Summary (सारांश)
About the Poet
William Blake was
a poet, painter and engraver. He abhorred the rationalism and materialism of
his times. What he saw and painted were human beings beset with evil, yet
striving for the divine within them. Blake's lyrics appeared in two
sets of volumes:
Songs
of Innocence (from which The Divine Image has been chosen) and Songs of
Experience (from which The Human Abstract has been taken) repre- William Blake
senting the two contrary states of the human soul. Most of the poems
(1757-1827) in the first volume have counterparts in the second.
कवि
के बारे में-
विलियम
ब्लेक एक कवि, चित्रकार और आकृति उकेरने वाले थे। उन्होंने अपने समय के विवेकवाद और
भौतिकवाद को घृणास्पद माना। उन्होंने जो कुछ लिखा और चित्रकारी की उसमें मनुष्य को
बुराइयों से भरा हुआ पाया लेकिन फिर भी वे अपने अन्दर समाहित देवत्व को प्राप्त करने
के लिए संघर्ष कर रहे थे।
ब्लेक
के गीत दो खण्डों में प्रकाशित हुए : Songs of Innocence (जिसमें से यह कविता The
Divine Image ली गई है) और Songs of Experience (जिसमें से कविता The Human
Abstract ली गई है)। ये दोनों खण्ड मानवीय आत्मा की दो विपरीत स्थितियों का प्रतिनिधित्व
करते हैं। प्रथम खण्ड की अधिकतर कविताओं के द्वितीय खण्ड में प्रतिरूप शामिल हैं।
I. The Divine Image
About the Poem-
The
poem The Divine Image by William Blake is a religious poem.
This poem has been included in the collection of poems
by Blake “Songs of Innocence'. In the poem the poet William
Blake says that human soul has some sparks of God. God is our father and we the
human beings are the children of him. He possesses the virtues of mercy, pity,
love and peace. Thus, they are divine virtues. When these virtues are possessed
by human beings, they also become divine. God dwells in the people in whom
these virtues dwell. The poet equates these qualities with God as well as man.
कविता
के बारे में-
विलियम
ब्लेक की कविता 'द डिवाइन इमेज' एक धार्मिक कविता है। यह कविता विलियम ब्लेक के कविता
संग्रह 'Songs of Innocence' में शामिल की गई है। कविता में, कवि विलियम ब्लेक कहता
है कि मानवीय आत्मा में ईश्वर की शक्ति होती है। ईश्वर हमारा पिता है और हम मनुष्य
उसके पुत्र हैं। उसमें दया, करुणा, प्रेम और शान्ति जैसे गुण होते हैं । इस प्रकार
वे दैवीय गुण हैं। जब ये गुण मनुष्य में विद्यमान रहते हैं तो वे भी दैवीय हो जाते
हैं। ईश्वर उन लोगों के शरीर में निवास करता है जिनमें ये गुण विद्यमान रहते हैं। कवि
इन गुणों को ईश्वर और मनुष्य दोनों के लिए समान मानता है।
कठिन शब्दार्थ एवं हिन्दी अनुवाद ।
To
Mercy, Pity..............thankfulness. (Page 97)
कठिन
शब्दार्थ-distress (डिस्ट्रेस) = great pain, अत्यधिक पीड़ा। virtues (वचू) = high
moral standards, उच्च नैतिकता वाला आचरण। delight (डिलाइट्) = great pleasure, अत्यन्त
प्रसन्नता।
हिन्दी
अनुवाद-कवि कहता है कि सभी लोग अपनी कठिनाइयों और परेशानी में दया, करुणा, शान्ति और
प्रेम प्राप्त करने के लिए (भगवान से) प्रार्थना करते हैं। इससे उनके कष्ट कम हो जाते
हैं । क्योंकि ये गुण प्रसन्नता का स्रोत हैं । अतः लोग इन गुणों के प्रति अपनी कृतज्ञता
प्रदर्शित करते हैं। (यह मानकर कि, इन गुणों के कारण उनके जीवन से कष्ट समाप्त अथवा
कम हो गये हैं।)
For
Mercy...................and care. (Page 97)
कठिन
शब्दार्थ-Father (फाद(र्)) = (here) God, (यहाँ पर) ईश्वर । care (केअ(र्)) =
protection, सुरक्षा।
हिन्दी
अनुवाद-कवि कहता है कि इन चार दया, करुणा, शान्ति और प्रेम रूपी दैवीय गुणों के कारण
ईश्वर को परम पिता का स्थान प्राप्त है (ईश्वर, मनुष्य का परम पिता है) और यही चारों
गुण दया, करुणा, शान्ति और प्रेम के कारण मनुष्य ईश्वर का सबसे प्रिय पुत्र है तथा
ईश्वर के सान्निध्य में रहने के कारण वह आवश्यक रूप से इन चारों गुणों को धारण करता
है।
For
Mercy has.........................human dress. (Page-97)
कठिन
शब्दार्थ-form (फॉम्) = shape, स्वरूप। divine (डि'वाइन्) = related to God, ईश्वरीय,
दैवीय।
हिन्दी
अनुवाद-कवि कहता है (दया, करुणा, शांति और प्रेम के प्रति कृतज्ञता इसलिए व्यक्त की
जाती है क्योंकि) दया में मानवीय हृदय होता है अर्थात् दया मनुष्य के हृदय में विद्यमान
रहती है । करुणा मानवीय गुणों से युक्त चेहरे पर दिखाई देती है अर्थात् करुणा व्यक्ति
के चेहरे पर विद्यमान रहती है। प्रेम मानवीय देवत्व का गुण है अर्थात् प्रेम दैवीय
है तथा शान्ति हमारे बाह्य आवरण के रूप में होती है। अर्थात् (जिस प्रकार मनुष्य के
वस्त्र उसे बाह्य रूप से सौम्यता प्रदान करते हैं) शान्ति मनुष्य को बाह्य सौम्यता
प्रदान करती है।
Then
every... .............................Peace. (Page-99)
कठिन
शब्दार्थ-clime (क्लाइम्) =pleasant climatic conditions, सुखद जलवायु। prays (प्रेज)
= speak to God, प्रार्थना करना।
हिन्दी
अनुवाद-कवि कहता है कि जब कोई भी व्यक्ति (वह चाहे किसी भी स्थान, जलवायु का हो) अपनी
परेशानी में ईश्वर से प्रार्थना करता है तो वह मनुष्य के दैवीय गुणों से युक्त स्वरूप
से प्रार्थना करता है अर्थात् वह प्रेम, दया, करुणा और शांति के लिए ही ईश्वर से प्रार्थना
करता है।
And
all must... ........................................dwelling too. (Page-99)
कठिन
शब्दार्थ-heathen (हीद्न्) = atheist, नास्तिक। Turk (टक्) = a citizen of Turky, तुर्की
का नागरिक। Jew (जू) = a citizen of Israel, यहूदी। dwell (ड्वेल) = to live or
stay, रहना, निवास करना।
हिन्दी
अनुवाद-कवि कहता है प्रत्येक व्यक्ति को मनुष्य मात्र से प्रेम करना चाहिए चाहे वे
नास्तिक हों अथवा तुर्क हों। (अथवा यहूदी हों अर्थात् मनुष्य को मनुष्य से प्रेम करना
चाहिए क्योंकि मानवीय शरीर दिव्य है) क्योंकि दया, करुणा, प्रेम, शान्ति के दिव्य गुण
जहाँ रहते हैं वहीं पर ईश्वर का निवास होता है।
II. The Human Abstract
About the Poem-
The
Human Abstract by William Blake is a part of songs of experience
which was first published in 1794. This poem is an example of
William Blake's metaphysical poetry. He is also known for his
romantic poetry and prophetic works. The poem presents the conflict between
humanity and divinity when it analyses different values like mercy, pity, peace
and love. This poem is a contrary counterpart of the poem. The Divine Image, a
poem from Songs of Innocence.
The
poem presents the eighteenth century thought that morality is a natural human
product and has no divine origin. He writes that except natural impulse, there
is no morality existed. He ironically says that pity, mercy and peace have no
real values without poverty, unhappiness and fear. He says that cruelty and
humanity grow into the tree of mystery or moral law.
Thus, Blake seems to be realistic poet in this poem.
कविता
के बारे में-
विलियम
ब्लेक द्वारा लिखित 'द ह्यूमन ऐब्सट्रैक्ट' कविता 'Songs of Experience' का एक भाग
है जिसका प्रथम प्रकाशन 1794 में हुआ था। यह कविता विलियम ब्लेक के Metaphysical काव्य
का एक उदाहरण है। वह अपने प्रेम के काव्य और भविष्यवादी कार्यों के लिए भी जाना जाता
है । कविता मानवीयता तथा दैवीयता के बीच संघर्ष को प्रस्तुत करती है जब इसमें विभिन्न
मूल्यों जैसे दया, करुणा, शान्ति और प्रेम की व्याख्या की जाती है।
यह
कविता The Divine Image कविता का विरोधाभासी स्वरूप है जो कि Songs of Innocence में
प्रकाशित हुई थी। कविता अठारहवीं शताब्दी के इस विचार को प्रस्तुत करती है कि नैतिकता
मनुष्य का स्वाभाविक गुण है। इसका कोई दैवीय अस्तित्व नहीं है। वह लिखता है कि सिवाय
स्वाभाविक प्रक्रिया के कहीं पर नैतिकता का अस्तित्व नहीं है। वह विडम्बनापूर्ण कहता
है कि करुणा, दया और शान्ति का बिना गरीबी, दुख और भय के कोई अस्तित्व नहीं है। वह
कहता है कि क्रूरता और विनम्रता रहस्यमय पेड़ अथवा नैतिक कानून में जन्म लेती है। इस
प्रकार ब्लेक इस कविता में यथार्थवादी कवि दिखाई देता है।
कठिन शब्दार्थ एवं हिन्दी अनुवाद ।
Pity
would..........as we. (Page 99)
कठिन
शब्दार्थ-poor (पॉ(र) = having no money, गरीब । mercy (मसि) = kindness, दया।
हिन्दी
अनुवाद-(यह कविता अत्यधिक व्यंग्यात्मक रूप में लिखी गई है जिसमें उन लोगों के पाखण्ड
को बताया गया है जो नैतिकता के नाम पर किसी न किसी प्रकार से कष्टों को घटाने के बजाय
बढ़ाते रहते हैं।) कवि कहता है कि करुणा का इस संसार से अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा
यदि इस संसार से हम गरीबी ही समाप्त कर देंगे और दया भी संसार में बिल्कुल भी नहीं
बचेगी यदि संसार में सभी इतने खुश होंगे जितने हम हैं । (कवि का आशय है कि यदि संसार
से गरीबी समाप्त हो जाए और सभी लोग पूर्ण रूप से खुश हो जाएं तो करुणा और दया जैसे
गुणों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।)
And
mutual.......with care. (Page 99)
कठिन
शब्दार्थ-mutual (म्यूचुअल) = felt or done by both parties, दोनों पक्षों द्वारा समान
रूप से किया गया। knits (निट्स्) = to weave, बुनना। snare (स्नेअ(र्)) = trap, जाल
अथवा फंदा। baits (बेट्स) = food to put in hook to catch fish or birds, मछली आदि
को फंसाने के लिए चारा, प्रलोभन ।
हिन्दी
अनुवाद-कवि कहता हैं कि जो हमारा आपसी भय होता है उससे शान्ति बनी रहती है। (मनुष्य
समाज में एक-दूसरे से डरता है कि कोई गलत कार्य न हो जाए, जिससे समाज में शांति बनी
रहती है।) और शान्ति तब तक बनी रहती है जब तक स्वार्थयुक्त प्रेम समाज में न बढ़ जाए
(अर्थात् स्वार्थ बढ़ने तक शान्ति बनी रहती है)। फिर उसके बाद क्रूरता अत्यन्त चतुराई
से अपना जाल बुनना शुरू कर देती है और बड़ी सावधानी से दूसरों को फँसाने के लिए चारा
डालती है (अर्थात् दूसरों को प्रलोभन देती है)।
He
sits down.......his foot. (Page 99)
कठिन
शब्दार्थ-holy (होली) = pious, पवित्र । humility (यूमिलिटि) = humbleness, विनम्रता।
underneath (अन्ड'नीथ्) = below, under, तले में, नीचे।
हिन्दी
अनुवाद-कवि व्यंग्यात्मक लहजे में कहता है कि (जब क्रूरता को लगता है कि अब सजा मिलेगी
तो) वह अर्थात् क्रूरता को ईश्वर का भय सताता है और फिर क्रूरता उन लोगों के साथ सहानुभूति
व्यक्त करती है जिन पर उसने अत्याचार किए हैं। (यहाँ पर भी क्रूरता लोगों को छलने में
सफल हो जाती है) और उसकी आँखों से (पश्चाताप के) आँसू बहने लगते हैं। तत्पश्चात् वह
अपने आपको तुच्छ मानने लगता है। और विनम्र हो जाता है । (क्रूरता इतनी विनम्र हो जाती
है कि उससे ग्रसित लोग ये मानने लगते हैं कि वह हमारे शुभचिन्तक हैं और उनके सामने
पूर्ण समर्पण कर देते हैं।)
Soon
spreads......................Mystery. (Page99)
कठिन
शब्दार्थ-spreads (स्प्रेड्स) = to scatter in large area, बड़े क्षेत्र में फैला देना।
dismal (डिज्मल्) = depressing, निराशाजनक। Mystery (मिस्टरि) = unable to
explain, रहस्यमय । caterpillar (कैटपिल()) = a small insect, एक छोटा कीट।
हिन्दी
अनुवाद-कवि कहता है कि शीघ्र ही (क्रूरता और विनम्रता की) निराशाजनक अर्थात् दयनीय
छाया चारों ओर फैल जाती है। यह छाया अत्यन्त रहस्यमयी होती है जो कि शोषण करने वालों
द्वारा उत्पन्न की जाती है। और इसी रहस्यमय आवरण में कैटरपिलर जैसे विषैले जीव तथा
मक्खियों जैसे समाज के घातक तत्त्व पलते रहते हैं । (यहाँ पर झूठे धार्मिक लोगों के
लिए caterpillar और fly का प्रयोग किया गया है।)
And
it bears................thickest shade. (Page 99)
कठिन
शब्दार्थ-Deceit (डि'सीट्) = dishonest behaviour, धोखाधड़ी, बहकाने का प्रयास ।
ruddy (रडी) = red colour, लाल रंग । raven (रैवेन्) = black crow, काला कौआ।
thickest (थिकेस्ट्) = with extreme circumference, मोटा।
हिन्दी
अनुवाद-कवि कहता है कि यह (झूठी धार्मिक प्रथाओं के) रहस्यमय वृक्ष पर (चालबाजी, धोखाधड़ी
के) धोखे के फल लगते हैं। ये (फल) अत्यन्त गहरे रंग के और खाने में अत्यन्त मीठे होते
हैं (लोगों को जाल में फंसाने में सहायक होते हैं) और इन (धोखेबाजी से पूर्ण वृक्षों
पर) वृक्षों की घनी छाया में काले कौए (स्वर्ग का शैतान) अपने घोंसले बना लेते हैं
(ऐसे वातावरण में गलत सोच रखने वाले लोग फलते फूलते हैं अर्थात् दुर्गुणों की उपस्थिति
बढ़ जाती है)।
The
Gods.............Human Brain. (Page 101)
कठिन
शब्दार्थ-sought (सॉट्) =try to find out, प्राप्त करने की कोशिश । vain (वेन्) =
useless, व्यर्थ।
हिन्दी
अनुवाद-कवि कहता है कि इस पृथ्वी और समुद्र के सभी देवी, देवता, धर्मगुरु और सन्तों
ने इस रहस्यमय वृक्ष को खोजने की पूरी कोशिश की है। परन्तु उनकी पूरी खोज व्यर्थ हो
गई। (अर्थात् उन्हें यह वृक्ष कहीं पर भी नहीं मिला) ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि यह वृक्ष
(बाहरी प्रकृति में कहीं पर भी नहीं पाया जाता) मनुष्य के मस्तिष्क में ही उत्पन्न
होता है।
Textbook Questions and Answers
I. The Divine Image
Understanding the
1. How are these two matched poems related to each other in
content? How is the human being depicted in the Song of Innocence and how is
he/she depicted in the Song of Experience? Do we find both aspects working in
an average human being?
इन
दोनों कविताओं की विषयवस्तु किस प्रकार एक-दूसरे से सम्बन्धित है ? मनुष्य को Song
of Innocence में किस प्रकार प्रदर्शित किया गया है और उसे Song of Experience में
किस प्रकार प्रदर्शित किया गया है? क्या हम दोनों स्वरूपों को एक औसत व्यक्ति में कार्यरत
पाते हैं ?
Answer
: No doubt, both the poems are related to each other in content. Both the poems
tell us about the different virtues like pity, mercy, love and peace. In Songs
of Innocence, human being is depicted as quite innocent and the virtues like
divine virtues which become very delightful but in Songs of Experience, man is
shown full of experience and these virtues are no more divine virtues.
Human
beings are completely in the control of evils and misconceptions. According to
the poet these virtues are natural to rise in human heart. We find both the
aspects working together in an average human being because they take origin in
the human mind.
निःसन्देह,
दोनों ही कविताएं विषयवस्तु में एक-दूसरे से सम्बन्धित हैं। दोनों ही कविताएं हमें
करुणा, दया, प्रेम और शान्ति जैसे गुणों के बारे में बताती हैं । Songs of
Innocence में मनुष्य को पूरी तरह भोला-भाला प्रदर्शित किया गया है और गुणों को दैवीय
गुण बताया गया है जो कि अत्यन्त खुशियाँ प्रदान करते हैं लेकिन Songs of
Experience में, मनुष्य को अनुभव से पूर्ण बताया गया है और ये गुण अब दैवीय गुण नहीं
हैं ।
मनुष्य
पूरी तरह से बुराइयों और गलत धारणाओं के नियन्त्रण में होता है। कवि के अनुसार ये गुण
मनुष्य के हृदय में स्वाभाविक रूप से उत्पन्न होते हैं । हम पाते हैं कि ये दोनों ही
स्वरूप औसत मनुष्य में साथ-साथ कार्य करते हैं क्योंकि उनका उदय मनुष्य के मस्तिष्क
में होता है।
2. How would you explain the lines
आप
इन पंक्तियों की व्याख्या किस प्रकार करेंगे
For
Mercy has a human heart,
Pity
a human face, And Love, the human form divine,
And
Peace, the human dress.
Answer
: The above lines personify these virtues. The poet tells how important is to
have virtues in human life. These virtues are the essence of life. Through
these lines, the poet tells how these virtues effect human life. According to
the poet, mercy resides in human heart. It comes from within spontaneously
whereas pity is an attribute of face.
It
is an external expression of the feeling of heart. Love is the divine essence
itself in human form. Peace is considered to be human dress or external
covering of human being. If man has these virtues, it would be heaven on earth.
The poet says that God cannot exist apart from man. He is the creative and
spiritual power in man and these virtues are divine in nature.
उपर्युक्त
पंक्तियाँ इन गुणों का मानवीयकरण करती हैं। कवि बताता है कि इन गुणों का मनुष्य में
होना कितना महत्त्वपूर्ण है। ये गुण जीवन का सारतत्त्व हैं। इन पंक्तियों के माध्यम
से कवि बताता है कि ये गुण किस प्रकार मानव जीवन को प्रभावित करते हैं। कवि के अनुसार,
दया मनुष्य के हृदय में निवास करती है। यह मनुष्य के अन्दर स्वत: ही उत्पन्न होती है
जबकि करुणा चेहरे का गुण है। (अर्थात् चेहरे पर झलकती है) यह हृदय की
भावनाओं
की बाह्य अभिव्यक्ति है। प्रेम मानवीय स्वरूप में स्वयं दैवीय तत्त्व है । शान्ति मनुष्य
की वेशभूषा अथवा मनुष्य का बाहरी आवरण माना जाता है। यदि मनुष्य में ये गुण होंगे तो
पृथ्वी पर स्वर्ग बन जाएगा। कवि कहता है कि ईश्वर मनुष्य से अलग नहीं रह सकता है ।
वह मनुष्य में सृजनात्मक और आध्यात्मिक शक्ति है और ये गुण स्वाभाविक रूप से दैवीय
हैं।
3. How dow Mercy, Pity, Peace and Love get distorted in the
human brain?
दया,
करुणा, शान्ति और प्रेम किस प्रकार मनुष्य के मस्तिष्क में विकृत हो जाते हैं ?
Answer
: According to the poet, the fruit of deceit grows on the tree of intellect,
selfishness and cruelty along with hypocrisy. This union wrecks the world. Hard
and harsh rules are imposed on life through what calls Mystery'. It
supports those outward forms of religion which regards as the death of
the soul'.
He
recreates the myth of the tree of knowledge which gives falsehood instead of
truth and death instead of life. Thus, in bitter irony, the poet shows how
love, pity, mercy and peace get distorted and they are used as a cover for
evils or cowardly motives. Blake goes straight to the heart of the matter by
showing how hypocrisy claims to observe these cardinal virtues.
कवि
के अनुसार, धोखे का फल बुद्धि, स्वार्थ और पाखण्ड के साथ-साथ क्रूरता के वृक्ष पर उगता
है। यह संगठन संसार को तोड़ देता है। मनुष्य के जीवन पर कठोर नियम लाद दिये जाते हैं
जिसे ब्लेक 'रहस्य' कहता है। यह धर्म के उन बाहरी स्वरूपों का समर्थन करता है जिसे
ब्लेक आत्मा की मृत्यु' मानता है। वह ज्ञान के वृक्ष की किवदन्ती को पुनः स्थापित करता
है जो कि सत्य के स्थान पर झूठ और जीवन के स्थान पर मृत्यु प्रदान करता है।
इस
प्रकार, अत्यधिक विडम्बना युक्त रूप में कवि प्रदर्शित करता है कि प्रेम, करुणा, दया
और शान्ति किस प्रकार विकृत हो जाते हैं और उनका प्रयोग किस प्रकार बुराइयों को ढकने
अथवा गलत उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किया जाता है। ब्लेक सीधा इस मामले के हृदय में
पहुँच जाता है यह दिखाकर कि किस प्रकार पाखण्ड इन हृदय से सम्बन्धित गुणों का प्रयोग
करता है।
4. Blake's poetry expresses one aspect of his
multi-dimensional view of human. experience-of mankind once whole and happy,
now fallen into discord and tyranny, from which it must be rescued. Explain
with reference to these two poems."
ब्लेक
की कविता उसके बहुआयामी स्वरूपों को व्यक्त करती है जिसमें मानवीय अनुभव के दृष्टिकोण
जिसमें सम्पूर्णता और खुशियों से परिपूर्ण मानवता समाहित है। अब यह संघर्ष और क्रूरता
में फँस गई है जिसमें से इसे अवश्य ही बचाया जाना चाहिए। दोनों कविताओं के सन्दर्भ
में व्याख्या कीजिए।
Answer
: These two poems present different aspects of human life through they have the
same meaning. Initially compassion was the motto of human life but personal
gain and selfish nature have overcome the feeling of love and
compassion. Blake has given two aspects of his poetry. In ‘Songs of
Innocence”, he presents happy and delightful experiences.
There
is a touch of divine virtues in these poems that are mercy, peace, love and
pity. Thus, he presents positive aspects of human life. But on the contrary, in
the 'Songs of Experience', he has presented human being continuously facing
cruelty, tyranny, hypocrisy, oppression etc. Blake lays stress to
rescue this negative aspect so that we can save and serve humanity.
इन
दोनों कविताओं में मानवीय जीवन के विविध स्वरूपों को प्रस्तुत किया गया है। यद्यपि
उनका अर्थ एक समान है । प्रारम्भिक रूप से, दया मनुष्य के जीवन का उद्देश्य था लेकिन
व्यक्तिगत उपलब्धि और स्वार्थ प्रेरित प्रकृति ने प्रेम और दया की भावना पर विजय प्राप्त
कर ली है। ब्लेक ने अपनी कविता के दो स्वरूप प्रस्तुत किए हैं।
'Songs
of Innocence' में वह खुशी से परिपूर्ण अनुभव प्रस्तुत करता है। इन कविताओं में, दैवीय
गुणों का समावेश है जो कि दया, शान्ति, प्रेम और करुणा हैं। इस प्रकार वह मानवीय जीवन
के सकारात्मक स्वरूप को प्रस्तुत करता है। लेकिन इसके विपरीत ‘Songs of
Experience' में उसने मनुष्यों को लगातार क्रूरता, आतंक, पाखण्ड, अत्याचार इत्यादि
का सामना करते हुए प्रस्तुत किया है। ब्लेक इस नकारात्मक स्वरूप को बचाने पर जोर देता
है ताकि हम मानवता को बचा सकें और उसकी सेवा कर सकें।
Language Work:
1. Certain words in the poem have been capitalised. Can you
think of reasons for this?
Answer
: The words are capitalised to draw the attention of readers towards the
important aspects of the poem. In these poems also, certain words have been
capitalised. Certain words are capitalised as Mercy, Pity, Love and Peace which
symbolise virtues of God. On the contrary Cruelty, Caterpillar, Mystery, Raven,
Deceit, Ruddy, Poor, Humility, Fly have been capitalised to show gloomy aspect
of life.
The
reason for capitalizing the virtues is to bring it into the notice of readers
that this capitalisation is also an important part to understand the emotions
and passions of poetry. They illustrate and emphasise both aspects of human
life. The main purpose is to tell readers what different virtues mean and
denote.
2. Count the syllables in the lines of 'The Divine Image'.
Do you see a pattern?
Answer
: The poet has given a fixed pattern in The Divine Image. The first line has
eight syllables and the second line has six syllables. When two syllables are
put together, they make a foot in poetry. In this poem, the first syllable of
each foot is unstressed while the second syllable is stressed. Thus, the poem
has a fixed pattern.
Important Questions and Answers
I. The Divine Image
Short Answer Type Questions :
1. What does a person do when he is in distress?
जब
व्यक्ति निराश होता है तो वह क्या करता है?
Answer
: When a person is in distress, he prays to God for mercy, pity, love and
peace. Man considers that God is an epitome of these virtues.
जब
मनुष्य निराश होता है तो वह दया, करुणा, प्रेम और शान्ति के लिए ईश्वर को याद करता
है। मनुष्य यह मानता है कि ईश्वर इन गुणों की प्रतिमूर्ति है।
2. How can you say that mercy, peace, pity and love are the
virtues of delight?
आप
कैसे कह सकते हैं कि दया, शान्ति, करुणा और प्रेम प्रसन्नतादायक गुण हैं ?
Answer
: Undoubtedly, mercy, peace, pity and love are the virtues of delight. They
always console man in distress and bring a positive change in human life and
help us to come out of misfortunes. When a man feels these virtues in his own
surroundings, he feels he is not alone but accompanied by God.
निस्सन्देह,
दया, शांति, करुणा और प्रेम प्रसन्नता प्रदान करने वाले गुण हैं । वे हमेशा मनुष्य
को निराशा में सांत्वना प्रदान करते हैं और मानवीय जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाते
हैं और हमें दुर्भाग्य के समय से बाहर आने में सहायता प्रदान करते हैं । जब मनुष्य
इन गुणों को अपने आस-पास महसूस करता है तो वह महसूस करता है कि वह अकेला नहीं है बल्कि
उसके साथ ईश्वर है।
3. What is Blake's belief about God's existence?
ईश्वर
के अस्तित्व के बारे में ब्लेक का क्या विश्वास है ?
Answer
: Blake is of the opinion that God possesses the qualities of love, peace,
pity and mercy so he does not believe that God existed outside human soul or
heart. To him God is the creative and spiritual power in man. Hence, when Blake
speaks of divine, he is referring to this power and not to any external or
independent supreme being.
ब्लेक
का मत है कि ईश्वर में प्रेम, शान्ति, करुणा और दया जैसे गुण समाहित होते हैं इसलिए
वह यह विश्वास नहीं करता है कि ईश्वर का मानवीय आत्मा अथवा हृदय के बाहर कोई अस्तित्व
है। उसके लिए ईश्वर मनुष्य में सृजनात्मक और आध्यात्मिक शक्ति है । इस प्रकार ब्लेक
जब देवत्व की बात करता है तो वह इसी शक्ति को उद्घोषित करता है न कि किसी बाहरी अथवा
स्वतन्त्र सर्वोच्च शक्ति को।
4. How does Blake equalize God and man?
ब्लेक
किस प्रकार मनुष्य और ईश्वर को एक समान मानता है ?
Answer
: According to the poet, God has created man in His own image. So people should
concern with the spirit and not the physical body. Human beings of all the
races and countries have the common human virtues or divine virtues. So God is
not different from these virtues. Thus, the essential attributes of both man
and God are the same. In the state of happiness,
which Blake calls 'Innocence', life is governed by these divine
qualities.
कवि
के अनुसार, ईश्वर ने मनुष्य का निर्माण अपनी स्वयं की प्रतिछाया के रूप में किया है।
अतः लोगों को उसकी भावना को समझना चाहिए न कि भौतिक शरीर को । सभी जातियों और सभी देशों
के लोगों में समान मानवीय गुण अथवा दैवीय गुण होते हैं। अतः ईश्वर भी इन गुणों से अलग
नहीं है। इस प्रकार, मनुष्य और ईश्वर दोनों के ही आवश्यक गुण समान हैं । अपनी खुशियों
के समय, जिसे ब्लेक ने 'भोलापन' कहा है, जीवन इन्हीं दैवीय गुणों से संचालित अथवा नियंत्रित
होता है।
5. What is the message of the poem 'The Divine
Image'?
कविता
'द डिवाइन इमेज' का क्या संदेश है?
Answer
: The poem 'The Divine Image' conveys the clear message that God and man are
one, they are not separated. We can have the reflection of God in human beings
due to the same virtues. We remember God for His divine virtues of mercy, pity,
love and peace and God has created His own image in man so man is also replete
with these virtues. Thus, God has embodied Himself in human body.
कविता
'द डिवाइन इमेज' स्पष्ट संदेश देती है कि ईश्वर और मनुष्य एक ही हैं, वे अलग-अलग नहीं
हैं। समान गुणों के कारण हम मनुष्यों में ईश्वर का प्रतिरूप देख सकते हैं। हम ईश्वर
को उसके दैवीय गुणों दया, करुणा, प्रेम और शान्ति के लिए याद करते हैं और ईश्वर ने
स्वयं अपनी छवि मनुष्य में सूजन की है। इसलिए मनुष्य भी इन गुणों से परिपूर्ण है। इस
प्रकार, ईश्वर ने स्वयं की प्रतिमा मानवीय शरीर में स्थापित की है।
Long Answer Type Questions :
1. What does the poem 'The Divine Image' tell us about the
four Godly virtues?
कविता
'द डिवाइन इमेज' चार ईश्वरीय गुणों के बारे में हमें क्या बताती है?
Answer : William Blake considers that human body is the divine form of God. The poem tells us about the four divine virtues-love, pity, mercy and peace. In fact, these virtues are basicly virtues of God but it is also true that human beings also possess all the four virtues.
convey
the idea that when a person in distress prays to God, in fact, he prays to
these virtues to shower upon him the rain of these virtues. This is the reason
why the poet wants that all the persons on the earth, irrespective of their
religion or citizenship, must imbibe and love these divine virtues. They should
practise humanity first without caring for their cultural issues.
विलियम
ब्लेक का मत है कि मानवीय शरीर ईश्वर का दैवीय रूप है । कविता हमें चार दैवीय गुणों-प्रेम,
करुणा, दया और शान्ति के बारे में बताती है । वास्तव में, ये गुण मूल रूप में ईश्वरीय
गुण हैं लेकिन यह भी सत्य है कि ये चारों गुण मनुष्यों में भी विद्यमान रहते हैं ।
इस प्रकार, ये गुण न केवल दैवीय हैं बल्कि वे मानवीय गुण भी हैं ।
कवि
विचार व्यक्त करना चाहता है कि जब दुख में व्यक्ति ईश्वर से प्रार्थना करता है तो वास्तव
में वह इन्हीं गुणों से अपने ऊपर इन गुणों की वर्षा होने की प्रार्थना करता है। यही
कारण है कि कवि चाहता है कि पृथ्वी पर रहने वाले सारे लोग, अपने धर्म और नागरिकता का
बिना ध्यान रखे हुए, इन गुणों को प्रेम करें और अपने जीवन में उतारें। उन्हें सर्वप्रथम,
अपनी सांस्कृतिक समस्याओं का बिना ध्यान रखे, मानवता को व्यवहार में लाना चाहिए।
2. Write a critical analysis of the poem “The Divine
Image'.
कविता
'द डिवाइन इमेज' की आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए।
Answer
: The poem 'The Divine Image' reveals Blake's belief in God whom he
equates in this poem with human form. But it is not the visible form of any
religion or of atheists but it is a collection of some divine virtues such as
Love, Peace, Pity and Mercy. So God is the divine essence who exists
potentially in every man and woman.
God
has created man in his own image and has endowed him with His own qualities.
The poet calls these virtues the virtues of delight so they are the elements of
human prayer in distress and piety in human form. The poet expresses his views
that since man is created in the image of God, so the embodies God in his best
qualities. God's abode is the human heart in which these virtues dwell
permanently. In this way, this rhetorical poem becomes a didactive poem for
human beings.
कविता
'द डिवाइन इमेज' ब्लेक के ईश्वर में विश्वास को प्रदर्शित करती है जिसे वह इस कविता
में मानवीय स्वरूप के बराबर मानता है। लेकिन यह किसी भी धर्म अथवा नास्तिकों के लिए
दृश्य नहीं है बल्कि यह कुछ दैवीय गुणों जैसे प्रेम, शांति, करुणा और दया का संग्रह
है । अतः ईश्वर एक दैवीय सारतत्त्व है जो कि अपनी पूरी क्षमता से प्रत्येक महिला और
पुरुष में विराजमान रहता है। ईश्वर ने मनुष्य को स्वयं अपनी छवि में सृजित किया है
और उसे अपने ही गुण प्रदान किए हैं ।
कवि
इन गुणों को खुशियों के गुण कहता है अत: वे दुख के समय मनुष्य के लिए प्रार्थना के
तत्त्व हैं और वे मानवीय रूप में पवित्र हैं । कवि अपने विचार व्यक्त करता है कि क्योंकि
मनुष्य का सृजन ईश्वरीय छवि में हुआ है अतः वह अपने सर्वश्रेष्ठ गुणों में ईश्वर का
प्रतिरूप है। ईश्वर का निवास मनुष्य का हृदय है जिसमें ये गुण स्थायी रूप से विद्यमान
रहते हैं । इस प्रकार यह आलंकारिक कविता मनुष्यों के लिए एक उपदेशात्मक कविता बन गई
है।
Seen Passages
Stanza-1.
To
Mercy, Pity, Peace, and Love
All
pray in their distress;
And
to these virtues of delight
Return
their thankfulness.
Questions
:
1.
To whom does a man pray in distress?
व्यक्ति
निराशा में किससे प्रार्थना करता है?
2.
Why does a man pray to these virtues?
व्यक्ति
इन गुणों से प्रार्थना क्यों करता है?
3.
What does man do to these virtues?
मनुष्य
इन गुणों से क्या करता है?
Answers
:
1.
Aman prays to mercy, pity, peace and love in distress as these virtues are
source of comfort and console for human beings.
व्यक्ति
निराशा में दया, करुणा, शान्ति और प्रेम से प्रार्थना करता है क्योंकि ये गुण मनुष्यों
के लिये आराम और सान्त्वना के स्त्रोत हैं।
2.
A man prays to these virtues because they are source of delight. They help man
to overcome his misfortunes.
व्यक्ति
इन गुणों से प्रार्थना इसलिए करता है क्योंकि ये गुण अनन्त प्रसन्नता के स्त्रोत हैं
। वे मनुष्य को अपने दुर्भाग्य पर विजय प्राप्त करने में सहायक हैं।
3.
Man thanks these virtues because the only way he could find during his
misfortune were these virtues so he thanks them.
मनुष्य
इन गुणों का धन्यवाद करता है क्योंकि अपने दुर्भाग्य के दिनों के दौरान एकमात्र पथ
जो वह प्राप्त कर सका वह ये गुण ही थे। इसलिए वह उनका कृतज्ञ है।
Stanza-2
For
Mercy, Pity, Peace, and Love
Is
God our father dear,
And
Mercy, Pity, Peace, and Love
Is
Man, his child and care.
Questions
:
1.
Why does the poet call God as dear father?
कवि
ईश्वर को प्रिय पिता क्यों कहता है?
2.
Why is man dear to God?
मनुष्य
ईश्वर को क्यों प्रिय है?
3.
Why does the poet present man as the child of God?
कवि
मनुष्य को ईश्वर के पुत्र के रूप में क्यों प्रस्तुत करता है?
Answers
:
1. The poet calls God as dear father because He possesses the virtues like Peace, Pity, Mercy and Love which are necessarily possessed by a father.
कवि
ईश्वर को प्रिय पिता इसलिए कहता है क्योंकि उसमें (ईश्वर में) शान्ति, करुणा, दया और
प्रेम जैसे गुण विद्यमान रहते हैं जो कि आवश्यक रूप से एक पिता में होते हैं।
2.
Man is dear to God because man possesses the virtues like love, peace, pity and
mercy which are chief qualities of God. So, man is dear to God.
मनुष्य
ईश्वर को इसलिए प्रिय है क्योंकि मनुष्य में प्रेम, शान्ति, करुणा और दया जैसे गुण
होते हैं जो कि मुख्य रूप से ईश्वर के गुण हैं। इसलिए मनुष्य ईश्वर को प्रिय है।
3.
The poet presents man as the child of God because under his protection, man
also essentially possesses these qualities.
कवि
मनुष्य को ईश्वर के पुत्र के रूप में इसलिए प्रस्तुत करता है क्योंकि उसके (ईश्वर के)
सान्निध्य में रहने के कारण मनुष्य में भी आवश्यक रूप से ये गुण समाहित हो जाते हैं।
Stanza-3.
For
Mercy has a human heart,
Pity
a human face,
And
Love, the human form divine,
And
Peace, the human dress.
Questions
:
1.
Explain the line-'Mercya has human heart.'
इस
लाइन की व्याख्या कीजिए-'दया में मानवीय हृदय होता है।'
2.
How can you say that pity is a human face?
आप
कैसे कह सकते हैं कि करुणा मनुष्य के चेहरे पर झलकती है?
3.
What are the qualities of love and peace?
प्रेम
और शान्ति किस प्रकार के गुण हैं ?
Answers
:
1.
Mercy has a human heart and is known to be a divine power as mercy is a quality
that is revealed in man.
दया
मानवीय हृदय में होती है और उसे दैवीय शक्ति के रूप में जाना जाता है क्योंकि दया का
गुण मनुष्य में विद्यमान होता है।
2.
The poet says that pity is an attribute of face. Thus, it is an external
expression of the feeling of human heart.
कवि
कहता है कि करुणा चेहरे का एक गुण है। इस प्रकार, यह मनुष्य के हृदय की भावनाओं की
बाह्य अभिव्यक्ति है।
3.
According to the poet, love is a divine essence itself in human form while
peace has the human dress or outer covering.
कवि
के अनुसार, प्रेम मानवीय स्वरूप में स्वयं में ही दैवीय तत्त्व है जबकि शान्ति मानवीय
वस्त्र अथवा बाहरी आवरण है।
Stanza-4.
Then
every man, of every clime,
That
prays in his distress,
Prays
to the human form divine,
Love,
Mercy, Pity, Peace.
Questions
:
1.
What do you mean by 'Every man and every clime'?
'प्रत्येक
व्यक्ति और प्रत्येक जलवायु' से आपका क्या अभिप्राय है?
2.
Whom do the people pray really in distress?
वास्तव
में निराशा में लोग किससे प्रार्थना करते हैं ?
3.
How can you say that these Godly elements are in man also?
आप
कैसे कह सकते हैं कि ये दैवीय तत्त्व मनुष्य में भी होते हैं?
Answers
:
1.
Every man' means here that the people of every cast, creed, religion and 'every
clime here means a person from any corner of the world. It means all the people
without any discrimination of any kind.
'प्रत्येक
व्यक्ति' का अर्थ है कि प्रत्येक जाति, पंथ अथवा धर्म का व्यक्ति तथा प्रत्येक जलवायु'
का अर्थ है-संसार के प्रत्येक कोने का व्यक्ति । इसका अर्थ है किसी भी प्रकार के बिना
भेदभाव के व्यक्ति।
2.
In distress, really, people pray to Godly elements in man because man also
possesses the qualities of love, peace, pity and mercy like God.
निराशा
में, वास्तव में व्यक्ति मनुष्य के अन्दर विद्यमान ईश्वरीय तत्त्वों से प्रार्थना करते
हैं क्योंकि मनुष्य में भी ईश्वर की तरह प्रेम, शान्ति, करुणा और दया के गुण विद्यमान
हैं।
3.
Man is emotional by nature. He melts in the distress of others. God also does
so, but he does so in human form. Thus, man has Godly elements in him.
मनुष्य
स्वाभाविक रूप से भावुक है । वह दूसरों की परेशानी में द्रवित हो जाता है। ईश्वर भी
ऐसा ही करता है लेकिन वह ऐसा मानवीय स्वरूप में ही करता है। इस प्रकार, मनुष्य के अन्दर
दैवीय तत्त्व विद्यमान हैं।
Stanza-5.
And
all must love the human form,
In
heathen, turk, or jew;
Where
Mercy, Love, and Pity dwell
There
God is dwelling too.
Questions
:
1.
What do you mean by heathen, turk or jew?
नास्तिक,
तुर्क अथवा यहूदी से आपका क्या आशय है?
2.
Why should all the people love human form?
सभी
व्यक्तियों को मानवीय स्वरूप से प्रेम क्यों करना चाहिए?
3.
Why does the poet exhort to love human body?
कवि
मानवीय शरीर को प्रेम करने का उपदेश क्यों देता है ?
Answers:
1.
Heathen, turk or jew means that people of every kind should love the human form
of Divine. If people are sincere in their love to God, they should love the
divine virtues.
नास्तिक,
तुर्क और यहूदी का अर्थ है कि हर प्रकार के लोगों को मनुष्य के देवत्व स्वरूप को प्रेम
करना चाहिए। यदि लोग ईश्वर के प्रति अपने प्रेम में गम्भीर हैं तो उन्हें दैवीय गुणों
को भी प्रेम करना चाहिए।
2.
All people should love human form because human body possesses divinity in it.
सभी
लोगों को मानवीय स्वरूप को प्रेम करना चाहिए क्योंकि मानवीय शरीर में देवत्व निवास
करता है।
3.
The poet exhorts to love human body because where the divine qualities like
mercy, pity, love and peace live, God must live there too.
कवि
मानवीय शरीर को प्रेम करने का उपदेश इसलिए देता है क्योंकि जहाँ पर दया, करुणा, प्रेम
और शान्ति जैसे दैवीय गुण होते हैं वहाँ पर अवश्य ही ईश्वर का निवास होता है।
II. The Human Abstract
Short Answer Type Questions :
1. Do you think that mutual fear and selfish love are
related to each other? Give a well reasoned answer.
क्या
आप सोचते हैं कि पारस्परिक भय और स्वार्थयुक्त प्रेम एक-दूसरे से सम्बन्धित हैं ? तार्किक
उत्तर दीजिए।
Answer
: No doubt, mutual fear and selfish love are related to each other. It happens
so because mutual fear gives rise to selfish love. People live in societies and
they have social interrelation with one another. But along with it they have a
common feeling of fear which is hidden deep in them. For this feeling of fear,
they develop a bond of love amongst them. The poet says that this love
orginates due to selfish love so it is not genuine and deep.
निस्सन्देह,
आपसी भय और स्वार्थयुक्त प्रेम एक-दूसरे से सम्बन्धित हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि
आपसी भय स्वार्थयुक्त प्रेम को जन्म देता है। लोग समाज में रहते हैं और उनके बीच सामाजिक
सम्बन्ध होते हैं लेकिन इसके साथ ही
उनमें
सामान्य भय की भावना होती है जो कि उनमें गहराई से छिपी होती है। इस भय की भावना के
कारण वे अपने बीच में प्रेम का बन्धन विकसित कर लेते हैं । कवि कहता है कि यह प्रेम
स्वार्थयुक्त प्रेम के कारण उत्पन्न होता है। अतः यह वास्तविक एवं गहरा प्रेम नहीं
होता है।
2. The poet calls the shade of the mystery tree to be thickest.
Why?
कवि
रहस्यमय वृक्ष की छाया को अत्यन्त घनी कहता है। क्यों?
Answer
: The poet presents a mystery tree in the poem. The Human Abstract with
thickest shade of it. The mystery tree symbolises that the different leaves of
the tree are full of conspiracles for different people. The shade of the tree
is considered the thickest because innumerable vices, wickedness and cruelty
breed in its shade which is human mind. These vices bring death, decay and
damnation of society as flies and caterpillars destroy a large tree.
कवि
ने कविता में एक रहस्यमय वृक्ष को The Human Abstract कविता में घनी छाया के साथ प्रस्तुत
किया है । रहस्यमय वृक्ष प्रतीक है कि इसकी विभिन्न पत्तियाँ विभिन्न लोगों के लिए
षड्यन्त्रों से भरी हुई हैं । वृक्ष की छाया घनी मानी गई है क्योंकि अनगिनत दुर्गुण,
दुष्टताएं और क्रूरता इसकी छाया में पलती हैं जो कि मानवीय मस्तिष्क है। ये दुर्गुण
मृत्यु, क्षय और विध्वंस से समाज को नष्ट करते हैं जैसे मक्खियाँ और कीट बड़े वृक्षों
को नष्ट कर देते हैं।
3. What idea does the poet wish to convey through
pity?
कवि
करुणा के माध्यम से क्या विचार देना चाहता है?
Answer
: The poet says that when we see one in misery, our heart feels pity. Thus,
pity is a sentimental aspect of humanity. Sympathy arises out of pity in our
heart. This feeling inspires us to help the people who are in great need. When
a man feels pity along with mercy, love and peace, our earth turns into a
heaven and all the people of the society take benefit of it.
कवि
कहता है कि जब हम किसी व्यक्ति को दयनीयता में देखते हैं तो हमारा हृदय करुणा महसूस
करता है। इस प्रकार, करुणा मानवता का भावुक बिन्दु है। करुणा से हमारे हृदय में सहानुभूति
उत्पन्न होती है। यह भावना हमें उन लोगों की सहायता करने के लिए प्रेरित करती है जिन्हें
इसकी अत्यधिक आवश्यकता है। जब कोई व्यक्ति दया, प्रेम और शान्ति के साथ करुणा महसूस
करता है तो हमारी पृथ्वी स्वर्ग में परिवर्तित हो जाती है और समाज के सभी लोग उसका
लाभ प्राप्त करते हैं।
4. What does the poet wish to express through the words
“And waters the ground with tears”?
"और
जमीन को आँसूओं से गीला कर देता है" इन शब्दों से कवि क्या व्यक्त करना चाहता
है?
Answer
: The poet wishes to express through these words that the person who commits
the acts of cruelty on the fellow beings in society, begins to repent for his
misdeeds. He continuously do these acts until he realises about his wrong
doings and misdeeds. Then he finds no way for his actions other than shedding
tears of regret. He dovelops humility in himself. Thus, the waters are the
tears of repentance.
कवि
इन शब्दों के माध्यम से यह व्यक्त करना चाहता है कि जो व्यक्ति समाज के अपने साथियों
के प्रति क्रूरता के कार्य करता है, अपने दुर्व्यवहार के लिए पश्चाताप शुरू कर देता
है । वह इन कार्यों को लगातार करता रहता है जब तक उसे अपने गलत कार्य और दुर्व्यवहार
महसूस नहीं होने लगते हैं । तब उसे अपने कार्यों के लिए कोई दूसरा रास्ता नहीं सूझता
है सिवाय इसके कि वह पश्चाताप में आँसू बहाये। वह विनम्रता अपने अन्दर विकसित कर लेता
है। इस प्रकार, पानी पश्चाताप में बहाये गये आँसू होते हैं।
5. How can you define the virtues given by God and gloomy
forms of life?
ईश्वर
द्वारा प्रदत्त गुण और जीवन के अन्धकार युक्त स्वरूपों को आप किस प्रकार परिभाषित कर
सकते हैं ?
Answer
: There are so many virtues like love, pity, peace and mercy which are
considered to be given by God. These are the virtues which make one's life a
godly life and make this planet a heaven. On the contrary, there are some
gloomy forms of life as conceit, revenge, mystery and cruelty which keep people
indulged in a sinful life. These forms make the life on earth as hell. These
are two different forms that Blake wants to convey.
प्रेम,
करुणा, शांति और दया जैसे अनेकों गुण हैं जो कि ईश्वर द्वारा प्रदत्त माने जाते हैं
। ये वे गुण हैं जो कि प्रत्येक के जीवन को दिव्य जीवन बना देते हैं और पृथ्वी ग्रह
को स्वर्ग का स्वरूप प्रदान करते हैं। इसके विपरीत, जीवन में अन्धकार युक्त स्वरूप
होते है जैसे-धोखा, बदला, रहस्य और क्रूरता जो कि लोगों को पापपूर्ण कार्यों में व्यस्त
रखते हैं। ये स्वरूप पृथ्वी पर जीवन को नर्क बना देते हैं । ये दो विभिन्न स्वरूप हैं
जिनको ब्लेक बताना चाहता है।
Long Answer Type Questions :
1. Write a central idea of the poem The Human
Abstract.
कविता
'द ह्यूमन ऐब्स्ट्रैक्ट' का केन्द्रीय भाव लिखिए।
Answer
: The poem “The Human Abstract' criticizes the traditional values and virtues
of humanity and clearly depicts that these virtues have been tied necessarily
to sufferings of human beings. The poet says that mercy and pity would not
exist without poverty and unhappiness. The origin of peace is fear. Then due to
fear rises selfishness and ultimately cruelty which operates with great cunning
and catches people in its trap.
Cruelty
sheds tears in sympathy and thus, humble people come under the heel of the
cruel. Later on, the manipulators create a halo of mystery where poisonous
insects and flies flourish. The poet says that even the wisest men of the world
could not know where this tree of mystery grows but the poet himself answers
this question and says that all these negative or false virtues are not found
anywhere because they grow and spread in human brain in contrast with what
happens in nature.
द
ह्यूमन ऐब्स्ट्रैक्ट कविता मानवता के परम्परागत मूल्यों और गुणों की आलोचना करती हैं
और स्पष्ट बताती है कि इन गुणों को आवश्यक रूप से मनुष्यों के कष्टों के साथ जोड़ दिया
गया है। कवि कहता है कि दया और करुणा का गरीबी और दुःखों के बिना कोई अस्तित्व नहीं
है । शान्ति का उद्गम भय के कारण होता है। फिर भय के कारण स्वार्थ और अन्त में क्रूरता
का उदय होता है जो कि अत्यन्त चतुराईपूर्वक कार्य करती है और लोगों को अपने जाल में
फँसा लेती है।
क्रूरता
सहानुभूति से आँसू बहाती है और इस प्रकार विनम्र लोग क्रूरता के फन्दे में फँस जाते
हैं । इसके बाद, शोषण करने वाले रहस्य का एक आभामण्डल विकसित करते हैं जहाँ पर जहरीले
कीट और मक्खियाँ पनपते हैं ।
कवि
कहता है कि संसार के सर्वाधिक विद्वान व्यक्ति भी यह नहीं जान सके कि यह रहस्यमय वृक्ष
कहाँ उगता है परन्तु कवि स्वयं ही इस प्रश्न का उत्तर देता है और कहता है कि ये सभी
नकारात्मक और झूठे गुण किसी भी स्थान पर नहीं पाये जाते हैं क्योंकि ये प्रकृति में
जो कुछ भी होता है उसके ठीक विपरीत मानवीय मस्तिष्क में उत्पन्न होते हैं और वहीं से
फैलते हैं।
2. What is the form and tone of the poem The Human
Abstract?
द
ह्यूमन ऐब्सट्रैक्ट कविता की रचना और स्वर शैली क्या है ?
Answer
: The poem The Human Abstract written by William search Blake is
a didactic poem. It has six quatrains (a stanza of four lines). In this way the
poem consists twenty four lines in all. The rhyme scheme of the poem is aabb.
The rhyme scheme is extremely simple in its nature which recreates innocent
sonority which is quite able to emphasize the true meaning of the words.
But
when we reach the fourth quatrain, we find the rhyme pattern broken because of
mystery. The poet quite carefully employs the word to draw the attention of the
reader. But again, last two stanzas follow the earlier for of aabb. So for as
the tone concerns, the poem is didactic in nature but with a ting of irony. The
poem conveys its message in a universal manner. The poem seems to be exhosting
but through critical perspective.
विलियम
ब्लेक द्वारा लिखित द ह्यूमन ऐब्सट्रैक्ट कविता उपदेशात्मक कविता है। इसमें छः चतुष्पदी
(चार पंक्तियों का छन्द) हैं। इस प्रकार कविता में कुल चौबीस पंक्तियाँ हैं। कविता
की तुकबन्दी aabb रूप में है। कविता की तुकबन्दी अपने आप में अत्यन्त सरल है जो कि
अत्यन्त साधारण सुरीलापन लिए हुए है और यह शब्दों का वास्तविक अर्थ प्रस्तुत करने में
पूरी तरह सक्षम है। लेकिन जब हम चौथी चतुष्पदी पर पहुंचते हैं तो पाते हैं कि तुकान्त
रूप टूटा हुआ है क्योंकि mystery (रहस्य) का प्रयोग किया गया है।
कवि
इस शब्द का प्रयोग अत्यधिक सावधानी से करता है ताकि पाठकों का ध्यान आकृष्ट कर सके।
लेकिन एक बार फिर अन्तिम दोनों छन्द पूर्व की भाँति aabb रूप का पालन करते हैं। जहाँ
तक स्वर शैली का सम्बन्ध है, कविता स्वाभाविक रूप से आदेशात्मक है लेकिन उसमें विडम्बना
का पुट दिया गया है। कविता अपना सन्देश स्वाभाविक रूप में प्रस्तुत करती है। कविता
उपदेश देती हुई प्रतीत होती है परन्तु आलोचनात्मक उद्देश्य के रूप में।
Seen Passages
Stanza-1.
Pity
would be no more
If
we did not make somebody Poor;
And
Mercy no more could be
If
all were as happy as we.
Questions:
1.
When will Pity come to an end?
करुणा
का अस्तित्व कब समाप्त हो जाएगा?
2.
When will Mercy come to an end?
दया
का अस्तित्व कब समाप्त हो जाएगा?
3.
What is the tone of the stanza?
छन्द
की स्वर शैली क्या है?
Answers:
1.
According to the poet, pity needs poverty. So when poverty comes to an end,
pity will also finish along with it.
कवि
के अनुसार, करुणा के लिए गरीबी की आवश्यकता है। इसलिए जब गरीबी समाप्त हो जाएगी तो
उसके साथ करुणा भी समाप्त हो जाएगी।
2.
Mercy needs unhappiness and sadness devoid of any kind of pleasure. Thus, mercy
will come to an end if miseries from the world are finished.
दया
के लिए दुख और परेशानी की आवश्यकता होती है जो कि किसी भी प्रकार कि खुशियों से वंचित
हों। इस प्रकार, दया का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा यदि संसार से दुःख समाप्त हो जाएंगे।
3.
The tone of the stanza is bitter satire to expose the hypocrisy and deceit of
those people who practise misery and suffering in the world in the name of
morality.
छन्द
की स्वर शैली तीखा व्यंग्य है जो उन लोगों के पाखण्ड और धोखेबाजी को बताता है जो संसार
में नैतिकता के नाम पर दयनीयता और कष्टों को बढ़ावा देते हैं।
Stanza-2.
And
mutual fear brings peace,
Till
the selfish loves increase;
Then
Cruelty knits a snare,
And
spreads his baits with care.
Questions
:
1.
What brings peace?
शान्ति
किस प्रकार आती है ?
2.
How does cruelty spread in the society?
समाज
में क्रूरता किस प्रकार बढ़ती है?
3.
What is the devise used in cruelty and what is its effect?
क्रूरता
में किस अलंकार का प्रयोग किया गया है और उसका क्या प्रभाव है?
Answers
:
1.
According to the poet, peace is born out of fear. When people are afraid of one
another lest they should commit any mistake, the society remains
peaceful.
कवि
के अनुसार, शान्ति भय से उत्पन्न होती है। जब लोग एक-दूसरे से डरते हैं कि ऐसा न हो
कि कोई गलती हो जाए तो समाज में शांति रहती है।
2.
Cruelty increases thanks to selfish people and finds away to grow. Then cruelty
knits a trap and very cautiously spreads its baits.
क्रूरता
स्वार्थी लोगों के प्रति कृतज्ञता को बढ़ाती है और उत्पन्न होने का मार्ग प्राप्त करती
है। तत्पश्चात्, क्रूरता एक जाल बुनती है और अत्यन्त सावधानी से लोगों को जाल में फंसाती
है।
3.
The device used in cruelty is personification'. Its effect is maximised by the
actions associated with the words knit snares' and 'spreads his baits'.
क्रूरता
में 'मानवीयकरण' अलंकार का प्रयोग किया गया है। इसका प्रभाव इससे जुड़े हुए कार्यों
'जाल बुनना' और 'चारा डालना' से अपने उच्चतम शिखर पर पहुँच जाता है।
Stanza-3.
He
sits down with holy fears,
And
waters the ground with tears;
Then
Humility takes its root
Underneath
his foot.
Questions
:
1.
Whom does 'He' refer here to?
यहाँ
पर 'वह' किसके लिए प्रयुक्त हुआ है ?
2.
What do you mean by holy fears'?
'पवित्र
भय' से आपका क्या अभिप्राय है?
3.
What is the irony in Humility?
विनम्रता
में विडम्बना क्या है ?
Answers
:
1.
He has been used here to indicate cruelty. This is a personification which
presents cruelty in a human form
'वह'
यहाँ पर क्रूरता के लिए प्रयोग किया गया है। यह मानवीयकरण है जो कि क्रूरता को मनुष्य
के स्वरूप में प्रस्तुत करता है।
2.
'Holy fear' reflects the fear of God. Cruelty becomes strict and torments
others. Then he (curelty) sheds tears in sympathy with those whom it oppresses
and then feels fear of God.
'पवित्र
भय' ईश्वर के भय को प्रतिबिम्बित करता है। क्रूरता कठोर होती है और दूसरों पर अत्याचार
करती है। तत्पश्चात् वह (क्रूरता) उन लोगों के साथ सहानुभूति प्रदर्शित करती है जिन
पर अत्याचार करती है और तब ईश्वर का भय महसूस करती है।
3.
The irony in Humility is that humble people come under the heel of the cruel.
They become victims and think that they (cruel people) are their great well
wishers and surrender themselves completely to them.
विनम्रता
में विडम्बना यह है कि साधारण लोग क्रूर लोगों के पैरों के नीचे आ जाते हैं। वे शिकार
बन जाते हैं और सोचते हैं कि वे (क्रूर लोग) उनके शुभचिंतक हैं और पूरी तरह से उनके
सम्मुख समर्पण कर देते हैं।
Stanza-4.
Soon
spreads the dismal shade
Of
Mystery over his head;
And
the Caterpillar and Fly
Feed
on the Mystery.
Questions
:
1.
Explain the line 'Mystery over his head'.
'उसके
सिर पर रहस्य' पंक्ति की व्याख्या कीजिए।
2.
What happens in the halo of mystery?
रहस्य
के आभामण्डल में क्या होता है?
3.
What do the caterpillar and fly signify?
कैटरपिलर
और मक्खी क्या इंगित करते हैं ?
Answers
:
1.
The line means that in order to cover their dirty desires, the exploiters
create a halo of mystery around them.
इस
पंक्ति का अर्थ है कि अपने गलत इरादों को ढकने के लिए शोषण करने वाले उन लोगों के चारों
ओर रहस्य का आभामण्डल निर्मित कर देते हैं।
2.
In the halo of mystery, the insects like caterpillar and fly flourish which are
always ready to sting the humble people.
रहस्य
के आभामण्डल में, कैटरपिलर और मक्खियों जैसे कीट पनपते हैं जो कि हमेशा साधारण लोगों
को डसने के लिए तैयार रहते हैं।
3.
Caterpillar and fly are the metaphors used here. Caterpillar is a poisonous
insect which means those people who spread poison in the society while fly
signifies the cankers of society.
कैटरपिलर
और मक्खी यहाँ पर रूपक के रूप में प्रयुक्त किए गये हैं। कैटरपिलर एक जहरीला कीट होता
है जिसका अर्थ है वे लोग जो समाज में जहर फैलाते हैं जबकि मक्खी का अर्थ है समाज के
लिए नासूर बने हुए लोग।
Stanza-5.
And
it bears the fruit of Deceit,
Ruddy
and sweet to eat;
And
the Raven his nest has made
In
its thickest shade.
Questions
:
1.
What type of fruits does mystery bear?
रहस्य
किस प्रकार के फल धारण करता है?
2.
What does the raven do there?
काला
कौआ वहाँ पर क्या करता है?
3.
What do fruit and raven symbolise?
फल
और काला कौआ किसके प्रतीक हैं ?
Answers
:
1.
Mystery bears the fruits of deception but outwardly they seem to be extremely
beautiful and delicious. Everybody is tempted to have such beautiful
fruits.
रहस्य
धोखेबाजी के फल धारण करता है लेकिन बाहरी रूप से वे अत्यन्त आकर्षक और स्वादिष्ट लगते
हैं। प्रत्येक व्यक्ति इतने शानदार फल प्राप्त करने के लिए लालायित रहता है।
2.
The raven makes its nest in the thick shade of mystery. It gets opportunity to
flourish there and nobody could be able to see its evil desires.
काला
कौआ रहस्य की घनी छाया में अपना घोंसला बनाता है। इसे वहाँ पर फलने-फूलने का मौका मिल
जाता है और कोई भी उसके गलत इरादों को नहीं देख सकता है।
3.
Fruit symbolises the fruit of tree of knowledge in paradise while raven
symbolises the Satan who tempted Eve to eat fruit from the tree of
knowledge.
फल
यहाँ पर स्वर्ग में ज्ञान के पेड़ के फल का प्रतीक है जबकि काला कौआ शैतान का प्रतीक
है जिसने ज्ञान के वृक्ष से फल खाने के लिए ईव को ललचाया।
Stanza-6.
The
Gods of the earth and sea
Sought
thro' Nature to find this Tree
But
their search was all in vain:
There
grows one in the Human Brain.
Questions
:
1.
What did the Prophets and seers try to find out?
पैगम्बरों
और भविष्यवेत्ताओं ने क्या प्राप्त करने की कोशिश की?
2.
Where did they find the tree of mystery?
उन्हें
यह रहस्य का पेड़ कहाँ पर मिला?
3.
Why was their search all in vain?
उनकी
यह खोज पूरी तरह से व्यर्थ क्यों हो गई?
Answers
:
1.
The Prophets and seers searched everywhere. They have sought through all nature
to find out that tree of mystery.
पैगम्बरों
और भविष्यवेत्ताओं ने प्रत्येक स्थान पर खोजा। वे पूरी प्रकृति में उस रहस्यमय वृक्ष
को ढूँढ़ने की कोशिश करते रहे।
2.
The Prophets and seers tried their best to find out the tree of mystery across
the earth and sea but could find it nowhere.
पैगम्बरों
और भविष्यवेत्ताओं ने रहस्य के वृक्ष को पाने के लिए पृथ्वी और सागरों में अपनी पूरी
कोशिश की परन्तु उन्हें यह वृक्ष कहीं पर भी नहीं मिला।
3.
Their search was all in vain because such tree does not grow in outside nature
anywhere but flourish in the brain of man itself.
उनकी खोज व्यर्थ इसलिए हो गई क्योंकि ऐसा वृक्ष प्रकृति के बाहरी वातावरण में नहीं उगता है बल्कि यह स्वयं मनुष्य के मस्तिष्क में ही फलता-फूलता है।