स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) की नई गाइडलाइंस 2026
केंद्र
सरकार द्वारा 6 मई 2026 को स्कूल प्रबंधन समिति (School Management Committee -
SMC) के लिए नई गाइडलाइंस जारी की गई हैं। ये दिशानिर्देश RTE अधिनियम 2009, NEP
2020 तथा समग्र शिक्षा योजना के अनुरूप तैयार किए गए हैं और पूर्व में जारी
गाइडलाइंस का स्थान लेंगी।
नई
व्यवस्था का उद्देश्य स्कूलों में अभिभावकों की भागीदारी बढ़ाना, शिक्षा की गुणवत्ता
में सुधार लाना और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
1.
SMC गठन का समय
Ø प्रत्येक
विद्यालय में शैक्षणिक सत्र शुरू होने के एक माह के भीतर SMC का गठन अनिवार्य
होगा।
Ø यह
व्यवस्था बालवाटिका से कक्षा 12 तक सभी विद्यालयों पर लागू होगी।
2.
सदस्य संख्या (नामांकन के आधार पर)
विद्यालय
में छात्रों की संख्या के अनुसार समिति का आकार निर्धारित किया गया है—
छात्र
संख्या सदस्य संख्या
100
तक। 12 से 15 सदस्य
100
से 500 तक 15 से 20 सदस्य
500
से अधिक। 20 से 25 सदस्य
3.
समिति की संरचना (Composition)
Ø अभिभावकों
की प्रमुख भागीदारी
Ø कुल
सदस्यों में 75% सदस्य माता-पिता/संरक्षक होंगे।
Ø शेष
25% सदस्य स्थानीय निकाय प्रतिनिधि, शिक्षक, शिक्षाविद्, पूर्व छात्र, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता,
ASHA, ANM आदि से लिए जाएंगे।
Ø महिलाओं
और वंचित वर्गों को प्रतिनिधित्व
Ø समिति
में कम से कम 50% महिलाएं होना अनिवार्य होगा।
Ø SC/ST/OBC
तथा अन्य सामाजिक एवं आर्थिक रूप से वंचित वर्ग (SEDGs) और दिव्यांग बच्चों (CwSN)
के अभिभावकों को आनुपातिक प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।
प्रमुख
पद
Ø अध्यक्ष
(Chairperson) — अभिभावकों में से चुना जाएगा।
Ø उपाध्यक्ष
(Vice Chairperson) — अभिभावकों में से।
Ø सदस्य-सचिव
(Member Secretary) — प्रधानाचार्य/हेडमास्टर/स्कूल इंचार्ज होंगे।
4.
कार्यकाल (Tenure)
Ø SMC
का कार्यकाल दो वर्ष का होगा।
Ø कोई
सदस्य लगातार दो कार्यकाल से अधिक नहीं रह सकेगा।
Ø नई
समिति बनने तक पुरानी समिति कार्य करती रहेगी।
Ø सदस्य-सचिव
पर यह सीमा लागू नहीं होगी।
5.
बैठकें और पारदर्शिता
Ø समिति
की हर माह कम से कम एक बैठक अनिवार्य होगी।
Ø बैठक
के लिए 50% सदस्यों की उपस्थिति (कोरम) जरूरी होगी।
Ø बैठक
की कार्यवाही का रिकॉर्ड रखना और उसे सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराना अनिवार्य रहेगा।
6.
SMC की मुख्य भूमिकाएं और जिम्मेदारियां
SMC
को विद्यालय विकास और निगरानी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं—
Ø शैक्षणिक
और विकास कार्य
Ø तीन
वर्षीय स्कूल डेवलपमेंट प्लान (SDP) तैयार करना।
Ø बच्चों
की उपस्थिति बढ़ाना और ड्रॉपआउट रोकना।
Ø समावेशी
एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना।
Ø निगरानी
और अनुपालन
Ø RTE
अधिनियम के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करना।
Ø PM
POSHAN (मिड-डे मील), छात्रावास, सुरक्षा और आधारभूत सुविधाओं की निगरानी।
Ø समग्र
शिक्षा, ULLAS, PM SHRI जैसी योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा।
Ø सामाजिक
भागीदारी
Ø सोशल
ऑडिट और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
Ø समुदाय
और विद्यालय के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना।
Ø शिक्षकों
और अभिभावकों के बीच संवाद का माध्यम बनना।
7.
उप-समितियों का गठन
SMC
आवश्यकता के अनुसार विभिन्न उप-समितियां गठित कर सकेगी, जैसे—
Ø शिक्षा
समिति
Ø सुरक्षा
समिति
Ø वित्त
समिति
Ø इंफ्रास्ट्रक्चर
समिति
8.
अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान
सदस्य-सचिव
को SMC गठन, बैठकें, प्रशिक्षण और UDISE+ रिपोर्ट कार्ड प्रदर्शित करने की
जिम्मेदारी दी गई है।
Ø SMC
सदस्यों के लिए क्षमता निर्माण प्रशिक्षण (Capacity Building Training) अनिवार्य होगा।
Ø वित्तीय
प्रबंधन और सोशल ऑडिट पर विशेष जोर दिया गया है।
Ø विभिन्न
विभागों और मंत्रालयों के साथ समन्वय भी समिति की जिम्मेदारी होगी।
9.
राज्य सरकारों की भूमिका
केंद्र
सरकार द्वारा जारी ये गाइडलाइंस एक फ्रेमवर्क के रूप में लागू होंगी। राज्य और
केंद्र शासित प्रदेश अपने नियमों के अनुसार चुनाव एवं गठन की विस्तृत प्रक्रिया तय
कर सकते हैं, लेकिन—75% अभिभावक प्रतिनिधित्व, 50% महिला भागीदारी जैसे प्रावधान
सभी राज्यों के लिए अनिवार्य रहेंगे।
सभी स्कूलों को निर्धारित समय सीमा के भीतर नयी समिति के गठन का निर्देश
झारखंड के सभी सरकारी विद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) का गठन 30 जुलाई तक पूरा करना अनिवार्य कर दिया गया है। राज्य के सभी स्कूलों को निर्धारित समय सीमा के भीतर नई समिति का गठन करने का निर्देश दिया गया है। गठित समिति का कार्यकाल दो वर्ष का होगा।
नयी एसएमसी में अभिभावकों की प्रमुख भूमिका होगी। इसके अलावा प्रधानाध्यापक (सह सचिव), चयनित शिक्षक, स्थानीय निकाय के निर्वाचित सदस्य तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता या एएनएम को भी समिति में शामिल किया जाएगा। समिति में 50 प्रतिशत महिला सदस्यों की भागीदारी अनिवार्य होगी। साथ ही अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के पदों में से किसी एक पद पर महिला प्रतिनिधि का होना भी जरूरी रहेगा।
विद्यालय में छात्रों की संख्या के आधार पर समिति के सदस्यों की संख्या तय की जाएगी। 100 विद्यार्थियों तक के स्कूलों में 15 सदस्य, 101 से 500 विद्यार्थियों वाले विद्यालयों में 20 सदस्य तथा 500 से अधिक विद्यार्थियों वाले विद्यालयों में 25 सदस्य शामिल होंगे। समिति के सदस्य बनने के लिए संबंधित विद्यालय के पोषक क्षेत्र का स्थानीय निवासी होना आवश्यक है। किसी भी सदस्य के खिलाफ पुलिस मामला या विभागीय कार्रवाई लंबित नहीं होनी चाहिए। साथ ही एक ही परिवार के दो सदस्य समिति में शामिल नहीं हो सकेंगे और कोई भी व्यक्ति लगातार दो बार अध्यक्ष नहीं बन सकेगा। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि 30 जुलाई तक सभी सरकारी विद्यालयों में नई रटउ का गठन पूर्ण करना अनिवार्य होगा। इससे विद्यालयों के संचालन, निगरानी और सामुदायिक सहभागिता को और अधिक मजबूत बनाने का लक्ष्य है।