12th Hindi Core 10. छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख JCERT/JAC Reference Book

12th Hindi Core 10. छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख JCERT/JAC Reference Book

 

12th Hindi Core 10. छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख JCERT/JAC Reference Book

10. छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख

कवि परिचय

उमाशंकर जोशी का जन्म 21 जुलाई 1911 को गुजरात के साबरकांठा में हुआ था। इनका उपनाम वासुकि है।

ये गुजराती भाषा के प्रसिद्ध साहित्यकार हैं। इनकी औपचारिक शिक्षा खंडों में पूरी हुई। असहयोग आंदोलन में भाग लेने के कारण इनको विद्यालय छोड़ना पड़ा। बाद में मुम्बई विश्वविद्यालय से इन्होंने एम. ए. किया।

उमाशंकर जोशी प्रतिभावान कवि और साहित्यकार थे। 1931 में प्रकाशित काव्य संकलन 'विश्वशांति' से उनकी प्रसिद्धि एक समर्थ कवि के रूप में हो गयी थी।

काव्य के अतिरिक्त उन्होंने साहित्य के अन्य अंगों, यथा कहानी, नाटक, उपन्यास, आलोचना, निबंध आदि को भी पोषित किया।

आधुनिक युग के साहित्यकारों में जोशी जी का विशिष्ट स्थान है। जोशी जी अध्यापक और संपादक भी रहे। वे गुजरात विश्वविद्यालय में प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष रहे। फिर वहां के वाइस चांसलर भी रहे। उन्हें अनेक विश्वविद्यालयों में डी. लिट् की मानद उपाधि प्रदान की गई।

इन्हें भारतीय परंपरा का गहरा ज्ञान था। 'अभिज्ञानशाकुंतलम' और 'उत्तररामचरित' का इन्होंने गुजराती में अनुवाद किया। इन्होंने गुजराती कविता को प्रकृति से जोड़ा, आम जीवन के अनुभव से परिचित कराया और नई शैली प्रदान की।

प्रमुख रचनाएँ:- विश्वशांति, गंगोत्री, निशीथ, गुलेपोलांड, प्राचीना, आतिथ्य और वसंत वर्ष, महाप्रस्थान (काव्य-संग्रह)। सापनाभरा, शहीद (कहानी)। श्रावणी मेंणो, विसामो (उपन्यास) आदि।

पुरस्कारः- ज्ञानपीठ पुरस्कार (1987), साहित्य अकादमी पुरस्कार (1973) आदि।

इन्हें गुजराती काव्य में नए युग का प्रवर्तक माना जाता है। साहित्य के इस महान विभूति का निधन 19 दिसंबर 1988 को मुम्बई में हो गया।

पाठ-परिचय

'छोटा मेरा खेत' कविता उमाशंकर जोशी द्वारा रचित 'निशीथ' काव्य-संग्रह से संकलित है। इस कविता में कवि ने कवि कर्म को रूपक के माध्यम से कृषक के समान बताया है।

जिस प्रकर से किसान अपने खेतों में बीज को बोता है और बीज अंकुरित होकर पल्लवित पुष्पित होते हैं। फसल के पकने पर उसकी कटाई होती है और फिर उससे अन्न की प्राप्ति होती है।

काव्य-निर्माण भी फसल के समान ही है। कागज का पन्ना एक चौकोर खेत के समान है। इसमें भावनात्मक आँधी के प्रभाव से किसी क्षण कविता रूपी बीज बोया जाता है। कल्पना के द्वारा शब्द रूपी अंकुर फूटते हैं और कविता रूपी फसल तैयार होती है।

कविता रूपी फसल में अलौकिक रस की सृष्टि होती है जो अनन्तकाल तक पाठक और श्रोता को अपने रस में डुबोये रखती है। यह ऐसी फसल है जिसका रस कभी समाप्त नहीं होता।

'बगुलों के पंख' कविता में जोशी जी ने प्रकृति के सौंदर्य का चित्रण किया है। इसमें प्राकृतिक सौंदर्य को प्रतीकों के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया है।

आकाश में काले-काले बादल छाए हुए हैं। शाम का समय है। सफेद पंखों वाले बगुले पंक्ति-बद्ध होकर आकाश में विचरण कर रहे हैं। कवि इस नयनाभिराम दृश्य को देखकर अत्यंत आनंदित अनुभव करता है तथा उस क्षण को वह अपनी स्मृति में सदैव के लिए अंकित कर लेना चाहता है।

व्याख्या:- छोटा मेरा खेत

काव्यांश - 1

छोटा मेरा खेत चौकोना

कागज का एक पन्ना,

कोई अंधड़ कहीं से आया

क्षण का बीज वहां बोया गया।

कल्पना के रसायनों को पी

बीज गल गया निःशेषः

शब्द के अंकुर फूटे,

पल्लव-पुष्पों से नमित हुआ विशेष।

2. शब्दार्थ :- चौकोना-चार कोनों वाला, चौकोर। अंधड़-आंधी का तेज झोंका। क्षण-अवसर। रसायन-खाद, पदार्थ, भोजन। निःशेष-पूरी तरह। अंकुर-नन्हा पौधा। पल्लव-पुष्प-कोमल पत्ते और पुष्प। नमित-झुका हुआ। विशेष-खास तौर पर।

3. प्रसंग-प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'आरोह भाग-2' में संकलित कविता 'छोटा मेरा खेत' से उद्धृत है। इसके रचयिता गुजराती कवि उमाशंकर जोशी हैं। इस अंश में कवि ने खेत के माध्यम से कवि-कर्म का सुंदर चित्रण किया है।

4. व्याख्या- कवि कहता है कि उसे कागज का पन्ना एक चौकोर खेत की तरह लगता है। उसके मन में कोई भावनात्मक आवेग उमड़ा और वह उसके खेत में विचार का बीज बोकर चला गया। यह विचार का बीज कल्पना के सभी सहायक पदार्थों को पी गया तथा इन पदार्थों से कवि का अहं समाप्त हो गया। जब कवि का अहं समाप्त हो गया तो उससे सर्वजनहिताय रचना का उदय हुआ तथा शब्दों के अंकुर फूटने लगे। फिर उस रचना ने एक संपूर्ण रूप ले लिया। इसी तरह खेती में भी बीज विकसित होकर पौधे का रूप धारण कर लेता है तथा पत्तों व फूलों से लदकर झुक जाता है।

5. विशेष-

(i) कवि ने कल्पना के माध्यम से रचना-कर्म को व्यक्त किया है।

(ii) रूपक अलंकार है। कवि ने खेती व कविता की तुलना सूक्ष्म ढंग से की है।

(iii) 'पल्लव-पुष्प', 'गल गया' में अनुप्रास अलंकार है।

(iv) खड़ी बोली में सुंदर अभिव्यक्ति है।

(v) दृश्य बिंब का सुंदर उदाहरण है।

(vi) प्रतीकात्मकता का समावेश है।

काव्यांश 2

झूमने लगे फल,

रस अलौकिक,

अमृत धाराएँ फुटतीं

रोपाई क्षण की,

कटाई अनंतता की

लुटते रहने से ज़रा भी नहीं कम होती।

रस का अक्षय पात्र सदा का

छोटा मेरा खेत चौकोना।

2. शब्दार्थ:-

अलौकिक-दिव्य, अद्भुत। रस- साहित्य का आनंद, फल का रस। रोपाई-छोटे-छोटे पौधों को खेत में लगाना। अमृत धाराएँ- रस की धाराएँ। अनंतता- सदा के लिए। अक्षय- कभी नष्ट न होने वाला। पात्र बर्तन, काव्यानंद का स्रोत।

3. प्रसंग- प्रस्तुत काव्यांश हमारी की पाठ्यपुस्तक 'आरोह भाग-2' में संकलित कविता 'छोटा मेरा खेत' से उद्धृत है। इसके रचयिता गुजराती कवि उमाशंकर जोशी हैं। इस कविता में कवि ने खेत के माध्यम से कवि-कर्म का सुंदर चित्रण किया है।

4. व्याख्या- कवि आगे कहता है कि जब पन्ने रूपी खेत में कविता रूपी फल झूमने लगता है तो उससे अद्भुत रस की अनेक धाराएँ फूट पड़ती हैं जो अमृत के समान लगती हैं। यह रचना पल भर में रची थी, परंतु उससे फल अनंतकाल तक मिलता रहता है। कवि इस रस को जितना लुटाता है, उतना ही यह बढ़ता जाता है। कविता के रस का पात्र कभी समाप्त नहीं होता। कवि कहता है कि उसका कविता रूपी खेत छोटा-सा है, उसमें रस कभी समाप्त नहीं होता।

5. विशेष-

(i) कवि-कर्म का सुंदर वर्णन है।

(ii) कविता का आनंद शाश्वत है।

(iii) 'छोटा मेरा खेत चौकाना' में रूपक अलंकार है।

(iv) तत्सम शब्दावलीयुक्त खड़ी बोली है।

(v) 'रस' शब्द के अर्थ हैं-काव्य रस और फल का रस। अतः यहाँ श्लेष अलंकार है।

बगुलों के पंख

काव्यांश 1

नभ में पाँती-बाँधे बगुलों के पंख,

चुराए लिए जातीं वे मेरी आँखे।

कजरारे बादलों की छाई नभ छाया,

तैरती साँझ की सतेज श्वेत काया

हौले हौले जाती मुझे बाँध निज माया से।

उसे कोई तनिक रोक रक्खो।

वह तो चुराए लिए जाती मेरी आँखे

नभ में पाँती-बँधी बगुलों की पाँखें।

2. शब्दार्थ:- नभ-आकाश । पाँती-पंक्ति। कजरारे-काले । साँझ-संध्या, सायं । सतेज-चमकीला, उज्जवल । श्वेत- सफेद । काया-शरीर। हौले-हौले-धीरे-धीरे। निज-अपनी। माया-प्रभाव, जादू। तनिक-थोड़ा। पाँखें-पंख।

3. प्रसंग- प्रस्तुत कविता 'बगुलों के पंख' हमारी पाठ्यपुस्तक 'आरोह भाग-2' में संकलित है। इसके रचयिता उमाशंकर जोशी हैं। इस कविता में सौंदर्य की नयी परिभाषा प्रस्तुत की गई है तथा मानव-मन पर इसके प्रभाव को बताया गया है।

4. व्याख्या- कवि आकाश में छाए काले- काले बादलों में पंक्ति बनाकर उड़ते हुए बगुलों के सुंदर-सुंदर पंखों को देखता है। वह कहता है कि मैं आकाश में पंक्तिबद्ध बगुलों को उड़ते हुए एकटक देखता रहता हूँ। यह दृश्य मेरी आँखों को चुरा ले जाता है। काले-काले बादलों की छाया नभ पर छाई हुई है। सायंकाल चमकीली सफेद काया उन पर तैरती हुई प्रतीत होती है। यह दृश्य इतना आकर्षक है कि अपने जादू से यह मुझे धीरे-धीरे बाँध रहा है। मैं उसमें खोता जा रहा हूँ। कवि आहवान करता है कि इस आकर्षक दृश्य के प्रभाव को कोई रोके। वह इस दृश्य के प्रभाव से बचना चाहता है, परंतु यह दृश्य तो कवि की आँखों को चुराकर ले जा रहा है। आकाश में उड़तें पंक्तिबद्ध बगुलों के पंखों में कवि की आँखें अटककर रह जाती हैं।

5. विशेष-

(i) कवि ने सौंदर्य व सौंदर्य के प्रभाव का वर्णन किया है।

(ii) 'हौले-हौले' में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।

(iii) खड़ी बोली में सहज अभिव्यक्ति है।

(iv) बिंब योजना है।

(v) 'आँखें चुराना' मुहावरे का सार्थक प्रयोग है।

प्रश्न अभ्यास

1. छोटे चौकोने खेत को कागज का पन्ना कहने में क्या अर्थ निहित है?

उत्तरः- इसमें कवि ने कृषक और कवि-कर्म को समानान्तर माना है। यही कारण है कि वह कागज के पन्ने को चौकोर खेत मानता है। जिस प्रकार से खेत में बीज बोया जाता है तत्पश्चात उसमें अन्न रूपी फसल तैयार होती है। उसी प्रकार से कागज रूपी खेत पर ही कवि अपनी भावना, शब्द, अलंकार, रस, कल्पना आदि को साकार रूप प्रदान करता है। यही कारण है कि कवि ने छोटे चौकोने खेत को कागज का पन्ना कहा है।

2. रचना के संदर्भ में अंधड़ और बीज क्या है?

उत्तर:-रचना के संदर्भ में 'अंधड़' का तात्पर्य-भावनात्मक आँधी से है। जब तक कोई भाव कवि के मन को आंदोलित न कर दे तब तक काव्य-सृजन सम्भव ही नहीं है।

'बीज' से तात्पर्य है-भाव के लिए निश्चित शब्दों का चयन। जिसे कवि कागज पर पिरोकर अपनी कल्पना को साकार रूप प्रदान करता है।

3. रस के अक्षयपात्र से कवि ने रचनाकर्म की किन विशेषताओं की ओर इंगित किया है?

उत्तरः-कवि ने रचना कर्म को रस का अक्षय पात्र कहा है। क्योंकि कविता में निहित रस, छंद, भाव, शब्द आदि अनन्तकाल तक सहृदयों को आंदोलित करते रहते हैं। उसका क्षय कभी नहीं होता। वह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक हस्तांतरित होता रहता है।

4. व्याख्या करें-

1. शब्द के अंकुर फूटे, पल्लव-पुष्पों से नमित हुआ विशेष।

2. रोपाई क्षण कि कटाई अनंतता की लूटते रहने से जरा भी कम नहीं होती।

उत्तर:-इन दोनों के लिए व्याख्या खंड देखें।


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