3. आँकड़ों का संगठन ORGANISATION OF DATA
पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर
Q. 1. निम्नलिखित में कौन-सा विकल्प सही है
?
(i) एक वर्ग मध्यबिन्दु बराबर है:
(a) उच्च वर्ग सीमा तथा निम्न वर्ग सीमा के
औसत के।
(b) उच्च वर्ग सीमा तथा निम्न वर्ग सीमा के गुणनफल के।
(c) उच्च वर्ग सीमा तथा निम्न वर्ग सीमा के अनुपात के।
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
(ii) दो चरों के बारंबारता वितरण को किस नाम
से जानते हैं ?
(a) एक विचर वितरण
(b) द्विचर वितरण
(c) बहुचर वितरण
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
(iii) वर्गीकृत आँकड़ों में सांख्यिकीय परिकलन
आधारित होता है:
(a) प्रेक्षणों के वास्तविक मानों पर
(b) उच्च वर्ग सीमाओं पर
(c) निम्न वर्ग सीमाओं पर
(d) वर्ग के मध्य बिन्दुओं पर
(iv) अपवर्जी विधि के अन्तर्गत
(a) किसी वर्ग की उच्च वर्ग सीमा को वर्ग अन्तराल
में समावेशित नहीं करते।
(b) किसी वर्ग की उच्च वर्ग सीमा को वर्ग अन्तराल में समावेशित
करते हैं।
(c) किसी वर्ग की निम्न वर्ग सीमा को वर्ग अन्तराल में समावेशित
नहीं करते।
(d) किसी वर्ग की निम्न वर्ग सीमा को वर्ग अंतराल में समावेशित
करते हैं।
(v) परास का अर्थ है :
(a) अधिकतम एवं न्यूनतम प्रेक्षणों के बीच
अंतर
(b) न्यूनतम एवं अधिकतम प्रेक्षणों के बीच अंतर
(c) अधिकतम एवं न्यूनतम प्रेक्षणों का औसत
(d) अधिकतम एवं न्यूनतम प्रेक्षणों का अनुपात
Q. 2. वस्तुओं को वगीकृत करने में क्या कोई
लाभ हो सकता है? अपने दैनिक जीवन ते एक उदाहरण देकर व्याख्या कीजिए ।
Ans. वर्गीकरण का अर्थ है वस्तुओं को उपयुक्त, क्रम में व्यवस्थित
करना तथा उनको सजातीय वगों में रखना। जैसे-पुस्तकालय में उपलब्ध पुस्तकों को विषयदार
रखना वर्गीकरण है, विद्यालय में छात्रों को कक्षावार बैठाना वर्गीकरण है, आदि।
Q.3. चर क्या है? एक संतत तथा विविक्त चर के बीच भेद कीजिए ।
Ans.
संतत चर- ऐसा घर जो किसी दिए गए परास के अन्तर्गत कोई मूल्य धारण कर सकता है,
संतत चर कहलाता है। संतत चर का मान पूर्णांक, भिन्नात्मक, परिमेय संख्या अथवा अपरिमेय
संख्या कुछ भी हो सकता है। जैसे लोगों की उम्र, कद, बजन आदि।
विविक्त
चर- ऐसा चर जो किसी दिए गए परास में केवल विशेष
मूल्य (पूर्णांक) ही धारण करता है, विविक्त चर कहलाता है। जैसे-परिवार के सदस्यों की
संख्या, कक्षा/विद्यालय में छात्रों की संख्या आदि।
Q. 4. आँकड़ों के वर्गीकरण में प्रयुक्त अपवर्जी तथा समावेशी विधियों
की व्याख्या कीजिए।
Ans.
समावेशी विधि- इस विधि में वर्ग अंतरालों का चयन इस प्रकार से किया जाता है
कि ऊपरी तथा निचली सीमाएँ अन्तराल का हिस्सा बन जाती हैं। जैसे वर्ग अंतराल 1-6,
7-13, 14-20... आदि में पहले वर्ग में निचली सीमा 1 तथा ऊपरी सीमा 6 दोनों शामिल हैं।
इसी प्रकार दूसरे वर्ग की दोनों सीमाएँ 7 व 13 इस वर्ग में सम्मिलित हैं।
अपवर्जी
विधि- इस विधि में वर्ग अंतरालों का चयन इस प्रकार
से किया जाता है कि निचली अथवा ऊपरी कोई एक सीमा शामिल नहीं की जाती है। जैसे वर्गान्तर
0-10, 10-20, 20-30.... आदि में यह स्पष्ट किया जा सकता है। निचली अथवा ऊपरी कोई एक
सीमा शामिल नहीं है। माना ऊपरी सीमा को शामिल नहीं करना है, तो 10 पहले वर्ग में शामिल
नहीं किया जाएगा। इसी प्रकार 20 दूसरे वर्ग में शामिल नहीं किया जायेगा।
Q. 5. सारणी के आँकड़ों का प्रयोग करें, जो 50 परिवारों के भोजन पर
मासिक व्यय (रु० में) को दिखलाती है और
(a)
भोजन पर मासिक पारिवारिक व्यय का विस्तार ज्ञात
कीजिए।
(b)
परास को वर्ग अंतराल की उचित संख्याओं में विभाजित करें तथा व्यय का बारंबारता वितरण प्राप्त करें।
- उन परिवारों की संख्या पता कीजिए जिनका भोजन पर मासिक व्यय
(a) 2000/- रु. से कम है।
(b) 3000/- रु. से अधिक है।
(c) 1500/- रु. और 2500/- रु. के बीच है।
50 परिवारों के भोजन पर मासिक व्यय (रु० में)
1904 1559 3473 1735 2760
2041 1612 1753 1855 4439
5090 1085 1823 2346 1523
1211 1360 1110 2152 1183
1218 1315 1105 2628 2712
4248 1812 1264 1183 1171
1007 1180 1953 1137 2048
2025 1583 1324 2621 3676
1397 1832 1962 2177 2575
1293 1365 1146 3222 1396
(a) Ans. अधिकतम मूल्य =
5090/- रु.
न्यूनतम मूल्य = 1007/- रु.
विस्तार = अधिकतम मूल्य -न्यूनतम मूल्य
विस्तार = 5090-1007 = 3983 रु.
(b)
Ans.
|
वर्गान्तराल |
मिलान
चिह्न |
बारंबारता |
|
1000-1500 |
|
20 |
|
1500-2000 |
|
13 |
|
2000-2500 |
|
06 |
|
2500-3000 |
|
05 |
|
3000-3500 |
II |
02 |
|
3500-4000 |
I |
01 |
|
4000-4500 |
II |
02 |
|
4500-5000 |
|
00 |
|
5000-5500 |
I |
01 |
|
|
|
कुल-50 |
उन
परिवारों की संख्या जिनका भोजन पर मासिक व्यय-
(a)
2000/- रु से कम है = 33
(b)
3000/- रु. से अधिक है = 06
(c)
1500/- रु. और 2500/- रु. के बीच है = 19
Q.6. एक शहर में यह जानने हेतु 45 परिवारों का सर्वेक्षण किया गया कि
वे अपने घरों में कितनी संख्या में घरेलू उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं। नीचे दिए गए
उनके उत्तरों के आधार पर एक बारंबारता सारणी तैयार कीजिए-
1
3 2 2 2 2 1 2 1 2 2 3 3 3 3
3
3 2 3 2 2 6 1 6 2 1 5 1 5 3
2
4 2 7 4 2 4 3 4 2 0 3 1 4 3
Ans.
बारंबारता सारणी
|
घरेलू
उपकरणों की संख्या |
परिवारों
की संख्या |
|
0 |
1 |
|
1 |
7 |
|
2 |
15 |
|
3 |
12 |
|
4 |
05 |
|
5 |
02 |
|
6 |
02 |
|
7 |
01 |
|
|
योग
45 |
Q. 7. वर्गीकृत आँकड़ों में 'सूचना की क्षति' का क्या अर्थ है ?
Ans.
वर्गीकृत आँकड़ों की यह छिपी हुई कमी होती है कि यह अपरिष्कृत आंकड़ों का विवरण पेश
नहीं करते हैं। आवृति वितरण के द्वारा आँकड़े संक्षिप्त हो जाते हैं। वर्गीकृत होने
से आँकड़ों से 'सूचना की क्षति होती है। एक बार आँकड़ों का वर्गीकरण हो जाने पर व्यक्तिगत
आँकड़ों का अस्तित्व खत्म हो जाता है। सांख्यिकीय गणनाएँ केवल 'माध्य मूल्य' पर आधारित
होती हैं, वे वास्तविक मूल्यों पर आधारित नहीं होती हैं। इस प्रकार सांख्यिकीय गणनाओं
में 'वास्तविक मूल्य' के स्थान पर 'माध्य मूल्य' के प्रयोग से 'सूचना की क्षति' हो
जाती है।
Q. 8. क्या आप इस बात से सहमत हैं कि अपरिष्कृत आंकड़ों की अपेक्षा
वर्गीकृत आँकड़े बेहतर होते हैं ?
Ans.
अपरिष्कृत आँकड़े संख्या में अधिक एवं अव्यवस्थित होते हैं, अतः उनका अध्ययन करना मुश्कितल
कार्य होता है। उन पर सांख्यिकीय विधि लागू न होने के कारण कोई निष्कर्ष निकालना बहुत
कठिन काम होता है। दूसरी ओर, वर्गीकृत ऑकड़े सामान्य एवं संक्षिप्त होते हैं। उनसे
अर्थपूर्ण निष्कर्ष निकालना आसान होता है। हम वर्गीकृत आँकड़ों को आसानी से चिहित कर
सकते हैं। उनकी तुलना की जा सकती है। बिना किसी बाधा के उनसे निष्कर्ष निकाल सकते है।
वास्तव में, वर्गीकृत आंकड़े अपरिष्कृत आँकड़ों से बेहतर होते हैं।
Q.9. एक-विचर एवं द्विचर बारंबारता वितरण के बीच अंतर बताइए ।
Ans.
एक-विचर समष्टि- यदि आँकड़े किसी एक चर से ही संबंध रखते हैं, तो माफ्न के समुच्चय
उस घर की एक-विचर समष्टि की रचना करते हैं। जैसे वस्तुओं की कीमत, लोगों की आप एक-विवर
समष्टि हो सकती है।
द्विचर
समाष्टि- यदि आँकड़े दो चरों से संबंध रखते हैं तो मापन
के समुच्चय द्विचर समष्टि की रचना करते हैं। जैसे किसी क्षेत्र में रहने वाले लोगों
का वजन व कद द्विचर समष्टि हो सकती है।
Q.
10. निम्नलिखित आँकड़ों के आधार पर 7 का वर्ग अंतराल लेकर समावेशी विधि द्वारा बारंबारता
वितरण तैयार कीजिए-
28
17 15 22 29 21 23 27 18 12 7 2 9 4
6
1 8 3 10 5 20 16 12 8 4 33 27 21 15 9
3
36 27 18 9 2 4 6 32 31 29 18 14 13 15
11
9 7 1 5 37 32 28 26 24 20 19 25 19 20
Ans.
|
वर्गान्तराल |
मिलान
चिह्न |
बारंबारता |
|
0-7 |
|
14 |
|
7-14 |
|
13 |
|
14-21 |
|
13 |
|
21-28 |
|
10 |
|
28-35 |
|
08 |
|
35-42 |
II |
02 |
|
|
|
कुल-60 |
अन्य महत्त्वपूर्ण परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
Q1. शुद्ध आंकड़े (Raw Data) क्या होते हैं
?
Ans. अपने मूल रूप में संकलित किए गए आँकड़े शुद्ध ऑकड़े
कहलाते हैं।
Q.2. शुद्ध आंकड़े तथा व्यक्तिगत श्रृंखला
में अन्तर बताइए ।
Ans. शुद्ध आँकड़े मूलरूप में व्यक्त किए जाते हैं जबकि व्यक्तिगत श्रृंखला में मूल आँकड़ों को किसी क्रम में व्यवस्थित किया जाता है।
Q. 3. 10, 18, 20, 22, 25 वह किस प्रकार की श्रृंखला है?
Ans.
व्यक्तिगत श्रृंखला है।
Q. 4. पाँच व्यक्तियों के दैनिक खर्चों का विस्तार ज्ञात करें-
रु०:
17, 27, 37, 42, 57
Ans.
विस्तार = अधिकतम मूल्य -न्यूनतम
मूल्य
विस्तार = 57-17 = 40 रु.
Q. 5. आँकड़ों को व्यवस्थित कैसे किया जाता है?
Ans.
आँकड़ों को व्यवस्थित समय और स्थान के अनुसार करते हैं।
Q. 6. चरपद से क्या तात्पर्य है?
Ans.
चरपद का तात्पर्य ऐसी विशेषताओं से है जो परिवर्तनशील होती है।
Q. 7. वर्गीकरण की कितनी विधियाँ हैं?
Ans.
वर्गीकरण की निम्न विधियों है-1 भौगोलिक, 2. समयानुसार,
3. संख्यात्मक, 4. (I) गुणात्मक, (ii) बहुगुण वर्गीकरण तथा साधारण वर्गीकरण।
Q. 8. सामान्य भाषा में समष्टि पद का क्या अर्थ है?
Ans.
किसी क्षेत्र में रहनेवाले सभी व्यक्तियों की कुल संख्या का समष्टि कहते हैं।
Q. 9. किसी विशेष वर्ग में मूल्यों की संख्या उस वर्ग की क्या कहलाती
है?
Ans.
आवृत्ति ।
Q. 10. वर्गीकरण का क्या तात्पर्य है?
Ans.
वस्तुओं को उपयुक्त क्रम से व्यवस्थित करना तथा सजातीय समूहों में रखना।
Q. 11. निम्नलिखित को आरोही क्रम में लिखें 9, 15, 6, 5, 3, 26
Ans.
3, 5, 6, 9, 15, 26
Q. 12. शुद्ध आँकड़ों की धारणा से आप क्या समझते हैं?
Ans.
वे आँकड़ें जिन्हें एक अनुसंधानकर्ता अपने अनुसंधान के दौरान संकलित करता है। इनका
रूप अव्यवस्थित होता है। निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले एक अनुसंधानकर्ता के लिए
इसका व्यवस्थीकरण करना आवश्यक है।
Q. 13. आवृत्ति से आप क्या समझते हैं?
Ans.
किसी समग्र में एक मद जितनी बार आती है उसे उस मद की आवृत्ति कहा जाता है।
Q. 14. अच्छे वर्गीकरण के मुख्य तत्व बताओ।
Ans.
व्यापकता, स्पष्टता, लोचशीलता, स्थिरता, अनुकूलता तथा सजातीयता।
Q. 15. सांख्यिकीय श्रृंखला का क्या अर्थ है?
Ans.
शुद्ध आँकड़ों को क्रम या विशेषता के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है तथा भिन्न-भिन्न
वर्गों में एक विशेष क्रम के अनुसार मदों को व्यवस्थित करना श्रृंखला कहलाता है।
Q. 16. आँकड़ों के संगठन का क्या अर्थ है?
Ans.
आँकड़ों के व्यबस्थितिकरण से तात्पर्य उन सभी प्रक्रियाओं से है जिनकी सहायता से एकत्रित
आँकड़ों को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करके समझने योग्य बनाया जाता है।
Q. 17. सांख्यिकीय श्रृंखला की अवधारणा को बताएँ।
Ans.
उन आँकड़ों को किसी विशेषता या क्रम के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है तो वह सांख्यिकीय
श्रृंखला कहलाती है।
Q. 18. किसी श्रृंखला के तथ्यों को बढ़ते अथवा घटते हुए क्रमबद्ध रूप
में प्रस्तुत करने की क्रिया को क्या कहते
हैं?
Ans.
तथ्यों का विन्यास (Array) करना।
Q. 19. व्यक्तिगत श्रृंखला से क्या समझते हैं?
Ans.
व्यक्तिगत श्रृंखला वह श्रृंखला है जिसमें प्रत्येक इकाई का अलग-अलग माप प्रकट किया
जाता है।
Q. 20. खण्डित श्रृंखला क्या है ?
Ans.
खण्डित श्रृंखला में प्रत्येक इकाई का निश्चित माप स्पष्ट हो जाता है।
Q. 21. अखण्डित श्रृंखला क्या है ?
Ans.
अखण्डित श्रृंखला में इकाइयों का निश्चित माप सम्भव नहीं होता इसलिए उन्हें कुछ वर्गान्तरों
में प्रकट किया जाता है।
Q. 22. आँकड़ों के वर्गीकरण के लाभ लिखें।
Ans.
आँकड़ों के वर्गीकरण से दिए गए आँकड़ों को समझना मुश्किल नहीं होता है। आँकड़ों की
उपयोगिता में इससे वृद्धि होती है। यह आँकड़ों को तुलना योग्य बना देता है। यह आँकड़ों
को वैज्ञानिक आधार प्रदान करता है। वर्गीकरण आँकड़ों को आकर्षक तया प्रभावशाली बना
देता है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
Q. 1. वर्गीकरण के उद्देश्य बताइए ।
Ans.
वर्गीकरण के निम्नलिखित उद्देश्य होते हैं-
1.
आँकड़ों को सरल, बोधगम्य एवं संक्षिप्त बनाना- वर्गीकरण
से आँकड़े संक्षिप्त रूप में हो जाते हैं, जिससे उन्हें समझना आसान हो जाता है।
2.
उपयोगिता- समरूपता के आधार पर वर्गीकरण करके आँकड़ों की
उपयोगिता को बढ़ाया जाता है।
3.
अधिक आकर्षक और प्रभावशाली बनाना- कच्चे आँकड़ों की तुलना
में वर्गीकृत आँकड़े ज्यादा आकर्षित और प्रभावशाली बन जाते हैं।
4.
तुलना योग्य बनाना- वर्गीकरण की सहायता से आँकड़ों
को तुलना करने व अनुमान लगाने के योग्य बनाना होता है।
5.
विभेदीकरण- वर्गीकरण की सहायता से आँकड़ों में विशिष्ट
अन्तर स्पष्ट किए जाते हैं।
Q. 2. एक अच्छे वर्गीकरण के मुख्य कारण समझाइए ।
Ans.
एक अच्छे वर्गीकरण के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं-
1.
व्यापकता- किसी समस्या से संबंधित आँकड़ों का वर्गीकरण
इतना व्यापक होना चाहिए कि उस समस्या के सम्बन्ध में एकत्रित किए गए सभी आँकड़े किसी-न-किसी
वर्ग में अवश्य आ जाएँ। वर्गीकरण से बाहर कोई भी इकाई नहीं रहती है।
2.
स्पष्टता- कौन-सी
इकाई किस वर्ग में रखी जानी चाहिए, यह वर्गीकरण करते समय स्पष्ट हो जाना चाहिए। विभिन्न
वर्ग भी इस प्रकार निर्धारित किए जाने चाहिए कि उनमें सरलता तथा स्पष्टता हो।
3.
लोचदार- जरूरत के अनुसार वर्गीकरण में परिवर्तन की गुंजाइश
रहनी चाहिए।
4.
अनुकूलता- वर्गीकरण अनुसंधान के उद्देश्य के लिए उपयुक्त
होना चाहिए। जैसे-पढ़ने वाले बच्चों को वर्गीकरण उनकी उम्र, कद, अंकों के आधार पर करना
चाहिए। व्यावहारिक स्थिति के आधार पर उनका वर्गीकरण कदापि उचित नहीं होता है।
5.
सजातीयता- प्रत्येक वर्ग में सभी इकाइयाँ समान गुण वाली
होनी चाहिए।
6.
स्थिरता- एक
प्रकार की जाँच के वर्गीकरण का आधार एक जैसा होना चाहिए। उसमें बार - बार परिवर्तन
उचित नहीं होता है।
Q. .3. समावेशी श्रृंखला को अपवर्जी श्रृंखला में किस प्रकार बदला जाता
है ? समझाइए ।
Ans.
समावेशी श्रृंखला उस स्थिति में उपयुक्त होती है जब चर मूल्यों में पूर्ण इकाई का अंतर
होता है। यदि चर मूल्यों में पूर्ण अन्तर न हो, तो अपवर्जी श्रृंखला में बदलना उचित
होता है। इसके लिए निम्नलिखित प्रक्रिया अपनाई जाती है-
(1)
पहले वर्ग की ऊपरी सीमा तथा दूसरे वर्ग की निम्न सीमा का अन्तर ज्ञात करते हैं।
(2)
उपरोक्त अन्तर को आधा करके प्रत्येक वर्ग की निम्न सीमा से उसे घटाने पर एवं ऊपरी सीमा
में जोड़कर अपवर्जी श्रृंखला बन जाती है।
उदाहरण-
इसे निम्नलिखित उदाहरणों की सहायता से समझाया गया है-
समावेशी
श्रृंखला
|
उम्र |
लोगों
की संख्या |
|
10-14 |
14 |
|
15-19 |
10 |
|
20-24 |
18 |
|
25-29 |
15 |
|
30-34 |
14 |
|
|
योग-71 |
अन्तर
= 15 14 = 1
अन्तर
का आधा = 1÷2
= 0.5
अपवर्जी
श्रृंखला
|
उम्र |
लोगों
की संख्या |
|
9.5-14.5 |
14 |
|
14.5-19.5 |
10 |
|
19.5-24.5 |
18 |
|
24.5-29.5 |
15 |
|
29.5-34.5 |
14 |
|
|
योग-71 |
Q. 4. अपवर्जी तथा समावेशी श्रृंखलाओं में अन्तर स्पष्ट करें।
Ans.
अपवर्जी तथा समावेशी श्रृंखलाओं में निम्नलिखित अन्तर होता है-
(1)
समावेशी श्रृंखला में एक वर्ग की ऊपरी सीमा दूसरे वर्ग की निचली सीमा से अलग होता है।
प्रायः इनमें एक इकाई का अन्तर होता है, जबकि समावेशी श्रृंखला में एक वर्ग की ऊपरी
सीमा दूसरे वर्ग की निचली सीमा के समान होती है।
(2)
समावेशी श्रृंखला में एक वर्ग की ऊपरी सीमा के मूल्य को उसी वर्ग में शामिल करते हैं।
जबकि अपवर्जी श्रृंखला में वर्ग की ऊपरी सीमा के मूल्य को उस वर्ग में शामिल नहीं करते
हैं, उसे अगले वर्ग की निचली सीमा में शामिल करते हैं।
(3)
समावेशी श्रृंखला उसी स्थिति में उपयुक्त रहती है जव आँकड़ों का मूल्य पूर्णांक में
दिया हो, लेकिन अपवर्जी श्रृंखला सभी स्थितियों में उपयुक्त होती है, चाहे आँकड़ों
का मूल्य पूर्णांक में हो या दशमलव में हो।
(4)
गणना करने के लिए समावेशी श्रृंखला को कई बार अपवर्जी श्रृंखला में बदलना आवश्यक होता
है, लेकिन अपवर्जी श्रृंखला गणना करने के लिए सदैव उपयुक्त होती है।
Q. 5. खुले सिरे वाली निर्वतमुखी श्रृंखला के अर्थ स्पष्ट कीजिए ।
Ans.
खुले मुँह वाली श्रृंखला वह श्रृंखला होती है जिसमें पहले वर्ग की निचली सीमा तथा अन्तिम
वर्ग की ऊपरी सीमा नहीं दी हुई होती है। इन सीमाओं के स्थान पर हम क्रमशः 'से कम' तचा
'से अधिक' लिखते हैं। खुले मुँह वाली श्रृंखला का उदाहरण नीचे दिया हुआ है-
खुले
सिरे वाली श्रृंखला
|
उम्र |
लोगों
की संख्या |
|
5
से कम |
11 |
|
5-10 |
13 |
|
10-15 |
14 |
|
15-20 |
16 |
|
20-25 |
11 |
|
25-30 |
15 |
|
30-35 |
17 |
|
35-40
से अधिक |
21 |
उपरोक्त
प्रकार की श्रृंखलाओं में अज्ञात सीमाओं को ज्ञात करने के लिए इनके निकटवर्ती वर्गों
के विस्तार को ही इसका विस्तार मान लेते हैं। परन्तु ऐसा उसी स्थिति में करते हैं जब
वर्ग अन्तराल समान होते हैं।
Q. 6. संचयी आवृति वितरण के लाभ बताइए ।
Ans.
संचयी आवृति वितरण के निम्नलिखित लाभ हैं-
(1)
संचयी आवृति वितरण की सहायता से हम 'से कम' तथा 'से अधिक' का मूल्य आसानी से प्राप्त
कर सकते हैं।
(2)
किसी विशेष वर्ग अन्तराल में आने वाले निरीक्षणों की संख्या को ज्ञात कर सकते हैं।
(3)
इसका प्रयोग विभाजन मूल्यों को ज्ञात करने के लिए भी किया जा सकता है।
Q. 7. व्यक्तिगत श्रृंखला किसे कहते हैं? उदाहरण भी दीजिए।
Ans.
व्यक्तिगत श्रृंखला वह श्रृंखला होती है जिसमें प्रत्येक मद को अलग-अलग मान दिया जाता
है। व्यक्तिगत श्रृंखलाएँ दो प्रकार से लिखी जाती हैं।
1.
क्रमानुसार- इस विधि में आँकड़ों को रौल नं. के अनुसार,
वर्ण अक्षर के अनुसार या किसी और नियम के अनुसार लिखते हैं।
अनुक्रमांक
के आधार पर 10 छात्रों के प्राप्तांक
|
अनुक्रमांक |
प्राप्तांक |
|
1 |
90 |
|
2 |
80 |
|
3 |
40 |
|
4 |
60 |
|
5 |
55 |
|
6 |
65 |
|
7 |
33 |
|
8 |
15 |
|
9 |
75 |
|
10 |
95 |
2.
क्रमागत आधार पर- इस विधि से मदों को घटते या बढ़ते क्रम
में लिखा जाता है। बढ़ते क्रम में 10 छात्रों के प्राप्तांक-
अक-15,
33, 40, 55, 60, 75, 80, 90, 95
Q. 8. विच्छिन्न श्रृंखला का अर्थ उदाहरण सहित समझाइए।
Ans.
विच्छिन्न श्रृंखला वह श्रृंखला होती है जिसमें मदों को उनकी आवृतियों सहित लिखा जाता
है। आवृति किसी मद पुनरावृत्ति को व्यक्त करती है। विच्छिन्न श्रृंखला बनाने की उस
स्थिति में जरूरत पड़ती है। जब व्यक्तिगत श्रृंखला का आकार बहुत बड़ा होता है तथा विभिन्न
मदों की पुनरावृत्ति बार-बार होती है। विच्छिन्न श्रृंखला का उदाहरण निम्नलिखित है-
|
छात्रों
की ऊँचाई (सेमी. में) |
छात्रों
की संख्या |
|
150 |
20 |
|
152 |
10 |
|
154 |
17 |
|
156 |
15 |
|
158 |
25 |
|
160 |
18 |
|
162 |
26 |
|
164 |
8 |
|
166 |
9 |
|
168 |
5 |
|
170 |
11 |
Q. 9. निम्नलिखित तालिका को 'से कम' में दर्शाएँ।
|
वर्गान्तराल |
आवृत्ति |
|
10-20 |
12 |
|
20-30 |
13 |
|
30-40 |
18 |
|
40-50 |
13 |
|
50-60 |
12 |
|
60-70 |
9 |
|
70-80 |
8 |
|
80-90 |
1 |
Ans.
|
मद
(से-कम) |
आवृत्ति |
|
90
से कम |
86 |
|
80
से कम |
86-1=85 |
|
70
से कम |
85-8=77 |
|
60
से कम |
77-9=68 |
|
50
से कम |
68-12=56 |
|
40
से कम |
56-13=43 |
|
30
से कम |
56-13=43 |
|
20
से कम |
43-18=25 |
|
10
से कम |
25-13=12 |
Ог.
|
मद
(से-कम) |
आवृत्ति |
|
10
से कम |
12 |
|
20
से कम |
12+13=25 |
|
30
से कम |
25+18=43 |
|
40
से कम |
43+13=56 |
|
50
से कम |
56+12=68 |
|
60
से कम |
68+9=77 |
|
70
से कम |
77+8=85 |
|
80
से कम |
85+1=86 |
|
90
से कम |
|
Q.10. निम्नलिखित तालिका को 'से अधिक' में दर्शाएँ।
|
वर्गान्तराल |
आवृति |
|
10-20 |
12 |
|
20-30 |
13 |
|
30-40 |
18 |
|
40-50 |
13 |
|
50-60 |
12 |
|
60-70 |
9 |
|
70-80 |
8 |
|
80-90 |
1 |
Ans.
|
मद
(से अधिक) |
आवृति |
|
90
से अधिक |
0 |
|
80
से अधिक |
1 |
|
70
से अधिक |
1+8=9 |
|
60
से अधिक |
9+9=18 |
|
50
से अधिक |
18+12=30 |
|
40
से अधिक |
30+13=43 |
|
30
से अधिक |
43+18=61 |
|
20
से अधिक |
61+13=74 |
|
10
से अधिक |
74+12=86 |
Or,
|
मद
(से अधिक) |
आवृति |
|
10
से अधिक |
86 |
|
20
से अधिक |
86-12=74 |
|
30
से अधिक |
74-13=61 |
|
40
से अधिक |
61-18=43 |
|
50
से अधिक |
43-13=30 |
|
60
से अधिक |
30-12=18 |
|
70
से अधिक |
18-9=9 |
|
80
से अधिक |
9-8=1 |
|
90
से अधिक |
1-1=0 |
Q. 11. एक अच्छे वर्गीकरण के कोई दो गुण बतायें ।
Ans.
1. व्यापकता- एक अच्छे वर्गीकरण का सबसे प्रमुख गुण है व्यापकता। इस गुण के
अनुसार वर्गीकरण ऐसा होना चाहिए कि प्रत्येक समक को किसी-न-किसी वर्ग में शामिल किया
जा सके।
2.
लोचशीलता- वर्ग ऐसे होने चाहिए कि वे लोचशील हो ताकि आवश्यकतानुसार
उनको बदला जा सके।
Q. 12. वर्गीकरण की उपयोगिता का वर्णन करें।
Ans.
वर्गीकरण के मुख्य लाभ या उपयोगिता इस प्रकार हैं-
1.
वर्गीकरण के आँकड़ों को समझने में सहायता मिलती है।
2.
आँकड़ों के ढेर को वर्गीकरण से संक्षिप्त रूप में मिल जाता है।
3.
वर्गीकृत आँकड़े आकर्षक व प्रभावशाली प्रतीत होते हैं।
4.
सांख्यिकी विश्लेषण में वर्गीकरण का बहुत महत्व है। वास्तव में वर्गीकरण विश्लेषण की
पहली कड़ी है।
5.
आँकड़ों को समान असमान के आधार पर वर्गीकरण से तुलना करनी सरल हो जाती है।
Q. 13. संचयी आवृत्ति वितरण से आप क्या समझते हैं ?
Ans.
संचयी आवृत्ति वितरण में वर्गों की दोनों सीमायें नहीं ली जातीं, अपितु एक ही सीमा
निम्न या उच्च सीमा ली जाती है। उच्च सीमा के आधार पर संचयी आवृत्ति लिखते समय उन
(उच्च सीमा) से पहले 'से कम' लिखा जाता है। इसके विपरीत निम्न सीमा के आधार पर संचयी
आवृत्ति लिखते समय से अधिक शब्द का प्रयोग किया जाता है।
Q. 14. वर्गीकरण की विशेषताएँ अथवा लक्षण लिखिए ।
Ans.
वर्गीकरण की विशेषताएँ अथवा लक्षण इस प्रकार हैं-
1.
वर्गीकरण के अन्तर्गत समकों को विभिन्न वर्गों में विभाजित किया या बाँटा जाता है।
2.
समकों का विभाजन सजातीयता और विजातीयता के आधार पर किया जाता है।
3.
वर्गीकरण इस प्रकार किया जाता है कि इकाइयों की विभिन्नता में समकों की एकरूपता स्पष्टतः
दृष्टिगोचर होने लगे।
4.
वर्गीकरण वास्तविक रूप से भी हो सकता है या काल्पनिक रूप से। दूसरे शब्दों में, यह
प्राकृतिक हो सकता है या अनुसन्धानकर्ता की इच्छा के आधार पर।
5.
वर्गीकरण का कार्य भी बड़े महत्व का है। अतः इसे बड़ी सावधानी से और अनुभवी व्यक्तियों
के द्वारा ही सम्पन्न किया जाना चाहिए।
Q. 15. एक अच्छे वर्गीकरण के आवश्यक तत्वों का विवेचन करें।
Ans.
एक अच्छे वर्गीकरण के आवश्यक तत्व इस प्रकार हैं-
1.
वर्गीकरण अत्यन्त स्पष्ट (Clarity) होना चाहिए।
2.
इसमें स्थायित्व का गुण (Stability) होना चाहिए।
3.
यह परिवर्तनशील (Flexibility) होना चाहिए ताकि परिस्थितियों के अनुसार उसमें परिवर्तन
किया जा सके।
4.
वर्गीकरण करते समय यह भी ध्यान रखना चाहिये कि वर्ग न तो अधिक विस्तृत हों और न ही
संकीर्ण। तव्यों की संख्या देखकर ही वगों की संख्या तथा अन्तर निर्धारित करना चाहिये।
5.
वर्गीकरण में सजातीयता (Homogeneity) का गुण भी होना चाहिये। इस दृष्टि से एक वर्ग
की सभी इकाइयों उस गुण के अनुरूप होनी चाहिए जिसके आधार पर वर्गीकरण किया गया है।
6.
वर्गों का निर्माण उद्देश्य के अनुकूल (Suitability) होना चाहिये।
7.
वर्गीकरण इस प्रकार किया जाना चाहिये कि उसमें समत्र के प्रत्येक पद का समावेश हो जाए
अर्थात् वर्गीकरण में विशालता (Comprehensiveness) का गुण भी होना चाहिये।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
Q. 1. राजकीय प्रतिभा विद्यालय हरिगनर के क्रमशः के कक्षा-11 के छात्रों
के सत्र 2002-03 में अर्थशास्त्र में अंकों का विवरण निम्नलिखित है
64 33 70 50 45
30 75 26 20 65
58 65 55 32 60
35 42 36 40 45
61 39 51 53 47
15 41 59 55 49
65 82 42 45 63
48 52 63 46 54
42 55 57 45 53
26 35 39 18 64
(a) विवरण का परास मालूम करें।
(b) परास को उपयुक्त वर्ग अन्तरालों में बाँट कर आवृत्ति ज्ञात करें।
Ans.
(a) अधिकतम मूल्य = 82
न्यूनतम
मूल्य = 15
परास
= अधिकतम मूल्य - न्यूनतम मूल्य
परास
= 82-15=67
(b)
|
वर्ग
अन्तराल |
मिलान
चिह्न |
आवृत्ति |
|
10-20 |
II |
2 |
|
20-30 |
III |
3 |
|
30-40 |
|
8 |
|
40-50 |
|
13 |
|
50-60 |
|
12 |
|
60-70 |
|
9 |
|
70-80 |
II |
2 |
|
80-90 |
I |
1 |
|
|
|
योग
50 |
Q. 2. राजकीय प्रतिभा विद्यालय पश्चिम विहार कक्षा 12 के छात्रों के
सत्र 2002-03 में अंग्रेजी में प्राप्त अंकों का विवरण निम्नलिखित है-
15 7 53 4 49
6 42 30 35 36
10 18 12 11 50
24 16 23 32 8
31 20 8 53 43
41 13 32 40 29
50 34 16 54 43
8 23 44 27 9
14 32 23 48 59
21 52 58 56 6
(a) वितरण का परास मालूम करें।
(b) परास को उपयुक्त वर्ग अन्तरालों में बाँट कर आवृत्ति वितरण ज्ञात
करें।
(c) उपरोक्त आँकड़ों का संचयी आवृत्ति वितरण तालिका बनाएँ ।
Ans.
(a) अधिकतम मूल्य = 59
न्यूनतम
मूल्य = 6
परास
= अधिकतम मूल्य - न्यूनतम मूल्य
परास
=59-6=53
(b)
|
वर्ग
अंतराल |
मिलान
चिह्न |
आवृत्ति |
|
0-10 |
|
8 |
|
10-20 |
|
8 |
|
20-30 |
|
9 |
|
30-40 |
|
8 |
|
40-50 |
|
8 |
|
50-60 |
|
9 |
|
|
|
योग
50 |
(c)
|
वर्ग
अंतराल |
मिलान
चिह्न |
आवृत्ति |
संचयी
आवृत्ति |
|
0-10 |
|
8 |
8 |
|
10-20 |
|
8 |
8+8=16 |
|
20-30 |
|
9 |
16+9=25 |
|
30-40 |
|
8 |
25+8=33 |
|
40-50 |
|
8 |
33+8=41 |
|
50-60 |
|
9 |
41+9=50 |
Q.3. अविच्छिन्न श्रृंखला से संबंधित निम्नलिखित अवधारणाओं को संक्षेप
में समइाइए ।
1.
वर्ग 2. वर्ग सीमाएँ 3. वर्ग विस्तार 4. मध्य मूल्य ।
Ans.
1. वर्ग: संख्याओं के किसी निश्चित समूह को जिसमें गर्दै शामिल होती है, वर्ष
कहते हैं, जैसे 5-10, 10-15 आदि।
2.
वर्ग सीमाएँ : दो संख्याओं के बीच में प्रत्येक वर्ग
होता है। वर्ग की सीमाएँ के दोषों संख्याएँ निर्धारित करती हैं। एक वर्ग की निम्न तथा
ऊपरी सीमा, वर्ग सीमाएँ कहलाती है। वर्ग सीमाएँ दी प्रकार की होती हैं।
(i)
निम्न या निचली सीमा वर्ग की पहली या न्यूनतम संख्या को निचली सीमा कहते हैं।
(ii)
ऊपरी सीमा वर्ग की अन्तिम या अधिकतम संख्या को उच्च सीमा या ऊपरी सीमा कहते हैं।
वर्ग
5-10 में 5 निचली सीमा है तथा 10 ऊपरी सीमा है।
3.
वर्ग विस्तार: किसी वर्ग की उच्च या ऊपरी तथा निचली या
निम्न सीमा में अन्तर को बर्ग विस्तार कहते हैं। जैसे 10-15 वर्ग का विस्तार 15-10=5
होगा। अतएव वर्ग विस्तार (i) = उच्च सीमा (L2) निम्न सीमा (L1)
वर्ग विस्तार को ज्ञात करने के लिए निम्न प्रकार के सूत्र का प्रयोग किया जाता है
i
= L2 – L1
यहाँ
i = वर्ग विस्तार, L2 = उच्च सीमा, L1 = निम्न सीमा।
4.
मध्य मूल्य: किसी वर्ग की उच्च सीमा तथा निम्न सीमा
के औसत मूल्य को मध्य मूल्य कहा जाता है। इसे ज्ञात करने के लिए ऊपरी सीमा तथा निचली
सीमा के जोड़ को 2 से भाग किया जाता है।
मध्य
मूल्य = (उच्च सीमा +निम्न सीमा) ÷ 2
जैसे,
10-20 के वर्ग का मध्य मूल्य = (20 + 10)/2 = 15
Q. 4. वर्गीकरण क्या है? इसके करें।
Ans.
संकलित आँकड़े अव्यवस्थित दशा में बहुत बड़ी मात्रा होते हैं। उनका समझना व उनसे किसी
निष्कर्ष पर पहुँचना असम्भव-सी बात है। समंकों क विधिवत विश्लेषण और निष्पक्ष निर्वचन
के लिए यह आवश्यक है कि एकत्रित आँकड़े को २. क्षेप्त तथा सुव्यवस्थित सारणियों के
रूप में प्रस्तुत किये जाएँ। लेकिन सारणीयन से पूर्व समकों के समान विशेषताओं के आधार
पर वर्गीकरण करना पड़ता है।
जब
आँकड़ों का वर्गीकरण किया जाता है तब उन्हें समान गुणों के आधार पर अलग-अलग वर्गों
में बाँटा दिया जाता है ताकि समंकों की विशेषताएँ स्पष्ट हो सकें। कॉनर के अनुसार-
"वर्गीकरण
आँकड़ों को (यथार्थ रूप से तया भावात्मक रूप से) समानता तथा सादृश्यता के आधार पर वर्गों
या विभागों में क्रमानुसार रखने की क्रिया है और यह व्यक्तिगत पदों की विभिन्नता के
बीच गुणों की एकता को व्यक्त करता है।"
इस
परिभाषा से वर्गीकरण की निम्नलिखित विशेषताओं का पता लगता है-
1.
वर्गीकरण के अन्तर्गत एकत्रित समंकों को विभिन्न वर्गों में बाँटा जाता है। जैसे विद्यार्थियों
द्वारा प्राप्त अंक 0-10, 10-20, 20-30 आदि वर्गों में।
2.
वर्गीकरण वास्तविक रूप से अथवा भावात्मक या काल्पनिक रूप से किया जाता है।
3.
वर्गीकरण इस प्रकार किया जाता है कि इकाइयों की विभिन्नता में उनकी एकता स्पष्ट हो
जाये।
4.
तथ्यों का विभाजन उनकी समानता तथा सजातीयता के आधार पर किया जाता है। अर्थात् एक प्रकार
की विशेषता रखने वाले समंक एक वर्ग में रखे जाते हैं।
वर्गीकरण
के उद्देश्य- ये इस प्रकार हैं
1.
सामग्री को सरल एवं समझने योग्य बनाना- वर्गीकरण
का मुख्य उद्देश्य सांख्यिकीय सामग्री की जटिलता को दूर करना है। तथ्यों का वर्गीकरण
किया जाता है तो ऑकड़ों की विशाल राशि को कुछ ही वर्गों में व्यक्त किया जाता है उससे
वह बहुत ही ही सुगमता से समझ में आ जाती है।
2.
आँकड़ों की समानता व असमानता का प्रकटीकरण- वर्गीकरण
से आंकड़ों की समानता व्यक्त होती है क्योकि समान गुण वाले आँकड़े एक साथ रखे जाते
हैं जैसे शिक्षित व्यक्ति, अशिक्षित व्यक्ति आदि।
3.
आकर्षक और प्रभावशाली बनाना- वर्गीकरण की सहायता से आँकड़े
आकर्षक लगने लगते हैं और मस्तिष्क पर उनका महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।
4.
तुलना में सहायक- वर्गीकरण से आँकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन
सरल हो जाता है। उदाहरणार्थ, यदि एक सारणी में विभिन्न देशों की प्रति व्यक्ति औसत
आय दी हुई हो तो तुलना बहुत सरल हो जायेगी।
5.
सारणीयन का आधार- वर्गीकरण सारणीयन का तथा विश्लेषण की अन्य
क्रियाओं का आधार प्रस्तुत करता है।
Q. 5. आँकड़ों के वर्गीकरण की विधियों का विवेचन करें।
Ans.
आँकड़ों के वर्गीकरण की विभिन्न विधियाँ निम्नलिखित हैं-
1.
भौगोलिक वर्गीकरण- इस प्रकार का वर्गीकरण आँकड़ों की भौगोलिक
मिन्नता की स्थिति के आधार पर किया जाता है। जैसे कि भारत में अलग-अलग स्थानों पर चीनी
के कारखानों की संख्या का निम्नलिखित विधि के अनुसार वर्गीकरण किया जाएगा-
सन् 2004 में विभिन्न स्थानों पर कारखानों की संख्या
|
स्थान |
कारखानों
की संख्या |
|
पंजाब |
30 |
|
बिहार |
20 |
|
उत्तर
प्रदेश |
25 |
2.
समयानुसार वर्गीकरण- जब आँकड़ों का वर्गीकरण समय
के आधार पर किया जाता है तो इसको समयानुसार वर्गीकरण कहते हैं, जैसे कि भारत का विभिन्न
वर्षों में निर्यात-
|
वर्ष |
निर्यात |
|
2002 |
90
लाख |
|
2003 |
95
लाख |
|
2004 |
98
लाख |
3.
गुणात्मक वर्गीकरण- जब तथ्यों या आँकड़ों की विशेषताओं
या गुणों के आधार पर जैसे धर्म, व्यवसाय, शिक्षा आदि के अनुसार वर्गीकरण किया जाता
है तो इसे गुणात्मक वर्गीकरण कहा जाता है। इस प्रकार का वर्गीकरण दो प्रकार का हो सकता
है-
(i)
साधारण वर्गीकरण- द्वन्द्व भाजन वर्गीकरण भी इसे ही कहते
हैं क्योंकि इसमें आँकड़ों को किसी विशेष गुण के होने या न होने के आधार पर विभाजित
किया जाता है, जैसे पुरुष-स्त्री, स्वस्थ-अस्वस्थ, शिक्षित अशिक्षित इत्यादि ।
(ii)
बहुगुण वर्गीकरण- इस प्रकार के वर्गीकरण में वर्गीकरण एक
से अधिक गुणों के आधार पर किया जाता है। इसके परिणामस्वरूप दो से अधिक वर्ग बनते हैं।
उदाहरण के लिए काम के आधार पर एक मिल के मजदूरों को दो भागों में कुशल अकुशल और उनमें
से शिक्षित अशिक्षित और पुनः शहरी और ग्रामीण के रूप में बाँटा जा सकता है। यही बहुगुण
वर्गीकरण है।
व्यावहारिक
प्रश्न
Q. 1. एक सर्वेक्षण के अनुसार एक शहर के 30 परिवारों का औसत दैनिक व्यव
(रुपयों) में इस प्रकार है-
11,
12, 14, 16, 16, 17, 18, 18, 20, 20, 20, 21, 21, 22, 22, 23,23, 24, 25, 25, 26,
27, 28, 28, 31, 32, 32, 33, 36, 38.
इन समंकों से आवृत्ति वितरण बनाइए जबकि वर्गान्तर इस प्रकार हों-
11-14,
15-19, 20-24, 25-29, 30-34 और 35-39
Ans.
|
वर्ग
अंतराल |
मिलान
चिह्न |
आवृत्ति |
|
11-14 |
III |
3 |
|
15-19 |
|
5 |
|
20-24 |
|
10 |
|
25-29 |
|
6 |
|
30-34 |
IIII |
4 |
|
35-39 |
II |
2 |
|
|
|
योग
30 |
Q. 2. निम्नलिखित तालिका में 36 श्रमिकों की रुपए में मजदूरी दी गई
है। एक उचित वर्गान्तर लेकर आवृत्ति वितरण बनाइए ।
100,
115, 120, 125, 92, 140, 150, 162, 189, 165, 200, 220, 250, 240, 300, 320, 270,
280, 400, 382, 288, 235, 225, 312, 270, 250, 242, 344, 248, 188, 220, 240, 212,
224, 325, 425.
Ans.
निम्न सीमा 92 तथा उच्च सीमा 425 है। इसलिए दोनों का अन्तर (425-92) = 333 है। यदि
हम वर्गान्तर 50 लें तो 333/50 अर्थात् 7 वर्ग इस प्रकार बनेंगे।
|
मजदूरी
(रुपयों में) |
मिलान
चिह्न |
आवृत्ति |
|
90-140 |
|
5 |
|
140-190 |
|
6 |
|
190-240 |
|
7 |
|
240-290 |
|
10 |
|
290-340 |
IIII |
4 |
|
340-390 |
II |
2 |
|
390-440 |
II |
2 |
|
|
|
योग
36 |
Q.3. 40 विद्यार्थियों का वजन निम्नलिखित प्रकार है। 5 वर्गान्तर से
आवृत्ति वितरण बनाए ।
83,
80, 91, 81, 88, 82, 87, 97, 93, 99, 75, 85, 72, 92, 84, 90, 87, 78, 83, 98, 86,
80, 93, 86, 88, 88, 82, 101, 89, 82, 85, 95, 80, 89, 84, 92, 76, 81, 103, 94.
Ans.
|
वजन
(पौंडों में) |
मिलान
चिह्न |
आवृत्ति |
|
70-75 |
I |
1 |
|
75-80 |
III |
3 |
|
80-85 |
|
13 |
|
85-90 |
|
10 |
|
90-95 |
|
7 |
|
95-100 |
IIII |
4 |
|
100-105 |
II |
2 |
|
|
|
योग
40 |
Q. 4. एक परीक्षा में 25 विद्यार्थियों के प्राप्तांक इस प्रकार हैं-
23,
28, 30, 32, 35, 36, 40, 41, 43, 44, 45, 45, 48, 49, 52, 53, 54, 56, 56, 58, 61,
62, 65, 68.
(i) आवृत्ति वितरण बनाइए जबकि वर्गान्तर इस प्रकार हों-
20-29, 30-39, 40-49, 50-59 और 60-69.
(ii) संचयी आवृत्ति वितरण भी बनाइए ।
Ans.
|
वर्गान्तर |
आवृत्ति |
संचयी
आवृत्ति |
|
20-29 |
2 |
2 |
|
30-39 |
5 |
2+5=7 |
|
40-49 |
8 |
2+5+8=15 |
|
50-59 |
6 |
2+5+8+6=21 |
|
60-69 |
4 |
2+5+8+6+4=
25 |
Q. 5. राजकीय प्रतिभा विद्यालय पश्चिम विहार कक्षा-11 के छात्रों के
सत्र 2002-03 में अंग्रेजी में प्राप्त अंकों का विवरण निम्नलिखित है-
15 7 53 4 49
6 42 30 35 36
10 18 12 11 50
24 16 23 32 8
31 20 8 53 43
41 13 32 40 29
50 34 16 54 43
8 23 44 27 9
14 32 23 48 59
21 52 58 56 6
(a) वितरण का परास मालूम करें।
(b) परास को उपयुक्त वर्ग अन्तरालों में बाँट कर आवृत्ति वितरण ज्ञात
करें।
(c) उपरोक्त आँकड़ों का संचयी आवृत्ति वितरण तालिका बनाएँ ।
Ans.
(a) अधिकतम मूल्य = 59
न्यूनतम
मूल्य = 6
परास
=अधिकतम मूल्य -न्यूनतम मूल्य
परास
=59-6=53
(b)
|
वर्ग
अंतराल |
मिलान
चिह्न |
आवृत्ति |
|
0-10 |
|
8 |
|
10-20 |
|
8 |
|
20-30 |
|
9 |
|
30-40 |
|
8 |
|
40-50 |
|
8 |
|
50-60 |
|
9 |
|
|
|
योग
50 |
(c)
|
वर्ग
अंतराल |
मिलान
चिह्न |
आवृत्ति |
संचयी
आवृत्ति |
|
0-10 |
|
8 |
8 |
|
10-20 |
|
8 |
8+8=16 |
|
20-30 |
|
9 |
16+9=25 |
|
30-40 |
|
8 |
25+8=33 |
|
40-50 |
|
8 |
33+8=41 |
|
50-60 |
|
9 |
41+9=50 |
Q. 1. राजकीय प्रतिभा विद्यालय हरिगनर के क्रमशः के कक्षा-11 के छात्रों
के सत्र 2002-03 में अर्थशास्त्र में अंकों का विवरण निम्नलिखित है
64 33 70 50 45
30 75 26 20 65
58 65 55 32 60
35 42 36 40 45
61 39 51 53 47
15 41 59 55 49
65 82 42 45 63
48 52 63 46 54
42 55 57 45 53
26 35 39 18 64
(a) विवरण का परास मालूम करें।
(b) परास को उपयुक्त वर्ग अन्तरालों में बाँट कर आवृत्ति ज्ञात करें।
Ans.
(a) अधिकतम मूल्य = 82
न्यूनतम
मूल्य = 15
परास
= अधिकतम मूल्य - न्यूनतम मूल्य
परास
= 82-15=67
(b)
|
वर्ग
अन्तराल |
मिलान
चिह्न |
आवृत्ति |
|
10-20 |
II |
2 |
|
20-30 |
III |
3 |
|
30-40 |
|
8 |
|
40-50 |
|
13 |
|
50-60 |
|
12 |
|
60-70 |
|
9 |
|
70-80 |
II |
2 |
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80-90 |
I |
1 |
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योग
50 |
JCERT/JAC REFERENCE BOOK
Group -A सांख्यिकी के सिद्धान्त
Group-B भारतीय अर्थव्यवस्था
JCERT/JAC प्रश्न बैंक - सह - उत्तर पुस्तक (Question Bank-Cum-Answer Book)
विषय सूची
क्र०स० | अध्याय का नाम |
अर्थशास्त्र में सांख्यिकी | |
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8. | |
भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास | |
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8. | |
