5. केन्द्रीय प्रवृत्ति की माप MEASUREMENT OF CENTRAL TENDENCY
पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर
Q. 1. निम्नलिखित
स्थितयों में कौन-सा औसत उपयुक्त होगा?
(a) तैयार वस्त्रों के औसत आकार।
Ans. बहुलक ।
(b) एक कक्षा में छात्रों की औसत बौद्धिक प्रतिभा।
Ans. माध्यिका
।
(c) एक कारखानों में प्रति पाली औसत उत्पादन।
Ans. बहुलक या
समातर माध्य।
(d) एक कारखाने में औसत मजदूरी।
Ans. बहुलक या
समांतर माध्य।
(e) जब औसत से निरपेक्ष विचलनों का योग न्यूनतम हो।
Ans. समांतर
माध्य।
(f) जब चरों की मात्रा अनुपात में हो।
Ans. माध्यिका
।
(g) मुक्तांत बारम्बारता बंटन के मामले में।
Ans. माध्यिका
।
Q. 2. प्रत्येक
प्रश्न के सामने दिए गए बहु विकल्पों में से सर्वाधिक उचित विकल्प को
चिह्नित करें :
1. गुणात्मक मापन के लिए सर्वाधिक उपयुक्त औसत है :
(a) समांतर माध्य
(b) माध्यिका
(c) बहुलक
(d) ज्यामितीय
माध्य
(e) उपर्युक्त
में से कोई नहीं
2. चरम पदों की उपस्थित से कौन-सा औसत सर्वाधिक प्रभावित होता है :
(a) माध्यिका
(b) बहुलक
(c) समांतर माध्य
(d) ज्यामितीय
माध्य
(e) हरात्मक
माध्य
3. समांतर माध्य से मूल्यों के किसी समुच्चय के विचलन का बीजगणितीय योग है-
(a) द
(b) 0
(c) 1
(d) उपर्युक्त
में से कोई नहीं
Q. 3. बताइए
कि निम्नलिखित कथन सही हैं या गलत-
(क) माध्यिका से मदों के विलचनों का योग शून्य होता है।
Ans. गलत ।
(ख) श्रृंखलाओं की तुलना के लिए सान्द्र औसत ही पर्याप्त नहीं है।
Ans. सही।
(ग) समांतर माध्य एक स्थैतिक मूल्य है।
Ans. गलत
(घ) उच्च चतुर्थक शीर्ष 25 प्रतिशत मदों का निम्नतम मान है।
Ans. सही
(ङ) माध्यिका चरम प्रेक्षणों द्वारा अनुचित रूप से प्रभावित होती है।
Ans. गलत
Q.4. यदि नीचे दिए गए आँकड़ों का समांतर माध्य 28 है, तो (क) लुप्त आवृत्ति
का पता करें और (ख) श्रृंखला की माध्यिका ज्ञात करें।
|
प्रति खुदरा दुकान लाभ (रु. में) |
खुदरा दुकानों की संख्या |
|
0-10 |
12 |
|
10-20 |
18 |
|
20-30 |
27 |
|
30-40 |
- |
|
40-50 |
17 |
|
50-60 |
6 |
(क) लुप्त आवृत्ति का पता करें
Ans.
|
वर्गान्तराल |
मध्य मूल्य (x) |
आवृत्ति (ƒ) |
ƒx |
|
0-10 |
5 |
12 |
60 |
|
10-20 |
15 |
18 |
270 |
|
20-30 |
25 |
27 |
675 |
|
30-40 |
35 |
n |
35n |
|
40-50 |
45 |
17 |
765 |
|
50-60 |
55 |
6 |
330 |
|
|
|
Σƒ = 80+n |
Σƒx =2100+35n |
= 28 (दिया है)
=
28
=
28(80+n) =
2100 + 35n
2240 + 28n
= 2100 + 35n
28n - 35n =
2100 - 2240
-7n =-140
n = = 20
(ख) श्रृंखला की माध्यिका ज्ञात करें।
Ans.
|
वर्ग अन्तराल |
आवृत्ति (ƒ) |
संचयी बारंबारता (cƒ) |
|
0-10 |
12 |
12 |
|
10-20 |
18 |
30 |
|
20-30 |
27 |
57 |
|
30-40 |
n |
77 |
|
40-50 |
17 |
94 |
|
50-60 |
6 |
100 |
|
|
Σƒ = 100 |
|
m = =
= 50 ( cƒ में देखें )
⸫ Median lise between ( 20 – 30 ) in
class interval
⸫ l1 = 20, l2
= 30, ƒ =27, c = 30, m =50, Median = ?
Median = l1
+ ( m – c ) = 20
+
(50 – 30)
Median = 20
+ (20) = 20 +
= 20 + 7.41 = 27.41
⸫
(क) लुप्त आवृत्ति = 20 (ख) माध्यिका = 27.41
Q. 5. निम्नलिखित सारणी में एक कारखाने के 10 मजदूरों की दैनिक आय दी गई है।
इनका समांतर माध्य ज्ञात कीजिए-
|
मजदूर |
दैनिक आय (रु. में) |
|
A |
120 |
|
B |
150 |
|
C |
180 |
|
D |
200 |
|
E |
250 |
|
F |
300 |
|
G |
220 |
|
H |
350 |
|
I |
370 |
|
J |
260 |
Ans.
|
मजदूर |
दैनिक आय (रु. में) |
|
A |
120 |
|
B |
150 |
|
C |
180 |
|
D |
200 |
|
E |
250 |
|
F |
300 |
|
G |
220 |
|
H |
350 |
|
I |
370 |
|
J |
260 |
|
|
Σx=2400 |
n=
10
Σx=2400
=
=
= 240
⸫
समांतर माध्य = 240 रु.
Q. 6. निम्नलिखित सूचना 150 परिवारों की दैनिक आय से सम्बद्ध है। समांतर माध्य
का परिकलन कीजिए।
|
आय (रु. में) |
परिवारों की संख्या |
|
75 से अधिक |
150 |
|
85 से अधिक |
140 |
|
95 से अधिक |
115 |
|
105 से अधिक |
95 |
|
115 से अधिक |
70 |
|
125 से अधिक |
60 |
|
135 से अधिक |
40 |
|
145 से अधिक |
25 |
Ans.
|
वर्गान्तराल |
मध्य मूल्य (x) |
आवृत्ति (ƒ) |
ƒx |
|
75-85 |
80 |
150-140=10 |
800 |
|
85-95 |
90 |
140-115=25 |
2250 |
|
95-105 |
100 |
115-95=20 |
2000 |
|
105-115 |
110 |
95-70=25 |
2750 |
|
115-125 |
120 |
70-60=10 |
1200 |
|
125-135 |
130 |
60-40=20 |
2600 |
|
135-145 |
140 |
40-25=15 |
2100 |
|
145-155 |
150 |
25 |
3750 |
|
|
|
Σƒ = 150 |
Σƒx =17450 |
समांतर माध्य
= 116.33 रु.
Q. 7. नीचे एक गाँव के 380 परिवारों की जोतों का आकार दिया गया है। जोत का माध्यिका
आकार ज्ञात कीजिए।
|
जोतों का आकार (एकड़ में) |
परिवारों की संख्या |
|
100 से कम |
40 |
|
100-200 |
89 |
|
200-300 |
148 |
|
300-400 |
64 |
|
400 तथा उससे अधिक |
39 |
Ans.
|
जोतों का आकार (एकड़ में) |
परिवारों की संख्या |
संचयी आवृत्ति |
|
100 से कम |
40 |
40 |
|
100-200 |
89 |
129 |
|
200-300 |
148 |
277 |
|
300-400 |
64 |
341 |
|
400 तथा उससे अधिक |
39 |
380 |
|
|
Σƒ=380 |
|
m = =
=190 ( cƒ में देखें )
⸫ Median lise between ( 200 – 300 )
in class interval
⸫ l1 = 200, l2
= 30, ƒ =148, c =129, m =190, Median = ?
Median = l1
+ ( m – c ) = 200
+
(190 – 129)
Median = 200
+ (61) = 200 +
= 200 +41.22= 241.22
जोतों का माध्यिका
आकार = 241.22 एकड़
Q. 8. निम्न श्रृंखला किसी कम्पनी में नियोजित मजदूरों की दैनिक आय से सम्बद्ध
है। अभिकलन कीजिए:
(क) निम्नतम 50 प्रतिशत मजदूरों की उच्चतम आय
(ख) शीर्ष 25 प्रतिशत मजदूरों द्वारा अर्जित न्यूनतम आय और
(ग) निम्नतम 25 प्रतिशत मजदूरों द्वारा अर्जित अधिकतम आय।
|
दैनिक आय (रु. में) |
मजदूरों की संख्या |
|
10-14 |
5 |
|
15-19 |
10 |
|
20-24 |
15 |
|
25-29 |
20 |
|
30-34 |
10 |
|
35-29 |
5 |
(संकेत : मध्य,
निम्न चतुर्थक तथा उच्च चतुर्थक का अभिकलन कीजिए।)
Ans.
|
दैनिक आय (रु. में) |
समायोजित वर्गान्तराल (Rs.) |
मजदूरों की संख्या (ƒ) |
संचयी बारम्बारता (cƒ) |
|
10-14 |
9.5-14.5 |
5 |
5 |
|
15-19 |
14.5-19.5 |
10 |
15 |
|
20-24 |
19.5-24.5 |
15 |
30 |
|
25-29 |
24.5-29.5 |
20 |
50 |
|
30-34 |
29.5-34.5 |
10 |
60 |
|
35-29 |
34.5-39.5 |
5 |
65N |
|
|
|
Σƒ=65 |
|
(क) निम्नतम 50 प्रतिशत मजदूरों की उच्चतम् आय ज्ञात करने के लिए माध्यिका ज्ञात
करनी होगी-
माध्यिका वर्गान्तराल (m) = =
=32.5 ( cƒ में देखें )
⸫ Median lise between ( 24.5 – 29.5
) in class interval
⸫ l1 =24.5, l2
= 29.5, ƒ =20, c =30, m =32.5, Median = ?
Median = l1
+ ( m – c ) = 24.5
+
(32.5 –30)
Median = 24.5
+ (2.5) = 24.5 +
= 24.5 +0.625= 25.125
(ख) उच्चतम 25 प्रतिशत श्रमिकों की न्यूनतम आय ज्ञात करने के लिए निम्न चतुर्यक
(Q1) का परिकलन करना चाहिए-
Q1
= Value of items =
=16.25
⸫ Q1 lise between (19.5 –24.5)
in class interval
⸫
l1 =19.5, l2 =24.5, ƒ =15, c =15, = 16.25
Q1 = l1 + (l2
– l1) = 19.5 +
(24.5–19.5)
Q1 =19.5 + (5) =19.5 +
=19.5 +0.42=19.92
(ग) निम्नतम 25 प्रतिशत श्रमिकों की उच्चतम आय ज्ञात करने के लिए उच्च चतुर्थक Q3 चात करना चाहिए-
Q3
= Value of items =
=48.75
⸫ Q3 lise between (24.5 –
29.5) in class interval
⸫ l1 =24.5, l2
=29.5, ƒ =20, c =30, =48.75
Q3 = l1 + (l2
– l1) =24.5+
(29.5–24.5)
Q3 =24.5+ (5) =24.5+
=24.5+4.69 =29.19
(क)= 25.125रु.
(ख) 19.92 रु. तथा
(ग) 29.19 रु.
Q. 9. निम्न सारणी में किसी गाँव के 150 खेतों में गेहूँ की प्रति हेक्टेयर
पैदावार ती गई है। उत्पादित फसलों का समांतर माध्य, माध्यिका तथा बहुलक परिकलित कीजिए
।
|
उत्पादित फसल (प्रति हेक्टेयर किग्रा. में) |
खेतों की संख्या |
|
50-53 |
3 |
|
53-56 |
8 |
|
56-59 |
14 |
|
59-62 |
30 |
|
62-65 |
36 |
|
65-68 |
28 |
|
68-71 |
16 |
|
71-74 |
10 |
|
74-77 |
5 |
Ans.
|
C.I |
ƒ |
MV x |
A=63.5 dx |
i=3 dxI |
ƒdxI |
cƒ |
|
50-53 |
3 |
51.5 |
-12 |
-4 |
-12 |
3 |
|
53-56 |
8 |
54.5 |
-9 |
-3 |
-24 |
11 |
|
56-59 |
14 |
57.5 |
-6 |
-2 |
-28 |
25 |
|
59-62 |
30 |
60.5 |
-3 |
-1 |
-30 |
55 |
|
62-65 |
36 |
63.5 |
0 |
0 |
0 |
91 |
|
65-68 |
28 |
66.5 |
3 |
1 |
28 |
119 |
|
68-71 |
16 |
69.5 |
6 |
2 |
32 |
135 |
|
71-74 |
10 |
72.5 |
9 |
3 |
30 |
145 |
|
74-77 |
5 |
75.5 |
12 |
4 |
20 |
150 |
|
|
Σƒ=150 |
|
|
|
ΣƒdxI=16 |
|
(2) माध्यिका वर्गान्तराल (m) = =
वाँ
पद =75 ( cƒ में देखें )
⸫ Median lise between (62–65) in
class interval
⸫ l1 =62, l2 =65,
ƒ =36, c =55, m =75, Median = ?
Median = l1
+ ( m – c ) = 62+
(75 –55)
Median =62
+ (20) =62 +
=62+1.67=63.67
(3)
बहुलक (Z) = 3M-2
Z =
3(63.67)-2(63.82)
Z =
191.01-127.64
Z=
63.37
माध्य 63.82
प्रति हेक्टेयर कि.ग्रा.
माध्यिका
63.67 प्रति हेक्टेयर कि.ग्रा.
बहुलक = 63.37
प्रति हेक्टयर कि.ग्रा.
अन्य महत्त्वपर्ण परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
Q. 1. एक श्रृंखला के सभी मदों को जोड़कर योग को संख्या से भाग करने पर क्या
प्राप्त होता है?
Ans. समांतर
माध्य।
Q. 2. एक क्रमबद्ध श्रृंखला का केन्द्रीय प्रवृत्ति का कौन-सा माप दो समान भागों
में बाँटता है?
Ans. माध्यिका
।
Q. 3. ज्यामितीय विधि से कौन-सा माध्य ज्ञात नहीं किया जा सकता है?
Ans. समांतर
माध्य।
Q. 4. समान्तर माध्य से विचलन का योग क्या होता है?
Ans. शून्य ।
Q. 5. एक क्रमबद्ध श्रृंखला को चार भागों में विभाजित करने वाल केन्द्रीय प्रवृत्ति
की माप क्या होती है?
Ans. चतुर्थक
।
Q. 6. श्रृंखला में सबसे अधिक बार आनेवाला मद कौन होता है?
Ans. बहुलक ।
Q. 7. सामान्य रूप से चतुर्थक की गणना किस प्रकार की जाती है?
Ans. Q1
तथा Q3
Q. 8. समान्तर माध्य की गणना पद विचलन विधि से करने पर उत्तर समान आता है या
असमान?
Ans. समान।
Q. 9. चतुर्थक को परिभाषित करें।
Ans. चतुर्थक
एक क्रमवत् श्रेणी की चार भागों में बाँटती है।
Q. 10. औसत के विभिन्न प्रकार बताइए।
Ans. औसत के
विभिन्न प्रकार हैं। जैसे-
1. समान्तर माध्य,
2. माध्यिका,
3. बहुलक,
4. ज्यामितीय
माध्य,
5. हरात्मक माध्य।
Q. 11. एक अच्छे औसत की आवश्यकताएँ बताइए।
Ans. एक अच्छे
औसत के लिए आवश्यक है कि यह
1. सुपरिभाषित
हो,
2. सभी मूल्यों
पर आधारित हो,
3. सरल एवं समझने
में आसान हो,
4. बीजगणितीय
विवेचन के योग हो।
Q.12. निम्न आँकड़ों से माध्यिका ज्ञात करें : 10, 30, 50, 70, 60, 40, 10
Ans. आरोही क्रम
में आँकड़े 10, 10, 20, 30, 40, 50, 60, 70
N = 8 जो कि
एक सम संख्या है
Median
= Value of items =
=
= 4.5
Median
= Value of items =
=
=35
Q. 13. निम्नलिखित आँकड़ों से माध्यिका निकालिये-30, 80, 35, 90, 40, 100,
50, 110, 55, 120, 55
Ans. आरोही क्रम
में आँकड़े 30, 35, 40, 50, 55, 55, 80, 90, 100, 110, 120
N = 11 जो कि
एक विषम संख्या है-
Median
= Value of items =
=
=6
Median
=55
Q. 14. निम्नलिखित आँकड़ों का बहुलक ज्ञात कीजिए।
13,15,16,18,18,17,17,16,15,15
Ans. 15
Q. 15. अज्ञात आवृत्ति ज्ञात कीजिए।
|
X |
ƒ |
|
5 |
5 |
|
10 |
7 |
|
15 |
- |
|
20 |
10 |
|
25 |
8 |
|
30 |
6 |
|
|
Σƒ=50 |
Ans. अज्ञात
आवृत्ति ज्ञात करने के लिए दी गई आवृत्तियों के योग को आवृत्तियों के कुल योग में से
घटाते हैं।
कुल योग =
50
दी गई आवृत्तियों
का योग = 5 + 7 + 10 + 8 + 6 = 36
⸫
अज्ञात आवृत्ति 50-36=14
Q. 16. समान्तर माध्य के तीन दोष लिखें।
Ans. समान्तर
माध्य के तीन दोष निम्नलिखित है-
1. यह चरम सीमाओं
के द्वारा प्रभावित होती है।
2. कई बार अस्वाभाविक,
अवास्तविक और हास्यास्पद निष्कर्ष देती है, जैसे भारत में औसत प्रत्येक परिवार में
3.6 बच्चे होते हैं।
3 यह दर, अनुपाल
और वृद्धि जैसे अध्ययनों में उपयुक्त नहीं होती।
Q. 17. माध्यिका के तीन दोष समझाइए ।
Ans. माध्यिका
के तीन दोष इस प्रकार हैं-
1. इसका समांतर
माध्य की भाँति बीजगणितीय विवेचन सम्भव नहीं होता।
2. अविच्छिन्न
श्रृंखला में माध्यिका का अनुमान लगाया जाता है, उचित गणना नहीं की जाती।
3. मूल्यों का
वितरण अनियमित होने पर माध्यिका समूह का पूर्ण प्रतिनिधित्व नहीं करती।
Q. 18. भूयिष्ठक के तीन दोष लिखिए ।
Ans. भूयिष्ठक
के तीन दोष निम्नलिखित हैं-
1. किसी-किसी
वितरण में एक नहीं अनेक
भूयिष्ठक मूल्य प्राप्त होते हैं।
2. गणितीय विवेचन
संभव नहीं होता।
3. भूयिष्ठक
में विभिन्न सूत्रों द्वारा विभिन्न मूल्य प्राप्त होते हैं। कौन-सा सूत्र अपनाएँ,
यह अनिश्चित होता है।
Q. 19. चतुर्थक का परिकलन करते समय घरों के मूल्यों के बारे में हम क्या मानते
हैं ?
Ans. चतुर्थक
का परिकलन करते समय चरों के मूल्यों के बारे में हम यह मानते हैं कि चरों के मूल्य
किसी भी वर्ग में समान रूप से वितरित हैं।
Q. 20. समान्तर माध्य, माध्यिका और बहुलक के परस्पर संबंध का सूत्र लिखिए ।
Ans. बहुलक
= 3 x माध्यिका -2 x समांतर माध्य
Q. 21. भारित माध्य का सूत्र बताइए ।
Ans. भारित माध्य
=
जहाँ x1……..xn
चर मूल्य तथा w1....wn चर मूल्यों के भार हैं।
Q. 22. माध्यिका की परिभाषा दें।
Ans. माध्यिका
वह संख्या है जो किसी श्रृंखला को दो बराबर भागों में इस प्रकार बाँटती है कि आधे मदों
का मूल्य उससे कम होता है तथा आधे का मूल्य अधिक होता है।
Q. 23. बहुलक का क्या अर्थ है ?
Ans. बहुलक किसी
संख्या के उस मूल्य को कहते हैं जो श्रृंखला में सबसे अधिक बार आता है।
Q. 24. श्रेणी में वह मूल्य जिसके इर्द-गिर्द अधिकतम मूल्य केन्द्रित होते हैं,
को क्या कहते हैं ?
Ans. बहुलक ।
Q. 25. वह मूल्य जो पदों के मूल्यों के योग को उनकी संख्या से भाग देने से प्राप्त
हो तो क्या कहलाता है?
Ans. मध्यक।
Q. 26. संख्या के पैमाने पर वह मूल्य जिसके आधे मदों का मूल्य कम तथा आधे मदों
का मूल्य अधिक होता है, क्या कहलाता है ?
Ans. बहुलक।
Q. 27. मध्यक तथा माध्य की सहायता से बहुलक को मापने का सूत्र लिखिए।
Ans. Z= 3M
-2
Q. 28. पता करना सबसे कठिन होता है ?
Ans. बहुलक का।
Q. 29. किस माध्य का पता करना सबसे सरल होता है ?
Ans. समान्तर
माध्य का।
Q. 30. एक अखण्डित श्रृंखला में समान्तर माध्य निकालने का सूत्र बताएँ।
Ans. =
Q.31. एक अखण्डित श्रृंखला में बहुलक की गणना कौन-से सूत्र से की जाती है ?
Ans. Mode = l1 + ( l2
– l1 )
Q. 32. अखण्डित श्रृंखला से माध्यिका ज्ञात करने का सूत्र लिखें।
Ans. Median = l1 + (m –c)
Q. 33. एक व्यक्तिगत श्रृंखला में माध्यिका ज्ञात करने का सूत्र
लिखें।
Ans.
Median = Value of items
Q. 34. केन्द्रीय प्रवृत्ति का कोई एक माप लिखें ।
Ans. समान्तर
माध्य।
Q. 35. निम्न चतुर्थक का अर्थ बताएँ ।
Ans. Q1
को प्रथम या निम्न चतुर्थक कहते हैं। निम्न चतुर्थक श्रृंखला के एक चौथाई भाग का प्रतिनिधित्व
करता है। Q1 से एक चौथाई मूल्य कम होते हैं तथा श्रृंखला के तीन चौथाई मूल्य Q1
से अधिक होते हैं।
Q. 36. उच्च चतुर्थक का आशय स्पष्ट करें।
Ans. Q3
को उच्च या तृतीय चतुर्थक कहते हैं। समुच्चय के कुल मूल्यों की संख्या में उच्च चतुर्थक
का तीन चौथाई मूल्यों की संख्याओं से अधिक होता है तथा इससे अधिक मूल्यों की संख्या
एक चौथाई होती है।
Q. 37. माध्य की परिभाषा लिखें ।
Ans. माध्य एक
ऐसी संख्या है जो एक वृहत श्रेणी का निरूपण करती है और जिसका प्रयोग विभिन्न श्रेणियों
के बीच सरल और आसान ढंग से तुलना करने के लिये किया जा सकता है।
Q. 38. केन्द्रीय प्रवृत्ति से आप क्या समझते हैं ?
Ans. केन्द्रीय
प्रवृत्ति की माप एक अकेली संख्या होती है जो आँकड़ों के वितरण या समूह की केन्द्रीय
प्रवृत्ति का निर्धारण करती है।
Q. 39. सांख्यिकीय माध्य के कोई तीन उद्देश्यों को बताइए ।
Ans. (i) माध्य
की एक संख्या द्वारा समग्र जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
(ii) जटिल तथा
अव्यवस्थित आँकड़ों का एक सरल तथा संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करना।
(iii) औसत की
सहायता से आँकड़ों से दो अथवा दो से अधिक समूहों की तुलना।
Q. 40. आदर्श औसत के कोई तीन गुणों को बताइए ।
Ans. (i) आदर्श
औसत स्पष्ट तथा स्थिर परिभाषा वाला होना चाहिए।
(ii) औसत को
सारे समूह की विशेषताओं को प्रकट करना चाहिए।
(iii) औसत का
यह गुण होना चाहिए कि न्यादर्श में होने वाले परिवर्तन उनसे अधिक प्रभावित न कर सकें।
Q. 41. समान्तर माध्य तथा माध्यिका में क्या अन्तर है ?
Ans. समान्तर
माध्य एक औसत है जो उसके पद मूल्यों को उनकी संख्या से भाग देने से प्राप्त होती है।
माध्यिका एक ऐसा चर मूल्य है जो मूल्यों के समूह को दो बराबर भागों में इस प्रकार बाँटता
है कि जितने मूल्य इससे कम होते हैं उतने ही मूल्य इससे अधिक होते हैं।
Q. 42. माध्यिका के किन्हीं तीन गुणों को लिखिए ।
Ans. (i) माध्यिका
की गणना सरल होती है।
(ii) माध्यिका
पर निम्न तथा उच्च मूल्यों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
(iii) माध्यिका
बिना सभी मूल्यों के ज्ञात की जा सकती है।
Q. 43. बहुलक के तीन गुणों को लिखें।
Ans. (i) बहुलक
को समझना आसान है।
(ii) बहुलक पर
असाधारण मूल्यों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
(iii) बहुलक
का बिन्दु रेखीय निर्धारण भी सम्भव है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Q.1. केन्द्रीय प्रवृत्ति के उद्देश्यों का वर्णन करें।
Ans. 1. संक्षिप्त
चित्र प्रस्तुत करना- माध्यों द्वारा जटिल और अव्यवस्थित समंकों की मुख्य विशेषताओं
को एक सरल, स्पष्ट व संक्षिप्त चित्र प्रस्तुत किया जाता है ताकि उन्हें समझने और याद
रखने में कोई कठिनाई नहीं हो।
2. तुलना की
सुविधा प्रदान करना- माध्यों की सहायता से दो समूहों के महत्वपूर्ण लक्षणों में
तुलना की जा सकती है। उदाहरणार्थ-भारत और अमेरिका की औसत प्रति व्यक्ति आय की तुलना
करके उचित निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं।
3. समग्र का
प्रतिनिधित्व- माध्यों की सहायता से ही पूरे समग्र के बारे में निष्कर्ष
निकाले जा सकते हैं।
4. सांख्यिकीय
विश्लेषण का आधार - सांख्यिकीय विश्लेषण की अनेक क्रियाएँ माध्यों पर ही आधारित
होती हैं।
5. पथ प्रदर्शित
करना- माध्यों से ऐसे मूल्य ज्ञात हो सकते हैं जो भावी योजनाओं,
क्रियाओं व कीमतों के निर्धारण में यथोचित मार्ग प्रदर्शन करते हैं।
Q. 2. केन्द्रीय प्रवृत्ति के अच्छे माप के आवश्यक गुण लिखिए ।
Ans. एक अच्छे
केन्द्रीय प्रवृत्ति की माप अथवा माध्य में निम्नलिखित गुण होने चाहिये-
1. केन्द्रीय
प्रवृत्ति की माप की परिभाषा स्पष्ट शब्दों में की जा सके। माप की परिभाषा को अन्वेषकों
पर ही नहीं छोड़ना चाहिए।
2. केन्द्रीय
प्रवृत्ति की माप अथवा माध्य सरलता और शीघ्रता से निकाला जाना चाहिए।
3. माध्य में
ऐसे स्पष्ट गुण होने चाहिए जिससे उसकी सामान्य प्रवृत्ति आसानी से समझ में आ सके।
4. एक अच्छे
माध्य की विशेषता यह है कि विभिन्न प्रतिदर्श (Samples) के घट-बढ़ से माध्य पर कम-से-कम
प्रभाव पड़े।
5. उसका प्रयोग
बीजगणितीय विधियों द्वारा किया जा सके।
6. माध्य समंक
माला के सभी पदों पर आधारित होनी चाहिये अन्यथा वे पूरे समूह के लक्षणों का प्रतिनिधित्व
नहीं करेगा।
Q. 3. समांतर माध्य ज्ञात करने की पद विचलन विधि के चरण लिखिए ।
Ans. पद विचलन
या लघु विधि में समान्तर माध्य ज्ञात करने के लिए चरण इस प्रकार हैं- -
गणना क्रिया-1.
सबसे पहले श्रेणी (x) के किसी भी मूल्य को, कल्पित माध्य(A) मान लेते हैं। उसके बाद
विचलन ज्ञात करने के लिए (x-A) ज्ञात करते हैं।
2. उसके बाद
इन विचलनों को एक समापवर्तक (common factor) से भाग देकर पद-विचलन (dx) ज्ञात करते
हैं।
3. Σƒdx
निकालने के लिए ƒ तथा dx को गुणा करते हैं।
4. निम्नलिखित
सूत्र का प्रयोग करके समांतर माध्य ज्ञात करते हैं :
यहाँ,
= माध्य , Σ = कुल जोड़
, n = पदों की संख्या , A= कल्पित माध्यम
,i
= विचलन को साझा संख्या से भाग लेंगे, ƒ =बारंबारता , dx = कल्पित माध्य की सहायता से
प्राप्त विचलन
Q. 4. समांतर माध्य की विशेषताएँ लिखिए ।
Ans. समांतर
माध्य की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
1. समांतर माध्य
का योग शून्य होता है।
2. समांतर माध्य
फल का एक सरल फलन (फंक्शन)
होता है जिसके दो लाभ निम्नलिखित हैं
(i) समांतर माध्य
की अंकगणतीय विशेषताओं को निकालना आसान है।
(ii) दिए गए
आँकड़ों के आधार पर स्पष्ट रूप से इसका परिकलन किया जा सकता है।
3. समांतर माध्य
के परिकलन में चर के सभी मूल्यों का समान महत्व होता है। ऐसा इसलिए है कि चर का बहुत
बड़ा या बहुत छोटा मूल्य भी समांतर माध्य को प्रभावित करता है।
Q. 5. माध्यिका की विशेषताएँ बताइये ।
Ans. माध्यिका
की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
1. यह सरल और
समझने में आसान होती है।
2. समांतर माध्य
की भाँति माध्यिका
सुपरिभाषित होती है।
3. यह अधिक या
न्यूनतम मूल्यों द्वारा प्रभावित नहीं होती है।
4. माध्यिका
को किसी दिए गएं समुच्चय के मूल्यों के एक सरल फलन के रूप में नहीं दिखाया जा सकता
है।
Q. 6. बहुलक की विशेषताएँ लिखिये ।
Ans. बहुलक की
प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं
1. समांतर माध्य
तथा माध्यिका की भाँति, बहुलक को आसानी से समझा जा सकता है।
2. बहुलक अधिकतम
और निम्नतम मानों से प्रभावित नहीं होती, क्योंकि वह केवल सबसे अधिक आवृत्ति पर निर्भर
करता है।
3. माध्यिका
की भाँति, बहुलक दिए गए मानों के सरल फलन की तरह नहीं दर्शाया जा सकता है।
Q. 7. आयत चित्र द्वारा बहुलक का निर्धारण कैसे किया जाता है ?
Ans. आवृत्ति
वितरण में, बहुलक के मूल्य को रेखाचित्र द्वारा भी ज्ञात कर सकते हैं। इसके निर्धारण
के लिए जो कदम उठाए जाते हैं वे इस प्रकार हैं-
गणन-प्रक्रिया-
1. दिए गए समंकों की सहायता से आवृत्ति आयत चित्र तैयार करते हैं।
2. सबसे ऊँचा
आयत बहुलक वर्ग का आयत होता है।
3. दो रेखाएँ
खींचते हैं। सबसे ऊँचे आयत के दाहिनी ओर के ऊपरी सिरे को सबसे पहले वाले आयत के दाहिने
सिरे से मिलाते हैं। इसी प्रकार ऊँचे आयत के बाएँ सिरे को उससे अगले आयत के बाएँ ऊपरी
सिरे से मिलाते हैं। इस प्रकार करने से बहुलक वर्ग के अंदर दो तिरछी रेखाएँ आपस में
प्रतिच्छेद करती हैं।
4. उस विन्दु
को दर्शाइए जहाँ ये दो रेखाएँ आपस में एक-दूसरे को काटती हैं।
5. इसके बाद
कटान बिन्दु से x-अक्ष पर एक लम्ब खींचते हैं।
6. यह लम्ब x-अक्ष
के जिस बिन्दु पर जाकर मिलती है, वही बहुलक मूल्य होता है।
रेखाचित्र द्वारा बहुलक का निर्धारण-
Q.8. चरों के मूल्यों के वितरण के बारे में क्या-क्या जानना उपयोगी होता है
?
Ans. चरों के
मूल्यों के वितरण के बारे में निम्नलिखित बातें जाननी महत्वपूर्ण होती हैं-
1. चर के सबसे
अधिक तथा सबसे कम मूल्य क्या है तथा मूल्यों के वितरण का परास कितना है।
2. वितरण का
वह केंद्रीय मूल्य कौन-सा है जिसके आस-पास अन्य मूल्य वितरित हैं।
3. केंद्रीय
मूल्य के आस-पास मूल्यों के वितरण का परिमाण कितना है।
4. क्या चर के
मूल्य परास के अन्तर्गत समान रूप से वितरित हैं या परास की ऊपरी या निचली सीमा के निकट
या उसके बीच में एकत्रित हैं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
Q. 1. आदर्श माध्य के आवश्यक गुणों का उल्लेख करें।
Ans. आदर्श माध्य
के आवश्यक गुण-माध्य पूरे समूह का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे मूल्य में निम्नलिखित
गुण होने चाहिए ताकि समंकों का ठीक रूप से प्रतिनिधित्व हो सके-
1. समझने में
सरल- सांख्यिकीय विधियों का प्रयोग समंकों को संक्षिप्त तथा सरल
बनाने के लिए किया जाता है। अतः माध्य ऐसा होना चाहिए जो आसानी से समझा जा सके, अन्यथा
इसका प्रयोग बहुत ही सीमित होगा।
2. निर्धारण
में सुगम- माध्य की गणन-क्रिया सरल होनी चाहिए ताकि इसका प्रयोग व्यापक
रूप से हो सके। यद्यपि माध्य का निर्धारण जहाँ तक हो सके सरल होना चाहिए तथापि विशेष
परिस्थितियों में परिणामों की शुद्धता के लिए अधिक कठिन माध्यों का प्रयोग भी किया
जा सकता है।
3. श्रेणी के
सभी मूल्यों पर आधारित- माध्य श्रेणी के सभी मूल्यों पर आधारित होना चाहिए ताकि
एक या अधिक मूल्यों में परिवर्तन होनें से माध्य में भी परिवर्तन हो सके। यदि मध्य
श्रेणी के सभी मूल्यों पर आधारित नहीं है तो वह पूरे समूह का प्रतिनिधित्व ठीक प्रकार
से नहीं कर सकता।
4. न्यूनतम तथा
अधिकतम मूल्यों पर अनुचित प्रभाव से बचाव- यद्यपि माध्य
सभी मूल्यों पर आधारित होना चाहिए तथापि किसी विशेष मूल्य का माध्य पर अधिक प्रभाव
नहीं पड़ना चाहिए अन्यथा माध्य समंकों का सही रूप व्यक्त नहीं करेगा।
5. स्पष्ट तथा
स्थिर परिभाषा- माध्य की परिभाषा स्पष्ट शब्दों में व्यक्त होनी चाहिए ताकि
जो भी व्यक्ति दिए हुए समंकों से माध्य निकाले वह एक निष्कर्ष पर पहुँचे। इसके लिए
यह आवश्यक है कि माध्य गणितीय सूत्र के रूप में दिया जाए। यदि माध्य की गणना में गतियों
की प्रवृत्तियों का प्रभाव पड़ा तो फल भ्रामक तथा अशुद्ध होंगे।
6. बीजगणितीय
विवेचन सम्भव- एक अच्छे माध्य का बीजगणितीय विवेचन सम्भव होना चाहिए। उदाहरण
के लिए, यदि दो कारखानों में मजदूरों की संख्या तथा उनकी औसत आय से सम्बन्धित समंक
दिए गए हों तो दोनों कारखानों के मजदूरों की आय का सामूहिक माध्य निकालना सम्भव होना
चाहिए।
7. प्रतिनिधि-
औसत को सारे समूह की विशेषताओं को प्रकट करना चाहिए अर्थात् उनका प्रतिनिधित्व करना
चाहिए।
Q. 2. समान्तर माध्य के गुण तथा दोष का वर्णन करें।
Ans. समान्तर
माध्य के गुण (Merits of Arithmetic Mean) समान्तर माध्य के निम्नलिखित गुण हैं-
1. गणना सरल-
इसको प्राप्त करने की क्रिया सरल है। इसलिए एक सामान्य व्यक्ति भी इसे समझ सकता है।
2. सभी पदों
पर आधारित- इसे प्राप्त करते समय समूह के सभी पदों का प्रयोग होता है।
3. बीजगणितीय
प्रयोग सम्भव- इसमें बीजगणित का प्रयोग सम्भव है जिसके कारण उच्चतर सांख्यिकीय
विश्लेषण में इसका पर्याप्त प्रयोग किया जाता है।
4. पदों को क्रमबद्ध
करना या समूहीकरण आवश्यक नहीं- इसमें सामग्री को माध्यिका
(Median) की भौति क्रमबद्ध करने और बहुलक (Mode) की भाँति समूहों में रखने की आवश्यकता
नहीं पड़ती।
5. निश्चित-
यह माध्य निश्चित और सदा एक ही होता है।
6. गणितीय क्रिया
सम्भव- पदों की संख्या, कुल योग और मध्यक में से यदि कोई दो ज्ञात
हों तो तीसरा सरलतापूर्वक ज्ञात किया जा सकता है। जैसे-
=
, Σx=n
and, n =
7. कुल मूल्य
व कुल संख्या में गणना- यदि किसी श्रेणी के चरों का कुल मूल्य और चरों की कुल संख्या
दी हुई हो, तो मूल्यों के अभाव में भी सरल मध्यक निकाला जा सकता है।
8. अशुद्धता
की जाँच- चार्लियर जाँच के आधार पर इस माध्य की शुद्धता की जाँच सम्भव
है जबकि अन्य माध्यों में ऐसा नहीं है।
9. स्थिरता-
अन्य माध्यों की अपेक्षा इस माध्य में स्थिरता पाई जाती है। यदि दैव निदर्शन से यथेष्ठ
मात्रा में न्यादर्श लिए जायें तो प्रत्येक दशा में यह माध्य समान होगा।
समान्तर माध्य
के दोष (Demerits of Arithmetic Mean) - उपर्युक्त गुणों
के साथ समान्तर माध्य में निम्नलिखित दोष भी हैं-
1. आकृति से
अनुमान नहीं- किसी समंकमाला की आकृति देखकर मध्यक का अनुमान नहीं लगाया
जा सकता।
2. अति सामान्त
मूल्यों का प्रभाव - सरल समान्तर माध्य की गणना करते समय प्रत्येक पद को तथाकथित
महत्व दिया जाता है, किन्तु इसकी गणना में असाधारण व सीमान्त मूल्यों का बहुत प्रभाव
पड़ता है। समान्तर माध्य द्वारा श्रेणी का सच्चा प्रतिनिधित्व नहीं होता। उदाहरणार्थ,
चार निर्धन व्यक्तियों में एक अति धनी व्यक्ति को शामिल करने पर उनकी आय का मध्यक अच्छी
आय प्रदर्शित करेगा। अतः परिणाम विश्वसनीय नहीं होता।
3. बिन्दु रेखा
द्वारा प्रदर्शन या प्राप्त करना सम्भव नहीं- बिन्दु रेखा
द्वारा इसका प्रदर्शन व ज्ञात करना सम्भव नहीं।
4. कोई भी मूल्य
न होने पर गणना सम्भव नहीं- यदि समंकमाला का कोई भी मूल्य ज्ञात न हो तो इसे नहीं निकाला
जा सकता जबकि माध्यिका व भूयिष्ठक ज्ञात किये जा सकते हैं।
5. गुणात्मक
सामग्री के अनुपयुक्त- गुणात्मक सामग्री के लिए यह प्रयोग नहीं होता।
6. सामग्री में
मिलना आवश्यक नहीं- यह निश्चित नहीं कि जो माध्य प्राप्त हो, वह सामग्री में
मिले। इसलिए यह मध्यका सच्चा प्रतिनिधि नहीं होता।
7. अशुद्ध परिणाम-
कभी-कभी मध्यक को देखकर अशुद्ध परिणाम निकाले जा सकते हैं यद्यपि यह समान्तर माध्य
का दोष नहीं है। उदाहरणार्थ, मान लीजिए 'A' और 'B' दो व्यवसायों का तीन वर्षों का शुद्ध
लाभ इस प्रकार है-
|
वर्ष |
'A' व्यवसाय का लाभ |
'B' व्यवसाय का लाभ |
|
2004 |
2,000 रु. |
6,000 रु. |
|
2005 |
4,000 रु. |
4,000 रु. |
|
2006 |
6,000 रु. |
2,000 रु. |
दोनों व्यवसायों का भध्यक 4,000 रु. होगा। फल यह निकलेगा कि दोनों व्यवसायों की दशा एक-सी है। परन्तु 'A' व्यवसाय उन्नति कर रहा है और 'B' व्यवसाय शीघ्रता से अवनति कर रहा है।
8. अनुपात पद
में अनुपयुक्त- अनुपात तथा दर आदि का अध्ययन करने के लिए मध्यक का प्रयोग
अनुपयुक्त समझा जाता है।
9. हास्यास्पद
परिणाम- कभी-कभी इस माध्य के द्वारा हास्यास्पद परिणाम निकलते हैं।
जैसे, यदि एक परिवार में 7 व्यक्ति हैं और दूसरे में 4, तो उनका समान्तर माध्य = 5.5 व्यक्ति हुआ।
Q. 3. मध्यका के गुण-दोष का वर्णन करें।
Ans. मध्यका
के गुण (Merits of Median)- मध्यका के निम्न गुण हैं-
1. समझना सरल-
मध्यका का अर्थ साधारण व्यक्ति के लिए भी बहुत सरल है।
2. चरम मूल्यों
का प्रभाव नहीं- मध्यका पर असाधारण और अति-सीमान्त पदों का प्रभाव नहीं पड़ता
है।
3. निश्चित एवं
स्पष्ट- मध्यका निश्चित होती है, भूयिष्ठक की भाँति अस्पष्ट और अनिश्चित
नहीं। इसे निश्चितता के साथ सदैव ज्ञात किया जा सकता है।
4. गुणात्मक
विशेषताओं के अध्ययन के उपयुक्त- गुणात्मक विशेषताओं का अध्ययन करने
के लिए मध्यका मध्यका को अन्य सभी माध्यकों की अपेक्षा अच्छा समझा जाता है।
5. वास्तविक
मूल्य- मध्यका श्रेणी के मूल्यों में से ही होती है। अतः यह प्रतिनिधित्व
की दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ माध्य माना जाता है।
6. अपूर्ण तथ्यों
में भी गणना सम्भव- मध्यका की गणना के लिये सम्पूर्ण सामग्री का पता होना आवश्यक
नहीं है। केवल मध्य पद का मूल्य और सम्पूर्ण इकाइयों की संख्या ज्ञात होना पर्याप्त
है।
7. बिन्दु रेखीय
प्रदर्शन सम्भव- मध्यका का बिन्दु रेखीय प्रदर्शन सम्भव है।
8. विशेष दशा
में एकमात्र प्रतिनिधि- कुछ दशाओं में मध्यका एकमात्र माध्य है जो समंकों का सही
प्रतिनिधित्व कर सकता है। जैसे, एक कक्षा के औसत बौद्धिक स्तर को ज्ञात करने के लिए
उस कक्षा का मध्यका ही ज्ञात किया जाएगा।
मध्यका के दोष
(Demerits of Median)- मध्यका के निम्नलिखित दोष हैं-
1. अनुविन्यास
आवश्यक- मध्यका प्राप्त करने के लिए पदों को आरोही व अवरोही क्रम
में अनुविन्यासित करना पड़ता है। इसमें समय लगता है और असुविधा होती है। अविच्छिन्न
श्रेणी में इसका निर्धारण इस मान्यता पर आधारित होता है कि प्रत्येक वर्ग में आवृत्तियाँ
समान अन्तर पर
वितरित हैं जो सदैव सत्य नहीं रहती हैं।
2. गणितीय शुद्धता
में कमी- मध्यका की आवृत्तियों की कुल संख्या से गुणा करने पर मूल्यों
का कुल योग नहीं प्राप्त किया जा सकता।
3. प्रतिनिधित्व
का अभाव- मूल्यों का वितरण अनियमित होने पर मध्यका समूह का ठीक प्रकार
से प्रतिनिधित्व नहीं कर सकती।
4. सभी पदों
का समान महत्व- इस माध्य को निकालने में श्रेणी के सभी पदों को समान महत्व
दिया जाता है जो अनुचित है।
5. बीजगणितीय
प्रयोग नहीं- इसका प्रयोग बीजगणितीय क्रियाओं में नहीं किया जा सकता।
6. निर्धारण
कठिन- यदि मध्य-पद दो मूल्यों के बीच पड़ता है तो इसे एकदम ठीक
प्राप्त करना कठिन होता है। ऐसी दशा में सम्भावित मूल्य ही प्राप्त किया जा सकता है।
Q. 4. भूयिष्ठक अथवा बहुलक के गुण-दोष का उल्लेख करें।
Ans. भूयिष्ठक
के गुण (Merits of Mode) - भूयिष्ठक के निम्नलिखित गुण हैं-
1. सरल तथा लोकप्रिय-
इसको समझना और प्रयोग करना साधारण व्यक्ति के लिए सरल है, क्योंकि निरीक्षण मात्र से
ही इसका पता लगाया जा सकता है। यह स्वभाव से ही एकत्र किये हुए समंकों का अर्थ स्पष्ट
कर देता है।
2. चरम मूल्यों
का न्यूनतम प्रभाव- इस पर अति-सीमान्त पदों का बहुत कम प्रभाव पड़ता है।
3. बिन्दु-रेखीय
निर्धारण- बिन्दु-रेखीय रीति से भूयिष्ठक सरलतापूर्वक प्रदर्शित किन
जा सकता है।
4. सर्वाधिक
सम्भावित मूल्य- लोकप्रियता का अध्ययन करने के लिए यह तबसे उपयुक्त माध्य
है। दैनिक प्रयोग की वस्तुओं जैसे सिले-सिलाये कपड़ों आदि के सम्बन्ध में सामान्य आकार
का तात्पर्य भूयिष्ठक आकार से ही होता है।
5. श्रेष्ठ प्रतिनिधि-
इससे समग्र के लक्षणों व रचना पर भी कुछ प्रकाश पड़ता है, क्योंकि यह आवृत्तियों के
अधिकतम घनत्व वाला पद होता है।
6. कई न्यादर्श
से मूल्य में अन्तर नहीं- समग्र में से दैव निदर्शन द्वारा चाहे जितनी बार भी न्यादर्श
लिया जाये, भूयिष्ठक लगभग एक ही आयेगा। अन्य माध्यमों में न्यादर्श के परिवर्तन के
साथ-साथ माध्यों में परिवर्तन होता है।
7. निकालने के
लिए सभी पदों की आवृत्तियों की जानकारी आवश्यक नहीं- भूयिष्ठक निकालने
के लिए सभी पदों की आवृत्तियों की जानकारी आवश्यक नहीं, केवल भूयिष्ठक पद के आगे-पीछे
वाले पदों की आवृत्तियाँ पर्याप्त हैं। जब समूहीकरण करना हो तब सभी आवृत्तियों
की जानकारी आवश्यक है।
भूयिष्ठक के
दोष (Demerits of Mode) - इसके दोष निम्नलिखित हैं-
1. चरम मूल्यों
की उपेक्षा- इसमें अति-सीमान्त पदों को कोई महत्व नहीं दिया जाता इसलिए
सीमान्त पदों को भार देने की जहाँ आवश्यकता होती है वहाँ यह उपयुक्त नहीं है।
2. कभी-कभी शुद्धता
के साथ निकालना कठिन- साधारण अंकगणितीय क्रिया द्वारा इसको नहीं निकाला जा सकता
है और जब श्रेणी का वितरण अनियमित हो तो किसी भी रीति द्वारा शुद्धता के साथ नहीं निकाला
जा सकता।
3. बीजगणितीय
विवेचन में अनुपयुक्त- यह बीजगणितीय विवेचन के लिए अनुपयुक्त है। विभिन्न बहुलकों
का पता होने पर भी हम एक संयुक्त बहुलक नहीं प्राप्त कर सकते।
4. अनिश्चित
तथा अस्पष्ट- यह प्रायः अनिश्चित और अस्पष्ट होती है। कभी-कभी दो या दो
से अधिक बहुलक हो जाते हैं और समूहीकरण करना पड़ता है। यदि श्रेणी के सभी पदों की आवृत्ति
समान हो तो बहुलक निश्चित नहीं किया जा सकता।
5. क्रमानुसार
रखना आवश्यक- इसमें पदों को क्रमानुसार रखना आवश्यक होता है, क्योंकि
सबसे अधिक आवृत्ति वाले पदों के आस-पास की आवृत्तियों की भी आवश्यकता पड़ती है।
6. वर्ग-विस्तार
का प्रभाव- बहुलक बहुत कुछ वर्गीकरण पर निर्भर करता है। यदि वर्ग विस्तार
में परिवर्तन कर दिया जाए तो बहुलक भी बदल जाएगा।
7. भ्रमात्मक
प्रतिनिधित्व- यह श्रेणी के सभी पदों के मूल्यों पर आधारित नहीं होता है।
इसलिए श्रेणी का पूर्ण रूप से प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता। जैसे- यदि 500 व्यक्तियों
में से 5 की मासिक आय 100 रु. है। शेष सभी की मासिक आय 100 रु. से अधिक है, किन्तु
आय किन्हीं 5 की समान आय नहीं है तो बहुलक आय 100 रु. होगी जो पूरे समूह की प्रतिनिधि
नहीं कही जा सकती।
Q. 5. बहुलक ज्ञात करने की समूहीकरण विधि का वर्णन करें।
Ans. समूहीकरण
विधि- कुछ मामलों में यह संभव होता है कि वह मूल्य जिसकी आवृत्ति सबसे ज्यादा है
बहुलक न हो। ऐसा निम्न परिस्थितियों में हो सकता है-
1. जब आवृत्तियाँ
अनियमित हों।
2. जब मदों का
केन्द्रीयकरण एक से अधिक मूल्यों पर हो,
3. जब बहुलक
के बारे में कुछ संदेह उत्पन्न हो जाए।
प्रक्रिया-
खण्डित श्रेणी में बहुलक की प्रक्रिया इस प्रकार है-ऐसी परिस्थितियों में, बहुलक की
गणना समूहीकरण के द्वारा करते हैं। समूहीकरण सारणी में 6 खाने होते हैं।
1. पहले कॉलम
में अधिक आवृत्तियों को रेखांकित करते हैं।
2. दूसरे कॉलम
में आवृत्तियों के प्रारम्भ में दो-दो समूहों का योग करते हैं।
3. तीसरे कॉलम
में सबसे पहले कॉलम की पहली आवृत्ति को छोड़कर दो-दो के समूहों का योग करते हैं।
4. चौथे कॉलम
में दी गई आवृत्तियों के तीन-तीन के समूहों का योग करते हैं।
5. पाँचवें कॉलम
में पहले कॉलम को आवृत्ति को अन्य तीन-तीन आवृत्तियों का योग किया जाता है।
6. छठे कॉलम
में पहली दो आवृत्ति को छोड़कर आगे की तीन-तीन आवृत्तियों का योग करते हैं।
आवृत्तियों का
इस प्रकार समूहीकरण करने के बाद प्रत्येक कॉलम की अधिकतम आवृत्ति को रेखांकित अथवा
वृत्त कर दिया जाता है।
समूहीकरण सारणी
बनाने के बाद एक विश्लेषण सारणी तैयार करनी पड़ती है। जिन मूल्यों की अधिकतम आवृत्ति
होती है उनको इसमें शामिल कर लिया जाता है। निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग करके बहुलक
ज्ञात करते हैं-
Mode
= l1 + ( l2
– l1 )
जहाँ Z = बहुलक,
l1 = बहुलक वर्ग की निचली सीमा ,l2 = बहुलक वर्ग की ऊपरी सीमा
ƒ1=
बहुलक वर्ग की आवृत्ति , ƒ0 = बहुलक वर्ग से पूर्व वर्ग की आवृत्ति
ƒ2
= बहुलक वर्ग के तुरन्त बाद के वर्ग की आवृत्ति
व्यावहारिक प्रश्न
माध्य
Q. 1. निम्नलिखित श्रृंखला से पद विचलन रीति के साथ तथा पद विचलन रीति के बगैर
माध्य ज्ञात करें-
|
आकार |
आवृत्ति |
|
0-9 |
8 |
|
10-19 |
12 |
|
20-29 |
10 |
|
30-39 |
16 |
|
40-49 |
13 |
|
50-59 |
6 |
Ans.
|
C.I |
M.V
(X) |
ƒ |
A=34.5(dx) |
i=10(dxI) |
ƒdx |
ƒdxI |
|
0-9 |
4.5 |
8 |
-30 |
-3 |
-240 |
-24 |
|
10-19 |
14.5 |
12 |
-20 |
-2 |
-240 |
-24 |
|
20-29 |
24.5 |
10 |
-10 |
-1 |
-100 |
-10 |
|
30-39 |
34.5 |
16 |
0 |
0 |
0 |
0 |
|
40-49 |
44.5 |
13 |
10 |
1 |
130 |
13 |
|
50-59 |
54.5 |
6 |
20 |
2 |
120 |
12 |
|
|
|
Σƒ=65 |
|
|
Σƒdx=-330 |
ΣƒdxI=-33 |
Step-deviation method
Mean
() = A +
× i =34.5 +
×10 =34.5- 5.08
=29.42
Q. 2. निम्नलिखित सारणी के लिए माध्य निकालें-
|
रुपये |
पाने वालों की संख्या |
|
10 से कम |
3 |
|
20 से कम |
8 |
|
30 से कम |
17 |
|
40 से कम |
20 |
|
50 से कम |
22 |
Ans. नोट-सबसे
पहले cumulative frequency को साधारण frequency में बदलें।
|
C.I |
M.V
(X) |
ƒ |
A=25(dx) |
ƒdx |
|
10
से कम |
5 |
3 |
-20 |
-60 |
|
20
से कम |
15 |
5 |
-10 |
-50 |
|
30
से कम |
25 |
9 |
0 |
0 |
|
40
से कम |
35 |
3 |
10 |
30 |
|
50
से कम |
45 |
2 |
20 |
40 |
|
|
|
Σƒ=22 |
|
Σƒdx=-40 |
Q. 3. निम्नलिखित संचयी आवृत्ति वितरण से पद विचलन विधि द्वारा समान्तर माध्य
ज्ञात कीजिए ।
|
अंक से अधिक |
छात्रों की संख्या |
|
0 से अधिक |
50 |
|
10 से अधिक |
46 |
|
20 से अधिक |
40 |
|
30 से अधिक |
20 |
|
40 से अधिक |
10 |
|
50 से अधिक |
3 |
Ans. समान्तर
माध्य ज्ञात करने के लिए पहले संचयी आवृत्ति वितरण को आवृत्ति वितरण में इस प्रकार
बदलते हैं-
|
C.I |
ƒ |
M.V(X) |
ƒX |
|
0-10 |
4 |
5 |
20 |
|
10-20 |
6 |
15 |
90 |
|
20-30 |
20 |
25 |
500 |
|
30-40 |
10 |
35 |
350 |
|
40-50 |
7 |
45 |
315 |
|
50-60 |
3 |
55 |
165 |
|
|
Σƒ=50 |
|
Σƒx =1440 |
) =
=
= 28.8
मध्यका
Q. 1. निम्नलिखित श्रृंखला से मध्यका ज्ञात करें ।
|
C.I |
ƒ |
cƒ |
|
5-10 |
2 |
2 |
|
10-15 |
4 |
6 |
|
15-20 |
6 |
12 |
|
20-25 |
8 |
20 |
|
25-30 |
6 |
26 |
|
30-35 |
2 |
28 |
|
|
Σƒ=28 |
|
=
= 14 ( cƒ में देखें )
⸫ Median lise between ( 20 – 25 ) in
class interval
⸫ l1 = 20, l2
= 25, ƒ = 8, c = 12, m = 14, Median = ?
Median = l1
+ ( m – c ) = 20
+
( 14– 12 )
= 20 + ( 2 ) = 20 +
1.25 = 21.25
Q. 2. निम्न सारणी से माध्यिका का परिकलन कीजिए-
|
X |
ƒ |
|
5 |
5 |
|
10 |
7 |
|
15 |
9 |
|
20 |
10 |
|
25 |
8 |
|
30 |
6 |
|
35 |
3 |
|
40 |
2 |
|
|
Σƒ=50 |
Ans.
|
X |
ƒ |
संचयी आवृत्ति (cƒ) |
|
5 |
5 |
5 |
|
10 |
7 |
12 |
|
15 |
9 |
21 |
|
20 |
10 |
31 |
|
25 |
8 |
39 |
|
30 |
6 |
45 |
|
35 |
3 |
48 |
|
40 |
2 |
50 |
|
|
Σƒ=50 |
|
=
= 25 (cƒ में देखे)
Median =20
Q. 3. निम्नलिखित आँकड़ों के वितरण की माध्यिका ज्ञात करें।
|
मध्य मूल्य |
आवृत्ति |
|
5 |
4 |
|
15 |
6 |
|
25 |
10 |
|
35 |
7 |
|
45 |
3 |
|
55 |
2 |
Ans. सबसे पहले
श्रेणी को संतत श्रेणी में बदल लेंगे, क्योंकि दी गई श्रेणी संतत श्रेणी की है परन्तु
मध्य बिन्दु लेकर उसे विच्छिन्न श्रेणी के रूप में दिया हुआ है। वहाँ वर्गान्तर 10
है। इससे आधे अर्थात् 5 को प्रत्येक मध्य बिन्दु में जोड़ देने पर मध्य उच्चतम सीमा
और घटा देने पर निम्नतम सीमा ज्ञात हो जाएगी। इसी प्रकार श्रेणी अपने वास्तविक रूप
में आ जाएगी।
|
आकार |
आवृत्ति |
संचयी आवृत्ति |
|
0-10 |
4 |
4 |
|
10-20 |
6 |
10 |
|
20-30 |
10 |
20 |
|
30-40 |
7 |
27 |
|
40-50 |
3 |
30 |
|
50-60 |
2 |
32 |
|
|
Σƒ=32 |
|
m = =
= 16 (cƒ में देखें)
⸫ Median lise between (20–30) in
class interval
⸫ l1 = 20, l2
=30, ƒ =10, c = 10, m =16, Median =?
Median = l1
+ (m –c) = 20 +
(16–10)
= 20 + (6) = 20 +6 = 26
बहुलक
Q. 1. निम्नलिखित आँकड़ों से बहुलक ज्ञात कीजिए ।
|
अंक |
बारम्बारता |
|
100 |
1 |
|
200 |
3 |
|
400 |
8 |
|
800 |
1 |
|
700 |
4 |
|
600 |
3 |
Ans.
Q. 2. निम्नलिखित आवृत्ति वितरण की सहायता से बहुलक ज्ञात कीजिए ।
|
C.I |
ƒ |
|
0-10 |
5 |
|
10-20 |
12 |
|
20-30 |
18 |
|
30-40 |
28 |
|
40-50 |
15 |
|
50-60 |
9 |
|
60-70 |
7 |
Ans.
l1 = 30, l2 = 40, ƒ1 = 28, ƒ2 = 15, ƒ0 = 18, Mode = ?
Mode = `l_1+\frac{f_1-f_0}{2f_1-f_0-f_2}(l_2-l_1)`
= 30+`\frac{28-18}{2(28)-18-15}(40-30)`
= `30+\frac{10}{56-33}(10)=30+\frac{100}{23}`
= 30+4.34 = 34.34
Q. 3. निम्नलिखित आवृत्ति वितरण की सहायता से बहुलक ज्ञात कीजिए ।
|
C.I |
ƒ |
|
0-5 |
6 |
|
5-10 |
1 |
|
10-15 |
2 |
|
15-20 |
4 |
|
20-25 |
5 |
|
25-30 |
3 |
Ans.
l1 = 20, l2 = 25, Mode = ?
Mode = `l_1+\frac{f_1-f_0}{2f_1-f_0-f_2}(l_2-l_1)`
= 20+`\frac{5-4}{2(5)-4-3}(25-20)`
= `20+\frac{1}{10-7}(5)=20+\frac{5}{3}`
= 20 + 1.6 = 21.6
Q. 4. निम्नलिखित आवृत्ति वितरण की सहायता से बहुलक ज्ञात कीजिए ।
Q. 5. ग्राफ की सहायता से बहुलक ज्ञात करें।
|
X |
ƒ |
|
0-10 |
8 |
|
10-20 |
10 |
|
20-30 |
23 |
|
30-40 |
37 |
|
40-50 |
47 |
|
50-60 |
26 |
|
60-70 |
16 |
|
70-80 |
5 |
Ans.
चित्र में X
को OX पर तथा आवृत्ति को OY पर दर्शाया गया है। 40-50 वर्गान्तर वाली जयत सबसे ऊँची
है। इसे बहुलक वर्ग बाली आयत कहा जायगा। इस आयत को एक किनारे से दूसरे किनारे तक मिलाने
वाली रेखा AB खीची गयी है। इसी प्रकार C को D से मिलाने वाली रेखा खींची गई है। ये
दोनों रेखाएँ AB तथा CD एक-दूसरे को पर काटती है। E से OX पर लम्ब खींचा गया। यह लम्ब
43 से पर OX को छूता है अतः बहुलक 43 है।
निम्न चतुर्थक (Q1) तथा उच्च चतुर्थक (Q3)
Q. 1. निम्नलिखित आंकड़ों से अन्तर चतुर्थक, चतुर्थक विचलन तथा चतुर्थक विचलन गुणांक निकालिए
अंक : 100,90,110,120,130,150,170,180,190,200,210
उत्तर :-
| SI | अंक |
|---|---|
| 1 | 90 |
| 2 | 100 |
| 3 | 110 |
| 4 | 120 |
| 5 | 130 |
| 6 | 150 |
| 7 | 170 |
| 8 | 180 |
| 9 | 190 |
| 10 | 200 |
| 11 | 210 |
Q. 2. निम्नलिखित आंकड़ों से अन्तर चतुर्थक, चतुर्थक विचलन तथा चतुर्थक विचलन गुणांक निकालिए
अंक | 2 | 4 | 6 | 8 | 10 | 12 |
SN | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 |
अंक | 2 | 4 | 6 | 8 | 10 | 12 |
अन्तर-चतुर्थक विस्तार = Q3 - Q1 = 11-3 = 8
चतुर्थक विचलन = `\frac{Q_3-Q_1}2`= `\frac{11-3}2` = `\frac{8}2` = 4
चतुर्थक विचलन गुणांक = `\frac{Q_3-Q_1}{Q_3+Q_1}` =`\frac{11-3}{11+3}`
=`\frac{8}{14}` = 0.57
Q. 3. निम्नलिखित श्रेणी से अन्तर चतुर्थक विस्तार, चतुर्थक विचलन तथा चतुर्थक विचलन के गुणांक ज्ञात कीजिए
| अंक | छात्रों की संख्या |
|---|---|
| 45 | 3 |
| 47 | 4 |
| 50 | 2 |
| 55 | 1 |
| 60 | 5 |
| 70 | 2 |
| 80 | 8 |
| 100 | 7 |
उत्तर :-
| अंक | छात्रों की संख्या (ƒ) | संचयी आवृत्ति (cƒ) |
|---|---|---|
| 45 | 3 | 3 |
| 47 | 4 | 7 |
| 50 | 2 | 9 |
| 55 | 1 | 10 |
| 60 | 5 | 15 |
| 70 | 2 | 17 |
| 80 | 8 | 25 |
| 100 | 7 | 32 |
Q1 = 50
Q3 = 80
अन्तर-चतुर्थक विस्तार = Q3 - Q1 = 80-50 = 30
चतुर्थक विचलन = `\frac{Q_3-Q_1}2`= `\frac{80-50}2` = `\frac{30}2` = 15
चतुर्थक विचलन गुणांक = `\frac{Q_3-Q_1}{Q_3+Q_1}` =`\frac{80-50}{80+50}`
=`\frac{30}{130}` = 0
Q. 4. निम्नलिखित श्रेणी से अन्तर चतुर्थक विस्तार, चतुर्थक विचलन तथा चतुर्थक विचलन के गुणांक ज्ञात कीजिए
| अंक | छात्रों की संख्या |
|---|---|
| 10-20 | 2 |
| 20-30 | 3 |
| 30-40 | 1 |
| 40-50 | 4 |
| 50-60 | 7 |
| 60-70 | 3 |
| अंक | छात्रों की संख्या (ƒ) | संचयी आवृत्ति (cƒ) |
|---|---|---|
| 10-20 | 2 | 2 |
| 20-30 | 3 | 5 |
| 30-40 | 1 | 6 |
| 40-50 | 4 | 10 |
| 50-60 | 7 | 17 |
| 60-70 | 3 | 20 |
Q1 = Value of `\frac{N}4` items = `\frac{20}4` = 5उत्तर :-
⸫ Q1 lise between ( 20 – 30 ) in class interval
⸫ l1 = 20, l2 = 30, ƒ = 3, c = 2, `\frac{N}4` = 5
`Q_1=L_1+\frac{\frac N4-C}ƒ\left(L_2-L_1\right)`
= 20 +`\frac{5-2}3`( 30 – 20 )
Q1 = 20 +`\frac{3}3`(10 ) = 20 + 10 = 30
Q3 =Value of`\frac{3N}4`items = (`\frac{3 X 20}4`)= 15
⸫ Q3 lise between ( 50 – 60 ) in class interval
⸫ l1 = 50, l2 = 60, ƒ = 7 , c =10, `\frac{3N}4` = 15
`Q_3=L_1+\frac{\frac{3N}4-C}ƒ\left(L_2-L_1\right)`
= 50 +`\frac{15-10}7`( 60 – 50 )
Q3 = 50 +`\frac{5}7` (10 ) = 50 +`\frac{50}7`= 50 + 7.14 = 57.14
JCERT/JAC REFERENCE BOOK
Group -A सांख्यिकी के सिद्धान्त
Group-B भारतीय अर्थव्यवस्था
JCERT/JAC प्रश्न बैंक - सह - उत्तर पुस्तक (Question Bank-Cum-Answer Book)
विषय सूची
क्र०स० | अध्याय का नाम |
अर्थशास्त्र में सांख्यिकी | |
1. | |
2. | |
3. | |
4. | |
5. | |
6. | |
7. | |
8. | |
भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास | |
1. | |
2. | |
3. | |
4. | |
5. | |
6. | |
7. | |
8. | |







