Class 12 History Jac Board 2026 Answer key

Class 12 History Jac Board 2026 Answer key

 Class 12 History Jac Board 2026 Answer key

झारखण्ड अधिविद्य परिषद्

ANNUAL INTERMEDIATE EXAMINATION - 2026

HISTORY (14.02.2026)

General Instructions / सामान्य निर्देश

1. इस प्रश्न-पुस्तिका में दो भाग भाग-A तथा भाग-B

2. भाग-A में 30 अंक के बहुविकल्पीय प्रश्न तथा भाग-B में 50 अंक के विषयनिष्ठ प्रश्न हैं।

3. परीक्षार्थी को अलग से उपलब्ध कराई गई उत्तर-पुस्तिका में उत्तर देना है।

4. भाग-A - इसमें 30 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं जिनके 4 विकल्प (A, B, C तथा D') हैं। परीक्षार्थी को उत्तर-पुस्तिका में सही उत्तर लिखनी है। सभी प्रश्न अनिवार्य हैं। प्रत्येक प्रश्न 1 अंक का है। गलत उत्तर के लिए कोई अंक काटा नहीं जाएगा।

5. भाग-B - इस भाग में तीन खण्ड-A, B तथा C हैं। इस भाग में अति लघु उत्तरीय, लघु उत्तरीय तथा दीर्घ उत्तरीय प्रकार के विषयनिष्ठ प्रश्न हैं। कुल प्रश्नों की संख्या 22 है।

खण्ड-A  - प्रश्न संख्या 31-38 अति लघु उत्तरीय हैं। किन्हीं 6 प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक प्रश्न 2 अंक का है।

खण्ड-B - प्रश्न संख्या 39-46 लघु उत्तरीय हैं। किन्हीं 6 प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक प्रश्न 3 अंक का है। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर अधिकतम 150 शब्दों में दें।

खण्ड-C - प्रश्न संख्या 47-52 दीर्घ उत्तरीय हैं। किन्हीं 4 प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक प्रश्न 5 अंक का है। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर अधिकतम 250 शब्दों में दें।

6. परीक्षार्थी यथासंभव अपने शब्दों में ही उत्तर दें।

7. परीक्षार्थी परीक्षा भवन छोड़ने के पहले अपनी उत्तर पुस्तिका वीक्षक को अनिवार्य रूप से लौटा दें।

8. परीक्षा समाप्त होने के उपरांत परीक्षार्थी प्रश्न-पुस्तिका अपने साथ लेकर जा सकते हैं।

भाग-A (बहुविकल्पीय प्रश्न)

प्रश्न संख्या 1 से 30 तक बहुविकल्पीय प्रकार हैं। प्रत्येक प्रश्न के चार विकल्प हैं। सही विकल्प चुनकर उत्तर पुस्तिका में लिखें। प्रत्येक प्रश्न 1 अंक का है। 1x30=30

1. 1922 ई० में मोहनजोदड़ो की खोज किसने की ?

(A) राखालदास बनर्जी

(B) रंगनाथ रा

(C) दयाराम साहनी

(D) माधोस्वरूप वत्स

2. सिंधु घाटी सभ्यता की पूर्वी सीमा किसे माना जाता है ?

(A) दैमाबाद

(B) आलमगीरपुर

(C) सुत्कागंडोर

(D) मांडा

3. सिंधु घाटी सभ्यता में विशाल स्नानागार के अवशेष कहाँ मिले हैं ?

(A) हड़प्पा

(B) धौलावीरा

(C) रंगपुर

(D) मोहनजोदड़ो

4. मेगस्थनीज़ किस देश का निवासी था

(A) अरब

(B) यूनान

(C) फ्रांस

(D) पुर्तगाल

5. अर्थशास्त्र के लेखक कौन हैं ?

(A) कौटिल्य

(B) चन्द्रगुप्त मौर्य

(C) समुद्रगुप्त

(D) इनमें से कोई नहीं

6. मगध के शासकों की प्रारंभिक राजधानी कहाँ थी

(A) राजगीर

(B) पाटलिपुत्र

(C) वैशाली

(D) नालंदा

7. ' अष्टाध्यायी' की रचना किसने किया ?

(A) पाणिनि

(B) चरक

(C) भरत मुनि

(D) कालिदास

8. भगवतगीता किस महाकाव्य का एक महत्वपूर्ण उपदेशात्मक अंश है ?

(A) महाभारत

(B) रामायण

(C) पुराण

(D) ऋग्वेद

9. अशोक के आदेश से बनाई गई सबसे प्राचीन कृत्रिम गुफाएँ किस संप्रदाय को समर्पित थीं ?

(A) बौद्ध

(B) जैन

(C) लोकायत

(D) आजीवक

10. जैन धर्म में कितने तीर्थंकर हुए ?

(A) 22

(B) 23

(C) 24

(D) 25

11. सांची का स्तूप मध्य प्रदेश के किस जिले में स्थित है ?

(A) ग्वालियर

(B) सागर

(C) रायसेन

(D) कटनी

12. इब्न बतूता अपनी यात्रा का विवरण किस भाषा में लिखा था ?

(A) फारसी

(B) उर्दू

(C) अंग्रेजी

(D) अरबी

13. फ्रांस्वा बर्नियर किस देश के निवासी थे?

(A) इंग्लैंड

(B) फ्रांस

(C)  इटली

(D)  र्मनी

14. 'आदिग्रंथ साहिब' का संकलन किसने किया ?

(A) गुरु नानक

(B) गुरु अर्जन देव

(C) गुरु गोविन्द सिंह

(D) गुरु तेग बहादुर

15. बीजक में किसका उपदेश संग्रहित है ?

(A) कबीर

(B) गुरु नानक

(C) चैतन्य

(D) रामानंद

16. विजयनगर साम्राज्य की स्थापना कब हुई ?

(A) 1333 ई०

(B) 1336 ई०

(C) 1340 ई०

(D) 1346 ई०

17. कहाँ के शासक वंश को "गजपति" कहा जाता था ?

(A) विजयनगर

(B) बहमनी

(C) गुजरात

(D) उड़ीसा

18. किस अफगान शासक ने हुमायूँ को पराजित कर भारत भूमि से बाहर निकाल दिया था ?

(A) सिकंदर शाह सूरी

(B) आदिल शाह सूरी

(C) शेरशाह सूरी

(D) इनमें से कोई नहीं

19. पानीपत का तीसरा युद्ध कब हुआ ?

(A) 1757 ई०

(B) 1761 ई०

(C) 1764 ई०

(D) 1765 ई०

20. आइन-ए-अकबरी कितने भागों में विभक्त है?

(A) दो

(B) तीन

(C) चार

(D) पाँच

21. तंबाकू पर किस मुग़ल शासक ने प्रतिबंध लगाया ?

(A) बाबर

(B) हुमायूँ

(C) अकबर

(D) जहाँगीर

22. संथाल विद्रोह किस वर्ष हुआ ?

(A) 1832

(B) 1885

(C) 1855

(D) 1876

23. 1875 ई० के दक्कन विद्रोह की शुरुआत से हुई थी ?

(A) मुंबई

(B) मद्रास

(C) पूना

(D) मैसूर

24. 1857 की क्रांति का आरंभ कब हुआ?

(A) 10 मई

(B) 13 मई

(C) 18 मई

(D) 21 मई

25. 1857 की क्रांति के तात्कालिक कारण क्या थे?

(A) हड़प नीति

(B) पेंशन एवं उपाधियों की समाप्ति

(C) व्यापार तथा वाणिज्य का विनाश

(D) प्राणीज चर्बी वाले कार्तृस की अफवाह

26. जलियांवाला बाग हत्याकांड कब हुआ ?

(A) 1913

(B) 1915

(C) 1919

(D) 1920

27. किस गोल मेज सम्मेलन में गाँधीजी सम्मिलिन हुए ?

(A) प्रथम

(B) द्वितीय

(C) तृतीय

(D) इनमें से कोई नहीं

28. मुस्लिम लीग द्वारा 'प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस' का आह्वान कब किया गया ?

(A) 22 दिसम्बर, 1939

(B) 22 दिसम्बर, 1942

(C) 16 अगस्त, 1945.

(D) 16 अगस्त, 1946

29. भारत के संविधान का पिता किसे कहा जाता है ?

(A) डॉ० राजेन्द्र प्रसाद

(B) पंडित जवाहरलाल नेहरू

(C) डॉ० सच्चिदानंद सिन्हा

(D) डॉ० भीमराव अम्बेडकर

30. भारतीय संविधान सभा के अस्थाई अध्यक्ष कौन थे ?

(A) डॉ० सच्चिदानंद सिन्हा

(B) वल्लभभाई पटेल

(C) डॉ० भीमराव अंबेडकर

(D) के०एम० मुंशी

भाग-B (विषयनिष्ठ प्रश्न)

खण्ड - A (अति लघु उत्तरीय प्रश्न)

किन्हीं छः प्रश्नों के उत्तर दें। 2x6-12

31. पाटलिपुत्र की स्थापना किसने किया था?

उत्तर- पाटलिपुत्र की स्थापना उदयिन ने किया था।

32. महावीर स्वामी का जन्म कब और कहाँ हुआ था ?

उत्तर- महावीर स्वामी का जन्म 540 ई. पू. में वैशाली के कुंडग्राम में हुआ था।

33. अल-बिरूनी किसके साथ भारत आया था?

उत्तर- अलबरूनी महमूद गजनवी के साथ भारत आया था।

34. पीर और मुरीद से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर- पीर का अर्थ है - गुरु, आध्यात्मिक मार्गदर्शक या सूफी संत।

मुरीद का अर्थ है- शिष्य, अनुयायी या दीक्षित भक्त।

35. अंतिम मुग़ल बादशाह कौन थे ?

उत्तर- अंतिम मुग़ल बादशाह बहादुर शाह जफर थे।

36. 1857 की क्रांति के प्रमुख केंद्रों के नाम बताएँ ।

उत्तर- 1857 के विद्रोह के प्रमुख केंद्रों के नाम- मेरठ, दिल्ली, बनारस, अवध, कानपुर, झांसी, इलाहाबाद।

 

37. गाँधीजी का जन्म कब और कहाँ हुआ?

उत्तर- महात्मा गाँधी का जन्म 2 अक्टूबर, 1869 को गुजरात के पोरबंदर नामक स्थान पर हुआ था।

38. भारतीय संविधान सभा के प्रारूप समिति के अध्यक्ष कौन थे ?

उत्तर- भारतीय संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अम्बेडकर थे।

खण्ड - B (लघु उत्तरीय प्रश्न)

किन्हीं छः प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर अधिकतम 150 शब्दों में दें। 3x6=18

39. हड़प्पा सभ्यता के पतन के कारणों का उल्लेख करें ।

उत्तर- हड़प्पा सभ्यता की पतन के संदर्भ में कोई संतोषजनक प्रमाण नहीं मिला है। लगभग अट्ठारह सौ ईसा पूर्व के आसपास इस सभ्यता का पतन हो गया। इस सभ्यता के पतन के संदर्भ में विद्वान एकमत नहीं है फिर भी कुछ ऐसे प्रमाण मिले हैं जिसके द्वारा अनुमान लगाया जाता है कि हड़प्पा सभ्यता के पतन के निम्नलिखित कारण थे-

A. बाढ़- सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख नगर नदियों के किनारे बसे थे, इन नदियों में प्रतिवर्ष बाढ़ आती थी। बाढ़ से प्रतिवर्ष क्षति भी होती थी। इस कारण से हड़प्पा वासी मूल स्थान को छोड़कर अन्य स्थानों पर रहने के लिए विवश हो गए होंगे।

B. महामारी- मोहनजोदड़ो से प्राप्त नर कंकालों के परीक्षण के पश्चात यह निष्कर्ष निकलता है कि हड़प्पा वासी मलेरिया महामारी जैसे अनेक प्राकृतिक आपदाओं के कारण बीमारियों के शिकार हो गए और उनके जीवन का अंत हो गया । इस कारण से भी इस सभ्यता का पतन हो गया।

C. जलवायु परिवर्तन- अनेक विद्वानों का कहना है कि अचानक सिंधु घाटी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के कारण यह हरा भरा क्षेत्र जंगल एवं बारिश की कमी के कारण मरुस्थल के रूप में परिवर्तित हो गया। इस कारण से भी यह सभ्यता नष्ट हो गया।

D. बाह्य आक्रमण- अनेक विद्वानों का अनुमान है कि बाह्य आक्रमण के कारण इस सभ्यता का अंत हुआ। संभवत ये बाह्य आक्रमणकारी आर्य रहे होंगे।

उपयुक्त कारणों के आधार हम कह सकते हैं कि हड़प्पा सभ्यता का पतन हो गया।

40. अशोक के धम्म से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर- अशोक के धम्म का अभिप्राय आचार के सर्वसम्मत नियमों से था। दया दान, सत्य, तथा गुरुजन माता-पिता की सेवा अहिंसा आदि गुण अशोक के धम्म थे। अनेक समानता के बावजूद अशोक धम्म बौद्ध धर्म से भिन्न था। धम्म सर्व हितकारी तथा लोक कल्याणकारी धर्म था। अशोक का धम्म आचार सम्बंधी सिद्धांतों समूह था। धम्म की संकल्पना नैतिक मूल्यों एवं आदर्शों से प्रभावित थी। अशोक का उद्देश्य सामाजिक समन्वय द्वारा राजनीतिक एकीकरण करना था । अर्थात् राजनीतिक एकीकरण का जो एक वृहत्तर उद्देश्य था, वह इसमें निहित था।

41. जैन धर्म के त्रिरत्न से आप क्या समझते हैं?

उत्तर- जैन धर्म के त्रिरत्न - मोक्ष का परम मार्ग त्रिरत्न अर्थात् सम्यक् ज्ञान, सम्यक् दर्शन और सम्यक् चरित्र हैं।

(i) सम्यक् ज्ञान - इसमें जीव और अजीव के मूल तत्वों का सविशेष ज्ञान होता है। यह दोषरहित होता है। इसकी प्राप्ति के लिए भी कर्मों का नाश आवश्यक है। इस ज्ञान की प्राप्ति सन्तों के उपदेशों के चिन्तन व मनन से होती है।

(ii) सम्यक् दर्शन - इसका आशय है वास्तविक ज्ञान के प्रति श्रद्धा मनन से श्रद्धा बढ़ती है और इसके लिए पूर्ण ज्ञान अनिवार्य है। श्रद्धा को सम्यक् दर्शन कहा जाता है।

(iii) सम्यक् चरित्र- इसमें हितकर कार्यों को शामिल करके अहित कार्यों का परित्याग किया जाता है। इसके अन्तर्गत हमें वासना, इन्द्रिय मन, वचन तथा कर्म को संयत करना पड़ता है। इसके परित्याग से नये कर्मों का संचय बन्द हो जाता है तथा पुराने कर्मों का नाश होता है। इससे जीव कर्मों से छूट जाता है।

42. विजयनगर में स्थित "महानवमी डिब्बा" पर टिप्पणी लिखें ।

उत्तर- महानवमी डिब्बा शहर के सबसे ऊंचे स्थानों में एक विशालकाय मंच है जो लगभग 11000 वर्ग फीट के आधार से 40 फीट की ऊंचाई तक जाता है। ऐसा साक्ष्य मिले हैं जिनसे पता चलता है कि इस पर एक लकड़ी की संरचना बनी थी। मंच का आधार उभारदार उत्कीर्णन से पटा पड़ा है।

महानवमी डिब्बा से संबंध अनुष्ठान सितंबर एवं अक्टूबर के शरद माह में 10 दिनों तक मनाया जाने वाला हिंदू त्यौहार है। इस अनुष्ठान को उत्तर भारत में दशहरा, बंगाल में दुर्गा पूजा और प्रायद्वीपीय भारत में नवरात्रि या महानवमी नामों से जाना जाता है। इस अवसर पर विजयनगर के शासक अपने रुतबे ताकत तथा सत्ता की शक्ति का प्रदर्शन करते थे। इस अवसर पर होने वाले धर्म अनुष्ठानों में मूर्ति की पूजा, राज्य के अश्व की पूजा तथा भैंसों और अन्य जानवरों की बलि दी जाती थी।

नृत्य कुश्ती प्रतिस्पर्धा तथा घोड़ों, हाथियों और रथों व सैनिकों की शोभायात्राएं निकाली जाती थी। साथ ही प्रमुख नायकों और अधीनस्थ राजाओं द्वारा राजा को प्रदान की जाने वाली औपचारिक भेंट इस अवसर के प्रमुख आकर्षण थे। त्योहारों के अंतिम दिन राजा सेनाओं का निरीक्षण करता था। साथ ही नए सिरे से कर निर्धारित किए जाते थे।

43. 17वीं सदी में कौन-कौन सी फसलें, फल एवं सब्जियाँ विदेशों से भारत आई ?

उत्तर - 17वीं सदी में मुख्यतः पुर्तगालियों और अन्य विदेशी यात्रियों के माध्यम से नई दुनिया (अमेरिका/अफ्रीका) से भारत में कई फसलें, फल और सब्जियाँ आईं। मुख्य रूप से मक्का, तंबाकू, आलू, टमाटर, मिर्च, अनानास, पपीता, अमरूद, काजू, काजू और मूंगफली भारत में इसी काल में लोकप्रिय हुईं और भारतीय कृषि का हिस्सा बनीं।

17वीं सदी की मुख्य विदेशी फसलें और फल/सब्जियाँ:

1. फसलें: मक्का (अफ्रीका-स्पेन के रास्ते), तंबाकू (दक्षिण अमेरिका)।

2. सब्जियाँ: आलू, टमाटर, मिर्च (नई दुनिया)।

3. फल: अनानास, पपीता, अमरूद, काजू, काजू (दक्षिण अमेरिका)।

44. 1857 के विद्रोह के क्या परिणाम हुए ?

उत्तर- भारत में ईस्ट इण्डिया कम्पनी के शासन का अन्त हो गया। अब भारत का शासन इंग्लैण्ड के ताज ने ग्रहण कर लिया। 1858 ई. में महारानी विक्टोरिया की घोषणा के अनुसार क्षेत्रों के सीमा विस्तार की नीति समाप्त कर दी गई। अब प्रादेशिक विस्तार के स्थान पर आर्थिक शोषण का युग आरम्भ हुआ। अंग्रेजों ने हिन्दू-मुस्लिम एकता तोड़ने के लिये 'फूट डालो एवं राज्य करो' की नीति अपनाई। 1858 से 1872 तक अंग्रेजों ने हिन्दू समर्थक एवं मुस्लिम विरोधी नीति अपनायी। 1872 ई. के पश्चात् इन्होंने मुस्लिम समर्थक एवं हिन्दू विरोधी नीति अपनाई।

45. भारत छोड़ो आंदोलन के क्या कारण थे?

उत्तर : भारत छोड़ो आंदोलन के कारण :

1. मार्च 1942 में क्रिप्स मिशन की असफलता से यह बात स्पष्ट हो गई थी कि विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटेन भारतीयों को किसी भी प्रकार के शासन का अधिकार देना नहीं चाहता था।

2. विश्व युद्ध के कारण कीमतों में वृद्धि तथा रोजाना की वस्तुओं के अभाव के कारण जनता में असंतोष बढ़ रहा था।

3. जनता ब्रिटिश विरोधी भावना और पूर्ण स्वतंत्रता की मांग की समर्थक बन गई थी।

4. द्वितीय विश्व युद्ध में भारत का ब्रिटिश को बिना शर्त सहयोग से इनकार करना।

5. कांग्रेस से जुड़े विभिन्न निकाय जैसे अखिल भारतीय किसान सभा, फॉरवर्ड ब्लॉक आदि ने दो दशकों से अधिक समय से आंदोलन करके इस आंदोलन की पृष्ठभूमि तैयार कर रखी थी।

14 जुलाई 1942 को वर्धा अधिवेशन में कांग्रेस कार्यसमिति ने भारत छोड़ो आंदोलन के निर्णय को स्वीकृति दी। 08 अगस्त मुंबई में कांग्रेस का अधिवेशन हुआ जिसमे महात्मा गाँधी ने 'अँगरेजो भारत छोड़ो' (Quit India) का प्रस्ताव रखा। अँगरेजों के भारत छोड़ देने अर्थात् उनके द्वारा अपनी सत्ता हटा लेने के उपरांत भारत की शासन व्यवस्था और सरकार के निर्माण के संबंध में भी एक व्यापक रूपरेखा भी प्रस्तुत की गयी।

आंदोलन में महात्मा गांधी ने 'करो या मरो' (Do or Die) का नारा जनता को दिया।

8 अगस्त 1942 को समस्त शीर्ष नेता गिरफ्तार कर लिए गए आंदोलन की शुरुआत 9 अगस्त 1942 से हुई। काँग्रेस को अवैध संगठन घोषित कर दिया गया। सभाओं और प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया। सरकार ने आंदोलन का दमन पूरी बर्बरता और कठोरता के साथ किया था। समूचा देश सैन्य शिविरों में बदल गया था। सेना और पुलिस का राज्य स्थापित हो गया था। जनता का विद्रोह अहिंसात्मक सत्याग्रह से हटकर ब्रिटिश सत्ता के समस्त प्रतीकों पर हमले के रूप में आया जैसे डाकघरों को जलाना, रेल की पटरी को उखाड़ना, तिरंगा झंडा फहराना आदि।

46. भारतीय संविधान के प्रारूप समिति के क्या कार्य थे?

उत्तर: संविधान का प्रारूप तैयार करने के लिए 29 अगस्त 1947 को संविधान सभा द्वारा प्रारूप समिति का गठन किया गया, इस समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर थे प्रारूप समिति का काम था कि वह संविधान सभा के परामर्श शाखा द्वारा तैयार की गई संविधान का परीक्षण करें और संविधान के प्रारूप को विचारार्थ संविधान सभा के सम्मुख प्रस्तुत करे प्रारूप समिति ने भारतीय संविधान का जो प्रारूप तैयार किया वह फरवरी 1948 में संविधान सभा के अध्यक्ष को सौंपा गया।

खण्ड - C (दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)

किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर अधिकतम 150 शब्दों में दें। 3x6=18

47. सोलह महाजनपदों में मगध साम्राज्य सबसे शक्तिशाली कैसे बना ?

उत्तर- छठी शताब्दी ईसा पूर्व 16 राज्यों का उदय हुआ जिन्हें महाजनपद के रूप में जाना जाता है। इसमें से वज्जि, मगध, कौशल, कुरु, पांचाल और अवंति सबसे महत्वपूर्ण महाजनपद थे। इन महाजनपद में से मगध धीरे-धीरे एक शक्तिशाली महाजनपद के रूप में उभरता चला गया।

मगध के उत्कर्ष के कई कारण थे-

भौगोलिक स्थिति - मगध अपनी विशिष्ट भौगोलिक की स्थिति के कारण यह चारों ओर से सुरक्षित थी उत्तर में गंगा नदी, पूर्व में सोन नदी, पश्चिम में चंपा नदी तथा दक्षिण में विंध्याचल इसकी भौगोलिक सुरक्षा सीमा निर्मित करती थी।

प्राकृतिक संसाधन - राजगीर के पास लोहे के विशाल भंडार थे जिससे अस्त्र-शस्त्रों का निर्माण सुगम हुआ। मगध में कोयले के भंडार भी मिले हैं जो की आधुनिक झारखंड में है।

आर्थिक कारण - मध्य गंगा के मैदान मध्य भाग में स्थित होने के कारण मगध राज्य की भूमि उपजाऊ थी। जिससे उत्पादन बढ़ा और परिणाम स्वरुप व्यापार में वृद्धि हुई। इस प्रकार मगध महाजनपद आर्थिक दृष्टिकोण से संपन्न हुई ।

शक्तिशाली शासक - बिम्बिसार, अजातशत्रु एवं महापदमनंद जैसे प्रतापी राजाओं ने मगध महाजनपद को सर्व शक्तिशाली स्वरुप प्रदान किया। मगध प्रथम राज्य था जिसके पास शक्तिशाली हाथी सेना भी थी।

इस प्रकार हम पाते हैं कि मगध साम्राज्य के उत्कर्ष के लिए विभिन्न परिस्थितियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऐसी परिस्थितियों अन्य महाजनपद में नहीं थी। जिसके कारण मगध के समानांतर विकास नहीं कर सकी ।

48. महाभारत कालीन समाज में प्रचलित विवाह के प्रकारों का वर्णन करें ।

उत्तर - महाभारत कालीन समाज में विवाह एक पवित्र संस्कार के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक गठबंधन का साधन था, जिसमें मुख्यतः आठ प्रकार के विवाह प्रचलित थे।

1. ब्रह्म विवाह- वेद जानने वाले शीलवान वर को आमंत्रित कर उपहार आदि के साथ कन्या का विवाह करना।

2. देव विवाह- सफलतापूर्वक पूर्ण अनुष्ठानिक यज्ञ पूर्ण करने वाले पुरोहित के साथ कन्या का विवाह करना।

3. आर्श विवाह- इस विवाह में कन्या का पिता वर को कन्या प्रदान करने के साथ एक जोड़ी बैल प्रदान करता है।

4. प्रजापत्य विवाह- इस विवाह के अंतर्गत कन्या के पिता वर को कन्या प्रदान करते समय आदेश देता है कि दोनों साथ-साथ मिलकर सामाजिक कार्यों का पालन करें।

5. गन्धर्व विवाह- यह प्रेम विवाह होता था।

6. असुर विवाह- कन्या का पिता धन लेकर कन्या प्रदान करता है।

7. राक्षस विवाह- बलपूर्वक कन्या का अपहरण कर उससे विवाह करना।

8. पिशाच विवाह- यह सबसे निम्न विवाह माना गया है।

49. भक्ति आंदोलन की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख करें।

उत्तर- वह आंदोलन जिसमें धार्मिक भेदभाव एवं कुरुतियों को दूर कर एकता एवं सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया उसे ही भक्ति आंदोलन कहा जाता है।

भक्ति आंदोलन की कुछ प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित है।

(I) बाह्य आडंबरी का विरोध इस आंदोलन के तहत अनावश्यक कर्मकांडो पर रोक लगाकर धर्म को सरल बनाने पर जोर दिया गया जिससे सभी लोग जुड़ सके।

(II) एक ईश्वर में विश्वास एक ही ईश्वर है और वह सर्वशक्तिमान है इस पर जोर दिया गया।

(III) गृहस्थ जीवन पर जोर लोगों में यह जागरूकता फैलाई गई कि सन्यास के द्वारा ही ईश्वर की प्राप्त नहीं बल्कि गृहस्थ जीवन में भी रहकर भक्ति की जा सकती है।

(IV) हिंदू-मुस्लिम एकता पर जोर समाज में व्याप्त धार्मिक विरोध को देखते हुए संतो ने लोगो में यह जागरूकता फैलाई कि राम-रहीम में कोई अंतर नहीं है।

(V) मानव सेवा पर जोर इस आंदोलन के तहत मानव सेवा को सर्वोपरी बताया गया तथा कहा गया कि इससे मुक्ति मिल सकती है।

इस प्रकार भक्ति आंदोलन ने समाजिक सदभावना को बढ़ाने स्थानीय भाषाओं के द्वारा लोगो को जागरुकता फैलाने में अहम भूमिका निभाई

50. संथाल विद्रोह के कारण और परिणाम लिखें ।

उत्तर- संथाल विद्रोह आदिवासी विद्रोह में सबसे शक्तिशाली व महत्वपूर्ण माना जाता था है। इस विद्रोह का प्रारंभ 30 जून 1855 को हुआ था। संथाल विद्रोह को हुल विद्रोह के नाम से भी जाना जाता है। है। इसका प्रभाव क्षेत्र संथाल परगना, भागलपुर एवं वीरभूम को माना जाता है। इस विद्रोह के कारणों को निम्न शीर्षको से आवद्ध किया जा सकता है :-

(I) जमीन हडपना :- संथाल शांतिपूर्ण तरिके से पहाड़ों में रहते थे एवं अपना जीवन यापन खेती तथा वन उत्पादो से करते थे। अंग्रेजो भू-नीतियों (जैसे स्थायी बंदोबस्त) ने संथालो को भूमिहीन कर दिया जिस कारण से विद्रोह का जन्म हुआ ।

(II) वन नीतियो में परिवर्तन- स्थानीय आदिवासी वन एवं वन उत्पाद का बिना किसी रोकटोक के उपयोग करते थे। परंतु अंग्रेज ने इस पर भी अनावश्यक हस्तक्षेप कर अपने अधीन का कर लिया था।

(III) इसाई धर्म का प्रचार- इसाई धर्म का प्रचार भी अंग्रेजो ने बड़े पैमाने पर किये। प्रलोभन एवं दबाव के द्वारा इसाई धर्म में आदिवासियो को परिवर्तित किये। इसका रोष भी आदिवासी समूह में जिस कारण विद्रोह होना निश्चित हुआ।

(IV) तात्कालिक कारण- इसी समय अंग्रेज अधिकारियो ने भागलपुर बर्द्धमान के बीच रेल लाइन बिछाने का कार्य शुरू किया। संथाल लोगो से बेगारी करवाता था इस कारण से भी संथाल लोगो ने अंग्रेजो के खिलाफ विद्रोह किया।

संथाल विद्रोह के परिणाम

संथाल विद्रोह 1855 आदिवासियों का सबसे शक्ति शाली महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे हुल आंदोलन भी कहा जाता है हलाकि इस आंदोलन को दमन कर दिया गया । परंतु इसका दीर्घगामी परिणाम हुआ इसके परिणाम निम्नांकित शीर्षकों से वर्णित किया जा सकता है।

(i) वन पर अधिकार 1855 के संथाल विद्रोह के उपरांत आदिवासियों को वन एंव वन उत्पाद पर अधिकार प्राप्त हुआ।

(ii) जमीन पर अधिकार :- संथाल विद्रोह के उपरांत अंग्रेजो को अपनी भू-नीति पर पुर्नविचार करना पड़ा। जमीन पर आदिवासियों को खोया हुआ अधिकार प्राप्त हुआ ।

(iii) वेगारी प्रथा बंद हुआ भागलपुर वर्द्धमान रेल लाईनो के निर्माण के समय आदिवासियों से जबरन बेगारी लिया जाता था। परंतु इस विद्रोह के उपरांत अंग्रेजो ने लाचार बस बेगारी लेना बंद किया।

(iv) संथाल परगना का जिला का निर्माण संथाल विद्रोह 1855 का एक प्रमुख परिणाम यह रहा कि संथाल बाहुल क्षेत्र को अलग संथाल परगना जिला बना। जो आज एक प्रमण्डल के रुप में विद्यमान है।

51. असहयोग आंदोलन के कारण और प्रभाव बताइए ।

उत्तर: अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों के विरोध में गांधीजी ने अगस्त 1920 ई. को असहयोग आन्दोलन प्रारंभ करने की घोषणा की। 1920 ई. के कलकत्ता के विशेष अधिवेशन तथा नागपुर अधिवेशन में गांधी जी की घोषणा का कांग्रेस ने समर्थन किया ।

असहयोग आंदोलन के कार्यक्रम :

A. उपाधियों और अवैतनिक पदों का बहिष्कार ।

B. सरकारी सभाओं का बहिष्कार ।

C. स्वदेशी का प्रयोग |

D. सरकारी स्कूलों व कॉलेजों का परित्याग ।

E. वकीलों द्वारा सरकारी न्यायालय का परित्याग ।

F. राष्ट्रीय न्यायालयों की स्थापना ।

G. हिन्दू-मुस्लिम एकता पर बल ।

H. अस्पृश्यता की समाप्ति ।

गांधीजी तथा अन्य व्यक्तियों द्वारा उपाधियों के परित्याग से इस आंदोलन की शुरुआत हुई। कांग्रेस ने विधानमंडल के चुनाव का बहिष्कार किया । स्वदेशी शिक्षण संस्थान स्थापित किए गए जैसे काशी विद्यापीठ, बिहार विद्यापीठ, जामिया मिलिया इस्लामिया आदि, विदेशी वस्त्रों की होली जलाई गई । चरखे का प्रचलन बढ़ा 'तिलक स्वराज फंड' की स्थापना हुई और शीघ्र ही इसमें 1 करोड़ रुपये जमा हो गए। स्वशासन के स्थान पर स्वराज को अंतिम लक्ष्य घोषित किया गया।

आंदोलन के दौरान हिन्दू मुस्लिम एकता का भी प्रस्फुटन हुआ। असहयोग आंदोलन का प्रारंभ शहरी मध्यम वर्ग की हिस्सेदारी से प्रारंभ हुआ। विद्यार्थियों ने स्कूल-कॉलेज छोड़ दिये, शिक्षकों ने त्यागपत्र दे दिया, वकीलों ने मुकदमे लड़ने बंद कर दिये तथा मद्रास के अतिरिक्त प्रायः सभी प्रांतों में परिषद् चुनावों का बहिष्कार किया गया । विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया गया, शराब की दुकानों की पिकेटिंग की गयी । व्यापारियों ने विदेशी व्यापार में पैसा लगाने से इन्कार कर दिया। देश में खादी का प्रचलन और उत्पादन बढ़ा। सरकार ने इस आंदोलन को सख्ती से दबाया।

असहयोग आंदोलन को वापस लेने का फैसला 5 फरवरी 1922 को उत्तर प्रदेश की चोरीचौरा नामक स्थान में आंदोलनकारियों और पुलिस में झड़प हो गई जिसमें 22 पुलिस वाले मारे गए। इस घटना से गांधी जी ने असहयोग आंदोलन को वापस ले लिया। अंततः 12 फरवरी 1922 को असहयोग आंदोलन की समाप्ति कर दी गई।

असहयोग आंदोलन के प्रभाव :

(i) आंदोलन ने राष्ट्रीय भावना का विकास किया, अंग्रेजो के प्रति विरोध का वातावरण बनाया।

(ii) स्वदेशी वस्तुओं के इस्तेमाल में वृद्धि हुई और विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार हुआ।

(iii) देशी शिक्षण संस्थाओं का विकास हुआ।

(iv) कांग्रेसी पार्टी भी अपनी नीतियों एवं कार्यक्रमों में बदलाव किया।

(v) हिंदी को राष्ट्रभाषा का महत्त्व दिया गया तथा अंग्रेजी के प्रयोग में कमी आई।

(vi) खादी का प्रचलन प्रारंभ हुआ। चरखा राष्ट्रीय अस्मिता का प्रतीक बन गया।

(vii) आंदोलन जनसाधारण तक पहुंची।

(viii) आंदोलन की असफलता ने कांतिकारी गतिविधियों को प्रेरणा दी।

52. महात्मा गाँधी को ऐसा क्यों लगता था कि हिन्दी राष्ट्रीय भाषा होना चाहिए ?

उत्तर - स्वतन्त्रता आन्दोलन के दौरान महात्मा गाँधी का मानना था कि प्रत्येक भारतीय को ऐसी भाषा बोलनी चाहिए जिसे सभी आसानी से समझ सकें। "हिन्दुस्तानी भाषा" एक ऐसी ही भाषा थी जो हिन्दी तथा उर्दू के शब्दों से मिलकर बनी थी तथा भारतीय जनता का एक बड़ा वर्ग इस भाषा का प्रयोग करता था। महात्मा गाँधी को लगता था कि "यह बहुसांस्कृतिक भाषा विविध समुदायों के बीच संचार की आदर्श भाषा हो सकती है।" "यह हिन्दुओं और मुसलमानों को, उत्तर और दक्षिण के लोगों को एकजुट कर सकती है।"

गाँधी जी साम्प्रदायिकता के विरोधी थे। उनका मानना था कि इस भाषा से दोनों सम्प्रदायों के लोगों में परस्पर मेल-मिलाप, प्रेम, सद्भावना, ज्ञान का आदान-प्रदान बढ़ेगा और यही भाषा देश की एकता को मजबूत करने में अधिक आसानी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

इस प्रकार स्वतन्त्रता आन्दोलन के दौरान काँग्रेस ने यह मान लिया था कि हिन्दुस्तानी को राष्ट्रीय भाषा का दर्जा दिया जाये।

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