
झारखण्ड अधिविद्य परिषद्
ANNUAL INTERMEDIATE EXΑΜΙΝΑΤΙΟΝ – 2026
HINDI - A (CORE) (Compulsory) 18.02.2026
भाग - A (बहुविकल्पीय प्रश्न )
प्रश्न संख्या 1 से 30 तक बहुविकल्पीय प्रकार के है।
प्रत्येक प्रश्न के चार विकल्प हैं। सही विकल्प चुनकर उत्तर पुस्तिका में लिखें।
प्रत्येक प्रश्न 1 अंक का है।
निर्देश : निम्नलिखित पद्यांश को
ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न संख्या 1-4 तक के लिए सही विकल्प का चयन करें।
तुझे मिली हरियाली डाली,
मुझे नसीब कोठरी काली ।
तेरा नभ भर में संचार,
मेरा दस फुट का संसार ।
तेरे गीत कहावें वाह,
रोना भी है मुझे गुनाह ।
देख विषमता तेरी मेरी
बजा रही तिस पर रण-भेरी ।
इस हुंकृति पर, अपनी कृति से
और कहो क्या कर दूँ ?
कोकिल, बोलो तो !
1. कवि किसे संबोधित कर रहा है ?
(A) कोकिल
(B)
कौआ
(C) कबूतर
(D)
चिड़िया
2. ये पंक्तियाँ किस काल की हैं ?
(A)
भक्तिकाल
(B)
आदिकाल
(C) आधुनिक काल
(D)
रीतिकाल
3. किसका रोना भी अपराध है ?
(A) कवि का
(B)
कोयल का
(C)
(A) तथा (B) दोनों का
(D)
इनमें से कोई नहीं
4. कवि किसकी विषमता की बात कर रहा है ?
(A)
कवि और पाठक
(B) कवि और कोयल
(C)
कवि और प्रकृति
(D)
कवि और धरती
निर्देश: निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्त्तक पढ़कर प्रश्न
संख्या 5-8 के लिए सही विकल्प का चयन करें ।
प्रभु का निरंतर स्मरण और समर्पण से जीवन में अनोखा
रूपान्तरण होता है। कुछ ऐसा, जैसे कि मिट्टी फूल बन जाती है और गंदगी खाद बनकर
सुगंध में बदल जाती है। भगवत् चिंतन से कुछ भी घृणा, द्वेष एवं वैर योग्य नहीं रह
जाता। सच तो यह है कि जो एक छोर पर पशु है, वही दूसरे छोर पर प्रभु है। पशु और
प्रभु में विरोध नहीं, विकास है। हमें हमारी गंदगी और बुराइयों को रूपान्तरित कर
खाद बनाना है और संसार में सुरभि फैलाना है। परमात्मा का निरंतर स्मरण, चिंतन और
समर्पण वह रसायन है, जिससे यह संभव है।
5. ईश्वर स्मरण और समर्पण का परिणाम होता है, तो
(A)
मिट्टी फूल बन जाती है
(B)
गंदगी खाद बन जाती है
(C)
वैर-भाव समाप्त हो जाता है
(D) इनमें से सभी
6. हमें निरंतर किसका चिंतन करना चाहिए?
(A)
धन-वैभव का
(B)
मान-सम्मान का
(C) ईश्वर का
(D)
पद-प्रतिष्ठा का
7. हमारे जीवन में अनोखा परिवर्तन किस प्रकार संभव है ?
(A)
वाद-विवाद से
(B) ईश्वर चिंतन से
(C)
पर्यटन से
(D)
अध्ययन से
8. मनुष्य यदि एक छोर पर पशु है, तो दूसरे छोर पर है
(A) प्रभु
(B)
विचार
(C)
वैभव
(D)
चिंतन
(रचनात्मक लेखन तथा अभिव्यक्ति और माध्यम )
9. पत्रकार की बैसाखियाँ किन्हें कहा जाता
(A)
सत्यता
(B)
संतुलन
(C)
निष्पक्षता
(D) इनमें से सभी
10. निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द व्यापार से संबंधित है ?
(A)
हिट विकट
(B)
रन
(C)
वाइड
(D) तेजड़िए
11. जनसंचार का मुख्य कार्य है
(A)
सूचना संग्रह एवं प्रसार करना
(B)
सूचना का विश्लेषण करना
(C)
ज्ञान के स्तर में वृद्धि करना
(D) इनमें से सभी
12. रेडियो नाटक का उद्देश्य स्पष्ट होता है
(A)
पात्रों से
(B)
घटनाओं से
(C) संवादों से
(D)
श्रोताओं से
13. समाचार संगठन में काम करने वाले नियमित वेतनभोगी पत्रकार को क्या कहते हैं ?
(A) फ्रीलांसर
(B) पूर्णकालिक
(C) अल्पकालिक
(D)
अंशकालिक
14. मुद्रण का आरंभ किस देश में हुआ ?
(A) भारत
(B)
जापान
(C) चीन
(D)
इंग्लैण्ड
15. क्रिकेट मैच का प्रसारण कैसा है ?
(A) एंकर पैकेज
(B)
एंकर बाइट
(C) लाइव
(सीधा प्रसारण)
(D)
फोन-इन
16. आधुनिक माध्यमों में सबसे पुराना माध्यम है
(A) अखबार
(B)
रेडियो
(C) टेलीविजन
(D)
सिनेमा
17. रिपोर्ट प्रस्तुतिकरण की प्रक्रिया क्या
कहलाती है ?
(A) रिपोर्टिंग
(B)
समाचार
(C) संपादकीय
(D) संवाद
18. 'रिमाइण्डर' को हिन्दी में
क्या कहते हैं ?
(A)
स्मृति पत्र
(B) अनुस्मारक
(C)
मिनट
(D)
नोटिस
निर्देश
: निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न संख्या 19-22 तक के लिए सही विकल्प
का चयन कीजिए ।
हम
दूरदर्शन पर बोलेंगे
हम
समर्थ शक्तिवान
हम
एक दुर्बल को लाएँगे
एक
बन्द कमरे में
उससे
पूछेंगे तो आप क्या अपाहिज है?
तो
आप क्यों अपाहिज हैं ?
19. काव्यांश में अपाहिज को दूरदर्शन पर ले जानेवाले लोग कैसे हैं
?
(A) संवेदनशील
(B)
दयालु
(C) संवेदनहीन
(D)
लापरवाह
20. प्रस्तुत
पंक्तियों के रचयिता है
(A) रघुवीर सहाय
(B) कुँवर नारायण
(C) शमशेर बहादुर सिंह
(D) गजानन माधव मुक्तिबोध
21. 'हम दूरदर्शन पर बोलेंगे' में 'हम' शब्द का
तात्पर्य है
(A) ताकतवर मीडिया
(B) कमजोर दिव्यांग
(C) कैमरामैन
(D) कवि स्वयं
22. 'आप क्यों अपाहिज हैं' - टेलीविजन कैमरे के
सामने इस तरह के प्रश्न पूछे जाने का क्या उद्देश्य हो सकता है?
(A) कार्यक्रम को बंद करना
(B) कार्यक्रम को सफल बनाना
(C) कार्यक्रम को असफल बनाना
(D) कार्यक्रम पर रोक लगाना
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न संख्या
23- 26 तक के लिए सही विकल्प का चयन करें:
पड़ोस में एक महानुभाव रहते हैं, जिनको लोग भगतजी कहते हैं।
चूरन बेचते हैं। यह काम करते, उन्हें न जाने कितने बरस हो गए हैं। लेकिन किसी एक भी
दिन चूरन से उन्होंने छः आने से ज्यादा पैसे नहीं कमाए। चूरन उनका आस-पास सरनाम है
और खुद खूब लोकप्रिय हैं। कहीं व्यवसाय का गुर पकड़ लेते और उस पर चलते तो आज खुशहाल
क्या, मालामाल होते। क्या कुछ उनके पास न होता। इधर दस वर्षों से देख रहा हूँ, उनका
चूरन हाथों-हाथ बिक जाता है। पर वह न उसे थोक में देते हैं, न व्यापारियों को बेचते
हैं । पेशगी ऑर्डर नहीं लेते। बँधे वक्त पर अपनी चूरन की पेटी लेकर घर से बाहर हुए
नहीं कि देखते-देखते छः आने की कमाई उनकी हो जाती है । लोग उनका चूरन लेने को उत्सुक
लोग रहते हैं। चूरन से भी अधिक शायद वह भगत जी के प्रति अपनी सद्भावना का देय देने
को उत्सुक रहते हैं।
23. प्रस्तुत गद्यांश किस पाठ से लिया गया है
?
(A) भक्तिन
(B) काले मेघा पानी दे
(C) बाज़ार दर्शन
(D) नमक
24. चूरन बेचने वाले का स्वभाव कैसा था ?
(A) संतोषी
(B) स्वार्थी
(C) गंभीर
(D) अहंकारी
25. भगत जी चूरन बेचकर प्रतिदिन कितना कमा लेते
थे ?
(A) दस आने
(B) सोलह आने
(C) चार आने
(D) छः आने
26. चूरन खरीदने वालों की उत्सुकता का क्या कारण
था ?
(A) भगत जी के प्रति उनकी सद्भावना
(B) भगत जी के द्वारा मुफ्त में चुरू
(C) भगत जी का व्यापारी स्वभाव
(D) इनमें से कोई नहीं
27. 'सिल्वर वैडिंग' कहानी में यशोधर बाबू के
जीवन में किशन दा का महत्व किस रूप में है ?
(A) वे उन्हें अपना भाई मानते थे
(B) वे उन्हें अपना गुरु मानते थे
(C) वे उन्हें अपना सेवक मानते थे
(D) वे उन्हें अपना बेटा मानते थे
28. 'जूझ' कहानी में आनंदा के पिता उसकी किस बात
से नाराज होते हैं ?
(A) खेत में काम करने की बात से
(B) पढ़ाई की बात करने से
(C) पशुओं को चराने की बात से
(D)
घर के कामों में मदद करने से
29. मोहनजोदड़ो का अर्थ है
(A) मुर्दो का टीला
(B) पहाड़ों का टीला
(C) मिट्टी का टीला
(D) खण्डहर
30. मोहनजोदड़ो की खुदाई से प्राप्त गेहूँ का
रंग कैसा है ?
(A) पीला
(B) काला
(C) हरा
(D) नीला
भाग-B (विषयनिष्ठ प्रश्न)
खण्ड- A (अति लघु उत्तरीय प्रश्न)
किन्हीं छः प्रश्नों के उत्तर दें।
2 x 6 = 12
31. श्रीराम के विलाप और उसी क्षण हनुमान के आगमन
से वानर सेना की क्या प्रतिक्रिया हुई ?
उत्तर-
श्रीराम के विलाप को सुनकर सारी वानर सेना अत्यधिक व्याकुल हो गयी. परन्तु तभी संजीवनी
बूटी सहित हनुमान के आगमन से सभी वानर अत्यधिक प्रसन्न और उत्साहित हो गये तथा उनमें
उत्साह और वीर रस का संचार हो गया।
32. उषा का जादू टूटने से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर-
उषा का जादू टूटने से तात्पर्य है सूर्योदय होना। सूर्य के उदय होते ही उषा का जादू
टूट जाता है।
33. 'पतंग' कविता के आधार पर बताएँ कि और भी निडर
कब हो जाते हैं'।
उत्तर-
पतंग उड़ाते समय बच्चे जब कभी छत की खतरनाक दीवारों एवं मुंडेरों से नीचे गिर जाते
हैं और उस दुर्घटना में चोटिल होने से बच जाते हैं, तब वे पूरी तरह निडर हो जाते हैं
और फिर दुगुने जोश से पतंगें उड़ाने लगते हैं।
34. पैसे की व्यंग्यशक्ति का क्या तात्पर्य है
?
उत्तर-
पैसे की व्यंग्य शक्ति का तात्पर्य है पैसे के आधार पर अपने - अभाव के कारण स्वयं को
हीन समझना या अधिक पैसे के कारण स्वयं को ऊंचा समझना पैसा ही हीनता या श्रेष्ठता का
अनुभव कराता है यही पैसे की व्यग्य शक्ति है।
35. 'भक्तिन का दुर्भाग्य भी कम हठी नहीं था' कैसे ?
उत्तर-
भक्तिन का दुर्भाग्य था कि उसकी बड़ी लड़की किशोरी से युवती बनी ही थी कि उसका पति
मर गया। वह असमय विधवा हो गई। दुर्भाग्य को हठी इसलिए कहा गया है, क्योंकि बेटी के
विधवा होने से पहले भक्तिन को बचपन से ही माता का बिछोह, बाल विवाह, विमाता का देश,
पिता की अकाल मृत्यु व असमय पति की मृत्यु जैसे जीवन में अनेक कष्टों का सामना करना
पड़ा।
36. 'काले मेघा पानी दे' संस्मरण द्वारा लेखिके ने क्या संदेश व्यक्त
किया है ?
उत्तर-
लेखक ने यह सन्देश दिया है कि विज्ञान अपनी जगह सत्य है। तथा उसके आविष्कारों से सभी
परिचित है। फिर भी जनता के सामूहिक चित्त में अन्धविश्वास और लौकिक कर्मकाण्ड का इतना
प्रभाव है कि विज्ञान भी उसके सामने कमजोर पड़ जाता है। अतएव परम्परागत मान्यताओं तथा
वैज्ञानिक दृष्टिकोण में जन- भावना के अनुसार समन्वय रखना जरूरी है।
37. लुट्टन पहलवान की पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में बताइए ।
उत्तर-
लुटून जब नौ वर्ष का था उसी समय उसके माता-पिता की मृत्यु हो चुकी थी। उसका विवाह बचपन
में ही हो चुका था। उसकी विधवा सास ने उसका पालन पोषण किया। वह अपनी सास के यहां गायों
को चराता, कसरत करता और बड़ा हो गया। समय के साथ उसका शरीर काफी मजबूत हो गया। इसके
बाद वह पहलवानी में जोर आजमाइश करने लगा।
38. ढोलक की आबाज का पूरे गाँव में क्या असर होता था ?
उत्तर-
ढोलक की आवाज से रात का सन्नाटा और भय कम हो जाता था। बच्चे, बूढ़े या जवान ढोलक की
आवाज़ से सबकी आंखों के सामने दंगल का दृश्य नाचने लगता था और वे सभी उत्साह से भर
जाते थे। लोग भले ही बीमारी के कारण मर रहे थे लेकिन जब तक जीवित थे ढोलक की आवाज के
कारण उन्हें मरने का भय नहीं सताता था। ढोलक की आवाज से उनका दर्द कम हो जाता था और
वह आराम से मर सकते थे।
खण्ड – B (लघु उत्तरीय प्रश्न)
किन्हीं
छः प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक का उत्तर अधिकतम 150 शब्दों में दें। 3x6-18
39. महामारी फैलने के बाद गाँव में सूर्योदस और सूर्यास्त के दृश्य
में क्या अंतर होता था ?
उत्तर-
महामारी फैलने के बाद गांव में सूर्योदय और सूर्यास्त के दृश्य में बहुत अंतर था। सूर्योदय
के समय सभी लोग लाशों को जलाने के लिए जाते थे। अपने पड़ोसियों और आत्मीयों को हिम्मत
देते थे। किंतु सूर्यास्त होते ही लोग अपने अपने घरों में घुस जाते थे। उसके बाद कोई
चूं की आवाज भी नहीं आती थी। धीरे-धीरे उनके बोलने की शक्ति भी जाती रहती थी। पास में
दम तोड़ते पुत्र को अंतिम बार बेटा कहकर पुकारने की भी हिम्मत माताओं में नहीं होती
थी। रात्रि में सिर्फ पहलवान की ढोलक ही महामारी को चुनौती देती थी।
40. "लक्ष्मण मूर्च्छा और राम-विलाप"
काव्यांश के आधार पर भ्रातृशोक में विह्वल श्रीराम की दशा स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर-
लक्ष्मण को मूर्च्छित देखकर श्रीराम अत्यधिक विह्वल हो उठे। उस समय वे मीता सुमित्रा
का ध्यान कर लक्ष्मण को अपने साथ लाने पर पछताने लगे। लक्ष्मण जैसे सेवा-भावी अनुज
के अनिष्ट की आशंका से वे प्रलाप करने लगे तथा अविनाश प्रभु होने के पश्चात् भी मनुष्यों
की भाँति द्रवित हो गये।
41. 'इंदर-सेना' अनावृष्टि दूर करने के लिए क्या
करती थी ?
उत्तर-
'इन्द्र सेना में गाँव के दस-बारह वर्ष से सोलह-अठारह वर्ष के सभी लड़के नंग-धडंग उछल-कूद,
शोर-शराबे के साथ कीचड़-मिट्टी को शरीर पर मलते हुए घर-घर जाते थे और बोल गंगा मैया
को जय का नारा लगाते हुए पानी की माँग करते थे। वे आस्था के कारण इन्द्र देवता से बारिश
करने के लिए प्रार्थना करते हुए ऐसा करते हैं।
42. भक्तिन के आ जाने से महादेवी अधिक देहाती
कैसे हो गई ?
उत्तर-
भक्तिन देहाती महिला थी। शहर में आकर भी उसने स्वयं कोई परिवर्तन नहीं किया। वह दूसरों
को भी अपने अनुसार बना लेना चाहती थी। उसने लेखिका को अपने अनुसार ही ढालना शुरू किया।
उसने लेखिका का मीठा खाना बिल्कुल बंद कर दिया। उसने गाढ़ी दाल व मोटी रोटी खिलाकर
लेखिका की स्वास्थ्य संबंधी चिंता दूर कर दी। अब लेखिका को रात को मकई का दलिया, सवेरे
मट्ठा, तिल लगाकर बाजरे के बनाए ठंडे पुए, ज्वार के भुने हुए भुट्टे के हरे-हरे दानों
की खिचड़ी और सफेद महुए की लपसी मिलने लगी। इन सबको वह स्वाद से खाने लगी। इसके अतिरिक्त
उसने महादेवी को देहाती भाषा भी सिखा दी। इस प्रकार महादेवी अधिक देहाती बन गई।
43. स्वयं कविता रच लेने का आत्मविश्वास लेखक
के मन में कैसे पैदा हुआ ?
उत्तर-
मराठी अध्यापक सौंदलगेकर के कविता पढ़ाने का ढंग अत्यंत रोचक एवं विलक्षण था। कविता
का वाचन वे भाव, लय, ताल, गति के साथ करते थे। लेखक एकाग्र होकर मास्टर साहब के हाव-
भाव, ध्वनि, गति और रसों का रसास्वादन किया करते थे। लेखक में इन्हीं अध्यापक के प्रोत्साहन
एवं उत्साहवर्धन के कारण स्वयं कविता रच सकने का आत्मविश्वास पैदा हुआ।
44. सिंधु-सभ्यता साधन सम्पन्न थी, पर उसमें भव्यता
का आडंबर नहीं था, कैसे ?
उत्तर-
सिंधु सभ्यता के शहर मुअनजोदड़ो की व्यवस्था, साधन संपन्न और सुनियोजित थी। वहाँ की
अन्न भंडारण व्यवस्था, जल निकासी की व्यवस्था अत्यंत विकसित और परिपक्व थी। हर निर्माण
बडा सुनियोजन के साथ किया गया था यह सोचकर कि यदि सिंधु का जल बस्ती तक फैल भी जाए
तो कम-से-कम नुकसान हो। इन सारी व्यवस्थाओं के बीच इस सभ्यता की संपन्नता की बात बहुत
ही कम हुई है। वस्तुतः इनमें भव्यता का आडंबर है ही नहीं। व्यापारिक व्यवस्थाओं की
जानकारी मिलती है, मगर सब कुछ आवश्यकताओं से ही जुड़ा हुआ है, भव्यता का प्रदर्शन कहीं
नहीं मिलता।
45. 'कैमरे में बंद अपाहिज' कविता को आप करुणा
की कविता मानते हैं या क्रूरता की ?
उत्तर-
कैमरे में बंद अपाहिज कविता बाजारवाद के युग में उन लोगों का चरित्र खोलता है, जो दूसरे
के दुखों को बेचकर धन कमाना चाहता है। कार्यक्रम संचालक अपने कार्यक्रम को सफल बनाने
के लिए एक अपाहिज व्यक्ति से प्रश्न पूछता है। वह प्रश्न पूछते पूछते क्रूर बन जाता
है। उसका उद्देश्य सिर्फ कार्यक्रम को सफल बनाना है न कि अपाहिज व्यक्ति से हमदर्दी
। अतः यह कविता करुणा के मुखोटे में छिपी क्रूरता की कविता है।
46. 'जन्म से ही वे अपने साथ लाते हैं कपास' कपास
के बारे में सोचें कि कपास से बच्चों का क्या संबंध बन सकता है ?
उत्तर-
जन्म से ही वे अपने साथ लाते हैं कपास पंक्ति में कपास से बच्चों की कोमल कल्पनाओं
का संबंध है। जिस प्रकार कपास अत्यंत स्वच्छ एवं कोमल होती है वैसे ही बच्चों की कल्पनाएं
अत्यंत नवीन, स्वच्छ एवं भावुकतापूर्ण होती है। वे निश्चल भाव से निरंतर कल्पनाएं करते
हैं। बच्चों के पैर भी कपास के समान कोमल, हल्के, आकर्षक और चोट सहने में समर्थ होते
हैं। इसलिए वे ऊँचाई से कूदकर भी चोट नहीं खाते, बल्कि उनकी कूद से कपास जैसे मुलायम
उनके तलवे जमीन की कठोरता का अनुभव नहीं कर पाते। अतः कपास से बालकों की समानता वर्णित
करना तर्कसम्मत है। दोनों में गुणों की समानता का संबंध है।
खण्ड – C (दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)
किन्हीं
चार प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर अधिकतम 250 शब्दों में दें।
5 x 4=20
47. निम्नलिखित में से किसी एक का काव्य सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए:
(क)
हो जाए न पथ में रात कहीं
मंजिल
भी तो है दूर नहीं -
यह
सोच थका दिन का पंथी भी जल्दी-जल्दी चलता है।
दिन
जल्दी-जल्दी ढलता है।
उत्तर-
(क)
भाव सौंदर्य- प्रस्तुत पंक्तियों में प्रेम की व्याकुलता
का अत्यंत ही सूक्ष्म चित्रण किया गया है। जल्दी-जल्दी चलना और दिन के ढलने का भय सताना
ये दोनों ही प्रेम की व्याकुलता के परिचायक है।
(ख)
शिल्प सौंदर्य- भाषा अत्यंत सरल, संगीतमय, सुकोमल और प्रवाहमयी
है।
अभिव्यक्ति
की सरलता मनभावन है।
जल्दी-जल्दी
में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।
(ख)
नील जल में या किसी की
गौर
झिलमिल देह
जैसी
हिल रही हो
और
जादू
टूटता है इस उषा का अब
सूर्योदय
हो रहा है।
उत्तर-
भाव-सौंदर्य
कवि
ने नीले जल में किसी गोरी देह वाली स्त्री का मनोहारी चित्रण किया है। धीमी हवा व नमी
के कारण सूर्य का प्रतिबिंब हिलता- सा प्रतीत होता है। कुछ समय बाद जब सूर्योदय होता
है तो प्रातः कालीन सुंदरता समाप्त हो जाती है।
काव्य
सौंदर्य / शिल्प सौंदर्य
1.
सरल भाषा का प्रयोग किया गया है।
2.
उषा का सुंदर दृश्य बिंब है।
3.
'नील जल में ... हिल रही हो।' में उत्प्रेक्षा अलंकार का प्रयोग है ।
4.
मुक्तक छंद का प्रयोग हुआ है।
5.
माधुर्य गुण है।
48. 'विद्यालय से लौटते समय जाम में फँस जाना' अथवा 'फैशन का बढ़ता
चलन' विषय पर एक निबंध लिखिए ।
उत्तर-
विद्यालय
से लौटते समय जाम में फँस जाना
सड़क
पर बहुत सारे वाहनों का एक स्थान पर फँस जाना ट्रैफिक जाम का कारण बनता है। यह कई प्रकार
से हानिकारक होता है। यह हमें कहीं भी आने-जाने में विलंब तो करता ही है साथ ही वायु
तथा ध्वनि प्रदूषण का कारण भी बनता है। इस ट्रैफिक जाम का सामना मुझ़े भी विद्यालय
से लौटते समय करना पड़ता है, जिसके कारण मुझे बहुत परेशानी होती है। मेरा विद्यालय
अजमेर रोड़ पर है। मैं अपने विद्यालय साइकिल से जाता हूँ। वहाँ से लौटते समय बाईपास
चौराहे पर अत्यधिक जाम होता है।
गाडियाँ
रेंग-रेंग कर चलती हैं, चारों ओर अत्यधिक ट्रैफिक का शोरगुल मचा रहता है। मैं विद्यालय
से 2 बजे निकलता हुँ, लेकिन मुझे घर पहुँचते-पहुँचते 4 बज जाते है, जिसके कारण मैं
अपनी कोचिंग क्लास के लिए भी लेट हो जाता हूँ। घंटों जाम में फँसा होने के कारण मेरा
शरीर एकदम थक जाता है तथा गर्मी के दिनों में लू के थपेड़े व कडकड्राती धूप से अत्यधिक
परेशान हो जाता हैँ। जाम में फँसने के कारण मेरा अमूल्य समय भी बर्बाद हो जाता है,
जिसके कारण मुझे पढ़ने का समय भी कम मिलता है। कभी-कभी यह जाम कई घंटों तक लगा रहता
है, जो खतरनाक भी साबित हो सकता है। यह किसी भी तरह से फायदेमंद नहीं हो सकता है। अत:
सरकार के साथ-साथ हमें भी कुछ सख़्त नियम बनाने चाहिए और इस समस्या का समाधान निकालना
चाहिए।
फैशन
का बढ़ता चलन
प्रस्तावना: आज
के आधुनिक युग में 'फैशन' शब्द हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग बन चुका है। साधारण अर्थों
में, फैशन का तात्पर्य कपड़ों, जूते, हेयरस्टाइल और मेकअप की उन नवीन शैलियों से है,
जो किसी समय विशेष में समाज द्वारा अपनाई जाती हैं। वर्तमान समय में यह केवल बाहरी
चमक-धमक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के आत्मविश्वास और व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति
का माध्यम भी बन गया है।
फैशन की इस तीव्र दौड़ के पीछे कई महत्वपूर्ण
कारक हैं:
1. मीडिया और सिनेमा का प्रभाव: फ़िल्मी सितारे
और सेलिब्रिटी युवाओं के लिए 'फैशन आइकन' होते हैं। सिनेमा और टीवी के माध्यम से नई-नई
शैलियाँ समाज में तेजी से फैलती हैं।
2. सोशल मीडिया और इन्फ्लुएंसर्स: आज के दौर
में इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म फैशन के नए रुझान (ट्रेंड्स) तय करने में
बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
3. वैश्वीकरण और ब्रांड जागरूकता: अंतरराष्ट्रीय
ब्रांड्स की पहुँच और बढ़ती आय के कारण लोग अब अपनी पसंद के अनुसार नए प्रयोग करने
के लिए अधिक उत्सुक हैं।
4. आधुनिकता की होड़: हर व्यक्ति खुद को आधुनिक
और दूसरों से अलग दिखाने की चाह रखता है, जिससे फैशन का चलन निरंतर बदलता रहता है।
समाज और युवाओं पर प्रभाव: फैशन
का प्रभाव सकारात्मक और नकारात्मक दोनों रूपों में देखा जा सकता है:
- सकारात्मक
पक्ष: यह लोगों को अपनी रचनात्मकता प्रदर्शित करने का अवसर देता है और आत्मविश्वास
बढ़ाता है। साथ ही, फैशन उद्योग लाखों लोगों को रोजगार भी प्रदान करता है।
- नकारात्मक
पक्ष: युवा पीढ़ी अक्सर फैशन की अंधी दौड़ में अपने सांस्कृतिक मूल्यों को भूल
जाती है। कभी-कभी महँगे फैशन के चक्कर में लोग अपनी आर्थिक क्षमता से अधिक खर्च
कर बैठते हैं, जिससे मानसिक तनाव बढ़ता है। इसके अतिरिक्त, 'फास्ट फैशन' पर्यावरण
को भी भारी नुकसान पहुँचाता है।
निष्कर्ष: फैशन
समय के साथ चलने की कला है, लेकिन इसे विवेकपूर्ण तरीके से अपनाना चाहिए। यदि फैशन
हमारी सादगी और शालीनता को नष्ट न करे, तो यह हमारे व्यक्तित्व को निखारने का एक अच्छा
साधन है। हमें याद रखना चाहिए कि वास्तविक सुंदरता हमारे व्यवहार और चरित्र में होती
है, न कि केवल बाहरी दिखावे में।
49. 'बगुलों के पंख' कविता का सार लिखें।
उत्तर-
यह कविता सुंदर दृश्य बिंबयुक्त कविता है जो प्रकृति के सुंदर दृश्यों को हमारी आँखों
के सामने सजीव रूप में प्रस्तुत करती है। सौंदर्य का अपेक्षित प्रभाव उत्पन्न करने
के लिए कवि ने कई युक्तियाँ अपनाई हैं जिनमें से सर्वाधिक प्रचलित युक्ति है-सौंदर्य
के व्यौरों के चित्रात्मक वर्णन के साथ अपने मन पर पड़ने वाले उसके प्रभाव का वर्णन
कवि काले बादलों से भरे आकाश में पंक्ति बनाकर उड़ते सफेद बगुलों को देखता है। वे कजरारे
बादलों के ऊपर तैरती साँझ की श्वेत काया के समान प्रतीत होते हैं। इस नयनाभिराम दृश्य
में कवि सब कुछ भूलकर उसमें खो जाता है। वह इस माया से अपने को बचाने की गुहार लगाता
है, लेकिन वह स्वयं को इससे बचा नहीं पाता।
50. 'पेट ही को पचत, बेचत बेटा-बेटकी।' में भक्त कवि तुलसीदास ने किस
विकट स्थिति की ओर संकेत किया है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
तुलसीदास के युग में धन-वैभव सम्पन्न लोग गरीबों की सन्तानों को दास रूप में खरीदते
थे। उस समय आर्थिक विषमता पिछड़ेपन एवं कट्टर वर्ण व्यवस्था जातिवाद के कारण भी थी।
वर्तमान में पेट की खातिर तथा बेकारी के कारण अतीव निर्धन लोग अपनी सन्तान को बेचते
थे। बन्धुआ मजदूर इसी का एक रूप है। आज की परिस्थिति भले ही पहले से भिन्न है, परन्तु
कर्जदारी और भुखमरी के कारण किसानों के द्वारा आत्महत्या करने की घटनाएँ आज भी अति
चिन्तनीय है।
51. 'अस्थिर सुख पर दुख की
छाया' - पंक्ति में 'दुःख की छाया' किसे कहा गया है और क्यों
?
उत्तर-
'अस्थिर सुख पर दुख की छाया पंक्ति में दुख की छाया क्रांति या विनाश की आशंका को कहा
गया है। जिन लोगों पास सुख के साधन होते हैं वे क्रांति से सदैव डरते हैं। क्रांति
उन्हीं का कुछ छीनेगी जिनके पास कुछ है। सुविधासंपन्न लोगों को क्रांति की संभावना
सदैव भयभीत करती रहती है। इसी कारण इसे दुख की छाया कहा गया है।
52. भक्तिन द्वारा शास्त्र के प्रश्न को सुविधा से सुलझा लेने का क्या
उदाहरण लेखिका ने दिया है?
उत्तर-
शास्त्र के प्रश्नों को भी भक्तिन अपनी सुविधानुसार सुलझा लेती है। वह सिर मंडाए रखती
थी, यह लेखिका को अच्छा नहीं लगता था। जब लेखिका भक्तिन को ऐसा करने से रोका तो उसने
अपनी बात ऊपर रखते हुए कहा कि शास्त्र में यही लिखा है। जब लेखिका ने पूछा कि क्या
लिखा है? उसने तुरंत उत्तर दिया- 'तीरथ गए मुंडाए सिध। यह बात किस शास्त्र में लिखी
गई है, इसका ज्ञान भक्तिन को नहीं था जबकि लेखिका जानती थी कि यह कथन किसी व्यक्ति
का नहीं है न ही किसी शास्त्र का है। अतः वह भक्तिन का चूड़ाकर्म हर बृहस्पतिवार को
होने से लेखिका नहीं रोक सकी और यथाविधि निष्पत्र होता रहा।