7. सहसंबंध COR-RELATION
पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर
Q. 1. कद (फुटों में) तथा वजन (किलोग्राम में)
के बीच सहसंबंध गुणांक की इकाई है।
(a) कि.ग्रा./फुट
(b)
प्रतिशत
(c)
अविद्यमान
Ans. (c) अविद्यमान
Q. 2. सरल सहसंबंध गुणांक का परास निम्नलिखित
होगा-
(a) 0 से अनंत तक
(b) -1 से +1 तक
(c) ऋणात्मक अनंत (infinity) से घनात्मक, अनंत
(infinity) तक
Ans. (b)-1 से +1 तक
Q. 3. यदि rxy धनात्मक है तो x और y के बीच का संबंध इस प्रकार का होता है:
(a) जब y बढ़ता है तो x
बढ़ता है।
(b) जब y घटता है तो x
बढ़ता है।
(c) जब y बढ़ता है तो x
नहीं बदलता है।
Ans. (a) जब y बढ़ता है तो
x बढ़ता है।
Q. 4. चदि rxy
= 0 तब चर x और y के बीच
(a) रेखीय संबंध होगा
(b) रेखीय संबंध नहीं होगा
(c) स्वतंत्र होगा
Ans. (c) स्वतंत्र होगा
Q. 5. निम्नलिखित तीनों मापों में, कौन-सा माप किसी भी प्रकार
के संबंध की माप कर सकता?
(a) कार्ल पियरसन सहसंबंध गुणांक
(b) स्पीयरमैन का कोटि सहसंबंध
(c) प्रकीर्ण आरेख
Ans. (a) कार्ल पियरसन सहसंबंध गुणांक
Q.6. यदि परिशुद्ध रूप से मापित आँकड़े उपलब्ध हों, तो सरल सहसंबंध गुणांक
:
(a)
कोटि सहसंबंध गुणांक से अधिक सही होता है।
(b)
कोटि सहसंबंध गुणांक से कम सही होता है।
(c)
कोटि सहसंबंध की ही भाँति सही होता है।
Ans.
(c) कोटि सहसंबंध की ही भाँति सही होता है।
Q. 7. साहचर्य के माप के लिए r को सहप्रसरण से अधिक प्राथमिकता क्यों
दी जाती है?
Ans.
दो चरों के मध्य सहप्रसरण के चिह्न से ही सहसम्बन्ध-गुणांक का चिह्न तय होता है, जबकि मानक विचलन हमेशा धनात्मक
होता है। यदि सहप्रसरण शून्य होता है तो सहसम्बन्ध गुणांक भी शून्य होता है।
Q. 8. क्या आँकड़ों के प्रकार के आधार पर r,- 1 तथा +1 के
बाहर स्थित हो सकता है?
Ans.
सहसम्बन्ध गुणांक का मूल्य हमेशा -1 तथा +1 की न्यूनतम एवं अधिकतम सीमाओं के बीच रहता
है। अतः r का मान -1 एवं +1 की सीमाओं से बाहर नहीं हो सकता है।
Q. 9. क्या सहसम्बन्ध के द्वारा कार्यकारण सम्बन्ध की जानकारी मिलती
है?
Ans.
नहीं, सहसम्बन्ध के द्वारा कार्यकारण सम्बन्ध की जानकारी नहीं मिलती है। सहसम्बन्ध
से केवल दो चरों
के मध्य सम्बन्ध की तीव्रता एवं दिशा की ही जानकारी मिलती है।
Q. 10. सरल सहसम्बन्ध गुणांक की तुलना में कोटि सहसम्बन्ध गुणांक कब
अधिक परिशुद्ध होता है?
Ans.
कार्ल पियरसन सहसम्बन्ध गुणांक एवं स्पीयरमैन कोटि सहसम्बन्ध दोनों ही दो चरों के मध्य
रेखीय सम्बन्ध को मापते हैं। लेकिन जब चर संख्यात्मक रूप में नहीं मापे जा सकते हैं
तो इस स्थिति में सरल सहसम्बन्ध की तुलना में कोटि सहसम्बन्ध का प्रयोग ज्यादा अर्थपूर्ण
होता है।
Q. 11. क्या शून्य सहसम्बन्ध का अर्थ स्वतंत्रता है?
Ans.
जब सहसम्बन्ध शून्य होता है तो इसका अभिप्राय दो चरों के मध्य रेखीय सम्बन्ध की अनुपस्थिति
होती है। लेकिन कोई दूसरी प्रकार का सम्बन्ध हो सकता है। इस प्रकार शून्य सहसम्बन्ध
का अर्थ सदैव स्वतंत्रता नहीं है। यह हो भी सकती है और नहीं भी।
Q. 12. क्या सरल सहसम्बन्ध गुणांक किसी भी प्रकार के सम्बन्ध को माप
सकता है?
Ans.
हाँ, सरल सहसम्बन्ध गुणांक दो चरों के मध्य रेखीय सम्बन्ध की तीव्रता एवं दिशा का मापता
है। सहसम्बन्ध के चिह के माध्यम से दोनों चरों के सम्बन्ध की प्रकृति का पता चलता है।
Q. 13. एक सप्ताह तक अपने स्थानीय बाजार से 5 प्रकार की सब्जियों की
कीमतें प्रतिदिन एकत्र करें। उनका सहसम्बन्ध गुणांक परिकलित कीजिए। इसके परिणाम की
व्याख्या कीजिए।
Ans.
स्वयं करें।
Q. 14. अपनी कक्षा के सहपाठियों के मद मापिए। उनसे उनके बेंच पर बैठे
सहपाठी का कद पूछिए। इन दो चरों का सहसम्बन्ध गुणांक परिकलित कीजिए और परिणाम का निर्वचन
कीजिए।
Ans.
स्वयं करें।
Q. 15. कुछ ऐसे चरों की सूची बनाएँ जिनका परिशुद्ध मापन कठिन हो।
Ans.
ऐसे चर जिनका परिशुद्ध मापन कठिन है वे हैं-
(1)
तापमान एवं पहाड़ी क्षेत्रों पर जाने वाले पर्यटक।
(2)
तापमान एवं आइसक्रीम की बिक्री।
(3)
पिता एवं पुत्र का कद आदि।
Q. 16. r के विभिन्न मानों +1,-1 तथा 0 की व्याख्या करें।
Ans.
जब r का मान +1 अथवा -1 होता है तो दो चरों के मध्य पूर्ण रेखीय सम्बन्ध होता है। उनके
बीच, सम्बन्ध एकदम सही होता है। यदि r= +1 है तो दो चरों में पूर्ण धनात्मक सम्बन्ध
होता है। यदि r=-1 होता है तो दो चरों में पूर्ण धनात्मक सम्बन्ध है। अर्थात् पूर्ण
विपरीत सम्बन्ध है।
जब
r= 0 तो दो चरों में सहप्रसरण का अभाव होता है। उनमें रेखीय सम्बन्ध के अलावा किसी
दूसरे प्रकार का सम्बन्ध हो सकता है।
Q. 17. पियरसन सहसम्बन्ध गुणांक से कोटि सहसम्बन्ध गुणांक क्यों भिन्न
होता है?
Ans.
साधारणतः पियरसन सहसम्बन्ध गुणांक एवं कोटि सहसम्बन गुणांक की विशेषताएँ एक जैसी होती
हैं। दोनों के मामलों में सहसम्बन्ध गुणांक का मान -1 तथा +1 के बीच में ही होता है। लेकिन कोटि सहसंबंध गुणांक, पियरसन गुणांक की तरह सही
नहीं होता है। कोटि सहसंबंध में सभी सूचनाओं का प्रयोग किया जाता है। सामान्यतः ρ,
r की तुलना में समान अथवा कम होता
है क्योंकि कोटि सहसंबंध में चर मूल्यों के बजाए कोटियों का प्रयोग किया जाता है। पियरसन
सहसंबंध गुणांक चरों के चरम मूल्यों से भी प्रभावित होता है।
Q. 18. पिताओं (x) और उनके पुत्रों (y)
के कदों का माप नीचे इंचों में दिया गया है, इन दोनों के बीच सहसंबंध गुणांक को परिकलित
कीजिए ।
|
x |
y |
|
65 |
67 |
|
66 |
56 |
|
57 |
65 |
|
67 |
68 |
|
68 |
72 |
|
69 |
72 |
|
70 |
69 |
|
72 |
71 |
Ans.
|
x पिता की ऊँचाई |
y पुत्रों की ऊँचाई |
xy |
x2 |
y2 |
|
65 |
67 |
4355 |
4225 |
4489 |
|
66 |
56 |
3696 |
4356 |
3136 |
|
57 |
65 |
3705 |
3249 |
4225 |
|
67 |
68 |
4556 |
4489 |
4624 |
|
68 |
72 |
4896 |
4624 |
5184 |
|
69 |
72 |
4968 |
4761 |
5184 |
|
70 |
69 |
4830 |
4900 |
4761 |
|
72 |
71 |
5112 |
5184 |
5041 |
|
Σx=534 |
Σy=540 |
Σxy=36118 |
Σx2=35788 |
Σy2=36644 |
⸫ r =0.44
Q. 19.x और y के बीच सहसंबंध गुणांक को परिकलित कीजिए और उनके संबंध
पर टिप्पणी कीजिए ।
|
x |
y |
|
-3 |
9 |
|
-2 |
4 |
|
-1 |
1 |
|
1 |
1 |
|
2 |
4 |
|
3 |
9 |
Ans.
|
x |
y |
xy |
x2 |
y2 |
|
-3 |
9 |
-27 |
9 |
81 |
|
-2 |
4 |
-8 |
4 |
16 |
|
-1 |
1 |
-1 |
1 |
1 |
|
1 |
1 |
1 |
1 |
1 |
|
2 |
4 |
8 |
4 |
16 |
|
3 |
9 |
27 |
9 |
81 |
|
Σx=0 |
Σy=28 |
Σxy=0 |
Σx2=28 |
Σy2=196 |
`r=\frac{\Sigma xy-\frac{\Sigma x\Sigma y}n}{\sqrt{\Sigma x^2-\frac{\left(\Sigma x\right)^2}n}\sqrt{\Sigma y^2-\frac{\left(\Sigma y\right)^2}n}}`
`r=\frac{0-\frac{0\times28}6}{\sqrt{28-\frac{\left(0\right)^2}6}\sqrt{196-\frac{\left(28\right)^2}6}}`
`r=\frac{0-0}{\sqrt{28}\sqrt{196-\frac{784}6}}`
`r=\frac{0}{\sqrt{28}\sqrt{196-130.67}}`
`r=\frac{0}{\sqrt{28}\sqrt{65.33}}`
⸫ r =0
अतः x एवं y के बीच कोई संबंध नहीं है।
Q.20. x और y के बीच सहसंबंध गुणांक को परिकलित कीजिए और उनके संबंध
पर टिप्पणी कीजिए ।
|
x |
y |
|
1 |
2 |
|
3 |
6 |
|
4 |
8 |
|
5 |
10 |
|
7 |
14 |
|
8 |
16 |
Ans.
|
x |
y |
xy |
x2 |
y2 |
|
1 |
2 |
2 |
1 |
4 |
|
3 |
6 |
18 |
9 |
36 |
|
4 |
8 |
32 |
16 |
64 |
|
5 |
10 |
50 |
25 |
100 |
|
7 |
14 |
98 |
49 |
196 |
|
8 |
16 |
128 |
64 |
256 |
|
Σx=28 |
Σy=56 |
Σxy=328 |
Σx2=164 |
Σy2=656 |
`r=\frac{\Sigma xy-\frac{\Sigma x\Sigma y}n}{\sqrt{\Sigma x^2-\frac{\left(\Sigma x\right)^2}n}\sqrt{\Sigma y^2-\frac{\left(\Sigma y\right)^2}n}}`
`r=\frac{328-\frac{28\times56}6}{\sqrt{164-\frac{\left(28\right)^2}6}\sqrt{656-\frac{\left(56\right)^2}6}}`
`r=\frac{328-\frac{1568}6}{\sqrt{164-\frac{784}6}\sqrt{656-\frac{3136}6}}`
`r=\frac{328-261.33}{\sqrt{164-130.67}\sqrt{656-522.67}}`
`r=\frac{66.67}{\sqrt{33.33}\sqrt{133.33}}`
`r=\frac{66.67}{\left(5.77\right)\left(11.55\right)}`
`r=\frac{66.67}{66.64}`
⸫ r =1
अतः
x एवं y में पूर्ण धनात्मक सम्बन्ध है।
अन्य महत्त्वपर्ण परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
Q. 1. सह-सम्बन्ध को गणितीय तरीके से किसने प्रतिपादित
किया?
Ans. कार्ल पियर्सन।
Q. 2. यदि दो चर एक-दूसरे के प्रति एक दिशा में या विपरीत
दिशा में परिवर्तित होते हैं तो इसे क्या कहा जाता है?
Ans. सह-सम्बन्ध ।
Q. 3. यदि एक चर को बढ़ने पर दूसरे चर में भी वृद्धि होती
है तो उनमें सहसम्बन्ध धनात्मक होगा या ऋणात्मक ?
Ans. धनात्मक ।
Q. 4. यदि चरों में (r) का मूल्य +1 है तो यह सहसम्बन्ध
कैसा होगा?
Ans. पूर्ण धनात्मक।
Q. 5. यदि चरों में (r) का मूल्य +1 है तो यह सहसम्बन्ध
कैसा होगा?
Ans. पूर्ण ऋणात्मक।
Q. 6. धनात्मक सहसम्बन्ध का अर्थ बताएँ।
Ans. यदि दो चरों में परिवर्तन एक ही दिशा में होता है अर्थात् जब एक में
वृद्धि होती है तो दूसरा भी बढ़ता है और अगर एक में कमी होती है तो दूसरा भी घटता
है तो ऐसे सम्बन्धों को चरों का धनात्मक सम्बन्ध कहते हैं कीमत आपूर्ति में
धनात्मक सम्बन्ध होता है।
Q. 7. प्रतीपगमन का अर्थ लिखें।
Ans. प्रतीपगमन एक ऐसा सांख्यिकीय संयंत्र है जिसकी सहायता से
स्वतंत्र चर के किसी दिए गए मूल्य के अनुरूप आश्रित चर
(y) का अनुमानित मूल्य ज्ञात किया जा सकता है।
Q. 8. पूर्ण सहसंबंध को समझाइए ।
Ans. पूर्ण सहसंबंध वह है जिसमें दो चर मूल्यों में एक ही अनुपात
में परिवर्तन होता है। यह दो प्रकार का होता है-
(a) पूर्ण धनात्मक सहसंबंध- वह सहसंबंध पूर्ण धनात्मक होता है
जिसमें चरों में समान अनुपात में परिवर्तन एक ही दिशा में होता है। इस स्थिति में चरों
का सहसंबंध गुणांक (+1) होता है।
(b) पूर्ण ऋणात्मक सहसंबंध- वह सहसंबंध जो पूर्ण ऋणात्मक है
जिसमें चरों में समान विपरीत परिवर्तन एक ही दिशा में होता है। इस स्थिति में सहसंबंध
गुणांक (-1) होता है।
Q. 9. ऋणात्मक सहसंबंध की परिभाषा दें।
Ans. यदि दो चरों में परिवर्तन विपरीत दिशा में होता है तो इसे
ऋणात्मक सहसंबंध कहा जाता है। इस प्रकार के सहसंबंध में यदि एक चर बढ़ता है तो दूसरा
चर घटता है तथा इसके विपरीत कीमत और माँग में ऋणात्मक संबंध होता है।
Q. 10. सहसंबंध को ज्ञात करने की विधियों को संक्षेप
में लिखें।
Ans. चरों के सहसंबंधों को ज्ञात करने के लिए प्रमुख विधियाँ
निम्नलिखित है-
1. विपेक्ष बिन्दु चित्र विधि।
2. कार्ल पियरसन की सहसंबंध गुणांक विधि।
3. स्पियरमैन का कोटि सहसंबंध गुणांक।
Q. 11. यदि कोटि सहसंबंध में किसी चर की पुनरावृत्ति
होती है तो प्रत्येक मूल्य औसत कोटि प्रदान करते हैं या नहीं ?
Ans. हाँ, औसत के आधार पर कोटि प्रदान की जाती है।
Q. 12. सहसंबंध किसे कहते हैं ?
Ans. दो या दो से अधिक चरों के सह-परिवर्तनों के विश्लेषण को
प्रायः सहसंबंध कहा जाता है।
Q. 13. सहसंबंध गुणांक का माप सदा किन दो छोरों
के बीच रहता है ?
Ans. (+1) तथा (-1).
Q. 14. धनात्मक तथा ऋणात्मक सहसंबंध में क्या अन्तर है ?
Ans. धनात्मक में दो मदों में परिवर्तन एक ही दिशा में होता
है। इसके विपरीत ऋणात्मक सहसंबंध में दो मदों में परिवर्तन विपरीत दिशाओं में होता
है।
Q. 15. सहसंबंध के कितने भेद हैं ?
Ans. (1) धनात्मक, ऋणात्मक।
(2) समरेखीय, वक्रीय रेखा।
(3) सरल, आंशिक बहुमुखी ।
Q. 16. सहसंबंध गुणांक सदैव +1 तथा 1 के मध्य
स्थित होता है। इस विशेषता को गणितीय रूप में आप कैसे व्यक्त करेंगे ?
Ans. We know
that
`\Sigma\left(\frac x{\sigma x}+\frac y{\sigma y}\right)^2\geq0`
`or,\Sigma\left(\frac{x^2}{\sigma x^2}+2\frac x{\sigma x}.\frac y{\sigma y}+\frac{y^2}{\sigma y^2}\right)\geq0`
`or,\left(\frac{\Sigma x^2}{\sigma x^2}+\frac{2\Sigma xy}{\sigma x\sigma y}+\frac{\Sigma y^2}{\sigma y^2}\right)\geq0`
`or,\left(n+2nr+n\right)\geq0`
`or,\left(2n+2nr\right)\geq0`
`or,2n\left(1+r\right)\geq0`
`or,1+r\geq\frac0{2n}`
`or,1+r\geq0`
`or,r\geq-1`
Again
`\Sigma\left(\frac x{\sigma x}-\frac y{\sigma y}\right)^2\leq0`
`or,\Sigma\left(\frac{x^2}{\sigma x^2}-2\frac x{\sigma x}.\frac y{\sigma y}+\frac{y^2}{\sigma y^2}\right)\leq0`
`or,\left(\frac{\Sigma x^2}{\sigma x^2}-\frac{2\Sigma xy}{\sigma x\sigma y}+\frac{\Sigma y^2}{\sigma y^2}\right)\leq0`
`or,\left(n-2nr+n\right)\leq0`
`or,\left(2n-2nr\right)\leq0`
`or,2n\left(1-r\right)\leq0`
`or,1-r\leq\frac0{2n}`
`or,1-r\leq0`
`or,-r\leq-1`
`or,r\leq1`
सहसंबंध गुणांक सदैव +1 तथा 1 के मध्य स्थित होता है।
Q. 17. जब दो चरों में एक ही दिशा में परिवर्तन होता है तो इन घरों
में सहसंबंध की कैसी प्रकृति होगी ?
Ans.
धनात्मक ।
Q. 18. विक्षेप चित्र का मुख्य दोष क्या है ?
Ans.
विक्षेप चित्र सहसंबंध की मात्रा का संख्यात्मक माप नहीं देती।
Q. 19. कोटि सहसंबंध गुणांक का प्रतिपादन किसने किया ?
Ans.
स्पीयरमैन ने।
Q. 20. कार्ल पियर्सन का सहसंबंध मापने का क्या सूत्र है ?
`r=\frac{\Sigma xy}{\sqrt{\Sigma x^2\times\Sigma y^2}}`
अथवा
`r=\frac{\Sigma xy}{\sqrt{Nx_x\times\sigma_y}}`
Q. 21. सहसंबंध गुणांक का एक दोष बताएँ ।
Ans. सहसंबंध गुणांक का एक दोष है कि यह कारण की दिशा नहीं बताता, जैसे
यह नहीं बताता कि X में परिवर्तन का कारण Y है या X में परिवर्तन का कारण X है।
Q. 22. वक्र-रेखीय सहसंबंध की परिभाषा बताएँ ।
Ans. यदि दो चरों के परिवर्तन का अनुपात असमान एवं अस्थायी होता है
तो इसे अरेखीय या वक्रीय रेखा सहसंबंध कहते हैं। इस संबंध को एक सरल रेखा के रूप में
नहीं दर्शाया जा सकता है।
Q. 23. सरल सहसंबंध का अर्थ बतायें ।
Ans. यदि केवल दो चरों के संबंधों का ही अध्ययन किया जाता है और इन
दोनों में एक स्वतंत्र तथा दूसरा आश्रित चर होता है तो ऐसे सहसंबंध को सरल सहसंबंध
कहते हैं, जैसे-आय और व्यय में सरल सहसंबंध है। आय स्वतंत्र तथा व्यय आश्रित चर है।
Q. 24. बहुमुखी सहसंबंध का आशय स्पष्ट करें।
Ans. यदि तीन या तीन से अधिक चरों के संबंधों का एक साथ अध्ययन किया
जाए तो ऐसे संबंधों को बहुमुखी सहसंबंध कहते हैं। ऐसे सहसंबंध में स्वतंत्र और निर्भर
दोनों प्रकार का लम्मिलित अध्ययन होता है जैसे प्रति हेक्टेयर गेहूँ की उपज के संबंध
में बीज, वर्षा, खाद, पानी, कीटनाशक आदि के प्रभावों का इकट्ठा अध्ययन किया जाता है।
Q. 25. सहसंबंध की अनुपस्थिति को समझाइए ।
Ans. यदि दो चरों में कोई संबंध नहीं पाया जाये अर्थात् एक में होने
वाले परिवर्तन का दूसरों पर कोई प्रभाव नहीं पड़े तो उन श्रृंखलाओं या चरों में सहसंबंध
का अभाव पाया जाता है या शून्य सहसंबंध होता है।
Q. 26. गुणन आघूर्ण सहसंबंध का अर्थ बताइए ।
Ans. यदि दो चरों x तथा y के बीच एक मौखिक संबंध है तो हम उनके बीच
के साहचर्य की कोटि को कार्ल पियरसन के सहसंबंध गुणांक द्वारा संख्यात्मक रूप से माप
सकते हैं। इसे गुणन-आघूर्ण सहसंबंध भी कहते हैं।
Q. 27. गुणन-आघूर्ण सहसंबंध का सूत्र लिखिए।
Ans. गुणन-आघूर्ण सहसंबंध
`r=\frac{\Sigma xy}{\sqrt{Nx_x\times\sigma_y}}`
or,`r=\frac{\Sigma xy-\frac{\Sigma x\Sigma y}n}{\sqrt{\Sigma x^2-\frac{\left(\Sigma x\right)^2}n}\sqrt{\Sigma y^2-\frac{\left(\Sigma y\right)^2}n}}`
Q. 28. प्रत्यक्ष विधि द्वारा सहसंबंध का सूत्र बताइए ।
Ars. प्रत्यक्ष विधि `r=\frac{\Sigma\left(x-\overline x\right)\left(y-\overline y\right)}{\sqrt{\Sigma\left(x-\overline x\right)^2\left(y-\overline y\right)^2}}`
Q. 29. पद विचलन विधि द्वारा सहसंबंध का सूत्र बताओ ।
Ans. पद विचलन विधि ;
`r=\frac{N\times\Sigma dxdy-\left(\Sigma dx\Sigma dy\right)}{\sqrt{\left[N\times\Sigma dx^2-\left(\Sigma dx\right)^2\right]\left[N\times\Sigma dy^2-\left(\Sigma dy\right)^2\right]}}`
Q. 30. स्पियरमैन का कोटि सहसंबंध का सूत्र बताओ ।
Ans. स्पियरमैन
का कोटि सहसंबंध
`\rho=1-\frac{6\Sigma d^2}{N(N^2-1)}`
लघु उत्तरीय प्रश्न
Q. 1. कार्ल पिवर्सन के सहसंबंध गुणक के मुख्य लक्षण बतायें
।
Ans. कार्ल पियर्सन के सहसंबंध गुणक के प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं-
1. सह-विचरण का अच्छा माप- यह गुणक श्रेणी के सभी पदों पर आधारित है और सभी को
महत्त्व प्रदान करता है, इसलिए सह-बिचरण (Co-variation) का एक अच्छा माप है।
2. +1 और -1 के बीच- यह संबंध गुणक सदैव +1 और -1 के बीच रहता
है। +1 पूर्ण धनात्मक सहसंबंध और -1 पूर्ण ऋणात्मक सहसंबंध प्रकट करता है। धन का चिन्ह
धनात्मक सहसंबंध और ऋण का चिन्ह ऋणात्मक सहसंबंध प्रकट करता है। सहसंबंध गुणक जब
शून्य हो तो कोई रेखीय सहसंबंध नहीं होता।
3. आवृत्ति को महत्त्व- यह गुणक समंक श्रेणियों की दिशाओं (+ और) के साथ-साथ
उनकी आवृत्ति को भी महत्त्व देता है अर्थात् प्रत्येक मूल्य के विचरण की मात्रा को
ध्यान में रखता है।
4. कार्य-कारण संबंध नहीं बताता - यह गुणक सहसंबंध बताता है परन्तु
इस विषय पर कुछ भी प्रकाश नहीं डालता कि श्रेणियों के बीच कार्य-कारण संबंध है या
नहीं।
5. संगणना कठिन- इस गुणक को निकालना कठिन है क्योंकि इसको वही निकाल सकता है
जिसे गणित का सामान्य ज्ञान है।
6. परिणाम के निर्वचन की आवश्यकता- इसके परिणाम अगर यों ही लिख दिए जाएँ तो
जन-सामान्य के लिए इसे समझना कठिन है। इस परिणाम को ऐसे सरल शब्दों में प्रकट करने
की आवश्यकता पड़ती है जो सर्वसाधारण की समझ में सरलता से आ जाए।
Q. 2. कार्ल पियर्सन के सहसंबंध गुणक की परिकल्पनाएँ बताइए
।
Ans. कार्ल पियर्सन के सहसंबंध गुणक की परिकल्पनाएँ-कार्ल पियर्सन का सहसंबंध
गुणक निम्नलिखित परिकल्पनाओं पर आधारित है-
(1) जो समंकमालाएँ सह-संबंधित होती हैं उन्हें अनेक स्वतंत्र कारण प्रभावित
करते हैं और फलस्वरूप अंक बंटन सामान्यता (normality) और संभावित (Probability)
होती है।
(2) समंकमाला को प्रभावित करने वाले स्वतंत्र कारणों में आपस में कारण एवं
प्रभाव का संबंध (cause and effect) होता है।
(3) दोनों श्रेणियों में रेखीय (linear) संबंध होता है।
Q.3. कार्ल पियर्सन सहसंबंध के मापन की प्रत्यक्ष विधि
कौन-सी है ?
Ans. प्रत्यक्ष रीति (Direct Method)- इस सहसंबंध गुणक को निकालने
की विधि इस प्रकार है-
(1) दोनों श्रेणियों का समान्तर माध्य निकाल लेते हैं।
(2) समान्तर माध्य में दोनों श्रेणियों के पदों का अलग-अलग विचलन
निकाल लेते हैं। पहले श्रेणी के विचलन को सामान्यतः dx और दूसरी श्रेणी के विचलन को
dy कहते हैं।
(3) दोनों श्रेणियों के पदों के आमने-सामने के विचलनों को गुणा
करके उन सबका योग (dxdy) प्राप्त कर लेते हैं।
(4) दोनों श्रेणियों का अलग-अलग प्रमाप विचलन (1 और 2) निकाल
लेते हैं। (5) अब दोनों श्रेणियों के विचलनों के गुणनफलों के योग (dxdy) में पदों की
संख्या, पहली श्रेणी के प्रमाप विचलन और दूसरी श्रेणी के प्रमाप विचलन के गुणनफल
(nσxσy) का भाग लेते हैं। प्राप्त भजनफल सहसंबंध गुणक होती है।
इसके लिए निम्न सूत्र प्रयोग में आता है- `r=\frac{\Sigma dxdy}{n\left(\sigma_1\times\sigma_2\right)}`
Q. 4. कार्ल पिवर्सन सहसंबंध गुणांक के गुण-दोष लिखिए ।
Ans. गुण - कार्ल पियर्सन सहसंबंध गुणांक के निम्न गुण हैं-
(1) यह गुणांक सहसंबंध का आदर्श माप माना जाता है क्योंकि यह समान्तर
माध्य और प्रमाप विचलन पर आधारित है।
(2) इससे सहसबंध की दिशा ज्ञात हो जाती है। गुणांक मे धन का चिन्ह
(+ sign) धनात्मक सहसंबंध का द्योतक है और ऋण का चिन्ह (- sign) ऋणात्मक सहसंबंध प्रदर्शित
करता है।
(3) इससे सहसंबंध की मात्रा का अंकात्मक माप प्राप्त हो जाता है। इस
गुणांक का माप सदा +1 और -1 के बीच रहता है। +1 होने पर पूर्ण धनात्मक और -1 होने पर
पूर्ण ऋणात्मक सहसंबंध पाया जाता है। गुणाक 0 होने पर सहसंबंध बिल्कुल नहीं होता। जैसे-जैसे
गुणांक का माप 0 से 1 की ओर बढ़ता जाता है सहसंबंध की मात्रा भी बढ़ती जाती है।
दोष- कार्ल पियर्सन सहसंबंध गुणांक के निम्न दोष हैं-
(1) सहसंबंध करते समय यह कल्पना की जाती है कि समंकमालाओं में रेखीय
संबंध हैं लेकिन व्यवहार में अधिकतर स्थितियाँ ऐसी होती हैं जिनमें यह कल्पना गलत सिद्ध
होती है।
(2) सहसंबंध गुणांक के निर्वचन में बहुत अधिक सावधानी की आवश्यकता है।
अन्यथा गलत और मिथ्या परिणामों पर पहुँचा जा सकता है।
(3) सीमान्त मूल्यों अर्थात् बहुत छोटे और बहुत बड़े मूल्यों का सहसंबंध
गुणांक पर अनुचित प्रभाव पड़ता है।
Q. 5. प्रकीर्ण आरेख का अर्थ बतायें। दो चरों तथा y के बीच संबंध बताने
में यह किस प्रकार सहायक होता है ?
Ans. यदि दो चरों के मूल्यों को ग्राफ पेपर पर दर्शाया जाए तो प्राप्त
बिन्दुओं से समुच्चय को प्रकीर्ण आरेख कहते हैं।
दो चरों x तथा y के बीच संबंध बताने में प्रकीर्ण आरेख निम्न प्रकार
सहायक होते हैं-
(i) यदि x तथा y का प्रकीर्ण आरेख धनात्मक ढाल वाली रेखा होती है तो
x तथा y में संबंध होता है।
(ii) यदि x तथा y का प्रकीर्ण आरेख ऋणात्मक ढाल वाली रेखा होती है तो
x तथा y में विपरीत संबंध होता है।
(iii) यदि प्रकीर्ण आरेख के बिन्दुओं की स्थिति अस्त-व्यस्त होती है
तो x तथा y में कोई संबंध नहीं माना जाता है।
(iv) यदि प्रकीर्ण आरेख x-अक्ष के समान्तर होता है तो x में परिवर्तन
का y पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
(v) यदि प्रकीर्ण आरेख y-अक्ष के समान्तर होगा तथा y में परिवर्तन का
पर कोई प्रभाव नहीं माना जायेगा।
Q.6. x तथा y के बीच किस प्रकार का संबंध है जब प्रकीर्ण आरेख पर सभी
बिन्दु-
(क) x-अक्ष के समान्तर एक सीधी रेखा के आस-पास एकत्रित हों ।
(ख) y-अक्ष के समान्तर एक सीधी रेखा के आस-पास एकत्रित हों।
(ग) ऊपर की ओर जाने वाली रेखा के आस-पास एकत्रित हों ।
(घ) नीचे की ओर जाने वाली रेखा के आस-पास एकत्रित हों ।
Ans. (क) यदि x तथा y प्रकीर्ण आरेख में सभी बिन्दु x-अक्ष के समान्तर
एक सीधी सरल रेखा के आस-पास एकत्रित होते हैं तो x में परिवर्तन का y पर कोई प्रभाव
नहीं होता है अर्थात् y का मान स्थिर रहता है।
(ख) यदि x तथा y के प्रकीर्ण आरेख में सभी बिन्दु y-अक्ष के समान्तर
एक सीधी सरल रेखा के आस-पास एकत्रित होते हैं तो y में परिवर्तन का x पर कोई प्रभाव
नहीं होता है अर्थात् x का मान स्थिर रहता है।
(ग) यदि x तथा y के प्रकीर्ण आरेख के सभी बिन्दु
ऊपर की ओर जाने वाली रेखा के आस-पास होते हैं तो प्रकीर्ण का ढाल घनात्मक होता है अतः x तथा y में सीधा
संबंध माना जायेगा अर्थात् x के बढ़ने पर y भी बढ़ेगा तथा x के घटने पर y भी
घटेगा।
(घ) यदि प्रकीर्ण आरेख के सभी बिन्दु नीचे की ओर जाने वाली
रेखा के आस-पास एकत्रित होते हैं तो प्रकीर्ण आरेख का ढाल ऋणात्मक होता है अतः x तथा y में विपरीत संबंध होगा, एक बढ़ने पर दूसरा घटेगा।
Q. 7. प्रकीर्ण आरेख के गुण व दोष बताइए ।
Ans. गुण-प्रकीर्ण आरेख के गुण इस प्रकार हैं-
1. प्रकीर्ण आरेख को रेखांकित करना आसान होता है।
2. दो चरों के बीच किस प्रकार का संबंध है, इसे बताने के
लिए यह एक पहला आसान कदम होता है।
3. यदि x तथा y के बीच रैखिक
संबंध होता है तो यह x के मूल्य में परिवर्तन के कारण y के मूल्य में हुए आनुपातिक
परिवर्तन का एक स्पष्ट चित्र प्रस्तुत करता है।
दोष-प्रकीर्ण आरेख के दोष इस प्रकार हैं-
1. प्रकीर्ण आरेख के द्वारा सहसंबंध की शक्ति या कोटि को
संख्यात्मक रूप से मापना संभव नहीं।
2. प्रकीर्ण आरेख कारण-कार्य संबंध की दिशा नहीं बताता है। यह नहीं बताता कि y के
कारण x में परिवर्तन होता है या x के कारण y में।
3. यदि चरों की संख्या दो से अधिक हो तो ग्राफ-पेपर पर
प्रकीर्ण आरेख बनाना संभव नहीं होता है।
Q. 8. स्पियरमैन के कोटि सहसंबंध की विभिन्न स्थितियाँ
बताइए ।
Ans. कोटि सहसंबंध के परिकलन के लिए निम्नलिखित स्थितियाँ
हो सकती हैं-
1. जब वास्तविक कोटियाँ दी गई हों।
2. यदि कोटियाँ नहीं दी गई हों, तो इन्हें वास्तविक मूल्यों
के द्वारा निकालते हैं।
3. यदि कोटियों की पुनरावृत्ति होती है अर्थात् जब दो या
तीन कोटियाँ बराबर हो जाती हैं तो उन्हें औसत कोटि प्रदान की जाती है।
Q. 9. स्पियरमैन के कोटि सहसंबंध को ज्ञात करने की
प्रक्रिया समझाइए ।
Ans. कोटि सहसंबंध के परिकलन में निम्नलिखित चरण होते हैं-
1. दोनों चरों को अवरोही या आरोही क्रम में कोटि प्रदान की
जाती है।
2. कोटियों के बीच अंतर निकालते हैं जहाँ प्रत्येक चर के
लिए D = R - R1 होती है।
3. सभी चरों की कोटियों में अंतर के वर्गों का योग करके ΣD2 निकालते हैं।
4. स्पियरमैन के कोटि सहसंबंध को निम्नलिखित सूत्र द्वारा
प्राप्त करते हैं-
`\rho=1-\frac{6\Sigma d^2}{N(N^2-1)}`
जहां N = व्यक्तियों की संख्या होती है।
Q. 10. प्रत्यक्ष विधि से सहसंबंध ज्ञात करने के चरण लिखें।
Ans. प्रगणना के पद :
1. `\overline x` व `\overline y` की गणना करते हैं।
2. x श्रेणी के पद `\overline x` से तथा y श्रेणी के पदों का `\overline y` से विचलन करते हैं।
3. विचलनों का वर्ग ज्ञात करते हैं व इन्हें क्रमशः dx2
तथा dy2 से दर्शाते हैं।
4. प्रत्येक dx व dy को आपस में गुणा करके गुणनफल को dxdy से
व्यक्त करते हैं।
5. dxdy के योग से Σdxdy प्राप्त करते हैं।
6. निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग करके सहसंबंध की गणना करते हैं-
`r=\frac{\Sigma dxdy}{\sqrt{\Sigma dx^2\Sigma dy^2}}`
Q. 11. सहसंबंध के सीमित परिमाणों को लिखिए ।
Ans. सहसंबंध के अभाव तथा पूर्ण सहसंबंध की स्थितियों के बीच
परिमाण का सहसंबंध होता है।
वास्तविक जीवन में आर्थिक, व्यावसायिक तथा सामाजिक क्षेत्रों में ज्यादातर सीमित
परिमाण में ही सहसंबंध मिलता है। इनका गुणांक 0 से अधिक तथा 1 से कम (>0 लेकिन
< 1) होता है। सीमित सहसंबंध को तीन वर्गों में बाँटते हैं-
1. उच्च सहसंबंध- यदि चरों के सहसंबंध की काफी मात्रा हो तो वह उच्च मात्रा का
सहसंबंध होता है। इसका गुणांक 0.75 तथा 1 के बीच में होता है।
2. मध्यम सहसंबंध- यदि दो चरों के बीच सहसंबंध की मात्रा न तो बहुत ज्यादा हो
और न ही बहुत कम हो तो इसका सहसंबंध गुणांक 0.25
तथा 0.75 के बीच होता है।
3. निम्न सहसंबंध - यदि दो चरों में कम अनुपात में सहसंबंध पाया जाता है
अर्थात् सहसंबंध गुणांक 0 तथा 0.25 के बीच में होता है।
उपरोक्त सभी सहसंबंध धनात्मक और ऋणात्मक हो सकते हैं।
सीमित सहसंबंध के परिमाण को निम्न तालिका द्वारा भी दर्शाया जा सकता है।
|
परिमाप |
धनात्मक |
ऋणात्मक |
|
उच्च |
+0.75
और + 1 के बीच |
-0.75
और -1 के बीच |
|
मध्य |
+
0.25 और +0.75 के बीच |
-0.
25 और -0.75 के बीच |
|
निम्न |
0
और + 0.25 |
0
और -0.25 के बीच |
Q. 12. सहसंबंध गुणांक के गुण और दोष बताइए ।
Ans. गुण-सहसंबंध गुणांक के गुण इस प्रकार हैं-
1. श्रेणी कोटि सहसंबंध विधि पियरसन के सहसंबंध गुणांक की अपेक्षा समझने में
आसान होती है।
2. यह विधि गुणात्मक चरों की अच्छाई, बुराई, बुद्धिमता, सुन्दरता व पवित्रता
आदि के संहसंबंधों की जानकारी प्राप्त करने के लिए उत्तम होती है।
3. इस विधि को उस स्थिति में भी आसानी से प्रयोग किया जा सकता है जब आँकड़ों
के स्थान पर केवल श्रेणियाँ दी गई हों तथा साधारण गुणात्मक श्रृंखलाओं के ढीले
सहसंबंध का अनुमान लगाने के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है।
दोष -सहसंबंध गुणांक के दोष इस प्रकार हैं-
1. समूह आवृत्ति आबंटन -अखंडित श्रृंखलाओं में इस विधि का प्रयोग नहीं हो सकता है।
2. जहाँ मदों की संख्या (N) 30 से ज्यादा हो जाती है तो इस विधि का प्रयोग
जटिल या कठिन हो जाता है, अतः इस विधि का प्रयाग 20 से अधिक मदों वाली श्रेणियों
के लिए करना उचित नहीं होता है।
Q. 13. सहसंबंध का महत्व लिखिए ।
Ans. सांख्यिकीय विधि के रूप में सहसंबंध का महत्व निम्नलिखित
है
1. कारण और परिणाम संबंध को जानने में मदद - सहसंबंध गुणांक
कई बार विभिन्न चरों में पाए जाने वाले कारण परिणाम संबंध को भी बता देता है। इससे
चरों के व्यवहारों को समझने में मदद मिलती है।
2. व्यापारिक निर्णय लेने में महत्व- सहसंबंध, विश्लेषण व्यापारिक
निर्णय लेने में मददगार है। एक चर में परिवर्तन होने की प्रवृत्ति द्वारा दूसरे चरों
में होने वाले अनुमानित परिवर्तन का अनुमान लगा कर व्यापारी व्यापारिक गतिविधियों की
दिशा व परिमाण का निर्णय करते हैं।
3. नियमों तथा धारणाओं का निर्माण करने में सहायक- सहसंबंध के
आधार पर चरों के पारस्परिक संबंध की दिशा तथा मात्रा का पता चलता है। इसके परिणामस्वरूप
अर्थशास्त्र के कई नियम तथा सिद्धान्त जैसे-माँग का नियम, माँग की लोच की पूर्ति का
नियम, पूर्ति की लोच का निर्माण संभव हो पाया है।
4. नीति निर्माण में सहायक सहसंबंध, नीति निर्माण में भी सहायक
होता है, जैसे यदि सरकार को करों की दर तथा करों के एकत्रीकरण में ऋणात्मक संबंध दिखाई
देता है तो सरकार करों की दर कम करने की नीति बना सकती है। करों की दर कम होने पर करों
की रकम के ज्यादा इकट्ठा होने की उम्मीद बढ़ जाती है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
Q. 1. सहसंबंध का क्या अर्थ है? सांख्यिकीय विश्लेषण
में इनकी महत्ता का विवेचन कीजिए ।
Ans. सहसंबंध का अर्थ- हम जानते हैं कि व्यवहार में दो या दो
से अधिक चरों का आपस में संबंध होता है। यदि किसी वस्तु का मूल्य बढ़ता है तो उनकी
माँग में कमी होती है। इसी प्रकार मूल्य कम होने से कुछ वस्तुओं की माँग बढ़ जाती है।
किसी वस्तु की बिक्री तथा विज्ञापन में भी आपस में संबंध पाया जाता है। सहसंबंध
विश्लेषण द्वारा दो या दो से अधिक श्रेणियों के बीच पारस्परिक संबंध ज्ञात किया जाता
है।
सहसंबंध की परिभाषा- प्रो. किंग के अनुसार, "दो श्रेणियों
अथवा समूहों के बीच कार्य-कारण सबंध को ही सहसंबंध कहते हैं।"
सहसंबंध की विशेषताएँ - सहसंबंध की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
(1) सहसंबंध एक तकनीक है जिसका दो या अधिक चरों के बीच पाए जाने
वाले संबंधों को मापने के लिए प्रयोग किया जाता है।
(2) सहसंबंध दो या अधिक चरों के बीच पारस्परिक संबंध की दिशा
बतलाता है। यदि दोनों चरों में एक ही दिशा में परिवर्तन होता है तो इसे धनात्मक सहसंबंध
कहते हैं। इसके विपरीत, इनमें विपरीत दिशा में परिवर्तन हो अर्थात् एक चर में वृद्धि
तथा दूसरे चर में कमी हो तो इसे ऋणात्मक सहसंबंध कहते हैं।
(3) सहसंबंध दो या अधिक चरों में 'पारस्परिक संबंधों की मात्रा'
भी बतलाता है।
(4) सहसंबंध दो या अधिक चरों के बीच 'कारण परिणाम' संबंध को
बतलाता है।
महत्ता-सहसंबंध का सांख्यिकीय में बहुत महत्त्व है-
(1) सहसंबंध द्वारा हम यह ज्ञात कर सकते हैं कि दो चरों में
संबंध है या नहीं और यदि है तो उसकी मात्रा तथा दिशा क्या है अर्थात् वह ऋणात्मक है
या धनात्मक।
(2) जब यह ज्ञात हो जाता है कि दो चर आपस में संबंधित हैं तो
एक चर के मूल्य के आधार पर दूसरी श्रेणी के सम्भावित चर-मूल्य का
विश्वसनीय अनुमान लगाया जा सकता है। सहसंबंध विश्लेषण पर आधारित अनुमान अधिक विश्वसनीय
और निश्चित होते हैं।
(3) प्रतिपगमन तथा विचरण अनुपात की धारणाएँ सहसंबंध सिद्धान्त
पर ही आधारित हैं।
(4) व्यावहारिक तथा सैद्धान्तिक उपयोगिता के कारण ही सहसंबंध
विश्लेषण का प्रयोग अन्य प्रकार के वैज्ञानिक अध्ययनों में बढ़ता जा रहा है।
(5) व्यावहारिक एवं व्यावसायिक क्षेत्र में सहसंबंध विश्लेषण
के आधार पर विभिन्न प्रकार के उत्पादन, विक्रय व अन्य प्रकार के निर्णय लिए जाते हैं।
Q. 2. सहसंबंध गुणांक की विशेषताओं का वर्णन करें।
Ans. सहसंबंध गुणांक की निम्नलिखित विशेषताएँ ध्यान देने योग्य
हैं-
(1) सहसंबंध गुणाक कभी -1 से कम तथा +1 से अधिक नहीं होता
-1 <r<+1.
(2) r का ऋणात्मक मूल्य दो चरों X तथा Y के बीच एक विलोम सबंध
दर्शाता है। X के मूल्य में वृद्धि के साथ Y के मूल्य में कमी होती है तथा X के मूल्य
में कमी के साथ Y के मूल्य में वृद्धि होती है। उदाहरण के लिए, किसी वस्तु की माँग की गई
मात्रा तथा उसकी कीमत में विपरीत संबंध है।
(3) यदि X के मूल्य में वृद्धि के साथ
Y के मूल्य में भी वृद्धि होती है तो r धनात्मक होगा। उदाहरण के लिए, आय तथा माँग की गई मात्रा में धनात्मक संबंध होता
है।
(4) यदि = 0 हो, तो दो चरों X तथा
Y के बीच कोई संबंध नहीं है। इस स्थिति में एक चर के मूल्य में परिवर्तन का दूसरे चर
के मूल्य में परिवर्तन से रैखिक सबंध नहीं है।
(5) यदि r = +1 अथवा r = -1 तो दो चरों
x तथा y के बीच पूर्ण रैखिक संबंध है
x तथा y के मध्य संबंध यथातथ्य है।
(6) r का ऊँचा मूल्य (+1 या -1 के निकट) X तथा Y के बीच निकट संबंध दर्शाता है।
(7) r का मूल्य यदि शून्य (0) के निकट हो (धनात्मक या ऋणात्मक) तो
यह X तथा Y के बीच कमजोर रैखिक संबंध दिखाता है।
(8) r का मूल्य 'उद्गम परिवर्तन' या 'स्केल परिवर्तन' से प्रभावित नहीं होता।
Q.3. सहसंबंध ज्ञात करने
की विक्षेप अथवा बिन्दु चित्र रीति का उल्लेख कीजिए ।
Ans. विक्षेप चित्र विधि - विक्षेप चित्र द्वारा दो समंकमालाओं में परस्पर सहसंबंध की दिशा
और मात्रा का अनुमान लगाया जा सकता है। इस रीति के अनुसार स्वतंत्र चर मूल्यों को बिन्दुरेखीय
पत्र के भुजाक्ष (x-axis) पर तथा तत्सम्बन्धी आश्रित चर मूल्यों को कोटि अक्ष
(y-axis) पर प्रांकित किया जाता है। एक पद के x-श्रेणी तथा y-श्रेणी के दो मूल्यों के लिए एक बिन्दु अंकित
किया जाता है। इस प्रकार जितने भी पद-युग्म होते हैं उतने ही बिन्दु रेखा-पत्र पर अंकित
हो जाते हैं और एक ऐसा चित्र बन जाता है जिसमें बिन्दुओं का समूह दिखाई देता है। ये
बिन्दु कई रूपों में बिखरे होते हैं। इन विभिन्न रूपों के आधार पर सहसंबंध की दिशा
एवं मात्रा का अनुमान लगाया जा सकता है। विक्षेप चित्रों के अध्ययन से अनुमान इस प्रकार
लगाए जाते हैं-
(1) यदि सभी बिन्दु बायीं ओर के निचले
कोने के दायीं ओर के ऊपर वाले कोने तक एक सरल व सीधी रेखा के रूप में प्रांकित हों
तो दोनों समंकमालाओं में पूर्ण धनात्मक सहसंबंध पाया जाता है जैसा कि रेखाचित्र-I से स्पष्ट होता है।
(2) जब सभी बिन्दु ऊपर से नीचे की ओर एक सीधी रेखा पर होते हैं तो चर मूल्यों में पूर्ण ऋणात्मक सहसंबंध पाया जाता है जैसा कि रेखाचित्र - II से स्पष्ट होता है।
(3)
जब बिन्दुओं से एक प्रवृत्ति दृष्टिगोचर होती है तथा वे निश्चित दिशा में जाने वाले
प्रवाह की भाँति होते हैं तो दोनों चर मूल्यों में सीमित सहसंबंध पाया जाता है। बिन्दु
जितने एक-दूसरे के निकट होंगे उतनी ही सहसंबंध की मात्रा अधिक होगी तथा वे जितने दूर
होते जाएँगे सहसंबंध की मात्रा उतनी हो कम होती जाएगी।
सीमित सहसंबंध धनात्मक हो सकता है या ऋणात्मक। जब बिन्दुओं
को उक्त धारा चित्र में बायीं ओर से दायीं ओर बढ़ती हैं तो सह-संबंध धनात्मक होता है,
जैसा कि रेखाचित्र III से विदित है। यदि बिन्दुओं का प्रवाह बायीं ओर से ऊपर वाले कोने
से दायीं ओर के निचले कोने की और घटता जाता है तो सहसंबंध ऋणात्मक होता जाता है, जैसा
कि रेखाचित्र IV से स्पष्ट है।
रेखाचित्र V और VI भी सीमित सहसंबंध को प्रदर्शित करते हैं
लेकिन यहाँ सहसंबंध की मात्रा रेखाचित्र III और IV से कम है क्योंकि बिन्दु रेखाचित्र
III और IV की अपेक्षा अधिक दूर तक फैले हुए हैं।
(4)
जब विक्षेप रेखाचित्र पर बिन्दु चारों ओर बिखरे हों तथा उनसे कोई निश्चित प्रवृत्ति
स्पष्ट न होती हो तो ऐसी परिस्थिति में सहसंबंध का अभाव होता है, जैसा चित्र VII से
स्पष्ट है।
Q. 4. कार्ल पियरसन का सहसंबंध ज्ञात करने की लघु विधि बताइये।
Ans.
इस विधि का प्रयोग उस समय उचित है जब समान्तर माध्य पूर्ण अंकों में न होकर दशमलव में
होता है। इस विधि में दोनों श्रृंखलाओं के कल्पित माध्य मान कर विचलन ज्ञात करते हैं।
लघु विधि द्वारा सहसंबंध गुणांक निम्नलिखित ढंग से ज्ञात करते हैं-
1.
x तथा y में किन्हीं उचित मूल्यों को उनका कल्पित माध्य Ax तथा Ay मानते हैं।
2.
दोनों श्रृंखलाओं के कल्पित माध्य से उनके चर मूल्यों के विचलन अर्थात् dx(x - A) तथा
dy(x - A) ज्ञात करते हैं।
3.
विचलनों का योग करके Σdx तथा Σdy
ज्ञात करते हैं।
4.
प्रत्येक dx से संबंधित dy को गुणा करके गुणनफलों (dxdy) का योग Σdxdy
ज्ञात करते हैं।
5.
विचलनों के वर्ग dx2 तथा dy2 ज्ञात करते हैं तथा उनका जोड़ Σdx2
तथा Σdy2 ज्ञात करते हैं।
6. सहसंबंध गुणांक ज्ञात करने के लिए निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग किया जाता है-
`r=\frac{\Sigma xy-\frac{\Sigma x\Sigma y}n}{\sqrt{\Sigma x^2-\frac{\left(\Sigma x\right)^2}n}\sqrt{\Sigma y^2-\frac{\left(\Sigma y\right)^2}n}}`
यहाँ पर,
dx = x श्रेणी के मदों का उसके कल्पित माध्य
से विचलन = (x - A)
dy = y श्रेणी के मदों का उसके कल्पित माध्य
से विचलन = (y - A)
Σdxdy = dx और dy के गुणनफल का योगफल
Σdx2= dx के वर्गों का योगफल
Σy2 = dy के वर्गों का योगफल
Σdx = x श्रृंखला के विचलनों का योगफल
Σdy = y श्रृंखला के विचलनों का योगफल
N = मदों की कुल संख्या
Q. 5. कार्ल पियर्सन का सहसंबंध गुणांक क्या है? इसके लक्षण लिखिए ।
Ans. कार्ल पियर्सन का सहसंबंध गुणांक दो चरों के मध्य सहसंबंध का परिणाम
ज्ञात करने के लिए व्यापक रूप से प्रयुक्त माप 'सहसंबंध गुणांक' है जिसका संकेताक्षर
'r' है। प्रसिद्ध संख्याशास्त्री कार्ल पियर्सन ने सहसंबंध ज्ञात करने के लिए एक सूत्र
का प्रतिपादन किया है। यह सूत्र इन्हीं के नाम से जाना जाता है तथा इसे 'पियर्सन का
सहसंबंध गुणांक' कहा जाता है। कार्ल पियर्सन द्वारा प्रतिपादित सहसंबंध का माप सूत्र
माध्य तथा प्रमाप विचलन पर आधारित है जो क्रमशः केन्द्रीय प्रवृत्ति तथा अपकिरण के
आदर्श माप हैं।
कार्ल पियर्सन के सहसंबंध की कल्पनाएँ कार्ल पियर्सन का सहसंबंध गुणांक
निम्नलिखित कल्पनाओं पर आधारित है-
1. सामान्यता- सह-संबंधित समंक श्रेणियों पर अनेक कारणों का प्रभाव
पड़ता है जिससे उनमें सामान्यता आ जाती है।
2. कार्य-कारण संबंध - श्रेणियों को प्रभावित करने वाले स्वतन्त्र कारणों
में परस्पर कारण और परिणाम का सम्बन्ध होता है। कार्य-कारण संबंध के अभाव में सहसंबंध
निरर्थक (nonsense correlation) होता है।
3. रेखीय प्रकृति - यह भी परिकल्पना की जाती है कि दोनों समंकमालाओं
में रेखीय संबंध है अर्थात् यदि दोनों पद-युग्मों को विन्दु-रेखीय पत्र पर प्रांकित
किया जाए तो बिन्दुचित्र में एक सरल रेखा (straight line) खींची जा सकती है।
कार्ल पियर्सन गुणांक के लक्षण - कार्ल पियर्सन गुणांक के निम्नलिखित
लक्षण हैं-
(1) यह गुणांक -1 और +1 सीमाओं के बीच रहता है। पूर्ण धनात्मक सहसंबंध
को +1 से तथा पूर्ण ऋणात्मक सहसंबंध को -1 से अंकित करते हैं। यदि सहसंबंध नहीं होता
है तो गुणांक, 0 (शून्य) होता है।
(2) यह गुणांक श्रेणी के सभी पदों को महत्त्व प्रदान करता है। अतः सह-विचरण का एक उत्तम माप है।
(3) यह गुणक श्रेणियों के अंकों की दिशाओं, धनात्मक (+) और ऋणात्मक
(-) के साथ-साथ उनकी प्रत्येक आकृति को भी महत्त्व प्रदान करता है।
(4) यह गुणांक दो श्रेणियों के बीच सहसंबंध की मात्रा अवश्य बतलाता
है, परन्तु वह यह स्पष्ट करने में असमर्थ रहता है कि उनमें कारण और प्रभाव का संबंध
है भी या नहीं।
व्यावहारिक प्रश्न
Q.1. निम्नलिखित आंकड़ों से विक्षेप चित्र बनाइए
|
Y |
3 |
6 |
9 |
12 |
15 |
18 |
|
X |
5 |
10 |
15 |
20 |
25 |
30 |
उत्तर :-
ऊपर के चित्र की सहायता से
X और Y मूल्यों
के बीच सह-सम्बन्ध को ज्ञात कर
सकते हैं। सभी अंकित बिंदु एक ही सरल रेखा में है,
इसका अर्थ है कि पूर्ण धनात्मक सह-सम्बन्ध
है।
Q. 2. निम्नलिखित आंकड़ों द्वारा
पत्नी तथा पति की आयु में सह-सम्बन्ध ज्ञात कीजिए
|
पति की आयु |
21 |
22 |
28 |
32 |
35 |
36 |
|
पत्नी की आयु |
18 |
20 |
25 |
30 |
31 |
32 |
प्रत्यक्ष रीति का प्रयोग उसी समय सरलता से किया जा सकता है, जबकि समान्तर माध्य पूर्ण अंक हो परन्तु जब माध्य दशमलव में आता है तो उससे विचलन निकालने और उन विचलनों का वर्ग करने आदि में बड़ी असुविधा होती है। इस असुविधा से बचने के लिए लघु रीति का प्रयोग किया जाता है।
2. लघु रीति
Q. 3. पिताओं (x) और उनके पुत्रों (y) के कदों का माप नीचे इंचों में
दिया गया है। इन दोनों के बीच सहसंबंध गुणांक को परिकलित कीजिए-
Q. 4. निम्न संमको से कार्ल पियर्सन
का सह-सम्बन्ध गुणांक ज्ञात कीजिए
|
X |
6 |
8 |
12 |
15 |
18 |
20 |
24 |
28 |
31 |
|
Y |
10 |
12 |
15 |
15 |
18 |
25 |
22 |
26 |
28 |
उत्तर :-
|
X |
Y |
A=6, dx |
A=15, dy |
dx2 |
dy2 |
dxdy |
|
6 |
10 |
0 |
-5 |
0 |
25 |
0 |
|
8 |
12 |
2 |
-3 |
4 |
9 |
-6 |
|
12 |
15 |
6 |
0 |
36 |
0 |
0 |
|
15 |
15 |
9 |
0 |
81 |
0 |
0 |
|
18 |
18 |
12 |
3 |
144 |
9 |
36 |
|
20 |
25 |
14 |
10 |
196 |
100 |
140 |
|
24 |
22 |
18 |
7 |
324 |
49 |
126 |
|
28 |
26 |
22 |
11 |
484 |
121 |
242 |
|
31 |
28 |
25 |
13 |
625 |
169 |
325 |
|
|
|
Σdx=108 |
Σdy=44-8=36 |
Σdx2=1894 |
Σdy2=482 |
Σdxdy=869-6=863 |
r = `\frac{863-432}{9\sqrt{210.4-(12)^2}\sqrt{53.5-(4)^2}}`
`r=\frac{431}{9\sqrt{210.4-144}\sqrt{53.5-16}}`
`r=\frac{431}{9\sqrt{66.4}\sqrt{37.5}}=\frac{431}{9\(8.14)\(6.12)}`
`r=\frac{431}{448.35}=0.96`
(यह उच्च सहसंबंध है।)
Q. 5. निम्न संमको
से रैंक सह-सम्बन्ध ज्ञात कीजिए
|
गणित में प्राप्तांक |
36 |
46 |
29 |
35 |
44 |
48 |
26 |
30 |
|
अर्थशास्त्र में प्राप्तांक |
20 |
50 |
30 |
40 |
60 |
55 |
29 |
42 |
उत्तर :-
|
X |
Y |
Rx |
Ry |
d (Rx
-Ry ) |
d2 |
|
36 |
20 |
4 |
8 |
-4 |
16 |
|
46 |
50 |
2 |
3 |
-1 |
1 |
|
29 |
30 |
7 |
6 |
1 |
1 |
|
35 |
40 |
5 |
5 |
0 |
0 |
|
44 |
60 |
3 |
1 |
2 |
4 |
|
48 |
55 |
1 |
2 |
-1 |
1 |
|
26 |
29 |
8 |
7 |
1 |
1 |
|
30 |
42 |
6 |
4 |
2 |
4 |
|
|
|
|
|
|
Σd2 =28 |
`\rho=1-\frac{6\Sigma d^2}{N(N^2-1)}` `=1-\frac{6(28)}{8(8^2-1)}`
`=1-\frac{168}{504}=1-0.33=0.67`
Q. 6. निम्न संमको
से रैंक सह-सम्बन्ध ज्ञात कीजिए
|
X |
1 |
2 |
3 |
2 |
3 |
4 |
3 |
2 |
|
Y |
4 |
3 |
2 |
4 |
5 |
6 |
2 |
3 |
उत्तर :-
|
X |
Rx |
Y |
Ry |
d (Rx -Ry ) |
d2 |
|
1 |
8 |
4 |
3.5 |
4.5 |
20.25 |
|
2 |
6 |
3 |
5.5 |
0.5 |
0.25 |
|
3 |
3 |
2 |
7.5 |
-4.5 |
20.25 |
|
2 |
6 |
4 |
3.5 |
2.5 |
6.25 |
|
3 |
3 |
5 |
2 |
1 |
1 |
|
4 |
1 |
6 |
1 |
0 |
0 |
|
3 |
3 |
2 |
7.5 |
-4.5 |
20.25 |
|
2 |
6 |
3 |
5.5 |
0.5 |
0.25 |
|
|
|
|
|
|
Σd2=68.50 |
m=3,m=3 m=2,m=2,m=2
`\[\rho=1-\frac{6\[68.50+\frac(1)12(24)+\frac(1)12(24)+\frac(1)12(6)+\frac(1)12(6)+\frac(1)12(6)]}{8(8^2-1)}\]`
`\rho=1-\frac{6(68.50+2+2+\frac(1)2+\frac(1)2+\frac(1)2)}{8(63)}`
`\rho=1-\frac{6(68.50+4+1.5)}{8(63)}`
`\rho=1-\frac{6(74)}{8(63)}=1-\frac{37}{42}=1-0.8=0.2`
Group -A सांख्यिकी के सिद्धान्त
JCERT/JAC REFERENCE BOOK
Group -A सांख्यिकी के सिद्धान्त
Group-B भारतीय अर्थव्यवस्था
JCERT/JAC प्रश्न बैंक - सह - उत्तर पुस्तक (Question Bank-Cum-Answer Book)
विषय सूची
क्र०स० | अध्याय का नाम |
अर्थशास्त्र में सांख्यिकी | |
1. | |
2. | |
3. | |
4. | |
5. | |
6. | |
7. | |
8. | |
भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास | |
1. | |
2. | |
3. | |
4. | |
5. | |
6. | |
7. | |
8. | |
Economics Group-A
Objective Question
Most Important Group-B
Economics Group-B
स्वतंत्रता की पूर्व संध्या पर भारतीय अर्थव्यवस्था की दशा (Indian Economy on the Eve of Independence)
भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy)
5.भारत में मानव पूँजी का निर्माण (Creation of Human Capital in India)
6. ग्रामीण विकास (Rural Development )
7. रोजगार-संवृद्धि, अनौपचारीकरण एवं अन्य मुद्दे(Employment Growth, Informalization and Other Issues)
8. आधारिक संरचना (Infrastructur)
9. पर्यावरण और धारणीय विकास (Environment and Sustainable Development)
Objective Question








