Class 10 हिन्दी 'ए' Set-2
Sumudran Model Sample Question Papers with Answers
JCERT द्वारा जारी
सामान्य निर्देश :
1. परीक्षार्थी यथासंभव अपने शब्दों में ही उत्तर दें।
2. इस प्रश्न-पत्र में चार खण्ड क, ख, ग एवं घ हैं। कुल प्रश्नों
की संख्या 52 है।
3. खण्ड 'क' में कुल 30 बहु-विकल्पीय प्रश्न हैं। प्रत्येक
प्रश्न के चार विकल्प दिए गए हैं। इनमें से एक सही विकल्प का चयन कीजिये। प्रत्येक
प्रश्न का मान 1 अंक निर्धारित है।
4. खण्ड 'ख' में प्रश्न संख्या 31 से 38 तक अति लघु उत्तरीय
प्रश्न हैं। इनमें से किन्हीं 6 प्रश्नों का उत्तर दीजिए। प्रत्येक प्रश्न का मान
2 अंक निर्धारित है।
5. खण्ड 'ग' में प्रश्न संख्या 39 से 46 तक लघु उत्तरीय प्रश्न
हैं। इनमें से किन्हीं 6 प्रश्नों का उत्तर दीजिए। प्रत्येक प्रश्न का मान 3 अंक निर्धारित
है।
6. खण्ड 'घ' में प्रश्न संख्या 47 से 52 दीर्घर्ष उत्तरीय
प्रश्न हैं। इनमें से किन्हीं 4 प्रश्नों का उत्तर दीजिए। प्रत्येक प्रश्न का मान
5 अंक निर्धारित है।
(खण्ड- क) अपठित बोध
निम्नलिखित
गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न संख्या 1-4 तक के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए।
गद्यांश
: हम जिस तरह भोजन करते हैं, गाछ-बिरछ भी उसी तरह भोजन करते हैं। हमारे दाँत हैं, कठोर
चीज खा सकते हैं। नन्हें बच्चों के दाँत नहीं होते, वे केवल दूध पी सकते हैं। गाछ-बिरछ
के भी दाँत नहीं होते, इसलिए वे केवल तरल द्रव्य या वायु से भोजन ग्रहण करते हैं। गाछ-बिरछ
जड़ के द्वारा माटी से रसपान करते हैं। चीनी में पानी डालने पर चीनी गल जाती है। माटी
में पानी डालने पर उसके भीतर बहुत-से द्रव्य गल जाते हैं। गाछ-बिरछ वे ही तमाम द्रव्य
सोखते हैं। जड़ों को पानी न मिलने पर पेड़ का भोजन बंद हो जाता है, पेड़ मर जाता है।
1. 'गाछ-बिरछ' का क्या अर्थ होता है?
(1)
घास-पातं
(2)
फल-फूल
(3) पेड़-पौधे
(4)
मिट्टी-पानी।
2. 'गाछ-बिरछ' के क्या नहीं होते?
(1)
पत्ते
(2) दाँत
(3)
फूल
(4)
फल।
3. 'गाछ-बिरछ' किसके द्वारा माटी से रसपान करते हैं?
(1) जड़ के द्वारा
(2)
तना के द्वारा
(3)
टहनी के द्वारा
(4)
पत्तों के द्वारा।
4. पेड़ कब मर जाता है?
(1)
खाद न मिलने पर
(2) पानी न मिलने पर
(3)
मिट्टी न मिलने प
(4)
दवा न मिलने पर।
निम्नलिखित
काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न संख्या 5-8 तक के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए।
रणभेरी
सुन, कह विदा-विदा
जब
सैनिक पुलक रहे होंगे।
हाथों
में कुमकुम थाल लिए
कुछ
जल कण ढुलक रहे होंगे।
कर्तव्य-प्रेम
उलझन में,
पथ भूल न जाना
पथिक कहीं।।
वेदी पर बैठा
महाकाल,
जब नर बलि चढ़ा
रहा होगा।
बलिदान अपने
ही कर से,
निज मस्तक बढ़ा
रहा होगा।
उस बलिदान-प्रतिष्ठा
में,
पथ भूल न जाना
पथिक कहीं।।
5. इस कविता कौन-सा भाव प्रस्तुत कर रही है?
(1) देशभक्ति
(2) मातृभक्ति
(3) पितृभक्ति
(4) गुरुभक्ति
6. 'पथ भूल न जाना पथिक कहीं' में पथिक कौन है?
(1) यात्री
(2) अतिथि
(3) सैनिक
(4) प्रार्थी
7. 'कुछ जल कण ढुलक रहे होंगे' किसके लिए कहा गया है?
(1) माँ
(2) बहन
(3) पत्नी
(4) इनमें से
सभी
8. कौन-सा कथन असत्य है?
(1) सैनिक मातृभूमि
की रक्षा हेतु जा रहा है।
(2) सैनिक बलिदान
हेतु स्वयं तत्पर है।
(3) सैनिक स्वतंत्रता
की लड़ाई लड़ने जा रहा है
(4) सैनिक निज स्वार्थ के लिए असमंजस में है।
निम्नलिखित प्रश्नों
के सही विकल्प का चयन कीजिए।
9. 'चिड़िया आसमान में उड़ती है।' इस वाक्य में कौन-सी क्रिया है?
(1) सकर्मक क्रिया
(2) अकर्मक क्रिया
(3) प्रेरणार्थक
(4) कोई नहीं
10. कौन-सा वाक्य अकर्मक क्रिया का उदाहरण है?
(1) सीता पत्र
लिखती है
(2) मयूर नाचता है
(3) रीमा सिनेमा
देखती है
(4) श्याम ने
गाना गाया
11. 'शिक्षक चाहते हैं कि उनके विद्यार्थी सदा सफल होवें?' यह कौन वाक्य है?
(1) सरल
(2) संयुक्त
(3) उप
(4) मिश्र।
12. 'आप चाय पीयेंगे या शरबत पीयेंगे।' यह कौन वाक्य है?
(1) संयुक्त
(2) सरल
(3) मिश्र
(4) उप।
13. रात हो गयी...तारे नहीं निकले। (सही अव्यय पद को चुनें।)
(1) तब
(2) ताकि
(3) लेकिन
(4) इसलिए
14. 'लाल' का एक अर्थ होता है एक 'रंग' और दूसरा -
(1) लोहा
(2) पुत्र
(3) वंश
(4) पत्थर
15. राम से पढ़ा नहीं जाता। (वाच्य का प्रकार बताएँ।)
(1) कर्तृवाच्य
(2) कर्मवाच्य
(3) भाववाच्य
(4) इनमें से
कोई नहीं
16. 'अठन्नी' कौन-सा समास है?
(1) द्वंद्व
(2) द्विगु
(3) अव्ययीभाव
(4) तत्पुरुष
निम्नलिखित गद्यांश
को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न संख्या 17 एवं 18 तक के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए।
पानवाले के खुद
के मुँह में पान दूँसा हुआ था। एक काला, मोटा और खुशमिजाज़ आदमी था। हालदार साहब का
प्रश्न सुनकर वह आँखों ही आँखों में हँसा।
17. किसके मुँह में पान दूँसा हुआ था?
(1)
हालदार साहब
(2) ड्राइवर
(3)
पानवाला
(4)
कैप्टन
18. पानवाला कैसा आदमी था?
(1) काला
(2) मोटा
(3)
खुशमिजाज़
(4) इनमें से सभी
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न संख्या 19 एवं 20 तक के लिए
सही विकल्प का चयन कीजिए।
हरि है
राजनीति पढ़ि आए।
समुझी बात
कहत मधुकर के, समाचार सब पाए।
19. प्रस्तुत पद में कौन राजनीति पढ़ आए हैं?
(1) उद्धव
(2) श्रीकृष्ण
(3)
गोपियाँ
(4) प्रजा
20. 'मधुकर' का शाब्दिक अर्थ होता है
(1) मक्खी
(2) मधुमक्खी
(3) मधु
(4) भौंरा
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प का चयन कीजिए :
21. 'कैप्टन' कौन था?
(1) अवकाश
प्राप्त सैनिक
(2) आजाद
हिन्द फौज का सिपाही
(3) चश्मा बेचने वाला (फेरीवाला)
(4)
नगरपालिका का सदस्य
22. बालगोबिन भगत की टोपी कैसी थी?
(1)
सूरदास जैसी
(2) कबीरपंथी जैसी
(3)
बच्चों की टोपी जैसी
(4) गाँधी
जी की टोपी जैसी
23. लेखक के अनुसार खीरा किस वर्ग का प्रतीक है?
(1) मामूली लोगों के वर्ग का
(2)
सामंती वर्ग का
(3) मध्यम
वर्ग का
(4) इनमें
से कोई नहीं
24. लेखिका और उनके पिता के बीच टकराव का क्या कारण था?
(1)
राजनीतिक कारण
(2)
आर्थिक कारण
(3) विचारों की भिन्नता
(4) उम्र
की भिन्नता
25. कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम को गोपियों ने किसके माध्यम से व्यक्त किया?
(1) तेल
की गगरी
(2) कमल
का पत्ता
(3) हारिल की लकड़ी
(4) प्रेम
की नदी
26. 'तप्त धरा' का सांकेतिक अर्थ क्या है?
(1) गर्म
धरती
(2) सूखी
धरती
(3) बंजर
घरती
(4) दुःखों से पीड़ित घरती
27. कवि ने अपनी आत्मकथा को कैसी बताया है?
(1) महान
(2)
प्रभावशाली
(3) भोली
(4) चंचल
28. किसकी मुस्कान इतनी मोहक है कि मुर्दे में भी जान डाल सकती है?
(1) माँ
की
(2)
पिताजी की
(3) नन्हे शिशु की
(4)
दादाजी की
29. भोलानाथ का वास्तविक नाम क्या था?
(1) तारकेश्वरनाथ
(2)
तारकनाथ
(3)
तारानाथ
(4)
बैजनाथ
30. गंगटोक में रंगीन पताकाएँ किस अवसर पर फहराई जाती हैं?
(1) शांति
के अवसर पर
(2) शोक
के अवसर पर
(3) युद्ध
के अवसर पर
(4) किसी नए कार्य की शुरुआत में
खण्ड B
प्रश्न संख्या 31 से 38 तक अति लघु उत्तरीय प्रश्न है। प्रत्येक प्रश्न 2
अंकों का है।
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं 6 प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
एक समय था
जब पानी सब जगह मिल जाता था। इसीलिए इसे कोई महत्त्व नहीं दिया जाता था। लेकिन
तेजी से बढती हई जनसंख्या और जीवन शैली में आये परिवर्तन के कारण जल अब दुर्लभ हो
गया है। इसी दुर्लभता के कारण जल का आर्थिक मूल्य बहुत बढ़ गया है। अब तक जल की
प्रमुख माँग फसलों की सिंचाई के लिए होती थी। लेकिन अब उद्योगों और घरेलू उपयोग के
लिए भी जल की बहुत आवश्यकता है। इसीलिए जल अब एक बहुमूल्य संसाधन बन गया है। नगरीय
और ग्रामीण क्षेत्रों में पीने के पानी की माँग बिल्कुल अलग-अलग तरह की होती है।
आइए, सबसे पहले नगरीय क्षेत्रों में जल की समस्या का अध्ययन करें।
नगरीय
क्षेत्रों में सामान्यतः जल का एक ही स्त्रोत होता है और उसी से सभी की आवश्यकताएँ
पूरी होती हैं। नगरीय क्षेत्रों में जल, झीलों या कृत्रिम जलाशयों या नदियों के तल
में गहरे खोदे गये कुओं या नलकूपों से लाकर इकट्ठा किया जाता है। कभी-कभी जल के
लिए इन सभी स्त्रोतों का उपयोग किया जाता है। इस स्त्रोतों को लेकर पहले उसमें
क्लोरीन जैसे रसायन मिलाकर उसे स्वच्छ किया जाता है। इसके बाद वह पीने के लिए
सुरक्षित बन जाता है। ऐसा सुरक्षित जल नगर की सम्पूर्ण जनसंख्या को अनेक बीमारियों
से बचाता है।
31. पहले सब जगह सुलभ जल अब दुर्लभ क्यों हो गया है?
उत्तर :
तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या और जीवन शैली में आये परिवर्तन के कारण जल की माँग बढ़
गयी है।
32. जल अब एक बहुमूल्य संसाधन क्यों बन गया है?
उत्तर :
सिंचाई के अतिरिक्त, घरेलू उपयोग एवं उद्योगों के लिए जल अपरिहार्य है। इस कारण से जल एक बहुमूल्य संसाधन बन गया है।
33. एक समय पहले पानी को उतना महत्व क्यों नहीं दिया जाता था?
उत्तर :
एक समय पहले पानी सभी जगहों में सुलभ था और उसका उपयोग सीमित था, इसीलिए इसे कोई महत्त्व नहीं दिया जाता था।
34. नगरों में पेयजल की व्यवस्था किस प्रकार की जाती है?
उत्तर :
नगरों में झीलों, कृत्रिम जलाशयों, नदियों के तल में गहरे खोदे गये कुओं या
नलकूपों से लाकर जल संयंत्रों से इकट्ठा किया जाता है। तत्पश्चात् उसमें क्लोरीन
जैसे रासायनिक पदार्थों को डालकर उसे पीने योग्य बनाया जाता है।
35. पहले जल की प्रमुख माँग किसके लिए होती थी?
उत्तर :
पहले जल की प्रमुख माँग फसलों की सिंचाई के लिए होती थी।
36. नगरों में पीने के लिए सुरक्षित जल की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर :
क्योंकि स्वच्छ सुरक्षित जल नगर की सम्पूर्ण जनसंख्या को अनेक बीमारियों से बचाता है।
37. इस गद्यांश का एक उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
उत्तर :
जल-दुर्लभता
38. 'दुर्लभ' शब्द का संधि-विच्छेद क्या होगा?
उत्तर :
दुः + लभ
खण्ड - C
प्रश्न संख्या 39 से 46 तक लघु उत्तरीय प्रश्न है। प्रत्येक प्रश्न 3 अंकों का
है। इनमें से किन्हीं 6 प्रश्नों के उत्तर अधिकतम 150 शब्दों में दीजिए।
प्रश्न 39. "वो लँगड़ा क्या जायेगा फौज में पागल है, पागल।" कैप्टन
के बारे में पान वाले की टिप्पणी पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करें।
उत्तर :
पान वाला पूर्णतः पनेरी है। उसे देशभक्ति से कोई संबंध नहीं। उसका संबंध केवल अपनी
दुकानदारी से था। इसी से वह कैप्टन को पागल मानता है। उसपर व्यंग्य करता है कि वह
लँगड़ा फौज में क्या जायेगा। दूसरी ओर वह गरीब चश्मे वाला चाहता था कि नेताजी की
मूर्ति किसी प्रकार अधूरी नहीं रहे। कैप्टन पर पान वाले की टिप्पणी मूर्खतापूर्ण
है।
प्रश्न 40. लेखिका के पिता ने रसोई को 'भटियार खाना' कहकर क्यों सम्बोधित किया है?
उत्तर :
भटियार खाने का अर्थ होता है जहाँ हमेशा भट्टी जलती रहती है अर्थात् चूल्हा जलते
रहता है। इसके अतिरिक्त भटियार खाने का अर्थ होता है, जहाँ असभ्य लोगों का जमघट
रहता है। इस पाठ में भटियार खाना 'रसोईघर' के लिए प्रयुक्त हुआ है। लेखिका के
पिताजी अपने बच्चों को घर-गृहस्थी या चूल्हे चौके तक सीमित नहीं रखना चाहते थे।
उनका मानना था कि इसमें बच्चों का समय व्यर्थ होता है और उनकी प्रतिभा और क्षमता
नष्ट होती है।
प्रश्न 41. काशी में हो रहे कौन-से परिवर्तन बिस्मिल्ला खाँ को व्यथित करते
थे?
उत्तर :
काशी अब पुरानी काशी नहीं रही। इस युग में काशी की प्राचीन परम्पराएँ लुप्त होती
जा रही हैं। खान-पान की पुरानी विशेषताएँ भी नष्ट हो रही हैं। मलाई बरफ वाले गायब
हो गये हैं। कुलसुम की देशी घी की कचौड़ी का पहले जैसा मेल-जोल नहीं रहा। ये सारे
परिवर्तन बिस्मिल्ला खाँ को आज भी व्यथित करते हैं।
अथवा, वास्तविक अर्थों में 'संस्कृत व्यक्ति' किसे कहा जा सकता है?
उत्तर :
वास्तविक अर्थ में संस्कृत व्यक्ति उस व्यक्ति को कहा जाता है जो मानव कल्याण की
चीजों का आविष्कार करता है। जैसे न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत को खोजा। वह
वास्तविक अर्थ में संस्कृत व्यक्ति था।
प्रश्न 42. उद्धव के व्यवहार की तुलना किस-किस से की गई है?
उत्तर :
उद्धव के व्यवहार की तुलना पानी में रहने वाले कमल के पत्ते तथा जल के घड़े में
स्थित तेल की बूँदों से की गयी है।
प्रश्न 43. 'फसल' कविता में फसल उपजाने के लिए किन-किन आवश्यक तत्वों की बात
कही गई है?
उत्तर :
फसल उपजाने के लिए निम्नलिखित आवश्यक तत्त्व हैं -
1. पानी,
2. सूर्य
की धूप,
3. मिट्टी
और
4. हवा।
प्रश्न 44. सफलता के चरम शिखर पर पहुँचने के दौरान यदि व्यक्ति लड़खड़ाते हैं
तब उसके सहयोगी किस प्रकार सँभालते हैं?
उत्तर :
जब कोई व्यक्ति सफलता के चरम शिखर पर पहुँचकर अचानक लड़खड़ाने लगता है तो उसके
सहयोगी ही उसे बल, साहस और उत्साह देकर सँभालते हैं। वे अपनी सारी शक्ति लगाकर उसे
सँभालते हैं। उनके साथी उसकी कमी को पूरा करने का भरसक प्रयत्न करते हैं।
प्रश्न 45. 'कटाओ पर किसी प्रकार की दुकान का न होना उसके लिए वरदान है।' इस
कथन के पक्ष में अपना तर्क प्रस्तुत करें।
उत्तर :
कटाओ सिक्किम की एक खूबसूरत अनजान-सी जगह है। वहाँ का प्राकृतिक सौन्दर्य अनुपम
है। वहाँ पर लेखिका को बर्फ पर चलने की इच्छा हुई। लेकिन वहाँ कोई दुकान नहीं थी,
जहाँ बर्फ पर चलने वाले जूते उपलब्ध हो सकें। खाने-पीने की सामग्रियों की भी कोई
दुकानें नहीं थीं। दुकान
न होना वहाँ के लिए वरदान है। दुकानें रहने पर वहाँ
गंदगी का अम्बार रहता और वहाँ की प्राकृतिक सुषमा नष्ट हो जाती।
प्रश्न 46. हरोशिमा की घटना विज्ञान का भयानकतम दुरुपयोग है। आपकी दृष्टि में
विज्ञान का दुरुपयोग कहाँ-कहाँ और किस तरह हो रहा है?
उत्तर :
आज विज्ञान अपना दुरुपयोग कर रहा है। वह मानव संहारक वस्तुओं के निर्माण में
ज्यादा व्यस्त है। नेपाम बम, एटम बम, हाइड्रोजन बम, रॉकेट, मिसाइल्स आदि अनेक
संहारक बम बन रहे हैं जिनसे क्षण भर में संसार को नष्ट किया जा सकता है। आज ऐसी
पनडुब्बियाँ बन रही हैं जिनकी चोट से बड़े-बड़े जहाज क्षण भर में नष्ट हो सकते
हैं। इसके साथ ही साथ विज्ञान आदमी को निकम्मा, आलसी और कमजोर बना रहा है। विज्ञान
के नये-नये प्रयोग मनुष्य में अनेक कुप्रवृत्तियों को जन्म दे रहे हैं।
खण्ड - D
प्रश्न संख्या 47 से 52 तक दीर्घ उत्तरीय प्रश्न है। प्रत्येक प्रश्न 5 अंकों
का है। इनमें से किन्हीं 4 प्रश्नों के उत्तर अधिकतम 250 शब्दों में दीजिए।
प्रश्न 47. बालगोबिन भगत की दिनचर्या लोगों के अचरज का कारण क्यों थी?
उत्तर :
बालगोबिन भगत की दिनचर्या लोगों के अचरज का कारण थी। भगत जी अपने स्वभाव से
बिल्कुल ही खरे और सच्चे थे। वे सांसारिक माया-मोह से दूर कबीर के भजन में लीन
रहते थे। कार्तिक महीना शुरू होते ही बालगोबिन भगत की प्रभातियाँ शुरू हो जाती
थीं। प्रातःकाल अँधेरे में ही स्नान के लिए निकलना और उसके बाद पोखरे पर बैठकर
भक्ति गीत में लीन हो जाना उनका दैनिक नियम था। वे किसी दूसरे की चीज छूते तक नहीं
थे। यहाँ तक कि वे किसी दूसरे के खेत में शौच तक करने नहीं जाते थे। लोग उनकी इस
दिनचर्या को देखकर अचरज व्यक्त करते थे।
अथवा, बालगोबिन भगत की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालें।
अथवा, खेतीबारी से जुड़े गृहस्थ बालगोबिन भगत अपनी किन चारित्रिक विशेषताओं के
कारण साधु कहलाते थे?
अथवा, बालगोबिन भगत का रेखाचित्र प्रस्तुत करें।
उत्तर :
बालगोबिन भगत खेती-बारी से जुड़े होकर भी साधु-सा जीवन व्यतीत करते थे। उनकी अपनी
गृहस्थी थी। एक बेटा और पतोहू के साथ उनका भरा-पूरा परिवार था। फिर भी, उनका सारा
जीवन अपने 'साहब' को समर्पित था। वे अपनी कमाई पर पहले 'साहब' का हक मानते थे।
प्रसाद के. रूप में उन्हें जो कुछ भी प्राप्त होता था, उसी से वे अपना गुजारा करते
थे। वे पूर्णतः कबीरपंथी साघु थे, अर्थात् अपना कर्म करते हुए भगवान का भजन। अतः
वे मृत्यु को भी परमात्मा में विलीन हो जाना मानते थे। वे अपने पुत्र की मृत्यु पर
भी रोये नहीं बल्कि भगवान का भजन गा रहे थे।
झूठ
बोलना, झगड़ा करना, किसी दूसरे की वस्तु लेना आदि उनके लिए पाप-कर्म था। उन्होंने
जीवन भर अपना शेष समय खंजड़ी बजाने और प्रभु का गीत गाने में व्यतीत किया।
प्रश्न 48. कवि ने बच्चे की मुसकान के सौंदर्य को किन-किन बिंबों के माध्यम से
व्यक्त किया है?
उत्तर :
कवि ने बच्चे की मुसकान के सौंदर्य को निम्नलिखित बिंबों के माध्यम से व्यक्त किया
है
(i) बच्चे
की मुसकान से मृतक में भी जान आ जाती है।
(ii) यों
लगता है मानो झोपड़ी में कमल के फूल खिल उठे हों।
(iii) यों
लगता है मानो चट्टानें पिघलकर जलधारा बन गई हों।
(iv) यों
लगता है मानो बबूल से शेफालिका के फूल झरने लगें हों।
प्रश्न 49. 'माता का अँचल' पाठ में आये ऐसे प्रसंगों का वर्णन कीजिए जो आपके
दिल को छू गये हों?
उत्तर :
इस पाठ का सबसे रोमांचक प्रश्न है, चूहा पकड़ते समय बिल से साँप का निकलना।
सभी
बेतहाशा गिरते-पड़ते शरीर को लहूलुहान करते जान लेकर भागते हैं। भोलानाथ अपनी माँ
की गोद में शरण लेता है। यह प्रसंग किसी भी पाठक के हृदय को छू लेता है।
इस पाठ
में बच्चों के विभिन्न प्रकार के खेलों और हरकतों का वर्णन है। बच्चों के खेलों
में कभी-कभी पिताजी का भागीदार बनना किसी के भी मन को छू लेता है।
बच्चों के
साथ मित्रतापूर्वक व्यवहार करना, बच्चों के भोज, शादी और खेती में साथ होना आदि
कुछ ऐसे प्रसंग आये हैं जिनमें पिताजी अपने बच्चों के साथ बच्चे बन जाते हैं। यह
सब पाठक के हृदय में गुदगुदी पैदा कर देते हैं।
प्रश्न 50. दिये गये संकेत बिन्दुओं के आधार पर निम्नलिखित में से किसी एक
विषय पर निबंध लिखें।
(क) भगवान बिरसा मुण्डा
संकेत
बिन्दु : परिचय, बचपन एवं शिक्षा, कार्य एवं उपदेश, अँगरेजों का विरोध, उपसंहार
(ख ) परोपकार (अथवा, 'परहित सरिस धर्म नहीं भाई)
संकेत
बिन्दु : परोपकार का अर्थ, परोपकार का महत्त्व,परोपकार से प्राप्त अलौकिक सुख
(ग) वन संपदा और उसका संरक्षण / वृक्षारोपण का महत्त्व
अथवा, वन संरक्षण अथवा, पर्यावरण और वृक्षारोपण अथवा, वनों से लाभ
संकेत
बिन्दु : भूमिका, वनों का योगदान, वृक्ष प्रकृति का सुन्दर उपहार,
वृक्षारोपण
का महत्व, वृक्ष पूजनीय, मानव मूल्यों का प्रतीक, उपसंहार
उत्तर :
(क)
भगवान बिरसा मुण्डा
परिचय :
भगवान बिरसा मुण्डा का जन्म खूँटी के अड़की प्रखंड स्थित उलीहातु में 15 नवम्बर,
1875 ई. को हुआ। इनकी माता का नाम करमी और पिता का नाम सुगना मुण्डा था। बिरसा
मुण्डा का जन्म एक अत्यंत निर्धन परिवार में हुआ था। सलगा स्कूल से इन्होंने
शिक्षा शुरू की। प्राथमिक शिक्षा के बाद अपर प्राइमरी की शिक्षा के लिए बुर्जु
मिशन स्कूल में अपना दाखिला लिया। भूमि आन्दोलन के समय इनका मिशनरी से मतभेद हो
गया और उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया। फिर चाईबासा में रहकर इन्होंने उच्च
प्राथमिक स्तर की शिक्षा प्राप्त की।
कार्य एवं
उपदेश : बिरसा अपनी आजीविका के लिए गौरबेड़ा के स्वांसी परिवार में नौकरी करने
लगे। इनके सम्पर्क का बिरसा पर अत्यधिक प्रभाव पड़ा। वह जनेऊ, खड़ाऊ और हल्दी के
रंग में रंगी धोती पहनने लगे। वे गाँव के लोगों की सेवा में लग गये। लोगों को
रोगमुक्त करने के लिए प्रार्थना करते और मंत्र जाप करते। माँस खाना छोड़ दिया।
गो-वध रुकवाया। तुलसी की पूजा करते और माथे पर चंदन टीका लगाते। वे एक विशाल आम
वृक्ष के नीचे बैठकर लोगों को दवा देते और उपदेश देते - सिंगबोंगा (ईश्वर) एक है;
बोंगाओं की पूजा के स्थान सिंगबोंगा की पूजा करनी चाहिए: भूत-प्रेत मत मानो; पूजा
में बलि बन्द करी; हिंसा मत करो; माँस-मछली मत खाओ: शराब मत पीयोः सादा रहो; घर-घर
में तुलसी चौरा की पूजा करो; सफेद ध्वज फहराओ; झूठ मत बोलो; चोरी मत करो; एकता
बनाये रखो; हर बृहस्पतिवार को छुट्टी मनाओ; यज्ञोपवीत धारण करो; कुसंग से बचो
इत्यादि। लोग इनके प्रवचन को सुनते और एक साथ भजनं करते। जनता में बिरसा अत्यंत
लोकप्रिय हो गये और दूर-दूर से लोग इनके दर्शन के लिए आने लगे।
अँगरेजों
का विरोध : आरंभ में बिरसा का आन्दोलन सुधारवादी का था, किन्तु बाद में यह अँगरेजों से स्वतंत्रता की लड़ाई के रूप में परिवर्तित हो गया। बिरसा को
गिरफ्तार कर लिया गया। जेल के बाहर बिरसा के अनुयायी इनके विचारों का प्रचार कर
रहे थे। 1897 ई. में ये जेल रिहा हुए। बिरसा स्वयं शान्तिपूर्वक तरीके से क्रान्ति
लाना चाहते थे, किन्तु सिबुआ बुरू की सभा में इनके अनुयायियों ने हिंसा तथा
बलपूर्वक आन्दोलन चलाने की माँग की।
क्रांतिकारी
: विद्रोह शुरू हुआ और अनेक स्थानों पर हलचल मच गयी। कोण्डाहातु में जर्मन मिशन
चर्च जला दिया गया। पुलिस कर्मचारियों को मारा गया और पुलिस स्टेशन को नुकसान
पहुँचाया गया। एटकेडी में बिरसा के प्रमुख शिष्य गया मुण्डा और पुलिस के बीच
मुठभेड़ हुई। अनेक सिपाही मारे गये। गया मुण्डा को गिरफ्तार कर लिया गया। बिरसा
मुण्डा के साथ मुण्डा लोगों ने खूँटी थाने को जला दिया और एक सिपाही की हत्या कर
दी। बिरसा की गिरफ्तारी के लिए पाँच सौ रुपये का ईनाम रखा गया। कुछ लोगों ने इनाम
की लालच में छल किया और एक रात कुछवारा जंगल में सोते हुए इन्हें गिरफ्तार कर लिया
गया।
जेल में
वह सभी का ढाँढ़स बंधाते और मनोबल बढ़ाये रखने की सीख अपने लोगों को देते रहे। जेल
में हैजा होने से 9 जून 1900 ई. को बिरसा की मृत्यु हो गयी। इनका अन्तिम संस्कार
हरमू नदी के किनारे हुआ। गया मुण्डा और उनके पुत्र को फाँसी की सजा मिली।
उपसंहार :
बिरसा का आन्दोलन भारत के जन आन्दोलनों में आदर के साथ याद किया जाता है। हर
झारखण्डी उन्हें भगवान की तरह पूजता है।
(ख)
परोपकार
परोपकार
का अर्थ : परोपकार दो शब्दों 'पर' तथा 'उपकार' के मेल से बना है। अर्थात् किसी भी
तरह दूसरों की भलाई करना परोपकार कहलाता है।
परोपकार
मनुष्यता की पहचान (परोपकार का महत्त्व) : परोपकार ही वह गुण है जो मनुष्य को पशु से भिन्न बनाता है। मैथिलीशरण गुप्त
की पंक्ति 'मनुष्य वही है जो मनुष्य के लिए मरें' परोपकार और मनुष्यता में
अन्योन्याश्रय सम्बन्ध को दर्शाती है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। समाज का हर
व्यक्ति जबतक उपकार की भावना से एक-दूसरे को सम्बल नहीं देगा अच्छे समाज की
स्थापना नहीं हो सकती। कहीं न कहीं हर किसी को स्वार्थ की भावना से उठकर परहित की
भावना से कार्य करना होता है।
परोपकार
से प्राप्त अलौकिक सुख : परोपकार से व्यक्ति को आत्मिक सुख
प्राप्त होता है। किसी सुनसान सड़क पर अगर किसी व्यक्ति के स्कूटर का पेट्रोल खत्म
हो जाय। आप उसे पेट्रोल पंप पहुँचने भर पेट्रोल दे देते हैं। सोचिये, किसी असहाय
व्यक्ति पर जो उपकार आपने किया आपको एक अलौकिक सुख देता है या नहीं! यह एक
ऐसी अनुभूति है जो आपकी आत्मा को तृप्त कर देती है। परोपकार से प्राप्त सुख की
तुलना भौतिक सुखों से नहीं की जा सकती।
परोपकार
के विविध रूप और उदाहरण : निःस्वार्थ भाव से किसी के काम
आना परोपकार है। किसी ने सही कहा है 'नेकी कर दरिया में डाल'। परोपकार कर उसका
दूसरे पर एहसान जताना दम्भहै। परोपकार की भावना अन्दर से आती है। यह एक सच्चे और
अच्छे मनुष्य का नैसर्गिक गुण है। जरूरी नहीं कि परोपकार सिर्फ आर्थिक मदद के रूप
में ही हो। कष्ट के समय अपने पड़ोसी तथा मित्रों के काम आना, किसी बीमार की असहाय
अवस्था में सहायता करना, किसी मित्र को गलत रास्ते में जाने से बचाना, विषाद के
क्षणों में उसे मानसिक सहारा देना सब परोपकार के ही रूप हैं।
परोपकार
में ही जीवन की सार्थकता : गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा है-
'परहित सरिस धर्म नहीं भाई' अर्थात् परोपकार के समान दूसरा कोई धर्म नहीं हैं।
अपने लिए तो सभी जीते हैं। जीवन की कुछ ऊर्जा दूसरों की भलाई में लगाकर ही सही
मायने में हम जीवन को सार्थक बना सकते हैं। महात्मा गाँधी, स्वामी विवेकानन्द, मदर
टेरेसा और ऐसे कितने महापुरुषों ने दूसरों के कल्याण के लिए अपना पूरा जीवन लगा
दिया और मानवता के प्रतीक बन गये। परोपकार में ही जीवन की सार्थकता है। परोपकार ही
मनुष्य की
(ग) वन संपदा और उसका संरक्षण / वृक्षारोपण का महत्त्व वन संरक्षण
मनुष्य
मूलतः प्रकृति का बालक है। उसकी सारी आवश्यकताएँ ही नहीं, जीवन प्रकृति पर निर्भर
है। मनुष्य के पास जो कुछ है, वह प्रकृति का ही दिया हुआ है। वृक्ष प्रकृति द्वारा
धरती को दिया गया सबसे सुन्दर उपहार है। वृक्ष है तो जीवन है। जिन ग्रहों में
वृक्ष नहीं वहाँ जीवन कहाँ है?
वन एवं
वृक्ष हमारे पर्यावरण और पारिस्थितिक तंत्र का एक अनिवार्य एवं महत्त्वपूर्ण अंग
है। वन जीवन का स्रोत है। वन विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों एवं औषधियों के आगार
होते हैं। वन में विविध प्रजातियों के वृक्ष, पौधे, और झाड़ियाँ पाये जाते हैं। वन
अनेक प्रकार के जीव-जन्तु के आश्रय स्थल हैं। वन उनका सबसे निरापद वास-स्थान होता
है। वन के जीव-जन्तु पर्यावरण एवं परिस्थितिकी तंत्र को, स्थिर एवं सुरक्षित रखने
में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वन बाढ़
को रोकने में सहायक होते हैं। कृषि के लिए जल ही मुख्य साधन है। पानी का सबसे बड़ा
स्रोत वर्षा है। जल के अन्य स्रोत, तालाब, कुएँ आदि गौण हैं। वन वर्षा को आकर्षित
करते हैं। मुदाक्षरण को रोकने में भी वन सहायक हैं।
भारतवर्ष
वृक्षों को पहले से महत्त्व देता रहा है। हमारे यहाँ यह कहा गया है कि दस पुत्र एक
वृक्ष के समान होते हैं। इतना ही नहीं पेड़ों को दूध भरी माता के रूप में देखा
गया। गाँवों के अधिकांश नाम वृक्षों पर आधारित होते हैं। आम, पीपल, बेल, नीम, वट,
आँवले का तो धार्मिक महत्त्व है। आज भी मनुष्य वृक्षों को पूजता है।
सीमा से
अधिक प्राकृतिक साधनों के दोहन के कारण भी पर्यावरण में असंतुलन उत्पन्न हुआ है।
वनों की अंधाधुंध कटाई के कारण ऋतु चक्र प्रभावित हुआ है। इसी के चलते बार-बार
अनावृष्टि का सामना करना पड़ रहा है। विनाशकारी बाढ़ों का एक प्रमुख कारण वनों का
उजड़ते जाना है। वनों की कटाई के चलते वन्य प्राणियों का अस्तित्व भी संकट में पड़
गया है। वनों की बर्बादी के कारण कई प्रकार के पक्षियों, पशुओं और वनस्पतियों की
प्रजातियाँ शनैः शनैः लुप्त होती जा रही हैं। इन में से तो कई प्रजातियों का
अस्तित्व तो पूर्णतः विलुप्त हो चुका है। यह कोई शुभ लक्षण नहीं है।
वन
संसाधनों का मनुष्य ने लोभवश सर्वाधिक दोहन किया, किन्तु उसने वृक्षारोपण पर कभी
ध्यान नहीं दिया। यही कारण है कि वन-विनाश के भयानक कुपरिणाम भुगतने के लिए आज का
विश्व-मानव अभिशप्त है। इस अभिशाप से मुक्ति का एकमात्र उपाय वनों का विकास ही है।
वृक्षारोपण
द्वारा घरती को हरा-भरा बना देने में ही विश्व का कल्याण है। इसी कारण अब
गाँव-गाँव तक 'वृक्ष बचाओ, वृक्ष लगाओं' का अभियान तेजी से चल रहा है। ठीक ही कहा
गया है कि 'देश की है यही पुकार, बच्चे दो और वृक्ष हजार' इसी नारा का कार्यान्वयन
विश्व की रक्षा कर पायेगा।
प्रश्न 51. वार्षिक परीक्षा में सफल होने पर अपने मित्र को बधाई-पत्र लिखिये।
अथवा, परीक्षा में प्रथम आने पर अपने मित्र को पत्र लिखकर बधाई दीजिए। अथवा, मेधा
छात्रवृत्ति परीक्षा में सफल होने पर अपने मित्र को बधाई पत्र लिखिए।
उत्तर :
आदर्श
नगर, धनबाद
21 फरवरी,
2026
प्रिय
आलोक
नमस्कार,
तुम्हारा
पत्र मिला। यह जानकर अत्यन्त प्रसन्नता हुई कि तुमने वार्षिक माध्यमिक परीक्षा में
अपने विद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त किया। तुम्हें विद्यालय द्वारा विशेष
पुरस्कार भी प्रदान किया गया। मेरी ओर से तुम्हें हार्दिक बधाई।
मैं आशा
करता हूँ कि तुम भविष्य में भी इसी प्रकार सभी परीक्षाओं एवं प्रतियोगिताओं में
शानदार सफलता प्राप्त करोगे। मित्र, अपनी कड़ी मेहनत से ही तुम अपने माता-पिता के
सपनों को साकार कर सकते हो।
माता-पिता
को चरण स्पर्श तथा रजनी को स्नेह।
तुम्हारा
अभिन्न मित्र
सुरेश
अथवा,
प्रश्न :
चार दिन के अवकाश के लिए प्रधानाचार्य को आवेदन-पत्र लिखिये। अथवा, अपने विद्यालय
के प्रधानाचार्य को चार दिन के अवकाश के लिए प्रार्थना-पत्र लिखिए।
उत्तर :
सेवा में,
प्रधानाचार्य महोदय
राजकीय जनता उच्च विद्यालय, खलारी
मान्यवर,
कल अचानक मेरी माता जी की तबियत काफी बिगड़ गयी थी। पिता जी को उन्हें अस्पताल
में भरती करना पड़ा। मुझे मेरी माता जी के पास रहना आवश्यक है। इसलिए मैं चार
दिनों तक विद्यालय में आने में असमर्थ हूँ।
अतएव आप
से प्रार्थना है कि मुझे आज से चार दिनों का अवकाश देने की कृपा करें।
दिनांक :
5 जनवरी, 2026
आपका
आज्ञाकारी शिष्य
रमेश
उराँव
कक्षा दशम
अथवा, छात्रावास में स्थान के लिए प्रधानाचार्य को आवेदन-पत्र लिखिये।
उत्तर :
सेवा में,
प्रधानाध्यापक, आदर्श विद्यालय, राँची
विषय :
छात्रावास में स्थान के लिए आवेदन।
महोदय,
सविनय
निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय में कक्षा 'दशम-ब' का छात्र हूँ। मुझे छात्रावास
में स्थान की अवश्यकता है। अभी तक मैं यहाँ अपने दूर के रिश्तेदार के यहाँ रह रहा
था। उनका स्थानांतरण पटना हो गया है।
अतः
श्रीमान् से प्रार्थना है कि मेरे लिए छात्रावास में स्थान देने की कृपा की जाय।
आपकी इस कृपा के लिए मैं आपका सदा कृतज्ञ बना रहूँगा।
दिनांक :
11.2.2026
आपका
आज्ञाकारी छात्र
सुबोध
रंजन
कक्षा-दशम
'ब', क्रमांक - 51
प्रश्न 52. सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए लगभग 50 शब्दों में
एक विज्ञापन तैयार कीजिए।
उत्तर :
सावधानी हटी. दुर्घटना घटी.
सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन
करें
अपनी जान के साथ-साथ दूसरों की भी
जान बचाएँ
- दोपहिया वाहन चलाते समय
हेलमेट अवश्य पहनें।
- वाहन चलाते समय मोबाईल फोन का
उपयोग न करें।
- सीट-बेल्ट लगाएँ और ट्रैफिक
नियमों का पालन करें।
- धीरे चलें, सुरक्षित चलें।
जानता है देश का बच्चा-बच्चा
सबसे जरूरी सड़क सुरक्षा।
अथवा, 'सौम्या हर्बल शैम्पू' की बिक्री हेतु एक आकर्षक विज्ञापन लगभग 50
शब्दों में तैयार कीजिए।
उत्तर :
सुन्दर, स्वस्थ और चमकदार बालों के लिए
सौम्या हर्बल शैम्पू
रूसी भगाए. गिरते-झड़ते बालों पर
रोक लगाए.
बालों में रूसी, बालों का झड़ना, असमय सफेद होना आज आम परेशानी है।
आँवला, शिकाकाई, एलोविरा और आयुर्वेदिक औषधियों के अपूर्व संगम से बना सौम्या
शैम्पू इन समस्याओं से निजात दिला कर बालों को स्वस्थ, सुन्दर और सौम्य बनाता है।
अपने नजदीक की दुकान से ले कर आज ही आजमाएँ
Question Solution
Class 10 Hindi -A SET-5 Sumudran Model Paper Solution 2025-26
Class 10 Hindi -A SET-4 Sumudran Model Paper Solution 2025-26
Class 10 Hindi -A SET-3 Sumudran Model Paper Solution 2025-26
Class 10 Hindi -A SET-2 Sumudran Model Paper Solution 2025-26
Class 10 Hindi -A SET-1 Sumudran Model Paper Solution 2025-26
Class 10 Hindi -A JAC Model Paper Solution 2025-26
Class 10 गणित (Mathematics) Jac Model Paper Solution 2025-26
Class 10 Science (विज्ञान) SET-5 Sumudran Model Paper Solution 2025-26
Class 10 Science (विज्ञान) SET-4 Sumudran Model Paper Solution 2025-26
Class 10 Science (विज्ञान) SET-3 Sumudran Model Paper Solution 2025-26
Class 10 Science (विज्ञान) SET-2 Sumudran Model Paper Solution 2025-26
Class 10 Science (विज्ञान) SET-1 Sumudran Model Paper Solution 2025-26
Class 10 Science Jac Model Paper Solution 2025-26
Class 10 Social Science All Subjects Model Question Answer 2025-26
Class 10 Social Science SET-5 Sumudran Model Paper Solution 2025-26
Class 10 Social Science SET-4 Sumudran Model Paper Solution 2025-26
Class 10 Social Science SET-3 Sumudran Model Paper Solution 2025-26
Class 10 Social Science SET-2 Sumudran Model Paper Solution 2025-26
Class 10 Social Science SET-1 Sumudran Model Paper Solution 2025-26
Class 10 Social Science Jac Model Paper Solution 2025-26
Class 10 Hindi-A Jac Model Paper Solution 2025-26
Class 10 Economics All Chapter MVVI Objective & Subjective Questions Answer
Class 10 Civics (नागरिकशास्त्र) All Chapter MVVI Objective & Subjective Questions Answer
Class 10 History (इतिहास) All Chapter MVVI Objective & Subjective Questions Answer
Class 10 Geography (भूगोल) All Chapter MVVI Objective & Subjective Questions Answer
Class 10 Science Jac Model Paper 2024-25
Class 10 Social Science Jac Model Paper 2024-25
Class 10 Hindi (A) Jac Model Paper Solution 2024-25
10th Hindi Jac Model Question Solution,2022-23
