Class 10 Hindi -A SET-4 Sumudran Model Paper Solution 2025-26

Class 10 Hindi -A SET-4 Sumudran Model Paper Solution 2025-26

Class 10 Hindi -A SET-4 Sumudran Model Paper Solution 2025-26

Class 10 हिन्दी 'ए' Set-4

Sumudran Model Sample Question Papers with Answers

JCERT द्वारा जारी

सामान्य निर्देश :

1. परीक्षार्थी यथासंभव अपने शब्दों में ही उत्तर दें।

2. इस प्रश्न-पत्र में चार खण्ड क, ख, ग एवं घ हैं। कुल प्रश्नों की संख्या 52 है।

3. खण्ड 'क' में कुल 30 बहु-विकल्पीय प्रश्न हैं। प्रत्येक प्रश्न के चार विकल्प दिए गए हैं। इनमें से एक सही विकल्प का चयन कीजिये। प्रत्येक प्रश्न का मान 1 अंक निर्धारित है।

4. खण्ड 'ख' में प्रश्न संख्या 31 से 38 तक अति लघु उत्तरीय प्रश्न हैं। इनमें से किन्हीं 6 प्रश्नों का उत्तर दीजिए। प्रत्येक प्रश्न का मान 2 अंक निर्धारित है।

5. खण्ड 'ग' में प्रश्न संख्या 39 से 46 तक लघु उत्तरीय प्रश्न हैं। इनमें से किन्हीं 6 प्रश्नों का उत्तर दीजिए। प्रत्येक प्रश्न का मान 3 अंक निर्धारित है।

6. खण्ड 'घ' में प्रश्न संख्या 47 से 52 दीर्घर्ष उत्तरीय प्रश्न हैं। इनमें से किन्हीं 4 प्रश्नों का उत्तर दीजिए। प्रत्येक प्रश्न का मान 5 अंक निर्धारित है।

(खण्ड- क) अपठित बोध

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न संख्या 1-4 तक के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए।

साहित्य को समाज का दर्पण इसलिए कहा गया है कि उसके माध्यम से हम युग विशेष की समस्याओं, परिस्थितियों तथा भावनाओं की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। साहित्य जीवन की अभिव्यक्ति है। साहित्य में ही जातीय भावों का प्रतिबिंब देख सकते हैं। प्रत्येक जाति के साहित्य का एक व्यक्तित्व होता है। केवल इतना ही नहीं, वरन् एक जाति के ही साहित्य में उसके विकास के अनुरूप समय-समय पर अंतर पड़ता रहता है। हिन्दी साहित्य का इतिहास इस तथ्य की पुष्टि करता है। वीरगाथाकाल, भक्तिकाल, रीतिकाल तथा आधुनिक काल के साहित्य में स्पष्ट रूप से अंतर देखा जा सकता है।

1. साहित्य को समाज का क्या कहा जाता है?

(1) दर्पण

(2) समर्पण

(3) आकर्षण

(4) तर्पण

2. जीवन की अभिव्यक्ति क्या है?

(1) हिन्दी

(2) साहित्य

(3) सौंदर्य

(4) भाषा

3. साहित्य में हम किन भावों का प्रतिबिंब देख सकते हैं?

(1) सामाजिक

(2) पारिवारिक

(3) जातीय

(4) सांसारिक

4. साहित्य के किस काल में अंतर देखा जा सकता है?

(1) वीरगाथाकाल

(2) भक्तिकाल

(3) आधुनिक काल

(4) इनमें से सभी

निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न संख्या 5-8 तक के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए।

लक्ष्य तक पहुँचे बिना, पथ में पथिक विश्राम कैसा।

लक्ष्य है अति दूर, दुर्गम मार्ग भी हम जानते हैं,

किन्तु पथ के कंटकों को हम सुमन ही मानते हैं,

जब प्रगति का नाम जीवन, यह अकाल विराम कैसा।

लक्ष्य तक...

धनुष से जो छूटता है बाण कब मग में ठहरता

देखते ही देखते वह लक्ष्य का ही वेध करता

लक्ष्य प्रेरित बाण हैं हम, ठहरने का काम कैसा।।

लक्ष्य तक...

बस वही है पथिक जो पथ पर निरंतर अग्रसर हो,

हो सदा गतिशील जिसका लक्ष्य प्रतिक्षण निकटतर हो।

हार बैठे जो डगर में पथिक उसका नाम कैसा ।।

लक्ष्य तक...

बाल रवि की स्वर्ण किरणें निमिष में भू पर पहुँचतीं

कालिमा का नाश करतीं, ज्योति जगमग जगत धरती

ज्योति के हम पुँज फिर हमको अमा से भीति कैसा ।।

5. धनुष से छूटा हुआ बाण क्या करता है?

(1) भेद

(2) अभेद

(3) प्रभेद

(4) लक्ष्य भेद।

6. लक्ष्य के पथिक कंटकों को क्या मानते हैं?

(1) पुष्प

(2) पत्ते

(3) फल

(4) पौधे।

7. बाल रवि की किरणें कैसी होती हैं?

(1) रजत

(2) हरित

(3) स्वर्ण

(4) श्याम।

8. कहाँ तक पहुँचे बिना पथिक को विश्राम नहीं करना चाहिए?

(1) घर

(2) धर्मशाला

(3) बाजार

(4) लक्ष्य।

निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प का चयन कीजिए।

9. इनमें से किस वाक्य में सकर्मक क्रिया नहीं है?

(1) सोहन देर तक सोता है

(2) रमा पत्र लिखती ह

(3) मैंने उसे पुस्तक दी

(4) विद्यार्थी कक्षा में पढ़ रहे हैं

10. 'माँ भोजन बना रही है।' निम्न में से कौन-सा क्रिया भेद है?

(1) सकर्मक

(2) अकर्मक

(3) द्विकर्मक

(4) प्रेरणार्थक

11. 'सूर्योदय हुआ और उजाला फैल गया।' यह कौन वाक्य है?

(1) सरल

(2) मिश्र

(3) संयुक्त

(4) उप।

12. 'आप जानते हैं कि ईमानदारी एक अच्छा गुण है।' यह कौन-सा वाक्य है?

(1) संयुक्त

(2) सरल

(3) मिश्र

(4) उपवाक्य

13. मैंने तुम्हारी शिकायत नहीं -----प्रशंसा की। (सही अव्यय पद को चुनें।)

(1) अरे!

(2) बल्कि

(3) क्योंकि

(4) और

14. 'गुरु' का एक अर्थ होता है 'शिक्षक' और दूसरा :

(1) आचार्य

(2) अध्यापक

(3) भारी

(4) सरल।

15. निम्न में से कर्तृवाच्य का उदाहरण कौन है?

(1) मुझसे चला नहीं जा रहा।

(2) आइए चला जाए।

(3) गीता ने खाना खाया।

(4) सुरेश द्वारा पाठ पढ़ा गया।

16. 'तिरंगा' - 'तीन रंगों का समूह' कौन-सा समास है

(1) तत्पुरुष

(2) कर्मधारय

(3) द्वंद्व

(4) द्विगु

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न संख्या 17 एवं 18 तक के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए।

मैं काली हूँ। बचपन से दुबली और मरियल भी थी। गोरा रंग पिताजी की कमजोरी थी सो बचपन से मुझसे दो साल बड़ी, खूब गोरी, स्वस्थ और हँसमुख बहिन सुशीला से ही हर बात में की ग्रंथि पैदा नहीं कर तुलना और फिर उसकी प्रशंसा ने ही, क्या मेरे भीतर ऐसे गहरे हीन भाव दी कि नाम, सम्मान और प्रतिष्ठा पाने के बावजूद आज तक मैं उससे उबर नहीं पाई?

17. प्रस्तुत गद्यांश किस पाठ से लिया गया है?

(1) नेताजी का चश्मा

(2) एक कहानी यह भी

(3) बालगोबिन भगत

(4) लखनवी अंदाज

18. बड़ी बहन से तुलना किए जाने पर लेखिका के मन में कैसी भावना उत्पन्न हो गई?

(1) प्रेम

(2) क्रोध

(3) ईर्ष्या

(4) हीन

निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न संख्या 19 एवं 20 तक के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए।

बादल, गरजो !

घेर घेर घोर गगन, धाराधर ओ !

ललित ललित, काले घुँघराले,

बाल कल्पना के-से पाले,

विद्युत-छबि उर में, कवि, नवजीवन वाले !

वज्र छिपा, नूतन कविता

फिर भर दो –

बादल, गरजो !

19. आपकी दृष्टि में बादल किसका प्रतीक हो सकता है?

(1) गरजने का

(2) बरसने का

(3) पौरुष और क्रांति का

(4) वर्षा करने का

20. कवि बादल को क्या घेरने को कह रहे हैं?

(1) शह

(2) पूरा आकाश

(3) देश

(4) संसार

or, कवि बादल को गरजने के लिए क्यों कह रहे हैं?

(1) गरजने से वर्षा होगी

(2) गरजने से लोगों में जोश और पौरुष बढ़ेगा

(3) गरजने से आवाज होगी

(4) गरजने से बिजली चमकेगी

निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प का चयन कीजिए :

21. नेताजी की मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा किसने लगाया होगा?

(1) पानवाले ने

(2) लेखक ने

(3) कैप्टन ने

(4) किसी बच्चे ने

22. बालगोबिन भगत के संगीत को लेखक ने क्या कहा है?

(1) जादू

(2) समय की बर्बादी

(3) नीरस

(4) धुन

23. लेखक ने खीरा खाने से क्यों इंकार कर दिया था?

(1) भूख नहीं थी

(2) आत्म सम्मान की रक्षा हेतु

(3) अहंकारी होने के कारण

(4) दूसरों की चीज़ खाना पसंद नहीं था

24. बालक अमीरुद्दीन रियाज के लिए किस मंदिर में जाया करते थे?

(1) संकटमोचन मंदिर

(2) विश्वनाथ मंदिर

(3) बालाजी मंदिर

(4) महादेव मंदिर

25. गोपियाँ किसकी अनन्य भक्त थीं?

(1) राधा

(2) कृष्ण

(3) उद्धव

(4) सूरदास

26. कवि किसका स्वप्न देखकर जाग गया था?

(1) धन का

(2) पारिवारिक जीवन का

(3) स्मृतियों का

(4) सुख का

27. 'विकल विकल, उन्मन थे उन्मन' पंक्ति किस कविता की है?

(1) उत्साह

(2) पद

(3) फसल

(4) अट नहीं रही है

28. 'यह दंतुरित मुसकान' में कवि को एकटक कौन निहार रहा है?

(1) पत्नी

(2) शिशु

(3) मेहमान

(4) पिता

29. भोलानाथ और उसके साथियों द्वारा बिल में पानी डालने से क्या निकल आया?

(1) चूहा

(2) बिच्छू

(3) साँप

(4) नेवला

30. 'गैंगटॉक' नगर किस राज्य की राजधानी है?

(1) आसाम

(2) सिक्किम

(3) बंगाल

(4) अरुणाचल

खण्ड - B

प्रश्न संख्या 31 से 38 तक अति लघु उत्तरीय प्रश्न है। प्रत्येक प्रश्न 2 अंकों का है। इनमें से किन्हीं 6 प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं 6 प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

जगत और प्रकृति के साथ हमारा जीवंत संबंध है, हम चेतन हैं और प्रकृति नितान्त जड़, ऐसी भ्रांति हमें नहीं पालनी चाहिए। प्रकृति अत्यंत अंतरंग भाव से मनुष्य के जीवन, उसकी चिन्ताओं व कार्यों से जुड़ी हुई है। मनुष्य जो भी पाता है, अपने पर्यावरण से ही प्राप्त करता है। लेकिन अब हम धरती की संतान न रहकर लुटेरे बन गए हैं। ई. एफ. शूमाकर ने 'स्मॉल इज व्युटीफुल' पुस्तक में यह स्थापना की है कि धरती की कोख से उत्खनन के जरिये हम अपने लिए किस प्रकार संसाधन प्राप्त कर उसकी खपत करते जा रहे हैं। यह ऐसा ही है जैसे कोई अपनी पूँजी ही बेचकर खाता जाए। जो कुछ भी है सब खा-पीकर एक खोखली और उजाड़ पृथ्वी हम आनेवाली नस्लों के लिये छोड़े जा रहे हैं। यदि हमने अपनी जीवन-शैली और ऐश्वर्य-भोग की लालसा नहीं छोड़ी, तो यह पृथ्वी भी जीवन के चिह्नों से रिक्त हो जाएगी। यह विचित्र विडम्बना है कि आज के वैज्ञानिक युग का ज्ञान सम्पन्न मनुष्य जिस डाल पर बैठा है उसे ही काट रहा है। सुख-भोग में वह ऐसा अंधा हो चला है कि सामने खड़े भविष्य को देखकर भी जैसे नहीं देखता और अपने सम्पूर्ण विनाश की तैयारी करता जाता है।

प्रश्न 31. जगत और प्रकृति के साथ हमारा कैसा संबंध है?

उत्तर : जगत और प्रकृति के साथ हमारा जीवंत संबंध है। हम दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। प्रकृति के बिना हमारा अस्तित्व संभव नहीं है। प्रकृति हमारे लिए जड़ नहीं, पूरी तरह चेतन रूप में ही है, जिसके साथ हम अभिन्न रूप से जुड़े हुए हैं।

प्रश्न 32. प्रकृति के अन्तरंग भाव से क्या तात्पर्य है?

उत्तर : प्रकृति के अंतरंग भाव से तात्पर्य यह है कि प्रकृति हमारे जीवन के प्रायः सभी पहलुओं से जुड़ी हुई है। हमारा निर्माण भी प्रकृति के तत्त्वों से ही हुआ है यथा भूमि, जल, वायु, अग्नि एवं आकाश से। हम सब कुछ प्रकृति से ही प्राप्त करते हैं।

प्रश्न 33. आज किस प्रकार मनुष्य अपने सम्पूर्ण विनाश की तैयारी कर रहा है?

उत्तर : आज का मनुष्य सुख-भोग में ऐसा अंधा हो गया है कि सब कुछ जानते हुए भी अनजान बनकर प्राकृतिक संसाधनों का चारों ओर दुरुपयोग कर रहा है। खनिजों का अवैध उत्खनन तथा वृक्षों की अंधाधुन्ध कटाई कर रहा है। यह भविष्य के लिए भयावह स्थिति है।

अथवा, हम धरती की संतान न रहकर क्या बन गए हैं?

उत्तर : हम धरती की संतान न रहकर लुटेरे बन गए हैं।

प्रश्न 34. ई. एफ. शूमाकर की पुस्तक का क्या नाम है?

उत्तर : 'स्माल इज ब्यूटीफुल'।

प्रश्न 35. हम आने वाली नस्लों के लिए क्या छोड़ रहे हैं?

उत्तर: हम आने वाली नस्लों के लिए खोखली और उजाड़ पृथ्वी छोड़ रहे हैं।

प्रश्न 36. पृथ्वी जीवन के चिह्नों से कैसे रिक्त हो जाएगी?

उत्तर : यदि हमने अपनी जीवन-शैली और ऐश्वर्य-भोग की लालसा नहीं छोड़ी, तो यह पृथ्वी भी जीवन के चिह्नों से रिक्त हो जाएगी।

प्रश्न 37. सुख-भोग की लालसा में मनुष्य का व्यवहार कैसा हो चला है?

उत्तर : सुख-भोग की लालसा में मनुष्य ऐसा अंधा हो चला है कि सामने खड़े भविष्य को देखकर भी जैसे नहीं देखता और अपने सम्पूर्ण विनाश की तैयारी करता जाता है।

प्रश्न 38. इस गद्यांश का एक उपयुक्त शीर्षक दीजिए।

उत्तर : प्रकृति और मानव

खण्ड - C

प्रश्न संख्या 39 से 46 तक लघु उत्तरीय प्रश्न है। प्रत्येक प्रश्न 3 अंकों का है। इनमें से किन्हीं 6 प्रश्नों के उत्तर अधिकतम 150 शब्दों में दीजिए।

प्रश्न 39. हालदार साहब हमेशा चौराहे पर रुककर नेताजी की मूर्ति को क्यों निहारते थे?

उत्तर : हालदार साहब एक देशभक्त व्यक्ति थे। चौराहे पर नेताजी की मूर्ति देख कर उन्हें प्रसन्नता हुई। लेकिन नेताजी की नाक पर संगमरमर के चश्मे की जगह पर मानवीय चश्मा देखकर उन्हें बड़ा कौतूहल हुआ। वे हमेशा चौराहे पर रुककर नेताजी की मूर्ति को निहारते थे और उन्हें आश्चर्य होता था कि चश्मा रोज बदल जाता था।

प्रश्न 40. लेखिका की अपनी पिता से वैचारिक टकराहट को अपने शब्दों में लिखिए।

अथवा, लेखिका को अपने पिता से संघर्ष क्यों करना पड़ा?

उत्तर : लेखिका के विचार पिता से भिन्न थे। फलस्वरूप, पिता-पुत्री के बीच टकराव होता रहता था। ये टकराव भिन्न-भिन्न रूप धारण करके लेखिका के स्वभाव में समा गये। लेखिका के पिता लड़की को विशिष्ट भी बनाना चाहते थे और मान-सम्मान के प्रति भी सावधान थे। लेखिका विशिष्टता का मार्ग पकड़कर स्वतंत्रता आंदोलन के क्रम में सड़क पर उतर पड़ी। नारे, जुलूस, हड़ताल, भाषण आदि उनका दैनिक कार्य-कलाप हो गया।

दूसरी ओर लेखिका ने पिता से विरोध कर अपनी शादी स्वतंत्रतापूर्वक राजेन्द्र यादव से कर लिया। इस प्रकार लेखिका को अपने पिता से संघर्ष करना पड़ा।

प्रश्न 41. पाठ में आए किन प्रसंगों के आधार पर आप कह सकते हैं कि बिस्मिल्ला खाँ मिली-जुली संस्कृति के प्रतीक थे?

उत्तर : बिस्मिल्ला खाँ मिली-जुली संस्कृति के प्रतीक थे। उनकी संस्कृति में हिन्दुओं और मुसलमानों की संस्कृति मिली-जुली थी। मुसलिम धर्म-त्योहारों में उनकी गहरी आस्था थी। वे पूरी श्रद्धा से मुहर्रम मनाते थे। वे पाँचों समय नमाज अदा करते थे। वे जीवन भर हिन्दू-मंदिरों में शहनाई बजाते रहे। गंगा को मैया मानते थे। बाबा विश्वनाथ के प्रति आस्था रखते थे। काशी से दूर रहने पर बालाजी के मंदिर की ओर मुँह करके प्रणाम किया करते थे। इन्हीं कारणों से उन्हें मिली-जुली संस्कृति का प्रतीक माना गया है।

अथवा, पाठ में आये किन प्रसंगों के आधार पर आप कह सकते हैं कि - बिस्मिल्ला खाँ वास्तविक अर्थ में सच्चे इंसान थे।

उत्तर : बिस्मिल्ला खाँ सच्चे अर्थों में एक सधे हुए इंसान थे। उनमें धार्मिक कट्टरता, क्षुद्रता और तंगदिली नहीं थी। काशी में रहकर उन्होंने काशी की परम्पराओं को निभाया। मुसलमान होते हुए भी उन्होंने कभी हिन्दू धर्म का विरोध नहीं किया। इस्लामिक धर्म का उन्होंने अच्छी तरह निर्वाह किया। सबों के प्रति उनमें अगाध प्रेम का भाव था। वे जीवन भर फटेहाल, सरल और सादे रहे। ऊँचे-ऊँचे सम्मान पाकर भौ वे सरल बने रहे।

प्रश्न 42. 'उत्साह' कविता में बादल किन-किन अर्थों की ओर संकेत करता है?

उत्तर 'उत्साह' कविता में बादल निम्नलिखित अर्थों की ओर संकेत करता है-

(i) वर्षा से धरती के तपन को दूर करने वाली शक्ति के रूप में।

(ii) अपने गर्जन से लोगों में उत्साह पैदा करने वाले के रूप में।

(iii) अपने वर्षन से इस सृष्टि में क्रांति लाने वाले के रूप में।

(iv) लोगों के कष्टों को दूर करने वाली शक्ति के रूप में।

प्रश्न 43. फसल को 'हाथों के स्पर्श की गरिमा और महिमा' से कवि क्या व्यक्त करना चाहता है?

उत्तर : इसमें कवि कहना चाहता है कि किसानों के श्रमपूर्ण हाथों का प्यार भरा स्पर्श पाकर ही ये फसलें इतनी फलती-फूलती हैं। यह किसानों के श्रम की गरिमा और महिमा का ही प्रतिफल है कि फसलें इतनी अधिक बढ़‌ती चली जाती हैं।

प्रश्न 44. संगतकार के माध्यम से कवि किस प्रकार के व्यक्तियों की ओर संकेत करना चाहता है?

अथवा, 'संगतकार' कविता में किस जीवन मूल्य को उभारा गया है?

उत्तर : संगतकार के माध्यम से कवि विभिन्न कार्यों में लगे सहायकों की ओर संकेत करना चाह रहा है। इनके प्रयास अनदेखे भले ही रह जाते हों, किसी कार्य की सफलता में इनका बड़ा योगदान होता है। कलाकारिता अथबा दूसरे कार्यों में जुटे लोगों को चाहिए कि वह अपने प्रधान का हर प्रकार से सहयोग करें। जिस प्रकार संगतकार अपने मुख्य गायक को हर प्रकार से सहयोग करते हैं, उसी प्रकार सभी सहायकों को अपने मुखिया का सहयोग करना चाहिए।

प्रश्न 45. 'माता का आँचल' शीर्षक की उपयुक्तता बताते हुए इसका कोई दूसरा शीर्षक सुझायें।

उत्तर : 'माता का आँचल' शीर्षक पूर्णतः उपयुक्त है। इस संस्मरण में बाल्यावस्था की जितनी भी बातें बतायी गयी हैं उनका अंत माता के स्नेह में हुआ है। माँ का स्नेह ही इसका निष्कर्ष है। इसके और भी शीर्षक हो सकते हैं- यथा 'बचपन की मस्ती', 'बचपन का जीवन', 'पिता का प्यार' और 'माँ का स्नेह' इत्यादि।

प्रश्न 46. प्राकृतिक सौन्दर्य के अलौकिक आनन्द में डूबी लेखिका को कौन-कौन से दृश्य झकझोर गये?

उत्तर : प्रकृति के अनन्त सौन्दर्य में डूबी लेखिका को को सड़ सड़क बनाने के लिए पत्थर तोड़ती सुन्दर और कोमलांगिनी औरतों के पत्थर तोड़ने के दृश्य झकझोर गये। उसने देखा कि अद्वितीय सौंदर्य से युक्त कुछ पहाड़ी औरतें पत्थरों पर बैठी पत्थर तोड़ रही थीं। उनके हाथों में हथौड़े और कुदाल थे। कई औरतों की पीठ पर बँधी टोकरी में उनके बच्चे भी थे। यह दृश्य देखकर लेखिका के मन को बार-बार झकझोर रहा था कि नदी, पुलों, वादियों और झरनों से ऐसे स्वर्गिक सौन्दर्य के बीच भूख, मौत और दीनता के बीच जीने का ढंग जारी है।

खण्ड - D

प्रश्न संख्या 47 से 52 तक दीर्घ उत्तरीय प्रश्न है। प्रत्येक प्रश्न 5 अंकों का है। इनमें से किन्हीं 4 प्रश्नों के उत्तर अधिकतम 250 शब्दों में दीजिए।

प्रश्न 47. पाठ के आधार पर बालगोबिन भगत के मधुर गायन की विशेषताएँ बतावें।

उत्तर : बालगोबिन भगत के जादुई संगीत में मस्ती, तल्लीनता और गायन-कला की अलौकिक मिठास का अद्भुत संगम था। बालगोबिन का संगीत स्वर जादू-सा था। उसका स्वर मानो ऊँचाई पर चढ़कर स्वर्ग की ओर जाता था। उनके गाने में इतनी तन्मयता और कबीर की ईश्वर और जीव के बारे में ज्ञान भरी बातें होती थीं कि वह सभी को चौंका देता था।

बालगोबिन के संगीत को सुनकर लोग झूमने लगते थे। किसानों को काम करने में और बच्चों को खेलने में मस्ती आ जाती थी। महिलाओं के भी होंठ गुनगुनाने लगते थे। हल चलाने वालों के पैर एक ताल में उठते थे। धान रोपने वालों की उँगलियाँ उसी ताल और लय में चलने लगती थीं।

अथवा, भगत ने अपने बेटे की मृत्यु पर अपनी भावनाएँ किस प्रकार प्रकट की?

अथवा, बालगोचिन भगत की संगीत साधना का चरम उत्कर्ष कब देखने को मिलता है?

उत्तर : पुत्र-शोक में प्रायः लोग मातम मनाते हैं। लेकिन, भगत जी अपने मृत बेटे के निकट बैठकर संगीत-साधना में लीन थे। उनकी मान्यता थी कि आत्मा परमात्मा में मिल गयी। उनका मृत पुत्र आँगन में चटाई पर लेटा था। उसे सफेद कपड़े से ढँक दिया गया था। उसके पास कुछ फूल बिखरे थे। सिरहाने में एक दीपक जल रहा था। उसकी बगल में भगत जी अपना आसन जमाये बैठे थे। वे पहले की भाँति भगवद् भक्ति के गीत में आत्मविभोर थे। बालगोबिन भगत की संगीत-राज्धना का चरम उत्कर्ष उनके बेटे की मृत्यु के बाद देखने को मिलता है। बेटे की मौत भी उनकी संगीत साधना को विचलित नहीं कर सकी। यह उनकी संगीत-साधना का चरम उत्कर्ष था।

प्रश्न 48. कृष्ण के प्रति अपने अनन्य प्रेम को गोपियों ने किस प्रकार अभिव्यक्त किया है?

उत्तर : कृष्ण के प्रति अपने अनन्य प्रेम को गोपियों ने निम्नलिखित रूपों में अभिव्यक्त किया है:

(i) गोपियाँ कृष्ण को गुड़ और अपने आपको उसमें लिपटी हुई चींटी मानती हैं।

(ii) गोपियाँ अपने को हारिल पक्षी मानती हैं और कृष्ण को अपना जीवनाधार 'हारिल की लकड़ी मानती हैं।

(iii) गोपियाँ रात-दिन, सोते-जागते और स्वप्न में भी कृष्ण के नाम का जाप करती रहती हैं।

(iv) गोपियाँ मन, वचन और कर्म से कृष्ण के प्रति समर्पित हैं।

(v) वे उद्धव के योग-संदेश से व्यथित हो उठती हैं।

प्रश्न 49. जितेन नार्गे की गाइड की भूमिका के बारे में विचार करते हुए लिखिए कि एक कुशल गाइड में क्या गुण होते हैं?

उत्तर : जितेन नार्गे एक कुशल गाइड के साथ ही साथ एक कुशल ड्राइवर भी था। प्रायः पर्यटक काहनों में ड्राइवर और गाइड अलग-अलग होते हैं। यदि एक कुशल गाइड में अगर अच्छी तरह गाड़ी चलाने का भी ज्ञान हो तो उसे एक अच्छा गुण माना जायेगा।

एक्क कुशल गाइड को अपने क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति तथा विभिन्न स्थानों के महत्त्व तथा उनसे जुड़ी रोचक जानकारियों का ज्ञान भी होना चाहिए।

जितेन यद्यपि नेपाली है तथापि उसे सिक्किम के जन-जीवन, संस्कृति तथा धार्मिक मान्यताओं का पूरा ज्ञान है। वहाँ की कठोर जीवन-स्थितियों से भी वह भली-भांति परिचित है। यह किसी कुशल गाइड का आवश्यक गुण है।

जितेन का सबसे अच्छा गुण है - मानवीय संवेदनाओं की समझ तथा परिष्कृत संवाद शैली।

प्रश्न 50, दिये गये संकेत बिन्दुओं के आधार पर निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर निबंध लिखें।

(क) समाचार पत्र का महत्व

संकेत बिन्दु : भूमिका, महत्त्व लोकतन्त्र का प्रहरी, बहुउपयोगिता - प्रचार का सशक्त माध्यम, व्यापार एवं रोजगार, ज्ञान-वृद्धि

(ख) परिश्रम का महत्त्व (अथवा, कर्म ही जीवन है अथवा, आराम हराम है)

संकेत बिन्दु : भूमिका, श्रम-जीवन का सत्य, उन्नति और विकास में सहायक, परिश्रम से लाभ, निष्कर्ष

(ग) प्रदूषण : समस्या और समाधान अथवा, पर्यावरण-प्रदूषण

संकेत बिन्दु : प्रदूषण से अभिप्राय एवं उसके कारण, प्रदूषण के प्रकार, ध्वनि प्रदूषण, जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, भूमि प्रदूषण, दुष्परिणाम, समाधान, उपसंहार।

उत्तर :

(क) समाचार पत्र का महत्व

विश्व के कोने-कोने में क्या हुआ, क्या हो रहा है, क्या होने जा रहा है इन सब की जानकारी समाचार पत्र से ही मिलती है। कम पढ़े-लिखे लोगों से लेकर सुशिक्षित लोगों की बहुत बड़ी संख्या को तब तक चैन नहीं मिलता जब तक वे कोई अखबार नहीं पढ़ लेते। अपनी दुनिया के बदलते चेहरे को पहचानने के लिए अखबार का पड़ना जरूरी है। प्रात कालीन बायु की तरह समाचार पत्र मानसिक ताजगी देता है।

समाचारपत्रों को लोकतंत्र का सजग प्रहरी एवं सबसे इव' चौथा स्तम्भ' कहा गया है। समाचारपत्र अप्रत्यक्ष रूप से सरकार, जनता और जनमत तीनों का नियंत्रण और निर्देशन करता है।

समाचार पत्र प्रचार का एवं जनमत को प्रभावित करने का शक्तिशाली साचन है। आधुनिक समाचार पत्र देश-विदेश की घटनाओं की जानकारी नहीं देते अपितु हमारी विचारधारा को दिशा-विशेष में मोड़ने की क्षमता भी रखते हैं।

विज्ञापन के सशक्त माध्यम के रूप में समाचार व्यापार के प्रचार-प्रसार में अत्यंत उपयोगी होता है। समाचार पत्रों से हमें रोजगार की प्राप्ति होती है। इसमें रोजगार के विज्ञापन छपते हैं। स्वर्य समाचार पत्र भी लोगों को रोजगार देता है।

समाचारपत्र सरकार और जनता दोनों को जागरूक बनाता है। समाचारपत्रों के महत्व का संकेत करते हुए पार्टन ने कहा था 'समाचार पत्र जनता का विश्वविद्यालय है।' समाचार पत्र में सामाजिक और सांस्कृतिक समस्याओं पर भी लेख प्रकाशित होते रहते हैं। राजनीति और सामाजिक घटनाओं पर विचारोत्तेजक सामग्री अखबारों द्वारा ही मिलती है

जनतंत्र के प्रहरी समाचार पत्रों को पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। तभी वे जनतंत्र की रक्षा करने में समर्थ हो सकेंगे। इसलिए संपादक की बहुत बड़ी जिम्मेवारी है कि वह अपने अखबार को प्रचार का साधन या पीत पत्रकारिता का केन्द्र न बनने दे। इस तरह वे राष्ट्र और मानवता की अमूल्य सेवा कर सकते हैं।

(ख) परिश्रम का महत्त्व

भूमिका यह संसार ही कर्म क्षेत्र है। इस कर्म क्षेत्र में श्रम के अभाव में कहीं भी सफलता नहीं मिल सकती। हर व्यक्ति के जीवन का अपना-अपना लक्ष्य होता है। कोई भी व्यक्ति श्रम के बिना अपने जीवन के लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता। यह संसार ही कर्म क्षेत्र है। श्रम के द्वारा ही विश्व जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त की जा सकती।

श्रम-जीवन का सत्य श्रम ही जीवन का सत्य है। यही जीवन को उसका अर्थ देता है। श्रम मानव जीवन को गतिशील बनाता है। गतिशील व्यक्ति को ही जीवंत माना जाता है। गति ही जीवन का मानदंड है। श्रम की उपेक्षा करने से जीवन की गति रुक जाती है।

उन्नति और विकास में सहायक परिश्रमी व्यक्ति में सभी प्रकार की कठिनाइयों से संघर्ष करते हुए अपने रास्ते का निर्माण करने का अदम्य साहस होता है। परिश्रमी व्यक्ति कर्महीन और भाग्यवादी नहीं होता। जिस किसी भी क्षेत्र में आप देखें परिश्रमी व्यक्ति पर ही जीवन में लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। वह भाग्य का भरोसा छोड़ अपने कर्म में मगन रहता है। उसका पुरुषार्थ हमेशा चमकता रहता है। परिश्रम के द्वारा ही जीवन के संघर्ष में हमें सफलता मिल पाती है।

इस संसार में जितने भी महान व्यक्ति हुए, उनकी महानता के मूल में उनके कर्म और श्रम की शक्ति छिपी हुई है। आज विश्व में जितने वैज्ञानिक, तकनीकी आदि क्षेत्रों में बड़ी-बड़ी खोजें नये-नये आविष्कार और निर्माण हो रहे हैं, वे सब परिश्रम के ही फल हैं। आज मनुष्य अपनी साधना और श्रम के बल पर ही अंतरिक्ष पर विजय प्राप्त कर सका है।

परिश्रम से लाभ: कर्महीन व्यक्तियों के लिए इस संसार में कोई जगह नहीं। भाग्यवादी व्यक्ति समाज तथा देश के उत्थान में बाधक ही होते हैं। श्रम करना मनुष्य का धर्म है। जो लोग श्रम नहीं करते उनका शरीर शिथिल बना रहता हैं। वे अनेक बीमारियों से घिरे रहते हैं। शारीरिक श्रम करने वाले व्यक्ति दीर्घजीवी होते हैं। शारीरिक और मानसिक श्रम करने वाले का ही बौद्धिक विकास होता है। वह विघ्न-बाधाओं को देख कर कभी घबड़ाता नहीं है। वह अपने पथ पर निरंतर आगे बढ़ता रहता है।

निष्कर्ष: वस्तुतः जीवन को सुखमय बनाने की आधारशिला कर्म और श्रम ही है। स्पष्टतः कर्म ही जीवन है। आराम हराम है।

(ग) प्रदूषण : समस्या और समाधान / पर्यावरण-प्रदूषण

प्रदूषण से अभिप्राय : प्रकृति पृथ्वी, जल, वायु आदि आधारभूत तत्त्वों के बीच एक प्राकृतिक समन्वय बनाकर जग में जीवन का संचार करती है। मानव अपनी निरंतर बढती आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रकृति के उपलब्ध संसाधनों का दोहन करता रहा है। अन्धाधुंध प्रकृति के दोहन से प्रकृति के आधारभूत तत्त्वों में सन्तुलन के बिगड़ने को प्रदूषण कहा जाता है। आधुनिक युग में विज्ञान के नये-नये आविष्कारों ने हमारे पर्यावरण को प्रदूषित कर दिया है। प्रदूषण की समस्या आज सारे विश्व के सामने विकराल रूप धारण किये खड़ी है।

प्रदूषण के प्रकार : प्रदूषण मुख्य रूप से चार प्रकार का है-ध्वनि प्रदूषण, जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण और भूमि प्रदूषण। इनमें से जल प्रदूषण और वायु प्रदूषण ने मानव-जीवन को बहुत प्रभावित किया है।

दुष्परिणाम : भारत में 80 प्रतिशत रोग प्रदूषित जल के पीने के कारण होते हैं। रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से भी जल प्रदूषण बढ़ रहा है। कल-कारखाने, मोटर, स्कूटर, बसें आदि निरन्तर जहरीला धुआँ उगलती रहती हैं। निरन्तर बढ़ती जनसंख्या से भी वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। इससे गर्मी बढ़ने लगी है। परमाणु ऊर्जा पर आधारित बिजली घर और कारखाने वायु प्रदूषण का कारण बन रहे हैं। रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के प्रयोग से भी भूमि प्रदूषण बढ़ा है।

समाधान : इन सभी प्रदूषणों को रोकने के लिए उपाय किये जाने चाहिए। भूमि प्रदूषण रोकने के लिए रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग कम किया जाना चाहिए। अनावश्यक बाँधों के निर्माण पर रोक लगायी जानी चाहिए। वनों का कटाव बन्द होना चाहिए और वृक्षारोपण के कार्यक्रम को बड़े पैमाने पर शुरू किया जाना चाहिए।

जल प्रदूषण को रोकने के लिए उद्योगों-कारखानों के दूषित जल को प्रदूषण मुक्त किये बिना नदियों और जलाशयों में नहीं बहाना चाहिए। महानगरों तथा अन्य बड़े-बड़े नगरों के मल-युक्त जल को प्रदूषण-मुक्त करके ही नदियों तथा अन्य जल स्रोतों में मिलने दिया जाय।

वायु प्रदूषण रोकने के लिए उद्योगों की चिमनियों पर फिल्टर लगाने चाहिए जिससे वायु को प्रदूषित करने वाले तत्त्वों को वायुमण्डल में मिलने से रोका जा सके। परमाणु ऊर्जा से उत्पन्न वायु प्रदूषण को रोकने के लिए भी कारगर उपाय किये जाने चाहिए।

जनसंख्या वृद्धि पर अंकुश लगा कर पर्यावरण प्रदूषण को कुछ कम किया जा सकता है।

उपसंहार : हमें उपर्युक्त सभी प्रकार के प्रदूषणों को रोकने के लिए गंभीरतापूर्वक विचार करना चाहिए तथा उन्हें सख्ती से कार्यान्वित करना चाहिए। यदि हम अब भी इस समस्या के प्रति सचेत नहीं हुए तो मानव जाति का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जायेगा।

प्रश्न 51. अपने मित्र के पास एक पत्र लिखें जिसमें झारखण्ड के ऐतिहासिक स्थल/रमणीक स्थान के बारे में वर्णन हो।

उत्तर :

प्रिय अजय,

सप्रेम नमस्कार,

29 D, रामनगर, गढ़वा

23 जनवरी, 2026

तुम्हारा पत्र मिला। बहुत ही खुशी की बात है कि तुम अपने विद्यालय की ओर से भारत के महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों के भ्रमण पर जा रहे हो। इस प्रकार के भ्रमण का शिक्षा के साथ-साथ व्यक्तित्व के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान होता है। इस पत्र में मैं झारखंड के ऐतिहासिक स्थल का उल्लेख कर रहा हूँ।

झारखंड की ऐतिहासिक विरासत अत्यन्त समृद्ध है। इन्हीं में से एक है 'पारसनाथ की पहाड़ियाँ'। यह गिरिडीह शहर से 35 कि.मी. दूर समुद्र तल से 4480 फीट की ऊँचाई पर स्थित है। यह जैन मतावलंबियों का पवित्र स्थान है। न सिर्फ धार्मिक दृष्टिकोण से बल्कि रमणीक प्राकृतिक दृश्यों की सुन्दरता के लिए भी यह स्थान प्रसिद्ध है।

छुट्टियों में यहाँ आओ। मैं तुम्हें झारखंड के अन्य ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कराऊँगा।

माता-पिता को चरण स्पर्श तथा पप्पू को प्यार।

तुम्हारा मित्र,

विजय

अथवा, अपने नगर में पेयजल की आपूर्ति को नियमित कराने हेतु नगरपालिका के अध्यक्ष को पत्र लिखिए।

उत्तर :

सेवा में,

अध्यक्ष, नगरपालिका, हजारीबाग

विषय : पेयजल की अनियमित आपूर्ति

महोदय,

आज पूरा नगर पेयजल की अनियमित आपूर्ति से परेशान है। अधिकतर चापाकल मरम्मत के इन्तजार में बेकार पड़े हैं। नलों में दस-दस दिनों तक पानी नहीं छोड़ा जाता। पानी आता भी है तो आधे-एक घण्टे के लिए। लोग आधी रात से ही बरतन, बाल्टी लिये लाइनों में खड़े रहते हैं। पानी के लिए आपस में मारपीट भी हो जाती है।

आपसे सविनय आग्रह है कि इस समस्या से निजात दिलाने के लिए त्वरित एवं प्रभावी कार्यवाही करें। लाखों लोगों का जीवन इस समस्या के कारण बिल्कुल अव्यवस्थित हो गया है।

भवदीय

दिनांक: 4. 2. 2026

जगत राम, रामनगर, हजारीबाग

प्रश्न 52. आपके शहर में पुस्तक मेले का आयोजन होने जा रहा है। इसके लिए लगभग 50 शब्दों में एक विज्ञापन तैयार कीजिए।

उत्तर :

पुस्तक प्रेमियों के लिए खुशखबरी !!

7 फरवरी को शुभारंभ

झारखंड पुस्तक मेला

ज्ञान-विज्ञान और मनोरंजन का अनूठा संगम

  • झारखण्ड के साहित्य और कला की प्रदर्शनी एवं गोष्ठी
  • देश विदेश के प्रकाशकों की पुस्तकें एक जगह
  • बाल साहित्य और महिलाओं के लिए उपयोगी पुस्तकें
  • रोज शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम

आयोजक : कला एवं संस्कृति मंत्रालय, झारखण्ड सरकार

अथवा, किसी आयुर्वेदिक कम्पनी द्वारा तैयार की गयी स्वास्थ्यवर्द्धक आयुर्वेदिक औषधि 'दीर्घायु भव' के लिए लगभग 50 शब्दों में एक आकर्षक विज्ञापन तैयार कीजिए।

उत्तर :

हरिकृपा आयुर्वेद द्वारा प्रस्तुत

दीर्घायु भव

सत्ताईस जड़ी-बूटियों से बनी स्वस्थ्यवर्धक आयुर्वेदिक औषधि

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