Class 10 Hindi -A SET-5 Sumudran Model Paper Solution 2025-26

Class 10 Hindi -A SET-5 Sumudran Model Paper Solution 2025-26

Class 10 Hindi -A SET-5 Sumudran Model Paper Solution 2025-26

Class 10 हिन्दी 'ए' Set-5

Sumudran Model Sample Question Papers with Answers

JCERT द्वारा जारी

सामान्य निर्देश :

1. परीक्षार्थी यथासंभव अपने शब्दों में ही उत्तर दें।

2. इस प्रश्न-पत्र में चार खण्ड क, ख, ग एवं घ हैं। कुल प्रश्नों की संख्या 52 है।

3. खण्ड 'क' में कुल 30 बहु-विकल्पीय प्रश्न हैं। प्रत्येक प्रश्न के चार विकल्प दिए गए हैं। इनमें से एक सही विकल्प का चयन कीजिये। प्रत्येक प्रश्न का मान 1 अंक निर्धारित है।

4. खण्ड 'ख' में प्रश्न संख्या 31 से 38 तक अति लघु उत्तरीय प्रश्न हैं। इनमें से किन्हीं 6 प्रश्नों का उत्तर दीजिए। प्रत्येक प्रश्न का मान 2 अंक निर्धारित है।

5. खण्ड 'ग' में प्रश्न संख्या 39 से 46 तक लघु उत्तरीय प्रश्न हैं। इनमें से किन्हीं 6 प्रश्नों का उत्तर दीजिए। प्रत्येक प्रश्न का मान 3 अंक निर्धारित है।

6. खण्ड 'घ' में प्रश्न संख्या 47 से 52 दीर्घर्ष उत्तरीय प्रश्न हैं। इनमें से किन्हीं 4 प्रश्नों का उत्तर दीजिए। प्रत्येक प्रश्न का मान 5 अंक निर्धारित है।

(खण्ड- क) अपठित बोध

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न संख्या 1-4 तक के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए।

गद्यांश : स्वावलंबन का अर्थ है अपना अवलंब अर्थात् आश्रय या सहारा आप बनना। किसी दूसरे पर बोझ न बन कर या निर्भर अर्थात् आश्रित न रहकर अपने आप पर निर्भर या आश्रित रहना, संसार में परावलंबी यानी दूसरों पर आश्रित हो या निर्भर रहना एक प्रकार का पाप और हीन कर्म है। यह आदमी के बाहरी और भीतरी व्यक्तित्व को एकदम हीन और बौना बना कर रख देने वाला हुआ करता है। परावलंबी को हमेशा आधार देने वालों के अधीन बनकर रहना पड़ता है, उनके इशारों पर नाचने की बाध्यता और विवशता रहा करती है। उनकी अपनी इच्छा होने पर भी उसका कोई मूल्य और महत्व नहीं रहा करता। आत्मनिर्भर व्यक्ति ही सही अर्थों में जान पाता है कि दुख, पीड़ा क्या होती है और मान सम्मान किसे कहते हैं। व्यक्तित्वहीन जीवन वास्तव में निरीह पशु और कीड़े-मकोड़े से अधिक महत्व नहीं रखा करता।

1. स्वावलंबन का क्या अर्थ होता है?

(1) दूसरों पर आश्रित रहना

(2) अपना सहारा स्वयं बनना

(3) खुश नहीं रहना

(4) दुःख पीड़ा सहना

2. परावलंबी कैसे लोग होते हैं?

(1) दूसरों पर आश्रित रहने वाले

(2) दूसरों पर आश्रित न रहने वाले

(3) सुखी रहने वाले

(4) अपना सहारा स्वयं बनने वाले

3. दुःख, पीड़ा और मान-सम्मान का

(1) परावलंबी व्यक्ति

(2) अभिमानी व्यक्ति

(3) अघर्मी व्यक्ति

(4) आत्मनिर्भर व्यक्ति

4. व्यक्तित्वहीन जीवन किनके समान होता है?

(1) ईश्वर के समान

(2) पशु और कीड़ मकोड़े के समान

(3) वीरों के समान

(4) शिष्य के समान

निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न संख्या 5-8 तक के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए।                          

तुम भारत, हम भारतीय हैं, तुम माता हम बेटे।

किसकी हिम्मत है कि तुम्हें दुष्टा दृष्टि से देखे।।

ओ माता तुम एक अरब से अधिक भुजाओं वाली।

सबकी रक्षा में तुम सक्षम हो अदम्य बलशाली ।।

भाषा, वेश, प्रदेश भिन्न है, फिर भी भाई-भाई।

भारत की साझी संस्कृति में पलते भारतवासी।।

सुदिनों में हम एक साथ हँसते, गाते, सोते हैं।

दुर्दिन में भी साथ-साथ जगते पौरुष होते है।।

5. काव्यांश में माँ की उपाधि किसे दी गई है?

(1) अपनी माँ को

(2) गाय को

(3) धरती को

(4) भारत को

6. कवि ने माँ को कितनी भुजाओं वाली कहा है?

(1) एक अरब

(2) एक अरब से अधिक

(3) दो अरब

(4) दो अरब से अधिक

7. भारत की संस्कृति कैसी है?

(1) साझी संस्कृति

(2) धार्मिक मित्रता वाली संस्कृति

(3) भेदभावपूर्ण संस्कृति

(4) साधारण संस्कृति

8. सुदिनों में हम क्या करते हैं?

(1) हँसते

(2) गाते

(3) सोते

(4) इनमें से सभी

निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प का चयन कीजिए।

9. कौन-सा वाक्य अकर्मक क्रिया का उदाहरण है?

(1) रमेश हँस रहा है

(2) माँ भोजन बना रही है

(3) वह गीत गा रहा है

(4) मैं शरबत पी रहा हूँ

10. कौन-सा वाक्य सकर्मक क्रिया का उदाहरण है?

(1) रीता खाना खाती है।

(2) पक्षी उड़ रहे हैं।

(3) वे कहाँ जा रहे हैं?

(4) सुमित सो रहा है।

11. 'तुम स्कूल जाओ, और मैं घर पर रहूँगा' इस वाक्य का प्रकार क्या है?

(1) सरल

(2) मिश्र

(3) संयुक्त

(4) विशेष

12. 'जहाँ-जहाँ वह गया, उसका बहुत सम्मान हुआ।' यह कौन-सा वाक्य है?

(1) मिश्र

(2) संयुक्त

(3) उप

(4) सरल।

13. -------- तुमने अच्छा काम किया। (सही अव्यय को चुनें।)

(1) शाबाश !

(2) अरे !

(3) छिःछिः!

(4) बाप रे!

14. 'आम' का एक अर्थ होता 'एक फल' और दूसरा

(1) आसा

(2) सामान्य

(3) समस्त

(4) आत्मा

15. माँ द्वारा भोजन बनाया जाता है। (वाच्य का प्रकार बताएँ।)

(1) कर्तृवाच्य

(2) कर्मवाच्य

(3) भाववाच्य

(4) इनमें कोई नहीं

16. 'आजीवन' कौन-सा समास है?

(1) अव्ययीभाव

(2) तत्पुरुष

(3) कर्मधारय

(4) द्विगु

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न संख्या 17 एवं 18 तक के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए।

काशी संस्कृति की पाठशाला है। शास्त्रों में आनंदकानन के नाम से प्रतिष्ठित। काशी में कलाधर हनुमान व नृत्य-विश्वनाथ हैं। काशी में बिस्मिल्ला खाँ हैं। काशी में हजारों सालों का इतिहास है जिसमें पंडित कंठे महाराज हैं, विद्याधरी हैं, बड़े रामदास जी हैं, मोजुद्दीन खाँ हैं व इन रसिकों से उपकृत होने वाला अपार जन-समूह है।

17. काशी को किसकी पाठशाला कहा गया है?

(1) आस्था

(2) संस्कृति

(3) परंपरा

(4) संस्कार

18. शास्त्रों में काशी किस नाम से प्रतिष्ठित है?

(1) आनंदधाम

(2) मंगलधाम

(3) आनंदकानन

(4) मंगलकानन

सही विकल्प का चयन कीजिए। निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न संख्या 19 एवं 20 तक के लिए

मुख्य गायक के चट्टान जैसे भारी स्वर का साथ देती

वह आवाज सुंदर कमजोर काँपती हुई थी

वह मुख्य गायक का छोटा भाई है

या उसका शिष्य

या पैदल चलकर सीखने आने वाला दूर का कोई रिश्तेदार

19. मुख्य गायक की आवाज कैसी थी?

(1) मधुर

(2) कर्कश

(3) चट्टान जैसी भारी

(4) कमजोर

20. 'संगतकार' मुख्य गायक का कौन हो सकता है?

(1) छोटा भाई

(2) शिष्य

(3) दूर का कोई रिश्तेदार

(4) इनमें से सभी

निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प का चयन कीजिए।

21. कस्बे के चौराहे पर किसकी प्रतिमा लगी हुई थी?

(1) नेताजी सुभाष चंद्र बोस क

(2) पंडित जवाहरलाल नेहरू की

(3) डॉ. राजेंद्र प्रसाद की

(4) महात्मा गाँधी की

22. बालगोबिन भगत गले में कैसी माला बाँधे रहते थे?

(1) जंगली फूलों की

(2) तुलसी की जड़ों की एक बेडौल माला

(3) सोने की सुंदर माला

(4) रुद्राक्ष की माला

23. अकेले सफर का वक्त काटने के लिए नवाब साहब ने क्या खरीदा था?

(1) अखबार

(2) पुस्तक

(3) पत्रिका

(4) खीरा

24. मन्नू भंडारी को साहित्य की दुनिया में बकायदा किसने प्रवेश कराया?

(1) मित्रों ने

(2) पति ने

(3) पिता ने

(4) हिन्दी की प्राध्यापिका ने

25. 'पुरइनि पात' का क्या अर्थ है?

(1) पीपल का पत्ता

(2) केले का पत्ता

(3) कमल का पत्ता

(4) कदंब का पत्ता

26. 'आत्मकथ्य' शीर्षक कविता के कवि का क्या नाम है?

(1) देव

(2) जयशंकर प्रसाद

(3) सूरदास

(4) तुलसीदास

27. नागार्जुन ने फसल के लिए किन आवश्यक तत्वों की चर्चा की है?

(1) नदियों का पानी

(2) मिट्टी का गुणधर्म और सूर्य की किरणें

(3) किसानों की मेहनत

(4) उपर्युक्त सभी

28. संगतकार किसे कहा गया है?

(1) मुख्य गायक का साथ देने वाले को

(2) संगति करने वाले को

(3) समूह में रहने वाले को

(4) संगत बनाने वाले को

29. लेखिका को मार्ग में सफेद रंग के जो ध्वज दिखाई दिए थे, वे किस धर्म से संबंधित थे?

(1) बौद्धधर्म

(2) जैनधर्म

(3) ईसाई धर्म

(4) मुस्लिम धर्म

30. हिरोशिमा नगर किस देश में स्थित है?

(1) जापान

(2) फ्रांस

(3) भारत

(4) जर्मनी

खण्ड - B

प्रश्न संख्या 31 से 38 तक अति लघु उत्तरीय प्रश्न है। प्रत्येक प्रश्न 2 अंकों का है। इनमें से किन्हीं 6 प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं 6 प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

गद्यांश : साहस की जिन्दगी सबसे बड़ी जिन्दगी होती है। साहसी मनुष्य की पहचान यह है कि वह बिलकुल निडर होता है और इस बात की चिंता नहीं करता कि तमाशा देखने वाले लोग उसके बारे में क्या सोच रहे हैं। अड़ोस-पड़ोस को देखकर चलना, यह साधारण जीव का काम है। क्रांति करने वाले लोग अपने उद्देश्य की तुलना न तो पड़ोसी के उद्देश्य से करते हैं और न अपनी चाल को पड़ोसी की चाल देखकर धीमा करते हैं।

साहसी मनुष्य सपने भी उधार नहीं लेता, वह अपने विचारों में रमा हुआ अपनी ही किताब पढ़ता है। झुंड में चलना और चरना तो भैंस और भेड़ का काम है। सिंह तो अकेला होने पर भी मगन रहता है।

अर्नाल्ड बेनेट ने लिखा है कि जो आदमी यह महसूस करता है कि किसी महान निश्चय के समय वह साहस से काम नहीं ले सका, वह सुखी नहीं हो सकता है। जिंदगी को ठीक से जीना हमेशा ही जोखिम झेलना है और जोखिम से बचने वाला आदमी जिंदगी का मजा नहीं ले पाता है।

प्रश्न 31. किसे सबसे बड़ी जिन्दगी बताया गया है और उसकी सबसे बड़ी पहचान क्या है?

उत्तर : साहस की जिंदगी को सबसे बड़ी जिदंगी बताया गया है। इसकी पहचान है कि यह बिल्कुल निडर होती है।

प्रश्न 32. साहसी मनुष्य की क्या पहचान है?

उत्तर : साहसी मनुष्य की सबसे बड़ी पहचान है कि वह बिल्कुल निडर होता है। वह इस बात की चिंता नहीं करता कि उसके साहस भरे कार्यों के बारे में अन्य लोग क्या कह रहे हैं। जनमत का उसके ऊपर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

प्रश्न 33. दुनिया की असली ताकत कौन होता है और मनुष्यता को प्रकाश किससे मिलता है?

उत्तर : जनमत की उपेक्षा करके जीने वाला साहसी आदमी दुनिया की असली ताकत होता है और मनुष्यता को प्रकाश भी उसी आदमी से मिलता है।

प्रश्न 34. अर्नाल्ड बेनेट ने एक जगह क्या लिखा है?

उत्तर : अर्नाल्ड बेनेट ने एक जगह लिखा है कि जब कोई व्यक्ति साहस दिखाने के मौके पर हर जाता है तथा कोई साहसिक निर्णय नहीं ले पाता है तो उसकी आत्मा उसे धिक्कारत्ती रहती है।

प्रश्न 35. साधारण जीव का क्या काम है?

उत्तर : अड़ोस-पड़ोस को देखकर भेंड़-चाल चलना साधारण जीव का काम है।

प्रश्न 36. साहसी मनुष्य क्या करता है?

उत्तर : साहसी मनुष्य इस बात की चिंता नहीं करता कि उसके साहस भरे कार्यों के बारे में अन्य लोग क्या कह रहे हैं।

प्रश्न 37. जिन्दगी को ठीक से जीना क्या है?

उत्तर: जिंदगी को ठीक से और पूर्णता के साथ जीने के लिए जोखिम को झेलना होता है। जोखिम मे बचने वाला आदमी अपने घेरे से बाहर नहीं निकल पाता और उस घेरे से बाहर के जीवन का आनन्द नहीं ले पाता।

प्रश्न 38. उपर्युक्त गद्यांश के लिए एक शीर्षक लिखें।

उत्तर: 'साहस सफल जीवन का मूल-तत्व' ।

खण्ड - C

प्रश्न संख्या 39 से 46 तक लघु उत्तरीय प्रश्न है। प्रत्येक प्रश्न 3 अंकों का है। इनमें से किन्हीं 6 प्रश्नों के उत्तर अधिकतम 150 शब्दों में दीजिए।

प्रश्न 39. चश्मे वाले को देख कर हालदार साहब चक्कर में क्यों पड़ गये?

उत्तर : हालदार साहब के दिमाग में यह बात थी कि चश्मा वाला अवश्य कोई फौजी आदमी या नेताजी का साथी रहा होगा। लेकिन उस बूढ़े, मरियल और फेरी वाले व्यक्ति को देख कर हालदार साहब चक्कर में पड़ गये। हालदार साहब यह भी सोचने लगे कि उसका नाम 'कैप्टन' क्यों पड़ा।

प्रश्न 40. वह कौन-सी घटना थी जिसके बारे में सुनने पर लेखिका को न अपनी आँखों पर विश्वास हो पाया और न अपने कानों पर?

उत्तर : लेखिका के आन्दोलनकारी व्यवहार को लेकर कॉलेज के प्रिंसिपल ने लेखिका के पिता को बुलवाया। लेखिका के पिता ने कॉलेज जाकर सारी बातों का जायजा लिया। यह सुनकर कि उनकी बेटी कॉलेज की नेत्री है और स्वतंत्रता आन्दोलन में सक्रिय रूप से भाग ले रही है, उन्होंने काफी गर्व महसूस किया। उन्होंने प्रिंसिपल को उत्तर दिया कि "यह तो देश की पुकार है। इसे कोई कैसे रोक सकता है।" इस घटना के बारे में सुनने पर लेखिका को न अपनी आँखों पर विश्वास हो पाया और न अपने कानों पर। पिताजी ने घर आकर भी लेखिका को शाबासी दी। इससे लेखिका को उनके बदले हुए व्यवहार पर काफी आश्चर्य हुआ।

प्रश्न 41. 'बिस्मिल्लाह खाँ कला के अनन्य उपासक थे।' तर्क सहित उत्तर दें।

उत्तर : बिस्मिल्लाह खाँ ने 80 वर्षों तक शहनाई वादन का काम किया। भारत में वे सबसे बड़े शहनाई वादक थे। उन्हें शहनाई वादन में 'भारत-रत्न' की उपाधि मिली। वे कला के क्षेत्र में प्रथम व्यक्ति थे जिन्हें भारत-रत्न की उपाधि मिली। वे अंत-अंत तक खुदा से अच्छे सुर की माँग करते रहे। वे कभी-भी इस क्षेत्र में अपने को पूर्ण नहीं मानते थे। इससे पता चलता है कि वे सच्चे कला-साधक थे।

प्रश्न 42. 'उत्साह' कविता का उद्देश्य/संदेश स्पष्ट करें।

उत्तर : 'उत्साह' कविता एक प्रतीकात्मक कविता है। इसमें बादल उत्साह का प्रतीक है। कवि बादल से निवेदन करता है कि वह सारे गगन को घेरकर छा जाय। वह अपनी कविता से आकाश को बैंक ले। वह सम्पूर्ण मानव-जीवन में एक नया उत्साह भर दे। वह अपने गर्जन-वर्धन से लोगों के मन में क्रांति की शक्ति पैदा कर दे।

कवि का मानना है कि अभी सारा संसार पीड़ा और ताप से दुखी है। कवि बादल से अनुरोध करता है कि वह अपने शीतल जल की धारा से लोगों को शांति प्रदान करे।

प्रश्न 43. 'अट नहीं रही है' कविता में कवि ने प्रकृति की व्यापकता का वर्णन किन रूपों में किया है?

उत्तर : प्रस्तुत कविता में कवि ने प्रकृति की व्यापकता का वर्णन कई रूपों में किया है। प्रकृति को हर जगह छलकता हुआ तथा घर-घर में फैला हुआ दिखाया गया है। इसमें कवि ने प्रकृति को असीम रूप में दिखाया है। 'कहीं साँस लेते हो' का आशय है कि कहीं मादक हवाएँ चल रही हैं। 'घर-घर में भरने के भी अनेक अर्थ हो सकते हैं। शोभा का भरना, फूलों का भरना, खुशी और उमंग का भरना आदि। इस प्रकार इस कविता में कवि ने प्रकृति की व्यापकता का वर्णन कई रूपों में किया है।

प्रश्न 44. 'उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ, मधुर चाँदनी रातों की' कथन के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?

उत्तर: इस पद्यांश के माध्यम से कवि कहना चाहता है कि व्यक्तिगत प्रेम के मधुर क्षण सभी के सामने कहने योग्य नहीं होते। मधुर चाँदनी में बिताये गये प्रेम के क्षण कोर्ड पवित्र कथा के समान होते हैं। उसकी यह गाथा बिल्कुल निजी होती है। अतः इसे आत्मकथा में नहीं लिखा जा सकता।

प्रश्न 45. प्रकृति ने जल संचय की व्यवस्था किस प्रकार की है?

उत्तर : प्रकृति ने जल संचय की अद्भुत व्यवस्था की है। ठंढे मौसम में पर्वतों पर जल संचयन बर्फ के रूप में होता है। गर्मियों में जलधारा के रूप में बहने लगती है। इससे करोड़ों लोगों की प्यास बुझाती है। अधिकांश नदियाँ पहाड़ों से निकली हैं। समुद्र में बने जलवाष्प समतल भूमि पर वर्षा के रूप में और पहाड़ों पर बर्फ के रूप में जमा होती है। कुएँ, तालाबों आदि में इसी से जलापूर्ति होती है। प्रकृति ने जल-चक्र के माध्यम से ही जल की व्यवस्था पृथ्वी पर की है।

प्रश्न 46. लेखक के अनुसार प्रत्यक्ष अनुभव की अपेक्षा अनुभूति उनके लेखन में अधिक मदद करती है। क्यों?

उत्तर : लेखक का मानना है कि सच्चा लेखक अपनी अनुभूतियों को लेखनी के सहारे कलमबद्ध करता है। अनुभूतियाँ लेखक की विवशता हैं। बाहरी घटनाओं को देखकर लेखक की अनुभूतियाँ नहीं जगतीं। किसी. भी कवि का हृदय किसी चीज को देखकर या किसी अनुभव के आधार पर संवेदित नहीं होता। जब अभिव्यक्त होने की पीड़ा उसे अकुलाने लगती है तभी वह कुछ लिख पाता है।

खण्ड D

प्रश्न संख्या 47 से 52 तक दीर्घ उत्तरीय प्रश्न है। प्रत्येक प्रश्न 5 अंकों का है। इनमें से किन्हीं 4 प्रश्नों के उत्तर अधिकतम 250 शब्दों में दीजिए।

प्रश्न 47. बिस्मिल्ला खाँ के जीवन से जुड़े उन घटनाओं और व्यक्तियों का उल्लेख करें जिन्होंने उनकी संगीत-साधना को समृद्ध किया।

उत्तर : बिस्मिल्ला खाँ की संगीत-साधना को समृद्ध करने में रसूलनबाई, बतूलनबाई, मामूजान अली बख्श खाँ, नाना, कुलसुम हलवाइन और अभिनेत्री सुलोचना की प्रमुख भूमिका रही।

रसूलनबाई और बतूलनबाई ने उन्हें संगीत-साधना की ओर प्रेरित किया। प्रथम प्रेरणा उन्हीं दोनों गायिकाओं से उन्हें मिली। बाद में उन्हें अपने नाना की मधुर शहनाई ने अपनी ओर आकर्षित किया। मामू जान अली बख्श जब शहनाई बजाते-बजाते सम पर आ जाते थे तो बिस्मिल्ला खाँ ने धड़ से एक पत्थर जमीन पर मारकर संगीत में दाद देना सीखा। अभिनेत्री सुलाचोना की फिल्मों से भी इनकी साधना को काफी बल मिला।

अथवा, मनुष्य के जीवन में आस-पड़ोस का बहुत महत्व होता है। परन्तु महानगरों में रहने वाले लोग प्रायः पड़ोस कल्चर से वंचित रह जाते हैं। इस बारे में अपने विचार लिखिए।

उत्तर : पास-पड़ोस मनुष्य की वास्तविक शक्ति होती है। किसी मुसीबत में तत्काल पड़ोसी ही काम आते हैं। पड़ोस कल्चर हमें सुरक्षा और अपनत्व प्रदान करती है। हमारा जीवन सामाजिक बना रहता है। परन्तु यह दुर्भाग्य की बात है कि आज नगरों और महानगरों में पड़ोस-संस्कृति खत्म होती जा रही है। अब एक नयी संस्कृति का जन्म हुआ है, जिसे फ्लैट संस्कृति कहा जा सकता है। लोग अपने फ्लैट रूपी पिंजरे में बन्द होकर जीने को अभ्यस्त हो गये हैं। बच्चे भी खुलापन महसूस नहीं करते हैं। इससे मानवीय एवं सामाजिक संवेदना लुप्त होती जा रही है।

प्रश्न 48. गोपियों ने किन-किन उदाहरणों के माध्यम से उद्धव को उलाहने दिये हैं?

उत्तर : गोपियों ने निम्नलिखित माध्यमों से उद्धव को उलाहने दिये हैं:

(i) गोपियों का कहना था कि कृष्ण के प्रति उनकी प्रेम-भावना मन में ही दब कर रह गयी। वे अपनी भावनाओं को न तो कृष्ण से कह पायीं और न किसी दूसरे से कह सकती हैं।

(ii) गोपियाँ कृष्ण की प्रतीक्षा में ही जी रही थीं लेकिन कृष्ण ने उद्धव के माध्यम योग का संदेश भिजवा कर उनकी वेदना को और भी बढ़ा दिया।

(iii) गोपियाँ कृष्ण की विरह-व्यधा से पीडित होकर कृष्ण से रक्षा की माँग करना चाह रही थीं। यह उनके सखा से प्रेम-संदेश की अपेक्षा करती थीं लेकिन उद्धव के योग संदेश से उनका हृदय टुकड़े टुकड़े में विभाजित हो गया।

प्रश्न 49. जितेन नार्गे ने लेखिका को सिक्किम की प्रकृति, वहाँ की भौगोलिक स्थिति एवं जनजीवन के बारे में क्या महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ दीं, लिखें।

उत्तर : जितेन नार्गे लेखिका के जीप चालक के साथ ही साथ गाइड भी था। जितेन एक समझदार तथा मानवीय संवेदनाओं से परिपूर्ण व्यक्ति था। उसने लेखिका को सिक्किम के संबंध में महत्त्वपूर्ण आनकारियाँ दी थीं। उसका कहना था कि सिक्किम काफी सौन्दर्यशाली प्रदेश है। वह समतल मैदानी भू-भाग नहीं बल्कि पहाड़ी प्रदेश है। यूमथांग की 149 कि.मी. की यात्रा में हिमालय की गहनतम घाटियों और फूलों से लदी वादियों के दर्शन होते हैं।

सिक्किम प्रदेश चीन की सीमा से सटा है। पहले वहाँ राजशाही थी और अब वह भारत में मिल गया है। वहाँ के अधिकांश लोग बौद्ध धर्मावलम्बी हैं। यदि किसी बुद्धिस्ट की मृत्यु हो जाती है तो उसकी आत्मा की शांति के लिए 108 सफेद पताकाएँ फहरायी जाती हैं। किसी शुभ कार्य के अवसर पर रंगीन पताकाएँ फहरायी जाती हैं। वहाँ के लोग काफी मेहनती हैं। वहाँ की औरतें भी काफी परिश्रमी होती हैं। कभी-कभी टोकरी में अपने बच्चों को भी लेकर चढ़ाई पर चढ़ती हैं। वहाँ की खियाँ रंगीन और चटकदार कपड़े पहनना पसन्द करती हैं। उनकी परम्परागत पोशाक 'बोकू' है।

प्रश्न 50. दिये गये संकेत बिन्दुओं के आधार पर निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर निबंध लिखें।

(क) राष्ट्रीय एकता अथवा, हम भारतवासी एक हैं, अथवा, हम सब एक हैं

संकेत बिन्दु : भूमिका / एकता से लाभ, भारत में अनेकता के कारक, आजादी पाने में एकता का योगदान, उपसंहार

(ख) मनोरंजन के आधुनिक साधन

संकेत बिन्दु : भूमिका, मनोरंजन की आवश्यकता, पुराने साधन, आधुनिक साधन, उपसंहार।

(ग) भारतीय नारी एवं शिक्षा अथवा, स्त्री-शिक्षा का महत्त्व

संकेत बिन्दु : भूमिका, विविध मत, भारत में नारी शिक्षा का इतिहास, नारी निरक्षरता के कुपरिणाम, नारी शिक्षा का महत्व, वर्तमान में नारी शिक्षा, उपसंहार

उत्तर :

(क) राष्ट्रीय एकता / हम भारतवासी एक हैं

किसी भी राष्ट्र के लिए एकता की सबसे बड़ी भूमिका होती है। राष्ट्र की रक्षा ही नहीं उसके विकास के लिए, नागरिकों की खुशहाली और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए भी एकता अनिवार्य है। एक राष्ट्र के लिए भोजन, बीमारी, जनसंख्या आदि की समस्याएँ कोई बड़ी समस्या नहीं है, यदि वहाँ के नागरिक जागरूक और एकता के सूत्र में बँधे हुए हों।

भारत के संबंध में राष्ट्रीय एकता तो और भी महत्त्व रखती है। महादेश की तरह इसकी विशालता है। भाषा, धर्म, संस्कृति, जलवायु, खान-पान, रीति-रिवाज, पहनावे सब-के-सब भिन्नता लिये हुए हैं. अलग-अलग पहचान रखते हैं। कभी-कभी तो इन्हें लेकर एक-दूसरे के प्रति घृणा अथवा बैर भाव प्रकट हो जाता है। अतः भारत की एकता बड़ी आवश्यक है।

भारत की संस्कृति किसी एक धर्म, जाति के सह‌योग से नहीं बनी, इसमें सबों का योगदान है। हम हिन्दू, मुसलमान, सिक्ख, ईसाई सब भाई-भाई की तरह रहें। हम याद रखें कि हम सबों को पहीं रहना है। यह देश सबों का है। राष्ट्रीय एकता के लिए यह आवश्यक है कि सबों को न्याय मिले, सब सुखी रहें, कोई दुःखी न हो। हम भूखों को रोटी दें, निरक्षरों को साक्षर बनाएँ।

हमारी राष्ट्रीय एकता को बनाये रखने के लिए प्राचीन काल से ही प्रयास होता रहा है। इसी तरह महाभारत काल और बाद के समय में भी प्रयास होता रहा है। शंकराचार्य ने चार मठों की स्थापना करके हमें भावात्मक एकता से आज तक बाँध रखा है।

राष्ट्रीय एकता के अभाव में हम पराधीन रहे और इसी एकता के आने पर हम स्वतंत्र हो गये। आजादी की लड़ाई ने उत्तर-दक्षिण, हिन्दू-मुस्लिम, ऊँच-नीच का भेदभाव मिटा दिया था। यदि यही एकता रही तो हम सदा सुखी और स्वतंत्र रहेंगे।

वास्तव में भारत अनेकता में एकता का देश है। यदि हमारा विचार एक रहेगा तो हमें कोई नहीं बाँट सकता।

(ख) मनोरंजन के आधुनिक साधन

जीवन को उबाऊ और बोझिल होने से बचाने के लिए मनोरंजन आवश्यक है। शारीरिक या मानसिक श्रम के पश्चात् विश्राम एवं मनोरंजन व्यक्ति की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है।

जीवन में आनन्द, उत्साह, स्फूर्ति का भाव मनोरंजन से ही आता है। मनोरंजन व्यक्ति की कार्यक्षमता बढ़ाता है। यह हमारे शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अत्यावश्यक है।

प्राचीन काल से ही मनोरंजन का हमारे जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रहा है। लोक नृत्य एवं संगीत, कृषि ऋतुओं के बाद त्योहारों के मौसम, शादी-ब्याह के आयोजन सभी मनोरंजन के पारंपरिक साधन रहे हैं। गाँवों की चौपाल, कबड्डी और खो-खो जैसे खेल, शतरंज, मल्ल युद्ध, घुड़दौड़, नौटंकी-नाटक, भजन-कीर्तन, देशाटन एवं तीर्थ-यात्राएँ सभी प्राचीन काल से ही लोगों की मनोरंजन की आवश्यकता के पूरक रहे हैं।

समय बदला और मनोरंजन की ललक ने अनेक नये मनोरंजन के साधनों को जन्म दिया। खेल और फिल्मों ने सबसे ज्यादा लोगों का मन मोहा। क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस, बैटमिंटन, एथलेटिक्स, मुक्केबाजी, जैसे खेलों ने सारे संसार के बच्चों और युवाओं को ऊर्जा से भर दिया। फिल्मों ने मनोरंजन की नयी परिभाषाएँ गढ़ दीं। उपन्यास, पत्र-पत्रिकाओं तथा समाचार पत्रों ने लोगों की सुबह एवं शामों को गुलजार कर दिया।

आधुनिक समय में टेलीविजन, मोबाइल और कम्प्यूटर जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम मनोरंजन के प्रमुख साधन बन गये हैं। मनोरंजन का सारा संसार अब आपके कमरे में सिमट गया है। जीवंत समाचार, मैचों का लाइव प्रसारण, फिल्में तथा सीरियल्स, कॉमेडी, एडवेंचर-सभी एक बटन दबाते ही आपका मन बहलाने को हाजिर हो जाते हैं। मनोरंजन के आधुनिक साधन के रूप में पिकनिक, पार्टी तथा पर्यटन भी तेजी से उभरे हैं। बच्चे तो आज 'गेम' नहीं के बराबर खेल रहे, 'बीडियोगेम' के ही दीवाने हैं। इंटरनेट ने युवाओं का मन मोह लिया है। ओ.टी.टी. के वेब सिरीज लोगों की पसंद के कंटेंट दे कर उलझाए रहते हैं।

मनोरंजन के इन आधुनिक साधनों के कुप्रभाव भी सामने आ रहे हैं। खेलों एवं शारीरिक मेहनत की ओर बच्चों एवं युवाओं का घटता रूझान अब स्वास्थ्य सम्बन्धी चिंताएँ पैदा कर रहा है। इसी प्रकार लोगों का अपने कमरों में सिमट जाना एक सामाजिक समस्या बनती जा रही है।

(ग) भारतीय नारी एवं शिक्षा अथवा, स्त्री-शिक्षा का महत्त्व

भारत में निरक्षरता और स्त्री-शिक्षा की समस्या भारत एक ऐसा देश है, जिसकी जड़ों में निरक्षरता, अज्ञान और कुशिक्षा का घुन शताब्दियों से लगा हुआ है। अल्पसंख्या में ही सही पुरुष-वर्ग येन-केन-प्रकारेण शिक्षा पाते रहे, लेकिन खियों को शिक्षा के अधिकार से पूर्णतः वंचित कर दिया गया।

भारत में नारी शिक्षा का इतिहास स्त्रियों में शिक्षा के प्रति ललक उत्पन्न करने तथा पुरुषों को उन्हें पढ़ाने-लिखाने के लिए प्रेरित करने में आर्य समाज का योगदान सराहनीय था। अनेक स्त्रियों ने वेदमन्त्रों की रचना की। मैत्रेयी, गार्गी, अरूंधती आदि महान नारियों का समाज में सम्मानजनक स्थान था। लेकिन, भारतीय पुरुष-वर्ग की मध्यकालीन मानसिकता अभी तक खत्म नहीं हुई। लड़कियों को शिक्षा देना वे व्यर्थ समझते थे। उनका विचार था कि उसे घर की चहारदीवारी के अन्दर रहना है। अतः पढ़-लिख कर क्या करेगी?

भारत में नारी निरक्षरता के कुपरिणाम अशिक्षा के कारण स्त्रियाँ पूर्णतः पुरुषों के अधीन हो जाती है। समाज और देश की अनेक बुराइयों की जड़ नारियों का अशिक्षित होना है। अशिक्षित होने के कारण ही वे कुपोषित, शोषित, अंधविश्वासों से ग्रस्त और रूढ़ि‌यों की दासी बनी हुई हैं। सुशिक्षित नारियाँ आर्थिक रूप से स्वतंत्र बन सकती हैं। दहेज-दानव का अत्याचार बंद हो सकता है। वे भी मताधिकार का उपयुक्त उपयोग कर सकती हैं। लोकतंत्र की प्रक्रिया में बराबर की सहभागिनी बन सकती हैं। सुशिक्षित नारियों की संचेतना देश को बहुत ऊपर उठा सकती है।

स्त्री-शिक्षा का महत्त्व: यह एक वास्तविकता है कि माँ की गोद ही शिशु की प्रथम पाठशाला होती है। माँ की गोद में शिशु जो कुछ सीखता है, जो संस्कार अर्जित करता है, वह उसका जन्म घर का साथी होता है। वही सीख और संस्कार भविष्य में उसके जीवन के दिशा-निर्देशक बनते हैं। यदि माँ अशिक्षित होगी, तो वह अपने बच्चों को सही सीख और संस्कार नहीं दे पायेगी।

यह स्वयंसिद्ध तथ्य है कि नारी और पुरुष, दोनों ही समाज के अभिन्न अंग होते हैं। इन्हीं दोनों की धुरी पर समाज का रथ चलता है। स्त्री के अशिक्षित रह जाने का अर्थ समाज का अपंग या पंगु हो जाना है। अशिक्षित स्त्रियों वाला समाज या देश घसीट-घसीट कर चलता है। अतः स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए, देश की प्रगति के लिए नारी और पुरुष दोनों का सुशिक्षित होना जरूरी है।

भारत में नारी-शिक्षा की वर्तमान स्थिति वर्तमान समय में नारी शिक्षा की स्थिति में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। स्कूल-कॉलेजों में उनकी संख्या बढ़ी है। वे अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। जीवन के कई क्षेत्रों में, वे सफलता के नये कीर्तिमान गढ़ चुकी हैं। वे डॉक्टर हैं, शिक्षिकाएँ हैं। इन्जीनियर और वैज्ञानिक हैं। वे सेना में हैं, पुलिस-सेवा में हैं। प्रशासनिक पदाधिकारी हैं। संसद और विधान मण्डलों में हैं। वे मंत्री भी हैं और देश की राजनीति में बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रही हैं। फिलवक्त उनके आगे बढ़ने पर कोई रोक नहीं है।

पर यह सवीर का एक पहलू है। तसवीर का दूसरा पहलू अभी तक बदनुमा है। ग्रामीण क्षेत्र की गरीब परिवार की औरतें मजदूरी करती हैं, गुलामी करती हैं। जरूरत देश की हर बालिका और स्त्री को सुशिक्षित करने की है। वे जब सम्पूर्णतः सुशिक्षित बनेगी, तभी वे देश और समाज की उन्नति में पुरुष के बराबर हिस्सा ले सकती हैं।

प्रश्न 51. वार्षिक परीक्षा की तैयारी का वर्णन करते हुए पिताजी को एक पत्र लिखिए।

उत्तर :

पूज्य पिताजी,

सादर प्रणाम।

कमरा न. 11, नया छात्रावास,

आदर्श विद्यालय, चाईबासा ।

11 जनवरी, 2026

आपका पत्र मिला। आप मेरी वार्षिक परीक्षा की तैयारी के बारे में जानने को उत्सुक हैं। पिताजी, आपकी प्रेरणा एवं निर्देशों के अनुसार ही मैं अपनी वार्षिक परीक्षा की तैयारी कर रहा हूँ। अब क्योंकि परीक्षा निकट है, मैंने पढ़ने का समय बढ़ा दिया है। अब मेरा ज्यादा ध्यान पाठों के दुहराने पर तथा प्रश्नों को बिना देखे हल करने के अभ्यास पर केन्द्रित है।

मैं देख रहा हूँ कि इससे मेरा आत्मविश्वास काफी बढ़ता जा रहा है। कोई दिक्कत होने पर गुरुजी से सहायता लेता हूँ। कक्षा में भी आजकल अभ्यास परीक्षाएँ होती रहती हैं। आपके आशीर्वाद से इनमें मुझे प्रायः हर बार कक्षा में सर्वाधिक अंक प्राप्त हो रहे हैं।

आशा है, मैं परीक्षा में अच्छे अंक लाकर आपकी आकांक्षा पर खरा उतरूंगा।

इस संदर्भ में भैया को भी निश्चिन्त रहने को कहियेगा। माँ को मेरा प्रणाम कह देंगे।

आपका आज्ञाकारी पुत्र

अजय

अथवा, अपने जिले के उपायुक्त को पत्र लिखकर बढ़ते प्रदूषण एवं अनियंत्रित पेड़ पौधों की कटाई के बारे में पत्र लिखकर समाधान का अनुरोध करें।

उत्तर :

सेवा में,

उपायुक्त महोदय, राँची।

महोदय,

हम नामकुम क्षेत्र के निवासी आपका ध्यान इस क्षेत्र में प्रदूषण तथा अनियंत्रित पेड़-पौधों की कटाई की ओर आकृष्ट करना चाहते हैं। इस क्षेत्र में पिछले कई माह से पेड़ों की कटाई बेरोक-टोक जारी है। इसके परिणामस्वरूप सम्पूर्ण क्षेत्र वृक्षविहीन हो गया है। इससे पर्यावरण पर भी गंभीर प्रभाव पड़ा है।

वाहनों से निकलने वाले धुएँ के कारण वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ा है। इससे लोगों का स्वास्थ्य भी प्रभावित हुआ है।

अगर प्रदूषण एवं वृक्षों की अनियंत्रित कटाई को समय रहते रोका नहीं गया तो इस क्षेत्र के लोगों का जीवन दुर्लभ हो जाएगा।

अतः हम प्रार्थना करते हैं कि इस दिशा में उचित कदम उठाये जायें।

भवदीय,

दिनांक 21 जनवरी, 2026

नामकुम क्षेत्र के निवासी।

प्रश्न 52. समाज में बढ़ रहे अपराधों के प्रति जन-जागरूकता के उद्देश्य से लगभग 50 शुब्दों में एक विज्ञापन तैयार करें।

उत्तर :

अपराध नियन्त्रण जागरूकता कार्यक्रम

आपका सहयोग. हमारी सफलता.

·         अपराध रोकने में हर नागरिक का योगदान है.

·         सतर्क रहिए, सचेत रहिए.

·         आपराधिक गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस को दें.

·         महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा का ध्यान रखें.

·         साइबर अपराधों से सतर्क रहें.

·         न अफवाह फैलाएँ और न अफवाह फैलने दें।

जिला पुलिस कार्यालय

अथवा,

प्रश्न : सुन्दर, काले एवं मजबूत बालों के लिए 'रत्ना केश तेल' के प्रचार-प्रसार हेतु लगभग 50 शब्दों में एक विज्ञापन तैयार कीजिए।

उत्तर :

सुन्दर, काले एवं मजबूत बालों के लिए

रत्ना केश तेल

·         आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से निर्मित बालों को झड़ने-टूटने से रोकें

·         हानिकारक केमिकल्स की जगह आयुर्वेदिक तत्वों से बना

·         बालों के सौन्दर्य एवं सुरक्षा के लिए अवश्य प्रयोग करें

सम्पर्क करें: अधिकृत डीलर सुरुचि मार्केटिंग मो. 9944332211

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