Parent Care Leave Bill 2026: माता-पिता की देखभाल के लिए 45 दिन की Paid Leave

Parent Care Leave Bill 2026: माता-पिता की देखभाल के लिए 45 दिन की Paid Leave

Parent Care Leave Bill 2026: माता-पिता की देखभाल के लिए 45 दिन की Paid Leave

Parent Care Leave Bill 2026: माता-पिता की देखभाल के लिए 45 दिन की Paid Leave

प्रस्तावना और शीर्षक

     यह बिल 13 मार्च, 2026 को राज्य सभा में पेश किया गया था (बिल संख्या XXV, 2026)।

     इसका उद्देश्य कर्मचारियों को अपने वृद्ध माता-पिता की चिकित्सा, स्वास्थ्य और भलाई की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए 'पेरेंट केयर लीव' (Parent Care Leave) प्रदान करना है।

     इस अधिनियम को 'पवित्र बंधन (माता-पिता देखभाल अवकाश) अधिनियम, 2026' कहा जाएगा।

महत्वपूर्ण परिभाषाएं

     कर्मचारी: इसमें नियमित, अस्थायी या संविदा (contract) के आधार पर काम करने वाले सभी व्यक्ति शामिल हैं।

     माता-पिता: इसमें कर्मचारी के जैविक, सौतेले, दत्तक (adoptive) माता-पिता या सास-ससुर शामिल हैं, जिनकी आयु साठ (60) वर्ष या उससे अधिक हो चुकी है।

     प्रतिष्ठान (Establishment): इसमें सरकारी विभागों के साथ-साथ दस या उससे अधिक कर्मचारियों वाले निजी क्षेत्र के संगठन, एनजीओ और ट्रस्ट शामिल हैं।

अवकाश का अधिकार (Entitlement)

     प्रत्येक कर्मचारी अपनी पूरी सेवा अवधि के दौरान अधिकतम पैंतालीस (45) दिनों के 'पेरेंट केयर लीव' का हकदार होगा।

     इस छुट्टी को एक बार में लगातार या कई हिस्सों में लिया जा सकता है, जिसके लिए नियोक्ता की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होगी।

     इस अवकाश के दौरान कर्मचारी को पूरा वेतन और भत्ते दिए जाएंगे।

     इस छुट्टी को कर्मचारी के किसी अन्य अवकाश (Leave Account) से नहीं काटा जाएगा।

     यह पूरी सेवा अवधि के दौरान मिलने वाला एकमुश्त अधिकार है और इसके बदले नकद (encashment) प्राप्त नहीं किया जा सकता।

आवेदन प्रक्रिया और नियम

     छुट्टी के लिए कर्मचारी को एक आवेदन पत्र के साथ मेडिकल सर्टिफिकेट और अस्पताल में भर्ती होने के रिकॉर्ड जैसे आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे।

     आपात स्थिति (Emergency) में, कर्मचारी बिना पूर्व स्वीकृति के भी छुट्टी पर जा सकता है, लेकिन उसे सात कार्य दिवसों के भीतर संबंधित दस्तावेज जमा करने होंगे।

     नियोक्ता को आवेदन मिलने के 48 घंटों के भीतर उसका निपटारा करना होगा।

     इस अवकाश को लेने वाले किसी भी कर्मचारी के साथ पदोन्नति, वेतन वृद्धि या स्थानांतरण (Transfer) में कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा।

जुर्माना और शिकायत निवारण

     यदि कोई नियोक्ता बिना किसी उचित कारण के पात्र कर्मचारी को यह छुट्टी देने से मना करता है, तो उस पर 50,000 रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

     यदि कोई कर्मचारी छुट्टी पाने के लिए जाली या झूठे दस्तावेज जमा करता है, तो उस पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी और उसे छुट्टी के दौरान लिया गया वेतन वापस करना पड़ सकता है।

     छुट्टी न मिलने पर सरकारी कर्मचारी सेवा नियमों के तहत और निजी क्षेत्र के कर्मचारी श्रम आयुक्त (Labour Commissioner) के पास शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

विधेयक के उद्देश्य और कारण

     भारत की जनसंख्या तेजी से बुजुर्ग हो रही है; अनुमान है कि 2050 तक लगभग 34 करोड़ व्यक्ति (आबादी का लगभग 20%) 60 वर्ष से अधिक आयु के होंगे।

     शहरीकरण और काम के लिए प्रवासन (migration) के कारण 68% कामकाजी आबादी अपने माता-पिता से दूर रहती है, जिससे आपात स्थिति में माता-पिता की देखभाल करना मुश्किल हो जाता है।

     35 से 55 वर्ष की आयु के कर्मचारी (सैंडविच जनरेशन) अपने बच्चों और बूढ़े माता-पिता दोनों की देखभाल के दोहरे दबाव का सामना कर रहे हैं, जिससे 56% कर्मचारी बर्नआउट का शिकार होते हैं।

     वर्तमान श्रम कानूनों में मातृत्व और पितृत्व अवकाश तो हैं, लेकिन माता-पिता की देखभाल के लिए कोई विशेष अवकाश नहीं है।

     न्यूज़ीलैंड, यूके, बेल्जियम और कनाडा जैसे कई अन्य देशों में बुजुर्ग परिजनों की देखभाल के लिए पहले से ही ऐसे कानूनी प्रावधान मौजूद हैं।

     यह बिल संवैधानिक दायित्वों और 'मातृ देवो भव, पितृ देवो भव' जैसे सांस्कृतिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए लाया गया है, ताकि कर्मचारी बिना नौकरी या वेतन खोए अपने माता-पिता की देखभाल कर सकें।

निष्कर्ष

Parent Care Leave Bill 2026 एक महत्वपूर्ण और समय की जरूरत के अनुसार लाया गया कदम है। यह न केवल कर्मचारियों को राहत देगा, बल्कि भारत के पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक संरचना को भी मजबूत बनाएगा। साथ ही यह बिल यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी कर्मचारी अपने माता-पिता की देखभाल के लिए अपनी नौकरी या आय से समझौता न करे।

 यह बिल साबित करता है कि विकास के साथ-साथ मानवीय संबंधों को भी महत्व देना जरूरी है।आने वाले समय में यह कानून लाखों परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

पवित्र बंधन (माता-पिता देखभाल अवकाश) विधेयक, 2026' अभी तक संसद द्वारा पारित नहीं हुआ है। यह केवल राज्य सभा में पेश किया गया एक प्रस्ताव है जिसे अभी कानून का रूप लेने के लिए दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) से पारित होना और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलना बाकी है

FAQ : अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1. Parent Care Leave Bill 2026 क्या है?

Ans: यह एक प्रस्तावित कानून है जो कर्मचारियों को माता-पिता की देखभाल के लिए 45 दिन की paid leave देता है।

Q2. कितने दिन की छुट्टी मिलेगी?

Ans: कुल 45 दिन की छुट्टी मिलेगी।

Q3. क्या यह छुट्टी paid होगी?

Ans: हाँ, यह पूरी तरह वेतन सहित होगी।

Q4. कौन इस leave के लिए eligible है?

Ans: सरकारी और निजी क्षेत्र के कर्मचारी (10+ कर्मचारियों वाली कंपनी)।

Q5. क्या यह हर साल मिलेगी?

Ans: नहीं, यह पूरी नौकरी में एक बार कुल मिलाकर मिलेगी।

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