PRE BOARD EXAMINATION ANSWER KEY - 2026-27
Class - XII HISTORY [Full Marks-80 Time-3 Hours-]
सामान्य
निर्देश-
• प्रश्न संख्या 1 से 30 तक
बहुविकल्पीय प्रश्न है। प्रत्येक प्रश्न के चार विकल्प है। सही विकल्प चुनकर उत्तर
पुस्तिका में लिखें। प्रत्येक प्रश्न 1 अंक का है।
• प्रश्न संख्या 31 से 38 तक
अति लघुउत्तरीय प्रश्न हैं। किन्हीं छः प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक प्रश्न के
लिए 2 अंक निर्धारित है।
• प्रश्न संख्या 39 से 46 तक
लघुउत्तरीय प्रश्न हैं। किन्हीं छः प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक प्रश्न के लिए
3 अंक निर्धारित है।
• प्रश्न संख्या 47 से 52 तक
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न हैं। किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक प्रश्न के
लिए 5 अंक निर्धारित है।
Part – A बहुविकल्पीय प्रश्न 30 x 1 = 30
1 हड़प्पा सभ्यता की खोज सर्वप्रथम किसने की थी?
(A)
जॉन मार्शल
(B) दयाराम साहनी
(C)
कनिंघम
(D)
आर. ई. एम. व्हीलर
2 हड़प्पा सभ्यता का सबसे बड़ा नगर कौन था?
(A)
लोथल
(B)
कालीवंगन
(C) मोहनजोदड़ो
(D)
धौलावीरा
3 महान स्नानागार कहाँ स्थित है?
(A)
हड़प्पा
(B)
लोयल
(C)
धौलावीरा
(D) मोहनजोदड़ो
4 हड़प्पावासी मुख्यतः किस धातु से परिचित थे?
(A)
लोहा
(B) तांबा
(C)
एल्युमिनियम
(D)
प्लेटिनम
5 लोथल किसके लिए प्रसिद्ध है?
(A)
दुर्ग
(B) बंदरगाह
(C)
स्तूप
(D)
मंदिर
6 मौर्य साम्राज्य का संस्थापक कौन था?
(A)
बिंदुसार
(B)
अशोक
(C) चंद्रगुप्त मौर्य
(D)
समुद्रगुप्त
7 मेगस्थनीज किस शासक के दरबार में आया था?
(A)
अशोक
(B) चंद्रगुप्त मौर्य
(C)
बिंदुसार
(D)
हर्षवर्धन
8 अर्थशास्त्र की रचना किसने की?
(A)
कालिदास
(B) कौटिल्य
(C)
बाणभट्ट
(D)
पतंजलि
9 अशोक के अभिलेख किस लिपि में लिखे गए थे?
(A) ब्राह्मी
(B)
देवनागरी
(C)
फारसी
(D)
रोमन
10 गुप्त वंश का सर्वाधिक प्रसिद्ध शासक कौन था?
(A)
चंद्रगुप्त प्रथम
(B)
कुमारगुप्त
(C) समुद्रगुप्त
(D)
स्कंदगुप्त
11 महाभारत का वर्तमान स्वरूप किस भाषा में है?
(A)
पाली
(B) संस्कृत
(C)
प्राकृत
(D)
तमिल
12 महाभारत के रचयिता किसे माना जाता है?
(A)
वाल्मीकि
(B) वेदव्यास
(C)
कालिदास
(D)
पाणिनि
13 महाभारत का युद्ध किस स्थान पर हुआ या?
(A)
अयोध्या
(B)
पाटलिपुत्र
(C) कुरुक्षेत्र
(D)
उज्जैन
14 जाति व्यवस्था का आधार क्या माना गया?
(A) जन्म
(B)
शिक्षा
(C)
धन
(D)
शक्ति
15 मनुस्मृति का संबंध किससे है?
(A) धर्मशास्त्र
(B)
वेद
(C)
उपनिषद
(D)
पुराण
16 बौद्ध धर्म के संस्थापक कौन थे?
(A)
महावीर
(B) बुद्ध
(C)
अशोक
(D)
नागार्जुन
17 बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति कहाँ हुई?
(A)
सारनाथ
(B)
कुशीनगर
(C) बोधगया
(D)
राजगृह
18 प्रथम बौद्ध संगीति कहाँ हुई?
(A)
वैशाली
(B) राजगृह
(C)
पाटलिपुत्र
(D)
तक्षशिला
19 साँची किसके लिए प्रसिद्ध है?
(A)
मंदिर
(B)
मस्जिद
(C) स्तूप
(D)
दुर्ग
20 महावीर स्वामी जैन धर्म के कौन से तीर्थकर थे?
(A)
22वें
(B)
23वें
(C) 24वें
(D)
22वें
21 धौलावीरा किस राज्य में स्थित है?
(A)
राजस्थान
(B) गुजरात
(C)
पंजाब
(D)
हरियाणा
22 हड़प्पा सभ्यता का काल लगभग क्या माना जाता है?
(A) 2600-1900 ВСЕ
(B)
1500-1000 BCE
(C)
600-300 BCE
(D)
300-100 BCE
23 अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद किस धर्म को अपनाया?
(A)
जैन धर्म
(B) बौद्ध धर्म
(C)
शैय धर्म
(D)
वैष्णव धर्म
24 प्रयाग प्रशस्ति किससे संबंधित है?
(A)
अशोक
(B) समुद्रगुप्त
(C)
चंद्रगुप्त मौर्य
(D)
हर्ष
25 महाभारत में कुल कितने पर्व है?
(A)
16
(B)
17
(C) 18
(D)
19
26 साँची स्तूप का निर्माण मूलतः किसने कराया ?
(A) अशोक
(B)
कनिष्क
(C)
हर्ष
(D)
समुद्रगुप्त
27 जैन धर्म का प्रमुख सिद्धांत क्या है?
(A) अहिंसा
(B)
भक्ति
(C)
यज्ञ
(D)
कर्मकांड
28 बुद्ध का प्रथम उपदेश कहाँ हुआ ?
(A) सारनाथ
(B)
बोधगया
(C)
वैशाली
(D)
कुशीनगर
29 महाजनपदों की संख्या कितनी थी?
(A)
12
(B)
14
(C) 16
(D)
18
30 ब्राह्मी लिपि को पढ़ने का श्रेय किसे जाता है?
(A)
कनिंघम
(B) जेम्स प्रिंसेप
(C)
जॉन मार्शल
(D)
फाह्यान
Part-B Section – A Subjective Type Quesrtion (6 x 2 =12)
प्रश्न
संख्या 31 से 38 तक अति लघुउत्तरीय प्रश्न है। किन्हीं छः प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक
प्रश्न 2 अंक का है।
31 हड़प्पा सभ्यता की दो प्रमुख विशेषताएँ लिखिए ।
उत्तर-
हड़प्पाई लिपि की दो मुख्य विशेषताएं-
A हड़प्पा लिपि
को आज तक पढ़ने में सफलता नहीं प्राप्त की जा सकी है यद्यपि निश्चित रूप से यह
वर्णमालीय नहीं है क्योंकि वर्णमाला के प्रत्येक चिन्ह एक स्वर या एक व्यंजन को
दर्शाता है।
B. यह लिपि दाएं
से बाएं लिखी जाती थी क्योंकि दाएं और अधिक अंतराल है जबकि बाएं और कम जगह है।
32 महान स्नानागार क्या था?
उत्तर-
सिंधु घाटी सभ्यता
के प्रमुख शहर मोहनजोदड़ो
में स्थित एक विशाल और ऐतिहासिक सार्वजनिक जलकुंड था।
33 अर्थशास्त्र का संक्षिप्त परिचय दीजिए ।
उत्तर-
कौटिल्य (चाणक्य) द्वारा रचित 'अर्थशास्त्र' प्राचीन भारत
का राजनीति, प्रशासन, अर्थव्यवस्था और सैन्य रणनीति पर लिखा गया एक अत्यंत महत्वपूर्ण
और प्रामाणिक ग्रंथ है।
34 अशोक के धम्म से आप क्या समझते हैं?
उत्तर-
'अशोक के धम्म' से तात्पर्य अशोक की नैतिक संहिता से है।
35 महाभारत का ऐतिहासिक महत्व लिखिए।
उत्तर-
महाभारत न केवल एक धार्मिक ग्रंथ है, बल्कि यह प्राचीन भारत
के इतिहास, संस्कृति और समाज का एक महत्वपूर्ण दर्पण भी है।
36 मनुस्मृति क्या है?
उत्तर-
मनुस्मृति सनातन धर्म का एक प्राचीन संस्कृत धर्मशास्त्रीय
ग्रंथ है, जिसे 'मानव धर्मशास्त्र' भी कहा जाता है।
37 साँची स्तूप का महत्व बताइए ।
उत्तर-
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित साँची का महान स्तूप
भारत की वास्तुकला, शांति और बौद्ध धर्म की समृद्ध विरासत का सबसे महत्वपूर्ण और जीवंत
प्रतीक है।
38 जैन धर्म के दो प्रमुख सिद्धांत लिखिए ।
उत्तर-
जैन धर्म के दो सबसे प्रमुख सिद्धांत अहिंसा और अपरिग्रह
हैं।
Section – B (6x3=18)
प्रश्न
संख्या 39 से 46 तक लघुउत्तरीय प्रश्न हैं। किन्हीं छः प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक
प्रश्न 3 अंक का है।
39 हड़प्पा सभ्यता की नगर योजना का वर्णन कीजिए।
उत्तर - हड़प्पा सभ्यता में नगर-निर्माण की योजना
सुव्यवस्थित और वैज्ञानिक सोच पर आधारित थी। इस सभ्यता के नगरों में चौड़ी सड़कों,
नियमित गलियों और एक निश्चित ग्रिड प्रणाली का उपयोग किया गया था। प्रत्येक नगर
में जल निकासी व्यवस्था अत्यंत अद्यतनीकृत थी, जिससे वर्षा के पानी को एकत्र करके
सुरक्षित दिशा में प्रवाहित किया जाता था। नगर की भूदृश्य व्यवस्था में सार्वजनिक
भवन, शिल्पकला केंद्र, बाज़ार तथा निवास स्थानों का स्पष्ट विभाजन किया गया था।
मोहरों और लेखन प्रणाली से प्राप्त प्रमाण बताते हैं कि यहाँ प्रशासनिक दक्षता और
सामुदायिक नियोजन की महत्वपूर्ण भूमिका थी। स्वच्छता और जल प्रबंधन के प्रति समाज
की सजगता इस सभ्यता की तकनीकी उन्नति का प्रमाण है। हड़प्पा नगरों में सामाजिक
समरसता, व्यापारिक केंद्रता, और स्थापत्य कला की विशिष्ट झलक दिखाई देती है।
40 हड़प्पा सभ्यता के पतन के कारण बताइए ।
उत्तर-
हड़प्पा सभ्यता की पतन के संदर्भ में कोई संतोषजनक प्रमाण नहीं मिला है। लगभग
अट्ठारह सौ ईसा पूर्व के आसपास इस सभ्यता का पतन हो गया। इस सभ्यता के पतन के
संदर्भ में विद्वान एकमत नहीं है फिर भी कुछ ऐसे प्रमाण मिले हैं जिसके द्वारा
अनुमान लगाया जाता है कि हड़प्पा सभ्यता के पतन के निम्नलिखित कारण थे-
A. बाढ़-
सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख नगर नदियों के किनारे बसे थे, इन नदियों में
प्रतिवर्ष बाढ़ आती थी। बाढ़ से प्रतिवर्ष क्षति भी होती थी। इस कारण से हड़प्पा
वासी मूल स्थान को छोड़कर अन्य स्थानों पर रहने के लिए विवश हो गए होंगे।
B. महामारी-
मोहनजोदड़ो से प्राप्त नर कंकालों के परीक्षण के पश्चात यह निष्कर्ष निकलता है कि
हड़प्पा वासी मलेरिया महामारी जैसे अनेक प्राकृतिक आपदाओं के कारण बीमारियों के
शिकार हो गए और उनके जीवन का अंत हो गया । इस कारण से भी इस सभ्यता का पतन हो गया।
C. जलवायु
परिवर्तन- अनेक विद्वानों का कहना है कि अचानक सिंधु घाटी क्षेत्र
में जलवायु परिवर्तन के कारण यह हरा भरा क्षेत्र जंगल एवं बारिश की कमी के कारण
मरुस्थल के रूप में परिवर्तित हो गया। इस कारण से भी यह सभ्यता नष्ट हो गया।
D. बाह्य
आक्रमण- अनेक विद्वानों का अनुमान है कि बाह्य आक्रमण के कारण इस
सभ्यता का अंत हुआ। संभवत ये बाह्य आक्रमणकारी आर्य रहे होंगे।
उपयुक्त
कारणों के आधार हम कह सकते हैं कि हड़प्पा सभ्यता का पतन हो गया।
41 मौर्य प्रशासन की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए ।
उत्तर - मौर्य प्रशासन की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. मौर्य साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र थी। राजधानी के
अलावा साम्राज्य में राजनीतिक शक्ति के चार अन्य केंद्र थे। वे तक्षशिला,
उज्जयिनी, तोसालि और सुवामागिरि थे।
2. सीमाओं के प्रशासन एवं सुरक्षा को चलाने के लिए समिति
एवं उपसमितियों का गठन किया गया। मेगस्थनीज ने उल्लेख किया है कि एक समिति तथा छह
उपसमितियाँ थीं। छह उपसमितियां और उनकी गतिविधियों के क्षेत्र इस प्रकार हैं:
(i) पहली उप समिति नौसेना की देखभाल करती थी।
(ii) दूसरी उप समिति परिवहन और संचार की देखभाल करती थी।
(iii) तीसरी उप समिति पैदल सेना की देखभाल करती थी।
(iv) चौथी उप समिति के पास घोड़ो की जिम्मेदारी थी।
(v) पांचवें के पास रथों की जिम्मेदारी थी।
(vi) छठे के पास हाथियों की जिम्मेदारी थी।
3. सड़कों और संचार का मजबूत नेटवर्क स्थापित किया गया।
उल्लेखनीय है कि इसके अभाव में कोई भी बड़ा साम्राज्य कायम नहीं रह सकता।
4. अशोक ने धम्म के दर्शन द्वारा साम्राज्य को एकजुट रखने
का प्रयास किया। धम्म और कुछ नहीं बल्कि नैतिक सिद्धांत हैं जो लोगों को अच्छे
आचरण के लिए प्रेरित करते हैं। धम्म के प्रचार के लिए धम्म महामंत्र नामक विशेष
अधिकारी नियुक्त किये गये। वास्तव में रोमिला थापर ने इसे अशोक राज्य के शासन
सिद्धांत का सबसे महत्वपूर्ण तत्व बनाया है।
42 अशोक के अभिलेखों का महत्वं स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर - अशोक के अभिलेखों की विशेषताएँ निम्न हैं -
1. प्राचीनतम
शिलालेख: अशोक के अभिलेख भारत के सबसे प्राचीन शिलालेख माने जाते हैं, जो लगभग
3वीं शताब्दी ईसा पूर्व के हैं।
2. भाषा
और लिपि: ये अभिलेख प्रायः प्राकृत भाषा में लिखे गए हैं और ब्राह्मी लिपि का
उपयोग किया गया है। कुछ अभिलेखों में कंधारी और ग्रीक-लैटिन लिपि भी पाई जाती है।
3. धार्मिक
और नैतिक संदेश: अशोक के अभिलेखों में बौद्ध धर्म के सिद्धांतों, अहिंसा, दया, और
नैतिकता के संदेश प्रमुख रूप से मिलते हैं।
4. राजनीतिक
और प्रशासनिक जानकारी: अभिलेखों में अशोक के शासन की नीतियों, प्रशासनिक व्यवस्था,
और साम्राज्य की सीमाओं का उल्लेख है।
5. सार्वजनिक
कल्याण पर जोर: अभिलेखों में अशोक ने जनता के कल्याण के लिए किए गए कार्यों जैसे
सड़क निर्माण, अस्पताल, और वन संरक्षण का वर्णन किया है।
6. शिलालेखों
का स्थान: ये अभिलेख विभिन्न स्थानों पर बने हैं जैसे कि स्तंभों पर, चट्टानों पर,
और गुफाओं की दीवारों पर।
7. शिलालेखों
का उद्देश्य: इन अभिलेखों का उद्देश्य जनता को शासन की नीतियों से अवगत कराना और
नैतिकता का प्रचार करना था।
43 महाभारत में वर्णित सामाजिक व्यवस्था पर प्रकाश डालिए ।
उत्तर - महाभारत के समय समाज वर्ण एवं आश्रम व्यवस्था पर
आधारित था। समाज में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र चार प्रमुख वर्ण माने
जाते थे। प्रत्येक वर्ण के अपने-अपने कर्तव्य निर्धारित थे।
• ब्राह्मण – अध्ययन-अध्यापन, यज्ञ तथा धार्मिक कार्य करते
थे।
• क्षत्रिय – शासन, युद्ध और प्रजा की रक्षा करना उनका
मुख्य कार्य था।
• वैश्य – कृषि, पशुपालन और व्यापार करते थे।
• शूद्र – अन्य तीन वर्णों की सेवा तथा विभिन्न श्रम कार्य
करते थे।
समाज में संयुक्त परिवार और पितृसत्तात्मक व्यवस्था का
महत्व था। विवाह को सामाजिक संस्था के रूप में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त था।
स्त्रियों को परिवार में सम्मान प्राप्त था, हालांकि उनकी स्वतंत्रता पुरुषों की
तुलना में सीमित थी। शिक्षा का भी महत्व था और गुरुकुल परंपरा प्रचलित थी।
44 जाति एवं वर्ण में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर - वर्ण तथा जाति में निम्नलिखित अन्तर पाए जाते हैं-
(i) वर्ण की संख्या कम है, जबकि जाति की संख्या अधिक है।
(ii) वर्ण बहिर्विवाही है, जबकि जाति अन्तर्विवाही है।
(iii) वर्ण में कर्त्तव्यों की व्याख्या की गई है, जबकि
जाति में निषेधों की।
(iv) वर्ण गुण और कर्म पर आधारित है, लेकिन जाति जन्म पर
आधारित है।
(v) वर्ण को बदला जा सकता है लेकिन जाति को बदला नहीं जा
सकता।
(vi) वर्णं समानता पर आधारित है, जबकि जाति में ऊँच-नीच का
भेदभाव पाया जाता है।
(vii) वर्ण में खानपान सम्बन्धी प्रबन्ध नहीं पाया जाता है,
जबकि जाति में खानपान सम्बन्धी प्रतिबन्ध पाया जाता है।
45 बौद्ध धर्म के चार आंर्य सत्य लिखिए ।
उत्तर - बुद्ध ने जीवन के दुखों और
उनके निवारण के बारे में चार आर्य सत्य बताए, जिन्हें "चार आर्य सत्य" कहा
जाता है। ये सत्य हैं:
1.
दुःख - गौतम बुद्ध के अनुसार समस्त संसार दुःख से भरा है यहां जन्म, मरण, वृद्धावस्था
अप्रिय का मिलन, प्रिय का वियोग एवं इच्छित वस्तु का प्राप्त ना होना आदि सभी दुःख
है।
2.
दुःख समुदाय- समुदाय का अर्थ है कारण । गौतम बुद्ध के अनुसार संसार में दुःखों का कोई
ना कोई कारण अवश्य है, उन्होंने समस्त दुःखों का कारण इच्छा बतलाया है।
3.
दुःख निरोध- निरोध का अर्थ है दूर करना । गौतम बुद्ध ने दु:ख निरोध या दुःख निवारण
के लिए इच्छा का उन्मूलन आवश्यक बताया है।
4.
दु:ख निरोध मार्ग- गौतम बुद्ध के अनुसार संसार में प्रिय लगने वाली वस्तु का त्याग
ही दुःख निरोध मार्ग है।
दुःख
का विनाश करने के लिए गौतम बुद्ध ने जिस सिद्धांत का प्रतिपादन किया उसे अष्टांगिक
मार्गे कहा जाता है।
46 साँची स्तूप की स्थापत्य कला का वर्णन कीजिए।
उत्तर - साँची स्तूप मध्य प्रदेश में
स्थित बौद्ध धर्म का प्रसिद्ध स्थापत्य स्मारक है। इसका निर्माण मूल रूप से सम्राट
अशोक ने करवाया था तथा बाद में इसका विस्तार किया गया। इसकी स्थापत्य कला की प्रमुख
विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—
1.
अर्धगोलाकार स्तूप – स्तूप का मुख्य भाग अर्धगोलाकार अण्ड (गुम्बद) के रूप में बना
है, जिसके भीतर बुद्ध के अवशेषों को सुरक्षित रखने की परंपरा थी।
2.
हर्मिका और छत्र – गुम्बद के ऊपर चौकोर हर्मिका तथा उसके ऊपर छत्रों की व्यवस्था है,
जो बौद्ध धर्म के प्रतीक माने जाते हैं।
3.
चार तोरण द्वार – स्तूप के चारों दिशाओं में सुंदर तोरण बनाए गए हैं। इन पर बुद्ध के
जीवन, जातक कथाओं, पशु-पक्षियों और वनस्पतियों के आकर्षक चित्रांकन मिलते हैं।
4.
पत्थर की वेदिका – स्तूप के चारों ओर पत्थर की रेलिंग बनी है, जो पवित्र क्षेत्र को
सामान्य क्षेत्र से अलग करती है।
5.
प्रदक्षिणा-पथ – स्तूप के चारों ओर श्रद्धालुओं के लिए प्रदक्षिणा करने हेतु मार्ग
बनाया गया है।
6.
मूर्तिकला और अलंकरण – साँची की कला में बुद्ध को प्रत्यक्ष मानव रूप में दिखाने के
बजाय कमल, धर्मचक्र, पदचिह्न और बोधिवृक्ष जैसे प्रतीकों द्वारा दर्शाया गया है।
Section – C (4 x 5 = 20)
प्रश्न
संख्या 47 से 52 तक दीर्घ उत्तरीय प्रश्न हैं। किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दें।
प्रत्येक प्रश्न 5 अंक का है।
47 हड़प्पा सभ्यता की प्रमुख विशेषताओं का विस्तृत वर्णन कीजिए।
उत्तर- हड़प्पा सभ्यता भारत की प्राचीनतम
नगरीय सभ्यताओं में से एक थी। इसका विकास लगभग 2600–1900 ईसा पूर्व के बीच हुआ। इसके
प्रमुख केंद्र हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, धोलावीरा, लोथल और कालीबंगा आदि थे। इसकी प्रमुख
विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—
1.
सुव्यवस्थित नगर योजना – हड़प्पा सभ्यता के नगर योजनाबद्ध ढंग से बनाए गए थे। सड़कें
सीधी थीं और एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं। नगर मुख्यतः दुर्ग क्षेत्र और निचले नगर
में विभाजित थे।
2.
उन्नत जल निकासी व्यवस्था – यहाँ पक्की ईंटों से बनी नालियाँ थीं। घरों की नालियाँ
मुख्य नालियों से जुड़ी होती थीं। यह उनकी स्वच्छता और नगर-प्रबंधन की उन्नति को दर्शाता
है।
3.
पक्की ईंटों का प्रयोग – भवनों और नालियों के निर्माण में मानकीकृत पक्की ईंटों का
प्रयोग किया जाता था। ईंटों का आकार लगभग समान होता था।
4.
भवन निर्माण कला – मकान प्रायः आँगन के चारों ओर बनाए जाते थे। कई घरों में स्नानघर,
कुएँ और जल निकासी की विशेष व्यवस्था थी। मोहनजोदड़ो का महान स्नानागार इसका उत्कृष्ट
उदाहरण है।
5.
कृषि और पशुपालन – गेहूँ, जौ, तिल, मटर आदि फसलों की खेती की जाती थी। लोग गाय, बैल,
भैंस, भेड़ और बकरी जैसे पशु पालते थे।
6.
व्यापार और वाणिज्य – हड़प्पावासी आंतरिक तथा बाहरी व्यापार करते थे। मेसोपोटामिया
के साथ उनके व्यापारिक संबंध थे। लोथल में मिले बंदरगाह के अवशेष समुद्री व्यापार की
ओर संकेत करते हैं।
7.
कला और शिल्प – हड़प्पावासी मिट्टी के बर्तन, आभूषण, मूर्तियाँ, मनके और धातु की वस्तुएँ
बनाने में कुशल थे। कांस्य की नर्तकी की मूर्ति तथा विभिन्न पशु-मूर्तियाँ उनकी कला-कुशलता
का प्रमाण हैं।
8.
धार्मिक जीवन – मातृदेवी, पशुपति-सदृश देवता, वृक्ष और पशु-पूजा के प्रमाण मिलते हैं।
अग्नि-पूजा से संबंधित संरचनाएँ भी कुछ स्थलों से प्राप्त हुई हैं।
9.
लिपि – हड़प्पावासियों की अपनी लिपि थी, जो मुहरों और अन्य वस्तुओं पर मिलती है। यह
लिपि अभी तक पूरी तरह पढ़ी नहीं जा सकी है।
10,
माप-तौल की व्यवस्था – व्यापार के लिए मानकीकृत बाट और माप प्रचलित थे। इससे उनके व्यापार
और प्रशासन में व्यवस्थित व्यवस्था का पता चलता है।
48 मौर्य साम्राज्य के प्रशासन एवं अर्थव्यवस्था की विवेचना कीजिए ।
उत्तर- मौर्य साम्राज्य की स्थापना
चंद्रगुप्त मौर्य ने की थी। मौर्य शासकों ने एक विशाल और केंद्रीकृत प्रशासनिक व्यवस्था
विकसित की। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित थीं—
1.
प्रशासन
• केंद्रीय शासन: राजा प्रशासन
का सर्वोच्च अधिकारी था। वह मंत्रियों और उच्च अधिकारियों की सहायता से शासन चलाता
था।
• मंत्रिपरिषद: राजा को प्रशासनिक
कार्यों में सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद होती थी।
• प्रांतीय प्रशासन: विशाल साम्राज्य
को विभिन्न प्रांतों में बाँटा गया था। प्रांतों में राजकुमार या विश्वसनीय अधिकारी
शासन करते थे।
• जिला एवं स्थानीय प्रशासन:
प्रांतों के नीचे जिले और गाँव होते थे। गाँव का प्रशासन ग्रामिक जैसे अधिकारियों द्वारा
चलाया जाता था।
• न्याय व्यवस्था: अपराधों के
लिए दंड की व्यवस्था थी। न्याय और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अधिकारियों की नियुक्ति
की जाती थी।
• गुप्तचर व्यवस्था: साम्राज्य
में गुप्तचरों का विस्तृत जाल था, जो अधिकारियों तथा जनता की गतिविधियों की जानकारी
राजा तक पहुँचाता था।
• अशोक का प्रशासन: अशोक ने धम्म
के प्रचार तथा जनकल्याण के लिए धम्म महामात्रों की नियुक्ति की।
2.
अर्थव्यवस्था
• कृषि: मौर्य अर्थव्यवस्था का
मुख्य आधार कृषि थी। राज्य सिंचाई की व्यवस्था तथा कृषि के विकास पर ध्यान देता था।
• भूमि कर: किसानों से उपज का
एक निश्चित भाग कर के रूप में लिया जाता था। यह राज्य की आय का प्रमुख स्रोत था।
• व्यापार एवं वाणिज्य: आंतरिक
और बाहरी व्यापार विकसित था। सड़क तथा जलमार्गों के माध्यम से वस्तुओं का आदान-प्रदान
होता था।
• उद्योग एवं शिल्प: धातु-कर्म,
वस्त्र निर्माण, मिट्टी के बर्तन, आभूषण तथा अन्य हस्तशिल्प विकसित थे।
• राजकीय नियंत्रण: खनन, वन,
नमक और कुछ महत्वपूर्ण उद्योगों पर राज्य का नियंत्रण था।
• मुद्रा व्यवस्था: व्यापार में
पंच-चिह्नित सिक्कों का प्रयोग किया जाता था।
• सिंचाई: बाँध, जलाशय और नहरों
के निर्माण से कृषि को बढ़ावा दिया गया।
49 महाभारत को इतिहास और साहित्य दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण क्यों
माना जाता है?
उत्तर- महाभारत भारतीय संस्कृति का
एक महान महाकाव्य है। इसे इतिहास और साहित्य दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जाता
है।
इतिहास
की दृष्टि से
• प्राचीन समाज का चित्रण – महाभारत
में तत्कालीन सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक जीवन का विस्तृत वर्णन मिलता है।
• राजनीतिक व्यवस्था – इसमें
राजतंत्र, राज्य संचालन, युद्ध, कूटनीति और शासन व्यवस्था की जानकारी मिलती है।
• सामाजिक जीवन – परिवार, विवाह,
स्त्रियों की स्थिति, वर्ण व्यवस्था तथा विभिन्न सामाजिक परंपराओं का वर्णन मिलता है।
• ऐतिहासिक परंपराओं का स्रोत
– कुरु, पांचाल, यादव आदि विभिन्न जनों और राजवंशों का उल्लेख मिलता है, जिससे प्राचीन
भारतीय इतिहास को समझने में सहायता मिलती है।
साहित्य
की दृष्टि से
• महान महाकाव्य – महाभारत विश्व
के सबसे विशाल महाकाव्यों में से एक है।
• समृद्ध कथानक – इसमें युद्ध,
प्रेम, त्याग, धर्म, राजनीति, वीरता और मानवीय भावनाओं से जुड़ी अनेक कथाएँ हैं।
• भगवद्गीता – महाभारत का प्रमुख
भाग भगवद्गीता है, जिसमें कर्म, ज्ञान और भक्ति का गहन दार्शनिक विवेचन मिलता है।
• भाषा और शैली – इसकी भाषा, संवाद, चरित्र-चित्रण और काव्यात्मक शैली भारतीय साहित्य पर अत्यंत प्रभावशाली रही है।
50 प्राचीन भारतीय समाज में जाति व्यवस्था की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर- प्राचीन भारतीय समाज में जाति
व्यवस्था सामाजिक संगठन का एक महत्वपूर्ण आधार थी। प्रारंभ में यह व्यवस्था मुख्यतः
कर्म और व्यवसाय पर आधारित थी, लेकिन बाद में यह जन्म पर आधारित और अधिक कठोर होती
गई।
• सामाजिक संगठन – जाति व्यवस्था
ने समाज को विभिन्न समूहों में बाँटकर सामाजिक कार्यों का विभाजन किया।
• व्यवसाय का निर्धारण – अलग-अलग
जातियों के लिए विशेष व्यवसाय निर्धारित हो गए, जिससे कार्यों में विशेषज्ञता विकसित
हुई।
• सामाजिक स्थिरता – जाति और
परंपराओं के निश्चित नियमों ने सामाजिक जीवन में स्थिरता और अनुशासन बनाए रखने में
सहायता की।
• धार्मिक एवं सांस्कृतिक भूमिका
– प्रत्येक जाति के अपने रीति-रिवाज, परंपराएँ और सामाजिक नियम विकसित हुए, जिससे भारतीय
संस्कृति की विविधता बढ़ी।
• असमानता को बढ़ावा – समय के
साथ जाति व्यवस्था कठोर और जन्म-आधारित हो गई। इससे ऊँच-नीच, भेदभाव और सामाजिक असमानता
बढ़ी।
• निम्न वर्गों की स्थिति – कुछ जातियों को सामाजिक और धार्मिक अधिकारों से वंचित किया गया तथा उन्हें समाज में निम्न स्थान प्राप्त हुआ। इससे उनकी सामाजिक उन्नति के अवसर सीमित हुए।
51 बौद्ध धर्म के उदय एवं प्रसार के कारणों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर- बौद्ध धर्म का उदय छठी शताब्दी
ईसा पूर्व में गौतम बुद्ध के उपदेशों से हुआ। उस समय समाज में अनेक धार्मिक और सामाजिक
समस्याएँ थीं। इन्हीं परिस्थितियों ने बौद्ध धर्म के उदय और प्रसार में सहायता की।
1.
उदय के कारण
• कर्मकांडों की अधिकता: वैदिक
धर्म में जटिल यज्ञ और कर्मकांड बढ़ गए थे, जिससे सामान्य लोग सरल धार्मिक मार्ग चाहते
थे।
• जाति व्यवस्था की कठोरता: समाज
में ऊँच-नीच और भेदभाव बढ़ रहा था। बुद्ध ने सभी मनुष्यों की समानता पर जोर दिया।
• ब्राह्मणों का प्रभुत्व: धार्मिक
जीवन में पुरोहित वर्ग का प्रभाव बढ़ गया था। बुद्ध ने मोक्ष के लिए पुरोहित या जटिल
यज्ञ को आवश्यक नहीं माना।
• सरल एवं नैतिक शिक्षा: बुद्ध
ने अहिंसा, सत्य, करुणा और मध्यम मार्ग जैसे सरल सिद्धांतों पर बल दिया।
• नए नगरों और व्यापारियों का
विकास: व्यापारियों और नगरों के विकास के कारण ऐसे धर्म की आवश्यकता महसूस हुई जो उनकी
सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के अनुकूल हो।
2.
प्रसार के कारण
• गौतम बुद्ध का प्रभावशाली व्यक्तित्व:
बुद्ध ने सरल भाषा में अपने विचारों का प्रचार किया, जिससे लोग आसानी से समझ सके।
• पालि भाषा का प्रयोग: बौद्ध
भिक्षुओं ने जनसामान्य की भाषा में उपदेश दिए, जिससे धर्म तेजी से लोकप्रिय हुआ।
• राजकीय संरक्षण: सम्राट अशोक
ने बौद्ध धर्म को संरक्षण दिया और उसके प्रचार के लिए अनेक प्रयास किए।
• संघ की स्थापना: बौद्ध संघ
ने भिक्षुओं को संगठित किया और उन्हें विभिन्न क्षेत्रों में धर्म प्रचार के लिए भेजा।
• व्यापारियों का सहयोग: व्यापारियों
ने बौद्ध भिक्षुओं और विहारों को आर्थिक सहायता दी।
• विदेशों में प्रचार: अशोक के
समय बौद्ध धर्म का प्रसार श्रीलंका तथा अन्य क्षेत्रों तक हुआ।
52 साँची स्तूप को भारतीय कला एवं स्थापत्य का उत्कृष्ट उदाहरण क्यों
माना जाता है?
उत्तर- साँची स्तूप मध्य प्रदेश में
स्थित प्राचीन बौद्ध स्मारक है। इसे भारतीय कला एवं स्थापत्य का उत्कृष्ट उदाहरण माना
जाता है क्योंकि इसमें स्थापत्य, मूर्तिकला और धार्मिक प्रतीकों का सुंदर समन्वय दिखाई
देता है।
• विशाल गुम्बद – इसका अर्धगोलाकार
गुम्बद इसकी प्रमुख स्थापत्य विशेषता है।
• चार भव्य तोरण – चारों दिशाओं
में बने तोरणों पर जातक कथाओं, बुद्ध के जीवन तथा तत्कालीन जनजीवन के सुंदर दृश्य उकेरे
गए हैं।
• सुंदर नक्काशी – पत्थरों पर
पशु-पक्षी, पेड़-पौधे, मानव आकृतियाँ और धार्मिक प्रतीकों की अत्यंत कलात्मक नक्काशी
की गई है।
• प्रतीकात्मक कला – बुद्ध को
मानव रूप में न दिखाकर धर्मचक्र, पदचिह्न, बोधिवृक्ष और खाली सिंहासन जैसे प्रतीकों
द्वारा दर्शाया गया है।
• सुव्यवस्थित संरचना – वेदिका,
प्रदक्षिणा-पथ, हर्मिका और छत्र इसकी स्थापत्य योजना को पूर्णता प्रदान करते हैं।
• धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व
– साँची में बौद्ध धर्म के साथ-साथ उस समय के सामाजिक जीवन, वेशभूषा, रीति-रिवाज और
प्रकृति का भी चित्रण मिलता है।
हजारीबाग प्री बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षा-01(2026-27)
कक्षा
12 विषय - इतिहास
समय:
3 घण्टा पूर्णांक: 80
सामान्य निर्देश:
1. परीक्षार्थी यथासंभव अपने
शब्दों में उत्तर दें।
2. सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
3. कुल प्रश्नों की संख्या
52 है।
4. प्रश्न संख्या 01 से 30
तक बहुविकल्पीय प्रश्न हैं। प्रत्येक प्रश्न के चार विकल्प दिए गए हैं। सही विकल्प
का चयन कीजिए। प्रत्येक प्रश्न के लिए 01 अंक निर्धारित है।
5. प्रश्न संख्या 31 से 38
तक अति लघु उत्तरीय प्रश्न हैं, जिनमें से किन्हीं 6 प्रश्नों का उत्तर देना अनिवार्य
है। प्रत्येक प्रश्न का मान 2 अंक निर्धारित है।
6. प्रश्न संख्या 39 से 46
तक लघु उत्तरीय प्रश्न हैं, जिनमें से किन्हीं 6 प्रश्नों का उत्तर देना अनिवार्य है।
प्रत्येक प्रश्न का मान 3 अंक निर्धारित है।
7. प्रश्न संख्या 47 से 52
तक दीर्घ उत्तरीय प्रश्न हैं, जिनमें से किन्हीं 4 प्रश्नों का उत्तर देना अनिवार्य
है। प्रत्येक प्रश्न का मान 5 अंक निर्धारित है।
खण्ड - क
खण्ड क में कुल 30 बहुविकल्पीय
प्रश्न हैं। प्रत्येक प्रश्न का मान 1 अंक निर्धारित है।
1. सिन्धु घाटी
निवासियों को किस धातु का ज्ञान नहीं था?
(a) सोना
(b) लोहा
(c) ताम्बा
(d) चाँदी
2. काली चूड़ियों
के नाम से कौन सा स्थान प्रसिद्ध है?
(a) मोहनजोदड़ो
(b) लोथल
(c) रंगपुर
(d) कालीबंगा
3. पाटलीपुत्र
शहर की स्थापना किसने की थी?
(a) बिम्बिसार
(b) अजातशत्रु
(c) उदयन / उदय
भद्र
(d) मुंडक
4. मेगास्थनीज
किस देश का निवासी था?
(a) अरब
(b) फ्रांस
(c) पुर्तगाल
(d) यूनान
5. हरिषेण की
प्रयाग प्रशस्ति किससे संबंधित है?
(a) चन्द्रगुप्त
(b) श्रीगुप्त
(c) समुद्रगुप्त
(d) रामगुप्त
6. साँची स्तूप
की खोज किसने की थी?
(a) जे० टेलर
(b) ए० कनिंघम
(c) एफ० सी० मेसी
(d) एम० कॉल
7. पाटलीपुत्र
: मौर्य : : उज्जैन : ?
(a) गुप्त काल
(b) चोल काल
(c) मुगल काल
(d) सल्तनत काल
8. भारत में
सर्वप्रथम कौन विदेशी यात्री आया था?
(a) हेनसांग
(b) इब्न बतूता
(c) मार्को पोलो
(d) फाह्यान
9. जैनियों की
भाषा क्या थी?
(a) पालि
(b) प्राकृत
(c) संस्कृत
(d) यूनानी
10. 'गोत्र'
शब्द का संबंध किससे है?
(a) कृषि
(b) व्यापार
(c) युद्ध
(d) विवाह
11. किस पुराण
में मौर्य शासकों का वर्णन है?
(a) वायु पुराण
(b) मत्स्य पुराण
(c) विष्णु पुराण
(d) गरुड़ पुराण
12. महात्मा
बुद्ध को निर्वाण की प्राप्ति कहाँ हुई थी?
(a) बोधगया
(b) सारनाथ
(c) लुम्बिनी
(d) कुशीनगर
13. बंधुत्व
का अर्थ क्या है?
(a) राजनीतिक संबंध
(b) रिश्तेदार
का संबंध
(c) व्यापारिक संबंध
(d) आर्थिक संबंध
14. मनुस्मृति
किस प्रकार का ग्रंथ है?
(a) धर्मशास्त्र
(b) यात्रा वृतांत
(c) नाटक
(d) अभिलेख
15. हाथीगुंफा
अभिलेख किससे संबंधित है?
(a) रुद्रदामन
(b) स्कंदगुप्त
(c) विजयासेन
(d) खारवेल
16. महावीर स्वामी
का जन्म कहाँ हुआ था?
(a) काशी
(b) कपिलवस्तु
(c) कुंडग्राम
(d) पावापुरी
17. बुद्ध के
उपदेशों का संग्रह किस नाम से प्रसिद्ध है?
(a) वेद
(b) त्रिपिटक
(c) पुराण
(d) आगम
18. बुद्ध के
जीवन की घटनाओं का सही क्रम क्या है?
(a) जन्म
-> ज्ञान -> पहला उपदेश -> महापरिनिर्वाण
(b) जन्म -> उपदेश
-> ज्ञान -> महापरिनिर्वाण
(c) ज्ञान -> जन्म
-> उपदेश -> महापरिनिर्वाण
(d) उपदेश -> जन्म
-> ज्ञान -> महापरिनिर्वाण
19. जैन धर्म
में 'त्रिरत्न' में क्या शामिल है?
(a) सम्यक दर्शन,
सम्यक ज्ञान, सम्यक चरित्र
(b) सत्य, अहिंसा, अस्तेय
(c) बुद्ध, धम्म, संघ
(d) ज्ञान, कर्म, भक्ति
20. अल-बिरूनी
का जन्म कहाँ हुआ था?
(a) मिस्र
(b) मोरक्को
(c) तंजानिया
(d) ख्वारिज्म
21. निम्न में
से कौन एक विदेशी यात्री चिकित्सक था?
(a) अल-बिरूनी
(b) बर्नियर
(c) इब्न बतूता
(d) मार्को पोलो
22. हम्पी नगर
किस साम्राज्य से संबंधित है?
(a) मौर्य साम्राज्य
(b) विजयनगर
साम्राज्य
(c) गुप्त साम्राज्य
(d) बहमनी साम्राज्य
23. विजयनगर
में राजा द्वारा असैनिक और सैनिक सेवा के लिए दिया जाने वाला भूमिदान कहलाता था?
(a) जागीर
(b) विष्टि
(c) इक्ता
(d) अमरम
24. भारत में
प्रचलित सती प्रथा का उल्लेख किस विदेशी यात्री ने किया?
(a) बर्नियर
(b) अल-बिरूनी
(c) इब्न बतूता
(d) अल-मसूदी
25. लिंगायत
परंपरा के प्रमुख प्रवर्तक कौन थे?
(a) बसवन्ना
(b) कबीर
(c) तुलसीदास
(d) सूरदास
26. मीराबाई
किसकी भक्त थी?
(a) शिव
(b) राम
(c) कृष्ण
(d) बुद्ध
27. सिख परंपरा
के संस्थापक कौन थे?
(a) गुरु नानक
देव
(b) अर्जुन देव
(c) गुरु गोविंद सिंह
(d) कबीर
28. शैव धर्म
के अनुयायी जाने जाते थे?
(a) नयनार
(b) अलवार
(c) भागवत
(d) तीर्थंकर
29. सूफी आश्रम
या निवास स्थान को क्या कहा जाता था?
(a) सभा
(b) मठ
(c) खानकाह
(d) विहार
30. बीजक किस
संत की रचनाओं से संबंधित है?
(a) मीराबाई
(b) कबीर
(c) चैतन्य
(d) सूरदास
खण्ड - ख (अति लघु उत्तरीय प्रश्न)
(खण्ड-ख में प्रश्न संख्या
31-38 अति लघु उत्तरीय प्रश्न हैं। इनमें से किन्हीं छह प्रश्नों के उत्तर दीजिए। प्रत्येक
प्रश्न का मान 2 अंक निर्धारित है।)
31. हड़प्पा
सभ्यता के नगर योजना की मुख्य विशेषता क्या थी?
उत्तर- हड़प्पा सभ्यता की नगर योजना की सबसे मुख्य विशेषता इसकी
ग्रिड प्रणाली पर आधारित सुव्यवस्थित वैज्ञानिक संरचना और उन्नत जल निकासी प्रणाली
थी।
32. हिंदू धर्म
के दो महाकाव्यों का नाम लिखें।
उत्तर- हिंदू धर्म के दो प्रमुख महाकाव्य रामायण और महाभारत हैं।
33. मौर्यकालीन
इतिहास जानने के प्रमुख स्रोत क्या हैं?
उत्तर- मौर्यकालीन इतिहास जानने के प्रमुख
स्रोत- साहित्यिक और पुरातात्विक (अभिलेख व सामग्री) है।
34. अशोक के
अभिलेखों में उपयोग में लाई गई दो लिपियों का नाम लिखें।
उत्तर- सम्राट अशोक के अभिलेखों में मुख्य
रूप से ब्राह्मी लिपि और खरोष्ठी लिपि का उपयोग किया गया था।
35. विजयनगर
साम्राज्य की स्थापना कब और किसके द्वारा हुई?
उत्तर- विजयनगर साम्राज्य की स्थापना 1336
ईस्वी में दो भाइयों, हरिहर प्रथम और बुक्का राय प्रथम द्वारा की गई थी।
36. विजयनगर
और बहमनी राज्य के बीच संघर्ष का क्या कारण था?
उत्तर- विजयनगर साम्राज्य और बहमनी सल्तनत
के बीच मुख्य संघर्ष का कारण रायचूर दोआब क्षेत्र और आर्थिक व सामरिक प्रभुत्व पर नियंत्रण
था।
37. अल-बिरूनी
द्वारा रचित पुस्तक का क्या नाम है?
उत्तर- अलबरूनी की सबसे प्रसिद्ध पुस्तक का
नाम किताब-उल-हिंद (जिसे तहकीक-ए-हिंद भी कहा जाता है) है।
38. भारत में
प्रमुख सूफी सिलसिलों के नाम लिखें।
उत्तर- भारत में प्रमुख सूफी सिलसिलों के नाम
हैं—
1. चिश्ती सिलसिला
2. सुहरावर्दी सिलसिला
3. कादरी सिलसिला
4. नक्शबंदी सिलसिला
5. फिरदौसी सिलसिला
खण्ड - ग (लघु उत्तरीय प्रश्न)
(खण्ड-ग में प्रश्न संख्या
39-46 लघु उत्तरीय प्रश्न हैं। इनमें से किन्हीं छह प्रश्नों के उत्तर दीजिए। प्रत्येक
प्रश्न का मान 3 अंक निर्धारित है। उत्तर लगभग 150 शब्दों में दें।)
39. हड़प्पा
सभ्यता को सिन्धु घाटी सभ्यता क्यों कहा जाता है?
उत्तर- हड़प्पा सभ्यता को इसलिए सिंधु घाटी सभ्यता कहा जाता है क्योंकि यह सभ्यता
मुख्य रूप से सिंधु नदी और उसके सहायक नदियों के किनारे विकसित हुई थी। इस सभ्यता
के प्रमुख नगर हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, तथा अन्य स्थल सिंधु घाटी क्षेत्र में स्थित
हैं।
सिंधु पद्धति से आशय: यह सिंधु नदी और उसके निकटवर्ती
क्षेत्रों में विकसित संस्कृति, कृषि, नगर नियोजन, और व्यापारिक पद्धतियों को
दर्शाने वाला शब्द है।
40. अभिलेख किसे
कहते हैं? इनका क्या महत्व है?
उत्तर- अभिलेख
उन्हें कहते हैं जो धातु, पत्थर, मिट्टी के बर्तन की कठोर सतह पर खुदे होते हैं।
इनमें उन लोगो के क्रियाकलाप उपलधिया व विचार लिखे होते हैं जो इन्हें बनवाते है।
खासतौर पर राजाओं के क्रियाकलाप व महिलाओं व पुरुषो द्वारा दिए गए दान का ब्योरा
होता है। अर्थात् वे स्थायी प्रमाण होते हैं।
41. गोत्र से
आप क्या समझते हैं?
उत्तर- गोत्र का
अर्थ है वंश या कुल। यह एक परिवार या वंश की पहचान होती है जो किसी प्राचीन ऋषि या
पूर्वज से जुड़ी होती है। हिंदू धर्म में, गोत्र का उपयोग विवाह में समान गोत्र के
लोगों के बीच विवाह न करने के लिए किया जाता है ताकि रक्त संबंधी निकटता से बचा जा
सके।
42. महाजनपद
किसे कहते हैं?
उत्तर- महाजनपद शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है — 'महाज' (बड़ा) और 'जनपद' (प्रदेश
या राज्य)। छठी शताब्दी ईसा पूर्व के समय भारत में छोटे-छोटे राज्य या जनपद थे।
समय के साथ इन जनपदों का विस्तार हुआ और वे बड़े राज्य बन गए, जिन्हें महाजनपद कहा
गया।
43. भक्ति आंदोलन
की दो विशेषताएँ लिखें।
उत्तर- भक्ति आंदोलन की मुख्य विशेषता ईश्वर के प्रति व्यक्तिगत प्रेम और भक्ति पर
जोर देना तथा जातिगत भेदभाव व कर्मकांडों का पूर्ण विरोध करना था।
44. अशोक ने
धम्म प्रचार में क्या-क्या उपाय किए?
उत्तर- कलिंग युद्ध के बाद सम्राट अशोक ने अपनी प्रजा के नैतिक व आध्यात्मिक उत्थान
के लिए 'धम्म' का मार्ग अपनाया और इसके प्रचार के लिए निम्नलिखित प्रमुख उपाय किए-
1. धम्म महामात्रों की नियुक्ति: समाज
में नैतिक आचरण, सद्भाव और जन-कल्याण की देखरेख के लिए 'धम्म महामात्र' नामक विशेष
अधिकारियों की नियुक्ति की गई।
2. शिलालेख और स्तंभ: आम जनता तक नैतिक
संदेश पहुँचाने के लिए साम्राज्य भर में चट्टानों और प्रस्तर स्तंभों पर प्राकृत भाषा
और स्थानीय लिपियों में धम्म आदेश उत्कीर्ण करवाए गए।
3. धम्म यात्राएँ: अशोक ने भोग-विलास वाली
'विहार यात्राओं' को बंद कर 'धम्म यात्राएँ' शुरू कीं, जिनके तहत वे स्वयं जनता से
मिलते, उपदेश देते और संतों व वृद्धों को दान देते थे।
4. विदेशों में प्रचारक: धम्म के वैश्विक प्रसार हेतु सीरिया,
मिस्र, ग्रीस तथा श्रीलंका में शांति दूत और प्रचारक मंडल भेजे गए ।
5. लोक-कल्याण और अहिंसा: पशु-बलि पर
रोक लगाई गई तथा मनुष्यों व पशुओं के लिए चिकित्सालय, कुएँ और छायादार वृक्षों की
व्यवस्था की गई ।
45. इब्न बतूता
के विषय में आप क्या जानते हैं?
उत्तर- इब्न
बतूता (1304–1369 ई.) मध्यकालीन विश्व के सबसे महान मुस्लिम यात्री, विद्वान और
लेखक थे। इनका जन्म 24 फरवरी 1304 को मोरक्को के टैंजियर नगर में हुआ था। इनका
पूरा नाम अबू अब्दुल्ला मुहम्मद इब्न बतूता था और ये एक प्रतिष्ठित बर्बर परिवार
से ताल्लुक रखते थे।
लगभग 21 वर्ष की आयु में 1325 में हज यात्रा के
उद्देश्य से घर से निकले इब्न बतूता अगले 30 वर्षों तक लगातार भ्रमण करते रहे। इस
दौरान इन्होंने उत्तरी अफ्रीका, मध्य पूर्व, भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया और चीन सहित
लगभग 44 देशों की यात्रा की। अनुमानतः इन्होंने कुल 75,000 मील (1,20,000 किमी) की
दूरी तय की, जो उस युग में अभूतपूर्व थी।
भारत में वे 1334 में दिल्ली पहुँचे और सुल्तान
मुहम्मद बिन तुगलक के दरबार में न्यायाधीश के पद पर नियुक्त हुए। बाद में चीन
राजदूत के रूप में भी गए। अपनी समस्त यात्राओं का विस्तृत वृत्तांत इन्होंने अरबी
भाषा में 'रिहला' (मेरी यात्राएँ) नामक पुस्तक में दर्ज किया, जो मध्यकालीन
इतिहास, भूगोल और समाज का अत्यंत महत्वपूर्ण स्रोत है। इनकी मृत्यु लगभग 1369 में
मोरक्को में हुई।
46. सूफी आंदोलन
ने समाज को क्या संदेश दिया?
उत्तर- सूफी आंदोलन ने समाज को प्रेम, भाईचारा, सहिष्णुता और मानव-समता का संदेश दिया।
इसने बताया कि ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग बाहरी कर्मकांड से अधिक अंतरात्मा की शुद्धि,
करुणा और सेवा में है।
सूफी संतों ने जाति-पाति, धार्मिक भेदभाव
और ऊँच-नीच का विरोध किया तथा सभी धर्मों के लोगों को समान सम्मान दिया। उनकी खानकाहें
शांति, सेवा और आपसी मेल-जोल के केंद्र बनीं, जहाँ गरीब, वंचित और सामान्य लोग भी सहजता
से जुड़ सकते थे।
इस प्रकार सूफी आंदोलन ने समाज में
सामाजिक समरसता, धार्मिक सद्भाव और मानवीय मूल्यों को मजबूत किया।
खण्ड - घ (दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)
(खण्ड-घ में प्रश्न संख्या
47 से 52 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न हैं। इनमें से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
प्रत्येक प्रश्न का मान 5 अंक निर्धारित है। उत्तर लगभग 250 शब्दों में दें।)
47. सिन्धु घाटी
सभ्यता के नगर निर्माण योजना की विवेचना कीजिए।
उत्तर - सिन्धु घाटी सभ्यता की नगर निर्माण योजना की प्रमुख विशेषताएँ
सुसंगठित नगर योजना: सिन्धु घाटी के नगर बहुत
सुव्यवस्थित और योजनाबद्ध थे। नगरों की सड़कों का जाल बिछा हुआ था, जो आमतौर पर
उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम दिशा में सीधे और चौड़े होते थे।
1. ग्रिड पैटर्न: नगरों की सड़कों का
ग्रिड पैटर्न था, जिससे यातायात और आवागमन में सुविधा होती थी। यह योजना आधुनिक
नगर नियोजन की मिसाल मानी जाती है।
2. उच्च और निम्न नगर: नगरों को दो
भागों में बांटा गया था - उच्च नगर (सिटी) और निम्न नगर (टाउनशिप)। उच्च नगर में
प्रशासनिक और धार्मिक स्थल होते थे, जबकि निम्न नगर में आवासीय क्षेत्र थे।
3. नालियों और जल निकासी व्यवस्था:
नगरों में अच्छी जल निकासी व्यवस्था थी। घरों के नीचे नालियाँ बनी होती थीं जो
गंदा पानी बाहर निकालती थीं। यह सभ्यता स्वच्छता के प्रति जागरूक थी।
4. मजदूरों के लिए आवास: नगरों में
मजदूरों और कारीगरों के लिए अलग-अलग आवासीय क्षेत्र होते थे।
5. किले और दीवारें: कई नगरों के
चारों ओर मजबूत दीवारें और किलेबंदी की गई थी, जो सुरक्षा के लिए थीं।
6. सार्वजनिक भवन: नगरों में
सार्वजनिक भवन, स्नानागार, और भंडारण गृह पाए गए हैं, जो सामाजिक और आर्थिक
गतिविधियों के लिए उपयोगी थे।
7. व्यवस्थित बाजार: नगरों में
व्यवस्थित बाजार होते थे जहाँ विभिन्न वस्तुओं का व्यापार होता था।
8. निर्माण सामग्री: घरों और भवनों के
निर्माण में ईंटों का उपयोग होता था, जो समान आकार की और अच्छी तरह से पकी हुई
होती थीं।
9. जल स्रोत: नगरों के पास कुएँ और
जलाशय होते थे, जिससे जल की आपूर्ति सुनिश्चित होती थी।
48. स्तूप क्यों
और कैसे बनाए जाते थे? चर्चा कीजिए।
उत्तर- स्तूप
का संस्कृत अर्थ टीला, ढेर या थूहा होता है। स्तूप का संबंध मृतक के दाह संस्कार से
था, मृतक के दाह संस्कार के बाद बची हुई अस्थियों को किसी पात्र में रखकर मिट्टी से
ढंक देने की प्रथा से स्तूप का जन्म हुआ। क्योंकि इस स्तूप में पवित्र अवशेष रखे होते
थे अतः समूचे स्तूप को बौद्ध धर्म के प्रतीक के रूप में प्रतिष्ठा प्राप्त हुई। पहले
मात्र भगवान बुद्ध के अवशेषों पर स्तूप बने बाद में बुद्ध के शिष्यों के अवशेषों पर
भी स्तूप निर्मित किए गए।
स्तुपों की संरचना स्तूप का
प्रारंभिक स्वरूप अर्ध गोलाकार मिलता है उसमें मेधी के ऊपर उल्टे कटोरे की आकृति का
हा पाया जाता है जिसे अंड कहते हैं, इस अंड की ऊपरी चोटी सिरे पर चपटी होती थी जिसके
ऊपर धातु पात्र रखा जाता था इसे हर्मिका कहते हैं। यह स्तूप का महत्वपूर्ण भाग माना
जाता था। हर्मिका का अर्थ देवताओं का निवास स्थान होता है।
स्तूप को चारों ओर से एक दीवार
द्वारा घेर दिया जाता है। जिसे वेदिका कहते हैं। स्तूप तथा वेदिका के बीच परिक्रमा
लगाने के लिए बना स्थल प्रदक्षिणा पथ कहलाता है, कालांतर में वेदिका के चारों ओर चार
दिशाओं में प्रवेश द्वार बनाए गए | प्रवेश द्वार पर मेहराबदार तोरण बनाए गए। इस प्रकार
स्तूप की संरचना की गई।
49. महावीर जैन
के जीवन एवं उपदेशों का वर्णन करें।
उत्तर- उत्तर- महावीर जैन जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर थे।
उन्हें अहिंसा का प्रतीक माना जाता है और उनके उपदेशों ने लाखों लोगों के जीवन को
प्रभावित किया है।
महावीर का जीवन
• जन्म: महावीर का जन्म वैशाली गणराज्य के क्षत्रिय कुंडलपुर में हुआ था।
• त्याग और तपस्या: तीस वर्ष की आयु में उन्होंने संसार के सभी बंधनों को
त्याग कर संन्यास ग्रहण किया। बारह वर्षों तक कठोर तपस्या के बाद उन्हें कैवल्य
ज्ञान प्राप्त हुआ।
• उपदेश: ज्ञान प्राप्ति के बाद उन्होंने लोगों को अपने उपदेश देने शुरू किए।
• निर्वाण: 72 वर्ष की आयु में पावापुरी में उनका निर्वाण हुआ।
महावीर के उपदेश
• महावीर के उपदेश मुख्यतः अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, ब्रह्मचर्य और अस्तेय पर
केंद्रित थे।
• अहिंसा: महावीर ने सभी जीवों के प्रति अहिंसा का महत्व बताया। उन्होंने
हिंसा को सबसे बड़ा पाप माना।
• सत्य: उन्होंने सत्य बोलने को सर्वोपरि बताया।
• अपरिग्रह: उन्होंने संपत्ति के मोह को त्यागने और सरल जीवन जीने का उपदेश
दिया।
• ब्रह्मचर्य: उन्होंने इंद्रियों पर संयम रखने और ब्रह्मचर्य का पालन करने का
महत्व बताया।
• अस्तेय: उन्होंने चोरी न करने का उपदेश दिया।
50. विजयनगर
के शासक कृष्णदेव राय की उपलब्धियों के बारे में लिखें।
उत्तर- कृष्णदेव
राय विजयनगर साम्राज्य के सबसे महान शासकों में से एक थे। उनके शासनकाल में
साम्राज्य राजनीतिक, सैन्य, आर्थिक और सांस्कृतिक सभी क्षेत्रों में अपने चरम पर
पहुँचा।
वे एक कुशल सेनानायक थे और उन्होंने कई अभियानों
द्वारा साम्राज्य का विस्तार किया। उन्होंने उड़ीसा, बहमनी सुल्तानों और अन्य
शक्तियों के विरुद्ध सफल युद्ध किए, जिससे विजयनगर की प्रतिष्ठा बहुत बढ़ी। उनके
शासन में सेना संगठित और शक्तिशाली थी, इसलिए साम्राज्य की सीमाएँ सुरक्षित रहीं।
कृष्णदेव राय ने प्रशासन में भी सुधार किए। उन्होंने
बंजर भूमि को कृषि योग्य बनाने का प्रयास किया और कुछ अलोकप्रिय करों को कम या
समाप्त किया। इससे कृषि और राज्य की आय दोनों को लाभ हुआ। व्यापार को भी
प्रोत्साहन मिला, जिससे विजयनगर आर्थिक रूप से समृद्ध बना।
सांस्कृतिक क्षेत्र में उनका योगदान अत्यंत
महत्वपूर्ण था। वे स्वयं एक विद्वान और कवि थे तथा तेलुगु भाषा की प्रसिद्ध कृति
अमुक्तमाल्यद के रचयिता थे। उनके दरबार में अनेक विद्वानों, कवियों और कलाकारों को
संरक्षण मिला, जिससे साहित्य, कला और स्थापत्य का विकास हुआ। मंदिरों और भवनों के
निर्माण से विजयनगर की भव्यता और बढ़ी।
धार्मिक सहिष्णुता भी उनके शासन की विशेषता थी।
विदेशी यात्रियों ने उनके राज्य में न्याय, शांति और सहिष्णुता की प्रशंसा की थी।
इसलिए कृष्णदेव राय को विजयनगर के स्वर्ण युग का शासक कहा जाता है।
अतः कृष्णदेव राय की उपलब्धियाँ उन्हें केवल एक
विजेता ही नहीं, बल्कि एक महान प्रशासक, संरक्षक और साहित्य-प्रेमी शासक के रूप
में प्रतिष्ठित करती हैं।
51. प्रसिद्ध
यात्री बर्नियर ने भारतीय समाज एवं अर्थव्यवस्था का किस प्रकार वर्णन किया?
उत्तर- फ्रांसीसी
चिकित्सक एवं यात्री फ्रांस्वा बर्नियर (1620–1688) ने 1656 से 1668 ई. तक मुगल
साम्राज्य में निवास कर भारतीय समाज और अर्थव्यवस्था का विस्तृत विवरण प्रस्तुत
किया। उनकी टिप्पणियाँ मुख्यतः उनकी रचनाओं, विशेषकर ‘ट्रैवल्स इन द मोघल इंडिया’
में मिलती हैं, जो उन्होंने फ्रांस के राजा लुई चौदह और अन्य यूरोपीय अधिकारियों
को लिखे पत्रों के रूप में तैयार कीं ।
समाज का वर्णन: बर्नियर ने भारतीय समाज को अत्यंत
ध्रुवीकृत चित्रित किया। उनके अनुसार, समाज केवल दो वर्गों में विभाजित था—एक
अत्यंत धनी और शक्तिशाली शासक वर्ग (अमीर और नवाब) और दूसरा अत्यंत गरीब जनसमूह।
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि “भारत में कोई मध्यम वर्ग नहीं है” । उनकी दृष्टि
में सबसे अमीर और सबसे गरीब के बीच कोई ऐसा सामाजिक समूह नहीं था जिसे नाम देने
योग्य माना जा सके। उन्होंने भारतीय शहरों को अविकसित और दूषित वातावरण वाला
बताया, जहाँ जीवन स्तर निम्न था ।
अर्थव्यवस्था का विश्लेषण: आर्थिक दृष्टि से बर्नियर
ने मुगल भू-स्वामित्व प्रणाली की कड़ी आलोचना की। उन्होंने लिखा कि यूरोप के
विपरीत भारत में निजी भूमि-स्वामित्व का अभाव था; सारी भूमि का स्वामी सम्राट होता
था, जो उसे अपने मनमाफिक अमीरों में बाँट देता था । बर्नियर के अनुसार, इस
व्यवस्था ने कृषि विकास को रोक दिया, क्योंकि भू-धारक अपनी भूमि को स्थायी संपत्ति
न मानने के कारण दीर्घकालिक निवेश या सुधार नहीं करते थे। इससे कृषि उत्पादन
प्रभावित हुआ, किसानों का शोषण बढ़ा और समग्र अर्थव्यवस्था कमजोर पड़ी । उन्होंने
चेतावनी दी कि यदि यूरोपीय शासकों ने मुगल मॉडल अपनाया तो उनका विनाश निश्चित है।
बर्नियर का यह द्विआधारी दृष्टिकोण (भारत बनाम यूरोप)
आलोचनात्मक रहा है, क्योंकि उन्होंने भारतीय जमींदारों, मध्यम वर्ग के व्यापारियों
और समृद्ध कृषि क्षेत्रों की उपेक्षा की, फिर भी उनका विवरण मुगल काल की
सामाजिक-आर्थिक स्थितियों को समझने का एक महत्वपूर्ण स्रोत बना हुआ है ।
52. गुरु नानक
के मुख्य उपदेशों का वर्णन कीजिए।
उत्तर- गुरु नानक देव जी के
उपदेशों का सार निम्नलिखित है:
1. एक ईश्वर: गुरु
नानक देव जी ने एक ईश्वर में विश्वास किया और सभी धर्मों को एक ही सत्य का अलग-अलग
रास्ता बताया।
2. सर्वसमत्व: उन्होंने
जाति, धर्म, लिंग और रंग के आधार पर भेदभाव का विरोध किया और सभी मनुष्यों को समान
माना।
3. कर्मकांडों का विरोध: उन्होंने
बाहरी कर्मकांडों और रीति-रिवाजों का विरोध किया और आंतरिक शुद्धता पर बल दिया।
4. नाम जपो, किरत करो, वंड
छको:
गुरु नानक देव जी ने ईश्वर का नाम जपना, ईमानदारी से काम करना और दूसरों के साथ बांटना
का संदेश दिया।
5. सत्संग: उन्होंने
सत्संग (संतों की संगति) को आत्मिक विकास का एक महत्वपूर्ण साधन बताया।
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