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Pre Board Exam-2 (2026-27)

Section A बहुविकल्पीय प्रश्न - 30 x 1=30

1. समष्टि अर्थशास्त्र किसका अध्ययन करता है ?

(A) व्यक्तिगत उपभोक्ता व्यवहार

(B) व्यक्तिगत फर्म का उत्पादन

(C) सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था

(D) एकल बाजार

2. निम्नलिखित में से कौन-सा एक समष्टि आर्थिक चर है?

(A) किसी वस्तु की कीमत

(B) राष्ट्रीय आय

(C) व्यक्तिगत माँग

(D) फर्म का लाभ

3. आधुनिक समष्टि अर्थशास्त्र का जनक किसे माना जाता है ?

(A) एडम स्मिथ

(B) जे.एम. कीन्स

(C) अल्फ्रेड मार्शल

(D) मिल्टन फ्रीडमैन

4. निम्नलिखित में से कौन समष्टि अर्थशास्त्र की केंद्रीय समस्या नहीं है ?

(A) रोजगार स्तर का निर्धारण

(B) सामान्य कीमत स्तर का निर्धारण

(C) किसी एक वस्तु की कीमत का निर्धारण

(D) आर्थिक संवृद्धि

5. समष्टि अर्थशास्त्र को और किस नाम से जाना जाता है ?

(A) कीमत सिद्धांत

(B) आय सिद्धांत

(C) फर्म का सिद्धांत

(D) मूल्य सिद्धांत

6. GDP का पूर्ण रूप है

(A) सकल घरेलू उत्पाद

(B) सकल विकास उत्पाद

(C) सामान्य घरेलू उत्पाद

(D) सकल प्रत्यक्ष उत्पाद

7. निम्नलिखित में से कौन राष्ट्रीय आय में शामिल किया जाता है ?

(A) पुरानी वस्तुओं की बिक्री

(B) लॉटरी जीतना

(C) कर्मचारियों का परिश्रमिक

(D) हस्तांतरण भुगतान

8. उत्पादन के प्रत्येक चरण में जोड़े गए मूल्य को जोड़कर राष्ट्रीय आय के आकलन की विधि कहलाती है

(A) आय विधि

(B) मूल्य वर्धित/उत्पाद विधि

(C) व्यय विधि

(D) इनमें से कोई नहीं

9. मूल्य ह्रास है

(A) पूंजी स्टॉक में वृद्धि

(B) स्थायी पूंजी का उपभोग

(C) माल-सूची में वृद्धि

(D) निवल निवेश

10. NNP=GNP-

(A) विदेशों से निवल कारक आय

(B) मूल्य ह्रास

(C) अप्रत्यक्ष कर

(D) आर्थिक सहायता

11. मुद्रा किस रूप में कार्य करती है ?

(A) विनिमय का माध्यम

(B) मूल्य संचय

(C) लेखा की इकाई

(D) उपरोक्त सभी

12. वैद्य निविदा मुद्रा जारी की जाती है:

(A) वाणिज्यिक बैंकों द्वारा

(B) केंद्रीय बैंक/ सरकार द्वारा

(C) सहकारी बैंकों द्वारा

(D) गैर-बैंकिंग वित्तीय कम्पनियों द्वारा

13. CRR का पूर्ण रूप है

(A) नकद आरक्षित अनुपात

(B) पूंजी आरक्षित अनुपात

(C) साख आरक्षित अनुपात

(D) मुद्रा आरक्षित अनुपात

14. निम्नलिखित में से कौन केंद्रीय बैंक का कार्य है ?

(A) सरकार का बैंकर होना

(B) जनता से जमा स्वीकार करना

(C) व्यक्तियों को ऋण देना

(D) लाभ अधिकतमीकरण

15. भारत में मुद्रा आपूर्ति का मापन किया जाता है

(A) RBI द्वारा

(B) SBI द्वारा

(C) NABARD द्वारा

(D) SEBI द्वारा

16. "किसके लिए उत्पादन किया जाए' की केंद्रीय समस्या संबंधित है -

(A) संसाधनों का आवंटन

(B) राष्ट्रीय उत्पाद का वितरण

(C) तकनीक का चुनाव

(D) उत्पादन का पैमाना

17. निम्नलिखित में से कौन-सा एक सकारात्मक (Positive) आर्थिक कथन है ?

(A) सरकार को कर कम करने चाहिए

(B) भारत में बेरोजगारी दर 7% है

(C) गरीबी बुरी है

(1D) न्यूनतम मजदूरी बढ़ानी चाहिए

18. उत्पादन संभावना वक्र (PPC) मूल बिंदु की ओर अवतल क्यों होता है ?

(A) स्थिर सीमांत अवसर लागत

(B) बढ़ती सीमांत अवसर लागत

(C) घटती सीमांत अवसर लागत

(D) शून्य अवसर लागत

19. अर्थशास्त्र किसका अध्ययन है?

(A) दुर्लभता और चयन

(B) केवल उत्पादन

(C) केवल उपभोग

(D) केवल वितरण

20. उपयोगिता उपागम के अंतर्गत उपभोक्ता संतुलन प्राप्त होता है जब -

(A) MU = कीमत

(B) MUx/Px = MUy/Py = मुद्रा की MU

(C) TU शून्य हो

(D) MU अधिकतम हो

21. उदासीनता वक्र होता है

(A) मूल बिंदु की ओर उत्तल

(B) मूल बिंदु की ओर अवतल

(C) एक सरल रेखा

(D) ऊपर की ओर ढालू

22. सीमांत उपयोगिता ह्रास नियम बताता है कि

(A) प्रत्येक अतिरिक्त इकाई के साथ MU बढ़ती है

(B) उपभोग की गई प्रत्येक सफल इकाई के साथ MU घटती है

(C) TU सदैव घटता है

(D) सिमांत उपयोगिता स्थिर रहती है

23. उदासीनता वक्र विश्लेषण में उपभोक्ता संतुलन बिंदु पर उदासीनता वक्र होता है-

(A) बजट रेखा के स्पर्शी

(B) बजट रेखा को काटता हुआ

(C) बजट रेखा के समानांतर

(D) बजट रेखा के ऊपर

24. माँग का नियम बताता है कि, अन्य बातें समान रहने परः

(A) कीमत और माँगी गई मात्रा एक ही दिशा में चलती हैं

(B) कीमत और माँगी गई मात्रा विपरीत दिशा में चलती हैं

(C) माँग कीमत से स्वतंत्र होती है

(D) इनमें से कोई नहीं

25. निम्नलिखित में से कौन माँग वक्र को दाहिने ओर खिसकता है ?

(A) वस्तु की कीमत में कमी

(B) आय में वृद्धि (सामान्य वस्तु)

(C) वस्तु की कीमत में वृद्धि

(D) आय में कमी

26. माँग की कीमत लोच मापी जाती है -

(A) कीमत में % परिवर्तन माँगी गई मात्रा में % परिवर्तन

(B) माँगी गई मात्रा में % परिवर्तन कीमत में % परिवर्तन

(C) मात्रा में परिवर्तन कीमत में परिवर्तन

(D) इनमें से कोई नहीं

27. गिफिन वस्तु के लिए माँग वक्र होता है -

(A) नीचे की ओर ढालू

(B) ऊपर की ओर ढालू

(C) ऊर्ध्वाधर

(D) क्षैतिज

28. परिवर्तनशील अनुपात का नियम लागू होता है:

(A) दीर्घकाल में

(B) अल्पकाल में

(C) अति दीर्घकाल में

(D) इनमें से कोई नहीं

29. निम्नलिखित में से कौन-सा उत्पादन और केवल एक परिवर्तनशील साधन के बीच संबंध दर्शाता है, अन्य साधनों को स्थिर रखते हुए ?

(A) दीर्घकालीन उत्पादन फलन

(B) अल्पकालीन उत्पादन फलन

(C) पैमाने के प्रतिफल

(D) समोत्पाद वक्र

30. जब सीमांत उत्पाद शून्य होता है, तब कुल उत्पाद होता है

(A) बढ़ता हुआ

(B) अधिकतम

(C) शून्य

(D) घटता हुआ

Section – B विषयनिष्ठ प्रश्न 6 x2=12

31. समष्टि अर्थशास्त्र को परिभाषित कीजिए।

उत्तर- एम. एच. स्पेन्सर के अनुसार," समष्टि अर्थशास्त्र का संबंध अर्थव्यवस्था अथवा उसके बड़े-बड़े हिस्सों से है। इसके अंतर्गत ऐसी समस्याओं का अध्ययन किया जाता है जैसे बेरोजगारी का स्तर, मुद्रास्फीति की दर राष्ट्र का कुल उत्पादन आदि जिनका संपूर्ण अर्थव्यवस्था के लिए महत्व होता है"।

32. स्टॉक और प्रवाह चर के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए (उदाहरण सहित) ।

उत्तर- प्रवाह (Flow)-

1. प्रवाह को समय की एक निश्चित अवधि के संदर्भ में मापा जाता है।

2. प्रवाह में समय की अवधि होती है।

3. यह एक गतिशील अवधारणा है।

प्रवाह चर का उदाहरण- नदी का जल , चलती गाड़ी की गति ,पानी की टंकी से रिसाव , गेहूं का विक्रय आदि।

स्टॉक (Stock)-

1. स्टॉक को निश्चित बिंदु पर मापा जाता है।

2. स्टॉक की समय अवधि नहीं होती।

3. यह एक स्थिर अवधारणा है।

प्रवाह चर का उदाहरण- किसी निश्चित समय (जैसे सुबह 8:00 बजे) टंकी में भरा कुल पानी (उदा. 500 लीटर)।

33. GDP अवमूल्यांक को परिभाषित कीजिए

उत्तर- GDP अवमूल्यांक (GDP Deflator) वह मूल्य सूचकांक है जो किसी देश में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं के सामान्य मूल्य स्तर में परिवर्तन को मापता है।

सूत्र: GDP Deflator= ×100

अर्थात, GDP अवमूल्यांक से यह पता चलता है कि GDP में वृद्धि वस्तुओं/सेवाओं के उत्पादन में वृद्धि के कारण हुई है या कीमतों में वृद्धि के कारण।

34. "वैध निविदा मुद्रा' से क्या तात्पर्य है ?

उत्तर- वह मुद्रा है जिसे किसी देश के कानून के अनुसार ऋण, वस्तुओं और सेवाओं के भुगतान के लिए स्वीकार करना अनिवार्य होता है।

35. "अवसर लागत' से क्या तात्पर्य है? उदाहरण सहित बताइए ।

उत्तर- किसी वस्तु या विकल्प को प्राप्त करने के लिए छोड़े गए अगले सर्वोत्तम वैकल्पिक अवसर के मूल्य को अवसर लागत कहते हैं।

उदाहरण: यदि कोई विद्यार्थी पढ़ाई करने के बजाय 3 घंटे काम करता है और ₹300 कमाता है, तो पढ़ाई करने पर छोड़ी गई ₹300 की आय उसकी अवसर लागत होगी।

36. उदासीनता वक्र को परिभाषित कीजिए।

उत्तर- उदासीनता वक्र वह वक्र है जो दो वस्तुओं के उन विभिन्न संयोजनों को दर्शाता है, जिनसे उपभोक्ता को समान संतुष्टि प्राप्त होती है।

37. माँग के नियम का वर्णन कीजिए ।

उत्तर- मांग का नियम यह बताता है कि अन्य तत्वों के स्थिर होने पर किसी वस्तु की कीमत में कमी से उसकी मांगी गई मात्रा बढ़ती है एवं विलोमशः अर्थात कीमत तथा वस्तु की मांगी गयी मात्रा के बीच विपरीत संबंध पाया जाता है।

`D=ƒ(\frac1P)`

जहां, D = वस्तु की माँग, f =फलन तथा P = वस्तु की कीमत

38. कुल उत्पाद तथा सीमांत उत्पाद को परिभाषित कीजिए।

उत्तर- कुल उत्पादन (TP) :- उत्पत्ति के साधनो से उत्पादित की गई वस्तुओं तथा सेवाओं की कुल मात्रा की कुल उत्पादन कहा जाता है।  

TP = ∑ MP

सीमांत उत्पादन (MP) :- परिवर्तनशील साधन की एक अतिरिक्त इकाई और लगाने से कुल उत्पादन में जो वृद्धि होती है, उसे सीमांत उत्पादन कहते हैं।

MP = TPn – TPn-1      

or ,  MP = `\frac{\Delta TP}{\Delta L}`

Section – C (6 x 3 = 18)

39. व्यष्टि अर्थशास्त्र और समष्टि अर्थशास्त्र में अंतर स्पष्ट कीजिए (कोई तीन बिंदु) ।

उत्तर-

व्यष्टि अर्थशास्त्र

समष्टि अर्थशास्त्र

i. व्यष्टि अर्थशास्त्र में व्यक्तिगत स्तर पर आर्थिक समस्या का अध्ययन किया जाता है, जैसे एक उपभोक्ता, एक उत्पादक तथा एक फर्म आदि ।

i. समष्टि अर्थशास्त्र में संपूर्ण अर्थव्यवस्था की आर्थिक इकाइयों का अध्ययन होता है, जैसे- राष्ट्रीय आय, कीमत स्तर, समग्र मांग तथा समग्र पूर्ति आदि।

ii. व्यष्टि अर्थशास्त्र में व्यक्ति और व्यक्ति के व्यवहार का अध्ययन होता है।

ii. समष्टि अर्थशास्त्र में समाज और समाज के व्यवहार का अध्ययन होता है।

iii. इसका उद्देश्य साधनों के कुशल बंटवारे से संबंधित सिद्धांतों, समस्याओं एवं नीतियों का अध्ययन करना है।

iii. इसका उद्देश्य साधनों के पूर्ण रोजगार तथा उनके विकास से संबंधित सिद्धांतों, समस्याओं तथा नीतियों का अध्ययन करना है।

40. GDP और साधन लागत पर NNP के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए ।

उत्तर-

आधार

GDP

साधन लागत पर NNP

अर्थ

देश की घरेलू सीमा के भीतर एक वर्ष में उत्पादित अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं का सकल मौद्रिक मूल्य।

देश के सामान्य निवासियों द्वारा एक वर्ष में अर्जित शुद्ध कारक आय का मौद्रिक मूल्य।

मूल्यांकन

बाजार मूल्य (Market Price) पर मापा जाता है।

साधन लागत (Factor Cost) पर मापा जाता है।

मूल्यह्रास

इसमें मूल्यह्रास शामिल होता है।

इसमें मूल्यह्रास घटा दिया जाता है।

विदेश से आय

विदेशों से प्राप्त शुद्ध कारक आय को शामिल नहीं करता।

विदेशों से प्राप्त शुद्ध कारक आय को शामिल करता है।

मुख्य आधार

घरेलू क्षेत्र में उत्पादन।

देश के निवासियों की शुद्ध कारक आय।

41. राष्ट्रीय आय के आकलन में आने वाली किन्हीं तीन समस्याओं की व्याख्या कीजिए।

उत्तर- राष्ट्रीय आय का आकलन करते समय निम्नलिखित समस्याएँ आती हैं—

1. दोहरी गणना की समस्या: एक ही वस्तु के मूल्य को उत्पादन की विभिन्न अवस्थाओं में बार-बार जोड़ देने से राष्ट्रीय आय का वास्तविक मूल्य बढ़ जाता है। इसे दोहरी गणना कहते हैं।

2. गैर-मौद्रिक सेवाओं का मूल्यांकन: कई सेवाओं का बाजार में मौद्रिक मूल्य निर्धारित नहीं होता, जैसे गृहिणी द्वारा घर का काम करना। इसलिए ऐसी सेवाओं को राष्ट्रीय आय में शामिल करना कठिन होता है।

3. मूल्यह्रास का सही अनुमान: मशीनों, भवनों आदि की टूट-फूट या घिसावट के कारण होने वाले मूल्यह्रास का सही अनुमान लगाना कठिन होता है। इससे राष्ट्रीय आय की गणना प्रभावित होती है।

42. केंद्रीय बैंक के किन्हीं तीन कार्यों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर- केंद्रीय बैंक द्वारा किए जाने वाले मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं

1. मुद्रा जारी करना :- वर्तमान समय में संसार के प्रत्येक देश में नोट (मुद्रा ) छापने का एकाधिकार केवल केंद्रीय बैंक को ही प्राप्त होता है और केंद्रीय बैंक द्वारा जारी किए गए नोट सारे देश में असीमित विधिग्राह्म के रूप में घोषित होते हैं

2. सरकार का बैंक :- केंद्रीय बैंक सभी देशों में सरकार के बैंकर, एजेंट एवं वित्तीय परामर्शदाता के रूप में कार्य करते हैं। सरकार बैंकर के रूप में यह सरकारी विभागों के खाते रखता है तथा सरकारी कोषों की व्यवस्था करता है। यह सरकार के लिए उसी प्रकार कार्य करता है जिस प्रकार व्यवसायिक बैंक अपने ग्राहकों के लिए करते हैं। आवश्यकता पड़ने पर सरकार को बिना ब्याज के ऋण दिया जाता है।

3.  बैंकों का बैंक :- केंद्रीय बैंक देश के अन्य बैंकों के लिए बैंक का कार्य करता है। केंद्रीय बैंक अन्य बैंकों के नगद कोष का कुछ भाग अपने पास जमा के रूप में रखता है, ताकि ग्राहकों की मांग होने पर वह उनके धन की अदायगी कर सके।

43. उत्पादन संभावना वक्र (PPC) की सहायता से "क्या उत्पादन किया जाए' की केंद्रीय समस्या को समझाइए ।

उत्तर- 'क्या उत्पादन किया जाए' की केंद्रीय समस्या का सीधा संबंध अर्थव्यवस्था में सीमित संसाधनों के आवंटन से है, जिसके तहत यह तय किया जाता है कि कौन सी वस्तुओं का कितनी मात्रा में उत्पादन किया जाए। चूंकि किसी भी देश के पास संसाधन सीमित होते हैं, इसलिए वह एक साथ सभी चीजों का असीमित उत्पादन नहीं कर सकता।

उत्पादन संभावना वक्र (PPC) इस समस्या को बहुत आसानी से समझाता है।

12th ECONOMICS FIRST TERMINAL EXAMINATION  Answer Key - 2026-27

मान लीजिए एक अर्थव्यवस्था अपने सभी सीमित संसाधनों से केवल दो वस्तुओं का उत्पादन कर सकती है: 'उत्पाद A'और 'उत्पाद B'।

ऊपर दिए गए चित्र (PPC) की सहायता से हम इसे इस प्रकार समझ सकते हैं:

  • विकल्प A (संसाधनों का चरम उपयोग - उत्पाद A): यदि अर्थव्यवस्था अपने सभी संसाधनों को केवल 'उत्पाद A' बनाने में लगा देती है, तो वह बिंदु A पर होगी। यहाँ उत्पाद B का उत्पादन शून्य होगा।
  • विकल्प E (संसाधनों का चरम उपयोग - उत्पाद B): यदि सभी संसाधन केवल 'उत्पाद B' के लिए उपयोग किए जाएं, तो अर्थव्यवस्था बिंदु E पर होगी। यहाँ उत्पाद A का उत्पादन शून्य होगा।
  • बिंदु B, C और D (संतुलित विकल्प): व्यावहारिक रूप से समाज को दोनों वस्तुओं की जरूरत होती है। इसलिए वक्र (Curve) पर स्थित बिंदु B, C, या D में से किसी एक का चयन करना पड़ता है।
    • यदि समाज बिंदु B को चुनता है, तो उत्पाद A का अधिक और उत्पाद B का कम उत्पादन होगा।
    • यदि समाज बिंदु D की तरफ बढ़ता है, तो उसे उत्पाद B की अधिक मात्रा मिलेगी, लेकिन इसके लिए उसे उत्पाद A की कुछ मात्रा का त्याग (अवसर लागत) करना पड़ेगा।

'क्या उत्पादन किया जाए' की समस्या असल में PPC वक्र पर किसी एक बिंदु के चयन की समस्या है। अर्थव्यवस्था अपनी प्राथमिकताओं के आधार पर वक्र पर मौजूद किसी एक बिंदु (जैसे B, C या D) को चुनकर इस केंद्रीय समस्या का समाधान करती है।

44. उपयोगिता विश्लेषण का प्रयोग करते हुए उपभोक्ता संतुलन की शर्तों को समझाइए ।

उत्तर- उपभोक्ता संतुलन वह स्थिति है जिसमें उपभोक्ता अपनी दी हुई आय और वस्तुओं की कीमतों के आधार पर अधिकतम संतुष्टि प्राप्त करता है और अपनी खरीद में कोई परिवर्तन नहीं करना चाहता।

उपयोगिता विश्लेषण के अनुसार उपभोक्ता संतुलन की मुख्य शर्तें हैं—

1. सीमांत उपयोगिता और कीमत का अनुपात समान होना चाहिए।

दो वस्तुओं X और Y के लिए : `\frac{MU_x}{P_x}=\frac{MU_y}{P_y}`

अर्थात दोनों वस्तुओं पर खर्च किए गए प्रति रुपये की सीमांत उपयोगिता समान होनी चाहिए।

2. सीमांत उपयोगिता घटने का नियम लागू होना चाहिए : वस्तु की अधिक इकाइयों का उपभोग करने पर उसकी सीमांत उपयोगिता घटती जानी चाहिए।

3. उपभोक्ता की पूरी आय खर्च होनी चाहिए : संतुलन की स्थिति में उपभोक्ता अपनी आय का उपयोग इस प्रकार करता है कि उपलब्ध आय से अधिकतम संतुष्टि प्राप्त हो।

जब उपभोक्ता अपनी आय को विभिन्न वस्तुओं पर इस प्रकार खर्च करता है कि प्रत्येक वस्तु पर खर्च किए गए अंतिम रुपये से प्राप्त सीमांत उपयोगिता समान हो जाए, तब उपभोक्ता संतुलन में होता है।

45. माँग की कीमत लोच की व्याख्या कीजिए ।

उत्तर- मांग की कीमत लोच

ed = वस्तु की मांगी गई मात्रा में आनुपातिक परिवर्तन ÷ कीमत में आनुपातिक परिवर्तन

या 

`e_d=\left(-\right)\frac{\Delta Q}{\Delta P}\times\frac{P_0}{Q_0}`

जहाँ,

Q- मांगी गयी मात्रा

P- वस्तु की कीमत

Δ- परिवर्तन

Q0 - वस्तु की प्रारंभिक मात्रा

P0- वस्तु की प्रारंभिक कीमत

46. परिवर्तनशील अनुपात के नियम की तीन अवस्थाओं की व्याख्या कीजिए।

उत्तर - अन्य बातें समान रहने पर परिवर्तनशील अनुपात का नियम यह बतलाता है कि अन्य साधन को स्थिर रखकर एक साधन में निरंतर वृद्धि की जाती है तो उत्पादन एक सीमा तक बढ़ने के पश्चात घटने लगता है। यह अल्पकालीन उत्पादन फलन से संबंधित होता है।

प्रो. बेन्हम के अनुसार, उत्पादन के साधनों के संयोग में से एक साधन का अनुपात जैसे जैसे बढ़ाया जाता है, वैसे-वैसे एक बिंदु के बाद उस साधन का सीमांत और औसत उत्पाद घटता जाता है। M

नियम की मान्यतायें:-

(a) उत्पत्ति का अन्य साधन स्थिर तथा एक परिवर्तनशील है।

(b) परिवर्तनशील साधन की समस्त इकाईयाँ समरूप होती है।

c) स्थिर साधन अविभाज्य होते हैं।

d) तकनीकी स्तर में कोई परिवर्तन नहीं होता है।

परिवर्तनशील अनुपात के नियम की मुख्यतः तीन अवस्थायें होती हैं जिसे निम्नांकित चित्र द्वारा दर्शाया जा सकता है-

12th Dumka Economics Deep Model Question Solution 2025-26

A) बढ़ते प्रतिफल की अवस्था-

प्रथम अवस्था में स्थिर साधन के साथ जैसे जैसे परिवर्तनशील साधन की इकाईयों में वृद्धि की जाती है, हमें बढ़ता हुआ उत्पादन प्राप्त होता है। परिवर्तनशील साधनों में वृद्धि होने पर स्थिर साधनों का पूर्ण विदोहन संभव होता है। आरंभ में TP, AP तथा MP तीनों बढ़ते हैं। अतः इस को बढ़ते प्रतिफल की अवस्था कहा जाता है।

B) घटते प्रतिफल की अवस्था-

द्वितीय अवस्था में AP तथा MP दोनों घट रहे हैं किंतु धनात्मक होते है। इस अवस्था का समापन उस बिंदु पर होता है यहाँ TP अधिकतम एवं MP शून्य होता है। परिणामस्वरूप TPबढ़ता है किंतु घटती दर से बढ़ता है। अतः इस अवस्था को घटते प्रतिफल की अवस्था कहा जाता है।

C) ऋणात्मक प्रतिफल की अवस्था-

तृतीय अवस्था में MP शून्य से कम अर्थात् ऋणात्मक हो जाता है। जिसके कारण TP घटने लगती है। AP भी घटती है, किंतु घनालक होती है। घटती कुल उत्पादकता ऋणात्मक सीमांत उत्पादकता के कारण इस अवस्था को ऋणात्मक प्रतिफल की अवस्था कहा जाता है।

उपर्युक्त तीनों अवस्थाओं के कारण इस नियम को उत्पादन का घटता बढ़ता नियम अथवा उत्पादन का आधुनिक ह्रासमान सिद्धांत के नाम से भी जाना जाता है।

Section – D (4 x 5=20)

47. राष्ट्रीय आय (NNP at FC) ज्ञात कीजिए। नीचे दिए गए आंकड़ों के आधार पर राष्ट्रीय आय (NNP at FC) की गणना कीजिए।:

मद

राशि (₹ करोड़)

कर्मचारियों का पारिश्रमिक

950

लगान

350

ब्याज

300

लाभ

400

स्वरोजगार व्यक्तियों की मिश्रित आय

450

विदेशों से शुद्ध कारक आय

40

मूल्य ह्रास

90

उत्तर -

घरेलू कारक आय (NDP at FC)

NDPFC​=कर्मचारियों का पारिश्रमिक+लगान+ब्याज+लाभ+मिश्रित आय

NDPFC​=950+350+300+400+450 =2450 करोड़

राष्ट्रीय आय (NNP at FC)

NNPFC​= NDPFC​​+विदेशों से शुद्ध कारक आय

NNPFC​=2450+40 =2490 करोड़ रुपये​

अतः राष्ट्रीय आय (NNP at FC) = ₹2,490 करोड़।

48. द्वि-क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था में आय के चक्रीय प्रवाह को चित्र सहित समझाइए ।

उत्तर - दो क्षेत्रकीय अर्थव्यवस्था में केवल दो क्षेत्र - फर्म व परिवार होते हैं। परिवार फर्मों को परिवार फर्मों को साधन सेवाएं प्रदान करते हैं, बदले में फार्म साधन सेवाओं का भुगतान परिवारों को करती है। इसी प्रकार फर्म परिवारों को वस्तुएं और सेवाएं प्रदान करती है तथा परिवार वस्तुओं और सेवाओं का भुगतान फर्म को करते हैं। परिवार उत्पादक क्षेत्र को भूमि, श्रम, पूंजी तथा उद्यम प्रदान करते हैं। फर्म परिवारों को मजदूरी, लगान, व्याज व लाभ के रूप में भुगतान करती है। इसे निम्न प्रकार दर्शा सकते हैं।

49. वाणिज्यिक बैंकों द्वारा साख सृजन की प्रक्रिया को एक संख्यात्मक उदाहरण सहित समझाइए ।

उत्तर- वर्त्तमान समय में व्यापारिक बैंक मुद्रा का केवल लेन-देन ही नहीं करता बल्कि साख का निर्माण भी करता है।

प्रो. हॉम के अनुसार बैंकों की जमाएँ दो प्रकार की होती हैं प्राथमिक जमाएँ और व्युत्पन्न जमा। प्राथमिक जमाएँ वे जमाएँ होती है जो जमाकर्ताओं द्वारा बैंक वास्तविक मुद्रा के रूप में जमा की जाती है। जब बैंक किसी व्यक्ति को ऋण देता है, तब वह बैंक अपने बैंक में उसके खातें में ऋण राशि को डाल देता है तब उस खाते में बैंक द्वारा लिखी गई धनराशि व्युत्पन्न जमा कहलाती है। व्युत्पन्न जमा साख जमा का परिणाम होता है, क्योंकि बैंक अपने नकद कोष के आधार पर ही साख प्रदान करता है इसलिए इन व्युत्पन्न जमाओं को साख जमा भी कहते है।

बैंक जितना अधिक ऋण देता है, उतना ही अधिक साख जमाएँ उत्पन्न होती है। इस प्रकार ऋण जमाओं को उत्पन्न करते है और जमाएँ ऋणों को जन्म देती है।

मान लीजिए:

  • प्रारंभिक जमा = ₹1,000 करोड़
  • नकद आरक्षित अनुपात = 20%

तब बैंक ₹1,000 करोड़ में से ₹200 करोड़ आरक्षित रखेगा और ₹800 करोड़ ऋण देगा।

यदि ₹800 करोड़ फिर बैंकिंग प्रणाली में जमा हो जाते हैं, तो उसका 20% यानी ₹160 करोड़ रिजर्व रखा जाएगा और ₹640 करोड़ आगे ऋण दिया जाएगा।

इसी प्रकार प्रक्रिया चलती रहेगी—

चरण

नई जमा (₹ करोड़)

20% रिजर्व

नया ऋण

1

1,000

200

800

2

800

160

640

3

640

128

512

4

512

102.4

409.6

…

…

…

…

 साख गुणक`=\frac1{C R R}=\frac1{20\%}=\frac1{0.20}=5`

अतः कुल जमा: 1000×5=₹5,000 करोड़​

और कुल साख सृजन: 5000−1000=₹4,000 करोड़​

20% आरक्षित अनुपात पर ₹1,000 करोड़ की प्रारंभिक जमा से वाणिज्यिक बैंक अधिकतम ₹5,000 करोड़ की कुल जमा और ₹4,000 करोड़ की अतिरिक्त साख का सृजन कर सकते हैं।

50. उत्पादन संभावना वक्र (PPC) के चित्र की सहायता से अर्थव्यवस्था की केंद्रीय समस्याओं को समझाइए।

उत्तर- उत्पादन संभावना वक्र (PPC) वह वक्र है जो दिए गए संसाधनों और तकनीक के आधार पर दो वस्तुओं के अधिकतम संभावित उत्पादन-संयोजनों को दर्शाता है।

PPC की सहायता से अर्थव्यवस्था की निम्न तीन केंद्रीय समस्याओं को समझा जा सकता है:

1. क्या उत्पादन किया जाए- अर्थव्यवस्था के संसाधन सीमित हैं, इसलिए यह तय करना पड़ता है कि कौन-सी वस्तुओं का कितना उत्पादन किया जाए। उदाहरण के लिए, उपभोक्ता वस्तुओं और पूँजीगत वस्तुओं के बीच चुनाव करना पड़ता है।

2. कैसे उत्पादन किया जाए- यह तय करना होता है कि वस्तुओं का उत्पादन श्रम-प्रधान तकनीक से किया जाए या पूँजी-प्रधान तकनीक से। उपलब्ध संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग के लिए उचित तकनीक का चयन किया जाता है।

3. किसके लिए उत्पादन किया जाए- उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं का वितरण किस प्रकार और किन लोगों के बीच किया जाए, यह भी एक केंद्रीय समस्या है। यह आय और क्रय-शक्ति के वितरण से संबंधित है।

PPC से निष्कर्ष

·         वक्र पर बिंदु: संसाधनों का पूर्ण और कुशल उपयोग।

·         वक्र के अंदर बिंदु: संसाधनों का अपूर्ण/अकुशल उपयोग।

·         वक्र के बाहर बिंदु: वर्तमान संसाधनों और तकनीक से प्राप्त करना संभव नहीं।

PPC मुख्य रूप से यह स्पष्ट करता है कि सीमित संसाधनों और असीमित आवश्यकताओं के कारण अर्थव्यवस्था को चुनाव करना पड़ता है। इसी चुनाव से “क्या, कैसे और किसके लिए उत्पादन किया जाए” जैसी केंद्रीय समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।

51. उदासीनता वक्र विश्लेषण की सहायता से उपभोक्ता संतुलन को चित्र सहित समझाइए ।

उत्तर- एक उपभोक्ता सन्तुलन की अवस्था में तब होता है जब वह अपनी सीमित आय की सहायता से वस्तुओं की दी गयी कीमत पर खरीदकर अधिकतम सन्तुष्टि प्राप्त करने में सफल हो जाता है। उपभोक्ता की कीमत रेखा उपभोक्ता की आय एवं वस्तुओं की दी गयी कीमतों से निर्धारित होती है। प्राप्त कीमत रेखा के साथ उपभोक्ता ऊँचे अधिमान वक्र पर पहुँचने का प्रयास करता है। उपभोक्ता का संतुलन उस बिंदु पर होता है जहा उपभोक्ता के सन्तुलन की दोनों शर्तें एवं निम्न मान्यताएं पूरी होती है

मान्यताएं

i. दो वस्तु है जिनकी कीमत और उपभोक्ता की आय स्थिर है।

ii. MRS की दर घटती हुई है।

iii. उपभोक्ता एक विवेकशील प्राणी है जो अपनी संतुष्टि को अधिकतम करना चाहता है।

iv. उपभोक्ता को विभिन्न अधिमान संयोगो की पूरी जानकारी है।

उपभोक्ता के सन्तुलन की शर्ते -

i. उदासीनता वक्र कीमत रेखा को स्पर्श करे इसका अर्थ है की मात्रात्मक रूप में X वस्तु की Y वस्तु के लिए सीमान्त प्रतिस्थापन दर X तथा Y वस्तुओं की कीमतों के अनुपात के बराबर होनी चाहिए

IC वक्र की ढाल = बजट रेखा की ढाल

ie. MRSxy = Px/ Py

ii. अधिमान वक्र मूल बिंदु की ओर उन्नतोदर इसका अर्थ है की संतुलन बिंदु पर MRSxy घटती हुई होनी चाहिए।

12th Dumka Economics Deep Model Question Solution 2025-26

रेखा चित्र से स्पष्ट है कि उपभोक्ता का संतुलन e बिंदु पर प्राप्त होगा। क्योंकि इस बिंदु पर उपभोक्ता अधिकतम संभव संतुष्टि IC3 को प्राप्त कर रहा है। दी गई आय पर उपभोक्ता a,b,c तथा d संयोग को भी खरीद सकता है किंतु उनसे प्राप्त संतुष्टि IC3 की तुलना में कम होंगे। उपभोक्ता को IC4 के बिंदु पर और अधिक संतुष्टि प्राप्त होगी, किंतु दी गई है पर वह C4 को प्राप्त नहीं कर सकता है। अतः दी गई आय पर उपभोक्ता को अधिकतम संभव संतुष्टि IC3 के e बिंदु पर प्राप्त होगी। जहां उपभोक्ता संतुलन की दोनों शर्तें पूरी हो रही हैं- अधिमान वक्र बजट रेखा को स्पर्श कर रहा है एवं अधिमान वक्र मूल बिंदु की ओर उन्नतोदर है।

52. किसी वस्तु की माँग को प्रभावित करने वाले कारकों की व्यख्या कीजिए।

उत्तर- मांग को प्रभावित करने वाले तत्व-

i. वस्तु की कीमत- किसी वस्तु की कीमत और मांग के बीच विपरीत संबंध पाया जाता है अर्थात कम कीमत पर लोगों द्वारा वस्तु की अधिक मात्रा की मांग की जाती है एवं विलोमशः

ii. अन्य वस्तु की कीमत- अन्य वस्तु की कीमत किसी विशेष वस्तु की मांग को दो तरह से प्रभावित करती है। एक वस्तु की कीमत में वृद्धि से किसी विशेष वस्तु की मांग बढ़ जात है. यह स्थानापत्र वस्तु होती है। जैसे चाप एवं कॉफी ।

अन्य वस्तु की कीमत में वृद्धि से किसी विशेष वस्तु की मांग में कमी हो जाती है ये पूरक वस्तु कहलाती है। जैसे कार एवं पेट्रोल

iii. उपभोक्ता की आय- सामान्यतः एक उपभोक्ता की आप और सामान्य वस्तु की मांग के बीच प्रत्यक्ष एवं सीधा संबंध पाया जाता है अर्थात आय में वृद्धि से वस्तु की मांग बढ़ जाती है। उपभोक्ता की आप और घटिया या गिफिन वस्तुओं की मांग के बीच विपरीत संबंध पाया जाता है अर्थात आय में वृद्धि से इन वस्तु की मांग घट जाती है।

iv. रुचि एवं अधिमान- किसी वस्तु की मांगी गई मात्रा एवं उपभोक्ता की रुचि तथा अधिमान के बीच प्रत्यक्ष संबंध पाया जाता है यदि किसी वस्तु के लिए उपभोक्ता की रूचि और अधिमान पक्ष में हो तो उस वस्तु की मांग अधिक होगी।

v. भविष्य में कीमत संबंधी आशा- किसी वस्तु की मांगी गई मात्रा और उसकी भविष्य में कीमत संबंधी आशा के बीच प्रत्यक्ष और सीधा संबंध पाया जाता है। अर्थात यदि उपभोक्ता यह आशा करता है कि किसी वस्तु की कीमत निकट भविष्य में कम होगी तो वह उस वस्तु की वर्तमान मांग कम कर देगा एवं विलोमश:।

vi. सरकारी नीति- सरकार किसी वस्तु पर कर लगाकर उसकी मांग को कम या सब्सिडी देकर किसी वस्तु की मांग को बढ़ा सकती है। कर लगाने से वस्तु की कीमत में वृद्धि हो जाती है जबकि सब्सिडी देने पर वस्तु की कीमत में कमी आती है।

vii. जनसंख्या- वस्तु क मांगी गई मात्रा एवं जनसंख्या के बीच सीधा संबंध पाया जाता है जनसंख्या में वृद्धि से वस्तु की मांग बढ़ जाती है जबकि जनसंख्या में कर्मी से वस्तु की मांग कम हो जाती है। 

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