12th Hindi Core 2. पतंग (आलोक धन्वा) JCERT/JAC Reference Book

12th Hindi Core 2. पतंग (आलोक धन्वा) JCERT/JAC Reference Book

 

12th Hindi Core 2. पतंग (आलोक धन्वा) JCERT/JAC Reference Book

2. पतंग (आलोक धन्वा)

1. लेखक परिचय

I. नाम- आलोक धन्वा

ii. जन्म- वर्ष सन 1948 ईस्वी

III. जन्म स्थान - बिहार

iv. जिला - मुंगेर

2. आलोक धन्वा : साहित्यिक परिचय

i. आलोक धन्वा अपनी गिनी चुनी कविताओं से हिंदी साहित्य जगत में नाम कमाया। आलोक धन्वा ने व्यापक ख्याति के बावजूद कभी भी लेखन का ढेर नहीं लगाया। ये सातवें-आठवें दशक के जाने- माने रचनाकार है।

ii. प्रमुख रचनाएं इनकी एक मात्र काव्य संग्रह सन 1998 में प्रकाशित हुआ। पिछले दो दशकों से सांस्कृतिक कार्यकर्ता के रूप में अपनी पहचान छोड़ी है जिसमें इस्पात नगरी जमशेदपुर भी शामिल है।

iii. भाषा शैली - इनकी रचना मे खड़ी बोली अपभ्रंश, देशज एवं हिंदी का सहज एवं सुंदर प्रयोग मिलता है जैसे पतंग कविता में कई भाषाओं के शब्दों का मेल देखने को मिलता है।

पाठ- परिचय

प्रस्तुत पाठ 'पतंग' आलोक धन्वा जी द्वारा रचित एक मनभावक कविता है। लेखक ने भादो मास के बाद आने वाली शरद ऋतु का बड़ा ही सुंदर चित्रण किया है। कविता की विषय वस्तु में उन्होंने उत्साही, एवं नादान बच्चों को रखा है, जो अपने ही धुन में रमे दिखते हैं जो दुनियादारी से बेखबर होकर पतंग उड़ाने में मशगूल (व्यस्त) है। कविता में ऋतु परिवर्तन का सुंदर समायोजन किया है। शरद ऋतु में बच्चों के क्रियाकलापों का वर्णन उन्होंने सजगता के साथ किया है। बच्चों के आंतरिक गुण कोमलता एवं निर्भीकता को उन्होंने अपने कविता में प्रमुख स्थान दिया है। मोटे तौर पर हम लोग कविता को तीन बिंदुओं के आधार पर देख सकते हैं। आइए इन बिंदुओं का एक अवलोकन किया जाए-

1. शरद ऋतु का भव्य चित्रण- भादो महीने के अस्तित्व समाप्ति के बाद शरद ऋतु के आगमन का चित्रण कवि ने बहुत ही सुंदर और भव्य तरीके से किया है। कवि ने खरगोश, नई चमकीली साइकिल, घंटी के जोर-जोर की आवाज, चमकीली इशारे, बादलों का मुलायम होना आदि शब्दों के द्वारा शरद ऋतु की आगमन (आना) का वर्णन किया है। कई महीनों के बाद शरद ऋतु का आगमन होता है जो अपनी स्वच्छ मुलायम आसमान को लेकर बच्चों के लिए उपस्थित होती है और साथ देती है चमकीले सूर्य की किरणे। पंतगउड़ाने के लिए शरद ऋतु का विस्तृत मुलायम आसमान उन्हें आकर्षित करता है।

2. पतंग और बच्चे - पतंग प्रतीक है ऊंचाइयों को छूने का। पतंग अपने हल्के निर्माण और कोमलता के कारण आसमान को छू पाता हैं। बच्चे भी जन्म के साथ केवल कोमलता एवं छल प्रपंच रहित उत्साह उमंग के भाव से संचालित होते हैं। इन्हीं कारणों से कवि ने पतंग और बच्चे में समानता दिखाई है। पतंग और बच्चे के गुणों में समानता के अतिरिक्त एक और यहां भाव निहित है जो यह बताती हैं कि कोमलता छल प्रपंच रहित व्यक्ति ही ऊंचाइयों को छू सकता है।

3. शरीर और मन की कोमलता के साथ निर्भीकता - कवि आलोक धन्वा जी ने बच्चे के कोमल हृदय और कोमल शरीर के साथ- साथ उनकी निर्भीकता की भी सराहना करते है। छतों पर पतंग उड़ाते उड़ाते कभी कभार वे नीचे भी गिर जाते हैं किंतु कुशल हो जाने की स्थिति में वे पुनः वैसे ही गतिविधियां करने लगते हैं जिनसे उनका कभी नुकसान हुआ था यहां बच्चों के माध्यम से आशावादी होने की प्रेरणा मिलती है जब कोई काम मन से किया जाए तो शरीर भी साथ देता है।

पतंग पाठ का सारांश-

1. पतंग कविता में शरद ऋतु के साथ बालमन की उमंग का चित्रण किया गया है।

2. भादो महीना की मूसलाधार बारिश के बाद शरद ऋतु का आगमन चमकीले धूप के साथ चित्रित किया है।

3. शरद ऋतु के चमकीले, स्वच्छ और मुलायम आकाश बच्चों को पतंग उड़ाने के लिए आकर्षित करती है।

4. शरद ऋतु की निम्नलिखित विशेषताओं को दिखाया गया है-

क) शरद ऋतु की सुबह को खरगोश की लाल आंख की भांति चमकीला दिखाया गया है।

ख) शरद ऋतु बच्चों को इशारे से पतंग उड़ाने के लिए बुलाते है।

ग) शरद ऋतु के आसमान को पतंग उड़ाने के लिए उपयुक्त माना गया है।

5. पतंग अपने हल्के निर्माण और कोमलता के कारण आसमान को छू पाता हैं।

6. बच्चे अपने जन्म के साथ कपास की भांति कोमलता लेकर आते हैं।

7. बच्चे शोर मचाते हुए पतंग को उड़ाते हैं। उनके शोर से मानो दिशाए भी मृदंग की भांति कम्पायमान हो रहा हो।

8. बच्चों के शरीर का लचीलापन पेड़ों की डालियों की भांति प्रतीत होता है।

9. वे छत के खतरनाक किनारों पर पतंग उड़ाते हुए ऐसे गतिविधि करते हैं मानो वे लचीली गति से झूल रहे हो।

10. बच्चे कभी पतंग उड़ाने में गिर भी जाते हैं तो और भी निर्भीक हो जाते हैं।

मूल काव्याश - 1

सबसे तेज़ बौछारें गयीं ।॥

भादो गया सवेरा हुआ

अपनी नयी चमकीली साइकिल तेज चलाते हुए

घंटी बजाते हुए जोर - जोर से

चमकीले इशारों से बुलाते हुए

पतंग उड़ाने वाले बच्चों के झुंड को

चमकीले इशारों से बुलाते हुए और

आकाश को इतना मुलायम बनाते हुए

खरगोश की आँखों जैसा लाल सवेरा

शरद आया पुलों को पार करते हुए

कि पतंग ऊपर उठ सके

दुनिया की सबसे हलकी और रंगीन चीज उड़ सके

दुनिया का सबसे पतला कागज उड़ सके

बाँस की सबसे पतली कमानी उड़ सके

कि शुरू हो सके सीटियों, किलकारियों और

तितलियों की इतनी नाजुक दुनिया।

1. शब्दार्थ

बौछार - पानी का छींटा।

भादो - वर्षा ऋतु का अंतिम महीना।

सवेरा - सुबह। चमकीली चमकता हुआ।

शरद - वर्षा ऋतु के बाद का महीना।

इशारा - संकेत।

झुंड - समूह।

किलकारियां - खुशी से निकलने वाली हंसी।

नाजुक - कोमल।

कमानी - झुकाई गई लोहे की कीली।

ii . प्रसंग- प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक आरोह भाग 2 के काव्य खंड में संकलित पतंग नामक कविता से उद्धृत है। इसके रचनाकार 'आलोक धन्वा' जी है। प्रस्तुत काव्यांश में शरद ऋतु का आगमन और इस ऋतु में बच्चों के क्रियाकलापों का जीवंत चित्रण किया गया है।

iii. व्याख्या- आलोक धन्वा जी ने कविता पतंग के माध्यम से ऋतु परिवर्तन का सुंदर समायोजन किया है, साथ ही साथ बच्चों का इन दिनों में होने वाले क्रियाकलापों को बड़े ही सुंदर ढंग प्रस्तुत किया है। भादो महीना वर्षा ऋतु की अंतिम महीना है जब यह ऋतु अपने काले मेघ के साथ अपना अस्तित्व मिटा देती है तब एक नई ऋतु का आगमन होता है जो खरगोश के सामान काफी सुंदर स्वच्छ और चमकीले सवेरे को साथ में लेकर आती। दूसरे शब्दों में अगर देखा जाए तो बर्षा ऋतु के समाप्ति के बाद पुलों को पार करते हुए, शरद ऋतु की नई चमकीली साइकिल रूपी सूरज अपनी नई किरणों के साथ उपस्थित होती है। उत्साह और उमंग को व्यक्त करते हुए घंटी की तेज आवाज का प्रयोग करते हुए बच्चों को पतंग उड़ाने के लिए आमंत्रित करते हुए बच्चों पर मेहरबान हो जाती है। इनकी पतंग को उड़ान भरने के लिए वो अपने विस्तृत मुलायम आसमान को बच्चों के लिए सुपुर्द कर देती है, ताकि बच्चे पतंग को उड़ता हुआ देखकर सीटियां और किलकारियां मार सके।

iv. विशेष -

i. भाषा सरल एवं प्रभावशाली है।

ii. खरगोश की आंखों जैसा लाल सवेरा में उपमा अलंकार है।

iii. "शरद आया पुल को पार करते हुए" में शरद आया में मानवीय अलंकार है

iv. जोर-जोर में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।

v. नई चमकीली साइकिल सूर्य की किरणों का प्रतीक है।

vi. घंटी बजाते हुए जोर-जोर से में उत्साह और उमंग का प्रतीक है।

vii. यहां बालकों का स्वाभाविक एवं बाल मनोविज्ञान भाव को दर्शाया गया है।

viii. संस्कृत के साथ-साथ उर्दू एवं तद्भव शब्दों का भी प्रयोग किया गया है।

मूल कव्यांश - 2

जन्म से ही वे अपने साथ लाते हैं कपास

पृथ्वी घूमती हुई आती है उनके बेचैन पैरों के पास

जब वे दौड़ते हैं बेसुध

छतों को भी नरम बनाते हुए

दिशाओं को मृदंग की तरह बजाते हुए

जब वे-पेंग भरते हुए चले आते हैं

डाल की तरह लचीले वेग सो अकसर

छतों के खतरनाक किनारों तक

उस समय गिरने से बचाता हैं उन्हें

सिर्फ उनके ही रोमांचित शरीर का संगीत

पतंगों की धड़कती ऊँचाइयाँ उन्हें थाम लेती हैं महज़ एक धागे के सहारे ।

i. शब्दार्थ -

कपास - एक प्रकार का पौधा जिसके फल से रुई निकाली जाती है। बेसुध- अचेत, बेहोश, अत्म विस्मृत (भूलाया हुआ)। नरम - कोमल। मृदंग - एक वाद्य यंत्र। पेंग झूला झूलते समय झूले का इधर - उधर जाना। लचीला कोमल। वेग - गति।

ii. प्रसंग प्रस्तुत काव्याश हमारी पाठ्य पुस्तक आरोह भाग 2 के काव्य खंड में संकलित पतंग नामक कविता से उद्धृत है। इसके रचनाकार 'आलोक धन्वा' जी है। इस काव्यांश में आत्म विस्मृत बच्चों को निर्भीकता एवं हर्षोल्लास के साथ पतंग उड़ाने में किए जा रहे विभिन्न क्रियाकलाप को दिखाया गया है। अपने शरीर के प्रति गंभीरता ना लेते हुए वे पतंग उड़ाते हुए छतों के किनारे तक पहुंच जाते हैं।

iii. व्याख्या इन पंक्तियों के माध्यम से आलोक धन्वा जी ने बच्चों की को मलता की तुलना कपास से की है। कपास अपनी कोमलता में अनूठी होती है वैसे ही यह बच्चे अपने स्वभाव में कोमलता को दर्शाते हैं। बच्चे पतंग उड़ाने में इतने आत्म विस्मृत (भूल जाना) हो जाते हैं कि वे लगभग बेसुध से हो जाते हैं उन्हें ज्ञात नहीं होता कि वह कहां दौड़ रहे हैं तो ऐसे में उनकी गतिशीलता को संभालने के लिए पृथ्वी को उनके पैरों के पास आना पड़ता है।

छत पर दौड़ते समय छत की खुरदरी सतह को अपने पैरों की गतिशीलता से नरम बना देते हैं। बच्चे जब तेज गति से छतों पर दौड़ते हैं तो उनके पैरों की थाप, हर्षोल्लास की ध्वनि एवं इनकी गतिशीलता दिशाओं को भी ध्वनित करती है जैसे मानो कहीं मृदंग बज रहा हो। जब यह एक तरफ से दूसरी तरफ दौड़ लगाते हैं तो इनके देह की लचक ऐसा प्रतीत होता है जैसे मानो कोई डाली मैं लचक आ गई हो।

iv. विशेष -

i. भाषा सरस एवं प्रभावशाली है।

ii. कई स्थानों पर बिंब का प्रयोग किया गया है।

iii. बालक की तुलना कपास से करके उनकी कोमलता को दर्शाया गया है।

iv. बालकों का अपने शरीर के प्रति लापरवाह होना स्वाभाविक रूप में दिखाया गया है।

v. इन पंक्तियों में कवि ने एक साथ कई भाषाओं के शब्दों का प्रयोग किया है।

vi. "दिशाओं को मृदंग की तरह बजाते हुए" और" डाल की तरह लचीले वेग से अक्सर " में उपमा अलंकार है।

मूल कव्यांश - 3

छतों के खतरनाक किनारों तक-

उस समय गिरने से बचाता हैं उन्हें

सिर्फ उनके ही रोमांचित शरीर का संगीत

पतंगों की धड़कती ऊँचाइयाँ उन्हें थाम लेती हैं महज़ एक धागे के सहारे ।

पतंगों के साथ-साथ वे भी उड़ रहे हैं

अपने रंध्रों के सहारे।

i. शब्दार्थ - रोमांचित-पुलकित, हर्ष से भरा हुआ। थामना-पकड़ना। महज केवल। रंध्रों-छिद्र, सुराख, मार्ग, सुषुप्त शक्ति।

ii. प्रसंग प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक आरोह भाग 2 के काव्य खंड में संकलित पतंग नामक कविता से उद्धृत है। इसके रचयिता आलोक धन्वा जी हैं। इस अंश में कवि ने शरद ऋतु में बच्चों द्वारा निर्भीक और मग्न और अपने शरीर के प्रति गंभीरता ना लेते हुए पतंग उड़ाते बच्चों का वर्णन किया है।

iii. व्याख्या - इन पंक्तियों के माध्यम से कवि कहते हैं कि बच्चे बिना डरे बिना अपनी जान की परवाह किए पतंग उड़ाने में मग्न रहते हैं। उन्हें इस बात की परवाह नहीं रहती कि वह पतंग उड़ाते वक्त गिर भी सकते हैं। ध्यान उड़ते पतंग की ऊंचाइयों पर होता है उन्हें यह आभास होता है कि वे भी पतंगके साथ-साथ ऊंचाइयों में उड़ रहे हैं। कोई भी जब काम मन से किया जाता है तो शरीर भी साथ देता है इन बच्चों के साथ भी यही बात लागू हो रही है पतंग को उड़ाते वक्त इन की लापरवाहियों को भी शरीर बड़ी कुशलता से थाम लेता है।

विशेष-

i. भाषा सरल सहज एवं प्रवाहमयी है

ii. कवि ने बड़ी कुशलता के साथ बाल मनोविज्ञान को यहां स्पष्ट किया है

iii. साथ-साथ में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।

iv. निडरता बच्चों का स्वाभाविक गुण है जिसे लेखक ने इन पंक्तियों में भली- भांति उकेरा है।

मूल कव्यांश चार - 4

शब्दों का तालमेल कवि ने बड़ी खूबसूरती के साथ किया है।

अगर वह कभी गिरते हैं छतों के खतरनाक किनारों से

और बच जाते हैं तब तो

और भी निडर होकर सुनहले सूरज के सामने आते हैं

पृथ्वी और भी तेज घूमती हुई जाती है

उनके बेचैन पैरों के पास ।

i. शब्दार्थ - निडर - बिना डरे हुए। सुनहरे- सोने के रंग का । पृथ्वी बेचैन - व्याकुल, अधीर। धरती।

ii. प्रसंग प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक आरोह भाग 2 के काव्य खंड में संकलित पतंग नामक कविता से उद्धृत है। इसके रचयिता श्री आलोक जी धन्वा है। इस अंश में कवि ने बच्चों की बाल सुलभ चेष्टा को प्रस्तुत किया है।

iii. व्याख्या - बच्चे कई बार खेल में इतना रम जाते हैं कि उन्हें खतरे का आभास ही नहीं होता कभी-कभी दुर्भाग्यवश पतंग उड़ाते वक्त छतों से गिर पड़ते हैं ऐसी हालात में अगर वह सही सलामत उठ खड़े होते हैं तो और भी निडर हो जाते हैं। फिर से वे गतिमान हो जाते हैं पहले से कहीं और अधिक गतिमान हो जाते हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि दुनिया उनके मुट्ठी में है और उनके चंचल कदमों को पृथ्वी संभालना और चूमना चाहती हो।

iv. विशेष-

i. निडरता बच्चों का स्वाभाविक गुण है।

ii. बच्चे जब किसी काम में रमते हैं तो सारी दुनिया को भूल जाते हैं।

iii. भाषा प्रभावशाली है।

iv. खड़ी बोली का प्रयोग किया गया है।

v. बच्चों का अपने लगन के प्रति कटिबद्ध होते दिखाया गया है।

vi. किसी दुर्घटना घटित होने पर बच्चे और भी निर्भीक (बिना डरे हुए) हो जाते हैं इन पंक्तियों के माध्यम से हम देख पाते हैं।

vii. पृथ्वी का यहां मानवीकरण किया गया है।

प्रश्न अभ्यास

प्रश्न 1 - सबसे तेज बौछारें गई भादो गया के बाद प्रकृति में जो परिवर्तन कवि ने दिखाया है उसका वर्णन अपने शब्दों में करें।

उत्तर - भादो का महीना वर्षा ऋतु का अंतिम महीना होता है। इस ऋतु में आसमान काले बादलों से छाया रहता है, लेकिन जब भादो माह की समाप्ति होती है तब बादल अपनी स्वच्छ आकृति में प्रकृति में फैल जाती है। आसमान खरगोश के सफेद रंगों के समान स्वच्छ हो उठता है। सूर्य की किरणें भी काफी प्रखर हो उठती है मानो खरगोश की लाल आंखें हमारे समक्ष प्रस्तुत हो गया हो। तितलियां भी अपनी नाजुक देह से इधर उधर उड़कर शरद ऋतु का अभिवादन करती है।

प्रश्न 2 - सोच कर बताएं कि पतंग के लिए सबसे हल्की और रंगीन चीज सबसे पतला कागज सबसे पतली कमानी जैसे विषयों का प्रयोग क्यों किया है?

उत्तर- कवि की दृष्टि में पतंग सपनों का प्रतीक है। सपने रंगीन और नाजुक होते हैं। पतंगों के लिए प्रयुक्त विशेषण हल्के रंगीन पतला आदि गुणों से शोभित किया गया है क्योंकि यह बच्चों के कोमलता निश्चल और उल्लास मन को दर्शाती है। कवि कहते हैं की मन पतंग की भांति जितना हल्का होगा वह उतना ऊपर उठ पाएंगा।

प्रश्न 3 - बिंब स्पष्ट करें

सबसे तेज़ बौछारें गयीं ।। भादो गया

सवेरा हुआ

खरगोश की आखों जैसा लाल सवेरा

शरद आया पुलों को पार करते हुए

अपनी नई चमकीली साइकिल तेज चलाते हुए

घंटी बजाते हुए जोर - जोर से

चमकीले इशारों से बुलाते हुए

पतग उड़ाने वाले बच्चों के झुड को चमकील इशारों से बुलाते हुए

और आकाश को इतना मुलायम बनाते हुए कि पतंग ऊपर उठ सके।

उत्तर - आलोक धन्वा जी द्वारा रचित पतंग एक बिंब प्रधान रचना है आलोक जी ने अपनी कविता में कई जगहो पर बिंब का सहारा लिया है। इन पंक्तियों में कुछ बिंब का प्रयोग किया गया है जो इस प्रकार से है -

1. सबसे तेज बौछार गई भादो गया सवेरा हुआ शरद आया वो को पार करते हुए अपनी नई चमकीली साइकिल तेज चलाते हुए- गतिशील बिंब।

2. घंटी बजाते हुए जोर-जोर से- श्रव्य बिंब।

3. चमकीले इशारों से बुलाते हुए - दृश्य बिंब और आकाश को इतना मुलायम बनते हुए में स्पर्श बिंब खरगोश की आंखों जैसा लाल सवेरा में दृश्य बिंब।

प्रश्न 4 जन्म से ही वे अपने साथ लाते हैं कपास कपास के बारे में सोचें कि कपास से बच्चों का क्या संबंध बन सकता है?

उत्तर - कवि बच्चों की कोमलता की तुलना कपास के साथ करते हैं। कपास अर्थात रूई अपने गुणों में काफी कोमल और देखने में काफी स्वच्छ प्रतीत होती है। कवि की दृष्टि में बच्चे भी कपास की भांति कोमल और मन से स्वच्छ होते हैं। कपास की कोमलता इस बात से प्रमाणित होती है कि जब नवजात शिशु होते हैं तो उन्हें रूई के द्वारा दूध का सेवन करवाया जाता है।

प्रश्न 5 - "पतंगों के साथ-साथ वे भी उड़ रहे हैं", बच्चों का उड़ान से कैसा संबंध बनता है?

उत्तर - कवि ने पतंग के बहाने बालसुलभ मन का वर्णन किया है। कवि कहते हैं कि जब पतंग ऊपर की उड़ान भरता है तो बच्चे खुश होते हैं। पतंग को ऊंचा उड़ते देख बच्चों को महसूस होता है कि उनकी कल्पना और खुशी उड़ान भर रही है।

प्रश्न 6 - निम्नलिखित पंक्तियों को पढ़ कर प्रश्नों का उत्तर दीजिए।

(क) छतों को भी नरम बनाते हुए

दिशाओं को मृदंग की तरह बजाते हुए।

दिशाओं को मृदंग की तरह बजाने का क्या तात्पर्य है?

उत्तर - कवि कहते हैं कि जब बच्चे छत पर पतंग उड़ा रहे होते हैं तो अपने भाग-दौड़ से पैरों की पदचाप से एक ध्वनि उत्पन्न करते हैं जो चारों दिशाओं में फैल जाती है। ऐसा प्रतीत होता है की यह पदचाप नहीं है बल्कि दिशाओं में बजती हुई मृदंग (एक प्रकार की ढोल) है।

(ख) अगर भी कभी गिरते हैं छतों के खतरनाक किनारों से और बच जाते हैं तब तो और भी निडर होकर सुनहले सूरज के सामने आते हैं।

1. जब पतंग सामने हो तो छतों पर दौड़ते हुए क्या आपको छत कठोर लगती है?

2. खतरनाक परिस्थितियों का सामना करने के बाद आप दुनिया की चुनौतियों के सामने स्वयं को कैसा महसूस करते हैं?

1. उत्तर- पतंग उड़ाते वक्त हमारा सारा ध्यान पतंग के उड़ाने पर होता है पैरों पर नहीं इसलिए छत की कठोर धरातल का हमें आभास नहीं हो पाता और छत दौड़ते वक्त कठोर प्रतीत नहीं होती।

2. उत्तर- खतरनाक परिस्थितियों का सामना करने के बाद हम निर्भीक हो जाते हैं और दुनिया की अन्य चुनौतियों का सामना हम साहस के साथ कर पाते हैं और चुनौतियों का सामना करने में हम अपने आप को सक्षम महसूस करते हैं।

पतंग : लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1 - पतंग कविता में पतंग किसका प्रतीक है?

उत्तर - पतंग कविता में पतंग उत्साह उमंग का और नई ऊंचाइयों को छूने का प्रतीक है।

प्रश्न 2 - "सबसे तेज बौछारें गई भादो गया सवेरा हुआ" का अर्थ बताएं।

उत्तर - कवि इन पंक्तियों के माध्यम से कहना चाहते हैं कि वर्षा ऋतु का अंत हो गया है और शरद ऋतु का आगमन हो गया है।

प्रश्न 3 कवि ने तेज बौछारें गई शब्द से किस ऋतु के बीत जाने की बात कही है?

उत्तर - भादो मास का महीना वर्षा ऋतु का अंतिम महीना होता है। इस माह में तेज बारिश होती है।

प्रश्न 4 - 'भादो गया सवेरा हुआ' कवि ने ऐसे शब्दों का प्रयोग किस प्रयोजन से किया है?

उत्तर - वर्षा ऋतु में खासकर भादो के माह में लगातार बारिश होने की वजह से आसमान साफ नहीं दिखती किंतु भादो के जाते ही और आश्विन माह के आते हीआसमान बिल्कुल निर्मल और स्वच्छ हो जाता है इसलिए कवि ने 'सवेरा' जैसे शब्द का प्रयोग किया है

प्रश्न 5 खरगोश की आंखों जैसा लाल सवेरा से किसकी तुलना की गई है?

उत्तर - खरगोश की आंखों जैसा लाल सवेरा से शरद ऋतु के चमकीली, स्वच्छ, निर्मल सवेरा की तुलना की गई है।

प्रश्न 6 भादो महीने के बाद शरद ऋतु का आगमन किस प्रकार से होता है?

उत्तर - पुलों को पार करते हुए अपनी नई चमकीली साइकिल चलाते हुए शरद ऋतु का आगमन होता है।

प्रश्न 7 नई चमकीली साइकिल का अर्थ बताएं?

उत्तर - चमकीले सूरज की किरणों को कवि ने चमकीली साइकिल कहा है।

प्रश्न 8 साइकिल का यहां अर्थ क्या है?

उत्तर - शरद ऋतु के सूर्य को कवि ने साइकिल कहा है।

प्रश्न 9 - नई चमकीली साइकिल में नई का अर्थ बताएं?

उत्तर - शरद ऋतु के बीत जाने के बाद एक और नई शरद ऋतु का आगमन के कारण कवि ने शरद ऋतु के लिए 'नई' शब्द का प्रयोग किया है।

प्रश्न 10 - शरद ऋतु क्या बजाते हुए आती है?

उत्तर - शरद ऋतु जोर-जोर से घंटी बजाते हुए आती है।

प्रश्न 11 घंटी की तेज आवाज किस बात की ओर संकेत करता है?

उत्तर - उत्साह और उमंग को व्यक्त करने के लिए घंटी की तेज आवाज का प्रयोग कवि ने कविता में की है।

प्रश्न 12 - शरद ऋतु चमकीले इशारों से किन्हें बुलाते हैं?

उत्तर - पतंग उड़ाने वाले बच्चे के झुंड को।

प्रश्न 13 - शरद ऋतु में बच्चे पतंग उड़ाना क्यों पसंद करते हैं?

उत्तर - आकाश शरद ऋतु में इतना मुलायम और स्वच्छ होता है की पतंग आसानी से ऊपर उठ पाती है इसलिए बच्चे इस ऋतु को पतंग उड़ाने के लिए पसंद करते हैं।

प्रश्न 14 - शरद ऋतु के आसमान कैसे होते हैं?

उत्तर - शरद ऋतु के आसमान इतनी मुलायम और हल्के होते हैं कि पतंग की पतली कागज और बांस की पतली कमानी उड़ सके।

प्रश्न 15 - दुनिया के सबसे पतले कागज और बांस की पतली कमानी से क्या बनाई जाती है और क्यों?

उत्तर - दुनिया के सबसे पतले कागज और बाँस की कमानी से रंगीन पंतग बनाई जाती है, क्योंकि ये अपने प्रकृति से हल्के होते है।

प्रश्न 16 - कविता में दुनिया की सबसे हल्की और रंगीन चीज किसे मानी गई है?

उत्तर - कविता में दुनिया की सबसे हल्की और रंगीन चीज पतंग को मानी गई है।

प्रश्न 17 - शरद ऋतु के आसमान जब मुलायम होते हैं तो बच्चों की कौन-कौन सी क्रियाएं देखने को मिलती है?

उत्तर - बच्चे पतंग उड़ाने के लिए उत्सुक रहते हैं और उड़ाते वक्त उनका हर्षोल्लास के साथ सीटियां और प्रसन्न होकर चिल्लाने आदि जैसी क्रियाएं देखने को मिलती है।

प्रश्न 18 - 'शरद आया पुलो को पार करते हुए 'पंक्ति का क्या अर्थ है बताएं।

उत्तर - एक लंबे समय के बाद शरद ऋतु का आगमन होना।

प्रश्न 19 - 'शरद आया पुलों को पार करते हुए' में कौन सा अलंकार है?

उत्तर - "शरद आया पुलों को पार करते हुए "में शरद आया में मानवीय अलंकार है।

प्रश्न 20 बच्चे अपने जन्म के साथ क्या लेकर आते हैं?

उत्तर - बच्चे अपने जन्म के साथ कपास सामान कोमलता लेकर आते हैं।

प्रश्न 21 - पतंग उड़ाते समय बच्चों को अपने पैरों के नीचे किस चीज का पता नहीं रहता है?

उत्तर - छत की कठोर जमीन का।

प्रश्न 22 - कविता में कपास शब्द का प्रयोग किन अर्थों में किया गया है?

उत्तर - कविता में कपास शब्द का का प्रयोग बच्चों की स्वच्छता और कोमलता के लिए किया गया है।

प्रश्न 23- पृथ्वी किन के बेचैन पैरों के पास घूमते हुए आती है और क्यों?

उत्तर - पृथ्वी बच्चों के बेचैन पैरों के पास घूमती हुई आती है। बच्चे पतंग उड़ाने में इतनी आत्म विस्मृत (भूल जाना) हो जाते हैं कि वे लगभग बेसुध से हो जाते हैं उन्हें ज्ञात नहीं होता कि वह कहां दौड़ रहे हैं तो ऐसे में उनकी गतिशीलता को संभालने के लिए पृथ्वी को उनके पैरों के पास आना पड़ता है।

प्रश्न 24 - बच्चे पतंग उड़ाते समय कैसे दौड़ते हैं?

उत्तर - बच्चे पतंग उड़ाते समय बेसुध होकर छतों पर दौड़ते हैं।

प्रश्न 25 - बच्चे छतों को किस तरह से नरम बना देते हैं?

उत्तर - बच्चे छत पर दौड़ते समय छत की खुरदरी सतह को अपने पैरों की गतिशीलता से नरम बना देते हैं।

प्रश्न 26 बच्चे दिशाओं को किस तरह बजाते हुए छतों पर दौड़ते हैं?

उत्तर - बच्चे छतों पर एक दिशा से दूसरे दिशाओं की तरफ दौड़ते समय हर्षोल्लास की आवाज निकालते हैं मानो जैसे दिशा भी मृदंग की तरह गुंजयमान हो गई हो।

प्रश्न 27 - बच्चों के तेज कदमों से निकलने वाले थाप की आवाज कवि को कैसा प्रतीत होता है?

उत्तर - बच्चे जब तेज गति से छतों पर दौड़ते हैं तो उनके पैरों की थाप मानो चारों दिशाओं में मृदंग को बजा रही हो।

प्रश्न 28 - बच्चों के दौड़ने की गति की तुलना किससे की गई है?

उत्तर - बच्चे की दौड़ने की तुलना झूले के आगे पीछे होने से जो गति उत्पन्न होती है उससे की गई है।

प्रश्न 29 उनके शरीर की गति किस की भांति लचीला होता है?

उत्तर - वृक्षों की डाल की तरह उनकी शरीर की गति लचीली होती है।

प्रश्न 30 - एक दिशा से दूसरी दिशा की ओर भागते हुए जब वे आते हैं तो उनकी शरीर का लचीलापन कैसा प्रतीत होता है?

उत्तर - उनके शरीर का लचीलापन वृक्ष की डाल की भांति लचीला प्रतीत होता है।

प्रश्न 31 - पतंग बाजो के पैर कैसे हैं?

उत्तर - बेचैन, व्याकुल।

प्रश्न 32 - पतंग के साथ बच्चे कैसे दौड़ते हैं?

उत्तर - पतंग के साथ बच्चे बेसुध (बिना होश) होकर दौड़ते हैं।

प्रश्न 33 - पतंग कविता में बच्चे के शरीर के लचीलापन को कैसा बताया गया है?

उत्तर - किसी पेड़ की डाल की तरह।

प्रश्न 34 पतंग उड़ाते समयबच्चे अपने लचीले शरीर के द्वारा दौड़ते हुए कहां पहुंच जाते हैं?

उत्तर - छतों के खतरनाक किनारों तक वे पहुंच जाते हैं।

प्रश्न 35 - बच्चों को छतों से गिरने से कौन बचाता है?

उत्तर - उनके पुलकित हर्षित शरीर के मधुर संगीत या ध्वनि उन्हें छत से गिरने से बचाते हैं।

प्रश्न 36 बच्चों के रोमांचित शरीर का संगीत क्या करता है?

उत्तर - उनको गिरने से बचाता है।

प्रश्न 37 महज एक धागे के सहारे का अभिप्राय क्या है?

उत्तर - बच्चे पतंग को धागे के सहारे उड़ाते हैं पतंग उड़ाने में इतना लीन हो जाते हैं कि उन्हें छत के खतरनाक किनारे तक नजर नहीं आते। पतंग उड़ाते समय वे धागों के साथ आगे पीछे होते रहते हैं। अतः पतंग के महज एक धागा ही उन्हें संभालता रहता है।

प्रश्न 38 - बच्चे पतंग के साथ कैसे उड़ रहे हैं?

उत्तर - बच्चे पतंग के साथ आसमान में अपनी कल्पनाओं, भावनाओं के साथ उड़ रहे हैं।

प्रश्न 39 पतंगों के साथ-साथ वे भी उड़ रहे हैं से क्या अभिप्राय है?

उत्तर - पतंग आसमान को छूने का प्रतीक है बच्चे पतंग के साथ-साथ स्वयं ही आसमान की ऊंचाइयों को छू रहे हैं, ऐसा उन्हें आभास होता है।

प्रश्न 40 - बच्चे और निडर (भय रहित) कब बन जाते हैं?

उत्तर - बच्चे पतंग उड़ाते समय अगर छतों के खतरनाक किनारों से गिर जाते हैं और बच जाते हैं तब वे और भी निडर हो जाते हैं।

प्रश्न 41- बच्चे गिरने के बाद अगर बच जाते हैं तो वे पुनः किसके सामने आते हैं?

उत्तर - सुनहरी सूरज के सामने अतः एक नए दिन से पुनः पतंग उड़ाना शुरू कर देते हैं।

पंतगः बहुविकल्पी प्रश्न उत्तर

1. 'पतंग' कविता किसकी रचना है?

क) आलोक धन्वा

ख) धर्मवीर भारती

ग) रघुवीर सहाय

घ) जैनेंद्र

2. पतंग कविता में 'पतंग' किसका प्रतीक है?

क) उत्साह की

ख) उमंग की

ग) ऊंचाइयों की

घ) इनमें से सभी

3) "भादो गया सवेरा हुआ' इन पंक्तियों का अर्थ बताएं?

क) शरद ऋतु का आगमन

ख) वर्षा ऋतु का समापन (समाप्ति)

ग) आश्विन माह का प्रारंभ

घ) इनमें से सभी

4) कवि ने 'तेज बौछारें गई' शब्द से किस ऋतु के बीत जाने की बात कही है?

क) आश्विन मास का

ख) पौष मास का

ग) भादो मास का

घ) फाल्गुन मास

5) कविता में वर्षा ऋतु के बाद कौन सा ऋतु बच्चों के खेलने के लिए उपयुक्त माना गया है?

क) हेमंत ऋतु

ख) शरद ऋतु

ग) शिशिर ऋतु आज

घ) इनमें से कोई नहीं

6) 'नई चमकीली साइकिल' का अर्थ बताएं?

क) चमकीली सूरज की किरणे

ख) साइकिल का पहिया

ग) साइकिल

घ) इनमें से कोई नहीं

7) 'साइकिल' का यहां क्या अभिप्राय है?

क) हेमंतऋतु के सूर्य से

ख) शरद ऋतु के सूर्य से

ग) शिशिर ऋतु के सूर्य से

घ) इनमें से कोई नहीं

8) कौन जोर-जोर से घंटी बजाते हुए आता है?

क) शरद ऋतु

ख) हेमंत ऋतु

ग) शिशिर ऋतु

घ) इनमें से कोई नहीं

9) 'खरगोश की आंखों जैसा लाल सवेरा' में कौन सा अलंकार है?

क) उत्प्रेक्षा अलंकार

ख) अतिशयोक्ति अलंकार

ग) उपमा अलंकार।

घ) इनमें से कोई नहीं

10) कविता में 'शरद ऋतु' को किस अलंकार में दर्शाया गया है?

क) मानवीय अलंकार

ख उत्प्रेक्षा अलंकार

ग) अतिशयोक्ति अलंकार

घ) उपमा अलंकार।

11) 'पुलों को पार' में कौन सा अलंकार है?

क) मानवीय अलंकार

ख) उत्प्रेक्षा अलंकार

ग) अनुप्रास अलंकार

घ) उपमा अलंकार।

12) 'ज़ोर-ज़ोर' में कौन सा अलंकार होगा?

क) पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार

ख) उत्प्रेक्षा अलंकार

ग) अनुप्रास अलंकार

घ) उपमा अलंकार।

13) कौन जोर-जोर से घंटी बजाते हुए आता है?

क) शरद ऋतु

ख) हेमंत ऋतु

ग) शिशिर ऋतु

घ) वसंत ऋतु

14) घंटी की तेज आवाज किस बात की ओर संकेत करता है?

क) दुख को

ख) सुख को

ग) उत्साह, उमंग को

घ) इनमें से कोई नहीं

15) पतंग उड़ाने वाले बच्चे के झुंड को कौन इशारे से बुलाती है?

क) शरद ऋतु

ख) हेमंत ऋतु

ग) शिशिर ऋतु

घ) इनमें से कोई नहीं

16) शरद ऋतु में बच्चे पतंग उड़ाना क्यों पसंद करते हैं?

क) स्वच्छ आसमान के कारण

ख) काले बादल के कारण

ग) भारी बादल के कारण

घ) इनमें से कोई नहीं

17) शरद ऋतु का आसमान कैसा होता हैं?

क) भारी

ख) हल्का एवं मुलायम

ग) गंभीर

घ) काला

18) दुनिया के सबसे पतले कागज और बांस की पतली कमानी से क्या बनाई जाती है?

क) पतंग

ख) खिलौना

ग) कपड़ा

घ) छाता

19) कविता में दुनिया की सबसे हल्की और रंगीन चीज किसे मानी गई है?

क) पतंग

ख) खिलौना

ग) कपड़ा

घ) छाता

20) बच्चे अपने जन्म के साथ क्या लेकर आते हैं?

क) कठोरता

ख) कपास की भांति कोमलता

ग) सवेरा

घ) अंधेरा

21) बच्चे की कोमलता की तुलना किससे की गई है?

क) कपास से

ख) मिट्टी से

ग) बादल से

घ) इनमें से कोई नहीं

22) पंतग के साथ- साथ कौन उड़ रहे हैं?

क) बच्चे

ख) बड़

ग) बूढ़े

घ) इनमें से कोई नहीं

23) पतंग उड़ाते समय बच्चों को अपने पैरों के नीचे किस चीज का पता नहीं रहता है?

क) मिट्टी का

ख) छत की कठोर जमीन का।

ग) पत्थर-कंकड़ का

घ) धूल-कण का

24) पृथ्वी किन के बेचैन पैरों के पास घूमते हुए आती है?

क) बच्चों के

ख) वृद्धों के

ग) महिलाओं के

घ) इनमें से कोई नहीं

25) पृथ्वी बच्चों के बेचैन पैरों के पास घूमते हुए क्यों आती है?

क) बच्चों को गिराने के लिए

ख) बच्चों को संभालने के लिए

ग) बच्चों को धकेलने के लिए

घ) इनमें से सभी

26) बच्चे पतंग उड़ाते समय कैसे दौड़ते हैं?

क) बेसुध होकर

ख) होश में

ग) संभल कर

घ) इनमें से कोई नहीं

27) बच्चे दौड़ते समय किसे के कठोर सतह को नरम बना देते हैं?

क) जमीन के

ख) धरती के

ग) छत के

घ) खेत के

28) बच्चों के दौड़ने से दिशाएं किस वाद्य यंत्र की तरह गुंजायमान हो जाती है?

क) ढोलक

ख) शहनाई

ग) मृदंग

घ) बांसुरी

29) कविता में बच्चों के शरीर की गति को किस की भांति लचीला माना गया है?

क) वृक्ष की डाल की भांति

ख) हंसी की भांति

ग) रेशम डोर की भांति

घ) इनमें से कोई नहीं

30) पतंग बाजो के पैर कैसे हैं?

क) स्थिर

ख) बेचैन, व्याकुल।

ग) निर्जीव

घ) इनमें से कोई नहीं

31) बच्चे पतंग के साथ कैसे उड़ रहे हैं?

क) कल्पनाओं के साथ

ख) नीरसता के साथ

ग) अनमने ढंग से

घ) आलस के साथ

32) कौन पतंग उड़ाते समय छतों के खतरनाक किनारों तक पहुंच जाते हैं।

क) बच्चे

ख) बड़े

ग) गांव वाले

घ) इनमें से कोई नहीं

33) 'घंटी बजाते हुए जोर-जोर से'- में कौन सा बिम्ब है?

क) दृश्य बिंब

ख) श्रव्य बिंब

ग) स्पर्श बिंब

घ) इनमें से कोई नहीं

34) 'चमकीले इशारों से बुलाते हुए' मैं कौन सा बिंब है?

क) दृश्य बिंब

ख) श्रव्य बिंब

ग) स्पर्श बिंब

घ) इनमें से कोई नहीं

35) 'और आकाश को इतना मुलायम बनाते हुए' में कौन सा बिम्ब है?

क) दृश्य बिंब

ख) श्रव्य बिंब

ग) स्पर्श बिंब

घ) इनमें से कोई नहीं

36) 'खरगोश की आंखों जैसा लाल सवेरा' में कौन सा बिंब है?

क) दृश्य बिंब

ख) श्रव्य बिंब

ग) स्पर्श बिंब

घ) गतिशील बिंब

37) 'सबसे तेज बौछार गई भादो गया सवेरा हुआ' कौन सा बिंब है?

क) दृश्य बिंब

ख) श्रव्य बिंब

ग) स्पर्श बिंब

घ) गतिशील बिंब

38) 'शरद आया पुल को पार करते हुए' में कौन सा बिंब है?

क) गतिशील बिंब

ख) दृश्य बिंब

ग) श्रव्य बिंब

घ) स्पर्श बिंब

39) 'अपनी नई चमकीली साइकिल तेज चलाते हुए' में कौन सा बिंब है?

क) गतिशील बिंब

ख) दृश्य बिंब

ग) श्रव्य बिंब

घ) स्पर्श बिंब

40) खतरनाक परिस्थितियों का सामना करके बच्चे क्या बन जाते हैं?

क) डरपोक

ख) कायर

ग) कमजोर

घ) निर्भीक

41) महज एक धागे के सहारे पंतग उड़ाते हुए बच्चे किस चीज से बच जाते हैं?

क) गिरने से

ख) उड़ने से

ग) रोने से

घ) इनमें से कोई नहीं

42) कविता में पतंग को किन गुणों से शोभित किया गया है?

क) हल्का

ख) रंगीन

ग) पतला

घ) इनमें से सभी

43) पतंग की तुलना किसके साथ की गई है?

क) बच्चों के कोमल, निश्चल मन से

ख) बड़ों के मन से

ग) बूढ़ो के मन से

घ) इनमें से कोई नहीं

44) बच्चें के मन और पंतग में क्या समानता है?

क) कोमलता

ख) कठोरता

ग) शुष्कता

घ) इनमें से कोई नहीं

45) कौन पंतग की भांति जितना हल्का होगा उतना ऊपर उठ सकेगा?

क) शरीर

ख) मन

ग) धूल

घ) राख

उपयोगी तथ्य

बिम्ब - बिम्ब शब्द अंग्रेजी के इमेज शब्द का हिंदी अनुवाद है।

काव्य में बिम्ब का कार्य काव्य को मूर्त (साकार) रूप देना एवं इंद्रिय आभास कराना। जैसे-खूब झम-झम कर बरस काली घटा में श्रव्य बिंब है क्योंकि उपर्युक्त पंक्ति को पढ़कर तेजी से बरसती हुई बारिश का शोर कानों में गूँजता सा महसूस होता है इसलिये यहाँ श्रव्य बिम्ब है।

बिंब के प्रकार- दृश्य बिंब, घ्राण बिंब, स्पर्श

बिंब, स्वाद बिंब श्रव्य बिंब, गतिशील बिंब, स्मृति बिंब, कल्पित बिंब आदि प्रमुख बिंब है।

पाठ में वर्णित बिंब के उदाहरण -

1. 'खरगोश की आंखों जैसा लाल सवेरा 'में दृश्य बिंब है क्योंकि उपर्युक्त पंक्ति को पढ़कर शरद ऋतु का सवेरा खरगोश की आंखों की भांति चमकीला और सुंदर प्रतीत हो रहा है।

2. 'और आकाश को इतना मुलायम बनते हुए' में स्पर्श बिंब है क्योंकि उपर्युक्त पंक्तियों को पढ़कर शरद ऋतु का आकाश किसी मुलायम वस्तु का आभास कराती है।

भादो महीना- यह वर्षा ऋतु का अंतिम महीना है इसे अंग्रेजी में अगस्त कहा जाता है।

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