Class 10 हिन्दी 'ए' Set-1
Sumudran Model Sample Question Papers with Answers
JCERT द्वारा जारी
सामान्य निर्देश :
1. परीक्षार्थी यथासंभव अपने शब्दों में ही उत्तर दें।
2. इस प्रश्न-पत्र में चार खण्ड क, ख, ग एवं घ हैं। कुल प्रश्नों
की संख्या 52 है।
3. खण्ड 'क' में कुल 30 बहु-विकल्पीय प्रश्न हैं। प्रत्येक
प्रश्न के चार विकल्प दिए गए हैं। इनमें से एक सही विकल्प का चयन कीजिये। प्रत्येक
प्रश्न का मान 1 अंक निर्धारित है।
4. खण्ड 'ख' में प्रश्न संख्या 31 से 38 तक अति लघु उत्तरीय
प्रश्न हैं। इनमें से किन्हीं 6 प्रश्नों का उत्तर दीजिए। प्रत्येक प्रश्न का मान
2 अंक निर्धारित है।
5. खण्ड 'ग' में प्रश्न संख्या 39 से 46 तक लघु उत्तरीय प्रश्न
हैं। इनमें से किन्हीं 6 प्रश्नों का उत्तर दीजिए। प्रत्येक प्रश्न का मान 3 अंक निर्धारित
है।
6. खण्ड 'घ' में प्रश्न संख्या 47 से 52 दीर्घर्ष उत्तरीय
प्रश्न हैं। इनमें से किन्हीं 4 प्रश्नों का उत्तर दीजिए। प्रत्येक प्रश्न का मान
5 अंक निर्धारित है।
(खण्ड- क) अपठित बोध
निम्नलिखित
गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न संख्या 1-4 तक के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए।
साहस
की जिन्दगी सबसे बड़ी जिन्दगी होती है। ऐसी जिन्दगी की सबसे बड़ी पहचान यह है कि वह
बिलकुल निडर, बिलकुल बेखौफ होती है। साहसी मनुष्य की पहली पहचान यह है कि वह इस बात
की चिन्ता नहीं करता कि तमाशा देखने वाले लोग उसके बारे में क्या सोच रहे हैं? जनमत
की उपेक्षा करके जीने वाला आदमी दुनिया की असली ताकत होता है और मनुष्यता को प्रकाश
भी उसी आदमी से मिलता है। अड़ोस-पड़ोस को देखकर चलना यह साधारण जीव का काम है। क्रान्ति
करने वाले लोग अपने उद्देश्य की तुलना न तो पड़ोसी के उद्देश्य से करते हैं और न अपनी
चाल को ही पड़ोसी की चाल देखकर मद्धिम बनाते हैं।
1. साहस की जिन्दगी सबसे बड़ी क्या होती है?
(1)
जीवन
(2) जिन्दगी
(3)
जिन्दा
(4)
हिम्मत
2. जनमत की उपेक्षा करके जीने वाला आदमी दुनिया की असली क्या होता है?
(1) ताकत
(2)
हिम्म
(3)
जीवन
(4)
सिफत
3. किस मनुष्य की पहली पहचान यह है कि वह किसी के बारे में कोई चिन्ता
नहीं करता ?
(1)
डरपोक
(2)
कायर
(3)
भीरु
(4) साहसी
4. 'जनमत' शब्द कौन समास है ?
(1)
द्वन्द्व
(2)
अव्ययीभाव
(3) तत्पुरुष
(4)
द्विगु
or, अड़ोस-पड़ोस को देखकर चलना यह कैसे जीव का काम है ?
(1) साधारण
(2)
असाधारण
(3)
असामान्य
(4)
डरपोक
निम्नलिखित काव्यांश
को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न संख्या 5-8 तक के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए।
विघ्नों का दल
चढ़ आए तो, उन्हें देख भयभीत न होंगे
अब न रहेंगें
दलित दीन हम, कहीं किसी से हीन न होंगे।
क्षुद्र स्वार्थ
की खातिर हम तो कहीं न गर्हित कर्म करेगें ।
पुण्य भूमि यह
भारत माता, जग की हम तो भीख न लेंगे।
मिसरी- मधु-मेवाफल
सारे देती हमको सदा यही है
कदली, चावल,
अन्य विविध और क्षीर सुधामय लुटा रही है।
5. किसके आने पर भयभीत न होंगे ?
(1) सिंह के
आने पर
(2) तूफान के
आने पर
(3) विघ्नों का दल चढ़ आने पर
(4) रात आने
पर
6. भारतवासी किसकी खातिर गर्हित कर्म (निंदनीय कार्य नहीं करेंगे ?
(1) क्षुद्र स्वार्थ
(2) भय
(3) दीनता
(4) भीख
7. कवि क्या आशा करता है ?
(1) भारत बहुत
तरक्की करेगा
(2) भारतीय किसी से पद-दलित और हीन न होंगे
(3) भारत में
आपसी झगड़े न होंगें
(4) भारत में
सुख और शांति होगी
8. भारत माता हमें क्या देती है?
(1) घर
(2) स्वर्ग
(3) जीवन
(4) खाने की विविध वस्तुएँ
निम्नलिखित प्रश्नों
के सही विकल्प का चयन कीजिए।
9. 'बच्चा पुस्तक पढ़ रहा है' इसमें कौन क्रिया है?
(1) अकर्मक
(2) सकर्मक
(3) द्विकर्मक
(4) प्रेरणार्थक।
10. 'बच्चा हँस रहा है।' निम्न में से कौन-सा क्रिया भेद है?
(1) सकर्मक
(2) अकर्म
(3) द्विकर्मक
(4) प्रेरणार्थक
11. रचना के आधार पर किस वाक्य में एक प्रधान वाक्य और शेष आश्रित उपवाक्य होते
हैं?
(1) सरल
(2) संयुक्
(3) मिश्र
(4) उपवाक्य
12. 'शाम हुई और तारे निकले।' यह कौन वाक्य है?
(1) सरल
(2) मिश्र
(3) संयुक्त
(4) उप।
13. हमें अपनी सभ्यता ----- संस्कृति पर गर्व है। (सही अव्यय पद को चुनें।)
(1) ताकि
(2) और
(3) बिना
(4) अच्छा !
14. 'अंबर' का एक अर्थ होता है 'वस्त्र' और दूसरा :
(1) आकाश
(2) कपड़ा
(3) पोशाक
(4) जलाशय।
15. निम्न में से भाव वाच्य का उदाहरण कौन है?
(1) घोड़ा दौड़ता
है।
(2) किसान हल
चलाता है।
(3) माँ से चला नहीं जाता है।
(4) प्रेमचंद
द्वारा कहानी लिखी गई।
16. 'विद्यालय - विद्या के लिए आलय' कौन-सा समास है?
(1) अव्ययीभाव
समास
(2) तत्पुरुष समास
(3) कर्मधारय
समास
(4) द्वंद्व
समास
निम्नलिखित गद्यांश
को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न संख्या 17 एवं 18 तक के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए।
हालदार साहब
को पानवाले द्वारा एक देशभक्त का इस तरह मजाक उड़ाया जाना अच्छा नहीं लगा। मुड़कर देखा
तो अवाक् रह गए। एक बेहद बूढ़ा मरियल-सा लंगड़ा आदमी सिर पर - गाँधी टोपी और आँखों
पर काला चश्मा लगाए एक हाथ में एक छोटी-सी संदूकची और दूसरे हाथ में एक बाँस पर टंगे
बहुत-से चश्मे लिए अभी-अभी एक गली से निकला था और अंब एक बंद दुकान के सहारे अपना बाँस
टिका रहा था। तो इस बेचारे की दुकान भी नहीं। फेरी लगाता है। हालदार साहब चक्कर में
पड़ गए। पूछना चाहते थे, इसे कैप्टन क्यों कहते हैं?
17. हालदार साहब को क्या अच्छा नहीं लगा?
(1) पानवाले
के द्वारा पान खाना
(2) कैप्टन के
द्वारा चश्मा पहनाना
(3) मूर्तिकार
द्वारा चश्मा नहीं बनाया जान
(4) पानवाले के द्वारा एक देशभक्त का मजाक उड़ाया जाना
18. बूढ़ा मरियल-सा लँगड़ा आदमी कौन था?
(1) हालदार साहब
(2) पानवाला
(3) कैप्टन (चश्मेवाला)
(4) मास्टर मोतीलाल
निम्नलिखित काव्यांश
को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न संख्या 19 एवं 20 तक के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए।
धन्य तुम, माँ
भी तुम्हारी धन्य !
चिर प्रवासी
मैं इतर, मैं अन्य !
इस अतिथि से
प्रिय तुम्हारा क्या रहा संपर्क
उँगलियाँ माँ
की कराती रही हैं मधुपर्क
देखते तुम इधर
कनखी मार
और होतीं जब
कि आँखें चार
तब तुम्हारी
दंतुरित मुसकान
मुझे लगती बड़ी
ही छविमान !
19. कवि किसे धन्य कह रहा है?
(1) शिशु को
(2) माँ को
(3) शिशु और उसकी माँ को
(4) शिशु की
मुसकान को
20. माँ बच्चे को क्या कराती रही है?
(1) काम
(2) आराम
(3) मधुपर्क
(4) संपर्क
or, दंतुरित का क्या अर्थ है?
(1) बिना दाँत
के
(2) लंबे-लंबे
दाँत
(3) टेढ़े-मेढ़े
दाँत
(4) नए-नए दाँत
निम्नलिखित प्रश्नों
के सही विकल्प का चयन कीजिए:
21. नेता जी की मूर्ति पर चश्मा कौन बदलता था?
(1) हालदार साहब
(2) पानवाला
(3) कैप्टन
(4) लेखक
22. बाल गोबिन भगत कैसे कद के थे?
(1) नाटे कद
के
(2) मंझोले कद के
(3) लंबे कद
के
(4) छोटे कद
के
23. कहानी लेखन के लिए क्या आवश्यक है?
(1) विचार
(2) पात्र
(3) घटना
(4) इनमें से
सभी
24. शहनाई की ध्वनि को क्या कहा जाता है?
(1) सुर
(2) ध्वनि
(3) मंगल ध्वन
(4) राग
25. किसके व्यवहार की तुलना कमल के पत्ते तथा तेल की गगरी से की गयी है?
(1) कृष्ण
(2) बलरा
(3) उद्धव
(4) गोपियाँ
26. श्रीराम ने किसके धनुष को तोड़ा था?
(1) परशुराम
के
(2) शिवजी के
(3) ब्रह्माके
(4) विष्णु के
27. 'अट नहीं रही है' कविता में किस महीने की प्रकृति का वर्णन हुआ है?
(1) फागुन
(2) चैत
(3) वैशाख
(4) माघ
28. फसल वस्तुतः किसके सहयोग का परिणाम है?
(1) प्रकृति
और नदी के
(2) प्रकृति और मनुष्य के
(3) नदी और सूरज
के
(4) मनुष्य और
मिट्टी के
29. 'माता का आँचल' पाठ का नायक कौन है?
(1) बैजू
(2) पिता
(3) गुरुजी
(4) भोलानाथ
30. 'कटाओ' को हिन्दुस्तान का क्या कहा जाता है?
(1) स्वर्ग
(2) जन्नत
(3) स्विट्जरलैंड
(4) वरदान
Ans. (3)
खण्ड B
प्रश्न संख्या
31 से 38 तक अति लघु उत्तरीय प्रश्न है। प्रत्येक प्रश्न 2 अंकों का है। इनमें से किन्हीं
6 प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
निम्नलिखित गद्यांश
को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं 6 प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
हँसी भीतरी आनन्द
का बाहरी चिह्न है। जीवन की सबसे प्यारी और उत्तम-से-उत्तम वस्तु एक बार हँस लेना तथा
शरीर को अच्छा रखने की अच्छी-से-अच्छी दवा एक बार खिलखिला उठना है। पुराने लोग कह गये
हैं कि हँसो और पेट फुलाओ। हँसी कितने ही कला-कौशलों से भली है। जितना ही अधिक आनंद
से हँसोगे उतनी ही आयु बढ़ेगी। एक यूनानी विद्वान कहता है कि सदा अपने कर्मों को खीझने
वाला हेरीक्लेस बहुत कम जिया, पर प्रसन्न मन डेमाक्रीटस 109 वर्ष तक जिया। हँसी-खुशी
ही का नाम जीवन है। जो रोते हैं, उनका जीवन व्यर्थ है। कवि कहता है- 'जिन्दगी जिन्दादिली
का नाम है, मुर्दादिल खाक जिया करते हैं।'
मनुष्य के शरीर
के वर्णन पर एक विलायती विद्वान ने एक पुस्तक लिखी है। उसमें वह कहता है कि उत्तम सुअवसर
की हँसी उदास-से-उदास मनुष्य के चित्त को प्रफुल्लित कर देती है। आनन्द एक ऐसा प्रबल
इंजन है कि उससे शोक और दुःख की दीवारों को डा सकते हैं। प्राण-रक्षा के लिए सदा सब
देशों में उत्तम-से-उत्तम उपाय मनुष्य के चित्त को प्रसन्न रखना है। सुयोग्य वैद्य
अपने रोगी के कानों में आनंदरूपी मंत्र सुनाता है।
एक अँगरेज डॉक्टर
कहता है कि किसी नगर में दवाई लदे हुए बीस गधे ले जाने से एक हँसोड़ आदमी को ले जाना
अधिक लाभकारी है। डॉक्टर हस्फलेंड ने एक पुस्तक में आयु बढ़ाने का उपाय लिखा है। वह
लिखता है कि हँसी बहुत उत्तम चीज है। यह पाचन के लिए है। इससे अच्छी औषधि और नहीं है।
एक रोगी ही नहीं, सबके लिए हँसी बहुत काम की वस्तु है।
प्रश्न 31. हँसी भीतरी आनन्द कैसे प्रकट करती है?
अथवा, हँसी भीतरी आनन्द का बाहरी चिह्न कैसे है?
उत्तर : हँसी
भीतरी आनन्द का बाहरी चिह्न है अर्थात् हमारे मन, प्राण, हृदय आदि में जब आनन्द का
भाव उत्पन्न होता है यानी इदय प्रसन्न होता है तब उसका प्रकटीकरण चेहरे पर हँसी के
रूप में होता है। हम खिलखिलाकर हँसते हैं अर्थात् खुश होते हैं।
प्रश्न 32. पुराने समय में लोगों ने हँसी को महत्त्व क्यों दिया?
उत्तर : पुराने
समय में लोगों ने हँसी को स्वास्थ्य के लिए आवश्यक समझकर उसे महत्त्व दिया। उनके अनुसार,
जितना ही अधिक आनन्द से हँसोगे उतनी ही आयु बढ़ेगी क्योंकि पेट फुलाकर हँसने से मन
के सारे विकार दूर हो जाते हैं। चित्त प्रसन्न हो जाता है और उससे पाचन शक्ति बढ़ती
है।
प्रश्न 33. हेरीक्लेस और डेमाक्रीटस के उदाहरण से लेखक क्या कहना चाहता है?
उत्तर : हँसते
रहने वाले प्रसन्नचित्त व्यक्ति ज्यादा जीते हैं।
प्रश्न 34. जिन्दगी किसका नाम है?
उत्तर : जिन्दगी
जिन्दादिली का नाम है।
प्रश्न 35. हँसी-खुशी का नाम जीवन कैसे है?
उत्तर : विद्वानों
का कहना है कि हँसने और खुश रहने से शरीर स्वस्थ रहता है और आयु बढ़ती है। रोने वालों
का जीना व्यर्थ है। हँसी जीवंतता का प्रतीक है। हँसी-खुशी का ही नाम जीवन है।
प्रश्न 36. डॉक्टर हस्फलेण्ड ने एक पुस्तक में हँसी के बारे में क्या लिखा है?
उत्तर : डाक्टर
हसफलेण्ड ने एक पुस्तक में आयु बढ़ाने का उपाय के संबंध में लिखा है कि हँसी बहुत ही
उत्तम चीज है। यह पाचक है। इससे अच्छी औषधि और कोई नहीं। एक रोगी ही नहीं, हँसी सबके
लिए बहुत ही काम की वस्तु है।
प्रश्न 37. एक अँगरेज डॉक्टर ने क्या कहा है?
उत्तर : एक अँगरेज
डॉक्टर ने कहा है कि किसी नगर में दवाई लदे हुए बीस गधे ले जाने से अच्छा
एक हँसोड़ आदमी को ले जाना लाभकारी है।
प्रश्न 38. हँसी को एक शक्तिशाली इंजन की तरह क्यों कहा गया है?
उत्तर : हँसी
को एक शक्तिशाली इंजन की तरह इसीलिए कहा गया है क्योंकि यह शोक और दुःख
की दीवारों को ध्वस्त कर देता है।
खण्ड - C
प्रश्न संख्या
39 से 46 तक लघु उत्तरीय प्रश्न है। प्रत्येक प्रश्न 3 अंकों का है। इनमें से किन्हीं
6 प्रश्नों के उत्तर अधिकतम 150 शब्दों में दीजिए।
प्रश्न 39. सेनानी न होते हुए भी चश्मे वाले को लोग कैप्टन क्यों कहते थे?
उत्तर : चश्मे
वाला सेनानी न होते हुए भी परम देशभक्त था। वह बूढ़ा-सा गरीब मरियल फेरी लगा कर चश्मा
बेचने वाला था। वह नेताजी की मूर्ति को बिना चश्मे के देखना नहीं चाहता था। वह अपनी
ओर से नेताजी को कोई न कोई चश्मा अवश्य लगाता रहता था। उसकी इसी भावना को देखकर उसे
लोग नेताजी का साथी समझते थे। लोग उसे आजाद हिन्द फौज का कैप्टन समझते थे। अतः लोग
उसे कैप्टन कहते थे।
प्रश्न 40. 'बिना विचार, घटना और पात्रों के भी क्या कहानी लिखी जा सकती है?' यशपाल के इस विचार से आप कहाँ तक सहमत हैं?
उत्तर : यशपाल
के विचारानुसार बिना घटना, बिना पात्र और बिना विचार के कहानी नहीं लिखी जा सकती। कहानी
का अर्थ ही है, क्या हुआ? उसे कहना। अतः बिना किसी घटना या पात्र के नई कहानी लिखना
संभव नहीं है। कहानी में कोई विचार, बात या उद्देश्य अवश्य होता है। अतः मैं लेखक के
इस विचार से सहमत हूँ।
प्रश्न 41. शहनाई की दुनिया में डुमराँव को क्यों याद किया जाता है?
उत्तर : डुमराँव
'भारतरत्न' की उपाधि प्राप्त शहनाई वादक बिस्मिल्ला खाँ की जन्मभूमि है। इसके साथ ही
यहाँ सोन नदी के किनारे नरकट के पौधे मिलते हैं, जिसकी रीड का उपयोग शहनाई बजाने के
लिए किया जाता है।
प्रश्न 42. गोपियों के अनुसार राजा का धर्म क्या होना चाहिए?
उत्तर : गोपियों
के अनुसार राजा का धर्म प्रजा-कल्याण होना चाहिए। राजा को चाहिए कि वह अपनी प्रजा की
मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक रूप में रक्षा करें।
प्रश्न 43. फागुन में ऐसा क्या होता है जो बाकी ऋतुओं से भिन्न होता है?
अथवा, फागुन की मस्ती का वर्णन करें।
उत्तर : फागुन
का महीना मादक और सौन्दर्यपूर्ण होता है। यह महीना बड़ा ही सुहावना होता है। इस
माह में सभी फूल खिल जाते हैं तथा वृक्षों में नयी-नयी पत्तियाँ निकल आती हैं। हवाएँ
भी अपने ढंग की सुंगधियुक्त होती हैं। इस माह में आकाश प्रायः साफ और आकर्षक होता है।
पक्षियों के समूह भी कलरव करते सुनायी पड़ते हैं।
प्रश्न 44. बच्चे की मुसकान और एक बड़े व्यक्ति की मुसकान में क्या अंतर है?
उत्तर : बच्चे
की मुसकान निश्छल और भोली होती है। उसमें कोई छल या स्वार्थ नहीं रहता। बच्चों की मुसकान
स्वाभाविक होती है। दूसरी ओर बड़ों की मुसकान कुटिल और स्वार्थपूर्ण भी होती है। वे
अपनी मुसकान को माप-तौल कर स्वार्थ के लिए प्रदर्शित करते हैं। वे कभी अपनी प्रसन्नता
व्यक्त करने के लिए भी करते हैं। बड़े लोगों की मुसकान लोक व्यवहार का एक अंग भी होती
है।
प्रश्न 45. आपके विचार में भोलानाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना क्यों भूल
जाता है?
उत्तर : मनोविज्ञान
कहता है कि बच्चे अपने साथियों को देखकर सिसकना भूल जाते हैं और उनके साथ खेलने की
चाह करने लगते हैं। वह अपने साथियों की हुल्लड़बाजी, शरारतें और मस्ती को देखकर अपनी
मग्नावस्था में सभी को भूल जाता है।
प्रश्न 46. कभी श्वेत तो कभी रंगीन पत्ताकाओं का फहराना किन अलग-अलग अवसरों
की ओर संकेत करता है?
उत्तर : लेखिका
को यूमयांग जाते हुए रास्ते में बहुत सारी बौद्ध पताकाएँ दिखलायी दीं। लेखिका का गाइड
और ड्राइवर जितेन था। जितेन नार्गे ने उन्हें बतलाया कि जब किसी बुद्धिस्ट की मृत्यु
होती है तो उसकी आत्मा की शांति के लिए श्वेत पताकाएँ फहरायी जाती हैं। किसी नये कार्य
के शुभारंभ के समय रंगीन पताकाएँ फहरायी जाती हैं।
खण्ड - D
प्रश्न संख्या
47 से 52 तक दीर्घ उत्तरीय प्रश्न है। प्रत्येक प्रश्न 5 अंकों का है। इनमें से किन्हीं
4 प्रश्नों के उत्तर अधिकतम 250 शब्दों में दीजिए।
प्रश्न 47. पान वाले का रेखाचित्र प्रस्तुत कीजिए।
अथवा, पान वाले का चरित्र-चित्रण करें।
उत्तर : पान
वाला एक काला, मोटा और खुशमिजाज आदमी था। वह भारी भरकम तोंद वाला था। वह हमेशा मुँह
में भी पान भरे रहता था। किसी से भी बात करते समय बार-बार पीक फेंकता था। जब वह हँसता
था तो उसकी तोंद थिरकने लगती थी और मुँह से पान-पीक के छींटें निकलते थे।
वह चश्मे वाले
तथा उसकी देश भक्ति का हमेशा मजाक उड़ाया करता था। पान वाला चश्मे वाले को देशभक्त
नहीं मानता है। नेताजी को बार-बार चश्मा लगाने के कारण वह उसे पागल मानता है। वह तो
केवल उसका ऊपरी रूप देखकर उसे एक लँगड़ा इन्सान मानता है। उसके मन में चश्मे वाले की
आंतरिक देशभक्ति के प्रति कोई सम्मान का भाव नहीं था।
प्रश्न 48. परशुराम के क्रोध करने पर लक्ष्मण ने धनुष के टूट जाने के लिए कौन-कौन
से तर्क दिये?
उत्तर : परशुराम
के क्रोध करने पर लक्ष्मण ने धनुष टूट जाने के लिए निम्नलिखित तर्क दिये :
(क) बचपन में
मैंने बहुत सारे धनुष तोड़े लेकिन आपने कभी क्रोध नहीं किया। लेकिन इस विशेष धनुष पर
आपकी ममता क्या है?
(ख) लक्ष्मण
कहते हैं कि उनकी नजर में सभी धनुष एक ही समान है, फिर इस धनुष पर इतना हल्ला क्यों?
(ग) इस पुराने
धनुष को तोड़ने से हमें क्या मिलना था?
(घ) राम ने तो
इस धनुष को हुआ ही था कि यह टूट गया। इसमें राम का कोई दोष नहीं।
प्रश्न 49. माता का आँचल' पाठ के आधार पर यह कहा जा सकता है कि बच्चे का अपने
पिता से अधिक जुड़ाव था, फिर भी विपदा के समय वह पिता के पास न जाकर माँ की शरण लेता
है। आपकी समझ से इसकी क्या वजह हो सकती है?
उत्तर : यह सही
है कि बच्चे (लेखक) को अपने पिता से अधिक लगाव था। वह अपने पिता के साथ खाता-पीता और
सोता था। उसके पिता ने उसके लालन-पालन में ही सहयोग नहीं दिया, अपितु वे उसके अच्छे
दोस्त भी थे। उसके खेल में साथ रहते थे।
लेकिन, विपदा
के समय बच्चे को लाड़-प्यार की अपेक्षा ममता, सहानुभूति एवं सुरक्षा की भावना की आवश्यकता
होती है। वह उसे माँ की गोद में मिल सकती कती है। बच्चा माँ की गोद में अपने-आपको जितना
सुरक्षित महसूस करता है उतना पिता के लाड़-प्यार की छाया में नहीं।
यही कारण है
कि संकट में बच्चे को माँ की याद आती है, पिता की नहीं। माँ की ममता बच्चे के घाव भरने
में मरहम का काम करती है। माँ के आँचल में बच्चा स्वयं को सुरक्षित महसूस करता है।
प्रश्न 50. दिये गये संकेत बिन्दुओं के आधार पर निम्नलिखित में से किसी एक विषय
पर निबंध लिखें।
(क) हमारा राज्य
झारखंड
संकेत बिंदु:
प्रस्तावना, इतिहास, सीमा एवं निवासी, संसाधन, विशेषता, उपसंहार
(ख) समय का महत्त्व
संकेत बिन्दु
: समय का महत्त्व (समय स्थिर नहीं), समय के सदुपयोग के लाभ, विद्यार्थी जीवन और समय,
सदुपयोग करनेवालों के कुछ उदाहरण, निष्कर्ष
(ग) कम्प्यूटर
विज्ञान का अद्भुत वरदान / कम्प्यूटर: आज की जरूरत
संकेत बिन्दु
: भूमिका, आधुनिक उपकरण, निर्दोष गणक, दुष्परिमाण, उपसंहार
उत्तर :
(क) हमारा
राज्य झारखंड
परिचय : सुरम्य
पहाड़ियों और वनों से आच्छादित हमारा राज्य झारखण्ड प्रकृति का क्रीड़ा स्थल है। यहाँ
की स्वर्णिम भूमि शस्य श्यामला, रत्नगर्भा और वन सम्पदा से परिपूर्ण है। इसकी प्राकृतिक
छटा अनूठी है। हर ओर प्रकृति अपनी अनोखी छटा बिखेरती रहती है।
इतिहास : अबुल
फजल ने 'आइने अकबरी' में इस प्रदेश को झारखण्ड नाम से सम्बोधित किया। इसका इतिहास भी
अत्यंत प्राचीन है। ईसा से हजारों वर्ष पूर्व के पत्थर के हथियार, बर्तन, उपकरण आदि
यहाँ मिले हैं।
झारखण्ड पहले
विहार का ही एक भाग था। बिहार के साथ इस भूप्रदेश का अपेक्षित विकास नहीं हो रहा था।
अतः अलग राज्य के लिए झारखण्ड में बहुत दिनों तक आन्दोलन चला। अन्ततः 15 नवम्बर
2000 ई. को बिरसा मुण्डा के जन्म दिवस पर भारतीय मानचित्र पर 28वें राज्य के रूप में
झारखण्ड प्रदेश का उदय हुआ।
सीमा एवं निवासी
: इसके उत्तर में बिहार, पूर्व में पश्चिम बंगाल, पश्चिम में छत्तीसगढ़ और दक्षिण में
ओडिसा है। झारखण्ड में 24 जिले हैं। राँची इसकी राजधानी है। झारखण्ड में तीस के करीब
जनजातियाँ रहती हैं जिसमें संथाल, मुण्डा और उराँव प्रमुख हैं।
संसाधन : देश
में खनिज की दृष्टि से झारखण्ड अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। यहाँ कोयला, लोहा प्रचुर मात्रा
में विद्यमान है। यहाँ उद्योग-धन्धों का जाल बिछा है। जमशेदपुर, राँची आदि प्रमुख औद्योगिक
नगर हैं। ताम्बा, क्रोमाइट, मैंगनीज और बॉक्साइट यहाँ प्रमुख रूप से उपलब्ध हैं।
विशेषता: पर्यटन
की दृष्टि से झारखंड में अपार संभावनाएँ हैं। हुण्डरू, दसम, जोन्हा, हिरनी आदि जलप्रपात
नयनाभिराम हैं। इसके अलावे नेतरहाट का पठार झारखंड का सबसे ऊँचा और खूबसूरत
पर्वतीय क्षेत्र है। स्वर्णरेखा, दामोदर, कोयल आदि नदियाँ इस प्रदेश की शोभा हैं। पलामू
तथा हजारीबाग का नेशनल पार्क इस प्रदेश का नामी-गिरामी अभयारण्य है। देवघर, बासुकीनाथ,
रजरप्पा का छिन्नमस्तिका मंदिर, रामरेखा घाम (सिमडेगा) आदि प्रमुख धर्म स्थान हैं।
उपसंहार : संसाधनों
से भरा-पूरा हमारा झारखण्ड त्वरित विकास की राह पकड़ रहा है। आशा है वह दिन दूर नहीं
जब हमारा राज्य देश के अग्रणी राज्यों में गिना जाएगा। सभी सुखी होंगे, समृद्ध होंगे
तथा सर्वत्र शांति, समरसता एवं सुशासन का साम्राज्य होगा।
(ख) समय
का महत्त्व
समय का महत्त्व
: समय की महत्ता अनन्त है। जिसने समय नष्ट किया उसने अपना जीवन व्यर्थ किया। समय ईश्वर
का दिया अमूल्य धन हैं। इसे बढ़ाया या घटाया नहीं जा सकता। संसार में जीवन की सभी वस्तुओं
को प्राप्त किया जा सकता है पर एक बार नष्ट हुआ समय पुनः प्राप्त नहीं किया जा सकता।
इसीलिए इसका महत्त्व सबसे अधिक है। यह एक ऐसा साधन है जिसके सदुपयोग से असंभव को संभव
बनाया जा सकता है। समय किसी के लिए रुकता नहीं। गया वक्त फिर हाथ आता नहीं।
समय के सदुपयोग
के लाभ समय के सदुपयोग से बहुत कुछ संभव है। यही मनुष्य को महान्
बनाता है, मस्तिष्क को स्वस्थ रखता है और शरीर को नीरोग बनाता है। इसके सदुपयोग पर
ही मानव-जीवन की सफलता निर्भर करती है। जो व्यक्ति अपने जीवन का प्रत्येक क्षण सदुपयोग
में लगाता है वह भाग्यवान बनता चला जाता है, वही उन्नति की सीढ़ियों पर निरन्तर चढ़ता
चला जाता है। ऐसा व्यक्ति ही जीवन में सदा प्रसन्न, सन्तुष्ट और सम्पन्न रहता है। विद्यार्थी
के लिए तो समय के सदुपयोग की और भी अधिक आवश्यकता है।
कुछ उदाहरण
: महात्मा गाँधी, रवीन्द्रनाथ ठाकुर, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, महर्षि अरविंद, पंडित जवाहर
लाल नेहरू आदि अनेक महान् विभूतियाँ इस भूतियाँ इस बात का ज्वलन्त प्रमाण हैं कि उन्होंने
समय का सदुपयोग कर अपने जीवन में लक्ष्य-सिद्धि की थी। महर्षि अरविन्द वर्ष-भर साधना
में लगे रहते थे। उनके भक्त दो-चार दिन ही उनके दर्शन कर पाते थे। पंडित नेहरू रात
के बारह बजे तक निरन्तर अपने काम में व्यस्त रहते थे। मेरी कहानी आदि पुस्तकें उन्होंने
जेल में रहते हुए समय का सदुपयोग कर लिखी थीं।
समय पर काम करने
का आनन्द ही कुछ अनोखा है। जीवन का एक-एक पल अमूल्य है। एक मिनट की देरी बहुत हानिकारक
सिद्ध हो सकती है। महाकवि तुलसीदास ने ठीक ही कहा है-
का बरखा जब कृषी
सुखाने।
समय चूकि पुनि
का पछताने ।।
निष्कर्ष : आज
का काम कल पर टालना बुरी आदत है। एक-एक पल अत्यंत मूल्यवान है। सफलता समय की दासी है।
इसलिए समय का लाभ उठाना जरूरी है। सच्चाई तो यह है कि समय के सदुपयोग में जो व्यक्ति
जितना अधिक कुशल होता है, वह उतना ही अधिक उन्नत हो जाता है।
(ग) कम्प्यूटर
: विज्ञान का अद्भुत वरदान / कम्प्यूटर : आज की जरूरत
भूमिका : कम्प्यूटर
को विज्ञान का आधुनिकतम उपकरण कहा जा सकता है। यह सामान्य यंत्र नहीं, यह जादुई यंत्र
है। अलादीन का चिराग है। इससे आप जो चाहे करा लें। बस निर्देश की आवश्यकता है। इसने
तो वास्तव में हमारे जीवन को बिल्कुल बदलकर रख दिया है।
आधुनिक उपकरण
: आधुनिक युग के उपकरण के रूप में कम्प्यूटर एक बहुत ही उल्लेखनीय वरदान सिद्ध हो रहा
है। इसके लाभ अनन्त हैं। खोज के कार्य में इसने क्रान्ति ला दी है। वास्तव में आज कोई
भी क्षेत्र ऐसा नहीं जो इससे अछूता रहा हो। सेना के उपकरण, उपग्रह प्रणाली, प्रक्षेपण
यान राडार-सभी में इसका उपयोग किया जाने लगा है।
निर्दोष गणक
: कम्प्यूटर गणित और गणना पर आधारित है। इसकी गणना नितान्त निर्दोष होती है। इसका गणना
तंत्र बहुत तीव्र होता है। पलक झपकते ही हजारों गणुनाएँ संपन्न हो जाती हैं। कम्प्यूटर
के प्रयोग से हमारे जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन आ गया है। आज प्रायः सभी क्षेत्रों
बैंक, रेलवे, चिकित्सा, प्रकाशन में इसका निःसंकोच प्रयोग हो रहा है। इसने सभी कार्य
सरल कर दिया है।
कम्प्यूटर आज
की जरूरत बन गया है। समाचार पत्र, पत्रिका एवं पुस्तक प्रकाशन में तीव्रता, कलात्मकता
एवं विविधता को लाने का श्रेय कम्प्यूटर को ही है। संचार व्यवस्था में क्रांतिकारी
परिवर्तन का श्रेय भी कम्प्यूटर को ही जाता है। कम्प्यूटर ने स्वास्थ्य के क्षेत्र
में भी अपनी निर्विवाद उपयोगिता सिद्ध कर दी है। इसकी सहायता से गंभीरतम रोगों की जाँच
का कार्य सरल हो गया है।
दुष्परिमाण
: यह भी एक कटु सत्य है कि आज हम कम्प्यूटर पर आवश्यकता से अधिक निर्भर हो गये हैं।
इसके कारण कई क्षेत्रों में मानवीय पहलुओं की अनदेखी होती है। लेकिन कम्प्यूटर से होने
वाली सुविधाओं को देखते हुए इन दुष्प्रभावों को दूर करने के उपाय किये जा सकते हैं।
उपसंहार : सच्चाई
यह है कि आज जीवन का कोई भी क्षेत्र कम्प्यूटर से अछूता नहीं रहा। इसने मनोरंजन का
क्षेत्र हो या कृषि या कार्यालय हो या घर-सभी क्षेत्रों में अपना प्रभाव जमा दिया है।
कम्प्यूटर ने अपनी उपयोगिता को निर्विवाद सिद्ध कर दिया है।
प्रश्न 51. समय के सदुपयोग और परिश्श्रम के महत्व को बताते हुए अपने छोटे भाई
को एक पत्र लिखिए।
अथवा, छात्रावास में रहने वाले अपने भाई को समय का सदुपयोग करने की सलाह देते
हुए पत्र लिखिए।
उत्तर :
प्रिय रमेश,
देवघर
शुभाशीष !
11 फरवरी,
2026
कल ही तुम्हारा
उदय मुझसे मिला था। उसकी बातों से मुझे यह आभास हुआ कि इन दिनों तुम समय का पूर्ण उपयोग
नहीं कर रहे हो।
बहन, अभी तुम्हारा
एक-एक मिनट अत्यंत कीमती है। अच्छे परीक्षाफल के द्वारा ही तुम अपने भविष्य की ठोस
आधारशिला रख सकते हो। याद रखो, जो व्यक्ति अपने जीवन के प्रत्येक क्षण का सदुपयोग करता
है वही सफल और भाग्यवान बनता चला जाता है। वही उन्नति की सीढ़ियों पर निरन्तर चढ़ता
चला जाता है। बीता हुआ समय कभी लौट कर नहीं आता। विद्यार्थी के लिए तो समय के सदुपयोग
और सही दिशा में कड़ी मेहनत की और भी अधिक आवश्यकता है।
आशा है इन बातों
को ध्यान में रखोगे। स्वर्णिम भविष्य तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा है।
शुभकामनाओं के
साथ -
तुम्हारा,
संदीप
अथवा,
प्रश्न : अपने विद्यालय में पीने के पानी की समुचित व्यवस्था हेतु प्रधानाचार्य
को प्रार्थना-पत्र लिखें।
उत्तर :
सेवा में,
प्रधानाध्यापक,
आदर्श
विद्यालय, राँची
विषय : विद्यालय
में पीने के पानी की समुचित व्यवस्था हेतु ।
महोदय,
सविनय निवेदन
है कि हमारे विद्यालय में पीने के पानी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण छात्रों
को काठनाई का सामना करना पड़ता है। भोजनावकाश में टिफिन खाने के बाद सामान्य नल के
पानी का सेवन करने से छात्रों को अनेक प्रकार की बीमारियाँ होती हैं। इससे उनके पठन-पाठन
पर कुप्रभाव पड़ता है। गर्मियों में तो स्थिति और भी बदतर हो जाती है।
अतः श्रीमान्
से प्रार्थना है विद्यालय में पीने के शुद्ध जल की व्यवस्था करने की कृपा करें। आपकी
इस कृपा के लिए हम सभी छात्र सदा कृतज्ञ रहेंगे।
दिनांक :
2.2.2026
आपका आज्ञाकारी
छात्र
सुमित किशोर
कक्षा-दशम 'ब', क्रमांक - 45
प्रश्न 52. छात्रों में शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से लगभग
50 शब्दों में एक विज्ञापन तैयार करें।
उत्तर :
पढ़े चलो, बढ़े चलो.
सबका है ये अधिकार. पूरी शिक्षा पूरा प्यार
अपने बच्चे-बच्चियों
को स्कूल भेजिए
शिक्षा अच्छा नागरिक बनाती है और अच्छे नागरिकों
से बनता है उत्तम देश.
शिक्षा ही विकास
की नींव है. पढ़िए और पढ़ाइए.
सर्व-शिक्षा अभियान के अन्तर्गत जनहित में
जारी.
अथवा, किसी दर्दनाशक तेल की बिक्री हेतु एक आकर्षक विज्ञापन तैयार कीजिए।
उत्तर :
अमृता तेल लगाएँ. दर्द से छुटकारा पायें
अमृता तेल
हर्बल दर्दनाशक तेल
·
सर-दर्द हो या बदन दर्द. तुरंत राहत पहुँचाये
·
27 परखी हुई जड़ी-बूटियों से बना
·
त्वचा को फायदा पहुँचाता है
·
कोई साइड-इफेक्ट नहीं
अपने नजदीक की दुकान से ले कर आजमाएँ
Question Solution
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