झारखण्ड अधिविद्य परिषद्
ANNUAL INTERMEDIATE EXAMINATION - 2026
ECONOMICS (Optional) Arts
General
Instructions / सामान्य निर्देश
1.
इस प्रश्न-पुस्तिका में दो भाग भाग-A तथा भाग-B
2.
भाग-A में 30 अंक के बहुविकल्पीय प्रश्न तथा भाग-B में 50 अंक के
विषयनिष्ठ प्रश्न हैं।
3.
परीक्षार्थी को अलग से उपलब्ध कराई गई उत्तर-पुस्तिका
में उत्तर देना है।
4.
भाग-A - इसमें
30 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं जिनके 4 विकल्प
(A, B, C तथा D')
हैं। परीक्षार्थी को उत्तर-पुस्तिका
में सही उत्तर लिखनी है। सभी प्रश्न अनिवार्य हैं। प्रत्येक प्रश्न 1 अंक
का है। गलत उत्तर के लिए कोई अंक काटा नहीं जाएगा।
5. भाग-B - इस भाग
में तीन खण्ड-A, B तथा C हैं। इस भाग में अति लघु उत्तरीय, लघु उत्तरीय तथा दीर्घ उत्तरीय
प्रकार के विषयनिष्ठ प्रश्न हैं। कुल प्रश्नों की संख्या 22 है।
खण्ड-A - प्रश्न संख्या 31-38 अति लघु
उत्तरीय हैं। किन्हीं 6 प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक प्रश्न 2 अंक का है।
खण्ड-B - प्रश्न संख्या 39-46 लघु उत्तरीय हैं। किन्हीं 6 प्रश्नों
के उत्तर दें। प्रत्येक प्रश्न 3 अंक का है। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर अधिकतम 150
शब्दों में दें।
खण्ड-C - प्रश्न संख्या 47-52 दीर्घ उत्तरीय हैं। किन्हीं 4 प्रश्नों
के उत्तर दें। प्रत्येक प्रश्न 5 अंक का है। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर अधिकतम 250
शब्दों में दें।
6. परीक्षार्थी यथासंभव अपने शब्दों में ही उत्तर दें।
7. परीक्षार्थी परीक्षा भवन छोड़ने के पहले अपनी उत्तर
पुस्तिका वीक्षक को अनिवार्य रूप से लौटा दें।
8. परीक्षा समाप्त होने के उपरांत परीक्षार्थी प्रश्न-पुस्तिका अपने साथ लेकर जा सकते
हैं।
भाग-A (बहुविकल्पीय प्रश्न)
प्रश्न
संख्या 1 से
30 तक
बहुविकल्पीय प्रकार हैं। प्रत्येक प्रश्न के चार विकल्प हैं। सही विकल्प चुनकर
उत्तर पुस्तिका में लिखें। प्रत्येक प्रश्न 1
अंक का है। 1x30=30
1. निम्नलिखित में से कौन
अर्थव्यवस्था की एक केन्द्रीय समस्या है ?
(A)
कैसे बचत हो ?
(B)
कैसे उपभोग हो ?
(C)
कैसे निवेश हो ?
(D) किसके लिए उत्पादन हो ?
2. अर्थशास्त्र
में व्यष्टि और समष्टि शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम किस अर्थशास्त्री ने किया था ?
(A) एडम
स्मिथ
(B) रैग्नर
फ्रिश
(C) माल्थस
(D)
मार्शल
3. एक
किसान खेतों की जुताई के लिए ट्रैक्टर और हल-बैल के बीच किसी एक तकनीक का चयन करता
है। उसका यह चयन अर्थव्यवस्था के किस केन्द्रीय समस्या से मेल खाता है ?
(A) क्या
उत्पादन करें ?
(B) कैसे उत्पादन करें ?
(C) किसके लिए उत्पादन करें ?
(D) कितनी मात्रा में उत्पादन करें ?
4. किस
अर्थशास्त्री के अनुसार उपयोगिता को मुद्रा में मापा जा सकता है ?
(A) रॉबिन्स
(B) मार्शल
(C) एडम स्मिथ
(D)
वालरस
5. एक
व्यक्ति 4 गोलगप्पे का उपभोग है। उसे प्रत्येक व्यक्तिगत इकाई से क्रमशः 15
यूटिल्स, 12 यूटिल्स, 10 यूटिल्स तुथा 8 यूटिल्स उपयोगिता मिलती है, तो उसे 4
गोलगप्पे के उपभोग से कुल कितनी उपयोगिता प्राप्त होगी ?
(A) 35 यूटिल्स
(B)
30 यूटिल्स
(C) 45 यूटिल्स
(D)
37 यूटिल्स
6. यदि
वस्तु X की कीमत कम होने से वस्तु Y की माँग कम हो जाती है तो इन दो वस्तुओं को क्या कहा जाएगा ?
(A) प्रतियोगी वस्तुएँ
(B)
पूरक वस्तुएँ
(C) घटिया वस्तुएँ
(D)
असंबंधित वस्तुएँ
7. यदि
किसी वस्तु की कीमत में 5% की कमी होने से उसकी माँग मात्रा में 8% की वृद्धि होती है तो माँग की कीमत लोच का मान होगा ?
(A) 1.6
(B) 40
(C) 0.67
(D)
13
8. एक
उत्पादन फलन Q= f (L,K) में Q क्या
प्रदर्शित करता है ?
(A) दो वस्तुओं का संयोग
(B) दो
साधनों का संयोग
(C) उत्पादन की अधिकतम मात्रा
(D) उत्पादन
की न्यूनतम लागत
9. परिवर्तनशील
अनुपातों का नियम उत्पादन के कितने स्तर की व्याख्या करता है ?
(A) 1
(B) 2
(C) 3
(D)
4
10. निम्नलिखित
में से कौन स्थिर लागत का एक उदाहरण है ?
(A) स्थायी कर्मचारी का वेतन
(B)
प्रति इकाई बिजली बिल
(C) दैनिक मजदूर की मजदूरी
(D)
कच्चे माल पर व्यय
11. मुक्त
प्रवेश और निकास की स्थिति में एक पूर्ण प्रतियोगी बाजार में संतुलन कीमत के बराबर
होती है।
(A) न्यूनतम कुल लागत
(B) न्यूनतम
औसत लागत
(C) न्यूनतम सीमान्त लागत
(D)
अधिकतम लागत
12. एक
उत्पादक का उद्देश्य क्या होता है
(A) लाभ अधिकतम करना
(B) लागत
अधिकतम करना
(C) आगम
अधिकतम करना
(D) लाभ न्यूनतम करना
13. किस
प्रकार की बाजार संरचना में किसी वस्तु का एक और केवल एक उत्पादक होता है ?
(A) एकाधिकार
(B)
अपूर्ण प्रतियोगिता
(C) पूर्ण प्रतियोगिता
(D) अल्पाधिकार
14. एक
विक्रेता को 5 रु० प्रति इकाई कीमत पर किसी वस्तु की 60 इकाई की बिक्री से प्राप्त
कुल आगम की राशि क्या होगी ?
(A) 65 रु०
(B)
12 रु०
(C) 300
रु०
(D)
55 रु०
15. उत्पादन
कर में वृद्धि से, किसी वस्तु की पूर्ति
(A) स्थिर
रहती है
(B)
वृद्धि होती है
(C) कमी
होती है
(D) इनमें से कोई नहीं
16. निम्नलिखित
में से कौन एक समष्टिगत आर्थिक एजेंट है ?
(A) एक
उपभोक्ता
(B)
एक उत्पादक
(C) एक
दुकानदार
(D) बैंक
17. "पूर्ति अपने लिए माँग का सृजन स्वयं कर लेती है।" यह
किसने कहा ?
(A) जे. बी. से
(B)
एडम स्मिथ
(C)
मार्शल
(D)
पीगू
18. निम्नलिखित
में से किस चर का संबंध समय के एक निश्चित बिन्दु से होता है ?
(A) वस्तु
(B)
प्रवाह
(C) स्टॉक
(D) इनमें से कोई नहीं
19. GNP और NNP में क्या संबंध है ?
(A)
GNP = NNP - घिसावट
(B)
NNP = GNP + घिसावट
(C) NNP = GNP - घिसावट
(D)
GNP = GDP + घिसावट
20. स्टॉक चर का एक उदाहरण
है
(A) मुद्रास्फीति
(B) पूँजी
(C) आय
(D)
व्यय
21. जीडीपी
की गणना की किस विधि में अंतिम वस्तुओं के मौद्रिक मूल्य को शामिल किया जाता है ?
(A) उत्पाद विधि
(B) आय
विधि
(C) व्यय
विधि
(D) इनमें
से सभी
22. किसने
कहा, "मुद्रा वह है जो मुद्रा का कार्य करे" ?
(A) रॉबर्टसन
(B)
जे. एम. केन्स
(C) हार्टले
विदर्स
(D) मार्शल
23. यदि
केन्द्रीय बैंक वैधानिक तरलता अनुपात को बढ़ा दे तो व्यावसायिक बैंकों को ऋण देने की
क्षमता में
(A) वृद्धि
होती है
(B) कमी होती है
(C) कोई
परिवर्तन नहीं होता
(D) वृद्धि या कमी हो सकती है।
24. भारत
का केन्द्रीय बैंक है
(A) सेंट्रल बैंक ऑफ इण्डिया
(B) भारतीय
रिजर्व बैंक
(C) बैंक ऑफ इण्डिया
(D)
भारतीय स्टेट बैंक
25. ब्याज
दर में वृद्धि होने से मुद्रा की किस माँग में कमी होती है ?
(A) दैनिक
लेनदेन माँग
(B)
मुद्रा की आपातकालीन माँग
(C) आड़ी माँग
(D) सट्टेबाजी
माँग
26. उपभोग
फलन C = A + bY में स्वायत्त उपभोग है
(A) C
(B) A
(C) B
(D) bY
27. भारत
में निम्नलिखित में से किस उत्पाद को जीएसटी से बाहर रखा गया है ?
(A) तंबाकू उत्पाद
(B) लेखन
सामग्री
(C) आभूषण
(D) पेट्रोलियम उत्पाद
28. यदि
MPC = 0.6
है तो MPS मान क्या होगा ?
(A) 0.2
(B) 0.4
(C) 0.6
(D) 1.6
29. व्यापार
संतुलन का अर्थ होता है
(A) वस्तुओं के आयात एवं निर्यात से
(B) पूँजी के लेनदेन से
(C) कुल डेबिट तथा क्रेडिट से
(D) इनमें से सभी
30. भुगतान
शेष का घटक है
(A) चालू
खाता
(B) पूँजी खाता
(C) (A) और (B) दोनों
(D) इनमें
से कोई नहीं
भाग-B (विषयनिष्ठ प्रश्न)
खण्ड - A (अति लघु उत्तरीय प्रश्न)
किन्हीं छः प्रश्नों के उत्तर दें। 2x6-12
31. पूँजीवादी
अर्थव्यवस्था को परिभाषित कीजिए।
उत्तर-
पूँजीवादी अर्थव्यवस्था, वह आर्थिक प्रणाली है, जहाँ उत्पादन के साधनों का निजी स्वामित्व
होता है, वस्तु का उत्पादन लाभ-प्राप्ति की दृष्टि से किया जाता है तथा आर्थिक क्रियाओं
सरकारी हस्तक्षेप नहीं होता है।
32. स्थानापन्न
वस्तु से आप क्या समझते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
स्थानापत्र वस्तु ऐसी वस्तुएं होती है जो एक दूसरे के स्थान पर प्रयोग की जाती है।
जैसे चाय और कॉफी, चावल और रोटी।
33. बजट
रेखा का क्या अर्थ है ?
उत्तर-
बजट रेखा दी वस्तुओं के उन सभी संयोजनों को दर्शाती है जो
उपभोक्ता दी हुई आय तथा दो वस्तुओं की दी हुई बाज़ार कीमतों पर खरीद सकता है।
34. बाजार
में पूर्ति आधिक्य की स्थिति कब उत्पन्न होती है ?
उत्तर-
“जब किसी निश्चित मूल्य पर बाजार में उत्पादकों द्वारा
लाई गई वस्तु की मात्रा, उपभोक्ताओं
द्वारा खरीदी जाने वाली मात्रा से अधिक होती है,
तो उसे पूर्ति आधिक्य कहा जाता है।”
पूर्ति आधिक्य कब उत्पन्न होता है-
1. मूल्य- संतुलन
मूल्य से अधिक हो
2. मांग
में कमी
3. अधिक
उत्पादन
4. भविष्य
में मूल्य बढ़ने की आशा
35. राष्ट्रीय
आय को परिभाषित करें।
उत्तर- राष्ट्रीय आय का अर्थ है एक देश के सभी निवासियों द्वारा एक वर्ष की अवधि में अर्जित कुल साधन ( कारक ) आय का जोड़।
`NY=\sum_{i=1}^nFY_i`
यहां NY = राष्ट्रीय आय , ∑ = कुल जोड़ , FY = कारक आय ( मजदूरी ,लगान , व्याज , लाभ ) , n = एक देश के सभी सामान्य निवासी।
36. साधन
आय से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर-
उत्पादन के साधन लगान मजदूरी ब्याज तथा लाभ के रूप में अपना पारिश्रमिक प्राप्त
करते हैं जिन्हें उनकी साधन आय कहते हैं।
37. समग्र
पूर्ति को परिभाषित करें।
उत्तर- समग्र पूर्ति से तात्पर्य एक अर्थव्यवस्था में एक निश्चित समयावधि
(सामान्यतः एक वर्ष) के दौरान उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य से है,
जिसे उत्पादक या फर्में बाजार में बेचने के लिए तैयार होती हैं।
38. बजट
क्या है?
उत्तर-
बजट एक वित्तीय वर्ष (अप्रैल
1 से मार्च 31 तक)
की अवधि के दौरान सरकार की प्राप्तियों
(आय) तथा सरकार के व्यय
के अनुमानों का विवरण होता है।
खण्ड - B (लघु उत्तरीय प्रश्न)
किन्हीं छः प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक प्रश्न का
उत्तर अधिकतम 150 शब्दों में दें। 3x6-18
39. अल्पकाल
और दीर्घकाल में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
|
आधार |
अल्पकाल |
दीर्घकाल |
|
(1) परिभाषा |
यह एक ऐसी समयावधि है जो स्थिर साधनों में परिवर्तन
लाने के लिए आवश्यक समय से कम होती है। |
यह एक ऐसी समयावधि है जिसमें उत्पादक
आवश्यकता अनुसार उत्पादन के समस्त साधनों में परिवर्तन कर सकता है। |
|
(2) कीमत पर प्रभाव |
इस अवधि में कीमत के निर्धारण में मांग
का अधिक प्रभाव रहता है। |
इस अवधि में कीमत पर मांग
की तुलना में पूर्ति का अधिक प्रभाव रहता है। |
|
(3) उत्पादन की मात्रा |
इस अवधि में उत्पादन की
मात्रा केवल परिवर्ती साधन की मात्रा बढ़ाकर ही संभव है। |
इस अवधि में उत्पादन की
मात्रा स्थिर और परिवर्ती दोनों प्रकार के साधनों में वृद्धि करके बढ़ाई जा सकती
है। |
|
(4) वर्गीकरण |
इस अवधि में उत्पादन साधनों
को दो भागों में वर्गीकृत किया जाता है - स्थिर साधन , परिवर्तनशील साधन |
इस अवधि में स्थिर व परिवर्ती
साधनों के बीच अंतर समाप्त हो जाता है। |
40. सीमांत
उपयोगिता तथा कुल उपयोगिता में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
कुल उपयोगिता :- उपभोक्ता
द्वारा उपयोग की जाने वाली वस्तु की सभी इकाइयों से प्राप्त
उपयोगिता के संपूर्ण योग को कुल उपयोगिता कहते हैं।
TU = ΣMU
सीमांत
उपयोगिता :- किसी वस्तु की एक अतिरिक्त इकाई का उपभोग बढ़ाने पर कुल उपयोगिता में जितन
वृद्धि होती है उसे वस्तु की सीमांत उपयोगिता कहते हैं।
MU = TUn - TUn-1
कुल
उपयोगिता तथा सीमांत उपयोगिता में
संबंध
|
मात्रा |
कुल
उपयोगिता |
सीमांत
उपयोगिता |
वर्णन |
|
0 |
0 |
- |
आरंभिक
उपयोगिता |
|
1 |
8 |
8-0
=8 |
|
|
2 |
14 |
14-8
=6 |
|
|
3 |
18 |
18-14
=4 |
धनात्मक
उपयोगिता |
|
4 |
20 |
20-18
=2 |
|
|
5 |
20 |
20-20
=0 |
शून्य
उपयोगिता |
|
6 |
18 |
18-20
=-2 |
ऋणात्मक
उपयोगिता |
चित्र
और तालिका
से निम्न बातें स्पष्ट है -
i.
जब सीमांत उपयोगिता गिरती है तब कुल उपयोगिता में घटती
दर पर वृद्धि होती है।
ii.
जब सीमांत उपयोगिता शून्य
होती है तब कुल उपयोगिता अधिकतम होती है।
iii.
जब सीमांत उपयोगिता ऋणत्मक होती
है तब कुल उपयोगिता गिरना शुरू हो जाती है।
41. कुल
आगम तथा सीमांत आगम क्या हैं ?
उत्तर-
कुल आगम (Total
Revenue)- उत्पादित वस्तुओं की कुल मात्रा की बिक्री से उत्पादक को
जो आय प्राप्त होता है उसे कुल आगम
कहतें हैं।
कुल आगम
= वस्तु की कीमत x बिक्री इकाइयां
Total Revenue = Price x Quantity
TR = P x Q
उदाहरण के लिए, यदि एक विक्रेता वस्तु की एक इकाई ₹10 में
बेचता है और यदि वह कुल 100 इकाइयां बेचता है तब इस स्थिति में,
कुल आगम
= वस्तु की कीमत x बिक्री इकाइयां
= 10 × 100 = 1000 रुपये
सीमांत आगम
(Marginal Revenue)- किसी वस्तु की एक अतिरिक्त इकाई की बिक्री से कुल
आय में जो वृद्धि होती है उसे सीमांत आगम कहतें हैं।
MR = TRn -TRn-1
`MR=\frac{\Delta TR}{\Delta Q}`
जहाँ, ΔTR = कुल आगम में परिवर्तन
ΔQ = बेची गयी मात्रा में
परिवर्तन
42. एकाधिकार की तीन मुख्य विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर-
एकाधिकार की मुख्य विशेषताएं:-
1. एक विक्रेता तथा बड़ी संख्या में क्रेता :- एकाधिकार में
केवल एक विक्रेता होता है जिसका पूर्ति पर नियंत्रण होता है। एकाधिकारी बाजार की
स्वरूप में फर्म तथा उद्योग में कोई अंतर नहीं होता। फर्म ही उद्योग होता है
क्योंकि उद्योग में किसी और फर्म को प्रवेश नहीं करने दिया जाता। परंतु, क्रेता की
संख्या अधिक होती है,
कोई अकेला क्रेता बाजार को प्रभावित नहीं कर पाता।
2. निकट प्रतिस्थापन का अभाव एकाधिकारी द्वारा वस्तु के
उत्पादन के लिए कोई निकट प्रतिस्थापन नहीं होता । एक एकाधिकारी एक निश्चित बाजार
में सभी उत्पादों का उत्पादन करता है। एकाधिकारी ही कीमत निर्धारक होता है। परंतु, कीमत तथा मांगी
गई मात्रा दोनों पर एक साथ नियंत्रण नहीं रख सकता है, यदि वह ऊंची
कीमत का निर्धारण करता है,
तो कम मात्रा की मांग की जाती है।
3. नई फर्म के प्रवेश पर प्रतिबंध : एकाधिकार बाजार में फर्म
तथा उद्योग में कोई अंतर नहीं होता क्योंकि इस बाजार में किसी नई फर्म को उद्योग
में प्रवेश नहीं करने दिया जाता है।
4. कीमत विभेद : एकाधिकारी अपनी वस्तु की विभिन्न इकाइयों के
लिए अलग-अलग कीमतें प्राप्त कर सकता है। उसका विभिन्न क्रेता से उसी वस्तु की
विभिन्न इकाइयों के लिए अलग-अलग कीमत तो प्राप्त करना कीमत विभेद कहलाता है। वह
अपनी वस्तु की विभिन्न बाजारों में से अलग-अलग कीमतें वस्तु की मूल्य लोच के आधार
पर प्राप्त करता है। वस्तु की मूल्य होने पर वस्तु की अधिक कीमत प्राप्त करेगा।
5. स्वतंत्र कीमत उत्पादन नीति एकाधिकारी फर्म की एक अपनी
स्वतंत्र कीमत- उत्पादन नीति होती है कोई और फर्म इसे इस तरह की निर्णय करने के
लिए मजबूर नहीं कर सकती। वह अपनी संपूर्ण बिक्री के लिए स्वतंत्र कीमत उत्पादन
नीति अपनाती है।
43. अंतिम
वस्तु तथा मध्यवर्ती वस्तु में अंतर स्पष्टि कीजिए।
उत्तर-
|
अन्तिम वस्तुएं |
मध्यवर्त्ती वस्तुएं |
|
अन्तिम
वस्तुएं वे वस्तुएं हैं
जिन्होंने उत्पादन की सीमा रेखा को पार कर
लिया है। |
मध्यवर्त्ती
वस्तुएं वे वस्तुएं हैं जो
अभी उत्पादन की सीमा रेखा में ही है। |
|
इनमें
कोई मूल्य जोड़ना शेष नहीं है। |
मध्यवर्त्ती
वस्तुओ में मूल्य जोड़ना शेष रहता
है। |
|
अंतिम
उपभोग करने वालों (जिनमें
उपभोक्ता तथा उत्पादक सम्मिलित होते हैं) के लिए तैयार
होती है। |
अंतिम
उपभोग करने के लिए तैयार नहीं रहती। |
|
राष्ट्रीय
आय का अनुमान लगाने के लिए अंतिम वस्तुओं को सम्मिलित किया
जाता है। |
राष्ट्रीय
आय का अनुमान लगाने के लिए सम्मिलित नहीं किया जाता है। |
44. GNP की गणना करने में किन मदों को शामिल नहीं किया जाता है ?
उत्तर- सकल राष्ट्रीय उत्पाद एक
देश की घरेलू सीमा में सामान्य निवासियों
द्वारा एक लेखा वर्ष में उत्पादित अंतिम वस्तुओं तथा सेवाओं के बाजार मूल्य के अतिरिक्त
विदेशों से प्राप्त निवल कारक आय तथा
स्थाई पूंजी के उपभोग का जोड़ है। इसमें
निम्न कार्यों को अपवर्जित माना गया है -
1. गैर कानूनी क्रियाओं से प्राप्त आय जैसे - जुआ
2. काला धन या वह आय
जो उत्पादकों के खातो
मे दिखाई
नहीं जाती
3. हस्तांतरण भुगतान जैसे - वृद्धावस्था
पेंशन
4. मौद्रिक लेन-देनो
से आय जैसे
शेयरों तथा डिबेंचरो से
5. पुरानी किताबों का मूल्य
6. स्व उपभोग सेवाएं,
जैसे डाॅक्टर द्वारा अपनी पत्नी का इलाज
चूंकि ये सभी अनार्थिक क्रिया है अतः यह राष्ट्रीय आय में
शामिल नहीं होगा।
45. दोहरी
गणना का क्या अर्थ है ? इस समस्या का समाधान कैसे किया जा सकता है ?
उत्तर- उत्तर :- दोहरी गणना से अभिप्राय
है किसी वस्तु के मूल्य की गणना एक बार से अधिक करना। इसका कारण
यह है कि यद्यपि उत्पाद विधि
द्वारा राष्ट्रीय आय का
अनुमान लगाने के
लिए केवल अन्तिम वस्तुओं और
सेवाओं के मूल्य को जोड़ा जाता है। इसके फलस्वरूप राष्ट्रीय उत्पाद
में अनावश्यक रूप से वृद्धि हो जाती है।
जैसे- उत्पाद का मूल्य = किसान
400 में आटा,
बेकरी वाला 600 में
मैदा दुकानदार 800 रुपये
में डबलरोटी तथा उपभोक्ता को 900 रुपये
में समान प्राप्त होगी। इस तरह एक ही समान
( गेहूं ) का
मूल्य 2700 रु.
तक हो जाऐगा। इसके फलस्वरूप राष्ट्रीय
उत्पाद में अनावश्यक रूप से वृद्धि हो
जाती है।
दोहरी गणना की गलती से बचने के
दो उपाय है -
1. अन्तिम उत्पाद विधि :- इस
विधि के अनुसार दोहरी गणना की गलती से बचने के लिए उत्पादन
के मूल्य में
से मध्यवर्ती वस्तुओं के मूल्य को घटा दिया जाता है
अन्तिम वस्तु का मूल्य = उत्पाद मूल्य - मध्यवर्ती वस्तुओं का मूल्य
2. मूल्य वृद्धि विधि
:- मूल्य वृद्धि की गणना करने के लिए किसी
उत्पादन के मूल्य में
से उसकी लागत को घटा दिया जाता है।
46. सीमांत
उपभोग की प्रवृत्ति तथा सीमांत बचत की प्रवृत्ति के बीच संबंध की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
आय में होने वाले परिवर्तन के फलस्वरुप उपभोग में होने वाले परिवर्तन के अनुपात को सीमांत
उपभोग प्रवृत्ति कहते हैं।
`MPC=\frac{\Delta C}{\Delta Y}`
∆C = उपभोग में परिवर्तन , ΔY = आय में परिवर्तन
आय में होने वाले परिवर्तन (∆Y) के कारण बचत में होने वाले परिवर्तन (∆C) के अनुपात को सीमांत बचत प्रवृत्ति (MPS) कहते हैं।
`MPS=\frac{\Delta S}{\Delta Y}`
ΔS = बचत में परिवर्तन ,
ΔY = आय में परिवर्तन
सीमांत उपभोग प्रवृत्ति (MPC) तथा सीमांत बचत प्रवृत्ति (MPS) के सम्बंध को निम्नलिखित समीकरण की सहायता से स्पष्ट किया जा सकता है।
हम जानते हैं कि ΔY = ΔC + ΔS
`\therefore MPC+MPS=\frac{\Delta C}{\Delta Y}+\frac{\Delta S}{\Delta Y}`
`=\frac{\Delta C+\Delta S}{\Delta Y}+\frac{\Delta Y}{\Delta Y}=1`
⸫ MPC + MPS = 1
MPC = 1 - MPS
MPS = 1 - MPC
समीकरण से स्पष्ट है कि सीमांत बचत प्रवृत्ति तथा सीमांत उपभोग प्रवृत्ति का योग सदैव 1 के बराबर होता है।
MPS
तथा MPC के उपर्युक्त संबंध से स्पष्ट है कि आय के दो मुख्य कार्य है
- उपभोग तथा बचत। उपभोग और बचत मिलकर
आय के बराबर होते हैं।
खण्ड -C (दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)
किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक प्रश्न कसे
उत्तर अधिकतम 250 शब्दों में दें। 5
x 4-20
47. माँग
की कीमत लोच से आप क्या समझते हैं? इसे कैसे मापा जाता है ?
उत्तर- प्रो. बोर्डिंग के अनुसार," किसी वस्तु के मूल्य में प्रतिशत परिवर्तन के फलस्वरूप उसकी मांग मात्रा में जो प्रतिशत परिवर्तन होता है उसे मांग की लोंच कहते हैं।"
मांग की लोंच की माप
1. कुल व्यय प्रणाली :- इस विधि का प्रयोग मार्शल ने किया था इस विधि द्वारा यह पता लगाया जाता है की मांग की लोच इकाई से ज्यादा ,इकाई के बराबर है अथवा इकाई से कम है।
चित्र से, कुल व्यय = मूल्य × मात्रा
वस्तु पर किया गया कुल व्यय = OP × OQ = OQRP
नई कीमत पर कुल व्यय = OP1 × OQ1 = OQ1R1P1
कीमत बदलने पर कुल व्यय बढ़ेगा या घटेगा, यह मांग की मूल्य लोच पर निर्भर करता है।
मूल्य लोच | कीमत घटने पर | कीमत बढ़ने पर |
ep >1 | कुल व्यय बढ़ता है | कुल व्यय घटता है |
ep < 1 | कुल व्यय घटता है | कुल व्यय बढ़ता है |
ep =1 | कुल व्यय स्थिर रहता है | कुल व्यय स्थिर रहता है |
2. प्रतिशत प्रणाली :- प्रो. फ्लक्स ने इस प्रणाली का सर्वप्रथम प्रयोग किया
मांग की लोंच = (-) मांग में प्रतिशत परिवर्तन / मूल्य में प्रतिशत परिवर्तन
`=(-)\frac{\Delta Q}{\Delta P}\times\frac PQ`
यदि भागफल 1 आता है तो मांग की लोंच इकाई के बराबर होता है। यदि भागफल 1 से अधिक आता है तो मांग की लोंच इकाई से अधिक होती है और यदि भागफल 1 से कम आता है तो मांग की लोंच इकाई से कम होती है।
3. बिन्दु प्रणाली या ज्यामितिक विधि :-
1. मांग की इकाई लोच :- यदि P बिन्दु रेखा के मध्य में स्थित है तो PN = PM इसलिए P बिन्दु पर मांग की लोच = `\frac{PN}{PM}`1 होगी।
2. इकाई से अधिक या लोचदार मांग :- यदि A बिन्दु मध्य बिन्दु P से ऊपर है तो निचला हिस्सा AN ऊपर के हिस्से AM से अधिक होगा। इसलिए A बिन्दु पर मांग की लोंच =`\frac{AN}{AM}`> 1 होगी।
3. इकाई से कम या बेलोचदार मांग :- यदि B बिन्दु P से नीचे है तो निचला हिस्सा BN ऊपर के हिस्से BM से कम होगा। इसलिए B बिन्दु पर मांग की लोंच =`\frac{BN}{BM}`< 1 होगी।
4. ep= 0 :- N बिन्दु पर मांग की लोंच = `\frac0{NM}` = 0
5. ep= `\infty` :- M बिन्दु पर मांग की लोंच = `\frac{NM}0=\infty`
4. चाप प्रणाली :- प्रो. स्टिगलर ने अपनी पुस्तक ' The Theory of Price' में बिन्दु प्रणाली को गणितीय फलनो तक सीमित ज्ञान कर मांग की लोंच की माप के लिए चाप प्रणाली का प्रयोग किया । इसमें नए एवं पुराने मूल्यों के औसत के आधार पर मांग की मूल्य लोंच की माप की जाती है।
`E_p=(-)\frac{\Delta Q}{\frac{Q_1+Q_2}2}\div\frac{\Delta P}{\frac{P_1+P_2}2}`
`=(-)\frac{\Delta Q}{\Delta P}\div\frac{P_1+P_2}{\Q_1+Q_2}`
48. यदि
एक फर्म का उत्पादन फलन Q = L0.5 K0.5 है, तो श्रम (L) की 36 इकाई तथा पूँजी (K) की 49 इकाई के नियोजन से वस्तु की कितनी इकाई का अधिकतम उत्पादन
संभव है ?
उत्तर-
दिया गया उत्पादन फलन:
Q = L0.5 K0.5
यहाँ: श्रम (L) = 36 इकाई
पूँजी (K) = 49 इकाई
समीकरण में मान रखने पर: Q
= (36)0.5 (49)0.5
चूँकि घात 0.5 का अर्थ वर्गमूल (Square Root) होता है,
इसलिए: `Q=\sqrt{36}\sqrt{49}`
Q
= (6) (7) = 42
श्रम की 36 इकाई और पूँजी की 49 इकाई के नियोजन से वस्तु की अधिकतम 42
इकाइयों का उत्पादन संभव है।
49. पैमाने
का प्रतिफल से आप क्या समझते हैं कब एक उत्पादन फलन पैमाने का स्थिर प्रतिफल तथा
पैमाने का बढ़ते प्रतिफल को कब संतुष्ट करता हैं? उदाहरण द्वारा स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर-
पैमाने का प्रतिफल
दीर्घकालीन उत्पादन फलन को प्रदर्शित करता है।साधनों के पैमाने में परिवर्तन के फलस्वरुप
उत्पादन में जो परिवर्तन होता है उसे पैमाने का प्रतिफल कहते हैं।
उत्पादन के साधनों के निरपेक्ष इकाई में
इस प्रकार वृद्धि की जाए कि साधनों का अनुपात स्थिर रहे तो इसका अर्थ होता है कि पैमाने
में वृद्धि की गई है।
इस
रेखा चित्र में OR उत्पादन की रेखा है। यह बताता है कि इसके प्रत्येक
बिंदु पर साधन का अनुपात स्थिर रहता है।
`\frac{AK_1}{OK_1}=\frac{BK_2}{OK_2}`
अर्थात
सभी साधनों को X गुना बढ़ाया जाए तो साधनों का अनुपात स्थिर होगा।
पैमाने
के प्रतिफल के नियम
(1)
पैमाने का वृद्धिमान प्रतिफल :- उत्पादन के सभी साधनों
को जिस अनुपात में बढ़ाया जाता है उत्पादन में अगर उससे अधिक अनुपात में वृद्धि हो
तो उसे पैमाने का विद्धिमान प्रतिफल कहा जाता है।
Y = f ( a, b, c.........)
जहां
, Y = उत्पादन f = फलन a,b,c............= साधन
Xα.y
= f (na,nb,nc...........)
अगर
वस्तु α >1 हो तो यह पैमाने का
वृद्धिमान प्रतिफल प्रदर्शित करेगा। रेखा चित्र में हर अगले सम उत्पाद वक्र (IQ) के
बीच की दूरी क्रमशः घटती जाती है जो दर्शाता है कि साधन जिस अनुपात में बढ़ता है उत्पादन
उससे अधिक अनुपात में बढ़ता है।
BC < AB < OA
पैमाने के वृद्धिमान प्रतिफल के कारण :-
a. तकनीकी बचत
b. श्रम संबंधी बचत
c. वित्तीय बचत
d. विपणन मितव्ययिता
e. शोध,प्रयोग एवं विज्ञापन से लाभ
(2)
पैमाने के स्थिर प्रतिफल :- जिस अनुपात में साधनों
को बढ़ाया जाता है ठीक उसी अनुपात में उत्पादन में वृद्धि होती है तो इसे पैमाने का
स्थिर प्रतिफल करते हैं।
Xα.y
= f (na,nb,nc...........)
अगर
वस्तु α =1 हो तो यह पैमाने का स्थिर
प्रतिफल प्रदर्शित करेगा।
चित्र में हर अगले सम उत्पाद वक्र की दूरी समान रहती है जो दर्शाता है कि जिस अनुपात में साधन लगता है उत्पादन उसी अनुपात में होता है।
OA=AB=BC
पैमाने के स्थिर प्रतिफल के कारण :-
A. आंतरिक एवं बाह्य बचत आंतरिक एवं बाह्य हानियों के बराबर होता है।
B. एक फार्म के विस्तार से कुछ सीमा तक पैमाने के बढ़ते प्रतिफल की अवस्था के बाद पैमाने के स्थिर प्रतिफल की एक लम्बी अवस्था होती है।
C.
कॉब-डग्लस उत्पादन फलन :- कॉब-डग्लस के अनुसार अधिकांश
उद्योगों पर लंबे समय तक पैमाने के स्थिर प्रतिफल लागू होता है।
Q = K La C1-a
= K (gL)a (gC)1-a
= K gaLa g1-aC1-a
= ga+1-a K La C1-a
= g (KLa C1-a)
= g (Q)
इस प्रकार साधनों को g गुणा बढ़ाने से उत्पादन भी g गुणा बढ़ता है जो पैमाने के स्थिर प्रतिफल को दर्शाता है।
(3) पैमाने का ह्रासमान प्रतिफल :- जिस अनुपात में साधनों में वृद्धि की जाती है उसे कम अनुपात में जब उत्पादन में वृद्धि होती है तो उसे पैमाने का ह्रासमान प्रतिफल कहते हैं।
Xα.y = f(na,nb,nc...........)
अगर वस्तु α < 1 हो तो यह पैमाने का स्थिर प्रतिफल प्रदर्शित करेगा।
चित्र
में हर अगले सम उत्पाद वक्रो की दूरी क्रमशः बढ़ती जाती है। जो दर्शाता है कि जिस अनुपात
में साधनों को लगाया जाता है उत्पादन उससे कम अनुपात में बढ़ता है
OA<AB<BC
ह्रासमान प्रतिफल के कारण :-
A. पैमाने का घटता हुआ प्रतिफल
B. प्राकृतिक साधनों की स्थिर मात्रा
C. आंतरिक एवं बाह्य हानियां
50. क्या
GDP कल्याण का सूचक है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- जीडीपी देश के कल्याण का सही माप नहीं हो सकता है, इस कथन
से मैं सहमत हूँ। इसके कई कारण हैं:
1.
जीडीपी केवल आर्थिक उत्पादन को मापता है- जीडीपी
देश में उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य को मापता है, लेकिन यह देश के नागरिकों
के कल्याण को मापने का एक संकीर्ण तरीका है। यह गैर-आर्थिक कारकों, जैसे कि स्वास्थ्य,
शिक्षा, पर्यावरण और सामाजिक संबंधों को ध्यान में नहीं रखता है, जो सभी मानव कल्याण
के लिए महत्वपूर्ण हैं।
2.
जीडीपी आय वितरण को ध्यान में नहीं रखता है- जीडीपी देश की औसत आय को मापता है, लेकिन यह आय के वितरण को ध्यान में नहीं
रखता है। एक देश में उच्च जीडीपी हो सकता है, लेकिन यदि आय का वितरण असमान है, तो अधिकांश
नागरिकों का जीवन स्तर निम्न हो सकता है।
3.
जीडीपी पर्यावरणीय लागतों को ध्यान में नहीं रखता है- जीडीपी आर्थिक उत्पादन को मापता है, लेकिन यह उत्पादन की
पर्यावरणीय लागतों को ध्यान में नहीं रखता है। उदाहरण के लिए, एक देश में उच्च जीडीपी
हो सकता है, लेकिन यदि यह प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण की कीमत पर हासिल
किया गया है, तो यह देश के दीर्घकालिक कल्याण के लिए हानिकारक हो सकता है।
4.
जीडीपी गैर-बाजार गतिविधियों को ध्यान में नहीं रखता है- जीडीपी केवल बाजार में किए गए लेनदेन को मापता है। यह गैर-बाजार
गतिविधियों, जैसे कि घरेलू काम, स्वयंसेवा और अवैतनिक देखभाल को ध्यान में नहीं रखता
है, जो सभी मानव कल्याण के लिए महत्वपूर्ण हैं।
5.
जीडीपी जीवन की गुणवत्ता को ध्यान में नहीं रखता है- जीडीपी जीवन की गुणवत्ता को मापने का एक अच्छा तरीका नहीं
है। यह कारकों, जैसे कि जीवन प्रत्याशा, शिशु मृत्यु दर, साक्षरता दर और अपराध दर को
ध्यान में नहीं रखता है, जो सभी मानव कल्याण के लिए महत्वपूर्ण हैं।
इन
कारणों से, जीडीपी देश के कल्याण का सही माप नहीं हो सकता है। यह एक उपयोगी संकेतक
है, लेकिन इसका उपयोग अन्य संकेतकों के साथ मिलकर किया जाना चाहिए ताकि देश के नागरिकों
के कल्याण का अधिक व्यापक दृष्टिकोण प्राप्त किया जा सके।
51. समग्र
माँग से आप क्या समझते हैं? समग्र माँग के विभिन्न घटकों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर
- कुल ( समग्र) मांग, वह कुल व्यय है जो लोग एक वित्तीय वर्ष की अवधि के दौरान वस्तुओं
और सेवाओं के खरीदने पर खर्च करने की योजना बनाते हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि
समग्र मांग (AD) को मापने समय हम सदा लोगों द्वारा किए जाने वाले आयोजित व्यय या प्रत्याशित व्यय के संदर्भ में बात करते हैं।
कुल
मांग के प्रमुख घटक निम्नलिखित हैं -
1.
निजी उपभोग व्यय (C) :- इसमें देश के गृहस्थो/परिवारो
द्वारा एक लेखा वर्ष में, सभी वस्तुओं तथा सेवाओं के लिए की गई मांग को शामिल किया
जाता है।
2.
निजी निवेश मांग (I) :- इससे अभिप्राय निजी निवेशकर्ताओं
द्वारा पूंजी पदार्थों की खरीद पर करने वाले व्यय से है।
3
सरकारी व्यय (G) :- इसमें सरकारी उपभोग में व्यय तथा सरकारी
निवेश व्यय दोनों शामिल होते हैं। सरकारी उपभोग व्यय से अभिप्राय है सैन्य/सुरक्षा
प्रयोग के लिए वस्तुओं के उपभोग की खरीद पर खर्च/सरकारी निवेश व्यय से अभिप्राय है
सड़कों,डैमो तथा पुलो के निर्माण पर किया जाने वाला व्यय।
4.
शुद्ध निर्यात (X - M ) :- विदेशियों द्वारा हमारी
वस्तु के लिए किए गए व्यय को अर्थव्यवस्था में कुल व्यय (समग्र मांग) मे जोड़ा जाता
है, जबकि आयात पर किए जाने वाले व्यय को घटाया जाता है। अतः X - M (शुद्ध निर्यात)
को समग्र मांग (AD) में जोड़ा जाता है।
अतः
समग्र मांग के प्रमुख तत्त्व है -
AD
= C + I + G + ( X- M) [ खुली अर्थव्यवस्था में ]
or, AD = C + I
[ बन्द अर्थव्यवस्था में ]
जहां
, AD = समग्र मांग , C = निजी उपभोग व्यय , I = निजी निवेश व्यय ,
G = सरकारी व्यय, X - M = शुद्ध निर्यात
चित्र
में, AD वक्र का बारे से दाये ऊपर की ओर बढ़ना इस बात को दर्शाता हैं कि जैसे-जैसे
आय / रोजगार की मात्रा बढ़ती जाती है, कुल मांग भी बढ़ती जाती है।
52. निजी
विनियोग को प्रोत्साहित करने के विभिन्न उपायों का वर्णन करें।
उत्तर-
निजी विनियोग को प्रोत्साहित करने का अर्थ है ऐसी अनुकूल परिस्थितियाँ बनाना
जिससे निजी उद्यमी और कंपनियाँ नए व्यवसायों और परियोजनाओं में अधिक पैसा लगाने के
लिए प्रेरित हों।
निजी विनियोग को प्रोत्साहित करने के प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं:
1.
करों में कटौती- सरकार निगम कर में कमी करके कंपनियों के पास अधिक शुद्ध लाभ
छोड़ सकती है। जब कंपनियों के पास टैक्स देने के बाद अधिक पैसा बचता है,
तो वे उस पैसे को व्यापार के विस्तार में निवेश करती हैं। साथ
ही, नई इकाइयों
को टैक्स हॉलिडे (कुछ वर्षों तक टैक्स से छूट) देना भी एक प्रभावी उपाय है।
2.
ब्याज दरों में कमी- विनियोग
के लिए उद्यमी अक्सर बैंकों से ऋण लेते हैं। यदि केंद्रीय बैंक (जैसे भारत में RBI)
ब्याज दरों में कमी करता है,
तो ऋण सस्ता हो जाता है। निवेश की लागत कम होने से उद्यमी नए
प्रोजेक्ट्स शुरू करने के लिए प्रोत्साहित होते हैं।
3.
आधारभूत संरचना का विकास- बेहतर
सड़कें, बिजली की निरंतर आपूर्ति, बंदरगाह और डिजिटल कनेक्टिविटी निवेश के लिए आधार तैयार करते
हैं। यदि बुनियादी ढांचा मजबूत है, तो उत्पादन लागत कम आती है और निजी निवेश अपने आप खिंचा चला
आता है।
4.
सरकारी सहायता और सब्सिडी- सरकार
पिछड़े क्षेत्रों में उद्योग लगाने के लिए नकद सहायता या सब्सिडी प्रदान कर सकती है।
उदाहरण के लिए, मशीनों की खरीद पर छूट या बिजली बिल में रियायत देने से निवेशकों का मनोबल बढ़ता
है।
5.
उदार व्यापार नीतियां- लाइसेंसिंग
प्रक्रिया को सरल बनाना और अनावश्यक कानूनी बाधाओं को दूर करना निजी विनियोग को बढ़ाता
है। जब निवेशकों को लगता है कि व्यवसाय शुरू करना और चलाना आसान है,
तो वे अधिक जोखिम लेने को तैयार रहते हैं।
6. माँग में वृद्धि- विनियोग अंततः इस बात पर निर्भर करता है कि बाजार में उपभोक्ता माँग कितनी है। यदि लोगों की आय बढ़ती है और वस्तुओं की माँग तेज होती है, तो उद्यमी उस माँग को पूरा करने के लिए उत्पादन क्षमता बढ़ाने (निवेश करने) के लिए प्रेरित होते हैं।
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