झारखण्ड अधिविद्य परिषद्
ANNUAL INTERMEDIATE EXAMINATION – 2026
POLITICAL SCIENCE (Optional) 16.02.2026
सामान्य निर्देश :
1.
इस प्रश्न-पुस्तिका में दो भाग भाग-A तथा भाग-B
2.
भाग-A में 30 अंक के बहुविकल्पीय प्रश्न तथा भाग-B में 50 अंक के
विषयनिष्ठ प्रश्न हैं।
3.
परीक्षार्थी को अलग से उपलब्ध कराई गई उत्तर-पुस्तिका
में उत्तर देना है।
4.
भाग-A - इसमें
30 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं जिनके 4 विकल्प
(A, B, C तथा D')
हैं। परीक्षार्थी को उत्तर-पुस्तिका
में सही उत्तर लिखनी है। सभी प्रश्न अनिवार्य हैं। प्रत्येक प्रश्न 1 अंक
का है। गलत उत्तर के लिए कोई अंक काटा नहीं जाएगा।
5. भाग-B - इस भाग
में तीन खण्ड-A, B तथा C हैं। इस भाग में अति लघु उत्तरीय, लघु उत्तरीय तथा दीर्घ उत्तरीय
प्रकार के विषयनिष्ठ प्रश्न हैं। कुल प्रश्नों की संख्या 22 है।
खण्ड-A - प्रश्न
संख्या 31-38 अति लघु उत्तरीय हैं। किन्हीं 6 प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक
प्रश्न 2 अंक का है।
खण्ड-B - प्रश्न संख्या 39-46 लघु उत्तरीय हैं। किन्हीं 6 प्रश्नों
के उत्तर दें। प्रत्येक प्रश्न 3 अंक का है। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर अधिकतम 150
शब्दों में दें।
खण्ड-C - प्रश्न संख्या 47-52 दीर्घ उत्तरीय हैं। किन्हीं 4 प्रश्नों
के उत्तर दें। प्रत्येक प्रश्न 5 अंक का है। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर अधिकतम 250
शब्दों में दें।
6. परीक्षार्थी यथासंभव अपने शब्दों में ही उत्तर दें।
7. परीक्षार्थी परीक्षा भवन छोड़ने के पहले अपनी उत्तर
पुस्तिका वीक्षक को अनिवार्य रूप से लौटा दें।
8. परीक्षा समाप्त होने के उपरांत परीक्षार्थी प्रश्न-पुस्तिका अपने साथ लेकर जा सकते
हैं।
भाग - A (बहुविकल्पीय प्रश्न)
प्रश्न संख्या 1 से 30 तक बहुविकल्पीय प्रकार है। प्रत्येक
प्रश्न के चार विकल्प हैं। सही विकल्प चुनकर उत्तर पुस्तिका में लिखें। प्रत्येक
प्रश्न 1 अंक का है। 1 x 30- 30
1. सोवियत संघ में कितने
संघीय गणराज्य थे?
(A)
12
(B) 15
(C)
10
(D)
8
2. स्वतंत्र
राष्ट्रों के राष्ट्रकुल की स्थापना किसने की ?
(A) पुतिन
(B) येल्तसिन
(C) स्टालिन
(D) गोर्बाचेव
3. यूरोपीय
संघ की स्थापना कब हुई ?
(A) 1957
(B)
1967
(C) 1992
(D)
1968
4. साम्यवादी
चीन का उदय कब हुआ ?
(A) 1949
(B)
1939
(C) 1969
(D) 1979
5. दक्षेस
का मुख्यालय कहाँ है ?
(A) नई दिल्ली
(B) ढाका
(C) काठमांडू
(D)
थिम्फू
6. निम्नलिखित
में कौन दक्षिण एशिया का देश नहीं है ?
(A) भारत
(C)
पाकिस्तान
(C) मालदीव
(D) थाइलैंड
7. विश्व
व्यापार संगठन की स्थापना कब हुई ?
(A) 1945
(B) 1965
(C) 1975
(D) 1995
8. किसकी
सिफारिश पर महासभा महासचिव की नियुक्ति करती है ?
(A) सुरक्षा परिषद्
(B) अन्तंरराष्ट्रीय न्यायालय
(C) आर्थिक और सामाजिक परिषद्
(D) सचिवालय
9. वैश्विक
ताप वृद्धि किस सुरक्षा का मामला है ?
(A) मानव सुरक्षा
(B) वैश्विक सुरक्षा
(C) सामूहिक सुरक्षा
(D) इनमें से कोई नहीं
10. पारंपरिक
सुरक्षा नीति के तत्व क्या हैं।
(A) शक्ति संतुलन
(B) गठबंधन बनाना
(C) सामूहिक सुरक्षा
(D) इनमें से सभी
11. विश्व
की साझी समस्या कौन हैं ?
(A) बाह्य अंतरिक्ष
(B)
महासागरीय सतह
(C) वायुमंडल
(D) इनमें
से सभी
12. ग्रीनहाउस
गैस सम्बन्धित हैं
(A) विश्व बाजार से
(B)
वैश्विक व्यापार से
(C) वैश्विक तापवृद्धि से
(D)
इनमें से सभी
13. निम्न
में से कौन बहुराष्ट्रीय कंपनी नहीं
(A) फोर्ड मोटर्स
(B) सैमसंग
(C) पारले
(D)
कोका-कोला
14. भारत
में किस प्रधानमंत्री ने आर्थिक उदारीकरण को शुरू किया था ?
(A) पी. वी. नरसिम्हा राव
(B) मनमोहन सिंह
(C) अटल बिहारी वाजपेयी
(D) चन्द्रशेखर
15. किस
भाषा के आधार पर 1953 में आंध्र प्रदेश राज्य का गठन किया गया था ?
(A) तेलुगु
(B) मलयालम
(C) कन्नड
(D) तमिल
16. राज्य
पुनर्गठन आयोग में कुल कितने सदस्य थे ?
(A) 3
(B)
4
(C)
5
(D)
6
17. 1952-1967 के मध्य भारतीय राजनीति में किस पार्टी का वर्चस्व रहा
?
(A)
जनता दल
(B)
जनता पार्टी
(C) कांग्रेस पार्टी
(D)
भारतीय जनता पार्टी
18. जनसंघ
के संस्थापक कौन थे ?
(A)
अटल बिहारी वाजपेयी
(B)
दीनदयाल उपाध्याय
(C) श्यामाप्रसाद मुखर्जी
(D) लालकृष्ण अडवानी
19. उदारीकरण
उत्तर के युग में भारतीय अर्थव्यवस्था के किस क्षेत्र में तेजी से प्रगति हुई है ?
(A) कृषि क्षेत्र
(B) विनिर्माण क्षेत्र
(C) औद्योगिक क्षेत्र
(D) सेवा
क्षेत्र
20. किस
पंचवर्षीय योजना में बड़े उद्योगों के विकास पर बल दिया गया था ?
(A) पहली योजना (1951-56)
(B) दूसरी योजना (1961-66)
(C) पाँचवीं योजना (1974-79)
(D)
छठी योजना (1980-85)
21. ऐतिहासिक
भारत-अमेरिका नागरिक परमाणु सहयोग संधि पर किस वर्ष हस्ताक्षर किये गये थे ?
(A) 2001
(B) 2004
(C) 2008
(D) 2006
22. कौन-सी रेखा भारत व बांग्लादेश के बीच सीमा निर्धारण करती है ?
(A)
डुरण्ड लाइन
(B)
मैकमोहन लाइन
(C) रैडक्लिफ लाइन
(D)
इनमें से कोई नहीं
23. 1969 में कांग्रेस के मतभेदों के कारण उसका राष्ट्रपति के लिए
कौन-सा प्रत्याशी चुनाव हार गया था ?
(A)
जाकिर हुसैन
(B)
बी. वी. गिरि
(C) नीलम संजीव रेड्डी
(D)
एम. हिदायतुल्ला
24. इंदिरा
गाँधी द्वारा 1971 के आम चुनावों के समय कौन-सा नारा दिया गया ?
(A) गरीबी हटाओ
(B) अंध विश्वास हटाओ
(C) भ्रष्टाचार हटाओ
(D) बेरोजगारी हटाओ
25. भारत
में आपातकाल के दौरान कौन-सा संविधान संशोधन पारित किया गया था ?
(A) 42 वाँ संशोधन
(B) 44 वाँ संशोधन
(C) 45 वाँ संशोधन
(D)
46 वाँ संशोधन
26. 1977 में जनता पार्टी शासन में कौन प्रधानमंत्री बना था ?
(A)
विश्वनाथ प्रताप सिंह
(B) मोरारजी देसाई
(C)
चन्द्रशेखर
(D)
इन्द्र कुमार गुजराल
27. धरती
पुत्र की धारणा का सम्बन्ध है
(A) उदारवादी क्षेत्रवाद से
(B)
राष्ट्रवाद से
(C) अन्तरराष्ट्रवाद से
(D) संकीर्ण
क्षेत्रवाद से
28. अमृतसर
के स्वर्ण मंदिर को आंतकवादियों से मुक्त कराने के लिए कौन-सा अभियान चलाया गया था
?
(A) ऑपरेशन
ब्लू स्टार
(B) ऑपरेशन विजय
(C) ऑपरेशन गोल्डन टेंपल
(D)
ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म
29. गठबंधन
सरकार है
(A) समस्या
(B) आवश्यकता
(C) औपचारिकता
(D)
इनमें से कोई नहीं
30. निम्न
में से किस पार्टी का गठन एक महिला नेता द्वारा किया गया था ?
(A) तेलुगु देशम
(B)
बहुजन समाज पार्टी
(C) ए.आई.डी.एम.के.
(D) तृणमूल
कांग्रेस
भाग-B (विषयनिष्ठ प्रश्न) खण्ड -A (अति लघु उत्तरीय प्रश्न)
किन्हीं छः प्रश्नों के उत्तर दें।
2 x 6 = 12
31. दो मध्य एशियाई देशों
के नाम लिखें जो सोवियत संघ में शामिल थे।
उत्तर - कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान
32. भारत ने अपना पहला परमाणु
परीक्षण कब और कहाँ किया था ?
उत्तर - भारत का पहला परमाणु परीक्षण 18 मई, 1974 को पोखरण,
राजस्थान में किया गया था।
33. संयुक्त राष्ट्र संघ
में भारत के किन्हीं दो योगदानों का वर्णन करें।
उत्तर –
1. अन्तर्राष्ट्रीय शांति व सुरक्षा को बढ़ाने में योगदान-
भारत की प्रत्येक अन्तर्राष्ट्रीय विवाद को संयुक्त राष्ट्र संघ के माध्यम से
शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने की नीति रही है। कोरिया, कांगो, फिलिस्तीन, नामीबिया
आदि की समस्या भारत के ही प्रयत्नों से सुलझाई गई।
2. संयुक्त राष्ट्र संघ को विश्वव्यापी संस्था बनाने में
सहयोग- भारत ने सदैव यह प्रयास किए हैं कि विश्व के सभी देश
संयुक्त राष्ट्र संघ के सदस्य बनें। भारत चाहता है कि यह संगठन विश्वव्यापी बने
जिससे यह दुनिया में शांति स्थापित करने में प्रभावी भूमिका का निर्वहन कर सके। एक
समय था जब अमेरिका और रूस में पारस्परिक विरोध के कारण अनेक देशों को विशेषकर
साम्यवादी देशों को संघ का सदस्य नहीं बनाया जा रहा था। 1957 में भारत के ही
प्रयत्न से दोनों में सहमति, हो गई तथा एक साथ 18 देशों को संयुक्त राष्ट्र का
सदस्य बनाया गया। इसी प्रकार भारत के ही प्रयत्न से चीन को संयुक्त राष्ट्र संघ का
स्थायी सदस्य बनाया गया।
34. प्रदूषण के दो प्रकारों
का वर्णन करें।
उत्तर -
1. वायु
प्रदूषण : कारण: वाहनों से
निकलने वाला धुआं, कारखानों की चिमनियां, और कचरा जलाना।
प्रभाव: यह
श्वसन संबंधी बीमारियां, अस्थमा और फेफड़ों के कैंसर का कारण बनता है।
2. जल
प्रदूषण : कारण: औद्योगिक
अपशिष्ट, घरेलू सीवेज, और कृषि में इस्तेमाल कीटनाशक, जो जल निकायों
में मिलते हैं।
प्रभाव: यह
पीने के पानी को जहरीला बनाता है, जलीय पौधों और मछलियों को मारता है, और
पारिस्थितिकी तंत्र को नष्ट करता है।
35. राज्य पुनर्गठन आयोग
का गठन कब हुआ था और इसके अध्यक्ष कौन थे ?
उत्तर- राज्य पुनर्गठन आयोग का गठन सन् 1953 में हुआ था और इसके अध्यक्ष
न्यायमूर्ति फजल अली थे। उन्होंने 1955 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की जिसके आधार पर
सन् 1956 का राज्य पुनर्गठन अधिनियम बना। इसके तहत भारत में भाषाई आधार पर 14 राज्यों
का निर्माण किया गया तथा 6 संघ शासित क्षेत्र बनाये गये।
36. भारत के दो राष्ट्रीय
राजनीतिक दलों के नाम लिखें।
उत्तर - भारत के दो प्रमुख राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के नाम
निम्नलिखित हैं:
1. भारतीय
जनता पार्टी (BJP)
2. भारतीय
राष्ट्रीय कांग्रेस (INC)
37. भारत के पहले मुख्य निर्वाचन
आयुक्त कौन थे ?
उत्तर - सुकुमार सेन भारत के पहले मुख्य चुनाव आयुक्त थे,
जिन्होंने 21 मार्च 1950 से 19 दिसंबर 1958 तक सेवा की।
38. दक्षेस के दो सदस्य देशों
के नाम लिखें।
उत्तर - दक्षेस (SAARC) के दो प्रमुख सदस्य देशों के नाम भारत और
पाकिस्तान हैं।
खण्ड - B (लघु उत्तरीय प्रश्न)
किन्हीं छः प्रश्नों के उत्तर दें।
प्रत्येक प्रश्न का उत्तर अधिकतम 150 शब्दों में दें। 3x6-18
39. आसियान वे क्या है?
उत्तर - आसियान (ASEAN) का पूरा नाम Association of Southeast
Asian Nations है। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का संगठन एक क्षेत्रीय संगठन है जो
एशिया-प्रशांत के उपनिवेशी राष्ट्रों के बढ़ते तनाव के बीच राजनीतिक और सामाजिक
स्थिरता को बढ़ावा देने के लिये स्थापित किया गया था।
आसियान का आदर्श वाक्य ‘वन विजन, वन आइडेंटिटी, वन
कम्युनिटी’ है। 8 अगस्त आसियान दिवस के रूप में मनाया जाता है। आसियान का सचिवालय
इंडोनेशिया के राजधानी जकार्ता में है।
40. पाकिस्तान में लोकतंत्र
के मार्ग में क्या बाधायें हैं ?
उत्तर-पाकिस्तान में कभी लोकतंत्र तथा कभी सैन्य शासन चलता
रहता है।
(i) पाकिस्तान में सैनिक हस्तक्षेप,
(ii) कट्टरतावाद,
(iii) आतंकवाद धर्मगुरू एवं भूस्वामी अभिजनों के सामाजिक
प्रभाव ने लोकतंत्र के मार्ग में कठिनाइयाँ पैदा की हैं। पाकिस्तान में विशेषकर
सैनिक तानाशाही ने लोकतंत्र के मार्ग में सर्वाधिक रुकावटें पैदा की हैं।
41. मानव सुरक्षा से आप क्या
समझते हैं ?
उत्तर- बाहरी आक्रमण ही राज्य की सुरक्षा को चुनौती नहीं
देते बल्कि भीतरी तत्व भी राज्य की असुरक्षा का कारण बन सकते हैं, जैसे- दरिद्रता,
बेकारी, भुखमरी, लोगों का पलायन, सामाजिक विखण्डन इत्यादि। राज्य का दायित्व है कि
वह अपने प्रदेश की सुरक्षा के साथ मानवों को ऐसे भयंकर दोषों या कष्टों से बचाये।
मानव अधिकारों की रक्षा की जाए तथा साझी सम्पदा व पर्यावरण को भी सुरक्षित किया
जाए।
42. एम० एस० स्वामीनाथन का
संबंध किस क्रांति से है ?
उत्तर - एम० एस० स्वामीनाथन का संबंध हरित क्रांति से है। उन्हें
भारत में हरित क्रांति का जनक कहा जाता है। उन्होंने 1960-70 के दशक में गेहूं और
चावल की अधिक उपज देने वाली (HYV) किस्में विकसित कर भारत को खाद्यान्न में
आत्मनिर्भर बनाया था।
43. प्रिवी पर्स से आप क्या
समझते हैं ?
उत्तर- भारतीय संविधान के अनुच्छेद
291 के अनुसार प्रिवीपर्स देशी रियासतों के पूर्व शासकों व उनके उत्तराधिकारियों
को कर-मुक्त एक निश्चित धनराशि दिये जाने की गारण्टी थी जिसे 1971 में 26 वें
संशोधन द्वारा समाप्त कर दिया गया।
44. सुरक्षा परिषद के सभी
स्थायी सदस्यों के नाम बतायें।
उत्तर- सुरक्षा परिषद् के पाँचों
स्थायी सदस्यों (अमरीका, रूसी संघ, ब्रिटेन, फ्रांस व चीन) को वीटो शक्ति प्राप्त
है। कोई स्थायी सदस्य किसी गैर-प्रक्रिया सम्बन्धी मामले में विपक्ष में अपना वोट
देकर किसी प्रस्ताव को पास होने से रोक सकता है।
45. दल-बदल
की राजनीति का लोकतंत्र पर क्या प्रभाव है ?
उत्तर- जब कोई सांसद या विधायक
अपनी पार्टी छोड़कर किसी अन्य दल में शामिल हो जाता है या अपनी अलग पार्टी बना
लेता है तथा उसके ऐसे काम से कोई सरकार बनती या गिर जाती है तो उसे राजनीतिक
दल-बदल का कृत्य कहते हैं। सारा प्रयोजन सत्ता प्राप्त करने हेतु किया जाता है।
इसी को 'आया राम, गया राम की राजनीति' कहते हैं। कोई अपनी पार्टी में आया या
पार्टी को छोड़कर अन्य पार्टी में चला गया। 1967 के चुनावों के बाद ऐसा कार्य बहुत
तेजी से हुआ। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार, मध्य प्रदेश, उड़ीसा (ओडिशा) जैसे
राज्यों में कांग्रेस की सरकारें गिर गयीं तथा उनकी जगह गठबन्धन सरकारें बनीं।
1971-72 में कांग्रेस व्यवस्था की बहाली से इस पर रोक लगी।
46. विविधता में एकता से
आप क्या समझते हैं?
उत्तर - भारत को विविधताओं का देश कहा
जाता है। इसका अर्थ यह है कि भारत में जातीय, धार्मिक तथा क्षेत्रीय विविधताएँ पायी
जाती हैं। अलग-अलग जाति, सम्प्रदायों तथा धर्मों के लोग यहाँ पर रहते हैं। फिर भी इन
विविधताओं अर्थात् विभिन्न धर्मों, जातियों और भाषा-भाषी लोगों में एकता की अटूट भावना
पायी जाती है। इसी को हम विविधता में एकता के रूप में जानते हैं।
खण्ड - C (दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)
किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दें।
प्रत्येक प्रश्न का उत्तर अधिकतम 250 शब्दों में दें। 5 x 4 = 20
47. नेपाल में लोकतंत्र समर्थक
आन्दोलन पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर - नेपाल में लोकतंत्र समर्थक आंदोलन (जन आंदोलन) राजशाही को
समाप्त कर लोकतांत्रिक गणराज्य की स्थापना करने वाला एक ऐतिहासिक संघर्ष था, जो
मुख्य रूप से 1990 और 2006 (जन आंदोलन-II) में चरम पर था। सात राजनीतिक दलों के
गठबंधन और माओवादियों ने राजा ज्ञानेंद्र के प्रत्यक्ष शासन के विरुद्ध संघर्ष
किया, जिसके परिणामस्वरूप 2008 में राजशाही खत्म हुई।
आंदोलन के मुख्य चरण:
1. 1990
का आंदोलन: 1990 के जन आंदोलन ने
राजा बीरेंद्र को संवैधानिक सुधार के लिए मजबूर किया और बहुदलीय लोकतंत्र बहाल
हुआ।
2. 2006
का 'जन आंदोलन-II': राजा ज्ञानेंद्र
द्वारा 2005 में सारी सत्ता अपने हाथ में लेने के खिलाफ, 7 प्रमुख दलों (SPA) और
माओवादियों ने मिलकर देशव्यापी प्रदर्शन किया। इस शांतिपूर्ण विरोध और हड़ताल ने
राजा को झुकने पर मजबूर किया, और संसद फिर से बहाल की गई।
3. गणराज्य
की स्थापना: 28 मई, 2008 को
नवनिर्वाचित संविधान सभा ने नेपाल को एक लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित कर दिया, जिससे
200 वर्षों से अधिक का राजशाही शासन समाप्त हो गया।
48. स्वतंत्रता के पश्चात
भारत के समक्ष राष्ट्र निर्माण की चुनौतियों पर एक निबंध लिखें।
उत्तर-
राष्ट्र निर्माण किसी नए राष्ट्र में एकीकरण, राजनीतिक स्थिरता तथा विकास की सुनियोजित
प्रक्रिया है। यह प्रक्रिया राष्ट्रीय जीवन के लिए सार्थक कतिपय मूल्यों, विश्वासों
तथा आदर्शों पर आधारित होती है। राष्ट्र निर्माण वैसे भी एक जटिल प्रक्रिया है लेकिन
1947 में आजादी के समय सांप्रदायिक आधार पर देश के विभाजन के कारण इसकी जटिलताएं अधिक
बढ़ गई थी। आजादी के समय भारत में राष्ट्र निर्माण की तीन प्रमुख चुनौतियां उपस्थित
थी:-
1.
राष्ट्रीय एकीकरण की चुनौती- इसके अंतर्गत विभाजन के बाद
देश के विभिन्न क्षेत्रों विशेषकर विभिन्न देशी रियासतों को भारतीय राष्ट्र के अंतर्गत
एकीकृत करना था। ऐसा करना भारत की क्षेत्रीय अखंडता के लिए अत्यंत आवश्यक था। मुख्य
चुनौतियां थी कि भारत की सांस्कृतिक, भाषायी तथा धार्मिक विविधताओं के बावजूद राष्ट्रीय
अखंडता को कैसे संरक्षित किया जाए।
इस
संबंध में नेहरू का दृष्टिकोण उदारवादी था। यह नीति विभिन्नताओं को समाप्त कर एकता
को थोपने की नीति ना होकर विभिन्नताओं का सम्मान करते हुए समायोजन के द्वारा राष्ट्रीय
एकीकरण की नीति थी।
2.
लोकतंत्र को मजबूत बनाने की चुनौती- भारत में ब्रिटेन की
तर्ज पर संसदीय लोकतंत्र की व्यवस्था की गई थी। नए संविधान में नागरिकों के मौलिक अधिकारों
व स्वतंत्रताओं के साथ-साथ प्रत्येक वयस्क नागरिकों के लिए सार्वभौमिक मताधिकार की
व्यवस्था पहली बार की गई थी। बहुदलीय प्रणाली को अपनाया गया तथा नियमित अंतराल पर स्वतंत्र
व निष्पक्ष चुनाव के संपादन के लिए एक स्वतंत्र निर्वाचन आयोग का प्रावधान किया गया।
जाति, धर्म तथा अन्य परंपरागत विशेषताओं से युक्त भारतीय सामाजिक परिवेश में नए लोकतंत्र
की सफलता व मजबूती एक गंभीर चिंता का विषय थी।
नेहरू
उदारवादी लोकतंत्र के समर्थक थे उनका विश्वास था कि जैसे-जैसे समानता व न्याय पर आधारित
विकास की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी भारत में लोकतंत्र की जड़ें भी मजबूत होते जाएंगे।
3.
समता व न्याय पर आधारित तीव्र विकास की चुनौती-
भारत में राष्ट्र निर्माण की तीसरी चुनौती विकास की ऐसी प्रक्रिया को सुनिश्चित करना
था कि उसका लाभ केवल कुछ उच्च वर्गों तक सीमित ना होकर समाज के सभी वर्गों को प्राप्त
हो सके। संविधान में कमजोर वर्गों तथा अल्पसंख्यकों के विशिष्ट हितों की रक्षा के साथ-साथ
नीति निर्देशक सिद्धांतों के अंतर्गत एक कल्याणकारी राज्य की व्यवस्था की गई थी।
इस
संबंध में नेहरू लोकतांत्रिक समाजवाद की धारणा से प्रभावित थे। इसके तहत जमींदारी उन्मूलन,
मिश्रित अर्थव्यवस्था तथा उसमें सरकारी क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका, योजनागत विकास
प्रक्रिया, कमजोर वर्गों के हितों का संरक्षण आदि उपायों द्वारा समता व न्याय पर आधारित
विकास प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।
49. भाषा राष्ट्र निर्माण
में एक चुनौती है। व्याख्या करें।
उत्तर - 'भाषा' राष्ट्र निर्माण में एक बड़ी चुनौती है क्योंकि यह
भाषाई विविधता, क्षेत्रीय पहचान और हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के विरोध के कारण
एकता को खतरे में डालती है। यह विभाजनकारी प्रवृत्तियों को बढ़ावा देकर और भाषाई
संघर्ष पैदा करके राष्ट्र के एकीकरण की राह में बाधा उत्पन्न करती है।
भाषा: राष्ट्र निर्माण में एक चुनौती
1. भाषाई
विविधता और पहचान: भारत में
सैकड़ों भाषाएँ और बोलियाँ हैं, जहाँ भाषा लोगों की संस्कृति और क्षेत्रीय पहचान
का मुख्य आधार है। इस विविधता के कारण, एक साझा राष्ट्रीय पहचान विकसित करना
चुनौतीपूर्ण रहा है।
2. हिंदी
का विरोध: स्वतंत्रता के बाद,
हिंदी को राष्ट्रभाषा (राजभाषा) बनाने के प्रयासों का दक्षिण और गैर-हिंदी भाषी
राज्यों में कड़ा विरोध हुआ, जिससे राष्ट्रीय एकता पर सवाल उठे।
3. क्षेत्रीय
संघर्ष: भाषाई पहचान के आधार
पर राज्यों के पुनर्गठन (जैसे भाषा के आधार पर राज्यों का पुनर्गठन) ने देश में
भाषाई समूहों के बीच टकराव और अलग पहचान की मांग को जन्म दिया।
4. प्रशासनिक
व शैक्षणिक चुनौतियाँ:
भाषाई विविधता के कारण शिक्षा और प्रशासनिक कार्यों में एक समान भाषा का उपयोग
करना कठिन हो जाता है, जो एकता में बाधा है।
50. भारत और रूस के बीच सम्बन्ध
पर प्रकाश डालें।
उत्तर - भारत और रूस के बीच संबंध ऐतिहासिक रूप से मजबूत,
विश्वसनीय और "विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी" पर
आधारित हैं। रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और परमाणु विज्ञान के क्षेत्रों में गहरा
सहयोग दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के मुख्य स्तंभ हैं। रूस भारत का
प्रमुख रक्षा उपकरण आपूर्तिकर्ता है, जबकि भारत के लिए परमाणु ऊर्जा और
भू-राजनीतिक सुरक्षा में रूस का समर्थन महत्वपूर्ण है।
भारत-रूस संबंधों की मुख्य विशेषताएं:
1. ऐतिहासिक
और रणनीतिक साझेदारी:
1971 की भारत-सोवियत मैत्री संधि के बाद से ही ये संबंध मजबूत रहे हैं। 2000 में
रणनीतिक साझेदारी और 2010 में इसे 'विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक
साझेदारी' में उन्नत किया गया।
2. रक्षा
सहयोग: रूस भारत के लिए
रक्षा उपकरणों का सबसे बड़ा और विश्वसनीय स्रोत है, जिसमें पनडुब्बी, मिसाइल
सिस्टम (जैसे S-400), और विमान शामिल हैं।
3. ऊर्जा
और परमाणु ऊर्जा: भारत कुडनकुलम
जैसे परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए रूस के साथ सहयोग कर रहा है, और रूस भारत के
लिए तेल और गैस का प्रमुख आपूर्तिकर्ता बन गया है।
4. बहुध्रुवीय
विश्व की कल्पना: दोनों देश
संयुक्त राष्ट्र, ब्रिक्स, और एससीओ जैसे मंचों पर साझा हितों पर सहयोग करते हैं
और एक बहुध्रुवीय विश्व के समर्थक हैं।
5. अंतरिक्ष
और विज्ञान: अंतरिक्ष अन्वेषण,
उपग्रह प्रक्षेपण, और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में दोनों देश मिलकर काम कर
रहे हैं।
51. शॉक थेरेपी क्या थी
? इसके क्या परिणाम हुए ?
उत्तर:
शॉक थेरेपी का अर्थ-साम्यवाद के पतन के पश्चात् पूर्व सोवियत संघ के गणराज्य एक
सत्तावादी समाजवादी व्यवस्था से लोकतान्त्रिक पूँजीवादी व्यवस्था के कष्टप्रद
संक्रमण से होकर गुजरे। रूस, मध्य एशिया के गणराज्य और पूर्वी यूरोप के देशों में
पूँजीवाद की ओर से संक्रमण का एक विशेष मॉडल अपनाया गया। विश्व बैंक एवं
अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा निर्देशित इस मॉडल को ‘शॉक थेरेपी’ अर्थात्
आघात पहुँचाकर उपचार करना कहा जाता है।
शॉक
थेरेपी में सम्पत्ति पर निजी स्वामित्व, राज्य की सम्पदा के निजीकरण एवं व्यापारिक
स्वामित्व के ढाँचे को अपनाना, पूँजीवादी पद्धति से खेती करना, मुक्त व्यापार को
पूर्ण रूप से अपनाना, वित्तीय खुलापन एवं मुद्राओं की आपसी परिवर्तनशीलता को
अपनाना शामिल है।
शॉक
थेरेपी के परिणाम शॉक थेरेपी के प्रमुख परिणाम निम्नलिखित हैं-
1.
अर्थव्यवस्था का नष्ट होना– सन् 1990 में अपनायी गयी शॉक
थेरेपी जनता को उपभोग के उस आनन्द लोक तक नहीं ले गई, जिसका उसने वादा किया था। शॉक
थेरेपी से पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था नष्ट हो गई और जनता को बरबादी की मार झेलनी
पड़ी। रूस में पूरा राज्य नियन्त्रित औद्योगिक ढाँचा चरमरा उठा। लगभग 90 प्रतिशत उद्योगों
को निजी हाथों अथवा कम्पनियों को बेच दिया गया। आर्थिक ढाँचे का यह पुनर्निर्माण चूंकि
सरकार द्वारा नियन्त्रित औद्योगीकरण नीति की अपेक्षा बाजार की शक्तियाँ कर रही थीं;
इसलिए यह कदम सभी उद्योगों को नष्ट करने वाला सिद्ध हुआ। इसे इतिहास की सबसे बड़ी
‘गराज सेल’ के नाम से जाना जाता है क्योंकि महत्त्वपूर्ण उद्योगों की कीमत कम-से-कम
करके आँकी गयी तथा उन्हें औने-पौने दामों में बेच दिया गया। यद्यपि इस महाबिक्री में
भाग लेने के लिए समस्त जनता को अधिकार पत्र प्रदान किए गए थे, लेकिन अधिकांश जनता ने
अपने अधिकार पत्र कालाबाजारियों को बेच दिए क्योंकि उन्हें धन की आवश्यकता थी।
2.
रूसी मुद्रा (रूबल) में गिरावट- शॉक थेरेपी के कारण
रूसी मुद्रा रूबल के मूल्य में नाटकीय ढंग से गिरावट आयी। मुद्रास्फीति इतनी अधिक बढ़ी
कि लोगों की जमा पूँजी धीरे-धीरे समाप्त हो गयी और लोग निर्धन हो गए।
3.
खाद्यान्न सुरक्षा की समाप्ति- शॉक थेरेपी के कारण सामूहिक
खेती की प्रणाली समाप्त हो गई। अब लोगों की खाद्यान्न सुरक्षा व्यवस्था भी समाप्त हो
गई, जिस कारण लोगों के समक्ष खाद्यान्न की समस्या भी उत्पन्न होने लगी। रूस ने खाद्यान्न
का आयात कर दिया। पुराना व्यापारिक ढाँचा तो टूट चुका था, लेकिन इसके स्थान पर कोई
वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो पायी थी।
4.समाज
कल्याण की समाजवादी व्यवस्था को नष्ट किया जाना- सोवियत
संघ से अलग हुए राज्यों में समाज कल्याण की समाजवादी व्यवस्था को क्रम से नष्ट किया
गया। समाजवादी व्यवस्था के स्थान पर नई पँजीवादी व्यवस्था को अपनाया गया। इस व्यवस्था
के बदलने से लोगों को प्रदान की जाने वाली राजकीय रियायतें समाप्त हो गईं; जिससे अधिकांश
लोग निर्धन होने लगे। इस कारण मध्यम एवं शिक्षित वर्ग का पलायन हुआ और वहाँ कई देशों
में एक नया वर्ग उभरकर सामने आया जिसे माफिया वर्ग के नाम से जाना गया। इस वर्ग ने
वहाँ की अधिकांश आर्थिक गतिविधियों को अपने हाथों में ले लिया।
5.
आर्थिक असमानताओं का जन्म- निजीकरण ने नई विषमताओं को
जन्म दिया। पूर्व सोवियत संघ में शामिल गणराज्यों और विशेषकर रूस में अमीर और गरीब
के बीच गहरी खाई तैयार हो गयी। अब धनी और निर्धन के बीच गहरी असमानता ने जन्म ले लिया
था।
6.
लोकतान्त्रिक संस्थाओं के निर्माण को प्राथमिकता नहीं-
सोवियत संघ से अलग हुए गणराज्यों में शॉक थेरेपी के अन्तर्गत आर्थिक परिवर्तन को बड़ी
प्राथमिकता दी गई है और उसे पर्याप्त स्थान भी दिया गया, लेकिन लोकतान्त्रिक संस्थाओं
के निर्माण का कार्य ऐसी प्राथमिकता के साथ नहीं हो सका। इन सभी देशों में जल्दबाजी
में संविधान तैयार किए गए। रूस सहित अधिकांश देशों में राष्ट्रपति को कार्यपालिका का
प्रमुख बनाया गया और उसके हाथों में अधिकांश शक्तियाँ प्रदान कर दी गईं। फलस्वरूप संसद
अपेक्षाकृत कमजोर संस्था रह गयी।
7.शासकों
का सत्तावादी स्वरूप- एशिया के देशों में राष्ट्रपति
को बहुत अधिक शक्तियाँ प्रदान कर दी गईं और इनमें से कुछ सत्तावादी हो गए। उदाहरण के
लिए, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपतियों ने पहले 10 वर्षों के लिए अपने
को इस पद पर बहाल किया और उसके बाद समय सीमा को अगले 10 वर्षों के लिए बढ़ा दिया। इन
राष्ट्रपतियों ने अपने फैसले से असहमति या विरोध की अनुमति नहीं दी।
8.
न्यायपालिका की स्वतन्त्रता स्थापित नहीं- सोवियत
संघ से अलग हुए गणराज्यों में न्यायिक संस्कृति एवं न्यायपालिका की स्वतन्त्रता अभी
तक स्थापित नहीं हो पायी है जिसे स्थापित किया जाना आवश्यक है।
52. भारत में क्षेत्रीय आकांक्षाओं
के कारणों की विवेचना करें।
उत्तर-
भारत के उत्तर-पूर्व के राज्यों अथवा क्षेत्रों में क्षेत्रीय आकांक्षाओं की उत्पत्ति
और विकास के कई कारण उत्तरदायी रहे हैं जैसे-
(i)
उत्तर-पूर्व के ये राज्य मुख्य राष्ट्र से कुछ अलग से रहे हैं। 22 मील लंबी एक पतली
सी राहदारी इस क्षेत्र को शेष भारत से जोड़ती है। इस कारण ये क्षेत्र आरंभ से अपनी
एक अलग पहचान बनाए हुए हैं। विभाजन के कारण भारत और इन क्षेत्रों के बीच पूर्वी पाकिस्तान
(अब बांग्ला देश) आ टपका जिससे ये भारत से अलग-थलग से पड़ गए।
(ii)
इस क्षेत्र में अलग-अलग इलाकों में बहुत-सी आदिम जातियाँ या कबीले स्थित हैं और वे
सभी अलग-अलग पहचान रखते रहे हैं। उनकी अलग पहचान उनकी भाषा, संस्कृति, रीति-रिवाजों
आदि के आधार पर रही है और आज भी है।
(iii)
इन क्षेत्रों में आवागमन के साधनों तथा संचार के साधनों का पूरी तरह विकास नहीं हुआ
और शेष भारत के लोग इन इलाकों में बहुत कम आते-जाते रहे हैं। इसका कारण यह भी रहा है
कि यहाँ आवागमन के साधन सुविधाजनक नहीं हैं और लोग इन इलाकों में आना-जाना सुरक्षित
भी महसूस नहीं करते।
(iv)
उत्तर-पूर्व के क्षेत्रों का विकास भी वैसा नहीं हुआ है जैसा कि देश के शेष भागों में
हुआ है। वहाँ के लोगों का आरोप है कि केन्द्रीय सरकार ने इन क्षेत्रों के विकास की
ओर ध्यान नहीं दिया है और वे सरकार की भेदभावपूर्ण नीति के शिकार रहे हैं, वे अपने
को क्षेत्रीय असंतुलन से प्रभावित मानते हैं।
(v)
इन क्षेत्रों में जब बाहरी लोगों अथवा दूसरे राज्यों से आकर उद्योगपतियों ने उद्योग
लगाए और उनमें उच्च पदों पर दूसरे राज्य के लोगों की नियुक्ति हुई और इस क्षेत्र के
लोगों को केवल छोटे कार्यों और छोटे पदों पर रखा गया तो इनमें यह भावना पैदा हुई कि
बाहरी लोग इस क्षेत्र के संसाधनों का प्रयोग करके मालामाल हो रहे हैं और यहाँ के लोगों
की दशा में विशेष सुधार नहीं होता तो इन्होंने बाहरी लोगों के आगमन का विरोध किया और
उन्हें अपने क्षेत्रों से निकाले जाने के आंदोलन किए।
