उत्पादक वर्ष के अंत तक अपने भंडार में 200 ₹ के मूल्य की वस्तु जोड़ने की योजना बनाता है। अतः उस वर्ष उसका प्रत्याशित निवेश 200 ₹ है। किंतु बाजार में उसकी वस्तुओं की माँग में अप्रत्याशित वृद्धि होने के कारण उसकी विक्रय में उस परिमाण से अधिक वृद्धि होती है, जितना कि उसने बेचने की योजना बनाई थी। इस अतिरिक्त माँग की पूर्ति के लिए उसे अपने भंडार से 60 ₹ के मूल्य की वस्तु बेचनी पड़ती है। अतः वर्ष के अंत में उसकी माल-सूची में केवल 200 ₹ - 60 ₹ = 140 ₹ की वृद्धि होती है। इस प्रकार, उसको प्रत्याशित निवेश 200 ₹ है, जबकि उसका यथार्थ निवेश केवल 140 ₹ है।
13.सरकारी बजट के उद्देश्य को लिखिए।
उत्तर: एक वित्तीय वर्ष में सरकार की प्रत्याशित आय एवं प्रत्याशित ब्यौरा जो 1 अप्रैल से 31 मार्च तक के अनुमानों को प्रगट करता है। जिसमें गतवर्ष की उपलब्धियों एवं कमियों का प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किया जाता है। सरल शब्दों में, एक वित्तीय वर्ष में सरकार की अनुमानित आय एवं अनुमानित व्यय का विवरण ही सरकारी बजट कहलाता है। इसके निम्न उद्देश्य होते हैं –
a. आर्थिक स्थिरता बनाये रखना।
b. उपलब्ध संसाधनों का कुशलतम आबंटन एवं विदोहन।
c. आय एवं संपत्ति का पुनः वितरण।
d. सार्वजनिक उद्यमों का प्रबंधन।
14.विदेशी व्यापार किसी देश की समग्र मॉग को किस प्रकार प्रभावित करता है?
उत्तर: कोई देश, जो किसी दूसरे देश के साथ आर्थिक संबंध रखता है, उसे खुली अर्थव्यवस्था कहते हैं। एक खुली अर्थव्यवस्था में, अन्य देश जो घरेलू देश के साथ आर्थिक संबंध रखते हैं, शेष विश्व कहलाते हैं। घरेलू देश के परिवार, जिस प्रकार देश के अंदर वस्तुएं तथा सेवाएं की मांग करते हैं, ठीक उसी तरह, विदेशी भी देश के बाहर से वस्तुएं व सेवाएं खरीदते हैं। इसे शेष विश्व का आयात अथवा घरेलू देश का निर्यात कहते हैं। लेकिन, क्योंकि घरेलू देश के परिवार, फर्म तथा सरकार भी विदेशों से वस्तुएं तथा सेवाएं खरीदते हैं, जिन्हें शेष विश्व से आयात कहते हैं। शुद्ध निर्यात की गणना करने के लिए देश के शेष विश्व को किए गए निर्यातों में से घरेलू देश के विदेशों से किए गए आयातों को घटाते हैं। निर्यात-आयात शुद्ध निर्यात कहलाते हैं। शुद्ध निर्यात शेष विश्व द्वारा घरेलू देश में वस्तुओं और सेवाओं की मांग का माप है।
अब हम कह सकते हैं कि समग्र मांग, परिवारों, फर्मों, सरकार तथा शेष विश्व द्वारा की गई मांग का योग है। हम परिवारों की मांग को उपभोग, फर्मों की मांग को निवेश, सरकारी मांग को सरकार का क्रय तथा शेष विश्व की मांग को शुद्ध निर्यात कह सकते हैं। हम कह सकते हैं कि समग्र मांग, उपभोग, निवेश व सरकारी क्रय तथा शुद्ध निर्यात का योग है।
हम इसे क्रमानुसार भी लिख सकते हैं-
समग्र मांग = उपभोग + निवेश + सरकारी क्रय + शुद्ध निर्यात
AD = C + I+ G + NX
जहां A.D. = समग्र मांग , C = उपभोग , I = निवेश , G = सरकारी क्रय
NX = शुद्ध निर्यात (X - M) जहां X = निर्यात M = आयात
समग्र मांग को अर्थव्यवस्था में समग्र व्यय या कुल व्यय भी कहते हैं।
खंड-C दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
निम्नलिखित में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
15. निम्नलिखित को परिभाषित करें?
(a) माल सूची
उत्तर: माल-सूची एक लेखांकन शब्द को कहते है जो माल को संदर्भित करता है जो बिक्री के लिए तैयार किए जाने के विभिन्न चरणों में बनाये जाते हैं, जैसे कि:
क. तैयार माल (जो बिकने के लिए उपलब्ध हो)
ख. कार्य-में-प्रगति (बनने की प्रक्रिया)
ग. कच्चे माल (तैयार माल का उत्पादन करने के लिए उपयोग में लाया जाने वाला माल)
माल-सूची आम तौर पर सबसे बड़ी वर्तमान संपत्ति होती है जिसे अगले वर्ष के भीतर बेचने की उम्मीद की जाती है जो माल एक कंपनी के पास होता है।
(b) ब्याज
उत्तर: कीन्स के अनुसार, "ब्याज वह कीमत है जो कि धन की नकद रूप में रखने की इच्छा तथा प्राप्त नकदी की मात्रा में समानता स्थापित करती है।
"किसी निश्चित अवधि के लिए तरलता के त्याग का पुरस्कार ही ब्याज है।"
(c) निवल निवेश
उत्तर: निवल निदेश-किसी अवधि विशेष में पूंजी-निर्माण पर हुए कुल व्यय में से वर्तमान पूंजी की घिसावट एवं प्रतिस्थापन की राशि को घटाने के बाद जो शेष रहता है वह निवल निवेश कहलाता है।
16.राष्ट्रीय आय मापन की व्यय विधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर: राष्ट्रीय आय व्यय बिंदु पर भी मापी जा सकती है इस विधि में हम पहले बाजार कीमत पर सकल घरेलू उत्पाद मानते है जो कि उपभोग और निवेश हेतु अंतिम उत्पादों पर होने वाला व्यय है इसमें से हम स्थिर पूंजी का उपभोग और शुद्ध अप्रत्यक्ष कर घटाकर और विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय जोड़कर राष्ट्रीय आय प्राप्त करते हैं।
1. उपभोग उपभोग पर अंतिम व्यय का वर्गीकरण - 1. परिवार उपभोग व्यय 2. सामान्य सरकार उपभोग व्यय में किया जाता हैं
2. निवेश व्यय दो वर्गों में बाटा जाता है - 1.आर्थिक क्षेत्र के अंदर निवेश 2. आर्थिक क्षेत्र के बाहर निवेश
3. इस विधि के निम्नलिखित चरण है - अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों के अंतिम उत्पादों पर होने वाले निम्नलिखित व्ययों का अनुमान लगाये :-
क. निजी अंतिम उपभोग व्यय
ख. सरकारी अंतिम उपभोग व्यय
ग. सकल घरेलु पूंंजी निर्माण
घ. शुद्ध निर्यात
उपरोक्त सभी क्षेत्रों के अंतिम उत्पादों पर होने वाले व्ययों को जोड़ने से हमें बाजार कीमत पर सकल घरेलू उत्पाद ज्ञात होता है
बाजार कीमत पर सकल घरेलू उत्पाद में से स्थिर पूंजी का उपभोग और अप्रत्यक्ष कर घटाकर तथा आर्थिक सहायता जोड़कर साधन लागत पर शुद्ध घरेलू उत्पाद ज्ञात होता है।
साधन लागत पर शुद्ध घरेलू उत्पाद = बाजार कीमत पर सकल घरेलू उत्पाद - स्थिर पूंजी का उपभोग - अप्रत्यक्ष कर + आर्थिक सहायता
साधन लागत पर शुद्ध घरेलू उत्पाद में विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय जोडने पर साधन लागत पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद ज्ञात होता है
साधन लागत पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद =साधन लागत पर शुद्ध घरेलू उत्पाद + विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय
अंतिम व्यय विधि मापने में सावधानियां
व्यय विधि द्वारा राष्ट्रीय आय मापने में सावधानियां रखना आवश्यकता हैं :-
1. मध्यवर्ती उत्पादों में होने वाले व्यय को शामिल न करें ताकि व्यय की दोहरी गणना से बचे केवल अंतिम उत्पादों पर होने वाले व्यय को शामिल करें
2. उपहार, दान, कर, छात्रवृित्त आदि के रूप में होने वाला व्यय अंतिम उत्पादों पर होने वाला व्यय नहीं है ये हस्तांतरणीय व्यय है जिन्हें राष्ट्रीय आय में शामिल नहीं करना चाहिए
3. पुरानी वस्तुओं के खरीदने पर होने वाला व्यय शामिल नहीं करना चाहिए क्योंकि जब ये वस्तुएं पहली बार खरीदी ग इन पर किया गया शामिल हो चुका था
17.मुद्रा गुणक क्या है? इसका मूल्य का निर्धारण कैसे होता है?
उत्तर: मुद्रा गुणक से अभिप्राय उस संख्या से है जिससे यह ज्ञात होता है कि उच्च शक्तिशाली मुद्रा में परिवर्तन होने पर मुद्रा की पूर्ति में कितने गुना परिवर्तन होगा।
मुद्रा गुणक = `\frac MH`
18.बैंक दर क्या है? बैंक दर मुद्रा की पूर्ति को किस प्रकार प्रभावित करती है?
उत्तर: बैंक दर ब्याज की वह न्यूनतम दर है जिस पर देश का केंद्रीय बैंक (अंतिम ऋणदाता होने के कारण) वाणिज्यिक बैंकों को ऋण देने के लिये तैयार होता है। बैंक दर के बढ़ने से ब्याज की दर बढ़ती है तथा ऋण महँगा होता है। इसके फलस्वरूप साख की माँग कम हो जाती है। इसके विपरीत, बैंक दर कम करने पर वाणिज्यिक बैंकों द्वारा अपने उधारकर्ताओं से लिए जाने वाले ब्याज की बाजार दर कम हो जाती है। अर्थात् साख (ऋण) सस्ती हो जाती है। इसके फलस्वरूप साख की माँग बढ़ जाती है। मुद्रा स्फीति के समय जब साख का संकुचन जरूरी होता है तब केंद्रीय बैंक महँगी साख नीति को अपनाता है। अवस्फीति के समय जब साख का विस्तार करना जरूरी होता है तब केंद्रीय बैंक सस्ती साख नीति को अपनाता है।
बैंक दर नीति की सफलता निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करती है:
(i) ऋणों के लिए वाणिज्यिक बैंकों की केंद्रीय बैंक पर निर्भरता का अंश : यदि वाणिज्यिक बैंकों के पास अपने फालतू फंड ग्राहकों की उधार की जरूरत पूरी करने के लिए काफी हैं तो उनकी केंद्रीय बैंक पर निर्भरता बहुत कम होगी।
(ii) वाणिज्यिक बैंकों की केंद्रीय बैंक से फंडस की माँग की संवेदनशीलता का अंश: बाजार की दशाओं को देखते हुए, वाणिज्यिक बैंक, बैंक दर में छोटी-सी वृद्धि या कमी के प्रति यदि संवेदनशील नहीं हैं तो ऐसी परिस्थिति में बैंक दर की नीति को विशेष सफलता प्राप्त नहीं हो सकती।
(iii) मुद्रा बाजार में व्याज दर का ढाँचा: यदि बाजार में गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थाएं अपनी ब्याज दर में उसी प्रकार परिवर्तन कर दें जैसा कि केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंकों से आशा करता है, तो बैंक दर की नीति सफल नहीं हो पाएगी।
(iv) बाजार में समुचित फण्डस की पूर्ति: बैंक दर की नीति तब भी सफल नहीं होगी यदि बैंकिंग साधनों की अपेक्षा गैर-बैंकिंग फण्डस के साधन अधिक महत्व रखते हैं।
19.यदि किसी अर्थव्यवस्था के लिए उपभोग फलन C = 50 + 0.4 Y है तो स्वायत निवेश में 100 करोड़ रुपये की वृद्धि से संतुलन आय में होने वाली वृद्धि की गणना कीजिए।
उत्तर: उपभोग फलन C = 50 + 0.4 Y
स्वायत निवेश IA = 100 करोड़
संतुलन Y= C + I
Y = 50 + 0.4Y + 100
Y - 0.4Y = 150
0.6Y = 150
अतः आय(Y) = 150÷ 0.6 = 250 करोड़
मॉडल प्रश्न-पत्र सेट-5 Term-1
1. समष्टि शब्द के लिए प्रयुक्त अंग्रेजी का शब्द 'MACRO' किस भाषा के शब्द से लिया गया है?
(A) अंग्रेजी
(B) फ्रेंच
(C) स्पेनिश
(D) ग्रीक
2. चयन की समस्या उत्पन्न होती है,क्योंकि हमारे साधन
(A) अत्यधिक
(B) दुर्लभ
(C) असीमित
(D) उपयुक्त
3. उत्पादन संभावना वक्र का आकार मूल बिन्दु की ओर अवतल होने का कारण है-
(A) सीमांत उपयोगिता ह्रास नियम
(B) परिवर्तनशील अनुपातों का नियम
(C) बढ़ती सीमांत अवसर लागत
(D) स्थिर सीमांत अवसर लागत
4. व्यष्टि अर्थशास्त्र के संबंध में कौन सा कथन सत्य है?
(A) व्यष्टि अर्थशास्त्र का क्षेत्र व्यापक होता है।
(B) व्यष्टि अर्थशास्त्र का संबंध राष्ट्रीय आय निर्धारण से है।
(C) व्यष्टि अर्थशास्त्र के अंतर्गत सामूहिक आर्थिक विचारों का अध्ययन किया जाता है।
(D) व्यष्टि अर्थशास्त्र के अंतर्गत व्यक्तिगत आर्थिक इकाई का अध्ययन किया जाता है।
5. 'THE WEALTH OF NATION' नामक पुस्तक के लेखक कौन हैं?
(A) अल्फ्रेड मार्शल
(B) एडम स्मिथ
(C) लियोनल रॉबिन्स
(D) आर. जी. डी. एलेन
6. अर्थव्यवस्था की किस केन्द्रीय समस्या का संबंध उत्पादन की तकनीक के चयन से है?
(A) क्या उत्पादन करें?
(B) कितनी मात्रा में उत्पादन करें?
(C) कैसे उत्पादन करें?
(D) किसके लिए उत्पादन करें?
7. निम्नलिखित तालिका एक उपभोक्ता के लिए कुल उपयोगिता तालिका है। यदि वस्तु की प्रति इकाई कीमत 5 रुपये हो तो संतुलन की अवस्था में उपभोक्ता वस्तु की कितनी इकाई प्राप्त करना चाहेगा?
वस्तु की इकाई | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 |
कुल उपयोगिता | 10 | 18 | 25 | 31 | 36 | 40 | 43 | 45 |
(A) 8
(B) 5
(C) 6
(D) 4
8. किसी वस्तु की एक अतिरिक्त इकाई के उपभोग से प्राप्त उपयोगिता क्या कहलाती है?
(A) कुल उपयोगिता
(B) औसत उपयोगिता
(C) सीमांत उपयोगिता
(D) सीमांत आगम
9. एक उपभोक्ता दो वस्तुओं के दो बंडलों A(समोसा =5, कचौड़ी =4) तथा B(समोसा =5, कचौड़ी =6) के बीच तटस्थ है। यह कथन
(A) सत्य है
(B) असत्य है
(C) भ्रामक है।
(D) संशयात्मक है।
10. यदि किसी वस्तु की माँग वक्र का समीकरण Q = 15-2P है, तो वस्तु की प्रति इकाई कीमत 1 रुपये होने पर वस्तु की माँग मात्रा क्या होगी?
(A) 10
(B) 13
(C) 20
(D) 8
11. यदि किसी वस्तु का माँग फलन Q = `\frac1P`
(A) 0
(B) 1
(C) 1 से अधिक
(D) 1 से कम
12. माना कि एक बाजार में केवल दो उपभोक्ता हैं। एक वस्तु के लिए जिनकी माँग को निम्न तालिका से दिखाया गया है-
P | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 |
D1 | 9 | 8 | 7 | 6 | 5 | 4 | 3 |
D2 | 24 | 20 | 18 | 16 | 14 | 12 | 10 |
वस्तु की कीमत 3 पर वस्तु की बाजार माँग मात्रा क्या होगी?
(A) 16
(B) 6
(C) 25
(D) 96
13. बजट रेखा 3x+4y-20 की ढाल क्या होगी?
(A) -`\frac{4}3`
(B) -`\frac{3}4`
(C) -12
(D) -`\frac{20}3`
14. चाय की कीमत कम होने से चीनी की माँग
(A) शून्य होगी
(B) कम होगी
(C) तीव्र गति से कम होगी
(D) बढ़ेगी
15. गिफिन वस्तु की स्थिति में माँग वक्र की ढाल होगी
(A) 0
(B) धनात्मक
(C) ऋणात्मक
(D) अन्नत
16. यदि किसी वस्तु की माँग रेखा मात्रा अक्ष (X-अक्ष) के समांतर है तो वस्तु की माँग की कीमत लोच का मान क्या होगा?
(A) अन्नत
(B) 1 से कम
(C) 1 से अधिक
(D) 0
17. किस साधन की कीमत को मजदूरी कहा जाता है?
(A) श्रम
(B) पूँजी
(C) भूमि
(D) साहस
18. दो साधन श्रम (L) और पूँजी (K) के लिए उत्पादन फलन Q = 5 L + 3K है। श्रम और पूँजी की 100 इकाई के रोजगार से वस्तु की ………. अधिकतम मात्रा का उत्पादन हो सकता है?
(A) 500
(B) 300
(C) 800
(D 600
19. साधनों के वैसे संयोग को तकनीकी रूप से दक्ष कहा जाता है जिसमें कम से कम एक साधन की मात्रा
(A) शून्य हो
(B) स्थिर हो
(C) कम
(D) अधिक
20. समोत्पाद वक्र का प्रत्येक बिन्दु दो साधनों के वैसे संयोगों को दर्शाता है जो वस्तु की …… मात्र का उत्पादन करते हैं।
(A) शून्य
(B) समान
(C) असमान
(D) इनमें से कोई नहीं
21. दो साधनों (L) तथा (K) के लिए उत्पादन फलन Q=ALaKb है तो पूँजी की 0 इकाई के रोजगार से कुल उत्पादन क्या होगा?
(A) 0
(B) Q
(C) Q से कम
(D) Q से अधिक
22.निम्नलिखित में से किस वक्र का आकार U आकार का होता है?
(A) कुल स्थिर लागत
(B) औसत परिवर्तनशील लागत
(C) कुल परिवर्तनशील लागत
(D) इनमें से सभी
23. कॉब डगलस उत्पादन फलन Q=ALaKb में पैमाने का ह्रासमान प्रतिफल प्राप्त होगा, जब
(A) a+b =0
(B) a+b>1
(C) a+b<1
(D) a+b=1
24.निम्नलिखित में से परिवर्तनशील लागत का एक उदाहरण है-
(A) मकान का मासिक किराया
(B) स्थायी कर्मचारी का वेतन
(C) मशीन की लागत
(D) कच्चे माल पर किया गया खर्च
25.औसत लागत में वृद्धि होगी जब सीमांत लागत
(A) औसत लागत से कम होगी
(B) औसत लागत से अधिक होगी
(C) औसत लागत के बराबर होगी
(D) शून्य होगी
26. उत्पादन फलन Q=5L0.5K0.5 पैमाने का ……….. प्रतिफल को प्रदर्शित करता है।
(A) वृद्धिमान
(B) स्थिर
(C) ह्रास
(D) वर्धमान
27. एक वस्तु की पूर्ति वक्र को निम्न रेखाचित्र से दर्शाया गया है। इस पूर्ति वक्र से पूर्ति की कीमत लोच का मान क्या होगा?
(A) 1
(B) 0
(C) 1 से अधिक
(D) 1 से कम
28. माँग आधिक्य की स्थिति होती है जब-
(A) माँग की मात्रा अत्यधिक होती है।
(B) पूर्ति की तुलना में माँग कम होती है।
(C) पूर्ति की तुलना में माँग अधिक होती है।
(D) माँग और पूर्ति बराबर होती है।
29. बाजार संतुलन के संबंध में कौन सा कथन सत्य है? बाजार संतुलन की स्थिति में
(A) माँग और पूर्ति दोनों बराबर होती है।
(B) माँग आधिक्य शून्य होता है।
(C) पूर्ति आधिक्य शून्य होता है।
(D) इनमें से सभी
30. किसी वस्तु की कीमत में 4 % की कमी करने से उसकी पूर्ति की मात्रा में 3% की वृद्धि हो जाती है तो वस्तु की पूर्ति …… होगी
(A) पूर्णतया बेलोचदार
(B) पूर्णतया लोचदार
(C) सापेक्षिक लोचदार
(D) सापेक्षिक बेलोचदार
31. यदि अल्पकाल में एक पूर्णप्रतियोगी फर्म के लिए वस्तु की कीमत औसत परिवर्तनशील लागत से कम है तो फर्म वस्तु की कितनी इकाई का उत्पादन करेगा?
(A) 0
(B) 10
(C) 100
(D) उत्पादन का निर्धारण नहीं हो सकता
32. एक बाजार में फ़र्मों की संख्या में कमी होने से वस्तु की पूर्ति
(A) कम हो जाएगी
(B) बढ़ जाएगी
(C) शून्य हो जाएगी
(D) अप्रभावित होगी।
33. बाजार में पूर्तिआधिक्य की स्थिति उत्पन्न होती है, जब
(A) वस्तु का उत्पादन अधिक हो
(B) वस्तु की पूर्ति अत्यधिक हो
(C) वस्तु के स्टॉक मे वृद्धि हो
(D) वस्तु की माँग की तुलना में पूर्ति अधिक हो।
34. दीर्घकाल में वस्तु की माँग घटने से साम्य कीमत में
(A) वृद्धि होगी।
(B) कमी होगी
(C) तीव्र गति से वृद्धि होगी
(D) कोई प्रभाव नहीं होगा।
35. बाजार संरचना में प्रतियोगिता घटने से फ़र्मों के बीच प्रतियोगिता के व्यवहार में
(A) कमी होगी
(B) वृद्धि होगी
(C) तीव्र गति से कमी होगी
(D) कोई परिवर्तन नहीं होगा
36. एक एकाधिकारी वस्तु की माँग की लोच एक के बराबर होती है, जब
(A) सीमांत आय शून्य होती है।
(B) सीमांत आय धनात्मक होती है।
(C) सीमांत आय, औसत आय के बराबर होती है।
(D) सीमांत आय ऋणात्मक होती है।
37. किस बाजार संरचना में एक फर्म के लिए औसत आगम वक्र की ढाल ऋणात्मक होती है?
(A) पूर्णप्रतियोगिता
(B) शुद्धप्रतियोगिता
(C) एकाधिकार
(D) इनमें से सभी
38. माँग वक्र का आकार क्या होगा ताकि कुल आगम वक्र एक क्षैतिज रेखा हो?
(A) ऋणात्मक ढाल की सरल रेखा
(B) आयताकार परवलीय
(C) U आकार
(D) उल्टा U आकार
39. माँग वक्र का आकार क्या होगा ताकि कुल आगम वक्र मूल बिन्दु से गुजरती हुई धनात्मक ढाल की एक सरल रेखा हो?
(A) एक सरल रेखा जिसकी ढाल ऋणात्मक हो।
(B) मात्रा अक्ष के समांतर
(C) आयताकार परवलीय
(D) U आकार
40. नीचे दिए एक फर्म के लिए सीमांत आगम अनुसूची से वस्तु की 6 इकाई के उत्पादन से कुल संप्राप्ति क्या होगी?
मात्रा | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 |
सीमांत आगम | 10 | 8 | 6 | 4 | 2 | 0 | -2 | -4 |
(A) 2
(B) 10
(C) 30
(D) 0
मॉडल प्रश्न-पत्र सेट-5 Term-2
खंड- A अति लघु उत्तरीय प्रश्न
निम्नलिखित में से किन्हीं पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
1. 'जनरल थ्योरी ऑफ एंप्लॉयमेंट इंटरेस्ट एंड मनी' नामक पुस्तक किसने लिखी थी?
उत्तर: जे. एम. केन्स
2. माल सूची में नियोजित संचय से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: वह माल सूची संचय जिसके लिए पहले से योजना बनाई गई है नियोजित माल सूचि संचय कहलाता है
3. केंद्रीय बैंक एवं व्यापारिक बैंक में कोई एक अंतर लिखिए।
उत्तर: केन्द्रीय बैंक मुद्रा का निर्माण करता है; वहीं व्यापारिक बैंक मुद्रा का लेन-देन और साख मुद्रा का निर्माण करता है।
4. कर की परिभाषा दीजिए।
उत्तर: प्रो. डाल्टन के अनुसार,'' कर किसी सरकार द्वारा लगाया जाने वाला वह अंशदान है जिसका कर दाता को बदले में प्राप्त होने वाली सेवाओं की मात्राओं से कोई संबंध नहीं होता।''
5. उपभोक्ता वस्तुओं से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: उपभोक्ता उस व्यक्ति को कहते हैं, जो विभिन्न वस्तुओं एवं सेवाओं का या तो उपभोग करता है अथवा उनको उपयोग में लाता है। वस्तुओं में उपभोक्ता वस्तुएं (जैसे गेहूं, आटा, नमक, चीनी, फल आदि) एवं स्थायी वस्तुएं (जैसे टेलीविजन, रेफरीजरेटर, टोस्टर, मिक्सर, साइकिल आदि) सम्मिलित है।
6. निवेश गुणक की धारणा किसने दी?
उत्तर: केन्स ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'The General Theory fo Employment, Interest and Money' (1936) में निवेश गुणक का प्रतिपादन किया है।
7. अवमूल्यन क्या है?
उत्तर: अवमूल्यन अन्य मुद्राओं के संबंध में एक मुद्रा के मूल्य में कमी है। यह किसी अन्य मुद्रा, मुद्राओं के समूह या मानक के सापेक्ष किसी देश की मुद्रा के मूल्य का जानबूझकर नीचे की ओर समायोजन है।
खंड-B लघु उत्तरीय प्रश्न
निम्नलिखित में से किन्हीं पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
8. किसी देश की अर्थव्यवस्था में सरकार की भूमिका का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: किसी देश की अर्थव्यवस्था में सरकार की भूमिका निम्नलिखित हैं-
1. सरकार परिवार क्षेत्र पर कर लगाती है। इसके फलस्वरूप मुद्रा का प्रवाह परिवार क्षेत्र से सरकारी क्षेत्र की ओर होता है।
2. सरकार उत्पादक क्षेत्र पर कर लगाती है। इसके फलस्वरूप मुद्रा का प्रवाह उत्पादक क्षेत्र से सरकारी क्षेत्र की ओर होता है।
3. सरकार उत्पादकों को आर्थिक सहायता देती है। इसके फलस्वरूप मुद्रा का प्रवाह सरकारी क्षेत्र से उत्पादक क्षेत्र की ओर होता है।
4. सरकार घरेलू क्षेत्र को आर्थिक सहायता देती है (पेंशन)। इसके फलस्वरूप मौद्रिक प्रवाह सरकारी क्षेत्र से परिवार क्षेत्र की ओर होता है।
5. सरकार बचत करती है जिसके फलस्वरूप मुद्रा का प्रवाह सरकारी क्षेत्र से मुद्रा बाजार की ओर होता है।
6. सरकार मुद्रा उधार लेती है जिसके फलस्वरूप मुद्रा का प्रवाह मुद्रा बाजार से सरकारी क्षेत्र की ओर होता है।
7. सरकार वस्तुएं और सेवाएं खरीदती है जिसके फलस्वरूप मुद्रा का प्रवाह सरकारी क्षेत्र से उत्पादक क्षेत्र की ओर होता है
चित्र से,
9. समष्टि अर्थशास्त्र में आर्थिक एजेंट कौन होते हैं? वे व्यक्तिगत आर्थिक एजेंट से किस प्रकार भिन्न होते हैं?
उत्तर: समष्टि अर्थशास्त्रीय नीतियों का अनुपालन राज्य स्वयं अथवा वैधानिक निकाय जैसे भारतीय रिज़र्व बैंक, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड और इसी प्रकार की संस्था (जिन्हें समष्टि अर्थशास्त्र में आर्थिक एजेंट कहा जाता है) करते हैं। विधि अथवा भारत के संविधान में जैसाकि परिभाषित की गई है कि ऐसे प्रत्येक निकाय को एक अथवा अधिक सार्वजनिक लक्ष्य का अनुपालन करना होगा। ये लक्ष्य उन वैयक्तिक , आर्थिक एजेंटों के लक्ष्य नहीं हैं जो निजी लाभ अथवा कल्याण को अधिकतम करना चाहते हैं। अतः समष्टि अर्थशास्त्र के एजेंट मूल रूप से वैयक्तिक निर्णयकर्ताओं से अलग होते हैं।
स्पष्टतः उनको आर्थिक उद्देश्यों (निजी लाभ अर्जित) के बाहर जाना पड़ता है ,उनके लिए आर्थिक संसाधनों का परिनियोजन करने का निर्णय लेना पड़ता है। इस प्रकार के क्रियाकलाप का लक्ष्य व्यक्ति के निजी हित के लिए नहीं होता है। इनका अनुपालन संपूर्ण देश और उसकी जनता के कल्याण के लिए किया जाता है।
10. एक उदाहरण से स्पष्ट कीजिए कि पूँजीगत वस्तुएँ श्रमिक की कार्यक्षमता को बढ़ाती हैं।
उत्तर: पूँजी स्वयं धन पैदा करने की क्षमता नहीं रखती। भूमि की तरह पूँजी भी उत्पादन का निष्क्रिय उपादान है और मानव-श्रम के बिना उससे कुछ भी उत्पन्न नहीं किया जा सकता।
समस्त पूँजी मानव-श्रम का परिणाम है। प्राकृतिक साधनों पर मानव-श्रम के काम करने से ही पूँजीगत वस्तुएँ पैदा होती हैं। मशीनें, औजार, बिल्डिग आदि सभी मानव-श्रम द्वारा उत्पादित वस्तुएँ हैं।
पूँजी उत्पादन का अनिवार्य साधन न होकर महत्त्वपूर्ण साधन है, क्योंकि बिना पूँजी के श्रम तथा भूमि के सहयोग से उत्पादन किया तो जा सकता है; परन्तु पूँजी के प्रयोग से उत्पादन की मात्रा में और अधिक वृद्धि सम्भव है। इस कारण पूँजी को उत्पाद का महत्त्वपूर्ण साधन कहा जा सकता है।
11. मुद्रा के अलावे तीन ऐसी परिसम्पत्तियों का उल्लेख कीजिए जो मूल्य संचय का कार्य कर सकती हैं। इन परिसंपत्तियों के मूल्य संचय कार्य करने में क्या कठिनाई उत्पन्न होती है?
उत्तर: मुद्रा के अलावा तीन परिसमाप्ति जो मूल्य का संचय कार्य कर सकती है - स्वर्ण, भूमि, वित्तीय संपत्ति ( एक वित्तीय परिसंपत्ति एक गैर-भौतिक संपत्ति है जिसका मूल्य एक संविदात्मक दावे से प्राप्त होता है, जैसे कि बैंक जमा , बांड , और कंपनियों की शेयर पूंजी में भागीदारी)। इस पर ब्याज भी कमायी जा सकती है।
आधुनिक बैंकिंग का विकास मुद्रा के इसी कार्य द्वारा सम्भव हुआ है। आर्थिक विकास के लिए यह आवश्यक है कि अधिक मात्रा में पूँजी-संचय हो । इसके लिए मुद्रा का मूल्य स्थिर बनाये रखना आवश्यक है ताकि लोग अपनी बचतें स्वर्ण, भूमि अथवा किसी अन्य रूप में न रखने लगें। मूल्य का संचय अमौद्रिक परिसम्पत्तियों के रूप में भी किया जा सकता है, परन्तु इसका मुद्रा के रूप में मूल्य घट जाने की सम्भावना बनी रहती है और इनमें अधिक 'तरलता' भी नहीं होती । लोगों द्वारा मूल्य का संचय मुद्रा के रूप में अथवा अमौद्रिक परिसम्पत्तियों के रूप में किये जाने का निर्णय बहुत कुछ कीमतों की स्थिति पर निर्भर करता है।
मूल्य को संचय वस्तुओं के रूप में हो सकता है, परन्तु मूल्य को वस्तुओं के रूप में संचित करने में निम्नलिखित कठिनाइयाँ हैं।
(i) मूल्य को वस्तुओं के रूप में संचित करने में अधिक स्थान की आवश्यकता पड़ती है।
(ii) वस्तुएँ नाशवान होती हैं।
(iii) वस्तुओं के मूल्य में अंतर आ जाता है।
(iv) वस्तुओं को रखे हुए भी मूल्यहास होता है। उदाहरण के लिए यदि एक व्यक्ति अपनी बेटी के विवाह के लिए मूल्य का संचय करना चाहता है तो वह क्या संचय करेगा? क्या वह बारातियों का भोजन बनवाकर रख देगा? क्या वह फर्नीचर खरीदकर रख देगा?
12. एक देश का उपभोग फलन C = 100 + 0.8Y है। इस उपभोग फलन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: उपभोग फलन का तात्पर्य होता है कि उपभोग व्यय योग्य आय पर निर्भर करता है।
C = f (Y)
उपरोक्त समीकरण में C = 100 + 0.8Y बतलाता है कि स्वतंत्र उपभोग 100 है, इसका अर्थ यह होता है कि जब व्यक्ति को आय शून्य होता है तब भी उसका उपभोग 100 है। जो उपभोक्ता पूर्व बचत से खर्च करता है।
इस समीकरण में दूसरा भाग 0.8 है जो सीमांत उपभोग प्रवृत्ति (MPC) को बतलाता है। इसका अर्थ यह होता है कि आय में परिवर्तन होने पर उपभोग में कितना परिवर्तन होगा। उदाहरण के लिए अगर किसी व्यक्ति की आय ₹500 है तो उसका 80% अर्थात ₹400 उपभोग पर खर्च करेगा।
13.सार्वजनिक वस्तुओं की पूर्ति सरकार के द्वारा ही की जाती है। क्यों?
उत्तर: सार्वजनिक वस्तुएँ ऐसी वस्तुओं को कहा जाता है जिनकी कीमत का निर्धारण बाजार कीमत तंत्र द्वारा नहीं हो सकता। इनकी संतुलन कीमत व संतुलन मात्रा वैयक्तिक उपभोक्ताओं और उत्पादकों के बीच संव्यवहार से नहीं हो सकती। उदाहरण राष्ट्रीय । प्रतिरक्षा, सड़क, लोक प्रशासन आदि। सार्वजनिक वस्तुएँ सरकार के द्वारा ही प्रदान की जानी चाहिए क्योंकि
(i) सार्वजनिक वस्तुओं का लाभ किसी उपभोक्ता विशेष तक ही सीमित नहीं रहता है, बल्कि इसका लाभ सबको मिलता है। उदाहरण के लिए सार्वजनिक उद्यान अथवा वायु प्रदूषण को कम करने के उपाय किये जाते हैं तो इसका लाभ सभी को मिलता है, भले ही वे इसका भुगतान करें या न करें। ऐसी स्थिति में सार्वजनिक वस्तुओं पर शुल्क लगाना कठिन या कहें असंभव होता है, इसे 'मुफ्तखोरी की समस्या कहा जाता है। इससे ये वस्तुएँ अर्वज्य हो जाती हैं अर्थात् भुगतान नहीं करने वाले उपभोक्ता को इसके उपयोग से वंचित नहीं किया जा सकता।
(ii) ये वस्तुएँ "प्रतिस्पर्धी नहीं होती, क्योंकि एक व्यक्ति अन्य व्यक्तियों के उपभोग को कम किये बिना इनका भरपूर प्रयोग कर सकता है।
14.व्यापार संतुलन में अदृश्य मदों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: अदृश्य आयात निर्यात के अन्तर्गत सेवाओं के आदान प्रदान को शामिल किया जाता है। ये सेवाएं हैं- बैंकिंग बीमा, विदेशों में शिक्षा चिकित्सा, पर्यटन, ब्याज तथा लाभांश, सैनिक सहायता, विदेशी दान, जुर्माने, मुआवज़े तथा अन्य प्रकार के हस्तांतरण से संबंधित आय का भुगतान, जिनका बंदरगाहों पर कोई लेखा-जोखा नहीं रखा जाता है। इस प्रकार अदृश्य मदों में सेवाओं एवं पूँजी में आयात-निर्यात को शामिल किया जाता है।
खंड-C दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
निम्नलिखित में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
15. राष्ट्रीय आय के वर्तुल प्रवाह के दो क्षेत्रीय मॉडल की व्याख्या कीजिए।
उत्तर :- दो क्षेत्रकीय अर्थव्यवस्था में केवल दो क्षेत्र - फर्म व परिवार होते हैं। परिवार फर्मों को परिवार फर्मों को साधन सेवाएं प्रदान करते हैं, बदले में फार्म साधन सेवाओं का भुगतान परिवारों को करती है। इसी प्रकार फर्म परिवारों को वस्तुएं और सेवाएं प्रदान करती है तथा परिवार वस्तुओं और सेवाओं का भुगतान फर्म को करते हैं। परिवार उत्पादक क्षेत्र को भूमि, श्रम, पूंजी तथा उद्यम प्रदान करते हैं। फर्म परिवारों को मजदूरी, लगान, व्याज व लाभ के रूप में भुगतान करती है। इसे निम्न प्रकार दर्शा सकते हैं।
16. क्या राष्ट्रीय आय की गणना में निम्नलिखित मदों को शामिल किया जाता है? कारण दीजिए। (a) वृद्धा पेंशन (b) सरकारी कर्मचारी को प्राप्त मुफ्त आवास का मूल्य
उत्तर: राष्ट्रीय आय में पुरानी अंतिम वस्तुओं, मध्यवर्ती वस्तु, हस्तांतरण भुगतान, वित्तीय सौदों, गैरकानूनी कार्यो, अवकाश के समय किए गए कार्यों, स्वयं उपभोग सेवाओं, आदि से संबंधित लेनदेन शामिल नहीं किए जाते हैं।
(a) वृद्धा पेंशन - इसको राष्ट्रीय आय में शामिल नहीं किया जाता, इसे हस्तांतरण भुगतान माना जाता है।
(b) सरकारी कर्मचारी को प्राप्त मुफ्त आवास का मूल्य - हां, या राष्ट्रीय आय में शामिल होता है क्योंकि या सरकारी कर्मचारी के मजदूरी(आय) का भाग होता है।
17.केन्द्रीय बैंक के किन्हीं दो कार्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: डी. कॉक के शब्दों में," केंद्रीय बैंक का बैंक है जो देश की मौद्रिक तथा बैंकिंग प्रणाली के शिखर पर होता है"
भारत का केंद्रीय बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया है जिसकी स्थापना 1 अप्रैल 1935 ई. को की गई।
एक केंद्रीय बैंक द्वारा किए जाने वाले मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं
1. मुद्रा जारी करना :- वर्तमान समय में संसार के प्रत्येक देश में नोट (मुद्रा ) छापने का एकाधिकार केवल केंद्रीय बैंक को ही प्राप्त होता है और केंद्रीय बैंक द्वारा जारी किए गए नोट सारे देश में असीमित विधिग्राह्म के रूप में घोषित होते हैं
2. सरकार का बैंक :- केंद्रीय बैंक सभी देशों में सरकार के बैंकर, एजेंट एवं वित्तीय परामर्शदाता के रूप में कार्य करते हैं। सरकार बैंकर के रूप में यह सरकारी विभागों के खाते रखता है तथा सरकारी कोषों की व्यवस्था करता है। यह सरकार के लिए उसी प्रकार कार्य करता है जिस प्रकार व्यवसायिक बैंक अपने ग्राहकों के लिए करते हैं। आवश्यकता पड़ने पर सरकार को बिना ब्याज के ऋण दिया जाता है।
18. माँग जमा और आवधिक जमा में अंतर स्पष्ट कीजिए। माँग जमा को मुद्रा का रूप क्यों कहा जाता है?
उत्तर: माँग जमा - माँग जमा खाते मुनाफे के मुकाबले अधिक तरलता और आसानी से पहुंच प्रदान करते हैं, लेकिन कम ब्याज दरों पर भुगतान करते हैं, और वे खाते को संभालने के लिए विभिन्न फीस भी शामिल कर सकते हैं। जमाकर्ता किसी भी समय किसी दंड या पूर्व नोटिस के बिना एक मांग जमा खाते में किसी भी या सभी निधियों को वापस ले सकते हैं। एक जमाकर्ता को किसी भी समय धनराशि का उपयोग करना पड़ सकता है जो अपने नियमित खर्चों को संभालने के लिए पर्याप्त व्यक्तिगत तरलता वाले जमाकर्ता को एक मांग जमा खाते में रखा जाना चाहिए। मांग जमा खातों के उदाहरणों में नियमित चेकिंग अकाउंट्स, बचत खाते या मनी मार्केट अकाउंट्स शामिल हैं।
आवधिक जमा- जिसे समय जमा के रूप में भी जाना जाता है, कुछ महीने से लेकर कई सालों तक की अवधि के पूर्व निर्धारित अवधि के लिए किए गए निवेश जमा हैं। जमाकर्ता को निर्धारित समय अवधि में सावधि जमा पर ब्याज की पूर्व निर्धारित दर प्राप्त होती है। लंबी अवधि के लिए जमा किए गए धन उच्च ब्याज दर को कमांड देते हैं सावधि जमा खाते पारंपरिक बचत खातों से अधिक ब्याज दर देते हैं। एक सावधि जमा खाते से एक वित्तीय दंड के बिना चुने हुए समय के अंत तक धन को वापस नहीं लिया जा सकता है, और निकासी को पहले से ही लिखित नोटिस की आवश्यकता होती है। समयावधि के अंत में, जमाकर्ता को जमा धन वापस लेने का विकल्प प्राप्त होता है, ब्याज अर्जित किया जाता है, या धन को एक नई अवधि जमा राशि में शामिल करने का विकल्प होता है। एक सावधि जमा का सबसे आम रूप जमा, या सीडी का एक बैंक प्रमाण पत्र है।
वाणिज्यिक बैंक एक अर्थव्यवस्था में मुद्रा पूर्ति का महत्वपूर्ण स्रोत होते हैं। ये मांग जमाओं के रूप में मुद्रा आपूर्ति का योगदान देते हैं। वाणिज्यिक बैंकों की मांग जमाएँ उनके नकद कोषों से कई गुणा अधिक होती हैं। यदि मान लीजिए नकद कोष 1,000 रुपये है और यदि मांग जमाएँ (चेक द्वारा निकाली जाने वाली जमाएँ) मान लीजिए 10,000 रुपये हैं तो इसका अर्थ यह है कि अर्थव्यवस्था में मुद्रा की पूर्ति में वाणिज्यिक बैंकों की नकद जमा की तुलना में दस गुणा वृद्धि हो जाएगी। इसलिए माँग जमा को मुद्रा का रूप कहा जाता है।
19.'मितव्ययिता का विरोधाभास' की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: मितव्ययिता के विरोधाभास से अभिप्राय यह है कि यदि अर्थव्यवस्था के सभी लोग अपनी आय से बचत के अनुपात को बढ़ा दें तो अर्थव्यवस्था में बचत के कुल मूल्य में वृद्धि नहीं होगी। इसका कारण यह है कि सीमांत बचत प्रवृत्ति के बढ़ने से सीमांत उपभोग प्रवृत्ति कम हो जाती है। और निवेश गुणक भी कम हो जाता है। फलस्वरूप आय में वृद्धि की दर भी कम हो जाती है। इस प्रकार बचत बढ़ाने से कुल बचत का बढ़ना आवश्यक नहीं है। नीचे दिए चित्र में स्पष्ट है
कि सीमांत उपभोग प्रवृत्ति के कम SS से S1S1 पर खिसक गया। फलस्वरूप राष्ट्रीय आय भी घटकर Oy1 से 0y2 हो जाती है। जिससे बचत फिर कम हो जाएगी। इस प्रकार बचत में वृद्धि नहीं हो सकेगी। मितव्ययिता से हम आय बढ़ाना चाहते थे, परंतु यह विरोधाभास है कि इससे आय बढ़ने की बजाय कम हो गई।