Class 12 Sociology Jac Board 2026 Answer key

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झारखण्ड अधिविद्य परिषद्

ANNUAL INTERMEDIATE EXAMINATION - 2026

SOCIOLOGY (Optional)

General Instructions / सामान्य निर्देश

1. इस प्रश्न-पुस्तिका में दो भाग भाग-A तथा भाग-B

2. भाग-A में 30 अंक के बहुविकल्पीय प्रश्न तथा भाग-B में 50 अंक के विषयनिष्ठ प्रश्न हैं।

3. परीक्षार्थी को अलग से उपलब्ध कराई गई उत्तर-पुस्तिका में उत्तर देना है।

4. भाग-A - इसमें 30 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं जिनके 4 विकल्प (A, B, C तथा D') हैं। परीक्षार्थी को उत्तर-पुस्तिका में सही उत्तर लिखनी है। सभी प्रश्न अनिवार्य हैं। प्रत्येक प्रश्न 1 अंक का है। गलत उत्तर के लिए कोई अंक काटा नहीं जाएगा।

5. भाग-B - इस भाग में तीन खण्ड-A, B तथा C हैं। इस भाग में अति लघु उत्तरीय, लघु उत्तरीय तथा दीर्घ उत्तरीय प्रकार के विषयनिष्ठ प्रश्न हैं। कुल प्रश्नों की संख्या 22 है।

खण्ड-A  - प्रश्न संख्या 31-38 अति लघु उत्तरीय हैं। किन्हीं 6 प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक प्रश्न 2 अंक का है।

खण्ड-B - प्रश्न संख्या 39-46 लघु उत्तरीय हैं। किन्हीं 6 प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक प्रश्न 3 अंक का है। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर अधिकतम 150 शब्दों में दें।

खण्ड-C - प्रश्न संख्या 47-52 दीर्घ उत्तरीय हैं। किन्हीं 4 प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक प्रश्न 5 अंक का है। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर अधिकतम 250 शब्दों में दें।

6. परीक्षार्थी यथासंभव अपने शब्दों में ही उत्तर दें।

7. परीक्षार्थी परीक्षा भवन छोड़ने के पहले अपनी उत्तर पुस्तिका वीक्षक को अनिवार्य रूप से लौटा दें।

8. परीक्षा समाप्त होने के उपरांत परीक्षार्थी प्रश्न-पुस्तिका अपने साथ लेकर जा सकते हैं।

भाग-A (बहुविकल्पीय प्रश्न)

प्रश्न संख्या 1 से 30 तक बहुविकल्पीय प्रकार हैं। प्रत्येक प्रश्न के चार विकल्प हैं। सही विकल्प चुनकर उत्तर पुस्तिका में लिखें। प्रत्येक प्रश्न 1 अंक का है। 1x30=30

1. देश में प्रथम महिला भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी कौन बनी ?

(A) बिमला मेहरा

(B) किरण बेदी

(C) कंवलजीत देओल

(D) कंचन चौधरी भट्टाचार्य

2. उदारीकरण का क्या अर्थ है ?

(A) समाजवाद

(B) मनुष्य की उदारता

(C) काफी उन्नति होना

(D) मुक्त बाजार व्यवस्था

3. परियोजना कार्य सामाजिक अनुसंधान की एक नवीन एवं .......... शाखा है।

(A) प्राचीन

(B) सैद्धान्तिक

(C) व्यावहारिक

(D) इनमें से कोई नहीं

4. भारतीयों का सरकारी अभिलेखों तक पहुँच बनाने के लिए "सूचना का अधिकार अधिनियम" कब पारित हुआ ?

(A) 2003

(B) 2004

(C) 2005

(D) 2007

5. तिभागा आन्दोलन के प्रमुख नेता कौन

(A) भवानी सेन

(B) रतन सेन

(C) योगेश चन्द्र चटर्जी

(D) इनमें से कोई नहीं

6. निम्न में से किससे बलवन्त राय मेहता समिति का सम्बन्ध है ?

(A) भूमि सूधार

(B) नक्सल आंदोलन

(C) पंचायती राज

(D) बाल श्रमिक

7. नगरीकरण का सामाजिक प्रभाव है

(A) आवास समस्या

(B) प्रदूषण

(C) अपराधों में वृद्धि

(D) इनमें से सभी

8. 'तीन अवस्थाओं का सिद्धान्त' निम्न में से किसने दिया है ?

(A) कार्ल मार्क्स

(B) ऑगस्त कॉम्टे

(C) मैक्स वेबर

(D) दुर्खीम

9. सांस्कृतिक विलम्बता का सिद्धान्त किसने प्रतिपादित किया ?

(A) बियरस्टिड

(B) टायलर

(C) आगबर्न

(D) क्रोबर

10. टिहरी आंदोलन का नेतृत्व किसने किया

(A) अमृता देवी

(B) गौरा देवी

(C) सुन्दरलाल बहुगुणा

(D) इनमें से कोई नहीं

11. जंगल बचाओ आन्दोलन किस प्रदेश से सम्बन्धित है ?

(A) झारखण्ड

(B) उत्तर प्रदेश

(C) राजस्थान

(D) मध्य प्रदेश

12. पूँजीपती वर्ग को शोषक वर्ग किसने कहाँ है ?

(A) मार्क्स

(B) सोरोकिन

(C) कॉम्टे

(D) दुर्खीम

13. भारत में साम्प्रदायिकता का मुख्य कारण क्या है ?

(A) अपराधी मनोवृत्तियाँ

(B) निर्धनता एवं बेरोजगारी

(C) राजनीतिक स्वार्थ

(D) सांस्कृतिक भिन्नताएँ

14. स्त्रीयों की निम्न स्थिति का प्रमुख कारण चुनें

(A) अशिक्षा

(B) संयुक्त परिवार

(C) हिन्दू धर्म

(D) जाति व्यवस्था

15. 'द वेल्थ ऑफ नेशन्स' के लेखक हैं

(A) थॉमस रॉबर्ट माल्थस

(B) एडम स्मिथ

(C) बी०आर० अम्बेडकर

(D) एम०एन० श्रीनिवास

16. निम्नलिखित में से शिकार एवं खाद्य संग्रहण जनजाति संमूह है

(A) कुकी

(B) भील

(C) मुण्डा

(D) गोंड

17. अंग्रेजी शब्द "Caste" किससे उधार लिया गया ?

(A) ग्रीक शब्द

(B) पुर्तगाली शब्द

(C) भारतीय शब्द

(D) इनमें से कोई नहीं

18. जाति व्यवस्था है एक

(A) बंद व्यवस्था

(B) भीड़ व्यवस्था

(C) खुली व्यवस्था

(D) वर्ण व्यवस्था

19. निम्न में से कौन एक कृषक समाज है ?

(A) गाँव

(B) मोहल्ला

(C) शहर

(D) इनमें से कोई नहीं

20. समाजशास्त्र की स्थापना किस वर्ष हुई

(A) 1820

(B) 1838

(C) 1797

(D) 1828

21. दिल्ली में सिखों के विरुद्ध दंगा किस वर्ष हुआ था ?

(A) 1990

(B) 1992

(C) 1994

(D) 1984

22. प्रजातंत्र की विशेषता है

(A) कानुन की दृष्टि में समानता

(B) प्रेस की स्वतंत्रता

(C) सार्वभौमिक मताधिकार

(D) इनमें से सभी

23. निम्न में से कौन सी सामाजिक समस्या नहीं है ?

(A) बाल श्रम

(B) तस्करी

(C) भ्रष्टाचार

(D) आधुनिकीकरण

24. किसने सीमांत व्यक्ति की अवधारणा दी है ?

(A) जॉनसन

(B) मर्टन

(C) रॉबर्ट ई० पार्क

(D) पारसन्स

25. जनजाति समाजों में निम्न में से क्या नहीं पाया जाता है ?

(A) श्रम विभाजन

(B) महिला की आजादी

(C) युवा गृह

(D) सरल अर्थव्यवस्था

26. नातेदारी की कितनी श्रेणियाँ हैं ?

(A) दो

(B) चार

(C) तीन

(D) पाँच

27. दादी नातेदारी की किस श्रेणी के अंतर्गत आती

(A) प्राथमिक

(B) तृतीयक

(C) द्वितीयक

(D) इनमें से कोई नहीं

28. क्षेत्रबाद की समस्या का मूल कारण है

(A) सांस्कृतिक भिन्नता

(B) जैविक भिन्नताएँ

(C) आर्थिक भिन्नता

(D) नैतिक भिन्नता

29. दलित वर्ग कल्याण लीग की स्थापना किसने की ?

(A) महात्मा गाँधी

(B) जगजीवन राम

(C) रामविलास पासवान

(D) बी०आर० अम्बेडकर

30. साम्प्रदायिकता जन्म देती है

(A) हिंसा को

(B) आतंकवाद को

(C) (A) और (B) दोनों

(D) जातिवाद को

भाग-B खण्ड - A (अति लघु उत्तरीय प्रश्न)

किन्हीं छः प्रश्नों के उत्तर दें। 2x6=12

31. संप्रदायवाद क्या है ?

उत्तर - सांप्रदायिकता शब्द का अर्थ है - धार्मिक समुदाय में भिन्नता । अर्थात किसी धर्म विशेष को महत्व देकर शेष समुदाय के हृदय में उस धर्म विशेष के प्रति नकरात्मक विचार उत्पन्न करना ।

32. जजमानी व्यवस्था की परिभाषा दीजिए ।

उत्तर - विलियम वाइजर ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक "The Hindu Jajmani System" में इसे सबसे पहले परिभाषित किया। उनके अनुसार, यह एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें गाँव की प्रत्येक जाति दूसरी जाति के लिए कुछ सेवाएँ प्रदान करती है और बदले में उसे अनाज या अन्य वस्तुएँ मिलती हैं।

33. कृषक आंदोलन से क्या तात्पर्य है ?

उत्तर - कृषि नीतियों में सुधार करने की भावना से किए गए आंदोलन को कृषक आंदोलन कहते हैं। विश्व भर में अलग-अलग समय पर किसानों एवं कृषि श्रमिकों द्वारा कृषि नीतियों में परिवर्तन के लिए आंदोलन किए जाते रहे हैं। भारत में भी कृषि आंदोलन कई दशकों से चला आ रहा है। सन 1900 के पूर्व में पड़ने वाले अकाल के फलस्वरुप भारतीय किसानों एवं कृषि-श्रमिकों ने कृषि आंदोलन की शुरूआत की थी।

34. क्षेत्रवाद पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें ।

उत्तर - हैडविंग हिंट्ज (Hedwing Hintze) का कथन है कि "क्षेत्रवाद एक क्षेत्र विशेष के व्यक्तियों के विशेष अनुरोग तथा पक्षपातपूर्ण धारणाओं से सम्बद्ध है..............और इसलिए इसके अन्तर्गत आधुनिक, राजनीतिक तथा सांस्कृतिक जीवन की विविध समस्याओं, जैसे- अल्पसंख्यकों की समस्या, प्रशासनिक विकेन्द्रीकरण, स्थानीय स्वशासन, स्वदेश-पूजा तथा स्थानीय देश-भक्ति आदि का समावेश होता है।"

35. राजनीतिक दल से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर- राजनैतिक उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु संगठित समूह राजनीतिक दल कहलाता है। काँग्रेस पार्टी, भारतीय जनता पार्टी इत्यादि राजनैतिक दलों के नाम हैं। ये देश में सरकार बनाकर नितियाँ निर्धारित करते हैं।

36. उदारीकरण क्या है ?

उत्तर - उदारीकरण का अर्थ ऐसे नियंत्रण में ढील देना या उन्हें हटा लेना है, जिससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिले। उदारीकरण में वे सारी क्रियाएँ सम्मिलित हैं, जिसके द्वारा किसी देश के आर्थिक विकास में बाधा पहुँचाने वाली आर्थिक नीतियों, नियमों, प्रशासनिक नियंत्रणों, प्रक्रियाओं आदि को समाप्त किया जाता है या उनमे शिथिलता दी जाती है।

37. जनसंचार के साधन के रूप में रेडियो की उपयोगिता लिखिये ।

उत्तर - जनसंचार के एक सशक्त, सुलभ और किफायती श्रव्य माध्यम के रूप में रेडियो की उपयोगिता अतुलनीय है। यह निरक्षरों, दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों और दृष्टिबाधित लोगों तक सूचना, शिक्षा व मनोरंजन (जैसे- समाचार, संगीत, नाटक, सरकारी योजनाएं) तुरंत पहुँचाता है। बिजली या इंटरनेट न होने पर भी यह आपदाओं के समय संचार बनाए रखता है, जिससे इसकी प्रासंगिकता आज भी कायम है।

38. जनसंचार के चार साधनों का वर्णन करें

उत्तर- भारत में जनसंचार के प्रमुख साधनाग्रलिखित हैं-

(1) टेलीविजन- भारत में सन् 1965 से अस्तित्व में आया टेलीविजन आधुनिक युग का सर्वाधिक प्रभावशाली जनसंचार का साधन है। इसके द्वारा देश-विदेश को सूचनाएँ समाचार के माध्यम से जन-जन तक पहुँचायी जाती हैं। इस पर अनेक मनोरंजक कार्यक्रम, जानकारियाँ, वार्ताएँ, सीरियल, खोजी कार्यक्रम, विज्ञान की नवीनतम जानकारियाँ, विशिष्ट प्रतिभाओं से परिचय आदि कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं जो लोगों को अत्यधिक प्रभावित करते हैं।

(2) रेडियो- रेडियो पर किसी बात को मात्र सुना जा सकता है, पर देखा नहीं जा सकता। इसलिए यह जनसंचार का महत्वपूर्ण श्रव्य माध्यम है। रेडियो के द्वारा हम देश-विदेश के समाचार, फिल्मी गीत, शास्त्रीय संगीत, सखेती सम्बन्धी जानकारी विज्ञान की नवीन खोजों आदि के कार्यक्रम सुनकर ज्ञान के क्षेत्र में प्रवीण हो जाते हैं।

(3) समाचार पत्र एवं पत्रिकाएँ - भारत देश में हजारों की संख्या में समाचार पत्र-पत्रिकाएँ प्रकाशित होती है। भारत में प्रचलित लगभग सभी भाषाओं में समाचार पत्र और पत्रिकाएँ प्रकाशित होती हैं। हिन्दी और अंग्रेजी भाषा में सर्वाधिक पत्र-पत्रिकाएँ प्रकाशित होती है। समाचार पत्र देश-विदेश के समाचारों के साथ-साथ अनेक रोचक साहित्य यथा साक्षात्कार, वार्ता, पहेली, ऐतिहासिक तथ्य, सम्पादकीय आदि प्रकाशित करते हैं और विभिन्न विज्ञापनों के साथ-साथ शेयर बाजार, वस्तुओं, धातुओं आदि के भाव, तापमान, भावी सम्भावनाएँ आदि भी प्रकाशित करते हैं जिससे लोगों के ज्ञानवर्द्धन के साथ-साथ सामाजिक-आर्थिक राजनीतिक जागरूकता उत्पन्न होती है।

(4) सिनेमा या चलचित्र- भारतीय फिल्मों के विषय समय के साथ बदलते रहे हैं। इनमें प्रायः समसामयिक समस्याओं को ही विषय बनाया जाता है और उनका समाधान भी प्रस्तुत किया जाता है। दहेजप्रथा, बलात्कार, राजनीतिक, भ्रष्टाचार, काला धन, धार्मिक आस्था की आड़ में लूट, धर्म का व्यवसायीकरण, पाखण्ड, व्यभिचार, नारी जागरूकता, शिक्षा में भ्रष्टाचार आदि विषयों को दिखाकर जनसामान्य में जागरूकता का संचार किया जाता है। सदैव सत्य की जीत दिखाकर मानव को सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी जाती है। इस प्रकार फिल्में सामाजिक परिवर्तन में प्रभावी रूप से कार्य करती हैं और ये जनसंचार का सशक्त माध्यम है।

खण्ड -B (लघु उत्तरीय प्रश्न)

किन्हीं छः प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर अधिकतम 150 शब्दों में दें। 3x6=18

39. विकलांगता क्या है ?

उत्तर- संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन के अनुसार विकलांग व्यक्तियों में वे लोग शामिल होते हैं जिनको शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक तथा इन्द्रियों सम्बन्धी क्षमताएँ लम्बी अवधि के लिए प्रभावित है और जिनके कारण उनकी समाज के विभिन्न कार्यों में प्रभावशाली तरीके से पूर्ण भागीदारी में बाधा पड़ती है। वर्तमान में 21 प्रकार की विकलांगता स्वीकार की गई है।

40. बाजार एक सामाजिक संस्था है। स्पष्ट कीजिए ।

उत्तर- बाजार एक सामाजिक संस्था है जिनका नियन्त्रण कुछ विशेष सामाजिक समूहों के हाथों में होता है। प्रत्येक समाज में व्यक्ति द्वारा की जाने वाली आर्थिक प्रक्रियाएँ उस समाज के मूल्यों, मानकों एवं विचारधाराओं से प्रभावित होती हैं। समाज की मूलभूत आवश्यकताएँ बाजार के स्वरूप को प्रभावित करती हैं तथा बाजार के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। पूर्व औपनिवेशिक काल में बाजार व्यवस्था जाति आधारित समाज व्यवस्था का ही एक अंग थी।

41. पितृसत्ता क्या है ? उसके प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए ।

उत्तर : अंग्रेजी में यह शब्द दो यूनानी शब्दों पैटर और आर्के को मिलाकर बना है। पैटर का मतलब है– पिता और आर्के का मतलब है – शासन। यानी कि ‘पिता का शासन।’

पितृसत्तात्मक व्यवस्था की विशेषताएं निम्नलिखित हैं-

1. पितृसत्ता एक सामाजिक प्रणाली है।

2. यह एक पारिवारिक प्रणाली है जिसमें पुरुष की भूमिकाएँ स्त्रियों की भूमिकाओं से ऊपर होती हैं।

3. पितृसत्तात्मक व्यवस्था में समाज, अर्थव्यवस्था, राज्यव्यवस्था, धर्म इत्यादि में पुरुष का ही वर्चस्व होता है।

4. पितृसत्तात्मक व्यवस्था में पुरुष समस्त गतिविधियों का केंद्र बिंदु होता है अर्थात परिवार के समस्त क्रियाएं उसी के चारों ओर घूमती हैं।

5. पितृसत्तात्मक व्यवस्था में समस्त महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय पुरुषों के द्वारा ही लिए जाते हैं।

6. इस प्रकार की व्यवस्था में आर्थिक मुद्दों पर पुरुषों का अधिकार होता है।

42. पश्चिमीकरण की प्रक्रिया को परिभाषित कीजिए ।

उत्तर - डॉ. एम. एन. श्रीनिवास (Dr. M.N. Srinivas) ने पश्चिमीकरण की व्याख्या करते हुए लिखा है, "मैंने पश्चिमीकरण शब्द को ब्रिटिश राज्य के डेढ़ सौ वर्ष के शासन के परिणामस्वरूप भारतीय समाज व संस्कृति में उत्पन्न हुए परिवर्तनों के लिए प्रयोग किया है, और यह शब्द विभिन्न स्तरों जैसे प्रौद्योगिकी, संस्थाओं, विचारधारा, मूल्य आदि में घटित होने वाले परिवर्तनों का द्योतक है।"

"पश्चिमीकरण परिवर्तन की उस प्रक्रिया का द्योतक है जो कि भारतीय जनजीवन, समाज व संस्कृति के विभिन्न पक्षों में उस पश्चिमी संस्कृति के सम्पर्क में आने के फलस्वरूप उत्पन्न हुई जिसे कि अंग्रेज शासक अपने साथ लायेथे।"

43. परियोजना कार्य के तीन चरण लिखें ।

उत्तर-जब हम किसी विषय का अध्ययन करने के लिए कोई परियोजना बनाते हैं, तब हमें बहुत व्यवस्थित ढंग से अपने कार्य को पूरा करना होता है। इसके लिए विभिन्न चरणों से होकर गुजरना पड़ता है ।

वे चरण निम्नलिखित हैं-

(a) विषय का चुनाव,

(b) अध्ययन क्षेत्र का निर्धारण,

(c) सूचनाओं का चुनाव,

(d) अध्ययन की विधियों में प्रविधियों का निर्धारण,

(e) अवधारणाओं का स्पष्टीकरण,

(f) तथ्यों का संकलन,

(g) तथ्यों का संकलन,

(h) निष्कर्षीकरण या सामान्यीकरण और अंत में रिपोर्ट प्रस्तुत करना,

(i) परिशिष्ट (संदर्भ ग्रंथ सूची) आदि ।

44. सांस्कृतिक विविधता के प्रमुख चुनौती क्या हैं ?

उत्तर - भारत विविधताओं से परिपूर्ण देश है जहाँ धर्म, जाति, क्षेत्र, भाषा, जलवायु, खानपान एवं रहन सहन सम्बन्धी अनेक विभिन्नताएँ पाई जाती हैं। अपनी पृथक् और श्रेष्ठ पहचान बनाने की इच्छा विभिन्न समुदायों के मध्य संघर्ष और प्रतिस्पर्धा को जन्म देती है। देश में सांस्कृतिक विविधता से उत्पन्न चुनौतियाँ हैं-साम्प्रदायिकता, क्षेत्रवाद, जातिवाद और पितृसत्ता आदि।

45. हरित क्रांति के कोई तीन सकारात्मक प्ररिणाम लिखें ।

उत्तर - हरित क्रांति के तीन प्रमुख सकारात्मक परिणाम निम्नलिखित हैं -

1. खाद्यान्न में आत्मनिर्भरता: उच्च उपज देने वाले बीजों (HYV) के उपयोग से गेहूँ और चावल के उत्पादन में भारी वृद्धि हुई, जिससे भारत खाद्यान्न आयात करने के बजाय निर्यात करने की स्थिति में आ गया।

2. किसानों की आय में वृद्धि: कृषि उत्पादकता बढ़ने से विशेषकर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों की आय में काफी वृद्धि हुई, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार हुआ।

3. कृषि का आधुनिकीकरण: खेती में ट्रैक्टर, थ्रेशर, पंपिंग सेट और आधुनिक उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा मिला, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में मशीनीकरण और कृषि आधारित उद्योगों का विकास हुआ।

46. भूमंडलीकरण से आप क्या समझते?

उत्तर- भूमंडलीकरण का तात्पर्य विश्व की अर्थव्यवस्था में एकीकरण की प्रक्रिया से है।

खण्ड -C (दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)

किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर अधिकतम 250 शब्दों में दें। 5x4=20

47. स्वतंत्र भारत में महिला आंदोलन पर एक निबन्ध लिखें ।

उत्तर : 20वीं सदी के प्रारंभ में महिलाओं के कई संगठन सामने आए। इनमें विपेंस इंडियन एसोसिएशन (WIA-1917) ऑल इंडिया विमेंस कॉफ्रेंस (AIWC-1926), नेशनल काउंसिल फॉर विमेन इन इंडिया – (NCWI-1925) शामिल हैं। हालांकि इनमें से कई की शुरुआत सीमित कार्य क्षेत्र से हुई, तथापि इनका कार्यक्षेत्र समय के साथ विस्तृत हुआ। ऐसा अक्सर माना जाता है कि केवल मध्यम वर्ग ही शिक्षित महिलाएँ ही इस प्रकार के आंदोलनों में शरीक होती हैं। किंतु संघर्ष का एक भाग महिलाओं की सहभागिता के विस्मृत इतिहास को याद करना रहा है। औपनिवेशिक काल में जनजातीय तथा ग्रामीण क्षेत्रों में प्रारंभ होने वाले संघर्षों तथा क्रांतियों में महिलाओं ने पुरुषों के साथ भाग लिया। अतएव न केवल शहरी महिलाओं ने बल्कि ग्रामीण तथा जनजातीय क्षेत्रों की महिलाओं ने भी महिलाओं के सशक्तिकरण वाले राजनीतिक आंदोलनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। 1970 के दशक के मध्य में भारत में महिला आंदोलन का दूसरा चरण प्रारंभ हुआ। उस काल में स्वायत्त महिला आंदोलनों में वृद्धि हुई। इसका अर्थ यह हुआ कि इस प्रकार के महिला आंदोलन राजनीतिक दलों अथवा उस प्रकार के महिला संगठन जिनके राजनीतिक दलों से संबंध थे, स्वतंत्र थे।

शिक्षित महिलाओं ने सक्रियतापूर्वक जमीनी राजनीति में हिस्सा लिया। इसके साथ ही उन्होंने महिला आंदोलनों को भी प्रोत्साहित किया। महिलाओं से संबंधित नए मुद्दों पर अब ध्यान केंद्रित किए जाने लगे-जैसे, महिलाओं के ऊपर हिंसा, विद्यालयों के फार्म पर पिता तथा माता दोनों के नाम, कानूनी परिवर्तन, जैसे-भूमि अधिकार, रोजगार, दहेज तथा लैंगिक प्रताड़ना के विरुद्ध अधिकार इत्यादि । इसके उदाहरण हैं, मथुरा बलात्कार कांड (1978) तथा माया त्यागी बलात्कार कांड (1980)। दोनों के ही खिलाफ व्यापक आंदोलन हुए। अतएव यह बात भी स्वीकार की गई है कि महिलाओं के आंदोलनों को लेकर भी विभिन्नता रही है। महिलाएँ विभिन्न वर्गों से संबद्ध होती हैं। अतः इनकी आवश्यकताएँ तथा चिंताएँ भी अलग-अलग होती हैं।

48. वर्ग क्या है ? भारत में वर्ग व्यवस्था की विशेषताओं का वर्णन करें ।

उत्तर - सामाजिक वर्ग जन्म के अतिरिक्त किसी भी आधार पर बना हुआ व्यक्तियों का ऐसा समूह है जो सामाजिक स्थिति में अन्य समूहों से भिन्न है, जैसे- डॉक्टर वर्ग, धनी वर्ग, निर्धन वर्ग, शिक्षक वर्ग, श्रमिक वर्ग, आदि।

वर्ग या वर्ग व्यवस्था की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

(1) अर्जित स्थिति - वर्ग व्यवस्था में व्यक्ति अपनी सामाजिक स्थिति जन्म के आधार पर नहीं अपितु अपने गुणों से अर्जित करता है। एक निम्न वर्ग का व्यक्ति अपनी उपलब्धियों से उच्च वर्ग का हो सकता है।

(2) खुली व्यवस्था- वर्ग की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह भी है कि वर्ग एक खुली व्यवस्था है। कोई भी व्यक्ति अपने गुणों और प्रतिभा से धनी होकर निम्न वर्ग से उच्च वर्ग में जा सकता है। इसके विपरीत कोई भी व्यक्ति अपने दुर्गुणों के कारण और निर्धन होने पर उच्च वर्ग से निम्न में चला जाता है।

(3) जन्म का महत्व नहीं- वर्ग व्यवस्था जाति की तरह जन्म पर आधारित नहीं होती। वर्ग में जन्म का महत्व नहीं होता। व्यक्ति भले ही किसी भी वर्ग में जन्म ले, वह किस वर्ग में रहेगा- यह उसकी शिक्षा, योग्यता, कुशलता आदि पर निर्भर करता है।

(4) समूहों का संस्तरण- प्रत्येक समाज में वर्गों की एक श्रेणी होती है। इसमें उच्च, मध्यम एवं निम्न वर्ग होता है। उच्च वर्ग के सदस्यों की सामाजिक प्रतिष्ठा एवं अधिकार अन्य वर्गों की तुलना में सर्वाधिक होते हैं। इससे सदस्य संख्या कम होती है। निम्न वर्ग में लोगों की संख्या अधिक होती है और उनकी प्रतिष्ठा एवं अधिकार भी सबसे कम होते हैं।

(5) उपवर्ग - प्रत्येक वर्ग में उपवर्ग भी पाये जाते हैं। जैसे-उच्च-उच्चवर्ग, उच्च मध्यम वर्ग एवं निम्न मध्यम वर्ग आदि होते हैं।

(6) कम स्थिरता- चूँकि वर्ग व्यक्ति के गुणों पर निर्भर करता है। अतः यह अपेक्षाकृत कम स्थिर है। व्यक्ति गुणों को अर्जित कर अपनी स्थिति में समय-समय पर परिवर्तन करता रहता है।

(7) वर्ग चेतना- वर्ग व्यवस्था में सामाजिक वर्ग के सदस्यों में वर्ग चेतना पायी जाती है। यही चेतना व्यक्ति के व्यवहार को निश्चित करती है। वे कुछ समूहों को अपने से नीचे और कुछ को ऊँचा मानते हैं।

(8) सीमित सामाजिक सम्बन्ध- एक वर्ग के सदस्यों के बीच घनिष्ठ सम्बन्ध होते हैं। जबकि दूसरे वर्ग के सदस्यों के साथ उनके सम्बन्ध उतने घनिष्ठ नहीं होते। एक वर्ग के सदस्य दूसरे वर्ग के सदस्यों के साथ एक निश्चित सामाजिक दूरी बनाये रखते हैं।

(9) पृथक जीवन- स्तर प्रत्येक वर्ग के रीति-रिवाज, रहन-सहन और आचार-व्यवहार आदि का एक निश्चित ढंग होता है।

(10) अन्तर्वर्गीय विवाह- यद्यपि वर्ग में जाति की तरह कठोरता नहीं पायी जाती फिर भी इसे जाति से कुछ ही कम कह सकते हैं। अधिकतर व्यक्ति अपने वर्ग में ही विवाह करना पसन्द करता है।

49. चिपको आन्दोलन पर प्रकाश डालें ।

उत्तर-राजस्थान के जोधपुर शहर से 25 किलोमीटर दूर 'खेजरली' गाँव की एक महिला अमृता बिश्नोई ने तत्कालीन जोधपुर रिसायत के महाराज अभय सिंह द्वारा भेजे गये लकड़हारे को खेजरी का पेड़ काटने नहीं दिया ओर वापस भेद दिया । उसने यह कहा कि पेड़ काटना ही है तो पहले मुझे काटना हो और यह कहते हुए अमृता बिश्नोई खेजरी के पेड़ से चिपक गयी । यहाँ से चिपको आंदोलन आरंभ हुआ ।

अमृता बिश्नोई द्वारा खेजरी वृक्षों की रक्षा के लिए प्रारंभ किया गया चिपको आंदोलन समाप्त नहीं हुआ। सन् 1972 में पुनः इस आंदोलन की पुनरावृत्ति बचनी देवी एवं गौरा देवी के त्याग से आरंभ हुआ । इस प्रकार चिपको आंदोलन वृक्षों की रक्षा से संबंधित है । सुंदर लाल बहुगुण ने चिपको आंदोलन को एक वैचारिक आधार प्रदान किया।

50. उदारीकरण की चुनौतियों का वर्णन करें ।

उत्तर- उदारीकरण की चुनौतियाँ (Challenges of Liberaliza-tion) - उदारीकरण के अनेक लाभों के बाद भी भारत में इस प्रक्रिया के फलस्वरूप हमारे सामने अनेक नयी चुनौतियाँ पैदा हो गई हैं। वास्तव में, जब कभी अर्थव्यवस्था की आधारभूत संरचना बदलती है तो परम्परागत व्यवसायों का महत्व कम होने लगता है। एक बड़ी संख्या में लोग बदलती हुई दशाओं से जल्दी ही अनुकूलन नहीं कर पाते। यही वह दशा है जिसके कारण हमारे सामने सामाजिक और आर्थिक जीवन में कुछ समस्याएँ गम्भीर रूप लेने लगी हैं-

(i) भारतीय समाज के सामने सबसे बड़ी चुनौती गरीबी को दूर करने की है। सरकार भी यह मानती है कि देश में लगभग 28 प्रतिशत लोग आज भी गरीबी रेखा से नीचे रहकर जीवन बिता रहे हैं। गैर-सरकारी अनुमानों के अनुसार यह संख्या लगभग 35 प्रतिशत है। स्वतन्त्रता के बाद सरकार ने गरीबी को कम करने के लिए जो विकास योजनाएँ आरम्भ कीं, उदारीकरण के कारण उन योजनाओं को लागू करने में बाधा पहुँचने लगी। धीरे-धीरे डीजल, मिट्टी के तेल, बीजों और खाद पर दी जाने वाली सरकारी आर्थिक सहायता में कमी होने के कारण कृषि के विकास और गरीबी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

(ii) उदारीकरण के फलस्वरूप रोजगार की समस्या अभी भी बहुत व्यापक गम्भीर है। उदारीकरण के फलस्वरूप ऐसे लोगों की माँग बढ़ रही है जो इन्जीनियरिंग, प्रबन्ध वित्त, कम्प्यूटर और संचार में प्रशिक्षित हों। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में इसके अनुसार अधिक परिवर्तन न हो सकने के कारण युवा पीढ़ी के लोग बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं। पिछले 10-15 वर्षों से औद्योगिक प्रतिष्ठानों और कार्यालयों से एक बड़ी संख्या में लोगों की छंटनी होने से भी इस समस्या में वृद्धि हुई है।

51. हरित क्रांति क्या है ? इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों की विस्तृत व्याख्या करें ।

उत्तर- हरित क्रांति का तात्पर्य उच्च उपज देने वाले किस्म के बीजों (HYV seeds), कीटनाशकों और बेहतर प्रबंधन तकनीकों के उपयोग से फसल उत्पादन में वृद्धि से है।

हरित क्रान्ति के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव इस प्रकार हैं-

(i) खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भरता- हरित क्रान्ति का सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रभाव यह देखने को मिला कि देश खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर हो गया। जबकि पूर्व में तुलनात्मक रूप कम जनसंख्या होने के बावजूद खाद्यान्न का विदेशों से आयात करना पड़ता था। यह हरित क्रान्ति का ही परिणाम है कि आज हमारा देश कई उपजों को आयात करने की बजाय उनका निर्यात करने लगा है।

(ii) जीवन-स्तर में सुधार- कृषि उत्पादन के क्षेत्र में अप्रत्याशित सफलता मिलने से किसानों की प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि हुई। परिणामतः ग्रामीण क्षेत्र में गरीबी की दशा में सुधार आया और लोगों के जीवन स्तर में सुधार हुआ। जीवन स्तर में सुधार होने से ग्रामीण लोगों के स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास व उपभोग के क्षेत्र में काफी बदलाव आया। इसीलिए यह कहा जाता है कि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने का श्रेय हरित क्रान्ति को ही दिया जाता है, क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार कृषि है। आज भी देश की लगभग 65% जनसंख्या कृषि या उससे जुड़े उद्योग-धन्धों के माध्यम से अपना जीवनयापन कर रही है।

(iii) सामाजिक-आर्थिक गतिशीलता- हरित क्रान्ति के परिणामस्वरूप व्यक्तियों की जीवनशैली में तीव्र परिवर्तन देखने को मिले हैं। नागरिकों की आर्थिक स्थिति में सुधार होने से न केवल उनकी जीवनशैली में परिवर्तन आया है, बल्कि जातीय बन्धनों में भी शिथिलता आयी है परिणामतः भारतीय सामाजिक व्यवस्था में जाति आधारित सामाजिक व्यवस्था वर्ग का रूप लेती जा रही है। सामाजिक स्तरीकरण में आये इस परिवर्तन के कारण समाज में गतिशीलता के प्रभाव में वृद्धि हुई है।

(iv) राजनीतिक चेतना का विकास- हरित क्रान्ति के प्रभावस्वरूप जहाँ ग्रामीण भारत में किसानों की सामाजिक आर्थिक स्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव आया है, उसका परिणाम ग्रामीणों में राजनीतिक चेतना के विकास के रूप में सामने आया है। दीपांकर गुप्ता ने पश्चिमी आन्ध्रप्रदेश पर किये गये अध्ययन में यह निष्कर्ष निकाला कि हरित क्रान्ति के परिणाम स्वरूप किसानों में राजनीतिक चेतना का विकास हुआ।

(v) किसानों की मानसिकता में बदलाव- यह हरित क्रान्ति का ही प्रभाव है जिसने भाग्यवादी एवं परम्परावादी भारतीय किसान को नवाचार तथा आधुनिकता को अपनाने के लिए तैयार किया। हरित क्रान्ति से लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार होने से उनकी जीवन शैली को एक नया आयाम मिला जिससे न केवल उनके रहन-सहन में परिवर्तन आया बल्कि उनकी मानसिकता भी पूरी तरह से बदल चुकी है, आज किसान देश की हर अच्छी-बुरी स्थिति में अपनी भागीदारी कर रहे हैं। वे अब स्वतन्त्र और शोषण मुक्त हो चुके हैं और अपने अधिकारों के प्रति भी जागरूक हुए हैं।

52. आधुनिकीकरण की प्रक्रिया से आप क्या समझते हैं ? उसके प्रमुख लक्षणों की चर्चा करें।

उत्तर - आधुनिकीकरण एक निरंतर चलने वाली सामाजिक-सांस्कृतिक प्रक्रिया है, जो पारंपरिक समाजों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तकनीक, औद्योगिकीकरण और तर्कसंगतता के माध्यम से अधिक विकसित, उन्नत और नगरीय समाज में बदलती है। यह जीवन स्तर में सुधार, शिक्षा, और लोकतांत्रिक मूल्यों को अपनाकर मानवीय विकास पर केंद्रित है।

आधुनिकीकरण के प्रमुख लक्षण:

1. तर्कसंगत दृष्टिकोण- अंधविश्वास और रूढ़ियों को छोड़कर तार्किक, वैज्ञानिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना।

2. औद्योगिकीकरण और तकनीक- उत्पादन के आधुनिक साधनों, मशीनों, और उन्नत तकनीक का व्यापक उपयोग।

3. नगरीकरण- ग्रामीण जीवन शैली से शहरी जीवन शैली की ओर स्थानांतरण, जहाँ बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं हों।

4. सामाजिक गतिशीलता- पारंपरिक जाति-आधारित संरचना के स्थान पर योग्यता-आधारित समाज, जहाँ व्यक्ति की स्थिति उसकी मेहनत से तय होती है।

5. धर्मनिरपेक्षता- सामाजिक और राजनीतिक जीवन में धर्म की भूमिका कम होना और धार्मिक सहिष्णुता में वृद्धि।

6. व्यक्तिवाद और स्वतंत्रता- व्यक्ति की गरिमा, अधिकारों और स्वतंत्रता को बढ़ावा मिलना।

7. शिक्षा का प्रसार- तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा के माध्यम से कौशल विकास।

आधुनिकीकरण परंपराओं को पूरी तरह नष्ट नहीं करता, बल्कि उन्हें नए समय के अनुरूप ढालता है।

Class XII Sociology

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