झारखण्ड अधिविद्य परिषद्
ANNUAL INTERMEDIATE EXAMINATION - 2026
ECONOMICS (Optional) Science/Commerce
General Instructions / सामान्य निर्देश
1. इस प्रश्न-पुस्तिका में दो भाग भाग-A तथा भाग-B
2. भाग-A में 30 अंक के बहुविकल्पीय प्रश्न तथा भाग-B में 50 अंक के विषयनिष्ठ प्रश्न हैं।
3. परीक्षार्थी को अलग से उपलब्ध कराई गई उत्तर-पुस्तिका में उत्तर देना है।
4. भाग-A - इसमें 30 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं जिनके 4 विकल्प (A, B, C तथा D') हैं। परीक्षार्थी को उत्तर-पुस्तिका में सही उत्तर लिखनी है। सभी प्रश्न अनिवार्य हैं। प्रत्येक प्रश्न 1 अंक का है। गलत उत्तर के लिए कोई अंक काटा नहीं जाएगा।
5. भाग-B - इस भाग में तीन खण्ड-A, B तथा C हैं। इस भाग में अति लघु उत्तरीय, लघु उत्तरीय तथा दीर्घ उत्तरीय प्रकार के विषयनिष्ठ प्रश्न हैं। कुल प्रश्नों की संख्या 22 है।
खण्ड-A - प्रश्न संख्या 31-38 अति लघु उत्तरीय हैं। किन्हीं 6 प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक प्रश्न 2 अंक का है।
खण्ड-B - प्रश्न संख्या 39-46 लघु उत्तरीय हैं। किन्हीं 6 प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक प्रश्न 3 अंक का है। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर अधिकतम 150 शब्दों में दें।
खण्ड-C - प्रश्न संख्या 47-52 दीर्घ उत्तरीय हैं। किन्हीं 4 प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक प्रश्न 5 अंक का है। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर अधिकतम 250 शब्दों में दें।
6. परीक्षार्थी यथासंभव अपने शब्दों में ही उत्तर दें।
7. परीक्षार्थी परीक्षा भवन छोड़ने के पहले अपनी उत्तर पुस्तिका वीक्षक को अनिवार्य रूप से लौटा दें।
8. परीक्षा समाप्त होने के उपरांत परीक्षार्थी प्रश्न-पुस्तिका अपने साथ लेकर जा सकते हैं।
भाग-A (बहुविकल्पीय प्रश्न)
प्रश्न संख्या 1 से 30 तक बहुविकल्पीय प्रकार हैं। प्रत्येक प्रश्न के चार विकल्प हैं। सही विकल्प चुनकर उत्तर पुस्तिका में लिखें। प्रत्येक प्रश्न 1 अंक का है। 1x30=30
1. निम्नलिखित में से कौन उत्पादन का साधन नहीं है?
(A) भूमि
(B) मुद्रा
(C) श्रम
(D) पूँजी
2. निम्न में से किस इकाई में उपयोगिता को मापा जा सकता है ?
(A) किलोमीटर
(B) लीटर
(C) ग्राम
(D) रुपया
3. निम्न में से पूरक वस्तुओं के उदाहरण हैं
(A) चाय और कॉफी
(B) कलम और स्याही
(C) कलम और जूते
(D) रसगुल्ला और गुलाब जामुन
4. पूर्ण प्रतियोगी बाजार में फर्मों की संख्या होती है
(A) 2
(B) 1
(C) अल्प
(D) अत्यधिक
5. एक फर्म के द्वारा वस्तु की कीमत में 10% की वृद्धि करने पर उसकी पूर्ति की मात्रा 15% बढ़ जाती है तो वस्तु की पूर्ति होगी
(A) पूर्णतया लोचदार
(B) इकाई लोचदार
(C) शून्य लोचदार
(D) लोचदार
6. किसी वस्तु की माँग में वृद्धि होने से संतुलन कीमत पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
(A) संतुलन कीमत में वृद्धि होती है
(B) संतुलन कीमत में कमी होती है
(C) संतुलन कीमत अपरिवर्तित रहती
(D) संतुलन कीमत शून्य हो जाती है
7. बाजार में माँग आधिक्य की स्थिति कब उत्पन्न होती है ? जब
(A) D = S
(B) D > S
(C) S > D
(D) D - S = 0
8. किसी वस्तु की सीमांत उपयोगिता शून्य होने पर कुल उपयोगिता........... होती है।
(A) शून्य
(B) अधिकतम
(C) ऋणात्मक
(D) न्यूनतम
9. सामान्यतः एक सरल रेखा के माँग वक्र की ढाल ऋणात्मक होने का एक कारण है
(A) घटती सीमांत अवसर लागत
(B) प्रतिस्थापन की बढ़ती सीमांत दर
(C) मूल्य प्रभाव, आय प्रभाव तथा प्रतिस्थापन प्रभाव
(D) प्रतिस्थापन की स्थिर सीमांत दर
10. उत्पादन फलन = AL0.6K0.5 किस उत्पादन नियम को प्रदर्शित करता है ?
(A) परिवर्तनशील अनुपातों का नियम
(B) पैमाने का स्थिर प्रतिफल
(C) पैमाने का वर्धमान प्रतिफल
(D) पैमाने का ह्मसमान प्रतिफल
11. निम्नलिखित रेखाचित्र से पूर्ति की लोच के किस मान की माप होती है ?
(A) शून्य
(B) एक से कम
(C) एक से अधिक
(D) एक
12. बाजार में पूर्ति आधिक्य की स्थिति में बाजार कीमत में ............ होने की प्रवृत्ति होती है।
(A) वृद्धि
(B) कमी
(C) अपरिवर्तित
(D) स्थिर
13. वस्तुओं का ब्रांडिंग किस प्रकार की बाजार संरचना की एक विशेषता है ?
(A) पूर्ण प्रतियोगिता
(B) एकाधिकार
(C) एकाधिकृत प्रतियोगिता
(D) इनमें से सभी
14. एकमुश्त कर लगाने से किसी वस्तु की पूर्ति पर क्या प्रभाव होता है ?
(A) पूर्ति कम हो जाती है
(B) पूर्ति में वृद्धि होती है
(C) पूर्ति अपरिवर्तित रहती है
(D) पूर्ति शून्य हो जाती है
15. किस बाजार में फर्म का माँग वक्र पूर्ण लोचदार होता है ?
(A) पूर्ण प्रतियोगिता
(B) एकाधिकार
(C) अल्पाधिकार
(D) इनमें से कोई नहीं
16. अर्थशास्त्र की भाषा में निवेश शब्द से क्या अभिप्राय है ?
(A) शेयर का क्रय
(B) जमीन का क्रय
(C) बीमा योजना में मुद्रा खर्च करना
(D) पूँजीगत वस्तुओं के स्टॉक में वृद्धि
17. आय के चक्रीय प्रवाह के दो क्षेत्रक मॉडल में कारक सेवाओं का प्रवाह किस दिशा में होता है ?
(A) फर्म से फर्म की ओर
(B) परिवार से फर्म की ओर
(C) परिवार से परिवार की ओर
(D) फर्म से परिबार की ओर
18. सरकार द्वारा भुगतान की गई वृद्धा पेंशन की राशि निम्नलिखित में से किस समुच्चय का एक भाग होती है ?
(A) GDP
(B) GNP
(C) राष्ट्रीय आय
(D) वैयक्तिक आय
19. निम्नलिखित में से विनिमय का एक सर्वमान्य माध्यम कौन-सा है ?
(A) चेकबुक
(B) बंध पत्र
(C) डिमांड ड्राफ्ट
(D) मुद्रा
20. निम्नलिखित में से किसे वैध मुद्रा कहा जाता है ?
(A) डिमांड ड्राफ्ट
(B) करेंसी नोट
(C) चेक
(D) इनमें से सभी
21. अर्थव्यवस्था में मुद्रा की पूर्ति को बढ़ाने के लिए एक केन्द्रीय बैंक के द्वारा अपनाए गए निम्न उपाय हैं। निम्न कूटों का प्रयोग करते हुए सही विकल्प का चयन कीजिए :
(a) बैंक दर में कमी
(b) प्रतिभूतियों की बिक्री
(c) कोष अनुपात में कमी
(A) (a) और (b)
(B) (b) और (c)
(C) (a) और (c)
(D) (a), (b) और (c)
22. निम्नलिखित में से किस कर को कागजी कर कहा जाता है?
(A) आयकर
(B) निगम कर
(C) सम्पत्ति कर
(D) सीमा शुल्क
23. यदि आय में परिवर्तन से उपभोक्त का उपभोग व्यय अपरिवर्तित रहता है तो इस स्थिति में MPC का मान क्या होगा ?
(A) 1 से अधिक
(B) 1
(C) 0
(D) 0 से कम
24. निम्न में से समग्र माँग का एक घटक नहीं है
(A) उपभोग व्यय
(B) निवेश व्यय
(C) शुद्ध निर्यात
(D) वित्तीय परिसंपत्तियों पर व्यय
25. निम्न में कौन सत्य है ?
(A) MPC + MPS = 1
(B) MPC + MPS > 1
(C) MPC + MPS < 1
(D) MPC + MPS = 0
26. विदेशी विनिमय दर क्या है ?
(A) वस्तु की वस्तु में कीमत
(B) वस्तु की मुद्रा में कीमत
(C) मुद्रा की वस्तु में कीमत
(D) देशी मुद्रा की विदेशी मुद्रा में कीमत
27. वस्तुओं एवं सेवाओं के अन्तरराष्ट्रीय लेनदेन संतुलन को क्या कहा जाता है ?
(A) बाजार संतुलन
(B) उपभोक्ता संतुलन
(C) व्यापार संतुलन
(D) भुगतान संतुलन
28. राजस्व व्यय एवं राजस्व प्राप्तियों के अंतर को क्या कहा जाता है ?
(A) राजकोषीय घाटा
(B) प्राथमिक घाटा
(C) व्यापार घाटा
(D) राजस्व घाटा
29. अप्रत्यक्ष कर में कौन-सा शामिल है ?
(A) आयकर
(B) संपत्ति कर
(C) उत्पाद शुल्क
(D) उपहार कर
30. बजट की अवधि क्या होती है ?
(A) वार्षिक
(B) दो वर्ष
(C) तीन वर्ष
(D) पाॅंच वर्ष
भाग-B (विषयनिष्ठ प्रश्न)
खण्ड - A (अति लघु उत्तरीय प्रश्न)
किन्हीं छः प्रश्नों के उत्तर दें। 2x6-12
31. अवसर लागत, उत्पादन संभावना वक्र को कैसे प्रभावित करती है ?
उत्तर-
उत्पादन संभावना वक्र (पीपीसी) एक ग्राफ
है जो अवसर लागत की अवधारणा को दर्शाता है। जैसे-जैसे हम पीपीसी के साथ एक बिंदु
से दूसरे बिंदु पर जाते हैं, वैसे-वैसे एक वस्तु के उत्पादन की अवसर लागत बढ़ती जाती
है क्योंकि हम दूसरी वस्तु का अधिक से अधिक त्याग करते हैं।
32. सीमांत लागत को परिभाषित करें।
उत्तर- एक अतिरिक्त इकाई का उत्पादन करने से लागत में जितनी वृद्धि होती है उसे उस इकाई विशेष की सीमांत लागत कहा जाता है।
MC = TCn -TCn-1
33. यदि किसी वस्तु की कीमत में 5% की कमी होने से उसकी माँग मात्रा में 8% की वृद्धि हो जाती है तो वस्तु की माँग की कीमत लोच ज्ञात कीजिए।
उत्तर-
मांग की लोच = मांग में प्रतिशत परिवर्तन/ मूल्य में प्रतिशत परिवर्तन
मांग की लोच =`\frac{8\%}{5\%}`
अतः मांग की लोच = 1.6 होगी।
34. सीमांत आगम तथा औसत आगम को परिभाषित कीजिए।
उत्तर- औसत आगम (AR):- औसत आगम, कुल आगम को बेची गई मात्रा से विभाजित करके ज्ञात किया जा सकता है।
`AR=\frac{TR}Q`
सीमांत आगम (MR):- सीमांत आगम अतिरिक्त बेची गई इकाई से प्राप्त कुल आगम में वृद्धि है ।
MR = TRn - TRn-1 or,
`MR=\frac{\Delta TR}{\Delta Q}`
35. समष्टि अर्थशास्त्र की दृष्टि से अर्थव्यवस्था के चार क्षेत्रकों के नाम लिखिए।
उत्तर- समष्टि अर्थशास्त्र में अर्थव्यवस्था को परिवार, फर्म, सरकार और बाह्य क्षेत्रक इन चार क्षेत्रकों के संयोग के रूप में देखा जाता है ।
36. खुली अर्थव्यवस्था से आप क्या समझते हैं?
उत्तर- खुली अर्थव्यवस्था से तात्पर्य ऐसे देश से है जहां देश के अंदर और बाहर वस्तुओं, सेवाओं और पूंजी का मुक्त प्रवाह होता है।
37. वस्तु विनिमय प्रणाली से आप क्या समझते हैं?
उत्तर- विनिमय की वह प्रणाली, जिसमें विनिमय के साधन के रूप में मुद्रा का प्रयोग नहीं होकर, वस्तु का प्रयोग होता है, वस्तु विनिमय प्रणाली के नाम से जानी जाती है।
38. प्रत्यक्ष कर को परिभाषित करें।
उत्तर- जिस कर के भुगतान में कर भार तथा कर दायित्व एक ही व्यक्ति पर पड़ते हैं उसे प्रत्यक्ष कर कहते हैं। जैसे – आयकर, सम्पत्ति कर आदि।
खण्ड - B (लघु उत्तरीय प्रश्न)
किन्हीं छः प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर अधिकतम 150 शब्दों में दें। 3x6-18
39. स्थानापन्न वस्तु तथा पूरक वस्तु में क्या अन्तर हैं?
उत्तर-
स्थानापन्न वस्तुएं | पूरक वस्तुएं |
स्थानापन्न वस्तुओं का प्रयोग अलग-अलग या एक दूसरे के स्थान पर किया जाता है जैसे- चाय के स्थान पर कॉफी | पूरक या प्रतिपूरक वस्तुओं का प्रयोग एक दूसरे के साथ किया जाता है जैसे - चाय के साथ दूध |
एक वस्तु के दाम में वृद्धि होने से दूसरी वस्तु की मांग में वृद्धि होती है जैसे -कॉफी के दाम में वृद्धि होने पर चाय की मांग में वृद्धि | एक वस्तु के दाम में वृद्धि होने से दूसरी वस्तु की मांग में कमी हो जाती है जैसे चाय के दाम बढ़ने पर दूध की मांग में कमी |
40. माँग के नियम के अपवाद क्या हैं ?
उत्तर- कुछ विशेष परिस्थितियों में मूल्य के घटने पर मांग भी घटती है तथा मूल्य के बढ़ने पर मांग घटने के बजाए और अधिक बढ़ जाती है । ऐसी अवस्था में मांग की रेखा नीचे से ऊपर दाहिनी ओर बढ़ती है। इसे मांग का अपवाद कहा जाता है
चित्र में मांग वक्र नीचे से दायी ओर बढ़ती है । इसके निम्न कारण है , जब मांग का नियम कार्यशील नहीं हो पाता -
(1) भविष्य में किसी वस्तु के न मिलने की आशंका
(2) बहुमूल्य तथा सामाजिक सम्मान वाली वस्तुएं
(3) अज्ञानता
(4) अनिवार्य वस्तुएं
(5) आदत की वस्तुएं
(6) विशेष अवसर
41. पूर्ति की लोच का क्या अर्थ है?
उत्तर- सैम्युलसन के अनुसार ," पूर्ति की लोच कीमत में होने वाले परिवर्तन के फलस्वरुप पूर्ति में होने वाले परिवर्तन की प्रतिक्रिया की मात्रा है।"
पूर्ति की लोच = पूर्ति में आनुपातिक परिवर्तन/ कीमत में आनुपातिक परिवर्तन
42. उत्पादक के चार कारक कौन-कौन से हैं और इनमें से प्रत्येक के पारिश्रमिक को क्या कहते हैं?
उत्तर- उत्पादन के चार कारक और उनके पारिश्रमिक इस प्रकार हैं—
1. भूमि → लगान/किराया (Rent)
2. श्रम → मजदूरी (Wages)
3. पूँजी → ब्याज (Interest)
4. उद्यमी / संगठन → लाभ (Profit)
43. व्यष्टि अर्थशास्त्र तथा समष्टि अर्थशास्त्र में क्या अंतर है?
उत्तर-
व्यष्टि | समष्टि |
1. इसमें व्यक्तिगत आर्थिक इकाइयों जैसे एक फर्म, एक उपभोक्ता आदि की समस्याओं का अध्ययन किया जाता है। | 1. इसमें पूरी अर्थव्यवस्था को एक इकाई मानकर इसकी आर्थिक समस्याओं का अध्ययन किया जाता है। |
2. माइक्रो (Micro) शब्द ग्रीक शब्द माइक्रस से बना है जिसका अर्थ होता है छोटा या सूक्ष्म। | 2 अँग्रेज़ी भाषा का मैक्रो (Macro) शब्द भी ग्रीक शब्द मेक्रोज से बना है जिसका अर्थ होता है विशाल अथवा व्यापक। |
3. व्यष्टि का मुख्य उद्देश्य संसाधनों के सर्वोत्तम बंटवारे से होता है। | 3. समष्टि का मुख्य उद्देश संसाधनों के पूर्ण रोजगार व विकास से होता है। |
4. इसकी मुख्य समस्या कीमत निर्धारण है। | 4. इसकी मुख्य समस्या आय व रोजगार का निर्धारण है। |
5. इसका मुख्य उपकरण मांग व पूर्ति है। | 5. इसका मुख्य उपकरण अर्थव्यवस्था की सम्रग मांग व सम्रग पूर्ति है। |
6. व्यष्टि अर्थशास्त्र की अवधारणा को समझना सरल होता है। | 6. समष्टि अर्थशास्त्र की अवधारणा को समझने में कठिनाई होती है । |
7. व्यष्टि अर्थशास्त्र में आवंटन बहुत जरूरी काम होता है । | 7. इसमें आवंटन को स्थिर माना जा सकता है । |
44. मुद्रा के क्या कार्य है ?
उत्तर- क्राउथर के अनुसार, “मुद्रा वह वस्तु है जो विनिमय के माध्यम के रूप में सामान्यतया स्वीकारी जाती है और साथ ही साथ में मुद्रा के माप और मुद्रा के संग्रह का कार्य भी करे।”
प्रो. किनले ने मुद्रा के कार्यो को निम्नलिखित तीन वर्गो में विभाजित किया है -
(A) प्राथमिक या मुख्य कार्य :- इसे आधारभूत अथवा मौलिक कार्य भी कहते हैं।
मुद्रा के मुख्य कार्य दो है -
1. विनिमय का माध्यम :- वस्तु विनिमय प्रणाली की एक मुख्य कठिनाई यह थी कि उनमें आवश्यकताओ के दोहरे संयोग का अभाव पाया जाता था। मुद्रा ने इस कठिनाई को दूर कर दिया है। आज किसी वस्तु को बेचकर मुद्रा प्राप्त कर ली जाती है और उस मुद्रा से आवश्यकतानुसार बाजार में वस्तुएं खरीदी जाती है। अर्थात मुद्रा विनिमय का माध्यम है।
2. मूल्य का मापक :- मुद्रा लेखे की इकाई के रूप में मूल्य का मापदंड करती है लेखे की इकाई से अभिप्राय यह है कि प्रत्येक वस्तु तथा सेवा का मूल्य मुद्रा के रूप में मापा जाता है। मुद्रा के द्वारा सभी वस्तुओं तथा सेवाओं के मूल्य अथवा कीमतों को मापा जा सकता है तथा व्यक्त किया जा सकता है।
(B) गौण अथवा सहायक कार्य :- इस श्रेणी में उन कार्यों को सम्मिलित करते हैं जो प्राथमिक कार्यों के सहायक है। इसमें निम्न कार्य है -
1. स्थगित भुगतानो का मान :- जिन लेन-देनो का भुगतान तत्काल न करके भविष्य के लिए स्थगित कर दिया जाता है उन्हें स्थगित भुगतान कहा जाता है। मुद्रा को स्थगित भुगतानो का मान इसलिए माना गया है क्योंकि - (क) अन्य किसी वस्तु की तुलना में इसका मूल्य स्थिर रहता है (ख) इसमें सामान्य स्वीकृति का गुण पाया जाता है (ग) अन्य वस्तुओं की तुलना में यह अधिक टिकाऊ है (घ) स्थगित भुगतानो के मान के रूप में कार्य करके मुद्रा पूंजी निर्माण में सहायक होती है।
2. मूल्य का संचय :- मुद्रा के मूल्य संचय से अभिप्राय यह है कि मुद्रा को वस्तुओं तथा सेवाओं के लिए खर्च करने का तुरंत कोई विचार नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति अपनी आय का कुछ भाग भविष्य के लिए बचाता है। इसे ही मूल्य का संचय कहा जाता है। मुद्रा के रूप में मूल्य का संचय करना सरल होता है क्योंकि (क) मुद्रा को सब लोग स्वीकार कर लेते हैं (ख) मुद्रा के मूल्य में अधिक कमी या वृद्धि नहीं होती है (ग) मुद्रा का संग्रह सरलता से किया जा सकता है (घ) मुद्रा के रूप में बचत करने में बहुत कम स्थान की आवश्यकता होती है।
3. मूल्य का हस्तांतरण :- मुद्रा मूल्य के हस्तांतरण का कार्य करती है, क्योंकि इसके माध्यम से कोई व्यक्ति अपनी क्रय शक्ति दूसरे को दे सकता है अथवा एक स्थान पर अपनी अचल संपत्ति को बेच कर दूसरे स्थान पर संपत्ति खरीद सकता है।
(C) आकस्मिक कार्य :- मुद्रा के आकस्मिक कार्य निम्नलिखित है
(a) सामाजिक आय का वितरण (b) साख निर्माण का आधार (c) अधिकतम संतुष्टि का माप (d) राष्ट्रीय आय का वितरण (e) शोधन क्षमता की गारंटी (f) पूंजी की तरलता में वृद्धि।
45. प्रगतिशील कर के गुण क्या है?
उत्तर- प्रगतिशील कर वह कर है जिसकी दर आय अथवा संपत्ति में वृद्घि के साथ साथ बढ़ती जाती है। इस प्रणाली में जिस व्यक्ति की आय जितनी अधिक होगी उससे उतना ही अधिक कर वसूला जायेगा।
प्रगतिशील कर के प्रमुख गुण निम्नलिखित हैं—
1. आय असमानता में कमी- अधिक आय वालों पर अधिक कर लगने से धन का समान वितरण होता है।
2. सामाजिक न्याय की स्थापना- कर देने की क्षमता के अनुसार कर लिया जाता है, जिससे न्यायसंगत व्यवस्था बनती है।
3. गरीब वर्ग पर कम भार- कम आय वालों पर कर का बोझ कम रहता है।
4. सरकारी राजस्व में वृद्धि- उच्च आय वर्ग से अधिक कर प्राप्त होता है।
5. आर्थिक स्थिरता में सहायक- मंदी और महँगाई को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
6. कल्याणकारी राज्य की अवधारणा को बल-प्राप्त राजस्व से शिक्षा, स्वास्थ्य आदि जनकल्याण कार्य किए जाते हैं।
46. समग्र मांग को परिभाषित करें तथा इसके घटकों को भी परिभाषित करें।
उत्तर- कुल ( समग्र) मांग, वह कुल व्यय है जो लोग एक वित्तीय वर्ष की अवधि के दौरान वस्तुओं और सेवाओं के खरीदने पर खर्च करने की योजना बनाते हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि समग्र मांग (AD) को मापने समय हम सदा लोगों द्वारा किए जाने वाले आयोजित व्यय या प्रत्याशित व्यय के संदर्भ में बात करते हैं।
कुल मांग के प्रमुख घटक निम्नलिखित हैं -
1. निजी उपभोग व्यय (C) :- इसमें देश के गृहस्थो/परिवारो द्वारा एक लेखा वर्ष में, सभी वस्तुओं तथा सेवाओं के लिए की गई मांग को शामिल किया जाता है।
2. निजी निवेश मांग (I) :- इससे अभिप्राय निजी निवेशकर्ताओं द्वारा पूंजी पदार्थों की खरीद पर करने वाले व्यय से है।
3 सरकारी व्यय (G) :- इसमें सरकारी उपभोग में व्यय तथा सरकारी निवेश व्यय दोनों शामिल होते हैं। सरकारी उपभोग व्यय से अभिप्राय है सैन्य/सुरक्षा प्रयोग के लिए वस्तुओं के उपभोग की खरीद पर खर्च/सरकारी निवेश व्यय से अभिप्राय है सड़कों,डैमो तथा पुलो के निर्माण पर किया जाने वाला व्यय।
4. शुद्ध निर्यात (X - M ) :- विदेशियों द्वारा हमारी वस्तु के लिए किए गए व्यय को अर्थव्यवस्था में कुल व्यय (समग्र मांग) मे जोड़ा जाता है, जबकि आयात पर किए जाने वाले व्यय को घटाया जाता है। अतः X - M (शुद्ध निर्यात) को समग्र मांग (AD) में जोड़ा जाता है।
खण्ड -C (दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)
किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक प्रश्न कसे उत्तर अधिकतम 250 शब्दों में दें। 5 x 4-20
47. आर्थिक समस्या क्या है? यह क्यों उत्पन्न होती है?
उत्तर- आर्थिक समस्या मूल रूप से चुनाव की समस्या है। आर्थिक समस्या उत्पन्न होने के कारण-
i. असीमित आवश्यकताएं- मानवीय आवश्यकताएं असीमित होती है। एक आवश्यकता को पूर्ण करते ही दूसरी आवश्यकताएं उत्पन्न हो जाती हैं। एक समय में मनुष्य की सभी आवश्यकताओं को संतुष्ट नहीं किया जा सकता है।
ii. आवश्यकताओं की तीव्रता में अंतर- मानव की सभी आवश्यकताओं की तीव्रता एक सी नहीं होती है, अर्थात कुछ अधिक महत्वपूर्ण एवं कुछ कम महत्वपूर्ण होती है। अधिक महत्व वाले आवश्यकताओं की तीव्रता अधिक होती है
iii. साधन सीमित होते हैं- साधन सीमित होते हैं का अर्थ है कि साधनों की पूर्ति इनकी मांग की तुलना में कम होती है।
iv. सीमित साधनों के वैकल्पिक प्रयोग-साधन सीमित होते हैं और इनके वैकल्पिक प्रयोग हो सकते हैं। जैसे-यदि किसी के पास ₹ 500 हैं तो वह इससे एक शर्ट या एक जोड़ी जूता या एक किताब खरीद सकता है।
v. चुनाव की समस्या- सीमित साधनों से सभी आवश्यकताओं को पूरा नहीं किया जा सकता है। अतः साधन को किस आवश्यकता की पूर्ति में कितनी मात्रा में प्रयोग किया जाए यह समस्या उत्पन्न होती है, इसे ही चुनाव की समस्या कहते हैं।
48. एक एकल वस्तु के संदर्भ में उपभोक्ता संतुलन की व्याख्या करें।
उत्तर- मार्शल ने सन् 1890 ई. में अपनी पुस्तक 'Principles of Economics' में उपभोक्ता संतुलन की व्याख्या की।
"एक उपभोक्ता उस समय संतुलन में होता है जब वह अपनी दी हुई आय तथा बाजार कीमतों से (विभिन्न वस्तुओं तथा सेवाओं पर) इस ढंग से खर्च करता है कि उसे अधिकतम संतुष्टि प्राप्त हो।"
मार्शल ने उपभोक्ता संतुलन के लिए दो सिद्धांतो का प्रतिपादन किया
मूल्य बराबर है सीमांत उपयोगिता के (एक वस्तु) :- इस सिद्धांत के अनुसार एक उपभोक्ता संतुलन की अवस्था में तब पहुंचता है जब कीमत तथा सीमांत उपयोगिता बराबर हो जाती है।
उपभोक्ता अपनी संतुलन की अवस्था तब प्राप्त कर लेता है जब
उपभोक्ता अपनी संतुलन की अवस्था तब प्राप्त कर लेता है जब
जहां , Px = वस्तु × की कीमत
MUx = वस्तु × की सीमांत उपयोगिता
MUm = मुद्रा की सीमांत उपयोगित
तालिका से
x वस्तु की इकाइयां | x वस्तु के उपभोग से प्राप्त उपयोगिता | वस्तु की कीमत | प्राप्त उपयोगिता का त्यागी जाने वाली उपयोगिता का आधिक्य |
1 | 50 | 20 | 30 |
2 | 40 | 20 | 20 |
3 | 30 | 20 | 10 |
4 | 20 | 20 | 0 |
5 | 10 | 20 | -10 |
जब उपभोक्ता x वस्तु की चार इकाइयां खरीदता है तो उससे मिलने वाली सीमांत उपयोगिता तथा कीमत के रुप में त्याग की जाने वाली उपयोगिता एक दूसरे के बराबर होती है। यह संतुलन की स्थिति होगी।
चित्र में, MU मांग अर्थात सीमांत उपयोगिता की रेखा है। PP1 मूल्य की रेखा है। दोनों E बिंदु पर बराबर है। अतः या संतुलन बिंदु है। जहां उपभोक्ता वस्तु के लिए OP मूल्य देगा और OM मात्रा क्रय करेगा।
49. पूर्ण प्रतियोगिता और एकाधिकार में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर-
अंतर का आधार | पूर्ण प्रतियोगिता | एकाधिकार |
विक्रेताओं तथा क्रेताओं की संख्या | बहुत अधिक | एक विक्रेता परन्तु अनेक क्रेता |
वस्तु | एक समान | एक समान हो सकता है नहीं भी हो सकता |
कीमत | एक कीमत | कीमत विभेद के कारण कीमत समान नहीं होती |
फर्मो का प्रवेश | प्रवेश की स्वतंत्रता | प्रवेश पर रुकावट |
बाजार की दशाओं का ज्ञान | पूर्ण ज्ञान | अपूर्ण ज्ञान |
फर्म की मांग वक्र | पूर्णतया लोचदार | बहुत कम लोचदार |
फर्म की मांग विक्रय का ढलान | पड़ी हुई सरल रेखा | नीचे की ओर झुकी हुई कम लोचदार |
विक्रय लागत | नहीं होता | बहुत कम |
कीमत नियंत्रण | कीमत पर कोई नियंत्रण नही | पूर्ण नियंत्रण |
50. राष्ट्रीय आय लेखांकन के क्या महत्व या उपयोग है?
उत्तर- राष्ट्रीय आय लेखांकन उस विषय सामग्री को कहते हैं जिसमें राष्ट्रीय आय के अनुमान तथा सम्बन्धित समष्टि आर्थिक चरो का अध्ययन किया जाता है।
फ्रेक जान के अनुसार ," राष्ट्रीय आय लेखांकन वह विधि है जिसकी सहायता से सामूहिक आर्थिक क्रियाओं को समझा एवं मापा जाता है।"
उपयोग या महत्त्व
राष्ट्रीय आय लेखांकन के निम्नलिखित उपयोग हैं
1. राष्ट्रीय आय का अनुमान :- इसके द्वारा अर्थव्यवस्था में उत्पादन का स्तर तथा लोगों की आय का स्तर प्रकट होता है।
2. अर्थव्यवस्था का ढांचा :- हमें इस बात की जानकारी प्राप्त होती है कि अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्र किस प्रकार परस्पर निर्भर हैं।
3. उत्पादक क्षेत्रों का सापेक्षिक महत्व :- अर्थव्यवस्था के उत्पादन क्षेत्र में प्राथमिक, द्वितीयक तथा तृतीयक क्षेत्र शामिल होते हैं। हमें इन क्षेत्रों के सापेक्षिक महत्व का ज्ञान राष्ट्रीय आय लेखांकन द्बारा होता है।
4. उत्पादन के साधनों में आय का वितरण :- राष्ट्रीय आय लेखांकन से हमें यह भी जानकारी मिलती है कि विभिन्न वर्गों के बीच राष्ट्रीय आय का वितरण किस प्रकार होता है।
5. अन्तर्क्षेत्रीय तथा अंर्तराष्ट्रीय तुलना :- राष्ट्रीय आय के अनुमानों द्वारा देश के विभिन्न क्षेत्रों तथा संसार के विभिन्न देशों की तुलना करना सरल हो जाता है।
6. सरकारी नीतियों का मूल्यांकन :- इसकी सहायता से अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों पर सरकारी नीतियों के प्रभाव का अध्ययन किया जा सकता है एवं नये नीतियों का निर्माण किया जा सकता है।
51. केंद्रीय बैंक द्वारा साख नियंत्रण की विधियों की व्याख्या करें।
उत्तर- साख नियंत्रण की प्रमुख विधियां निम्नलिखित हैं -
(1) आरक्षित जमा कोष में परिवर्तन :- सभी अनुसूचित व्यवसायिक बैंको को अपनी कुल जमा की एक निश्चित नियंत्रण राशी आरक्षित कोष के रूप में केंद्रीय बैंक के पास जमा करनी पड़ती है। यह आरक्षित कोष जितना अधिक होता है, व्यवसायिक बैंकों के पास नकदी जमा उतनी ही कम हो जाती है और उसी अनुपात में साख का सृजन कम होता है। इसके विपरीत आरक्षित कोष में कमी से साख का सृजन अधिक होता है।
(2) बैंक दर में परिवर्तन :- बैंक दर में परिवर्तन करके भी साख पर नियंत्रण किया जा सकता है। बैंक दर वह दर है जिस पर केन्द्रिय बैंक व्यवसायिक बैंको को ऋण देता है। बैंक दर से ब्याज दर प्रभावित होता है। बैंक दर में वृद्धि करके साख की मात्रा को कम किया जा सकता है और बैंक दर में कमी करके साख की मात्रा को बढ़ाया जा सकता है।
(3) खुले बाजार की क्रियाएं :- खुले बाजार की क्रियाओं के अंतर्गत केंद्रीय बैंक बाजार में सरकारी प्रतिभूतियों का क्रय-विक्रय करता है। जब केंद्रीय बैंक प्रतिभूतियों को बेचता है तो मुद्रा बाजार में मुद्रा की मात्रा कम होने लगती है और जब बाजार से केंद्रीय बैंक प्रतिभूतियों को खरीदता है तो मुद्रा बाजार में मुद्रा की मात्रा बढ़ जाती है ।
जब मुद्रा बाजार में मुद्रा की अधिकता (अर्थात मुद्रास्फीति) होती है, तब केंद्रीय बैंक खुले बाजार में प्रतिभूतियां बेचना प्रारंभ कर देता है। जनता अपनी नकदी अथवा बचत कोषों से केंद्रीय बैंक द्वारा बेचे जाने वाली प्रतिभूतियों का क्रय करना शुरू कर देती है। इस प्रकार नकदी केंद्रीय बैंक को लौट जाती है और प्रचलित मुद्रा की मात्रा कम हो जाती है जिससे बैंकों के नकद कोषों में कमी आ जाती है ।
(4) सीमांत कटौती में परिवर्तन :- व्यापारी लोग अपनी वस्तुओं को व्यापारिक बैंकों के पास प्रतिभूतियों के रूप में रखते हैं और उसके बदले ऋण लेते हैं। बैंक पूरी प्रतिभूति अथवा जमानत मूल्य के बराबर ऋण नहीं देते हैं। उसमें कुछ कटौती करते हैं। इसे सीमांत कटौती कहते हैं। सीमांत कटौती में परिवर्तन करके साख पर नियंत्रण करने का प्रयास किया जाता है।
(5) नैतिक दबाव :- नैतिक दबाव के अंतर्गत केंद्रीय बैंक साख संस्थाओं पर नैतिक दबाव डालकर उन्हें संबंधित नीति अपनाने के लिए बाध्य कर सकता है।
52. भुगतान संतुलन के असंतुलन को ठीक करने की विधियों की व्याख्या करें।
उत्तर- भुगतान संतुलन से आशय देश के समस्त आयातो एवं निर्यात एवं अन्य सेवाओं के मूल्य के सम्पूर्ण विवरण से होता है। इसके अंतर्गत लेन-देन के दो पक्ष होते हैं। एक ओर तो देश की विदेशी मुद्रा की लेनदारियो का विवरण रहता है जिसे धनात्मक पक्ष कहते हैं तथा दूसरी ओर उस देश की समस्त देनदारियों का विवरण रहता है जिसे ऋणात्मक पक्ष कहते हैं।
प्रतिकूल भुगतान संतुलन को ठीक करने के निम्न तरीके हैं -
1. मुद्रा संकुचन :- मुद्रा संकुचन के फलस्वरूप देश में वस्तुओं एवं सेवाओं की कीमतों में कमी आ जाती है। जिससे निर्यात में वृद्धि हो जाती है। आय के कम होने के कारण लोगों की आयात करने की प्रवृत्ति कम हो जाती है।
2. विनिमय ह्रास :- किसी देश के विनिमय ह्रास से विदेशियों के लिए घरेलू वस्तुएं सस्ती हो जाती है और आयात महंगे हो जाते हैं अतः निर्यात में वृद्धि तथा आयातो मे कमी आ जाती है।
3. विनिमय नियंत्रण :- विनिमय नियंत्रण पूंजी के निर्यात एवं बहिर्गमन को रोक कर भुगतान संतुलन को ठीक करने में सहायता देता है।
4. अवमूल्यन :- अवमूल्यन के अंतर्गत सरकारी घोषणा के अनुसार देश के मुद्रा के बाह्य मूल्य को कम कर दिया जाता है। जिससे देश के निर्यात विदेशों में सस्ते पड़ते हैं जबकि आयात महंगे हो जाते हैं।
5. अमौद्रिक उपाय :- (a) आयात में कमी करना (b) निर्यात को प्रोत्साहन (c) विदेशी निवेश को प्रोत्साहन (d) सरकार की आर्थिक नीतियों में परिवर्तन (e) विदेशी ऋण (f) विदेशी पर्यटकों को प्रोत्साहन।
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