Class 11 Economics 6. परिक्षेपण की माप (MEASURES OF DISPERSION)

Class 11 Economics 6. परिक्षेपण की माप (MEASURES OF DISPERSION)

Class 11 Economics 6. परिक्षेपण की माप (MEASURES OF DISPERSION)

6. परिक्षेपण की माप (MEASURES OF DISPERSION)

पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर

Q. 1. 'किसी बारंबारता वितरण के समझने में परिक्षेपण का माप केन्द्रीय मान का एक अच्छा संपूरक है।' टिप्पणी करें।

Ans. परिक्षेपण यह बताता है कि वितरण का मान उसके औसत मूल्य से कितना अलग है। केन्द्रीय माप वितरण के प्रतिनिधित्व हेतु एकल मूल्य प्रदान करता करता है, द्यपि यह मूल्य आँकड़ों में उपस्थित बिखराव को व्यक्त नहीं करता है। लेकिन परिक्षेपण की माप आँकड़ों में बिखराव के बारे में बताती है। केन्द्रीय प्रवृत्ति की माप अथवा औसत मूल्यों में बिखराव की मान को प्रदर्शित नहीं करते हैं। वितरण के बारे में परिक्षेपण की माप से आँकड़ों की बेहतर जानकारी प्राप्त होती है। इस प्रकार परिक्षेपण की माप, आँकड़ों के वितरण को समझने में केन्द्रीय प्रवृत्ति की माप का एक अच्छा संपूरक है।

Q. 2. परिक्षेपण का कौन-सा माप सर्वश्रेष्ठ है और कैसे ?

Ans. परिक्षेपण के बार प्रमुख माप हैं, जैसे-

(i) विस्तार, (ii) चतुर्थत विचलन, (iii) माध्य विचलन तथा (iv) मानक विचलन।

वास्तव में, उपर्युक्त में से कोई-सा भी परिक्षेपण का माप सीमाओं से परे नहीं है। प्रत्येक 'परिक्षेपण माप' की अपनी विशेषताएँ एवं कमियां हैं। इससे भी अधिक, प्रत्येक माप का अपना प्रयोग है। यद्यपि मानक विचलन परिक्षेपण का बेहतर भाग है। इसके निम्नलिखित कारण हैं-

(i) यह श्रृंखला के सभी मूल्यों पर आधारित है।

(ii) यह एक ऐसा माप है जिसका हर स्थिति में प्रयोग किया जा सकता है।

(iii) प्रतिदर्श उच्चावचन का थोड़ा प्रभाव इस पर पड़ता है।

(iv) इसका बीजगणितीय उपचार भी सम्भव है।

Q. 3. 'परिक्षेपण के कुछ माप मानों के प्रसरण पर निर्भर करते हैं' लेकिन कुछ केन्द्रीय मान से मानों के विचरण को परिकलित करते हैं।' क्या आप सहमत है?

Ans. विस्तार, चतुर्थक विलन, माध्य विचलन एवं मानक विचलन परिक्षेपण के निरपेक्ष माप है। जब मूल्यों में ज्यादा बिखराव पाया जाता है तो परिक्षेपण के माप आँकड़ों के वितरण के बारे में भ्रम पैदा कर सकते हैं। परिक्षेपण के माप उसी इकाई में होते हैं जिसमें मौलिक मूल्य होते हैं।

विस्तार गुणांक, माध्य विचलन गुणाक, विचरण गुणांक सापेक्ष मूल्य है। इन मूल्यों की कोई इकाई नहीं होती है। निरपेक्ष परिक्षपेण के माप आंकड़ों के बिखराव से प्रभावित होते हैं, जबकि परिक्षेपण के सापेक्ष माप केन्द्रीय प्रवृत्ति से विचरण को मापते हैं।

Q. 4. एक कस्बे में, 25% लोग रु. 45,000 से अधिक आय अर्जित करते हैं, जबकि 75% लोग 18,000 से अधिक अर्जित करते हैं। परिक्षेपण के निरपेक्ष एवं सापेक्ष मानों का परिकलन कीजिए।

Ans. अर्जित आय का अधिकतम मूल्य = 45,000 रु.

अर्जित आय का न्यूनतम मूल्य = 18,000 रु.

विस्तार = L-S = 45,000 रु. - 18,000 रु. = 27,000 रु.

विस्तार गुणांक`=\frac{L-S}{L+S}=\frac{45000-18000}{45000+18000}`

`=\frac{27000}{63000}=\frac{3}7` = 0.43

इसलिए परिक्षेपण का निरपेक्ष मान = 27,000 रु.

एवं परिक्षेपण का सापेक्ष मान 0.43 रु.

Q. 5. एक राज्य के 10 जिलों की प्रति एकड़ गेहूं व चावल फसल की उपज निम्नवत हैं।

जिले

गेहूं

चावल

1

12

72

2

10

29

3

15

12

4

19

23

5

21

18

6

16

15

7

18

12

8

9

34

9

25

18

10

10

12

प्रत्येक फसल के लिए परिकलन करें:

(a) परा

(b) चतुर्थक विचलन

(c) माध्य से माध्य विचलन

(d) माध्यिका से माध्य विचलन

(e) मानक विचलन

(f) किस फसल में अधिक विचरण है?

(g) प्रत्येक फसल के लिए विभिन्न मापों के मानों की तुलना कीजिए।

Ans. (a) परास :

(1) गेहूं - वितरण का अधिकतम मूल्य (L) = 25

वितरण का न्यूनतम मूल्य (S) = 9

परास = L-S =25-9 = 16

गेहूं की फसल का परास = 16

(2) चावल- वितरण का अधिकतम मूल्य (L) = 34

वितरण का न्यूनतम मूल्य (S) = 12

परास = L-S =34-12 = 22

(b) चतुर्थक विचलन

i. गेहूं का चतुर्थक विचलन : गेहूँ के उत्पादन का बढ़ता क्रम-

9, 10, 10, 12, 15, 16, 18, 19, 21, 25

Q1 = Value of  `\frac{n+1}4`  items  =  `\frac{10+1}4` = `\frac{11}4` = 2.75

Q1= Value of `\frac{2^{nd}+3^{rd}}2` items

     =`\frac{10+15}2=\frac{25}2`=12.5

Q3 = Value of 3 (`\frac{n+1}4`) items

Q3 = 3 (`\frac{10+1}4`)  =  (`\frac{33}4`) = 8.25

Q3 = Value of `\frac{8^{th}+9^{th}}2` items

Q3 =`\frac{9+25}2=\frac{34}2=17`

चतुर्थक विचलन = `\frac{Q_3-Q_1}2`

चतुर्थक विचलन = `\frac{17-12.5}2` = `\frac{4.5}2` = 2.25

ii. चावल का चतुर्थक विचलन : चावल के उत्पादन का बढ़ता क्रम-

12,12, 12, 15, 18, 18, 22, 23, 29, 34

Q1 = Value of  `\frac{n+1}4`  items  =  `\frac{10+1}4` = `\frac{11}4` = 2.75

Q1= Value of `\frac{2^{nd}+3^{rd}}2` items

     =`\frac{29+12}2=\frac{41}2`=20.5

Q3 = Value of 3 (`\frac{n+1}4`) items

Q3 = 3 (`\frac{10+1}4`)  =  (`\frac{33}4`) = 8.25

Q3 = Value of `\frac{8^{th}+9^{th}}2` items

Q3 =`\frac{34+18}2=\frac{52}2=26`

चतुर्थक विचलन = `\frac{Q_3-Q_1}2`

चतुर्थक विचलन = `\frac{26-20.5}2` = `\frac{5.5}2` = 2.75

(c) माध्य से माध्य विचलन

(i) माध्य से माध्य विचलन (गेहूँ के लिए) :

गेहूँ का उत्पादन

A= 15.5 (dx)

IdxI

9

-6.5

6.5

10

-5.5

5.5

10

-5.5

5.5

12

-3.5

3.5

15

-0.5

0.5

16

0.5

0.5

18

2.5

2.5

19

3.5

3.5

21

5.5

5.5

25

9.5

9.5

ΣX = 155

 

ΣIdxI =43

 Mean (X̅ ) = `\frac{\Sigma X}n` =`\frac{155}10=15.5`

deviation = 15.5

माध्य से माध्य विचलन (δX̅)

=`\frac{\Sigma|dx\|}n``=\frac{43}10=4.3`

(ii) माध्य से माध्य विचलन (चावल के लिए) :

चावल का उत्पादन

A= 19.5 (dx)

IdxI

12

-7.5

7.5

12

-7.5

7.5

12

-7.5

7.5

15

-4.5

4.5

18

-1.5

1.5

18

-1.5

1.5

22

2.5

2.5

23

3.5

3.5

29

9.5

9.5

34

14.5

14.5

ΣX = 195

 

ΣIdxI =58.5

 Mean (X̅ ) = `\frac{\Sigma X}n` =`\frac{195}10=19.5`

deviation = 19.5

माध्य से माध्य विचलन (δX̅)

=`\frac{\Sigma|dx\|}n``=\frac{58.8}10=5.83`

माध्य से माध्य विचलन (i) गेहूँ के लिए = 4.3 (ii) चावल के लिए = 5.83

(d) माध्यिका से माध्य विचलन

(i) मध्यिका से माध्य विचलन (गेहूँ के लिए):

S.N

गेहूँ का उत्पादन

A= 15.5 (dx)

IdxI

1

9

-6.5

6.5

2

10

-5.5

5.5

3

10

-5.5

5.5

4

12

-3.5

3.5

5

15

-0.5

0.5

6

16

0.5

0.5

7

18

2.5

2.5

8

19

3.5

3.5

9

21

5.5

5.5

10

25

9.5

9.5

 

 

 

ΣIdxI =43

 Median = Value of  `\frac{n+1}2` items

  =`\frac{10+1}2=\frac{11}2=5.5`

Median = Value of `\frac{5^{th}+6^{th}}2` items
 =`\frac{15+16}2=\frac{31}2=15.5`

devition = 15.5

माध्यिका से माध्य विचलन (δM
=`\frac{\Sigma|dx\|}n``=\frac{43}10=4.3`

(ii) माध्यिका से माध्य विचलन (चावल के लिए):

S.N

चावल का उत्पादन

A= 18 (dx)

IdxI

1

12

-6

6

2

12

-6

6

3

12

-6

6

4

15

-3

3

5

18

0

0

6

18

0

0

7

22

4

4

8

23

5

5

9

29

11

11

10

34

16

16

 

 

 

ΣIdxI =57

  Median = Value of  `\frac{n+1}2` items

  =`\frac{10+1}2=\frac{11}2=5.5`

Median = Value of `\frac{5^{th}+6^{th}}2` items
 =`\frac{18+18}2=\frac{36}2=18`

devition = 18

माध्यिका से माध्य विचलन (δM
=`\frac{\Sigma|dx\|}n``=\frac{57}10=5.7`

माध्यिका से माध्य विचलन (i) गेहूँ के लिए = 4.3 (ii) चावल के लिए = 5.7

(e) मानक विचलन

(i) मानक विचलन (गेहूँ के लिए):

गेहूँ का उत्पादन (x)

A= 15 (dx)

dx2

9

-6

36

10

-5

25

10

-5

25

12

-3

9

15

0

0

16

1

1

18

3

9

19

4

16

21

6

36

25

10

100

 

Σdx= 24-19=5

Σdx2 =257

 σ =`\sqrt{\frac{\Sigma dx^2}n-(\frac{\Sigma dx}n)^2`

σ =`\sqrt{\frac{257}10-(\frac{5}10)^2`

σ =`\sqrt{25.7-0.25}=\sqrt25.45=5.044`

(ii) मानक विचलन (चावल के लिए) :

चावल का उत्पादन (x)

A= 18 (dx)

dx2

12

-6

36

12

-6

36

12

-6

36

15

-3

9

18

0

0

18

0

0

22

4

16

23

5

25

29

11

121

34

16

256

 

Σdx= 36-21=15

Σdx2 =535

  σ =`\sqrt{\frac{\Sigma dx^2}n-(\frac{\Sigma dx}n)^2`

σ =`\sqrt{\frac{535}10-(\frac{15}10)^2`

σ =`\sqrt{53.5-2.25}=\sqrt51.25=7.16`

मानक विचलन, (i) गेहूँ = 5.044 (ii) चावल के लिए = 7.16 

(f) किस फसल में अधिक विचरण है?

(i) विचरण का बहुलक (गेहूँ के लिए):

C.V.=`\frac\sigma{\overline X}\times100`

=`\frac{5.044}15.5\times100= 32.54`

(ii) विचरण का बहुलक (चावल के लिए):

C.V.=`\frac\sigma{\overline X}\times100`

=`\frac{7.15}19.5\times100= 36.71`

चावल की फसल में अधिक विचरण है

(g) प्रत्येक फसल के लिए विभिन्न मापों के मानों की तुलना कीजिए।

माप

गेहूँ

चावल

तुलना

(a) परास

16

22

चावल की फसल का विस्तार ज्यादा है।

(b) चतुर्थक विचलन

2.25

2.75

चतुर्थक विचलन चावल की फसल के लिए अधिक है।

(c) माध्य से माध्य विचलन

4.3

5.83

चावल की फसल का माध्य से माध्य विचलन अधिक है।

(d) मध्यिका से माध्य विचलन

4.3

5.7

मध्यिका से माध्य विचलन चावल की फसल के लिए ज्यादा है।

(e) मानक विचलन

5.044

7.16

चावल के लिए मानक विचलन अधिक है।

(f) C.V.

32.54

36.71

चावल उत्पादन का विचरण गुणांक ज्यादा है।

Q.6. पूर्ववर्ती प्रश्न में, विचरण के सापेक्ष मापों को परिकलित कीजिए और वह मान बताइए जो आपके विचार से सर्वाधिक विश्वसनीय हो।

Ans. (A) पूर्ववर्ती प्रश्न में, परिक्षेपण के माप निम्नलिखित हैं

(i) L = 25, S = 9

विस्तार गुणांक = `\frac{L-S}{L+S}` 

`=\frac{25-9}{25+9}=\frac{16}{34}=0.47` 

(ii) Q1 = 12.5 , Q3 = 17

चतुर्थक विचलन गुणांक = `\frac{Q_3-Q_1}{Q_3+Q_1}` 

=`\frac{17-12.5}{17+12.5}`

=`\frac{4.5}{29.5}` = 0.15

(iii)  = 15.5 ,माध्य विचलन (δ)= 4.3

माध्य से माध्य विचलन गुणांक 

X̅ ) =`\frac{\delta\overline X}{\overline X}``=\frac{4.3}15.5= 0.28`

(iv) M = 15.5, MDM= 4.3

MDM गुणांक `=\frac{MD_M}M=\frac{4.3}{15.5}=0.28` 

(v) `SD=5.044\overline X=15.5`

विचरण गुणांक `=\frac\sigma{\overline X}\times100`

=`\frac{5.044}15.5\times100= 32.54`

(B) पूर्ववर्ती प्रश्न में, चावल की फसल के लिए विभिन्न परिक्षेपण के सापेक्ष माष एवं विचरण निम्न प्रकार हैं:

(i) L = 34, S =12 

विस्तार गुणांक = `\frac{L-S}{L+S}` 

`=\frac{34-12}{34+12}=\frac{22}{46}=0.48` 

(ii) Q1 =20.5 , Q3 = 26

चतुर्थक विचलन गुणांक = `\frac{Q_3-Q_1}{Q_3+Q_1}` 

=`\frac{26-20.5}{26+20.5}`

=`\frac{5.5}{46.5}` = 0.118

(iii)  = 19.5 ,माध्य विचलन (δ)= 5.83

माध्य से माध्य विचलन गुणांक 

X̅ ) =`\frac{\delta\overline X}{\overline X}``=\frac{5.83}19.5= 0.29`

(iv) M = 18, MDM= 5.7

MDM गुणांक `=\frac{MD_M}M=\frac{5.7}{18}=0.316` 

(v) `SD=7.16\overline X=19.5`

विचरण गुणांक `=\frac\sigma{\overline X}\times100`

=`\frac{7.16}19.5\times100= 36.71`

मानक विचलन से विचरण गुणांक ज्यादा विश्वसनीय है।

Q. 7. किसी क्रिकेट टीम के लिए एक बल्लेबाज का चयन करना है। यह चयन x और y के बीच पाँच पूर्ववर्ती स्कोर के आधार पर करना है जो निम्नवत हैं :

x : 25   85        40        80        120

y : 50   70        65        45        80

किस बल्लेबाज को टीम में चुना जाना चाहिए ?

(क) अधिक रन स्कोर करने वाले को, या (ख) अधिक भरोसेमंद बल्लेबाज को।

Ans. x बल्लेबाज के लिए

x

dx= 70

d2

25

-45

2025

85

15

225

40

-30

900

80

10

100

120

50

2500

Σx = 350

Σdx= 75-75=0

Σdx2 =5750

 Mean (X̅ ) = `\frac{\Sigma x}n` =`\frac{350}5=70`

deviation = 70

σ = `\sqrt{\frac{\Sigma dx^2}n}` 

= `\sqrt{\frac{5750}5}=\sqrt1150=33.91`

विचरण गुणांक `=\frac\sigma{\overline X}\times100`

=`\frac{33.91}70\times100= 4844.28`

y बल्लेबाज के लिए

y

dx=62

d2

50

-12

144

70

8

64

65

3

9

45

-17

289

80

18

324

Σy = 310

Σdx=29-29=0

Σdx2 =830

Mean`\overline Y=\frac{\Sigma Y}n`

=`\frac{310}5=62`

deviation = 62

σ = `\sqrt{\frac{\Sigma dy^2}n}` 

= `\sqrt{\frac{830}5}=\sqrt166=12.88`

विचरण गुणांक `=\frac\sigma{\overline X}\times100`

=`\frac{12.88}62\times100= 20.77`

(i) बल्लेबाज 'y' की तुलना में बल्लेबाज 'x' का औसत स्कोर ज्यादा है। अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज का रूप में 'x' चयन होना चाहिए।

(ii) C.V. बल्लेबाज 'y' का 'x' की तुलना में अधिक है। विश्वसनीयता के आधार पर बल्लेबाज 'y' का चयन किया जाना चाहिए।

Q.8. दो ब्रांडों के बल्बों की गुणवत्ता जाँचने के लिए ज्वलन अवधि घंटों में उनके जीवन काल को, प्रत्येक ब्रांड के 100 बल्बों के आधार पर निम्नानुसार अनुमानित किया गया है:

जीवन काल (घंटों में)

 

बल्बों की संख्या

ब्रांड 'क'

ब्रांड 'ख'

0-50

15

2

50-100

20

8

100-150

18

60

150-200

25

25

200-250

22

5

 

100

100

(क) किस ब्रांड का जीवन काल अधिक है ?

(ख) कौन-सा ब्रांड अधिक भरोसेमंद है ?

Ans. ब्रांड 'क' के लिए

जीवन काल (घण्टों में) X

बल्बों की संख्या (ƒ)

मध्य मूल्य (x)

ƒx

A=125 dx

i=50 dx’

ƒdx'

𝑓d

0-50

15

25

375

-100

-2

-30

60

50-100

20

75

1500

-50

-1

-20

20

100-150

18

125

2250

0

0

0

0

150-200

25

175

4375

50

1

25

25

200-250

22

225

4950

100

2

44

88

 

Σƒ=100

 

Σƒx=13450

 

 

ΣƒdxI =19

Σ𝑓d =193

Mean (X̅ ) = `\frac{\Sigma fx}{\Sigma f}` 

= `\frac{13450}100` = 134.50

σ = `\sqrt{\frac{\Sigma fdx^{I^2}}{\Sigma f}-(\frac{\Sigma fdx^I}{\Sigma f})^2` x i

=`\sqrt{\frac{\193}{\100}-(\frac{\19}{\100})^2` x 50

`=\sqrt{1.93-(0.19)^2}\times50`

`=\sqrt{1.93-0.0361}\times50`

`=\sqrt{1.8939}\times50=1.37\times50=68.5`

विचरण गुणांक `=\frac\sigma{\overline X}\times100`

=`\frac{68.5}134.50\times100= 50.92`

बल्ब 'ख' के लिए

जीवन काल (घण्टों में) X

बल्बों की संख्या (ƒ)

मध्य मूल्य (x)

ƒx

A=125 dx

i=50 dx’

ƒdx'

𝑓d

0-50

2

25

50

-100

-2

-4

8

50-100

8

75

600

-50

-1

-8

8

100-150

60

125

7500

0

0

0

0

150-200

25

175

4375

50

1

25

25

200-250

5

225

1125

100

2

10

20

 

Σƒ=100

 

Σƒx=13650

 

 

ΣƒdxI =23

Σ𝑓d =61

 Mean (X̅ ) = `\frac{\Sigma fx}{\Sigma f}` 

= `\frac{13650}100` = 136.50

σ = `\sqrt{\frac{\Sigma fdx^{I^2}}{\Sigma f}-(\frac{\Sigma fdx^I}{\Sigma f})^2` x i

=`\sqrt{\frac{\61}{\100}-(\frac{\23}{\100})^2` x 50

`=\sqrt{0.61-(0.23)^2}\times50`

`=\sqrt{0.61-0.0529}\times50`

`=\sqrt{0.5571}\times50=0.74\times50=37`

विचरण गुणांक `=\frac\sigma{\overline X}\times100`

=`\frac{37}136.50\times100= 27.10`

(i) बल्ब ' ख ' का औसत जीवन काल ज्यादा  है

(ii) बल्ब 'ख' के लिए विचरण गुणांक का मान कम है, अतः बल्ब 'ख' ज्यादा विश्वसनीय है 'क' बल्ब की तुलना में।

Q. 9. एक कारखाने के 50 मजदूरों की औसत दैनिक मजदूरी 200 रु. तथा मानक विचलन 40 रु. था। प्रत्येक मजदूर की मजदूरी में 20 रु. की वृद्धि की गई। अब मजदूरों की औसत दैनिक मजदूरी एवं मानक विचलन क्या है? क्या मजदूरी में समानता आई है ?

Ans. मजदूरों की संख्या = 50

औसत मजदूरी = 200 रु.

कुल मजदूरी = मजदूरों की संख्या x औसत मजदूरी

= 50 x 200 = 10000

प्रत्येक मजदूर की मजदूरी में वृद्धि = 20 रु.

कुल वृद्धि = 50 ×20=1000

नयी कुल मजदूरी = 10000 रु. + 1000 रु. = 11000 रु 

नयी औसत मजदूरी `=\frac{11000}{50}=220`

नयी मानक विचलन `\sigma=\sqrt{\frac{\Sigma X^2}n-\left(\frac{\Sigma X}n\right)^2}`

प्रत्येक मजदूर की मजदूरी में 20 रु. की वृद्धि की गई

ΣX2 = (220)2 x 50

 = 48400 x 50 = 2420000

नयी मानक विचलन `\sigma=\sqrt{\frac{\Sigma X^2}n-\left(\frac{\Sigma X}n\right)^2}`

`\sigma=\sqrt{\frac{2420000}{50}-\left(220\right)^2}`

`\sigma=\sqrt{48400-48400}=0`

Q. 10. पूर्ववर्ती प्रश्न में, यदि प्रत्येक मजदूर की मजदूरी में 10% की वृद्धि की जाए, तो माध्य एवं मानक विचलन पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?

Ans. पूर्ववर्ती प्रश्न में,

औसत मजदूरी = 200 रु.

मानक विचलन = 40 रु

माध्य 10% बढ़ जाएगी क्योंकि माध्य मूलों से स्वतंत्र नहीं है परंतु मानक विचलन समान रहेगा क्योंकि मूलों से स्वतंत्र है। नई माध्य = 200 + 10% of 200 = 200 + 20 = 220 मानक विचलन समान होगा।

Q. 11. निम्नलिखित वितरण के लिए माध्य से माध्य विचलन और मानक विचलन का परिकलन कीजिए ।

वर्ग

बारंबारता

20-40

3

40-80

6

80-100

20

100-120

12

120-140

9

 

50

Ans. माध्य से माध्य विचलन

वर्ग

बल्बों की संख्या (ƒ)

मध्य मूल्य (x)

ƒx

dev=94.8 (dx)

IdxI

ƒIdxI

20-40

3

30

90

-64.8

64.8

194.4

40-80

6

60

360

-34.8

34.8

208.8

80-100

20

90

1800

-4.8

4.8

96

100-120

12

110

1320

15.2

15.2

182.4

120-140

9

130

1170

35.2

35.2

316.8

 

Σƒ=50

 

Σƒx=4740

 

 

ΣƒIdxI=998.4

Mean (X̅ ) = `\frac{\Sigma fx}{\Sigma f}` 

= `\frac{4740}50` = 94.8

deviation = 94.8

माध्य से माध्य विचलन (δX̅)

= `\frac{\sum f\|dx\|}{\sum f}``=\frac{998.4}50=19.968`

मानक विचलन –

वर्ग

ƒ

MV (x)

A=90 dx

ƒdx

ƒdx2

20-40

3

30

-60

-180

10800

40-80

6

60

-30

-180

5400

80-100

20

90

0

0

0

100-120

12

110

20

240

4800

120-140

9

130

40

360

14400

 

Σƒ=50

 

 

Σƒdx=240

Σƒdx2=35400

 σ=`\sqrt{\frac{\Sigma fdx^2}{\Sigmaf}-(\frac{\Sigmafdx}{\Sigma f})^2`

=`\sqrt{\frac{\35400}{\50}-(\frac{\240}{\50})^2`

=`\sqrt{708-(4.4)^2}=\sqrt{708-23.04}=\sqrt{684.96}=26.17`

Q. 12. 10 मानों का योग 100 है और उनके वर्गों का योग 1090 है। विचरण गुणांक ज्ञात कीजिए।

Ans. ΣX = 100

N = 10

ΣX2 = 1090

मानक विचलन `\sigma=\sqrt{\frac{\Sigma X^2}n-\left(\frac{\Sigma X}n\right)^2}`

`\sigma=\sqrt{\frac{1090}{10}-\left(\frac{100}{10}\right)^2}`

`\sigma=\sqrt{109-100}=\sqrt9=3`

C.V. `=\frac\sigma{\overline X}\times100`

C.V. =`\frac{3}10\times100= 30%`

अन्य महत्त्वपूर्ण परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

Q. 1. मानक तिचलन की इकाई क्या होती है ?

Ans. चर की इकाई।

Q. 2. विचरण मापांक की इकाई क्या होती है ?

Ans. चर की इकाई का वर्ग।

Q. 3. परिक्षेपण की परिभाषा दीजिए।

Ans. परिक्षेपण श्रेणी के मूल्यों के विचरण का माप है।

Q.4. विस्तार का अर्थ बताइए ।

Ans. किसी समंक श्रेणी के अधिकतम एवं न्यूनतम मूल्य के अंतर को विस्तार कहते हैं।

Q. 5. प्रसरण किसे कहते हैं?

Ans. प्रसरण प्रमाप विचलन के वर्ग को प्रसरण करते हैं अर्थात् V = σ2

Q. 6. चतुर्थक विचलन को परिभाषित कीजिए।

Ans. समंक श्रेणी के तृतीय व प्रथम चतुर्थक के अंतर को चतुर्थक विचलन कहते हैं।

Q. 7. शतमक विस्तार किसे कहते हैं?

Ans. आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्थित आँकड़ों के पैमाने पर वे 99 बिन्दु (चर-मूल्य) जो ऑकड़ों को 100 बराबर भागों में विभाजित करते हैं जिससे प्रत्येक भाग में आवृत्तियों की संख्या समान रहे, शतमक कहलाते हैं।

यदि आँकड़े आरोही क्रम में हों तो पहले बिन्दु को प्रथम शतमक (First Percentile), दूसरे को द्वितीय शतमक (Second Percentile),... 99वें को निन्यानवाँ शतमक (Ninty-ninth Percentile) कहा जाता है। इन्हें क्रमशः P1, P2, ..., P99 से व्यक्त किया जाता है।

Q. 8. माध्य विचलन का अर्थ स्पष्ट

Ans. किसी श्रेणी के उसके किसी माध्य से निकाले गये विचलनों के माध्य को माध्य विचलन कहते हैं।

Q. 9. अंतर चतुर्थक विस्तार किसे कहते हैं?

Ans. ऊपरी चतुर्थक व निम्न चतुर्थक के अंतर को अंतर चतुर्थक विस्तार कहते हैं।

Q. 10. प्रमाप विचलन किसे कहते हैं?

Ans. प्रमाप विचलन, समांतर माध्य से निकाले गए विचलनों के वर्गों के माध्य का वर्गमूल होता है।

Q. 11. समांतर माध्य से माध्य विचलन का सूत्र लिखें।

Ans. (δX̅) =`\frac{\Sigma|dx\|}n`

जहाँ δX̅ = समांतर माध्य से विचलन समांतर माध्य

Q. 12. मध्यिका से माध्य विचलन का सूत्र लिखिए।

Ans. माध्यिका से माध्य विचलन (δM ) =`\frac{\Sigma|dx\|}n` 

Q. 13. मानक विचलन का सूत्र बताइए।

Ans. 

σ = `\sqrt{\frac{\Sigma fdx^{I^2}}{\Sigma f}-(\frac{\Sigma fdx^I}{\Sigma f})^2` x i

Q. 14. विचरण गुणांक (मानक विचलन) का सूत्र लिखें।

Ans. विचरण गुणांक(Coefficient of Variation) = `\frac\sigma Ẍ` × 100

Q. 15. विस्तार से विचरण गुणांक का सूत्र लिखिए ।

Ans.  विस्तार गुणांक = `\frac{L-S}{L+S}` 

Q. 16. माध्य विचलन के गुण लिखिये।

Ans. माध्य विचलन के निम्नलिखित गुण है

1. यह समझने में तथा ज्ञात करने में सरल है।

2. यह श्रेणी के सभी मूल्यों पर आधारित है।

3. इस पर चरम मूल्यों का कम प्रभाव पड़ता है।

Q. 17. माध्य विचलन के दोष समझाइये ।

Ans. माध्य विचलन के दोष निम्नलिखित हैं-

1. यह ± चिन्ह की अवहेलना करता है जोकि गणितीय दृष्टि से अशुद्ध है।

2. इसका बीजगणितीय विवेचन संभव नहीं है।

3. यह सामाजिक अध्ययनों में कम प्रयोग होता है।

Q. 18. अपकिरण किसे कहते हैं ?

Ans. व्यक्तिगत मदों के मूल्यों में भिन्नता की सीमा के माप को अपकिरण कहते हैं।

Q. 19. लॉरेन्ज वक्र किसे कहते हैं ?

Ans. लॅरिन्ज वक्र समान वितरण रेखा के वास्तविक वितरण के विचलन का विन्दु रेखीय माप है।

Q. 20. चतुर्थक विचलन गुणांक का क्या अर्थ है ?

Ans. किसी श्रृंखला के तीसरे तथा पहले चतुर्थक के अन्तर तथा योग के भजनफल को चतुर्थक विचलन गुणांक कहते हैं।

Q. 21. विचरण गुणांक का प्रयोग किस लिए किया जाता है ?

Ans. विचरण गुणांक का प्रयोग दो श्रेणियों की विचरणशीलता, स्थिरता, एकरूपता तथा संगति (Consistency) की तुलना करने के लिए किया जाता है।

Q. 22. विचरण गुणांक तथा प्रमाय विचलन में क्या अन्तर है ?

Ans. विचरण गुणांक माध्य में होने वाला प्रतिशत विचरण है जबकि प्रमाप विचलन को माध्य में होने वाला कुल विचरण माना जाता है।

Q. 23. अखण्डित श्रृंखला में प्रमाप विचलन के माप की प्रत्यक्ष विधि का सूत्र दें।

 Ans. σ = `\sqrt{\frac{\Sigma dx^2}n}`

Q. 24. प्रमाप विचलन का खण्डित श्रृंखला सूत्र लिखिए।

Ans. σ =`\sqrt{\frac{\Sigma dx^2}n-(\frac{\Sigma dx}n)^2` 

Q. 25. चतुर्थक विचलन के गुण बताइये ।

Ans. चतुर्थक विचलन के गुण में निम्नलिखित हैं

(i) यह समझने और ज्ञात करने में सरल होता है।

(ii) इसकी गणना खुले सिरे वाली आवृत्ति वितरण में भी संभव है।

(iii) यह विस्तार से श्रेष्ठ व अधिक विश्वसनीय होता है क्योंकि विस्तार तो परिक्षेपण का एक कठोर माप है।

(iv) उस स्थिति में भी लाभदायक होता है जब मध्यवती परिक्षेपण (50%) की गणना करते हैं।

Q. 26. चतुर्थक विचलन के तीन दोष बताइये ।

Ans. चतुर्थक विचलन के तीन दोष निम्नलिखित हैं-

(i) यह बीजगणितीय विवेचन के लिए उपयोगी नहीं है।

(ii) यह 50% मदों की अवहेलना करता है जैसे प्रथम 25% और अंतिम 25%।

(iii) यह विशेषकर उन श्रेणियों के लिए उचित माप नहीं है, जहाँ विचरण की मात्रा अधिक होती है।

Q. 27. वास्तविक माध्य से विचलन ज्ञात करने की विधि बताइए ।

Ans. इस विधि के प्रमुख चरण निम्नलिखित हैं

(i) सर्मक श्रेणी का समांतर माध्य () ज्ञात करते हैं।

(ii) उसके बाद समांतर माध्य द्वारा विचलन ज्ञात करके और | x - X̅ | इसे d द्वारा प्रदर्शित करते हैं।

(iii) इसके बाद विचलनों का वर्ग निकालकर और इनका (Σd2) ग्रात करते हैं।

(iv) निम्न सूत्र का प्रयोग करके प्रमाप विचलन ज्ञात करते हैं 

σ = `\sqrt{\frac{\Sigma dx^2}n}`

Q. 28. व्यक्तिगत श्रृंखला में कल्पित माध्य से मदों का विचलन ज्ञात करने के चरण समझाइए ।

Ans. इस विधि को लघु-विधि भी कहा जाता है। इस विधि के प्रमुख चरण निम्नलिखित हैं-

(i) पहले कल्पित माध्य द्वारा श्रृंखला के मूल्यों का विचलन (d) ज्ञात करते हैं। विचलन ज्ञात करने के बाद, इन सब विचलनों का योग (Σd) जात किया जाता है।

(ii) फिर विचलनों के वर्ग ज्ञात करके उनका योग (Σd2) प्राप्त करते हैं।

(iii) प्रमाप विचलन की गणना करने के लिए निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग कीजिए-

σ =`\sqrt{\frac{\Sigma dx^2}n-(\frac{\Sigma dx}n)^2` 

Q. 29. माप में कौन-कौन से गुण होने चाहिए ?

Ans. (i) समझने में सरल,

(ii) निर्धारण में सरल,

(iii) श्रेणी के सभी मूल्यों पर आधारित,

(iv) निदर्शन के परिवर्तनों का न्यूनतम प्रभाव,

(v) स्पष्ट व स्थिर परिभाषा तथा

(vi) बीज-गणितीय विवेचन सम्भव ।

Q. 30. माध्य विचलन की विशेषताएँ बताइये ।

Ans. माध्य विचलन की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

(i) माध्य विचलन पद माला के सभी मूल्यों के आधार पर निकाले जाते हैं।

(ii) माध्य विचलन समान्तर, माध्यिका व बहुलक किसी की भी सहायता से ज्ञात किया जा सकता है।

(iii) माध्य विचलन की प्रक्रिया इतनी सरल नहीं है।

(iv) अन्तिम पदों का प्रभाव माव्य-विचलन पर बहुत कम पड़ता है।

Q. 31. माध्य विचलन और प्रमाप विचलन में अन्तर बताइए ।

Ans. माध्य विचलन तथा प्रमाप विचलन में अन्तर निम्नलिखित आधारों पर किया जा सकता है-

(i) माध्य विचलन की गणना किसी भी माव्य से समान्तर माध्य, मध्यिका अधवा बहुलक से की जा सकती है। इसके विपरीत प्रमाप विचलन की गणना केवल समान्तर माध्य के आधार पर ही की जा सकती है।

(ii) माध्य विचलन की गणना करते समय विचलनों के बीजगणितीय चिह्नों (+) या (-) की उपेक्षा की जाती है। गणितीय दृष्टि से यह उचित नहीं है, परन्तु प्रमाप विद्यलन की गणना करते समय बीजगणितीय चिह्नों को ध्यान में रखा जाता है।

Q. 32. चतुर्थक विचलन की विशेषताएँ लिखें ।

Ans. चतुर्थक विचलन की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

(i) चतुर्वक विचलन की गणना सुगमता से की जा सकती है।

(ii) अपकिरण के इस माप को सरलता से समझा जा सकता है।

(iii) सर्मक श्रेणी के माध्य का अध्ययन करने के लिए इसको अधिक प्रयोग में लाया जाता है।

(iv) चतुर्थक विचलन ज्ञात करने के लिए किसी विशिष्ट माध्य से विचलन लेने की आवश्यकता नहीं होती।

(v) चतुर्थक विचलन ज्ञात करने में सीमान्त पदों का प्रभाव विस्तार की तुलना में कम पड़ता है।

Q. 33. विस्तार अथवा परास की विशेषताओं का वर्णन करें।

Ans. विस्तार अथवा परास की निम्नलिखित विशेषतायें हैं-

(i) यह सुपरिभाषित होता है।

(ii) इसका परिकलन सरल तथा इसे समझना आसान है।

(iii) यह चर के प्रत्येक मूल्य पर निर्भर नहीं करता अर्थात् उच्चतम तथा निम्नतम मान के वीच भूल्यों के वितरण से परास पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

(iv) यह अन्तिम मूल्यों द्वारा आवश्यकता से अधिक प्रभावित होता है।

(v) परास चर के मापन की इकाइयों पर निर्भर करता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

Q. 1. माध्य विचलन के गुण एवं दोषों का वर्णन करें।

Ans. माध्य विचलन के निम्नलिखित गुण हैं-

1. यह समझने में तथा ज्ञात करने में सरल है।

2. यह श्रेणी के सभी मूल्यों पर आधारित है।

3. इस पर चरम मूल्यों का कम प्रभाव पड़ता है।

माध्य विचलन के दोष निम्नलिखित हैं-

1. यह ± विह की अवहेलना करता है जोकि गणितीय दृष्टि से अशुद्ध है।

2. इसका बीजगणितीय विवेचन संभव नहीं है।

3. यह सामाजिक अध्ययनों में कम प्रयोग होता है।

Q. 2. विस्तार के उपयोग लिखिए ।

Ans. यह मुख्य तौर पर निम्नलिखित में प्रयुक्त होता है-

1. किस्म नियंत्रण-उत्पादित वस्तुओं की किस्म नियंत्रण में विस्तार अत्यन्त उपयोगी सिद्ध होता है।

2. कीमतों में परिवर्तन विस्तार का प्रयोग अनेक प्रकार के परिवर्तनों जैसे ब्याज दर, विनिमय दर, शेयरों के मूल्य, तापमान आदि का अध्ययन करने के लिए भी किया जाता है।

3. मौसम का पूर्वानुमान विस्तार का प्रयोग न्यूनतम तथा अधिकतम तापमान के अंतर का पता लगाने के लिए भी किया जाता है।

Q.3. हम किसी मूल्य विशेष परिक्षेपण का मापन क्यों करते हैं ? क्या परास और चतुर्थक विचलन किसी मूल्य से परिक्षेषण के मापक हैं ?

Ans. केन्द्रीय मूल्य से वितरण के सभी मूल्यों के विचलन को संक्षेप में मापने के लिए हम किसी मूल्य विशेष से परिक्षेपण का मापन करते हैं। परिक्षेपण के निम्नलिखित मापक हैं-

(i) परास, (ii) चतुर्थक विचलन, (iii) माध्य विचलन, (iv) मानक विचलन।

माध्य विचलन तथा मानक विचलन किसी मूल्य विशेष से परिक्षेपण का मापन करते हैं। परन्तु परास तथा चतुर्थक विचलन किसी विशेष मूल्य से परिक्षेपण का मापन नहीं करते हैं।

Q.4. व्यक्तिगत श्रृंखला में कल्पित माध्य से मदों का विचलन ज्ञात करने के चरण समझाइए ।

Ans. इस विधि को लघु-विधि भी कहा जाता है। इस विधि के प्रमुख चरण निम्नलिखित हैं-

(i) पहले कल्पित माध्य द्वारा श्रृंखला के मूल्यों का विचलन (d) ज्ञात करते हैं। विचलन ज्ञात करने के बाद, इन सब विचलनों का योग (Σd) जात किया जाता है।

(ii) फिर विचलनों के वर्ग ज्ञात करके उनका योग (Σd2) प्राप्त करते हैं।

(iii) प्रमाप विचलन की गणना करने के लिए निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग कीजिए-

σ =`\sqrt{\frac{\Sigma dx^2}n-(\frac{\Sigma dx}n)^2` 

Q. 5. प्रमाप विचलन किसे कहते हैं? इसकी विशेषताएँ लिखें।

Ans. प्रमाप विचलन किसी श्रेणी के विभिन्न पदों के, समान्तर माध्य से विचलन के वर्गों के, समान्तर माध्य वर्गमूल होता है।

प्रमाप विचलन की विशेषताएँ -

(i) प्रमाप विचलन के अन्तर्गत मूल्यों से विचलन सदैव समानान्तर माध्य से ही लिए जाते हैं, क्योंकि यह माध्य केन्द्रीय प्रवृत्ति का सर्वश्रेष्ठ माप समझा जाता है। (मध्यका एवं बहुलक का प्रयोग नहीं किया जाता है।)

(ii) बीजगणितीय चिहों को छोड़ा नहीं जाता है बल्कि विचलनों के वर्ग कर लिए जाते हैं जिससे ऋणात्मक विचलन स्वतः ही धनात्मक हो जाते हैं।

(iii) समान्तर माध्य से लिए गए विचलनों के वर्गों का समान्तर माध्य, द्वितीय अपकिरण घात (Second moment of dispersion) अथवा विचरण मापांक (Variance) कहलाता है। जब विचरण मापांक का वर्गमूल निकाला जाता है तो यह प्रमाप विचलन बन जाता है।

Q. 6. प्रमाप विचलन के गुण तथा दोष बतलाएँ ।

Ans. इसके निम्नलिखित गुण हैं-

(i) प्रमाप विचलन गणितीय दृष्टि में पूर्णतया उपयुक्त माप है, क्योंकि इसमें बीजगणितीय चिह्नों को महत्व दिया जाता है।

(ii) अपकिरण का यह माप श्रेणी के सभी मूल्यों पर आधारित होता है।

(iii) इस पर आकस्मिक परिवर्तनों का कम प्रभाव पड़ता है।

(iv) प्रमाप विचलन उच्चतर बीजगणितीय अध्ययन के लिए सर्वथा उपयुक्त माप है।

(v) यह अपकिरण का निश्चित तथा स्पष्ट माप है।

(vi) इस पर निदर्शन परिवर्तनों का कम-से-कम प्रभाव पड़ता है।

प्रमाप विचलन के दोष- इसके निम्नलिखित दोष हैं-

(i) प्रमाप विचलन की गणना क्रिया कुछ सीमा तक जटिल होती है।

(ii) प्रमाप विचलन चरण पदों के मूल्यों को अधिक महत्व देता है।

(iii) एक सामान्य बुद्धि वाले व्यक्ति के लिए प्रमाप विचलन का समझना भी प्रायः कठिन होता है।

Q. 7. लॉरेन्ज वक्र किसे कहते हैं? इसके गुण तथा दोष लिखें ।

Ans. लॉरेन्ज वक्र डॉ. लॅरिन्ज ने अपकिरण मापन की बिन्दु रेखीय रीति का निर्माण किया। उसके नाम पर ही इसे लॅरिन्ज वन कहते हैं। यह एक संचयी प्रतिशत वक्र है। लेरिन्ज बक्र वितरण रेखा के जितने पास होगा, अपकिरण की मात्रा उतनी ही कम होगी। इसके विपरीत लॅरिंज वक्र समान वितरण रेखा से जितना दूर होगा, अपकिरण या असमानता की मात्रा उतनी अधिक होगी।

गुण- लॉरेन्ज वक्र के निम्न गुण हैं-

(i) यह आकर्षक तथा प्रभावशाली होता है।

(ii) सरलता से समझ में आ जाता है।

(iii) धन, आय, मजदूरी, लाभ आदि के वितरण की असनानताओं का एक ही दृष्टि में अनुमान लगाने के लिए यह वक्र उत्लन्त उपयोगी होता है।

दोष -लेरिन्ज वक्र के निम्न दोष हैं

(i) इसके अपकिरण का अंकात्मक नाप ज्ञात नहीं होता है।

(ii) इसे उनाने की क्रिया कठिन है।

Q. 8. विस्तार का क्या अर्थ है ?

Ans. किसी समंक माला में सबसे बड़े और सबसे छोटे मान के अन्तर को उसका विस्तार (Range) कहते हैं। यह अपकिरण ज्ञात करने की सबसे सरल रीति है। विस्तार की गणन क्रिया इस प्रकार है-

(i) श्रेणी का अधिकतम मान और न्यूनतम मान ज्ञात किया जाता है। अविच्छिन्न श्रेणी में न्यूनतम वर्ग की निचली सीमा को न्यूनतम मान और अधिकतम वर्ग की ऊपरी सीमा को अधिकतम मान माना जाता है।

(ii) निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग किया जाता है- R = L - S

R = विस्तार (Range)

L = सबसे बड़ा मान (Largest Value)

S = सबसे छोटा मान (Smallest Value)

विस्तार-गुणक (Coefficient of Range)- विस्तार के सापेक्ष माप को विस्तार-गुणक कहते हैं। तुलनात्मक अध्ययन के लिए विस्तार-गुणक निकालना पड़ता है। इसकी गणना निम्नलिखित सूत्र द्वारा की जाती है-

Coeff. of Range = `\frac{L-S}{L+S}` 

Q.9. विस्तार के गुण तथा दोष का वर्णन करें।

Ans. गुण- विस्तार के निम्नलिखित गुण हैं- अपकिरण के मापने की विभिन्न रीतियों में विस्तार समझने में तथा निर्धारण में सबसे सुगम है। गणन-क्रिया सरल होने के कारण विस्तार का मूल्य ज्ञात करने में बहुत ही कम समय लगता है।

दोष- विस्तार के निम्नलिखित दोष हैं-

(i) विस्तार श्रेणी के सभी पद मूल्यों पर आधारित नहीं होते। अधिकतम व न्यूनतम मूल्यों के बीच के पदों में होने वाले परिवर्तनों का विस्तार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

(ii) विस्तार मूल्य में समंकमाला की बनावट या चरम मूल्यों के मध्य पद-मूल्यों के फैलाव या बिखराव का बिल्कुल पता नहीं चलता। दो समंक श्रेणियों का विस्तार समान होने पर भी उनकी बनावट में बहुत अन्तर हो सकता है।

(iii) विवर्तमुखी आवृत्ति वितरणों में विस्तार का मूल्य ज्ञात नहीं किया जा सकता।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

Q. 1. परिक्षेपण के उद्देश्य एवं महत्त्त का वर्णन करें।

Ans. परिक्षेपण का अध्ययन अनेक प्रकार से महत्वपूर्ण हैं। इनमें प्रमुख निम्नलिखित हैं-

1. विचरणशीलता के नियंत्रण के लिए- परिक्षेपण के माप मात्रात्मक समंकों का नियंत्रण करने में भी मदद करते हैं। सामाजिक विज्ञानों में यदि आय एवं धन की असमानता का माप करना है तो उसके लिए परिक्षेपण के माप जरूरी होते हैं।

2. औसत की विश्वसनीयता को जानने के लिए- परिक्षेपण के माप मदों के वितरण की प्रवृत्ति को स्पष्ट करते हैं। ये बताते हैं कि औसत कहाँ तक सांख्यिकीय श्रेणी के प्रतिनिधित्व के लिए उपयुक्त हैं। यदि परिक्षेपण कम होता है तो औसत अधिक निकटता से व्यक्तिगत पद मूल्यों को प्रकट करते हैं और यह इस अर्थ में अधिक विश्वसनीय होता क्योंकि यह एक समग्र के लिए अच्छे अनुमान लगाता है। दूसरी तरफ, यदि परिक्षेपण अधिक होता है, तो औसत अविश्वसनीय होता है।

3. दो या दो से अधिक श्रेणियों की विचरणशीलता द्वारा तुलना- इसके द्वारा दो या दो से अधिक श्रेणियों में पाई जाने वाली विचरणशीलता की तुलना की जाती है। विचरण का अध्ययन दो अथवा दो से अधिक समंक श्रेणियों के बीच एकरूपता तथा नियमितता के निर्धारण के लिए भी लाभदायक होता है। किसी श्रेणी में विचरण की मात्रा अधिक होने का अर्थ है नियमितता या एकरूपता का अभाव। विचरेण की कम मात्रा का अर्थ है श्रेणी में एकरूपता पाया जाना।

4. अन्य सांख्यिकीय उपायों के लिए उपयोगी- अन्य कई प्रकार के सांख्यिकीय माप, जैसे-सह-सम्बन्ध, प्रतिपगमन इत्यादि किसी-न-किसी प्रकार से विचरणशीलता पर आधारित हैं।

Q. 2. अखंडित श्रृंखला से प्रमाप विचलन ज्ञात करने के चरण समझाइए।

Ans. इस विधि में प्रमाप विचलन की गणना निम्न प्रकार से की जाती है-

(i) विभिन्न वर्ग अंतरालों का माध्य मूल्य ज्ञात करते हैं।

(ii) उसके बाद कल्पित माध्य से विचलन लेकर इसे dx से प्रकट करते हैं।

(iii) यदि वर्ग अंतराल समान होता है तो एक समापवर्तक लेकर इससे विचलनों को भाग देते हैं और इसे dx’ से दर्शाते हैं।

(iv) फिर विचलनों को संबंधित आवृत्तियों से गुणा करके तथा इसके योग को ƒdxI द्वारा प्रकट करते हैं।

(v) फिर विचलनों का वर्ग ज्ञात करके आवृत्तियों से गुणा करते हैं और इसे `fdx^{1^2}` से दर्शात हैं।

(vi) निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग करके मानक विचलन ज्ञात किया जाता है।

σ = `\sqrt{\frac{\Sigma fdx^{I^2}}{\Sigma f}-(\frac{\Sigma fdx^I}{\Sigma f})^2` X i

Q. 3. अपकिरण किसे कहते हैं? इसकी क्या आवश्यकता है? वर्णन करें।

Ans. अपकिरण का अर्थ (Meaning of Dispersion) सामान्यतः किसी चर (Variable) के मान तथा समान्तर माध्य या किसी अन्य निश्चित बिन्दु के माप के बीच अन्तरों को विचलन कहा जाता है और माध्य से पद मानों के विचलन के माप को अपकिरण का माप कहते हैं।

अपकिरण की परिभाषा (Definition of Dispersion) निश्चित शब्दों में अपकिरण को परिभाषित करते हुए डॉ. बाउले (Bowley) ने लिखा है कि, "अपकिरण पदों के विचरण या अन्तर की माप है।" ("Dispersion is the measure of the variations of the item.") प्रो. स्पाइगेल के मतानुसार, "वह सीमा जहाँ तक श्रेणी के विभिन्न समंक एक माध्य-मूल्य के दोनों ओर फैलने की प्रवृत्ति रखते हैं, उन समंकों का विचरण या भिन्नीकरण कहलाती है।" कॉनर (Connor) के शब्दों में, "व्यक्तिगत मदों के मूल्यों में भिन्नता की सीमा के माप को अपकिरण कहते हैं।”

अपकिरण की माप की आवश्यकता के सन्दर्भ में एक रोचक कहानी भी सामने आती है। एक व्यक्ति सपरिवार एक नदी पार करना चाहता था। उसने पाया कि उसके परिवार की औसत लम्बाई 4 फुट 3 इंच है, जबकि नदी की औसत गहराई केवल 3 फुट 8 इंच है। यह सोचकर कि नदी की औसत गहराई से उसके परिवार की औसत लम्बाई अधिक है, वह परिवार सहित नदी पार करने के लिए नदी में घुस गया। उसका परिवार नदी में डूब गया क्योंकि नदी की औसत गहराई 3 फुट 8 इंच होते हुए भी नदी की गहराई अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग थी-कहीं यह 6 फुट भी थी, कहीं यह 2 फुट भी थी। यदि उस व्यक्ति ने नदी की औसत गहराई का उसकी अधिकतम गहराई से अन्तर (या विचलन) देख लिया होता, तब वह व्यक्ति दुर्घटना से बच सकता था।

Q. 4. परिक्षेपण के विभिन्न मापों की तुलना करें।

Ans.

1. ये सुपरिभाषित होते हैं- परास अथवा विस्तार, चतुर्वक विचलन, माध्य विचलन तथा मानक विचलन-ये चारों मापक सुपरिभाषित होते हैं। उनकी परिभाषाओं में कोई अस्पष्टता नहीं होती।

2. इनका परिकलन आसान होता है- विस्तार का परिकलन सबसे आसान है। चतुर्थक विचलन में उच्च और निम्न चतुर्थकों के परिकलनों की आवश्यकता होती है पर वे भी काफी सरल हैं। हालांकि, माध्य विचलन तथा मानक विचलन में कुछ व्यवस्थित परिंकलनों की आवश्यकता पड़ती है, परन्तु ये भी सरल ही हैं।

3. इन्हें समझना आसान है- इन सभी मापकों को समझना आसान है। विस्तार तथा चतुर्वक विचलन परिक्षेपण के सामान्य मापक हैं, माध्य विचलन तथा मानक विचलन परिक्षेपण का मापन किसी केन्द्रीय मूल्य से विचलनों के रूप में करते हैं। अतः माध्य विचलन तथा मानक विचलन परास के अन्तर्गत मूल्यों के परिक्षेपण की एक बेहतर जानकारी देती है।

4. ये सभी मूल्यों पर आधारित होते हैं- विस्तार तथा चतुर्थक विचलन सभी मूल्यों पर आधारित नहीं होते हैं, जबकि माध्य विचलन तथा मानक विचलन चरों के सभी मूल्यों पर आधारित होते हैं। सबसे अधिक अन्तिम मूल्यों द्वारा प्रभावित होता है।

5. ये बीजगणितीय विवेचन के योग्य होते हैं- विश्लेषण की दृष्टि से मानक विचलन सबसे आसान होता है। अन्य मापकों का विश्लेषण भी किया जा सकता है, परन्तु वे थोड़ा कठिन होते हैं।

Q.5. 'निरपेक्ष' परिक्षेपण के चार विभिन्न मापक कौन-कौन से हैं? उनकी विशेषताओं को संक्षेप में लिखिये ।

Ans. 'निरपेक्ष' परिक्षेपण के चार विभिन्न मापक निम्नलिखित हैं-

(1) परास, (ii) चतुर्थक विचलन, (iii) माध्य विचलन, (iv) मानक विचलन ।

परास की विशेषताएँ-परास की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं-

1. यह सुपरिभाषित है।

2. इसकी गणना करना एवं इसे समझना बहुत आसान है।

3. यह वितरण के अधिकतम एवं न्यूनतम मूल्यों से ही प्रभावित होता है, अन्य मूल्यों का इसपर कोई असर नहीं पड़ता है।

4. यह मूल्यों की इकाई पर निर्भर करता है।

चतुर्थक विचलन की विशेषताएँ- 1. यह सुपरिभाषित है।

2. इसकी गणना करना एवं इसे समझना आसान है।

3. यह वितरण के सभी मूल्यों पर निर्भर नहीं होता है।

माध्य विचलन की विशेषताएँ- 1. यह सुपरिभाषित है।

2. यह वितरण के सभी मूल्यों पर आधारित होता है।

3. यह केन्द्रीय मूल्यों (समांतर माध्य, माध्यिका या बहुलक) से निरपेक्ष विचलनों पर आधारित होता है।

4. इसका बीजगणितीय विवेचन संभर होता है।

5. माध्य विचलन की इकाई वितरण के मूल्यों की इकाई होती है।

मानक विचलन की विशेषताएँ- 1. यह सुपरिभाषित है।

2. मानक चिचलन की गणना में एवं इसे समझने में अन्य दिधलन एपों की तुलना में ज्यादा सुव्यवस्थित होने की जरूरत होती है।

3. मानक विचलन परास के अंतर्गत मूल्यों के परिक्षेपण की बेहतर जानकारी देता है।

4. यह वितरण के सभी मूल्यों पर आधारित होता है।

5. इसका वीजगणितीय विवेचन संभव होता है।

6. इसके आकलन में कोई गणितीय अशुद्धि का सहारा नहीं लिया जाता है।

Q. 6. परिक्षेपण पद की सोदाहरण व्याख्या करें।

Ans. केन्द्रीय प्रवृत्ति के माप (समांतर माध्य, माध्यिका, बहुलक व चतुर्थक) समंकों के वितरण के केन्द्रीय मूल्य की जानकारी प्रदान कराते हैं। केंद्रीय मूल्यों के आसपास मूल्यों के विचलन (विचरण या फैलाब) की जानकारी इनसे नहीं मिलती है। केन्द्रीय मूल्यों के आसपास मूल्यों के विचलन की जानकारी परिक्षेपण की माप से प्राप्त होती है अर्थात् परिक्षेपण की माप से यह पता चलता है कि केन्द्रीय प्रवृत्ति का कौन-सा औसत वितरण का अच्छा प्रतिनिधित्व करता है। यदि किसी औसत से परिक्षेपण की माप का मूल्य कम होता है तो उसे वितरण का बेहतर प्रतिनिधि माना जायेगा तथा इसके विपरीत यदि किसी औसत से परिक्षेपण का मूल्य ज्यादा होता है तो इसे अच्छा नहीं माना जायेगा।

जैसे सांख्यिकी परीक्षा में छात्रों के अंक

450, 600, 550, 375, 470

अंकों का समांतर माध्य `=\frac{2445}5=489` 

समांतर माध्य से विचलन

-39, +111, +61, -114, -19

अंकों की मध्यिका = 470

मध्यिका से विचलन -20, +130, +80, -95, 0

समांतर माध्य एवं मध्यिका दोनों से वितरण के कुछ मूल्यों का विचलन धनात्मक एवं कुछ का ऋणात्मक तथा कुछ मूल्यों का विचलन कम तो कुछ का ज्यादा है। अतः केंद्रीय मूल्य से वितरण के सभी मूल्यों के विचलनों की एक संक्षिप्त माप की जरूरत होती है।

केन्द्रीय मूल्य से वितरण के सभी मूल्यों के विचलनों की संक्षिप्त माप को 'परिक्षेपण की माप' कहते हैं।

व्यावहारिक प्रश्न

(i) विस्तार 

प्रश्न :- निम्नलिखित आंकड़ों का विस्तार एवं विस्तार गुणांक ज्ञात कीजिए

अंक - 20,30,32,35,40,50,90

अधिकतम अंक = 90 ; न्यूनतम अंक = 20

विस्तार = L - S = 90 - 20 = 70

विस्तार गुणांक = `\frac{L-S}{L+S}` 

`=\frac{90-20}{90+20}=\frac{70}{110}=0.63`

खण्डित श्रेणी में विस्तार

प्रश्न :- निम्नलिखित आंकड़ों का विस्तार एवं विस्तार गुणांक ज्ञात कीजिए ।

अंक

विद्यार्थियों की संख्या

10

2

20

5

30

3

40

1

50

4

60

5

70

3

80

1

अधिकतम अंक = 80 ; न्यूनतम अंक = 10

विस्तार = L - S = 80 - 10 = 70

विस्तार गुणांक = `\frac{L-S}{L+S}` 

`=\frac{80-10}{80+10}=\frac{70}{90}=0.77`

सतत श्रेणी में विस्तार

प्रश्न :- निम्नलिखित आंकड़ों का विस्तार एवं विस्तार गुणांक ज्ञात कीजिए ।

अंक

विद्यार्थियों की संख्या

10-20

2

20-30

4

30-40

3

40-50

5

50-60

1

60-70

3

अधिकतम अंक = 70 ; न्यूनतम अंक = 10

 विस्तार = L - S = 70 - 10 = 60

विस्तार गुणांक = `\frac{L-S}{L+S}` 

`=\frac{70-10}{70+10}=\frac{60}{80}=0.75`

(ii) चतुर्थक विचलन

प्रश्न :- निम्नलिखित आंकड़ों से अन्तर चतुर्थक, चतुर्थक विचलन तथा चतुर्थ विचलन गुणांक निकालिए

अंक : 100,90,110,120,130,150,170,180,190,200,210

उत्तर :- 

SN

अंक

1

90

2

100

3

110

4

120

5

130

6

150

7

170

8

180

9

190

10

200

11

210

Q1 = Value of `\frac{n+1}4`  items  =  `\frac{11+1}4` = `\frac{12}4` = 3

Q1 = 110

Q3 = Value of 3 (`\frac{n+1}4`) items

Q3 = 3 (`\frac{11+1}4`)  = 3 (`\frac{12}4`) = 3(3) = 9

Q3 = 190

अन्तर-चतुर्थक विस्तार = Q3 - Q1 = 190-110= 80

चतुर्थक विचलन=`\frac{Q_3-Q_1}2`=`\frac{190-110}2` 

= `\frac{80}2` = 40

चतुर्थक विचलन गुणांक = `\frac{Q_3-Q_1}{Q_3+Q_1}` =`\frac{190-110}{190+110}`

=`\frac{80}{300}` = 0.26

प्रश्न :- निम्नलिखित आंकड़ों से अन्तर चतुर्थक, चतुर्थक विचलन तथा चतुर्थक विचलन गुणांक निकालिए

अंक

2

4

6

8

10

12

उत्तर :-

SN

अंक

1

2

2

4

3

6

4

8

5

10

6

12

Q1 = Value of  `\frac{n+1}4`  items  =  `\frac{6+1}4` = `\frac{7}4` = 1.7

Q1= Value of `\frac{1^{st}+2^{nd}}2` items

     =`\frac{2+4}2=\frac{6}2`=3

Q3 = Value of 3 (`\frac{n+1}4`) items

 = 3 (`\frac{6+1}4`)  =  (`\frac{21}4`) = 5.2

Q3 = Value of `\frac{5^{th}+6^{th}}2` items

     =`\frac{10+12}2=\frac{22}2=11`

अन्तर-चतुर्थक विस्तार = Q3 - Q1 = 11-3 = 8

चतुर्थक विचलन = `\frac{Q_3-Q_1}2`= `\frac{11-3}2` = `\frac{8}2` = 4

चतुर्थक विचलन गुणांक = `\frac{Q_3-Q_1}{Q_3+Q_1}` =`\frac{11-3}{11+3}`

  =`\frac{8}{14}` = 0.57

खण्डित श्रेणी

प्रश्न :- निम्नलिखित श्रेणी से अन्तर चतुर्थक विस्तार, चतुर्थक विचलन तथा चतुर्थक विचलन के गुणांक ज्ञात कीजिए

अंक

छात्रों की संख्या

45

3

47

4

50

2

55

1

60

5

70

2

80

8

100

7

उत्तर :-

अंक

छात्रों की संख्या (ƒ)

संचयी आवृत्ति (cƒ)

45

3

3

47

4

7

50

2

9

55

1

10

60

5

15

70

2

17

80

8

25

100

7

32

Q1 = Value of `\frac{N}4`  items  = `\frac{32}4` = 8 (cf में देखें)

Q1 = 50

Q3 =Value of``\frac{3N}4`items = 3 (`\frac{32}4`)= 3x8 = 24

Q3 = 80

अन्तर-चतुर्थक विस्तार = Q3 - Q1 = 80-50 = 30

चतुर्थक विचलन = `\frac{Q_3-Q_1}2`= `\frac{80-50}2` = `\frac{30}2` = 15

चतुर्थक विचलन गुणांक = `\frac{Q_3-Q_1}{Q_3+Q_1}` =`\frac{80-50}{80+50}`

   =`\frac{30}{130}` = 0.23

सतत श्रेणी

प्रश्न :- निम्नलिखित श्रेणी से अन्तर चतुर्थक विस्तार, चतुर्थक विचलन तथा चतुर्थक विचलन के गुणांक ज्ञात कीजिए

अंक

छात्रों की संख्या

10-20

2

20-30

3

30-40

1

40-50

4

50-60

7

60-70

3

उत्तर :-

अंक

छात्रों की संख्या (ƒ)

संचयी आवृत्ति (cƒ)

10-20

2

2

20-30

3

5

30-40

1

6

40-50

4

10

50-60

7

17

60-70

3

20

Q1 = Value of `\frac{N}4`  items  = `\frac{20}4` = 5 

⸫  Q1 lise between ( 20 – 30 ) in class interval

⸫ l1 = 20, l2 = 30, ƒ = 3, c = 2, `\frac{N}4` = 5

`Q_1=L_1+\frac{\frac N4-C}ƒ\left(L_2-L_1\right)`

= 20 +`\frac{5-2}3`( 30 –  20 )  

Q1  = 20 +`\frac{3}3`(10 ) = 20 + 10 = 30

Q3 =Value of`\frac{3N}4`items = (`\frac{3 X 20}4`)= 15

Q3 lise between ( 50 – 60 ) in class interval

⸫ l1 = 50, l2 = 60, ƒ = 7 , c =10, `\frac{3N}4` = 15

`Q_3=L_1+\frac{\frac{3N}4-C}ƒ\left(L_2-L_1\right)`

= 50 +`\frac{15-10}7`( 60 –  50 )

 Q3  = 50 +`\frac{5}7` (10 ) = 50 +`\frac{50}7`= 50 + 7.14 = 57.14

(iii) माध्य विचलन

 व्यक्तिगत श्रेणी

प्रश्न :- निम्नलिखित आंकड़ों से माध्य से माध्य विचलन एवं उसका गुणांक ज्ञात कीजिए ?    

X : 10,15,20,25,30

उत्तर :-

X

dev=20 (dx)

IdxI

10

-10

10

15

-5

5

20

0

0

25

5

5

30

10

10

ΣX =100

 

ΣIdxI = 30

Mean (X̅ ) = `\frac{\Sigma x}n` =`\frac{100}5=20`

deviation = 20

माध्य से माध्य विचलन (δX̅)

=`\frac{\Sigma|dx\|}n``=\frac{30}5=6`

माध्य से माध्य विचलन गुणांक 

X̅ ) =`\frac{\delta Ẍ}Ẍ``=\frac{6}20= 0.3`

खण्डित श्रेणी

प्रश्न :- निम्नलिखित आंकड़ों से माध्य से माध्य विचलन एवं उसका गुणांक ज्ञात कीजिए ?

X

ƒ

2

1

4

3

3

2

2

3

1

1

उत्तर :-

X

ƒ

dev=2.7(dx)

IdxI

ƒIdxI

2

1

2

-0.7

0.7

0.7

4

3

12

1.3

1.3

3.9

3

2

6

0.3

0.3

0.6

2

3

6

-0.7

0.7

2.1

1

1

1

-1.7

1.7

1.7

 

Σƒ= 10

Σƒx = 27

 

 

ΣƒIdxI = 9

 Mean (X̅ ) = `\frac{\Sigma fx}{\Sigma f}` = `\frac{27}10` = 2.7

माध्य से माध्य विचलन (δX̅)

= `\frac{\sum f\|dx\|}{\sum f}``=\frac{9}10=0.9`

माध्य से माध्य विचलन गुणांक X̅

=`\frac{\delta Ẍ}Ẍ``=\frac{0.9}2.7= 0.3`

सतत श्रेणी

प्रश्न :- निम्नलिखित आंकड़ों से माध्य से माध्य विचलन एवं उसका गुणांक ज्ञात कीजिए ?

X

ƒ

0-10

3

10-20

2

20-30

3

30-40

1

40-50

1

उत्तर :-

X

ƒ

MV(X)

ƒx

dev=20(dx)

IdxI

ƒIdxI

0-10

3

5

15

-15

15

45

10-20

2

15

30

-5

5

10

20-30

3

25

75

5

5

15

30-40

1

35

35

15

15

15

40-50

1

45

45

25

25

25

 

Σƒ = 10

 

Σƒx = 200

 

 

ƒIdxI=110

Mean (X̅ ) = `\frac{\Sigma fx}{\Sigma f}` = `\frac{200}10` = 20

माध्य से माध्य विचलन (δX̅)

= `\frac{\sum f\|dx\|}{\sum f}``=\frac{110}10= 11`

माध्य से माध्य विचलन गुणांक X̅

=`\frac{\delta Ẍ}Ẍ``=\frac{11}20= 0.5`

प्रश्न :- निम्नलिखित आंकड़ों से माध्यिका से माध्य विचलन एवं उसका गुणांक ज्ञात कीजिए ?

X : 2,4,6,8,10

उत्तर :- 

SN

X

1

2

2

4

3

6

4

8

5

10

Median = Value of  `\frac{n+1}2` items

  =`\frac{5+1}2=\frac{6}2=3`

        Median = 6
      devition = 6

X

dev=6(dx)

IdxI

2

-4

4

4

-2

2

6

0

0

8

2

2

10

4

4

 

 

ΣIdxI = 12


माध्यिका से माध्य विचलन (δM
=`\frac{\Sigma|dx\|}n``=\frac{12}5=2.4`
माध्यिका से माध्य विचलन गुणांक(ᵹ_m)
`=\frac{ᵹ_m}M=\frac{2.4}6=0.4`

प्रश्न :- निम्नलिखित आंकड़ों से बहुलक से माध्य विचलन एवं उसका गुणांक ज्ञात कीजिए ?

X

ƒ

4

10

6

12

8

5

7

20

6

4

3

3

 उत्तर :-  

Class 11 Economics 6. परिक्षेपण की माप (MEASURES OF DISPERSION)

Mode = 7

devotion = 7 

X

ƒ

dev=7(dx)

IdxI

ƒIdxI

4

10

-3

3

30

6

12

-1

1

12

8

5

1

1

5

7

20

0

0

0

6

4

-1

1

4

3

3

-4

4

12

 

Σƒ = 54

 

 

ΣƒIdxI = 63


बहुलक से माध्य विचलन (δZ
= `\frac{\sum f\|dx\|}{\sum f}``=\frac{63}54=1.1`

बहुलक से माध्य विचलन गुणांक(ᵹ_z)

`=\frac{ᵹ_z}Z=\frac{1.1}7=0.1`

(iv) प्रमाप विचलन

 Individual Series

 (Direct Method)

प्रश्न :- निम्न आंकड़ों से प्रमाप विचलन की गणना करे

 x : 2,4,6,8,10

Xdev=6(dx)dx2
2-416
4-24
600
824
10416
=30=40

  X̅   = `\frac{\Sigma x}n` =`\frac{30}5=6` 

σ = `\sqrt{\frac{\Sigma dx^2}n}` = `\sqrt{\frac{40}5}=\sqrt8=2.8`

(Shortcut Method)
Xdev=6(dx)dx2
2-416
4-24
600
824
10416
=0=40

σ =`\sqrt{\frac{\Sigma dx^2}n-(\frac{\Sigma dx}n)^2`

σ =`\sqrt{\frac{40}5-(\frac{0}5)^2`=`\sqrt8=2.8`

विचरण मापांक (Variance) = `\sigma^2`= (2.8)2 = 7.84

प्रमाप विचलन का गुणांक(Coefficient of SD) =`\frac\sigma Ẍ`

=`\frac{2.8}6=0.46`

विचरण गुणांक(Coefficient of Variation) = `\frac\sigma Ẍ` × 100

=`\frac{2.8}6\times100=46.66`

Discrete Series  

(Direct Method)

प्रश्न :- निम्न आंकड़ों से प्रमाप विचलन की गणना करे

x

2

4

8

10

3

4

ƒ

3

2

1

3

4

3


X

ƒ

ƒx

dev =4.7(dx)

ƒdx

ƒdx2

2

3

6

-2.7

-8.1

21.87

4

2

8

-0.7

-1.4

0.98

8

1

8

3.3

3.3

10.89

10

3

30

5.3

15.9

84.27

3

4

12

-1.7

-6.8

11.56

4

3

12

-0.7

-2.1

1.47

 

Σƒ = 16

Σƒx = 76

 

 

Σƒdx2=131.04


Mean (X̅ ) = `\frac{\Sigma fx}{\Sigma f}` = `\frac{76}16` = 4.7

σ=`\sqrt{\frac{\Sigma fdx^2}{\Sigma f}}`=`\sqrt{\frac{131.04}{16}}=\sqrt{8.19}=2.8`

(Shortcut Method)

X

ƒ

A = 4 (dx)

ƒdx

ƒdx2

2

3

-2

-6

12

4

2

0

0

0

8

1

4

4

16

10

3

6

18

108

3

4

-1

-4

4

4

3

0

0

0

 

Σƒ = 16

 

Σƒdx= -10+22=12

Σƒdx2 =140


(X̅ ) =`A+\frac{\Sigma fdx}{\Sigma f}`

`=4+\frac{12}{16}=3+\frac{3}{4}=4+0.7=4.7`

σ=`\sqrt{\frac{\Sigma fdx^2}{\Sigmaf}-(\frac{\Sigmafdx}{\Sigma f})^2`

=`\sqrt{\frac{\140}{\16}-(\frac{\12}{\16})^2`

=`\sqrt{8.75-(0.75)^2}=\sqrt{8.75-0.5625}=\sqrt{8.1875}=2.8`
विचरण मापांक (Variance) = `\sigma^2`= (2.8)2 = 7.84

प्रमाप विचलन का गुणांक(Coefficient of SD) =`\frac\sigma Ẍ`

=`\frac{2.8}4.7=0.59`

विचरण गुणांक(Coefficient of Variation) = `\frac\sigma Ẍ` × 100

=`\frac{2.8}4.7\times100= 59.5`

Continuous Series (Direct Method)

C.I

0-10

10-20

20-30

30-40

40-50

50-60

ƒ

1

2

1

2

2

2


C.I

ƒ

MV

x

ƒx

dv=33

dx

ƒdx

ƒdx2

0-10

1

5

5

-28

-28

784

10-20

2

15

30

-18

-36

648

20-30

1

25

25

-8

-8

64

30-40

2

35

70

2

4

8

40-50

2

45

90

12

24

288

50-60

2

55

110

22

44

968

 

Σƒ =10

 

Σƒx=330

 

 

Σƒdx2 =2760


Mean (X̅ ) = `\frac{\Sigma fx}{\Sigma f}` = `\frac{330}10` = 33

σ =`\sqrt{\frac{\Sigma fdx^2}{\Sigma f}}`=`\sqrt{\frac{2760}10}=\sqrt276=16.6`

(Shortcut Method)

C.I

ƒ

MV(x)

A=5(dx)

ƒdx

ƒdx2

0-10

1

5

0

0

0

10-20

2

15

10

20

200

20-30

1

25

20

20

400

30-40

2

35

30

60

1800

40-50

2

45

40

80

3200

50-60

2

55

50

100

5000

 

Σƒ = 10

 

 

Σƒdx=280

Σƒdx2=10600


σ=`\sqrt{\frac{\Sigma fdx^2}{\Sigmaf}-(\frac{\Sigmafdx}{\Sigma f})^2`=`\sqrt{\frac{\10600}{\10}-(\frac{\280}{\10})^2`

=`\sqrt{1060-(28)^2}=\sqrt{1060-784}=\sqrt{276}=16.6`

पद विचलन विधि ( Step Deviation Method)

C.I

ƒ

MV(x)

A=5(dx)

i=10(dx)'

ƒdx'

𝑓

0-10

1

5

0

0

0

0

10-20

2

15

10

1

2

2

20-30

1

25

20

2

2

4

30-40

2

35

30

3

6

18

40-50

2

45

40

4

8

32

50-60

2

55

50

5

10

50

 

Σƒ = 10

 

 

 

ΣƒdxI = 28

Σ𝑓 =106


σ = `\sqrt{\frac{\Sigma fdx^{I^2}}{\Sigma f}-(\frac{\Sigma fdx^I}{\Sigma f})^2` x i

=`\sqrt{\frac{\106}{\10}-(\frac{\28}{\10})^2` x 10

`=\sqrt{10.6-(2.8)^2}\times10`

`=\sqrt{10.6-7.84}\times10`

`=\sqrt{2.76}\times10=1.6\times10=16.6`

अपकिरण के मापों का संम्बन्ध (Relationship among Measures of Dispersion)

(1) चतुर्थक विचलन (Q.D) प्रमाप विचलन(S.D) का 0.6745 गुणन अथवा `\frac{2}{3}`होता है             

  Q.D = `\frac{2}{3}`σ          अथवा              σ = `\frac{3}{2}`Q.D

(2) माध्य विचलन(M.D) प्रमाप विचलन(S.D) का 0.7979 गुणा अथवा `\frac{4}{5}`होता है।

     δ = `\frac{4}{5}`σ               अथवा              σ = `\frac{5}{4}`δ

(3) चतुर्थक विचलन (Q.D) माध्य विचलन(M.D) का होता है।

     Q.D = `\frac{5}{6}`δ           अथवा             δ = `\frac{6}{5}` Q.D

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