12th POLITICAL SCIENCE PRE BOARD EXAMINATION ANSWER KEY - 2026-27

12th POLITICAL SCIENCE PRE BOARD EXAMINATION ANSWER KEY - 2026-27

12th POLITICAL SCIENCE PRE BOARD EXAMINATION  ANSWER KEY - 2026-27

FIRST TERMINAL EXAMINATION - 2026-27

Class - XII POLITICAL SCIENCE

सामान्य निर्देश :-

• प्रश्न संख्या 1 से 30 तक बहुविकल्पीय प्रश्न है। प्रत्येक प्रश्न के चार विकल्प है। सही विकल्प चुनकर उत्तर पुस्तिका में लिखे। प्रत्येक प्रश्न 1 अंक का है।

• प्रश्न संख्या 31 से 38 तक अति लघुउत्तरीय प्रश्न हैं। किन्हीं छः प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक प्रश्न के लिए 2 अंक निर्धारित है।

• प्रश्न संख्या 39 से 46 तक लघुउत्तरीय प्रश्न हैं। किन्हीं छः प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक प्रश्न के लिए 3 अंक निर्धारित है।

• प्रश्न संख्या 47 से 52 तक दीर्घ उत्तरीय प्रश्न हैं। किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक प्रश्न के लिए 5 अंक निर्धारित है।

Part - A (बहुविकल्पीय प्रश्न) 30 x 1=30

1. सोवियत संघ का विघटन कब हुआ था?

A) 1989

B) 1991

C) 1995

D) 2000

2. संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) की स्थापना कब हुई?

A)1945

B) 1950

C) 1960

D) 1975

3. गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) का पहला सम्मेलन कहाँ हुआ था?

A) भारत

B) मिस्र

C) बेलग्रेड

D) चीन

4. शीत युद्ध किन दो महाशक्तियों के बीच था?

A) भारत और चीन

B) अमेरिका और सोवियत संघ

C) जापान और रूस

D) ब्रिटेन और फ्रांस

5. भारत की विदेश नीति की मुख्य विशेषता क्या है?

A) उपनिवेशवाद

B) गुटनिरपेक्षता

C) सैन्यवाद

D) विस्तारवाद

6. सोवियत संघ के अंतिम राष्ट्रपति कौन थे?

A) लेनिन

B) स्टालिन

C) मिखाइल गोर्बाचेव

D) पुतिन

7. वैश्वीकरण का संबंध किससे है?

A) देशों के बीच बढ़ते संबंध

B) युद्ध

C) अलगाव

D) सम्राज्यवाद

8. SAARC की स्थापना कब हुई?

A) 1985

B) 1991

C) 1975

D) 2000

9. भारत के प्रथम प्रधानमंत्री कौन थे?

A) महात्मा गांधी

B) जवाहरलाल नेहरू

C) सरदार पटेल

D) राजेंद्र प्रसाद

10. मानव सुरक्षा मुख्य रूप से किस पर केंद्रित है?

A) केवल सेना

B) व्यक्ति की सुरक्षा

C) हथियार

D) युद्ध

11. संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रथम महासचिव कौन थे?

A) ट्रिग्वे ली

B) बान की मून

C) कोफी अन्नान

D) एंटोनियो गुटेरेस

12. शीत युद्ध के दौरान पश्चिमी गुट का नेता कौन सा देश था?

A) सोवियत संघ

B) अमेरिका

C) चीन

D) भारत

13. पूर्वी गुट का नेतृत्व किस देश ने किया?

A) अमेरिका

B) ब्रिटेन

C) सोवियत संघ

D) फ्रांस

14. NATO की स्थापना किस वर्ष हुई थी?

A) 1945

B) 1949

C) 1955

D) 1961

15. वारसा संधि का गठन कब हुआ था ?/

A) 1949

B) 1955

C) 1965

D) 1975

16. सैन्य गठबंधनों से दूर रहने की नीति कहलाती हैः

A) वैश्वीकरण

B) गुटनिरपेक्षता

C) उदारीकरण

D) निजीकरण

17. भारत की विदेश नीति का निर्माता किसे माना जाता है?

A) सरदार पटेल

B) जवाहरलाल नेहरू

C) सुभाष चंद्र बोस

D) राजेंद्र प्रसाद

18. संयुक्त राष्ट्र संघ का मुख्यालय कहाँ स्थित है?

A) जिनेवा

B) पेरिस

C) न्यूयॉर्क

D) लंदन

19 ASEAN की स्थापना कब हुई थी?

A) 1967

B) 1975

C) 1985

D) 1991

20. यूरोपीय संघ का गठन मास्ट्रिष्ट संधि द्वारा कब हुआ?

A) 1989

B) 1992

C) 1995

D) 2000

21 GATT के स्थान पर किस संगठन की स्थापना हुई?

A) IMF

B) WTO

C) UNO

D) SAARC

22 IMF का पूरा नाम है:

A) अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष

B) अंतरराष्ट्रीय सैन्य बल

C) भारतीय मुद्रा कोष

D) अंतरराष्ट्रीय बाजार मंच

23. पहला गुटनिरपेक्ष सम्मेलन कहाँ आयोजित हुआ था?

A) बेलग्रेड

B) दिल्ली

C) काहिरा

D) मॉस्को

24. भारत ने पहला परमाणु परीक्षण कब किया?

A) 1974

B) 1984

C) 1998

D) 2005

25. वैश्विक गाँव' शब्द किससे संबंधित है?

A) मार्शल मैक्लुहान

B) कार्ल मार्कस

C) लेनिन

D) गांधी

26 शीत युद्ध के समय द्वितीय विश्व किसे कहा जाता था?

A) अमेरिका

B) सोवियत संघ और उसके सहयोगी

C) विकासशील देश

D) यूरोपीय संघ

27 शीत युद्ध मुख्य रूप से किसका संघर्ष था?

A) सैन्य हमला

B) विचारधाराओं का

C) केवल व्यापार

D) धर्म

28. सोवियत संघ ने किस आर्थिक व्यवस्था को अपनाया था?

A) पूंजीवाद

B) समाजवाद

C) मिश्रित अर्थव्यवस्था

D) सामंतवाद

29 ग्लासनोस्त और पेरेस्त्रेइका की नीति किसने शुरू की?

A) लेनिन

B) स्टालिन

C) मिखाइल गोर्बाचेव

D) येल्तसिन

30. बर्लिन की दीवार कब गिरी?

A) 1985

B) 1989

C) 1991

D) 1995

Part-B Section - A (Subjective Type Quesrtion)

प्रश्न संख्या 31 से 38 तक अति लघुउत्तरीय प्रश्न हैं। किन्हीं छः प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक प्रश्न 2 अंक का है। 6x2=12

31 शीत युद्ध क्या है?

उत्तर- संयुक्त राज्य अमेरिका तथा सोवियत संघ के बीच वह तनावपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक स्थिति जो द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद 1945 ई. से 1990 ई. तक जारी रही, शीत युद्ध कहा जाता है।

32. शीत युद्ध की कोई दो विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर- शीत युद्ध की दो मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

1. प्रत्यक्ष युद्ध का अभाव: शीत युद्ध के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) और सोवियत संघ (USSR) के बीच कोई सीधा या प्रत्यक्ष सैन्य युद्ध नहीं हुआ। यह केवल कूटनीतिक तनाव, राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और वैचारिक मतभेदों तक सीमित था।

2. शस्त्रों की होड़ : दोनों महाशक्तियों के बीच अपनी ताकत बढ़ाने और एक-दूसरे से आगे निकलने के लिए परमाणु तथा अन्य घातक हथियारों के संचय (शस्त्रों की होड़) की तीव्र प्रतिस्पर्धा रही।

33. सोवियत संघ का विघटन कब हुआ?

उत्तर- सोवियत संघ (USSR) का आधिकारिक विघटन 26 दिसंबर 1991 को हुआ था।

34. सोवियत संघ के विघटन के कोई दो कारण लिखिए।

उत्तर-

1 राजनीतिक अस्थिरता: सोवियत संघ में एकदलीय शासन था जिसमें लोकतांत्रिक मूल्यों की कमी थी। इससे नागरिकों में असंतोष और राजनीतिक अस्थिरता बढ़ गई।

2. ग्लासनोस्त और पेरेस्त्रोइका नीतियाँ: मिखाइल गोर्बाचेव द्वारा लागू की गई खुली राजनीति (ग्लासनोस्त) और अर्थव्यवस्था में सुधार (पेरेस्त्रोइका) से शासन की कमजोरी उजागर हो गई, जिससे सोवियत संघ का विघटन तेज़ हो गया।

35. मिखाइल गोर्बाचेव कौन थे?

उत्तर- मिखाइल गोर्बाचेव (1931–2022) सोवियत संघ (USSR) के अंतिम नेता थे। वे 1985 से 1991 तक सोवियत संघ की कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव रहे और बाद में सोवियत संघ के पहले तथा एकमात्र राष्ट्रपति बने।

36 ग्लासनोस्त और पेरेस्त्रोइका से आप क्या समझते हैं?

उत्तर- पेरेस्त्रोइका: अर्थव्यवस्था में सुधार और कुछ हद तक बाज़ार-आधारित नीतियाँ लागू करने का प्रयास।

ग्लासनोस्त: शासन में अधिक पारदर्शिता, अभिव्यक्ति की अपेक्षाकृत अधिक स्वतंत्रता और मीडिया पर ढील।

37 गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) क्या है?

उत्तर- गुटनिरपेक्षता का अर्थ है किसी भी गुट में शामिल ना होना और अपनी स्वतंत्र नीतियों का अनुसरण करना।

38 NAM के कोई दो उद्देश्य लिखिए।

उत्तर- गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) के दो मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

1. स्वतंत्र विदेश नीति का संचालन करना: नए स्वतंत्र हुए और विकासशील देशों को किसी भी महाशक्ति या सैन्य गुट (जैसे शीत युद्ध के दौरान अमेरिका या सोवियत संघ) में शामिल होने से बचाना और उन्हें अपनी स्वतंत्र विदेश नीति अपनाने में सक्षम बनाना।

2. विश्व शांति और संप्रभुता की रक्षा: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना, साथ ही सदस्य देशों की राष्ट्रीय स्वतंत्रता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करना।

Section - B

प्रश्न संख्या 39 से 16 तक लघुउत्तरीय प्रश्न हैं। किन्हीं छः प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक प्रश्न 3 अंक का है। 6x3=18

39 सोवियत संघ के विघटन के कोई तीन कारणों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर- सोवियत संघ के विघटन (1991) के तीन प्रमुख कारण थे:

आर्थिक कमजोरी- सोवियत अर्थव्यवस्था लंबे समय से धीमी थी। अत्यधिक सैन्य खर्च और हथियारों की दौड़ के कारण जनता की आवश्यक वस्तुओं की कमी होने लगी और जीवन-स्तर प्रभावित हुआ।

गोर्बाचेव के सुधार- मिखाइल गोर्बाचेव ने पेरेस्त्रोइका और ग्लासनोस्त जैसे सुधार शुरू किए। इनसे राजनीतिक स्वतंत्रता और आलोचना बढ़ी, लेकिन व्यवस्था पर सरकार का नियंत्रण कमजोर हो गया।

राष्ट्रीयता की भावना का बढ़ना- सोवियत संघ के विभिन्न गणराज्यों में अपनी अलग पहचान और स्वतंत्र राष्ट्र बनने की मांग तेज हो गई। बाल्टिक देशों, यूक्रेन, जॉर्जिया आदि ने स्वतंत्रता की दिशा में कदम बढ़ाए, जिससे संघ कमजोर होता गया।

40 शीत युद्ध की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर- शीत युद्ध द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका और सोवियत संघ के बीच चला लंबे समय का राजनीतिक, वैचारिक और सैन्य तनाव था। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित थीं—

1. दो महाशक्तियों के बीच संघर्ष- अमेरिका और सोवियत संघ विश्व की दो प्रमुख महाशक्तियाँ बन गए और दोनों के बीच प्रभुत्व की प्रतिस्पर्धा शुरू हुई।

2. वैचारिक संघर्ष- अमेरिका पूँजीवाद और लोकतंत्र का समर्थक था, जबकि सोवियत संघ साम्यवाद का समर्थन करता था।

3. सैन्य गुटों का निर्माण- अमेरिका ने नाटो (NATO) और सोवियत संघ ने वारसा संधि (Warsaw Pact) जैसे सैन्य गुट बनाए।

4. हथियारों की होड़- दोनों देशों ने परमाणु हथियारों और आधुनिक सैन्य तकनीक का तेजी से विकास किया। इससे दुनिया में परमाणु युद्ध का खतरा बढ़ गया।

5. प्रत्यक्ष युद्ध से बचाव- अमेरिका और सोवियत संघ ने एक-दूसरे के विरुद्ध सीधे बड़े युद्ध से बचते हुए दूसरे देशों में अपने समर्थक पक्षों को सहायता दी। इसे प्रतिनिधि युद्ध (Proxy War) कहा जाता है।

6. विश्व का दो गुटों में विभाजन- अनेक देश अमेरिकी गुट या सोवियत गुट के साथ जुड़ गए, जबकि कुछ देशों ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) का रास्ता अपनाया।

41 गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) के कोई तीन उद्देश्य लिखिए ।

उत्तर- गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) का मुख्य उद्देश्य शीत युद्ध के दौरान किसी भी महाशक्ति गुट (अमेरिका या सोवियत संघ) में शामिल हुए बिना एक स्वतंत्र विदेश नीति अपनाना था।

1. किसी भी शक्ति-गुट में शामिल न होना और स्वतंत्र विदेश नीति अपनाना।

2. विश्व शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना तथा युद्ध और हथियारों की होड़ का विरोध करना।

3. उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद का विरोध करना तथा सभी देशों की स्वतंत्रता और संप्रभुता का समर्थन करना।

42 वैश्वीकरण का अर्थ और इसके प्रभाव समझाइए ।

उत्तर- वैश्वीकरण का तात्पर्य विश्व के विभिन्न समाजों और अर्थव्यस्थाओं के एकीकरण से है। यह उत्पादों, विचारों, दृष्टिकोणों, विभिन्न सांस्कृतिक पहलुओं आदि के आपसी विनिमय के परिणाम से उत्पन्न होता है।

वैश्वीकरण के प्रभाव

1. आर्थिक प्रभाव- विदेशी कंपनियों और निवेश में वृद्धि हुई तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार का विस्तार हुआ।

2. तकनीकी विकास- इंटरनेट, मोबाइल और आधुनिक संचार तकनीकों का तेजी से प्रसार हुआ।

3. रोजगार के अवसर- बहुराष्ट्रीय कंपनियों के विस्तार से कुछ क्षेत्रों में नए रोजगार के अवसर पैदा हुए।

4. प्रतिस्पर्धा में वृद्धि- घरेलू कंपनियों को विदेशी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ी, जिससे उत्पादों की गुणवत्ता और विविधता बढ़ी।

5. सांस्कृतिक प्रभाव- विभिन्न देशों की भाषाओं, खान-पान, पहनावे, संगीत और जीवन-शैली का आपसी प्रभाव बढ़ा।

6. नकारात्मक प्रभाव- छोटे और कमजोर उद्योगों पर दबाव बढ़ा तथा आर्थिक असमानता और रोजगार की असुरक्षा जैसी समस्याएँ भी बढ़ सकती हैं।

43.  भारत की विदेश नीति की कोई तीन विशेषताएँ बताइए ।

उत्तर- भारत की विदेश नीति की तीन प्रमुख विशेषताएँ

1. गुटनिरपेक्षता- भारत ने शीत युद्ध के समय किसी भी महाशक्ति के गुट में शामिल होने के बजाय स्वतंत्र विदेश नीति अपनाई।

2. पंचशील के सिद्धांत- भारत ने देशों के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने जैसे सिद्धांतों का समर्थन किया।

3. विश्व शांति का समर्थन- भारत युद्ध, उपनिवेशवाद और हथियारों की होड़ का विरोध करता है तथा अंतरराष्ट्रीय विवादों का शांतिपूर्ण समाधान चाहता है।

44. संयुक्त राष्ट्र संघ के महत्व की व्याख्या कीजिए ।

उत्तर- संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना 24 अक्टूबर 1945 को विश्व में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्य से की गई थी। इसका महत्व निम्नलिखित है—

1. विश्व शांति की स्थापना- यह देशों के बीच होने वाले विवादों को बातचीत और कूटनीति के माध्यम से हल करने का प्रयास करता है।

2. अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा- युद्ध, आतंकवाद और अन्य अंतरराष्ट्रीय संकटों से निपटने में सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाता है।

3. मानव अधिकारों की रक्षा- संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार, स्वतंत्रता और समानता की रक्षा के लिए विभिन्न कार्यक्रम चलाता है।

4. आर्थिक और सामाजिक विकास- गरीबी, बेरोजगारी, भुखमरी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी समस्याओं के समाधान में देशों की सहायता करता है।

5. अंतरराष्ट्रीय सहयोग- जलवायु परिवर्तन, महामारी, शरणार्थी समस्या और पर्यावरण जैसे वैश्विक मुद्दों पर देशों को मिलकर काम करने का मंच प्रदान करता है।

45. संयुक्त राष्ट्र संघ की तीन सीमाएँ लिखिए ।

उत्तर- संयुक्त राष्ट्र संघ की तीन सीमाएँ

1. सुरक्षा परिषद में वीटो शक्ति- पाँच स्थायी सदस्यों को वीटो का अधिकार प्राप्त है। इसके कारण किसी महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर एक देश की असहमति से निर्णय रुक सकता है।

2. निर्णयों को लागू करने में कठिनाई- संयुक्त राष्ट्र के पास अपने सभी निर्णयों को प्रभावी ढंग से लागू कराने की पर्याप्त शक्ति नहीं है।

3. महाशक्तियों का प्रभाव- शक्तिशाली देश अपने राजनीतिक और आर्थिक हितों के अनुसार संयुक्त राष्ट्र के निर्णयों को प्रभावित करते हैं, जिससे उसकी निष्पक्षता और प्रभावशीलता सीमित हो जाती है।

46 पारंपरिक और अपारंपरिक सुरक्षा में अंतर बताइए ।

उत्तर- पारम्परिक सुरक्षा और अपारम्परिक सुरक्षा में अन्तर :

(1) परम्परागत सुरक्षा की धारणा का सम्बंध मुख्यता बाह्य खतरों से होता है जबकि अपारम्परिक सुरक्षा की धारणा का सम्बंध बाह्य खतरों के साथ अन्य खतरनाक खतरों से होता है।

(2) परम्परागत सुरक्षा की धारणा में सैन्य खतरों को किसी देश के लिए सर्वाधिक खतरनाक माना जाता है जबकि अपारम्परिक सुरक्षा में सैन्य खतरे को ही नहीं अपितु मानवीय अस्तित्व पर प्रहार करने वाले व्यापक खतरों एवं अकांक्षाओं को भी खतरनाक समझा जाता है।

(3) परम्परागत सुरक्षा में खतरे का स्त्रोत कोई विदेशी देश होता है। अपारम्परिक सुरक्षा की धारणा मंह खतरे का स्त्रोत विदेशी राष्ट्र के साथ-साथ कोई अन्य भी हो सकता है।

(4) परम्परागत सुरक्षा में एक देश की सेना एवं नागरिको को दूसरे देश के सैन्य बलों से खतरा होता है अपारम्परिक सुरक्षा की धारणा में देश के नागरिकों से विदेशी सेना के साथ-साथ अपने स्वयं के देश की सरकारों से बचना जरूरी होता है।

Section - C

प्रश्न संख्या 47 से 52 तक दीर्घ उत्तरीय प्रश्न हैं। किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक प्रश्न 5 अंक का है। 4x5=20

47 सोवियत संघ के विघटन के कारणों और परिणामों की व्याख्या कीजिए ।

उत्तर- सोवियत संघ का विघटन 1991 में हुआ। इसके पीछे कई राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक कारण थे।

विघटन के प्रमुख कारण

1. आर्थिक संकट- सोवियत अर्थव्यवस्था लंबे समय से कमजोर हो रही थी। उत्पादन कम था, उपभोक्ता वस्तुओं की कमी थी और जनता का जीवन-स्तर प्रभावित हो रहा था।

2. हथियारों की होड़- अमेरिका के साथ प्रतिस्पर्धा में सोवियत संघ ने बहुत अधिक धन सैन्य शक्ति और परमाणु हथियारों पर खर्च किया। इससे उसकी अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव पड़ा।

3. गोर्बाचेव के सुधार- मिखाइल गोर्बाचेव ने पेरेस्त्रोइका और ग्लासनोस्त के माध्यम से आर्थिक और राजनीतिक सुधार किए। इन सुधारों से जनता को अधिक स्वतंत्रता मिली, लेकिन कम्युनिस्ट शासन का नियंत्रण कमजोर हो गया।

4. राष्ट्रीयता की भावना- सोवियत संघ के विभिन्न गणराज्यों में अपनी स्वतंत्र पहचान और स्वतंत्र राष्ट्र बनने की मांग बढ़ने लगी।

5. कम्युनिस्ट पार्टी की कमजोर होती पकड़- भ्रष्टाचार, प्रशासनिक अक्षमता और राजनीतिक असंतोष के कारण कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति लोगों का विश्वास कम होता गया।

विघटन के प्रमुख परिणाम

1. सोवियत संघ का अंत- 1991 में सोवियत संघ टूट गया और उसके स्थान पर 15 स्वतंत्र गणराज्य अस्तित्व में आए।

2. अमेरिका का प्रभुत्व- सोवियत संघ के समाप्त होने के बाद अमेरिका विश्व की प्रमुख महाशक्ति बन गया और एकध्रुवीय विश्व व्यवस्था का दौर शुरू हुआ।

3. शीत युद्ध का अंत- अमेरिका और सोवियत संघ के बीच लंबे समय से चल रहा शीत युद्ध समाप्त हो गया।

4. पूर्वी यूरोप में साम्यवादी शासन का पतन- कई पूर्वी यूरोपीय देशों में साम्यवादी सरकारें समाप्त हुईं और लोकतांत्रिक शासन स्थापित हुआ।

5. विश्व राजनीति में परिवर्तन- अंतरराष्ट्रीय संबंधों में नए शक्ति-संतुलन का निर्माण हुआ और कई नए स्वतंत्र देशों ने वैश्विक राजनीति में प्रवेश किया।

48. शीत युद्ध का अर्थ, कारण और प्रभावों का वर्णन कीजिए।

उत्तर- संयुक्त राज्य अमेरिका तथा सोवियत संघ के बीच वह तनावपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक स्थिति जो द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद 1945 ई. से 1990 ई. तक जारी रही, शीत युद्ध कहा जाता है।

शीत युद्ध के प्रमुख कारण

1. वैचारिक मतभेद- अमेरिका पूँजीवादी और लोकतांत्रिक व्यवस्था का समर्थक था, जबकि सोवियत संघ साम्यवादी व्यवस्था का समर्थक था।

2. महाशक्ति बनने की प्रतिस्पर्धा- दोनों देश विश्व में अपना राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव बढ़ाना चाहते थे।

3. यूरोप का विभाजन- द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप अमेरिकी और सोवियत प्रभाव वाले दो गुटों में बँट गया।

4. हथियारों की होड़- दोनों देशों ने परमाणु और आधुनिक हथियारों का तेजी से विकास किया।

5. परस्पर अविश्वास — दोनों महाशक्तियों को एक-दूसरे के विस्तार और नीतियों पर विश्वास नहीं था।

शीत युद्ध के प्रमुख प्रभाव

1. विश्व का दो गुटों में विभाजन- दुनिया अमेरिकी गुट और सोवियत गुट में बँट गई।

2. सैन्य गुटों का निर्माण- अमेरिका ने नाटो (NATO) और सोवियत संघ ने वारसा संधि बनाई।

3. हथियारों की होड़ बढ़ी- परमाणु हथियारों के विकास से विश्व में परमाणु युद्ध का खतरा बढ़ गया।

4. प्रतिनिधि युद्ध हुए- कोरिया, वियतनाम और अफगानिस्तान जैसे क्षेत्रों में महाशक्तियों के समर्थक पक्षों के बीच संघर्ष हुए।

5. गुटनिरपेक्ष आंदोलन का उदय- भारत सहित कई नव-स्वतंत्र देशों ने किसी भी महाशक्ति के गुट में शामिल न होकर गुटनिरपेक्षता की नीति अपनाई।

6. शीत युद्ध का अंत- 1991 में सोवियत संघ के विघटन के साथ शीत युद्ध समाप्त हो गया।

49. गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) के उद्देश्यों और उपलब्धियों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर- गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) का औपचारिक गठन 1961 में बेलग्रेड सम्मेलन में हुआ। इसका मुख्य उद्देश्य शीत युद्ध के दौरान नव-स्वतंत्र देशों को अमेरिका या सोवियत संघ के किसी भी सैन्य गुट में शामिल होने से बचाना और स्वतंत्र विदेश नीति अपनाना था।

गुटनिरपेक्ष आंदोलन के प्रमुख उद्देश्य

1. गुटों से दूरी- किसी भी महाशक्ति के सैन्य गुट में शामिल न होकर स्वतंत्र विदेश नीति अपनाना।

2. विश्व शांति की स्थापना- युद्ध, हथियारों की होड़ और परमाणु हथियारों का विरोध करना।

3. उपनिवेशवाद का विरोध- सभी देशों को स्वतंत्रता दिलाने और साम्राज्यवाद का विरोध करने का समर्थन करना।

4. राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान- सभी देशों की स्वतंत्रता, क्षेत्रीय अखंडता और समानता की रक्षा करना।

5. आर्थिक विकास- विकासशील देशों के आर्थिक हितों की रक्षा करना और उनके बीच सहयोग बढ़ाना।

गुटनिरपेक्ष आंदोलन की प्रमुख उपलब्धियाँ

1. शांति और निरस्त्रीकरण को बढ़ावा- NAM ने परमाणु हथियारों की होड़ और सैन्य तनाव को कम करने के लिए लगातार आवाज उठाई।

2. उपनिवेशवाद के अंत में योगदान- इस आंदोलन ने एशिया और अफ्रीका के देशों की स्वतंत्रता तथा उपनिवेशवाद के विरोध को मजबूत किया।

3. विकासशील देशों को मंच मिला- छोटे और विकासशील देशों को अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अपनी समस्याएँ और हित रखने के लिए सामूहिक मंच मिला।

4. स्वतंत्र विदेश नीति को बढ़ावा- NAM ने यह स्थापित किया कि छोटे देश भी अपनी विदेश नीति स्वतंत्र रूप से निर्धारित कर सकते हैं।

5. आर्थिक समानता की मांग- विकासशील देशों ने विश्व व्यापार और आर्थिक व्यवस्था में अधिक न्यायपूर्ण व्यवस्था की मांग को सामूहिक रूप से उठाया।

50. भारत की विदेश नीति की विशेषताओं और महत्व की चर्चा कीजिए।

उत्तर- भारत की विदेश नीति का उद्देश्य राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए विश्व में शांति, सहयोग और स्थिरता को बढ़ावा देना है। स्वतंत्रता के बाद जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में भारत ने स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति अपनाई।

भारत की विदेश नीति की प्रमुख विशेषताएँ

1. गुटनिरपेक्षता- शीत युद्ध के दौरान भारत ने अमेरिका या सोवियत संघ के किसी गुट में शामिल होने के बजाय स्वतंत्र विदेश नीति अपनाई।

2. पंचशील के सिद्धांत- भारत ने संप्रभुता का सम्मान, एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व जैसे सिद्धांतों को महत्व दिया।

3. विश्व शांति का समर्थन- भारत युद्ध, उपनिवेशवाद और हथियारों की होड़ का विरोध करता है तथा विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करता है।

4. उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद का विरोध- भारत ने एशिया और अफ्रीका के देशों की स्वतंत्रता का समर्थन किया और रंगभेद जैसी नीतियों का विरोध किया।

5. राष्ट्रीय हितों की रक्षा- भारत अपनी सुरक्षा, आर्थिक विकास और क्षेत्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए अन्य देशों के साथ संबंध बनाता है।

भारत की विदेश नीति का महत्व

1. राष्ट्रीय सुरक्षा- विदेश नीति भारत की सीमाओं, संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

2. आर्थिक विकास- अन्य देशों के साथ व्यापार, निवेश, तकनीक और आर्थिक सहयोग से भारत के विकास को बढ़ावा मिलता है।

3. विश्व में भारत की भूमिका- भारत ने NAM, संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों के माध्यम से विकासशील देशों की आवाज को मजबूत किया।

4. पड़ोसी देशों से संबंध- भारत अपनी विदेश नीति के माध्यम से पड़ोसी देशों के साथ शांति, सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने का प्रयास करता है।

5. विश्व शांति में योगदान- भारत ने निरस्त्रीकरण, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का समर्थन किया है।

51. संयुक्त राष्ट्र संघ की भूमिका, उपलब्धियों और सीमाओं की व्याख्या कीजिए।

उत्तर- संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) की स्थापना 24 अक्टूबर 1945 को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद हुई। इसका मुख्य उद्देश्य विश्व में शांति और सुरक्षा बनाए रखना तथा देशों के बीच सहयोग बढ़ाना है।

भूमिका

1. विश्व शांति और सुरक्षा- देशों के बीच विवादों को बातचीत और शांतिपूर्ण तरीकों से सुलझाने का प्रयास करता है।

2. मानवाधिकारों की रक्षा- मानवाधिकार, स्वतंत्रता और समानता को बढ़ावा देता है।

3. आर्थिक एवं सामाजिक विकास- गरीबी, भुखमरी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी समस्याओं के समाधान में सहायता करता है।

4. अंतरराष्ट्रीय सहयोग- जलवायु परिवर्तन, महामारी, शरणार्थी समस्या और पर्यावरण जैसे वैश्विक मुद्दों पर देशों को एक साथ लाता है।

5. शांति स्थापना अभियान- विभिन्न संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के लिए शांति सैनिकों को भेजता है।

उपलब्धियाँ

1. युद्धों को रोकने और शांति स्थापित करने में योगदान- कई अंतरराष्ट्रीय विवादों में मध्यस्थता और शांति स्थापना के प्रयास किए गए।

2. मानवाधिकारों का संरक्षण- 1948 में मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा को स्वीकार किया गया।

3. उपनिवेशवाद के अंत में योगदान- एशिया और अफ्रीका के अनेक देशों की स्वतंत्रता के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिला।

4. स्वास्थ्य और शिक्षा में योगदान- WHO, UNICEF और UNESCO जैसी संस्थाओं के माध्यम से स्वास्थ्य, शिक्षा और बच्चों के कल्याण के क्षेत्र में कार्य किया गया।

5. अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा- देशों के बीच संबंधों को नियमों और अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर संचालित करने में सहायता मिली।

सीमाएँ

1. वीटो शक्ति- सुरक्षा परिषद के पाँच स्थायी सदस्यों को वीटो अधिकार प्राप्त है। इससे कई महत्वपूर्ण निर्णय रुक जाते हैं।

2. निर्णयों को लागू करने की कमजोरी- संयुक्त राष्ट्र के पास अपने सभी निर्णयों को प्रभावी ढंग से लागू कराने की पर्याप्त स्वतंत्र शक्ति नहीं है।

3. महाशक्तियों का प्रभाव- शक्तिशाली देश अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार संयुक्त राष्ट्र की कार्यवाही को प्रभावित कर सकते हैं।

4. सुरक्षा परिषद की संरचना पुरानी- वर्तमान वैश्विक शक्ति-संतुलन को सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करती।

5. वित्तीय और संसाधन संबंधी सीमाएँ- संयुक्त राष्ट्र अपने कार्यों के लिए सदस्य देशों के सहयोग और संसाधनों पर काफी निर्भर रहता है।

52. वैश्वीकरण क्या है? इसके सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर- वैश्वीकरण वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से विश्व के विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाएँ, समाज, संस्कृति और बाजार एक-दूसरे से अधिक जुड़ते और परस्पर निर्भर होते हैं। इसके कारण वस्तुओं, सेवाओं, पूँजी, तकनीक और सूचनाओं का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से आदान-प्रदान होता है।

वैश्वीकरण के सकारात्मक प्रभाव

1. व्यापार में वृद्धि- देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार बढ़ा, जिससे बाजार का विस्तार हुआ।

2. विदेशी निवेश में वृद्धि- विदेशी कंपनियों के निवेश से उद्योगों और व्यापार के विकास को बढ़ावा मिला।

3. तकनीकी विकास- नई तकनीकों, इंटरनेट और संचार साधनों का तेजी से प्रसार हुआ।

4. रोजगार के अवसर- बहुराष्ट्रीय कंपनियों और नए उद्योगों के विकास से रोजगार के नए अवसर पैदा हुए।

5. उपभोक्ताओं को लाभ- लोगों को विभिन्न प्रकार की वस्तुएँ और सेवाएँ अधिक आसानी से उपलब्ध होने लगीं।

6. सांस्कृतिक आदान-प्रदान- विभिन्न देशों की संस्कृति, खान-पान, संगीत और जीवन-शैली का आपसी आदान-प्रदान बढ़ा।

वैश्वीकरण के नकारात्मक प्रभाव

1. छोटे उद्योगों पर दबाव- बड़ी विदेशी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा के कारण छोटे और घरेलू उद्योगों को नुकसान हो सकता है।

2. आर्थिक असमानता- वैश्वीकरण का लाभ सभी वर्गों को समान रूप से नहीं मिलता, जिससे अमीर और गरीब के बीच अंतर बढ़ सकता है।

3. रोजगार की असुरक्षा- कंपनियाँ कम लागत वाले क्षेत्रों में उत्पादन स्थानांतरित कर सकती हैं, जिससे कुछ लोगों की नौकरियाँ प्रभावित हो सकती हैं।

4. स्थानीय संस्कृति पर प्रभाव- विदेशी संस्कृति और जीवन-शैली के बढ़ते प्रभाव से स्थानीय परंपराएँ और संस्कृतियाँ कमजोर हो सकती हैं।

5. विकासशील देशों की निर्भरता- विदेशी पूँजी और बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर अत्यधिक निर्भरता आर्थिक स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकती है।

6. पर्यावरण पर दबाव- औद्योगीकरण और उत्पादन में वृद्धि से प्राकृतिक संसाधनों का अधिक दोहन और प्रदूषण बढ़ सकता है।

हजारीबाग प्री बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षा-01

​कक्षा 12 विषय - राजनीति विज्ञान

​सामान्य निर्देश:

​1. परीक्षार्थी यथासंभव अपने शब्दों में उत्तर दें। 

​2. सभी प्रश्न अनिवार्य हैं। 

​3. कुल प्रश्नों की संख्या 52 है। 

​4. प्रश्न संख्या 01 से 30 तक बहुविकल्पीय प्रश्न हैं। प्रत्येक प्रश्न के चार विकल्प दिए गए हैं। सही विकल्प का चयन कीजिए। प्रत्येक प्रश्न के लिए 01 अंक निर्धारित है। 

​5. प्रश्न संख्या 31 से 38 तक अति लघु उत्तरीय प्रश्न हैं, जिनमें से किन्हीं 6 प्रश्नों का उत्तर देना अनिवार्य है। प्रत्येक प्रश्न का मान 2 अंक निर्धारित है। 

​6. प्रश्न संख्या 39 से 46 तक लघु उत्तरीय प्रश्न हैं, जिनमें से किन्हीं 6 प्रश्नों का उत्तर देना अनिवार्य है। प्रत्येक प्रश्न का मान 3 अंक निर्धारित है। 

​7. प्रश्न संख्या 47 से 52 तक दीर्घ उत्तरीय प्रश्न हैं, जिनमें से किन्हीं 4 प्रश्नों का उत्तर देना अनिवार्य है। प्रत्येक प्रश्न का मान 5 अंक निर्धारित है। 

​खण्ड क (Section - A)

​खण्ड क में कुल 30 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं। प्रत्येक प्रश्न का मान 1 अंक निर्धारित है। 

​1. किसने सोवियत संघ में सुधारों की शुरुआत की थी?

(a) खुश्चेव

(b) स्टालिन

(c) गोर्बाचेव

(d) बोरिस येल्तसिन 

​2. 1917 में रूस में समाजवादी गणराज्य की स्थापना किसने की थी?

(a) कार्ल मार्क्स

(b) स्टालिन

(c) लेनिन

(d) खुश्चेव 

​3. शॉक थेरेपी को कब अपनाया गया?

(a) 1990

(b) 1991

(c) 1992

(d) 1994 

​4. भारत में राज्य पुनर्गठन आयोग की स्थापना किस वर्ष की गई थी?

(a) 1951

(b) 1952

(c) 1953

(d) 1954 

​5. भारतीय संघ में शामिल होने वाली अंतिम देशी रियासत कौन सी थी?

(a) जम्मू कश्मीर

(b) हैदराबाद

(c) जूनागढ़

(d) बीकानेर 

​6. परमाणु अप्रसार संधि पर किस देश ने हस्ताक्षर नहीं किया है?

(a) ईरान

(b) भारत

(c) उत्तरी कोरिया

(d) चीन 

​7. विश्व को इंटरनेट की सुविधा किस देश की देन है?

(a) चीन

(b) अमेरिका

(c) जापान

(d) भारत 

​8. 1996 में तालिबान ने किस देश में अपना शासन स्थापित कर लिया?

(a) ईरान

(b) पाकिस्तान

(c) अफगानिस्तान

(d) तजाकिस्तान 

​9. शेख मुजीबुर्रहमान किस देश के प्रधानमंत्री थे?

(a) पाकिस्तान

(b) बांग्लादेश

(c) अफगानिस्तान

(d) मालदीव 

​10. पहली लोकसभा में सबसे बड़ा विपक्षी दल कौन था?

(a) भारतीय जनसंघ

(b) स्वतंत्र पार्टी

(c) भारतीय समाजवादी पार्टी

(d) भारतीय साम्यवादी पार्टी 

​11. बर्लिन की दीवार कब खड़ी की गई?

(a) 1965

(b) 1961

(c) 1962

(d) 1960 

​12. शिवसेना किस राज्य में सक्रिय है?

(a) हरियाणा

(b) गुजरात

(c) पंजाब

(d) महाराष्ट्र 

​13. यूरोपीय संघ की स्थापना कब हुई?

(a) 1957

(b) 1967

(c) 1992

(d) 1968 

​14. साम्यवादी चीन का उदय कब हुआ?

(a) 1949

(b) 1939

(c) 1957

(d) 1849 

​15. एशिया का वह कौन सा देश है जो अकेला जी-8 का सदस्य है?

(a) चीन

(b) जापान

(c) भारत

(d) पाकिस्तान 

​16. भारत से शांति सेना श्रीलंका कब भेजी गयी थी?

(a) 1989

(b) 1990

(c) 1987

(d) 1985 

​17. चिपको आंदोलन की शुरुआत किस राज्य से हुई थी?

(a) गुजरात

(b) उत्तराखण्ड

(c) बिहार

(d) महाराष्ट्र 

​18. प्रथम पंचवर्षीय योजना का उद्देश्य क्या था?

(a) कृषि पर जोर देना

(b) उद्योग पर जोर देना

(c) पशुपालन पर जोर देना

(d) मत्स्य पालन पर जोर देना 

​19. फरक्का समझौता किन दो देशों के बीच हस्ताक्षरित हुआ?

(a) पाकिस्तान और नेपाल

(b) पाकिस्तान और बांग्लादेश

(c) भारत और बांग्लादेश

(d) बांग्लादेश और भूटान 

​20. दक्षिण एशियाई देशों में सैनिक शासन सबसे पहले किस देश में स्थापित हुआ?

(a) श्रीलंका

(b) नेपाल

(c) पाकिस्तान

(d) भूटान 

​21. ताशकंद समझौता कब हुआ था?

(a) 10 जनवरी 1966

(b) 10 जनवरी 1965

(c) 11 जनवरी 1966

(d) 3 जुलाई 1972 

​22. कौन सी रेखा भारत और बांग्लादेश के बीच सीमा निर्धारण करती है?

(a) मैकमोहन लाइन

(b) डुरण्ड लाइन

(c) रेडक्लिफ लाइन

(d) उपरोक्त कोई नहीं 

​23. किसे 'अफ्रीकन गांधी' के नाम से जाना जाता है?

(a) मार्टिन लूथर किंग

(b) रॉबर्ट मुगाबे

(c) यासिर अराफात

(d) नेल्सन मंडेला 

​24. नीति आयोग ने भारत सरकार के किस संगठन का स्थान लिया?

(a) चुनाव आयोग

(b) योजना आयोग

(c) वित्त आयोग

(d) मानवाधिकार आयोग 

​25. बांग्लादेश किस वर्ष आजाद हुआ?

(a) 1971

(b) 1965

(c) 1972

(d) 1961 

​26. अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय कहाँ अवस्थित है?

(a) हेग

(b) लन्दन

(c) पेरिस

(d) न्यूयार्क 

​27. सुरक्षा परिषद में कितने अस्थायी सदस्य हैं?

(a) 15

(b) 10

(c) 11

(d) 5 

​28. जब इंदिरा गांधी पहली बार प्रधानमंत्री बनीं, तो वे किसकी सदस्य थीं?

(a) लोकसभा

(b) राज्य सभा

(c) विधान सभा

(d) विधान परिषद 

​29. विश्व मानवाधिकार दिवस कब मनाया जाता है?

(a) 10 दिसम्बर

(b) 8 मई

(c) 1 मई

(d) 5 जून 

​30. 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण किस वर्ष हुआ था?

(a) 1968

(b) 1969

(c) 1970

(d) 1971 

​खण्ड-ख (Section - B) (अति लघु उत्तरीय प्रश्न)

​खण्ड-ख में प्रश्न संख्या 31-38 अति लघु उत्तरीय प्रश्न हैं। इनमें से किन्हीं छह प्रश्नों के उत्तर दीजिए। प्रत्येक प्रश्न का मान 2 अंक निर्धारित है। 

​31. भारत के प्रथम मुख्य चुनाव आयुक्त कौन थे? 

​ उत्तर- भारत के प्रथम मुख्य चुनाव आयुक्त सुकुमार सेन थे। उन्होंने 21 मार्च 1950 से 19 दिसंबर 1958 तक अपना पद संभाला था।

32. UNO की सुरक्षा परिषद में कितने स्थायी और कितने गैर-स्थायी सदस्य होते हैं? 

​​ उत्तर- UNO (संयुक्त राष्ट्र) की सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं:

• 5 स्थायी सदस्य- अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस

• 10 गैर-स्थायी (अस्थायी) सदस्य- 2 वर्ष के लिए चुने जाते हैं।

33. UNO का मुख्य उद्देश्य क्या है? 

उत्तर-

(i) विश्व के विभिन्न राष्ट्रों के बीच होने वाले अन्तर्राष्ट्रीय झगड़ों को रोकना और राष्ट्रों के बीच सहयोग को प्रोत्साहन देना।

(ii) विश्व में सामाजिक-आर्थिक विकास की सम्भावनाओं को बढ़ाने के लिए विभिन्न देशों को एक साथ लाना।

(iii) बिना किसी भेदभाव के मौलिक स्वतन्त्रताओं को प्रोत्साहन देना।

(iv) विश्व शान्ति को सुदृढ़ बनाने हेतु समुचित प्रयास करना।

​34. सोवियत संघ की राजनीतिक व्यवस्था किसके विचार पर आधारित है? 

उत्तर- सोवियत राजनैतिक प्रणाली समाजवाद तथा साम्यवाद पर आधारित थी। सोवियत संघ की राजनीतिक और आर्थिक संस्थाओं की आन्तरिक कमजोरी की वजह से जनसाधारण की आकांक्षाएँ पूर्ण न हो सकी।

​35. तिब्बत के कौन पारंपरिक नेता ने 1959 में भारत में शरण ली?

उत्तर- 1959 में तिब्बत के पारंपरिक आध्यात्मिक और राजनीतिक नेता 14वें दलाई लामा ने भारत में राजनीतिक शरण ली थी।

​36. 'आसियान' में कितने सदस्य देश हैं? 

उत्तर- आसियान (ASEAN) में 11 सदस्य देश हैं। तिमोर-लेस्ते 2025 में इसका नवीनतम सदस्य बना।

​37. कांग्रेस पार्टी के संदर्भ में सिंडिकेट शब्द से आप क्या समझते हैं? 

उत्तर- कांग्रेस सिंडिकेट से आशय कांग्रेस के पुराने एवं वरिष्ठ नेताओं के गुट से था जिसने इन्दिरा गाँधी को सत्ता से वंचित करने हेतु उन्हें दल की प्राथमिक सदस्यता से वंचित कर दिया।

​38. चिपको आंदोलन के क्या उद्देश्य थे? 

उत्तर- चिपको आंदोलन का मुख्य उद्देश्य वनों की अंधाधुंध कटाई को रोकना और पेड़ों की रक्षा करना था।

​खण्ड-ग (Section - C) (लघु उत्तरीय प्रश्न)

​खण्ड-ग में प्रश्न संख्या 39-46 लघु उत्तरीय प्रश्न हैं। इनमें से किन्हीं छह प्रश्नों के उत्तर दीजिए। प्रत्येक प्रश्न का मान 3 अंक निर्धारित है। 

​39. किन कारणों से गोर्बाचेव सोवियत संघ में सुधार के लिए बाध्य हुए? 

उत्तर- सोवियत संघ ने अपने संसाधनों का अधिकांश हिस्सा परमाणु हथियार और सैन्य साजो-सामान पर व्यय किया। उसने अपने संसाधन पूर्वी यूरोप के अपने पिछलग्गू देशों के विकास पर भी खर्च किए ताकि वे सोवियत नियन्त्रण में बने रहें। इससे सोवियत संघ पर गहरा आर्थिक दबाव बना और सोवियत व्यवस्था इसका सामना नहीं कर सकी।

सोवियत संघ प्रशासनिक और राजनीतिक रूप से गतिरुद्ध हो चुका था। गतिरुद्ध प्रशासन भारी भ्रष्टाचार और अपनी गलतियों को सुधारने में व्यवस्था की अक्षमता, शासन में ज्यादा खुलापन लाने के प्रति अनिच्छा और देश की विशालता के बावजूद सत्ता का केन्द्रीकृत होना इन सारी बातों के कारण आम जनता अलग-अलग पड़ गई। इससे भी बुरी बात यह थी कि 'पार्टी' के अधिकारियों को आम नागरिक से ज्यादा विशेषाधिकार मिले हुए थे। इसे लोगों में सत्ता के प्रति मोह भंग हुआ और सरकार का जनाधार खिसकता चला गया।

मिखाइल गोर्बाचोव ने इन समस्याओं के समाधान का वादा किया। गोर्बाचोव द्वारा सुधार लागू होते ही लोगों की आकांक्षाओं-अपेक्षाओं का ज्वार उमड़ा जो सोवियत साम्यवादी व्यवस्था को बहा ले गया। सोवियत गणराज्य में राष्ट्रीय और सम्प्रभुता के भावों के उभार ने भी मिखाइल गोर्बाचोव को सुधार के लिए बाध्य किया।

​40. बांग्लादेश के प्रति भारत की सद्भावना का वर्णन करें। 

उत्तर- भारत ने बांग्लादेश के प्रति हमेशा मैत्री और सहयोग की भावना रखी है। भारत की सद्भावना के प्रमुख उदाहरण हैं-

1. 1971 के मुक्ति संग्राम में भारत ने बांग्लादेश के स्वतंत्रता आंदोलन का समर्थन किया।

2. भारत ने बड़ी संख्या में शरणार्थियों को आश्रय और सहायता दी।

3. स्वतंत्रता के बाद भारत ने बांग्लादेश के पुनर्निर्माण में सहयोग किया।

4. दोनों देशों के बीच व्यापार, परिवहन, संस्कृति और सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का प्रयास किया गया।

​41. विश्व व्यापार संगठन क्या है? 

उत्तर- डब्ल्यू. टी. ओ. (W.T.O.) का विस्तृत रूप है 'विश्व व्यापार संगठन' (World Trade Organisation) 1947 में गैट की रचना हुई थी जो अपना उद्देश्य पूरा नहीं कर सका। अतः उसकी जगह 1995 में विश्व व्यापार संगठन बना। इसका हर दो वर्ष बाद सम्मेलन होता है जिसमें व्यापार सम्बन्धी मामलों पर चर्चा की जाती है। निर्णय बहुमत से लिये जाते हैं जो सभी सदस्य राज्यों को बाध्यकारी हैं। इसका अपना न्यायाधिकरण है जिसमें राज्यों के बीच व्यापार सम्बन्धी विवादों का निपटान होता है।

​42. संयुक्त राष्ट्र संघ में वीटो का क्या महत्व है? 

उत्तर- सुरक्षा परिषद् के पाँचों स्थायी सदस्यों (अमरीका, रूसी संघ, ब्रिटेन, फ्रांस व चीन) को वीटो शक्ति प्राप्त है। कोई स्थायी सदस्य किसी गैर-प्रक्रिया सम्बन्धी मामले में विपक्ष में अपना वोट देकर किसी प्रस्ताव को पास होने से रोक सकता है।

​43. 1962 के भारत-चीन युद्ध के परिणामों की संक्षेप चर्चा करें। 

उत्तर- 1962 के भारत-चीन युद्ध के परिणाम निम्न हैं -

(i) भारत के चीन के साथ सम्बन्ध टूट गए।

(ii) भारत के सोवियत संघ के साथ सम्बन्ध अधिक दृढ़ हो गए।

(iii) चीन ने पाकिस्तान से निकट सम्बन्ध स्थापित कर भारत के लिए संकट उत्पन्न किया।

(iv) भारत की विदेश नीति आदर्शवाद से हटकर यथार्थवाद पर केन्द्रित हो गई। इसी के परिणामस्वरूप सन् 1965 के भारत-पाक युद्ध में भारत ने सफलता प्राप्त की।

(v) इस अपमानजनक पराजय के बाद भारत ने अपनी सैनिक शक्ति को बढ़ाया।

​44. गुटनिरपेक्ष आंदोलन क्या है? 

उत्तर- गुट निरपेक्ष आंदोलन एक अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक आंदोलन था जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद शुरू हुआ। इसका उद्देश्य था कि देश किसी भी बड़े सैन्य या राजनीतिक गुट (जैसे कि अमेरिका के नेतृत्व वाला पश्चिमी गुट या सोवियत संघ के नेतृत्व वाला पूर्वी गुट) का हिस्सा न बनें। यह आंदोलन उन देशों द्वारा अपनाया गया जो शीत युद्ध के दौरान दोनों महाशक्तियों के बीच तटस्थ रहना चाहते थे।

​45. प्रिवी पर्स से आप क्या समझते हैं? 

उत्तर- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 291 के अनुसार प्रिवीपर्स देशी रियासतों के पूर्व शासकों व उनके उत्तराधिकारियों को कर मुक्त एक निश्चित धनराशि दिये जाने की गारण्टी थी जिसे 1971 में 26 वें संशोधन द्वारा समाप्त कर दिया गया।

​46. भारतीय संविधान में पिछड़े वर्गों के लिए क्या प्रावधान हैं? 

उत्तर - भारतीय संविधान में पिछड़े वर्गों के लिए मुख्यतः समानता, आरक्षण, और विशेष संरक्षण के प्रावधान हैं। इनमें अनुच्छेद 15(4), 15(5), 15(6), 16(4), 16(4A), 16(4B), 340, 341, 342, और 342A प्रमुख हैं।

• अनुच्छेद 15(4): राज्य को सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए विशेष प्रावधान करने की शक्ति देता है।

• अनुच्छेद 15(5): शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए विशेष प्रावधान की अनुमति देता है, निजी सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त संस्थानों सहित, कुछ अपवादों के साथ।

• अनुच्छेद 15(6): आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 103वें संशोधन के बाद विशेष प्रावधान जोड़ा गया।

• अनुच्छेद 16(4): सरकारी नौकरियों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व न होने पर पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण की अनुमति देता है।

• अनुच्छेद 16(4A) और 16(4B): पदोन्नति में आरक्षण और रिक्त पदों को अगले वर्ष के लिए सुरक्षित रखने से संबंधित प्रावधान हैं।

• अनुच्छेद 340: पिछड़े वर्गों की स्थिति की जाँच और सुधार के उपाय सुझाने के लिए आयोग नियुक्त करने का प्रावधान करता है।

• अनुच्छेद 342A: सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की केंद्रीय सूची से जुड़े प्रावधानों से संबंधित है।

• अनुच्छेद 341 और 342: अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की पहचान और सूचीकरण से जुड़े हैं, जो पिछड़े वर्गों की समग्र सामाजिक न्याय व्यवस्था का हिस्सा हैं।

• अनुच्छेद 46: राज्य को निर्देश देता है कि वह कमजोर वर्गों, विशेषकर अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य कमजोर समूहों के शैक्षिक तथा आर्थिक हितों को बढ़ावा दे।

​खण्ड-घ (Section - D) (दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)

​खण्ड-घ में प्रश्न संख्या 47 से 52 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न हैं। इनमें से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए। प्रत्येक प्रश्न का मान 5 अंक निर्धारित है। 

​47. यूरोपीय संघ की उपलब्धियों का वर्णन करें। 

उत्तर-यूरोपीय संघ की अनेक विशेषताएँ उसे एक प्रभावशाली क्षेत्रीय संगठन बनाती हैं।

(i) इस महाद्वीप के देशों की भौगोलिक निकटता इस संघ को मजबूती प्रदान करती है।

(ii) एकध्रुवीय विश्व व्यवस्था ने उन्हें जता दिया है कि यदि अमरीकी वर्चस्व का सामना करना है तो आपसी मतभेदों को भुलाकर एक छतरी के तले आना ही उपयुक्त होगा।

(iii) यूरोपीय संघ का आर्थिक प्रभाव काफी प्रबल है। यह विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, इसका सकल घरेलू उत्पाद 12,000 अरब डॉलर से ज्यादा है।

(iv) वर्तमान समय में अमरीका मन्दी की चपेट में है और उसकी मुद्रा यूरो अमरीकी डॉलर के प्रभुत्व के लिए खतरा बन सकती है। विश्व व्यापार में उसकी हिस्सेदारी अमरीका से तीन गुनी ज्यादा है।

(v) उसकी आर्थिक शक्ति का प्रभाव इसके नजदीकी देशों पर ही नहीं बल्कि एशिया और अफ्रीका के दूर-दराज देशों पर भी पड़ा है।

(vi) यूरोपीय संघ के दो सदस्य फ्रांस और ब्रिटेन संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद् के स्थायी सदस्य हैं। यूरोपीय संघ के कई और देश सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्यों में शामिल होते हैं। अतः यह संघ अमरीका समेत सभी देशों की नीतियों को प्रभावित करता है।

(vii) सैनिक क्षमता की दृष्टि से यूरोपीय संघ के पास दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सेना है। यूरोपीय संघ के दो देश ब्रिटेन और फ्रांस परमाणु सम्पन्न देश हैं।

​48. सुरक्षा की कौन-कौन सी अपरंपरागत अवधारणाएँ हैं? 

उत्तर - सुरक्षा की अपरंपरागत (गैर-पारंपरिक) अवधारणाएँ केवल देश की सीमा और सेना की रक्षा तक सीमित नहीं हैं। इनमें व्यक्ति, समुदाय और पूरी मानवता को गरीबी, बीमारी, पर्यावरण संकट तथा हिंसा जैसे गैर-सैन्य खतरों से बचाना शामिल है।

मुख्य अवधारणाएँ

1. मानव सुरक्षा- व्यक्ति के जीवन, गरिमा और बुनियादी अधिकारों की सुरक्षा। इसका लक्ष्य भय और अभाव—दोनों से मुक्ति है।

2. वैश्विक सुरक्षा- ऐसे खतरों से सुरक्षा जिनका असर सीमाओं से परे पूरी दुनिया पर पड़ता है, जैसे जलवायु परिवर्तन, वैश्विक महामारी और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद।

3. आर्थिक सुरक्षा- बेरोजगारी, गरीबी, असमानता और आजीविका के संकट से लोगों की रक्षा।

4. खाद्य सुरक्षा- प्रत्येक व्यक्ति को पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध होना।

5. स्वास्थ्य सुरक्षा- महामारी, कुपोषण, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और अन्य स्वास्थ्य-संकटों से बचाव।

6. पर्यावरणीय सुरक्षा- प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, प्राकृतिक संसाधनों की कमी और प्राकृतिक आपदाओं से संरक्षण।

7. सामुदायिक एवं सामाजिक सुरक्षा- जातीय संघर्ष, सांप्रदायिक हिंसा, भेदभाव और सामाजिक अस्थिरता से समुदायों की रक्षा।

8. राजनीतिक एवं व्यक्तिगत सुरक्षा- मानवाधिकारों, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और कानून के समक्ष समान सुरक्षा की गारंटी; साथ ही अपराध, हिंसा और दमन से बचाव।

​49. भारत की परमाणु नीति के किन्हीं दो पहलुओं का वर्णन करें। 

उत्तर- भारत की परमाणु नीति की मुख्य विशेषताएँ निम्न हैं-

(i) भारत अपनी परमाणु क्षमता का शान्तिपूर्ण और रचनात्मक कार्यों में प्रयोग करेगा।

(ii) भारत किसी अन्य देश पर परमाणु हमले की पहल नहीं करेगा, किन्तु यदि कोई देश भारत के विरुद्ध इस तरह का कार्य करता है, तो उसके विरुद्ध व्यापक परमाणविक कार्यवाही की जाएगी।

(iii) भारत किसी प्रकार की भेदभावपूर्ण परमाणु सन्धि पर हस्ताक्षर नहीं करेगा।

(iv) भारत अपनी न्यूनतम परमाणु प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखेगा।

​50. दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग की सफलता का परीक्षण करें। 

उत्तर - दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग के लिए सार्क (SAARC) की स्थापना 1985 में हुई। इसके माध्यम से सदस्य देशों ने आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का प्रयास किया।

सफलताएँ-

1. सार्क ने सदस्य देशों को साझा मंच प्रदान किया, जहाँ वे क्षेत्रीय समस्याओं पर चर्चा कर सकते हैं।

2. व्यापार और आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए SAFTA जैसे समझौते किए गए।

3. शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति और गरीबी उन्मूलन जैसे क्षेत्रों में सहयोग की पहल हुई।

4. लोगों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक संपर्क बढ़ाने में भी योगदान मिला।

सीमाएँ- भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव, आपसी राजनीतिक विवाद तथा आतंकवाद जैसी समस्याओं के कारण सार्क की गतिविधियाँ कई बार प्रभावित हुई हैं। इससे क्षेत्रीय सहयोग की गति धीमी रही है।

51. भारत की विदेश नीति की उपलब्धियों की व्याख्या करें। 

उत्तर- भारत की विदेश नीति की प्रमुख उपलब्धियों को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से स्पष्ट कर सकते हैं-

(1) शान्तिपूर्ण सह – अस्तित्व की नीति-भारत की विदेश नीति शांतिपूर्ण सह – अस्तित्व की नीति की समर्थक है। अर्थात् वह सभी पड़ोसी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण नीति का अनुसरण करता है। जिससे समाज में शांति – व्यवस्था स्थापित हो सके। शांति एवं सह – अस्तित्व हमारी भारतीय संस्कृति के मूलमंत्र हैं। जीओ और जीने दो ही मूल स्रोत हैं हमारी संस्कृति के, जो आज भी हमारे देश की आतंरिक एवं विदेश नीति को दिशा प्रदान करते हैं।

(2) साम्राज्यवाद एवं उपनिवेशवाद का विरोध – साम्राज्यवादी देश दूसरे देशों की स्वतंत्रता का अपहरण कर उनका शोषण करते हैं संघर्ष व युद्धों का सबसे बड़ा कारण साम्राज्यवाद है। भारत स्वयं साम्राज्यवाद वे उपनिवेशवाद का शिकार रहा है। इसलिए भारत की विदेश नीति साम्राज्यवाद व उपनिवेशवादी अवधारणा की विरोधी है। उपनिवेशवादी अवधारणा व्यक्ति व समाज को संकीर्ण विचारधारा की ओर अग्रसर करती है, जिससे समाज का संपूर्ण विकास अवरुद्ध हो जाता है और वह प्रगति नहीं कर पाता है।

(3) रंगभेद का विरोध-भारत की विदेश नीति रंगभेद की नीति की प्रबल विरोधी है। यह समस्त देशों में इस भावना को विरोधी मानते हुए इसे पूर्ण रूप से नकार देती है। इसके अंतर्गत लोगों के साथ रंग के आधार पर कोई भी भेदभाव नहीं किया जाता है तथा सभी को समान रूप से स्वीकार किया जाता है।

(4) अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं का समर्थन-भारत की विदेश नीति अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं का खुलकर समर्थन करती है। स्वतंत्रता के पश्चात् भारत ने इसकी सदस्यता को स्वीकार कर इसके विभिन्न कार्यक्रमों व एजेन्सियों में अपनी भागीदारी को सार्थक सिद्ध किया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में भारत की स्थायी सदस्यता का दावा व अंतर्राष्ट्रीय मंचों का समर्थन हमारी विदेश नीति की सफलता का द्योतक है।

(5) पंचशील के सिद्धान्त पर आधारित नीति-पंचशील सिद्धान्त भारत की विदेश नीति की एक मुख्य विशेषता है जो पाँच आचरण के सिद्धान्तों पर आधारित है जिसके अंतर्गत समानता, अनाक्रमण, किसी के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना, सबकी सत्ता के लिए पारस्परिक सम्मान व शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पक्ष शामिल है।

(6) गुट – निरपेक्षता की नीति – द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात विश्व दो गुटों में विभाजित हो गया। इसमें से एक पश्चिमी देशों का गुट था और दूसरा साम्राज्यवादी देशों का। दोनों महाशक्तियों ने भारत को अपने साथ लाने के काफी प्रयास किए लेकिन भारत ने दोनों प्रकार के सैनिक गुटों से अलग रहने का निश्चय किया और तय किया कि वह किसी सैनिक गठबंधन का सदस्य नही बनेगा, स्वतंत्र विदेश नीति अपनाएगा और प्रत्येक राष्ट्रीय महत्व के प्रश्न पर स्वतंत्र व निष्पक्ष रूप से विचार करेगा।

​52. जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद की राजनीति क्या है? 

उत्तर- अलगाववाद की राजनीति से आशय ऐसी राजनीतिक गतिविधियों से है, जिनमें कुछ समूह जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग राजनीतिक दर्जा या अलग राष्ट्र देने की मांग करते रहे हैं। कश्मीर में यह राजनीति विशेष रूप से 1989 के बाद विभिन्न रूपों में सामने आई।

इसके प्रमुख रूप थे-

1. स्वतंत्र कश्मीर की मांग – कुछ अलगाववादी जम्मू-कश्मीर को भारत और पाकिस्तान दोनों से अलग एक स्वतंत्र राष्ट्र बनाना चाहते थे।

2. पाकिस्तान में विलय की मांग – कुछ समूह जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान में मिलाने की मांग करते थे।

3. भारत के भीतर अधिक स्वायत्तता की मांग – कुछ समूह भारत के संघ के भीतर जम्मू-कश्मीर के लिए अधिक राजनीतिक स्वायत्तता चाहते थे।

अलगाववाद के बढ़ने के कारणों में राजनीतिक असंतोष, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर अविश्वास और 1987 के विधानसभा चुनावों को लेकर व्यापक धांधली के आरोप शामिल थे। इसके बाद 1989 में उग्रवाद/सशस्त्र आंदोलन बढ़ा और क्षेत्र में लंबे समय तक हिंसा रही। 

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