Class 10 Social Science All Subjects Model Question Answer 2025-26

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अन्य महत्वपूर्ण परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

इतिहास

यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय

Q. 'स्वतंत्रता, समानता एवं बंधुत्व' का नारा किस क्रांति की देन है?

(1) रूसी क्रांति

(2) फ्रांसीसी क्रांति

(3) अमेरिकी क्रांति

(4) भारतीय क्रांति

Q. किसका कथन है "जब फ्रांस छींकता है तो बाकी यूरोप को सर्दी-जुकाम हो जाता है।"

(1) मैटरनिख

(2) मेत्सिनी

(3) बिस्मार्क

(4) रूसो

Q. फ्रांस की क्रांति कब हुई?

(1) 14 जुलाई 1789

(2) 4 जुलाई 1776

(3) 15 अगस्त 1947

(4) 26 जनवरी 1950

Q. 1789 ई. में फ्रांस की क्रांति के समय किसका शासन था?

(1) लुई XIV

(2) लुई XV

(3) लुई XVI

(4) लुई XVII

Q. किसके कल्पनादर्श (यूटोपिया) में एक आदर्श समाज की कल्पना की गई है?

(1) मेत्सिनी

(2) नेपोलियन

(3) कार्ल कैस्पर

(4) फ्रेडरिक सॉरयू

Q. 1804 की नागरिक संहिता जिसे आमतौर पर नेपोलियन की संहिता के नाम से भी जाना जाता है, उसने फ्रांस के सुधार के लिए क्या कदम उठाया?

(1) जन्म पर आधारित विशेषाधिकार की समाप्ति

(2) कानून के समक्ष बराबरी और संपत्ति के अधिकार को सुरक्षा

(3) प्रशासनिक विभाजनों को सरल बनाया

(4) इनमें से सभी

Q. 1832 में किस संधि के द्वारा यूनान को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता मिली ?

(1) वियना

(2) कुस्तुनतुनिया

(3) पेरिस

(4) वर्साय

Q. जर्मनी के एकीकरण के लिए बिस्मार्क ने कौन-सी नीति अपनाई?

(1) खून और खड्ग

(2) अहिंसा

(3) गठबंधन

(4) शांति-वार्ता।

Q. किसी राष्ट्र की सामूहिक पहचान को क्या कहते हैं?

(1) निरंकुशवाद

(2) राष्ट्रवाद

(3) रूढ़िवाद

(4) उदारवाद

Q. मारीआन किस देश के राष्ट्रवाद की प्रतीक थी?

(1) फ्रांस

(2) रूस

(3) इटली

(4) जर्मनी

Q. 'यंग इटली' और 'यंग यूरोप' नामक दो भूमिगत संगठनों की स्थापना किसने की थी?

(1) काबूर

(2) बिस्मार्क

(3) गैरीबाल्डी

(4) मैजिनी

Q. इटली के एकीकरण की रूपरेखा देने वाले क्रांतिकारी ज्यूसेपे मेत्सिनी का जन्म कब और कहाँ हुआ था?

(1) 1807 ई., जेनेवा

(2) 1804 ई., पेरिस

(3) 1801 ई., रोम

(4) 1815 ई., पेपल

Q. किसका विश्वास था कि ईश्वर की मर्जी के अनुसार राष्ट्र ही मनुष्यों की प्राकृतिक इकाई थी?

(1) नेपोलियन

(2) निकोलस

(3) ज्यूसेपे मेत्सिनी

(4) मैटरनिख

Q. 'यंग इटली' भूमिगत संगठन के संस्थापक कौन थे?

(1) हिटलर

(2) नेपोलिय

(3) ज्युसेपि मेत्स्नी

(4) कार्लमार्क्स

Q. 1815 में आयोजित 'वियना सम्मेलन' की मेजबानी किसने की?

(1) मेत्सिनी

(2) रूसो

(3) गैरीबाल्डी

(4) मेटरनिख

Q. 1848 में यूरोपीय देशों के किसान-मजदूर किन कारणों से विद्रोह कर रहे थे?

(1) गरीबी

(2) बेरोजगारी

(3) भूखमरी

(4) इनमें से सभी

Q. 'सामाजिक उपबंध' (Social Contract) नामक पुस्तक का लेखक कौन था?

(1) रूसो

(2) मॉन्टेस्क्यू

(3) दिदरो

(4) वॉल्टेयर

Q. "पहले तुम मनुष्य हो, उसके बाद किसी देश के नागरिक या अन्य कुछ" यह कथन किसका है?

(1) मेत्सिनी

(2) वॉल्टेयर

(3) रूसो

(4) दिदरो

प्रश्न : कल्पनादर्श या यूटोपिया से आप क्या समझते हैं?

उत्तर : एक ऐसे आदर्श समाज की कल्पना जिसे वास्तविकता के घरातल पर लाना लगभग असंभव है, यूटोपिया या कल्पनादर्श के नाम से जाना जाता है। यूटोपिया के प्रणेता फ्रेड्रिक सॉरयू थे।

प्रश्न : उदारवाद का क्या अर्थ है?

उत्तर : उदारवाद (Liberalism) की उत्पत्ति लैटिन भाषा के liber शब्द से हुई है जिसका अर्थ होता है - आजादी या स्वतंत्रता। व्यापक अर्थों में उदारवाद, कानून के समक्ष समानता, आम सहमति से बनी सरकार, शासक वर्ग, पादरी वर्ग तथा कुलीन वर्ग के विशेषाधिकारों की समाप्ति तथा सभी नागरिकों के लिए मताधिकार का समर्थन करता है।

प्रश्न : समन्वयवाद से क्या अभिप्राय है?

उत्तर : दो अलग-अलग मान्यताओं को उनकी भिन्नताओं तथा समानताओं को ध्यान में रखते हुए साथ लाने का प्रयास समन्वयवाद के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न : नेपोलियन बोनापार्ट कौन था?

उत्तर : नेपोलियन बोनापार्ट फ्रांस का एक महान सेनानायक था जिसके नेतृत्व में फ्रांस ने अनेक विजय प्राप्त कीं तथा बाद में उसे फ्रांस का पहला सम्राट घोषित किया गया। उसके द्वारा शासन व्यवस्था के लिए बनायी गयी आचार संहिता प्रसिद्ध है।

प्रश्न : 'नारीवाद' से क्या अभिप्राय है?

उत्तर : 'नारीवाद' एक ऐसा दर्शन है जो स्त्री-पुरुष की सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक समानता के सिद्धान्त पर आधारित है।

प्रश्न : जनमत संग्रह से क्या अभिप्राय है?

उत्तर : किसी निश्चित क्षेत्र में किसी खास विषय पर उस क्षेत्र के निवासियों के विचारों के संग्रह को जनमत संग्रह कहा जाता है। जनमत संग्रह लोकतंत्र का आधार है।

प्रश्न : मैटरनिख कौन था?

उत्तर : ड्यूक मैटरनिख ऑस्ट्रिया का चांसलर था। उसने 1815 ई. में वियना कांग्रेस की मेजबानी की थी।

प्रश्न: 1815 की वियना संधि के क्या उद्देश्य थे?

उत्तर : युद्धों को रोकने के लिए एक संविधान का निर्माण, पराजित राष्ट्रों द्वारा विजयी राष्ट्रों को क्षतिपूर्ति, फ्रांस तथा अन्य राजतंत्रों को फिर से बहाल करना तथा दास प्रथा की समाप्ति।

प्रश्न : बिस्मार्क कौन था? उसने कौन सी नीति अपनायी?

उत्तर : बिस्मार्क प्रशा का चांसलर था। जर्मनी के एकीकरण में उसकी अत्यंत महत्त्वपूर्ण भूमिका थी। इसके लिए उसने 'खून और खड्ग' की नीति अपनायी।

प्रश्न: रूपक से आपका क्या तात्पर्य है?

उत्तर : जब किसी अमूर्त भावना या विचार को किसी मूर्त आकृति के रूप में दर्शाया जाता है तो इसे 'रूपक' कहा जाता है। जैसे टूटी जंजीर, मशाल, नारी के रूप में राष्ट्र का कल्याणकारी स्वरूप आदि जन-जन में राष्ट्रीयता की भावना को जगा देते हैं।

प्रश्न : ऑटोमॉन साम्राज्य से क्या तात्पर्य है?

उत्तर : तुर्की शासन के अधीन आने वाला, पश्चिमी एशिया, पूर्वी यूरोप के बाल्कन क्षेत्र तथा उत्तरी अफ्रीका तक फैले साम्राज्य को ऑटोमन साम्राज्य कहा जाता है। राष्ट्रवाद के उदय के साथ, प्रथम विश्व-युद्ध के पहले तक यह अनेक स्वतन्त्र राष्ट्रों में विभाजित हो गया।

प्रश्न : ज्युसेपी मेत्सिनी कौन था? राष्ट्रवाद के विकास में उसका क्या योगदान था?

अथवा, ज्युसेपी मेत्सिनी पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।

उत्तर : (1) ज्युसेपी मेत्सिनी इटली का एक महान क्रांतिकारी था। वह निरंकुश राजतंत्र का विरोधी एवं उदार लोकतंत्र का समर्थक था। उसने इटली के एकीकरण की रूपरेखा तैयार की।

(2) अपने विचारों को कार्य रूप देने के उद्देश्य से मेत्सिनी, कार्बोमारी के गुप्त संगठन का सदस्य बन गया। लिगुरिया में विद्रोह के आरोप में बहिष्कृत होने के बाद उसने दो भूमिगत संगठनों की स्थापना की। ये संगठन थे- 'यंग इटली' तथा 'यंग यूरोप'।

(3) मेत्सिनी का मानना था कि ईश्वर की मर्जी के अनुसार राष्ट्र ही मनुष्यों की प्राकृतिक इकाई है। उसके प्रयासों से अन्ततः इटली का एकीकरण संभव हुआ।

प्रश्न : उदारवादियों की 1848 की क्रान्ति का क्या अर्थ लगाया जाता है?

अथवा, उदारवादी राष्ट्रवाद के क्या मायने थे?

उत्तर : उदारवादियों की 1848 की क्रान्ति का अर्थ था राजतन्त्र की समाप्ति एवं गणतन्त्र की स्थापना। उदारवादियों की 1848 की क्रान्ति फ्रांस के मध्यमवर्गीय लोगों से सम्बन्धित थी। उदारवादियों की 1848 ई. की क्रांति का अर्थ राष्ट्रवाद के विजय तथा शेष विश्व में राष्ट्र-राज्यों के अभ्युदय से लगाया जाता है।

इस क्रांति में निरंकुश राजतन्त्र तथा पादरी एवं कुलीन वर्ग के विशेषाधिकारों का विरोध किया गया। मताधिकार पर आधारित संसदीय शासन, कानून के समक्ष सबकी बराबरी, आम जनता का आर्थिक कल्याण आदि पर जोर दिया गया। इस प्रकार उदारवाद गणतंत्र, राष्ट्र राज्य, संविधानवाद, प्रेस की स्वतंत्रता तथा संगठन बनाने की स्वतंत्रता के संसदीय विचारों पर आधारित है।

इस क्रान्ति के फलस्वरूप फरवरी, 1848 में फ्रांस के सम्राट को सिंहासन छोड़ना पड़ा और फ्रांस में गणतन्त्र की स्थापना की गयी। यह गणतन्त्र पुरुषों के सर्वव्यापी मताधिकार पर आधारित था।

भारत में राष्ट्रवाद

Q. सरदार बल्लभ भाई पटेल ने किस किसान आन्दोलन का नेतृत्व किया था?

(1) खेड़ा आन्दोलन

(2) बारदोली आन्दोलन

(3) चंपारण आन्दोलन

(4) व्यक्तिगत सत्याग्रह आन्दोलन

Q. किसानों के लिए गुजरात के खेड़ा में गाँधीजी ने सत्याग्रह कब किया?

(1) 1916 ई.

(2) 1917 ई.

(3) 1918 ई.

(4) 1920 ई.।

Q. किस एक्ट के तहत बागानों में काम करने वाले मजदूरों को बगैर इजाजत बागानों से बाहर जाने की छूट नहीं थी?

(1) रॉलेट एक्ट

(2) वर्नाक्यूलर एक्ट

(3) इनलैंड इमीग्रेशन एक्ट

(4) साइमन कमीशन

Q. 'अवध किसान सभा' का गठन करने का उद्देश्य क्या था?

(1) लगान को कम करना

(2) बेगार को समाप्त करना

(3) जमींदारों का बहिष्कार करना

(4) इनमें से सभी

Q. 1920 के दशक की शुरुआत में एक उग्र गुरिल्ला आंदोलन गुडेम की पहाड़ियों पर फैल गया। 'गुडेम' भारत के किस राज्य में स्थित है?

(1) कर्नाटक

(2) तमिलनाडु

(3) आंध्र प्रदेश

(4) मिजोरम

Q. असहयोग खिलाफत आंदोलन किस वर्ष शुरू हुआ?

(1) 1901

(2) 1907

(3) 1915

(4) 1921

Q. साइमन कमीशन भारत क्यों आया?

(1) भारत में संवैधानिक व्यवस्था की कार्यशैली का अध्ययन करने और उसके बारे में सुझाव देने

(2) नई शिक्षा नीति लागू करने

(3) लगान से सम्बंधित कानून बनाने

(4) व्यापार सम्बंधित कानून बनाने

Q. लंदन में द्वितीय गोलमेज सम्मेलन का आयोजन कब हुआ था?

(1) 7 सितंबर, 1931 ई०

(2) 20 जून, 1931 ई०

(3) 16 अगस्त, 1931 ई०

(4) 10 नवंबर, 1931 ई०

Q. पूना पैक्ट डॉ. भीमराव अम्बेदकर एवं किसके मध्य हुआ था?

(1) नेहरू

(2) सरदार पटेल

(3) डॉ राजेन्द्र प्रसाद

(4) महात्मा गाँधी

Q. धन-निष्कासन के सिद्धांत का प्रतिपादन किसने किया था?

(1) फिरोजशाह मेहता ने

(2) बाल गंगाधर तिलक ने

(3) दादाभाई नौरोजी ने

(4) महात्मा गाँधी ने

Q. यह किसका कथन है- "तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूँगा।"

(1) डॉ. राजेंद्र प्रसाद

(2) महात्मा गाँधी

(3) सुभाष चन्द्र बोस

(4) बाल गंगाधर तिलक

Q. 'वंदे मातरम्' गीत किस पुस्तक से लिया गया है?

(1) आनंद मठ

(2) गीतांजलि

(3) गीता रहस्य

(4) हिंद स्वराज

Q. 1870 के दशक में भारत मातृभूमि की स्तुति के रूप में 'वन्दे मातरम' गीत किसने लिखा था?

(1) रवीन्द्र नाथ टैगोर

(2) बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय

(3) यदुनाथ भट्टाचार्य

(4) शरत चंद्र चट्टोपाध्याय

Q. 'गीत गोविंद' की रचना किसने की थी?

(1) जयदेव

(2) राजा राममोहन राय

(3) शिवानी

(4) विवेकानंद

प्रश्न : 'बहिष्कार' से क्या अभिप्राय है?

उत्तर : 'बहिष्कार' विरोध का एक गाँधीवादी रूप है, जिसका अर्थ है किसी के साथ संपर्क रखने और जुड़ने से इन्कार करना, गतिविधियों में हिस्सेदारी से स्वयं को अलग रखना तथा उसकी चीजों को खरीदने तथा इस्तेमाल करने से इन्कार करना।

प्रश्न : उपनिवेशों में राष्ट्रवाद के उदय की प्रक्रिया उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन से जुड़ी हुई क्यों थी? कारण दें।

अथवा, भारतीयों में सामूहिक अपनेपन का भाव विकसित करने वाले कारकों का उल्लेख करें।

उत्तर : (i) उपनिवेशों में आधुनिक राष्ट्रवाद के उदय की परिघटना उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन के साथ गहरे तौर पर जुड़ी हुई थी। भारत में भी आधुनिक राष्ट्रवाद एवं सामूहिक अपनेपन के भाव का उदय इसी कारण हुआ।

(ii) औपनिवेशिक शासकों के खिलाफ संघर्ष के दौरान लोगों में आपसी एकता की भावना का संचार हुआ। सभी जाति, वर्ग और संप्रदायों के लोग विदेशी सत्ता के विरुद्ध संघर्ष के लिए एकजुट हुए।

(iii) उत्पीड़न और दमन के साझा भाव ने विभिन्न समूहों को एक-दूसरे से बाँध दिया था। इस प्रकार औपनिवेशिक शासन के खिलाफ लोग एक हुए तथा उनमें राष्ट्रवाद के आदर्श का बोध जागृत हुआ।

(iv) इसने स्थानीय लोगों में राष्ट्रवादी और उदारवादी विचारों के आदान-प्रदान के लिए एक अच्छा प्लेटफार्म प्रदान किया। राष्ट्रवादी भावना के जागरण से उपनिवेशों में किसी अन्य राष्ट्र की पराधीनता के विरुद्ध आन्दोलन की पृष्ठभूमि तैयार हुई।

इस प्रकार, उपनिवेश विरोधी आन्दोलन सभी उपनिवेशों में राष्ट्रवाद के विकास के लिए प्रजनन भूमि बना।

प्रश्न : खिलाफत आंदोलन पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

उत्तर : प्रथम विश्वयुद्ध में ऑटोमन तुर्की को भारी पराजय का मुँह देखना पड़ा। अँगरेजों ने यह घोषणा की कि मुस्लिम जगत के आध्यात्मिक नेता (खलीफा) का पद समाप्त कर दिया जायेगा। दुनिया भर के मुसलमानों ने इसका तीव्र विरोध किया।

भारत में खलीफा को बनाये रखने के लिए अली बंधुओं ने खिलाफत समिति का गठन किया। 19 अक्तूबर, 1919 ई. को खलीफा पद की समाप्ति के खिलाफ खिलाफत आन्दोलन की शुरुआत हुई।

गाँधी जी ने इसे हिन्दू-मुसलमानों को एक मंच पर लाने का अवसर समझा तथा 1920 ई. में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में खिलाफत आंदोलन में सहयोग करने की घोषणा की।

प्रश्न : गाँधीजी ने असहयोग आंदोलन को वापस लेने का फैसला क्यों लिया?

उत्तर : (i) असहयोग आंदोलन का प्रारंभ शहरी शिक्षित एवं मध्यम वर्ग की हिस्सेदारी से हुआ जहाँ इसका स्वरूप नियंत्रित एवं अहिंसक था।

(ii) जैसे-जैसे यह आंदोलन देश के भीतरी अथवा ग्रामीण इलाकों में फैला इसका स्वरूप अनियंत्रित एवं हिंसक होता गया।

(iii) स्वराज के प्रति अति उत्साह ने शांतिपूर्ण असहयोग को हिंसक टकराव में बदल दिया।

(iv) असहयोग आंदोलन के दौरान गोरखपुर स्थित चौरी-चौरा बाजार से गुजर रहा एक शांतिपूर्ण जुलूस पुलिस के साथ हिंसक टकराव में बदल गया। लोगों ने थाने में आग लगा दी जिसके परिणामस्वरूप कुछ पुलिसकर्मियों की मौत हो गयी। इस घटना को चौरी-चौरा कांड के नाम से जाना जाता है।

(v) आंदोलन को हिंसा का मार्ग पकड़ते देख गाँधी जी ने इसे वापस लेने का फैसला किया।

प्रश्न : साइमन कमीशन क्या था? भारत में उसका विरोध क्यों किया गया?

अथवा, साइमन कमीशन पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।

उत्तर : (1) 1927 ई. में ब्रिटेन की टोरी सरकार ने भारत में राष्ट्रवादी आंदोलन के जवाब में एक वैधानिक आयोग का गठन किया जिसे साइमन कमीशन के नाम से जाना जाता है। इस कमीशन के अध्यक्ष सर जॉन साइमन थे।

(2) इस आयोग का कार्य भारत में संवैधानिक व्यवस्था की कार्यशैली का अध्ययन करना एवं तदनुरूप सुझाव देना था। इसके सभी सदस्य अँगरेज थे।

(3) भारत में इसका विरोध इसलिए किया गया कि इस आयोग में एक भी भारतीय सदस्य नहीं था। सारे सदस्य अँगरेज थे। अतः 1928 में जब साइमन कमीशन भारत पहुँचा तो उसका स्वागत 'साइमन कमीशन वापस जाओ' के नारों से किया गया।

(4) कांग्रेस और मुस्लिम लीग, सभी पार्टियों ने प्रदर्शनों में हिस्सा लिया।

(5) पंजाब में लाला लाजपत राय ने इस आयोग के विरुद्ध प्रदर्शन का नेतृत्व किया। पुलिस ने उन पर इतनी लाठियाँ बरसायीं कि इस प्रहार से उनकी मृत्यु हो गयी।

प्रश्न : दांडी यात्रा से आप क्या समझते हैं? संक्षेप में लिखिए।

अथवा, दांडी मार्च अभूतपूर्व घटना साबित हुई, जिसने ब्रिटिश साम्राज्य को हिला कर रख दिया। स्पष्ट करें।

अथवा, नमक यात्रा की चर्चा करते हुए स्पष्ट करें कि यह उपनिवेशवाद के खिलाफ प्रतिरोध का एक असरदार प्रतीक था।

उत्तर : (1) गाँधी जी द्वारा अँगरेजों द्वारा लगाये गये नमक कर के विरोध में चलाया गया आंदोलन 'नमक आंदोलन' के नाम से जाना जाता है। इस आंदोलन के अन्तर्गत गाँधी जी ने अपने गिने-चुने साथियों के साथ साबरमती आश्रम से 240 कि.मी. दूर दांडी नामक तटीय कस्बे तक की पैदल यात्रा की। दांडी यात्रा द्वारा ही गाँधी जी ने 'सविनय अवज्ञा आंदोलन' की शुरुआत की।

(2) 6 अप्रैल को दांडी पहुँच कर गाँधी जी ने समुद्र के पानी को उबाल कर नमक बनाया था और नमक कानून का उल्लंघन किया। दांडी यात्रा द्वारा ही गाँधी जी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत की।

(3) स्वतंत्रता के लिए देश को एकजुट करने के लिए गाँधी जी ने नमक को एक शक्तिशाली प्रतीक के रूप में देखा। नमक सर्वसाधारण के भोजन का एक अनिवार्य हिस्सा था। अतः नमक कर को महात्मा गाँधी ने ब्रिटिश शासन का सबसे दमनकारी पहलू बताया।

(4) यद्यपि नमक आंदोलन का केन्द्रीय उद्देश्य नमक कानून का उल्लंघन करना था, लेकिन इस आंदोलन ने अँगरेजों के खिलाफ भारतीय जनमानस में एक राष्ट्रीय विरोध की भावना को जन्म दिया।

(5) नमक कानून तोड़कर गाँधीजी ने औपनिवेशिक ब्रिटिश सरकार को अपने सत्याग्रह के तरीके से जबाव दिया। इस आन्दोलन के जरिये गाँधी जी ने समाज के सभी तबकों को प्रभावित किया तथा उन्हें उपनिवेशवाद के खिलाफ प्रतिरोध के लिए प्रेरित कर दिया।

इस प्रकार, दांडी मार्च अभूतपूर्व घटना साबित हुई, जिसने ब्रिटिश साम्राज्य को हिला कर रख दिया।

प्रश्न : सविनय अवज्ञा आंदोलन में विभिन्न वर्गों और समूहों ने क्यों हिस्सा लिया।

उत्तर : विभिन्न वर्गों और समूहों ने सविनय अवज्ञा आंदोलन में हिस्सा लिया। क्योंकि 'स्वराज' के मायने सभी के लिए अलग-अलग थे। जैसे-

(i) ज्यादातर व्यवसायी स्वराज को एक ऐसे युग के रूप में देखते थे जहाँ कारोबार पर औपनिवेशिक पाबंदियाँ नहीं होगी और व्यापार व उद्योग निर्बाध ढंग से फल-फूल सकेंगे।

(ii) धनी किसानों के लिए स्वराज का अर्थ था, भारी लगान के खिलाफ लड़ाई।

(iii) महिलाओं के लिए स्वराज का अर्थ था, भारतीय समाज में पुरुषों के साथ बराबरी और स्तरीय जीवन की प्राप्ति।

(iv) गरीब किसानों के लिए स्वराज का अर्थ था उनके पास स्वयं की जमीन होगी, उन्हें जमीन का किराया नहीं देना होगा और बेगार नहीं करनी पड़ेगी।

प्रश्न : राजनीतिक नेता पृथक निर्वाचिका के सवाल पर क्यों बँटे हुए थे? चर्चा कीजिए।

उत्तर : (i) राजनीतिक नेता भारत समाज में विभिन्न वर्गो-समुदायों का प्रतिनिधित्व करते थे।

(ii) डॉ. भीमराव अम्बेदकर दलित वर्गों या दलितों का नेतृत्व करते थे जबकि मुहम्मद अली जिन्ना भारत के मुस्लिम समुदायों का प्रतिनिधित्व करते थे।

(iii) ये नेतागण विशेष राजनीतिक अधिकारों और पृथक निर्वाचन क्षेत्र माँगकर अनुयायियों का जीवन स्तर ऊँचा उठाना चाहते थे।

(iv) गाँधी जी का मानना था कि पृथक निर्वाचन क्षेत्र भारत की एकता पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा।

भूमंडलीकृत विश्व का बनना

Q. 1890 के दशक में अफ्रीका के मवेशियों में कौन-सी बीमारी बहुत तेजी से फैल गयी :

(1) चेचक

(2) रिंडरपेस्ट

(3) निमोनिया

(4) चर्मरोग।

Q. 1840 के दशक के मध्य में आयरलैंड में किसी बीमारी के कारण कौन-सी फसल खराब हो गयी जिससे लाखों लोग भुखमरी के कारण मौत के मुँह में चले गए?

(1) चावल

(2) आलू

(3) मक्का

(4) मूँगफली

Q. 'आलू अकाल' किस देश में हुआ था?

(1) इंगलैंड

(2) आयरलैंड

(3) स्पेन

(4) अमेरिका

Q. होसे मेला का आयोजन कहां किया जाता था?

(1) गुयाना

(2) मॉरीशस

(3) त्रिनिदाद

(4) सूरीनाम

Q. प्रथम विश्व युद्ध कब से कब तक हुआ?

(1) 1916 से 1920

(2) 1914 से 1918

(3) 1939 से 1945

(4) 1912 से 1918

Q. आर्थिक महामंदी की शुरुआत कब हुई?

(1) 1932 ई. से

(2) 1929 ई. से

(3) 1933 ई. से

(4) 1936 ई. से

Q. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आई. एम. एफ.) की स्थापना 1944 ई. में किस सम्मेलन में की गयी?

(1) ब्रेटन वुड्स

(2) जी-77

(3) गोलमेज

(4) बियेना।

Q. द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान निम्नलिखित देशों में से किसे धुरी शक्तियाँ माना गया?

(1) जर्मनी, जापान, इटली

(2) ब्रिटेन, जर्मनी, रूस

(3) फ्रांस, जर्मनी, इटली

(4) ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, अमेरिका

Q. निम्न में से किस देश को वीटो का अधिकार प्राप्त नहीं है?

(1) बेल्जियम

(2) चीन

(3) फ्रांस

(4) रूस

प्रश्न : रिंडरपेस्ट से आपका क्या तात्पर्य है?

उत्तर : पशुओं में प्लेग की बीमारी को रिंडरपेस्ट कहा जाता था। 1890 के दशक में यह बीमारी आफ्फ्रीका में फैली, जिसके परिणामस्वरूप भारी संख्या में पशु मर गये।

प्रश्न: समूह-77 (G-77) देशों से आप क्या समझते हैं?

उत्तर : अल्प-विकसित या विकासशील देशों के संगठन को जी-77 कहते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) तथा विश्व बैंक का लाभ विकसित और औद्योगिक देशों को ही हुआ।

ऐसी परिस्थिति में विकासशील तथा अल्पविकसित देशों ने एक नयी अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक प्रणाली की माँग उठायी और अपने हितों को ध्यान में रख कर स्वयं को 'G-77' समूह में संगठित किया।

प्रश्न : बताएँ कि पूर्व-आधुनिक विश्व में बीमारियों के वैश्विक प्रसार ने अमेरिकी भूभागों के उपनिवेशीकरण में किस प्रकार मदद दी?

उत्तर : (1) जब यूरोपीय अमेरिका पहुँचे तो उनके साथ चेचक जैसी बीमारी के कीटाणु भी वहाँ पहुँचे। लाखों सालों से दुनिया से अलग-थलग रहने के कारण अमेरिका के लोगों के शरीर में चेचक से बचने की रोग-प्रतिरोधी क्षमता नहीं थी। इसलिए अमेरिका में यह बीमारी अत्यधिक घातक एवं जानलेवा सिद्ध हुई।

(2) एक बार संक्रमण होने के बाद यह बीमारी सम्पूर्ण अमेरिकी महाद्वीप में फैल गयी तथा इसने पूरे-के-पूरे समुदाय को खत्म कर डाला। यूरोपीय शक्तियों ने वहाँ अपने उपनिवेश बनाने शुरू किये।

(3) इस प्रकार, यूरोपीय शक्तियों को अमेरिका के लोगों को जीतने के लिए ज्यादा शक्ति का इस्तेमाल नहीं करना पड़ा। अमेरिका में यूरोपीयों की जीत का रास्ता आसान होता चला गया।

प्रश्न : खाद्य उपलब्धता पर तकनीक के प्रभाव को दर्शाने के लिए इतिहास से दो उदाहरण दें।

उत्तर : मध्य उन्नीसवीं सदी में तकनीकी विकास का खाद्य उपलब्धता पर व्यापक प्रभाव पड़ा।

(1) तकनीकी विकास के कारण खेतों को साफ करना आसान हुआ तथा बड़े पैमाने पर खेती करना संभव हुआ। उत्पादों को बाजारों तक तुरंत पहुँचाने के लिए बंदरगाहों को रेलों से जोड़ा गया। प्रचुर मात्रा में खाद्य उपलब्धता के परिणामस्वरूप लोगों की जीवन स्थिति में सुधार हुआ।

(2) तकनीकी विकास के पूर्व अमेरिका से यूरोप को मांस का निर्यात नहीं किया जाता था बल्कि जिंदा जानवरों का निर्यात किया जाता था। इसके कारण यूरोप में मांस खाना एक महँगा सौदा था। मांस गरीबों की पहुँच से बाहर था। तकनीकी के आधार पर जहाजों में रेफ्रिजरेशन की व्यवस्था हुई जिसके परिणामस्वरूप जानवरों को अमेरिका में ही काटकर यूरोप भेजा जाने लगा।

प्रश्न : ब्रेटनवुड्स समझौते का क्या अर्थ है?

उत्तर : द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात् विश्व की विखंडित अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के उद्देश्य से 1944 ई. में अमेरिका में ब्रेटन वुड्स समझौता हुआ। इस समझौते का उद्देश्य औद्योगिक विश्व में आर्थिक स्थिरता तथा पूर्ण रोजगार को बनाये रखना था।

युद्ध के पूर्व तथा युद्ध के दौरान सदस्य देशों के विदेशी व्यापार में घाटे से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की स्थापना की गयी। इसी प्रकार, युद्धोत्तर पुनर्निर्माण के लिए मुद्रा का इंतजाम करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण एवं विकास बैंक का गठन किया गया। इसे सामान्य रूप से विश्व बैंक के नाम से जाना जाता है।

इस प्रकार, ब्रेटन वुड्स समझौते के अन्तर्गत अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष तथा विश्व बैंक के माध्यम से युद्धोत्तर आर्थिक व्यवस्था को सुधारने का प्रयास किया गया। इसी कारण युद्धोत्तर अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था को ब्रेटन वुड्स व्यवस्था के नाम से भी जाना जाता है।

प्रश्न : जी-77 की स्थापना क्यों की गई?

उत्तर : युद्धोत्तर काल में विश्व अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण तथा विकास के लिए 1944 ई. में अमेरिका में ब्रेटन वुड्स समझौता हुआ। लेकिन, इसके द्वारा बनाये गये अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष एवं विश्व बैंक के प्रावधानों से विकासशील एवं अल्पविकसित देशों को अपेक्षित लाभ नहीं हो सका।

विकासशील तथा अल्पविकसित देशों ने एक नयी अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक प्रणाली की माँग उठायी। अपेक्षित समाधान न होने पर उपर्युक्त परिस्थिति की प्रतिक्रिया में इन देशों ने स्वयं को 'G-77' समूह में संगठित किया।

औद्योगीकरण का युग

Q. 'डॉन ऑफ द सेंचुरी' नामक चित्र में किसका महिमामंडन है?

(1) राष्ट्रवाद

(2) प्रजातंत्र

(3) औद्योगीकरण

(4) संगीत

Q. औद्योगिक क्रांति सर्वप्रथम किस देश में शुरू हुई?

(1) अमेरिका

(2) इंग्लैण्ड

(3) फ्रांस

(4) चीन।

Q. बृहद उत्पादन व्यवस्था किस देश में आरंभ की गई?

(1) ब्रिटेन

(2) रूस

(3) अमेरिका

(4) जर्मनी

Q. भारत का पहला लौह एवं इस्पात संयंत्र कहाँ स्थापित किया गया?

(1) कोलकाता

(2) मुंबई

(3) मद्रास

(4) जमशेदपुर

Q. स्पिनिंग जेनी मशीन ने किस प्रक्रिया में वृद्धि की?

(1) कताई

(2) बुनाई

(3) छपाई

(4) रंगाई

Q. निम्नलिखित में से गुमाश्ता का क्या कार्य था?

(1) बुनकरों का पर्यवेक्षण करना

(2) आपूर्ति लेना

(3) कपड़े की गुणवत्ता की जाँच करना

(4) उपर्युक्त सभी

Q. स्पिनिंग जेनी मशीन किसके द्वारा बनाई गई थी?

(1) न्यूटन

(2) कैपलर

(3) जेम्स हारग्रीब्ज

(4) राफेल

Ans. (3)

प्रश्न : औद्योगिक क्रांति सर्वप्रथम कब और कहाँ प्रारंभ हुई?

उत्तर : औद्योगिक क्रांति 18वीं शताब्दी के मध्य में सर्वप्रथम इंग्लैंड में प्रारंभ हुई।

प्रश्न : बहुत सारे मजदूर स्पिनिंग जेनी के इस्तेमाल का विरोध क्यों कर रहे थे?

अथवा, स्पिनिंग जेनी क्या था? इसका आविष्कार किसने किया था?

उत्तर : स्पिनिंग जेनी का आविष्कार 1764 ई. में जेम्स हरग्निब्ज ने किया था। मजदूर स्पिनिंग जेनी के इस्तेमाल का विरोध इसलिए कर रहे थे क्योंकि

(1) यह मशीन एक ही समय में अनेक मजदूरों का काम कर लेती थी। स्पिनिंग जेनी मशीन में एक ही पहिये में अनेक तकलियाँ लगी होती थीं तथा एक ही मजदूर एक पहिया घुमाकर अनेक तकलियों को घुमा देता था।

(2) जबकि इसके पहले एक पहिये की मशीन केवल एक ही तकली को घुमा सकती थी। इस मशीन के कारण कई मजदूरों को काम से हटना पड़ा।

(3) स्पिनिंग जेनी के कारण उत्पादकता बढ़ गयी परन्तु इसने बेरोजगारी को बढ़ावा दिया। बेरोजगारी के कारण मजदूर स्पिनिंग जेनी को अच्छी नजर से नहीं देखते थे।

प्रश्न : 'जॉबर' कौन होते थे? उनका क्या कार्य होता था?

उत्तर : 'जॉबर' उद्योगों में नये मजदूरों की भर्ती के लिए एक विशेष कर्मचारी होता था। जॉबर कोई पुराना तथा विश्वस्त कर्मचारी होता था। वह गाँव से लोगों को काम का भरोसा देकर शहर ले आता था और उन्हें शहर में जमने के लिए आवश्यक मदद देता था।

प्रश्न : ब्रिटेन की महिला कामगारों ने स्पिनिंग जेनी मशीनों पर हमले किये। व्याख्या करें।

उत्तर : (1) स्पिनिंग जेनी मशीन ने ऊन की कताई की प्रक्रिया बहुत तेज कर दी। स्पिनिंग जेनी मशीन एक समय में अनेक मजदूरों का कार्य कर लेती थी। इसके कारण मजदूरों की माँग घट गयी।

(2) बेरोजगारी की आशंका से मजदूर वर्ग खासकर महिलाओं में नयी प्रौद्योगिकी के प्रति आशंका व्याप्त थी।

(3) जब ऊन ऊद्योग में इस मशीन का इस्तेमाल किया गया तो अनेक औरतों, जो हाथ से ऊन की कताई करती थीं को काम काम से हटना पड़ा। इसी कारण महिला कामगारों ने स्पिनिंग जेनी मशीनों पर हमले किये। स्पिनिंग जेनी मशीन का, महिलाओं द्वारा विरोध काफी लम्बे समय तक चलता रहा।

मुद्रण संस्कृति और आधुनिक दुनियाँ

Q. विश्व में सर्वप्रथम मुद्रण की शुरुआत कहाँ हुई?

(1) भारत

(2) जापान

(3) चीन

(4) अमेरिका

Q. 1448 में छापाखाना (प्रिंटिंग प्रेस) का आविष्कार किसने किया?

(1) गुटेन्बर्ग

(2) कैक्सटन

(3) एम.ओ. हो

(4) इनमें किसी ने नहीं

Q. भारत में पहला प्रिंटिंग प्रेस किनके द्वारा स्थापित किया गया था?

(1) फ्रांसीसियों द्वारा

(2) पुर्तगालियों द्वारा

(3) डचों द्वारा

(4) अँग्रेजों द्वारा

Q. मार्टिन लूथर कौन था?

(1) धर्म-सुधारक

(2) वैज्ञानिक

(3) नाविक

(4) किसान

Q. किस विद्वान ने मुद्रण के बारे में गहरी चिंता व्यक्त की थी?

(1) मार्टिन लूघर

(2) इरास्मस

(3) जोहान्स गुटेनबर्ग

(4) वास्को डी गामा

Q. 'गीत गोविन्द' की रचना किसने की थी?

(1) जयदेव

(2) तुलसीदास

(3) रसखान

(4) रामकृष्ण

Q. किसने कहा कि 'स्वराज की लड़ाई दरअसल अभिव्यक्ति, प्रेस, और सामूहिकता के लिए लड़ाई है।'

(1) महात्मा गांधी

(2) मार्टिन लूथर

(3) तिलक

(4) गोखले

Q. भारतीयों द्वारा प्रकाशित प्रथम साप्ताहिक समाचार-पत्र कौन-सा था?

(1) पायोनियर

(2) बंगाल गजट

(3) अमृत बाजार पत्रिका

(4) सुलभ समाचार

प्रश्न : कुछ लोग किताबों की सुलभता को लेकर चिंतित क्यों थे? यूरोप और भारत से उदाहरण लेकर समझाएँ।

अथवा, छपाई के विरोधी विचारों के प्रसार को किस प्रकार बल मिलता था?

अथवा, कुछ लोग दयों डरते थे कि छपाई से विरोधी विचारों का प्रसार होगा? वर्णन करें।

उत्तर : मुद्रण तकनीक के विकास और किताबों की सुलभता के प्रति सभी लोगों की प्रतिक्रियाएँ एक समान नहीं थीं। कुछ ने इसकी प्रशंसा की जबकि कुछ लोगों ने इसे शक और भय की नजर से देखा। किताबों की सुलभता के प्रति चिंतित वर्ग का मानना था कि किताबों से लोगों में बागी और अधार्मिक विचार पनपने लगेंगे तथा मूल्यवान साहित्य की सत्ता समाप्त हो जायेगी। इस वर्ग में धर्मगुरु, सम्राट, लेखक और कलाकार आदि शामिल थे।

यह किताबों की सुलभता का ही परिणाम था कि सामान्य लोग धर्म की अलग-अलग व्याख्याओं से परिचित हुए। इससे ईसाई धर्म में प्रोटेस्टेंट विचारधारा का उदय हुआ। इसे कैथोलिक शाखा ने चुनौती के रूप में देखा। धर्मगुरु इसे 'धर्म विरोधी' मानते थे।

ज्योंही बाइबिल, ईश्वर और सृष्टि के नये अर्थ सामने आये, धर्मगुरुओं के कान खड़े हो गये। प्रकाशकों पर पाबंदी लगायी गयी, पुस्तकों को प्रतिबंधित किया गया तथा लेखकों को 'धर्म की सुरक्षा' के नाम पर मौत की सजा दी गयी।

भारत में ब्रिटिश शासन ने पुस्तकों को ब्रिटिश राज के खिलाफ एक गंभीर चुनौती के रूप में देखा। अँगरेजों का यह मानना था कि पुस्तकें, ब्रिटिश विरोधी विचारों को जन्म देंगी। अतः पुस्तकों के मुद्रण एवं वितरण पर पाबंदियाँ लगायी गयीं।

प्रश्न : 18वीं सदी के यूरोप में कुछ लोगों को क्यों ऐसा लगता था कि मुद्रण संस्कृति से निरंकुशवाद का अंत और ज्ञानोदय होगा। वर्णन कीजिए।

उत्तर : मार्टिन लूथर ने कहा "मुद्रण ईश्वर की दी हुई महानतम देन है, सबसे बड़ा तोहफा।"

(1) छापेखाने के कारण किताबें बड़ी मात्रा में छपने लगीं और बच्चों, महिलाओं और साधारण व्यक्ति तक पहुँचने लगीं। इस प्रकार ज्ञान का प्रकाश बढ़ने लगा।

(2) छापेखाने के कारण बड़े-बड़े विद्वानों और दार्शनिकों के विचार बड़ी तेजी से लोगों तक पहुँचने लगे और लोग प्रत्येक बात को कसौटी पर कसने लगे। इससे पुराने अन्धविश्वास और मान्यताओं को चुनौती मिली। अंधभक्ति और निरंकुशवाद के विरुद्ध विचार फैलने लगे।

(3) मुद्रण ने लोगों के दिलोदिमाग को हिलाकर रख दिया। पुस्तकों ने लोगों के मन में विवेक और बुद्धि का ऐसा संचार किया कि लोग क्या चर्च, क्या राजसत्ता सबका सामना करने के लिए तैयार हो गए। लुई बेस्तिन मर्सिस ने लिखा है- "छापाखाना प्रगति का सबसे शक्तिशाली औजार है। इससे बन रही जनमत की आँधी में निरंकुशवाद बह जायेगा।"

(4) छापाखाने से विचारों के व्यापक प्रचार-प्रसार और बहस मुबाहिसे के द्वार खुले। इसने वाद-विवाद-संवाद की नयी संस्कृति को जन्म दिया।

(5) कई दार्शनिकों और तर्कवादियों को अपने ज्ञान और विचारों का प्रसार करने का अवसर मिल गया। इससे जनता का झुकाव नये ज्ञान और तर्कपूर्ण विचारों की ओर बढ़ा।

प्रश्न : मार्टिन लूथर मुद्रण के पक्ष में था और उसने खुलेआम उसकी प्रशंसा की। कारण बताएँ।

उत्तर : (1) मार्टिन लूथर जर्मनी का एक महान धर्म सुधारक था। उसने रोमन कैथलिक चर्च की कुरीतियों का विरोध किया तथा रेफार्मेशन आंदोलन की शुरुआत की।

(2) मुद्रण के माध्यम से उसके द्वारा कैथलिक चर्च की आलोचना कर लिखी गयी '95 स्थापनाएँ अधिक से अधिक लोगों तक पहुँची।

(3) उसने प्रोटेस्टेंट मत की शुरुआत की। उसने न्यू टेस्टेमेंट की रचना की। जो मुद्रण तकनीक के कारण बहुत कम समय में हजारों लोगों के हाथों में पहुँच गया।

(4) मुद्रण के तकनीक के विकास के कारण ही लूथर को अपने विचारों को लोगों में फैलाने का अवसर प्राप्त हुआ, जिसके कारण प्रोटोस्टेंट धर्म की शुरुआत हुई।

(5) मार्टिन लूथर का मानना था कि मुद्रण ईश्वर की दी हुई महानतम देन और सबसे बड़ा तोहफा है। मुद्रण के प्रति लूथर कृतज्ञ था और उसने खुलेआम उसकी प्रशंसा की।

भूगोल

संसाधन और विकास

Q. समाप्यता के आधार पर संसाधन कितने प्रकार के होते हैं?

(1) दो

(2) तीन

(3) चार

(4) इनमें कोई नहीं

Q. ऐसा आर्थिक विकास क्या कहलाता है जो पर्यावरण को बिना नुकसान पहुँचाए हो और वर्तमान विकास की प्रक्रिया भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकता की अवहेलना न करे।

(1) सतत् पोषणीय आर्थिक विकास

(2) मानव आर्थिक विकास

(3) सार्वभौमिक विकास

(4) पर्यावरण विकास

Q. जून 1992 में 'प्रथम अंतरराष्ट्रीय पृथ्वी सम्मेलन' ब्राजील किस शहर में हुआ था?

(1) टोकियो

(2) रियो डी जेनेरो

(3) न्यूयार्क

(4) दिल्ली

Q. नवीकरणीय योग्य संसाधन है?

(1) पवन ऊर्जा

(2) वन

(3) जल

(4) उपर्युक्त सभी

Q. लौह अयस्क किस प्रकार का संसाधन है?

(1) नवीकरणीय योग्य

(2) प्रवाह

(3) जैव

(4) अनवीकरणीय योग्य

Q. निम्नलिखित में से कौन जैव संसाधन का उदाहरण है?

(1) मनुष्य

(2) जल

(3) सूर्यताप

(4) लौह अयस्क

Q. वे संसाधन जिनका सर्वेक्षण किया जा चुका है और उनके उपयोग की गुणवत्ता और मात्रा निर्धारित की जा चुकी है। ऐसे संसाधन क्या कहलाते हैं?

(1) विकसित संसाधन

(2) अन्तरराष्ट्रीय संसाधन

(3) व्यक्तिगत संसाधन

(4) नवीकरणीय संसाधन

Q. किस राज्य में पवन और सौर ऊर्जा संसाधनों की बहुतायत है ।

(1) हिमाचल प्रदेश

(2) उत्तराखण्ड

(3) राजस्थान

(4) झारखण्ड

Q. भारत के किन राज्यों में खनिजों और कोयले के प्रचुर भंडार हैं?

(1) झारखंड, आन्ध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश

(2) झारखंड, ओडिसा, राजस्थान

(3) झारखंड, गोवा, असम

(4) झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़

Q. भारत का संपूर्ण उत्तरी मैदान प्रायः किस मृदा से बना है?

(1) काली मृदा

(2) लेटेराइट

(3) जलोढ़ मृदा

(4) पीली मिट्टी

Q. देश के क्षेत्रफल का लगभग 27 प्रतिशत हिस्सा खनिजों, जीवाश्म ईंधन और वनों के अपार संचय के रूप में किस क्षेत्र को जाना जाता है?

(1) पठारी

(2) मैदानी

(3) पर्वतीय

(4) इनमें से सभी

Q. भारत के कुल क्षेत्रफल का कितना प्रतिशत भू-क्षेत्र मैदानों के रूप में है?

(1) 27 प्रतिशत

(2) 30 प्रतिशत

(3) 43 प्रतिशत

(4) 87 प्रतिशत

Q. भारत के दो ऐसे राज्य कौन हैं जहाँ 80% भूमि पर कृषि कार्य किया जाता है?

(1) बिहार और झारखण्ड

(2) मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़

(3) पंजाब और हरियाणा

(4) गुजरात और महाराष्ट्र

Q. निम्नलिखित में से किस राज्य में सीढ़ीदार (सोपानी) खेती की जाती है?

(1) पंजाब

(2) उत्तर प्रदेश का मैदान

(3) हरियाणा

(4) उत्तराखंड

Q. पूर्वी तट के नदी डेल्टाओं पर किस प्रकार की मिट्टी पायी जाती है?

(1) काली मिट्टी

(2) जलोढ़ मिट्टी

(3) लेटेराइट मिट्टी

(4) लाल मिट्टी

Q. किस प्रकार के मृदा में कपास की खेती होती है?

(1) बलुआ मिट्टी

(2) काली मिट्टी

(3) लाल मिट्टी

(4) कोई नहीं

Q. पंजाब में भूमि निम्नीकरण का निम्नलिखित में से मुख्य कारण क्या हैं?

(1) गहन खेती

(2) अधिक सिंचाई

(3) वनोन्मूलन

(4) पशुचारण

प्रश्न : संसाधन क्या होता है? अथवा, संसाधन से क्या अभिप्राय है?

उत्तर : पर्यावरण में उपलब्ध प्रत्येक वस्तु जो हमारी आवश्यकताओं को पूरा करने में प्रयुक्त की जा सकती है और जिसको बनाने के लिए प्रौद्योगिकी उपलब्ध है; जो आर्थिक रूप से संभाव्य और सांस्कृतिक रूप से मान्य है, संसाधन कहलाती है।

प्रश्न : प्राकृतिक संसाधन से क्या अभिप्राय हैं?

उत्तर : प्रकृति प्रदत्त संपदा, जैसे भूमि, जल, वनस्पति, खनिज आदि प्राकृतिक संसाधन के रूप में जाने जाते हैं। इन संसाधनों को प्रयोग में लाने के लिए प्रौद्योगिकी तथा तकनीक एवं मानवीय कौशल की आवश्यकता होती है।

प्रश्न : संसाधनों के वर्गीकरण के विभिन्न आधार क्या हैं?

उत्तर : संसाधनों का वर्गीकरण निम्नलिखित आधारों पर किया जा सकता है-

(i) उत्पत्ति के आधार पर जैव और अजैव

(ii) समाप्यता के आधार पर नवीकरणीय और अनवीकरणीय

(iii) स्वामित्व के आधार पर व्यक्तिगत, सामुदायिक, राष्ट्रीय, वैश्विक

(iv) विकास के स्तर के आधार पर।

प्रश्न : उत्पत्ति के आधार पर संसाधनों के प्रकार उदाहरण सहित बताइए।

उत्तर : जैव संसाधन, जिनकी प्राप्ति जीवमंडल से होती है; जैसे-मनुष्य, बनस्पतिजात आदि और अजैव संसाधन जो निर्जीव वस्तुओं से बने हैं; जैसे-चट्टानें और धातुएँ।

प्रश्न : जैव संसाधन क्या होते हैं? कुछ उदाहरण दीजिए।

उत्तर : जैव संसाधन : वैसे संसाधन जिनकी प्राप्ति जैवमंडल से होती है तथा जिनमें जीवन व्याप्त होता है, जैव संसाधन कहलाते हैं। उदाहरण मानव, वनस्पति, मत्स्य, पशुधन आदि।

प्रश्न : अजैव संसाधन क्या होते हैं? कुछ उदाहरण दीजिए।

उत्तर : वैसे संसाधन जो निर्जीव होते हैं अजैव संसाधन कहलाते हैं। उदाहरण- भूमि, पहाड़, नदियाँ, खनिज आदि।

प्रश्न : समाप्यता के आधार पर संसाधनों का वर्गीकरण उदाहरण सहित कीजिए।

उत्तर : नवीकरण योग्य संसाधन जिन्हें पुनः नवीकृत किया जा सकता है। जैसे-जल, पवन ऊर्जा और अनवीकरण योग्य संसाधन जिन्हें बनने में लाखों वर्ष लगते हैं और जिन्हें नवीकृत नहीं किया जा सकता; जैसे-जीवाश्म ईंधन, धातुएँ।

प्रश्न : नवीकरणीय संसाधन क्या होते हैं?

उत्तर : ऐसे संसाधन, जिनका उपयोग बार-बार किया जाता है तथा जिनकी पूर्ति प्रकृति द्वारा पुनः कर दी जाती है, नवीकरणीय संसाधन कहलाते हैं। जैसे जल, पेड़-पौधे, वायु आदि।

प्रश्न : अनवीकरण योग्य संसाधन क्या होते हैं?

उत्तर : ऐसे संसाधन, जिनका उपयोग सिर्फ एक बार किया जाता है तथा जिनकी समाप्ति पर प्रकृति द्वारा पूर्ति संभव नहीं है, गैर-नवीकरणीय संसाधन कहलाते हैं। जैसे कोयला, पेट्रोलियम आदि।

प्रश्न : भारत के तीन राज्यों के नाम बताइए जहाँ खनिजों और कोयले के प्रचुर भंडार हैं।

उत्तर : झारखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़।

प्रश्न : किस राज्य में पवन और सौर ऊर्जा संसाधन अधिक हैं?

उत्तर : राजस्थान में।

प्रश्न : भारत में पाई जाने वाली मृदाओं का उल्लेख कीजिए।

उत्तर : जलोढ़ मृदा, काली मृदा, लाल और पीली मृदा, लेटराइट मृदा, मरुस्थली मृदा, वन मृदा।

प्रश्न : पूर्वी तट के नदी डेल्टाओं पर किस प्रकार की मिट्टी पायी जाती है?

उत्तर : जलोढ़ मिट्टी।

प्रश्न : भारत में जलोढ़ मृदा किन राज्यों में पायी जाती है?

उत्तर : पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, छत्तीसगढ़ तथा तटवर्ती मैदान।

प्रश्न : आयु के आधार पर जलोढ़ मृदाएँ कितने प्रकार की हैं?

उत्तर : (i) पुराना जलोढ़ : इसे बांगर कहा जाता है।

(ii) नया जलोढ़ : इसे खादर कहा जाता है।

प्रश्न : भारत में पाई जाने वाली मृदा का वर्गीकरण करें और उनका वर्णन करें।

उत्तर :

(1) जलोढ़ मृदा-  इसका निर्माण नदियों, द्वारा लाये अवसादों से होता है।

विशेषताएँ : (i) यह पोटाश, फॉस्फोरस तथा चूनायुक्त होती है।

(ii) यह सर्वाधिक उपजाऊ मिट्टी है।

(iii) इसमें नाइट्रोजन तथा जैविक पदार्थों जैसे पोषक तत्त्वों की कमी होती है।

वितरण : पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, छत्तीसगढ़ तथा तटवर्ती मैदान।

(2) लाल और पीली मृदा : यह रवेदार आग्नेय चट्टानों वाले कम वर्षा के क्षेत्रों में विकसित होती है।

विशेषताएँ: (i) इसमें लोहा, एल्युमिनियम और चूना पर्याप्त मात्रा में पाये जाते हैं।

(ii) यह हल्की, पतली और कंकरीली होती है।

(iii) इसमें फॉस्फोरस तथा वनस्पति की कमी होती है।

वितरण : उड़ीसा, छत्तीसगढ़, मध्य गंगा के मैदान का दक्षिणी छोर तथा पश्चिमी घाट।

(3) काली मृदा : इसका निर्माण ज्वालामुखी उद्गार से होता है।

विशेषताएँ: (i) यह महीन कणों से बनी होती है।

(ii) इसमें नमी ग्रहण करने की क्षमता अधिक होती है।

(iii) शुष्क मौसम में इसमें दरारें पड़ जाती हैं।

(iv) गीली होने पर यह चिपचिपी हो जाती है।

(v) इसमें कैल्सियम कार्बोनेट, पोटाश, मैग्नेशियम आदि जैसे पोषक तत्त्व पाये जाते हैं।

वितरण: महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश आदि।

(4) लैटराइट मृदा : इसका निर्माण अधिक वर्षा के कारण मिट्टी के कटाव से होता है।

विशेषताएँ : (i) इसमें चूने और मैग्नेशियम की मात्रा कम होती है।

(ii) इसमें नाइट्रोजन कम होता है।

(iii) इसमें फॉस्फोरिक एसिड की मात्रा अधिक होती है।

वितरण : कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, मध्य प्रदेश, उड़ीसा और असम के पहाड़ी क्षेत्र।

(5) मरुस्थलीय मृदा : यह कम वर्षा वाले क्षेत्र में विकसित होती है।

विशेषताएँ : (i) इसका रंग लाल और भूरा होता है।

(ii) यह रेतीली और लवणीय होती है।

(iii) इसमें ह्यमस तथा नमी की मात्रा कम होती है।

(iv) मिट्टी की सतह के नीचे कैल्शियम की मात्रा बढ़ती चली जाती है।

वितरण: राजस्थान का पश्चिमी भाग।

प्रश्न : भारत में भूमि उपयोग प्रारूप का वर्णन कीजिए। वर्ष 1960-61 ई. से वन के अन्तर्गत क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण वृद्धि नहीं हुई है, इसका क्या कारण है?

उत्तर : भारत का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 32.8 लाख वर्ग कि.मी. है।

भारत में लगभग 43 प्रतिशत भू-क्षेत्र मैदान है। सम्पूर्ण भूमि के 30 प्रतिशत भाग पर पर्वत हैं तथा 27 प्रतिशत पठारी क्षेत्र हैं। 43% भूक्षेत्र में चरागाह भूमि 5 प्रतिशत, वन भूमि 23 प्रतिशत तथा 15 प्रतिशत बंजर क्षेत्र हैं।

वर्ष 1960-61 ई. में वन के अन्तर्गत क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण वृद्धि नहीं होने के कारण निम्नलिखित हैं -

(1) वनों को काटकर कृषि क्षेत्रों का विस्तारीकरण

(2) सड़क मार्ग तथा रेलवे लाइन के निर्माण के लिए वनों की कटाई।

(3) वनों को काटकर औद्योगिक इकाइयों की स्थापना।

प्रश्न : मृदा अपरदन के लिए उत्तरदायी कारकों का वर्णन करें।

अथवा, मृदा का अपरदन किस प्रकार होता है?

उत्तर : (1) मानवीय कारक- वनों की कटाई, अति पशुचारण, निर्माण एवं खनन, दोषपूर्ण कृषि पद्धति तथा औद्योगिक प्रक्रियाएँ आदि मृदा अपरदन के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी हैं। ढाल वाली भूमि पर ऊपर से नीचे की ओर हल चलाने से मिट्टी में अवनलिकाएँ बन जाती हैं जिसके अन्दर से बहता हुआ पानी आसानी से मिट्टी का कटाव करता है।

(2) प्राकृतिक कारक - प्राकृतिक कारकों में पवन, जल तथा हिमनद मुख्य रूप से अपरदन के कारक हैं। बहता जल मिट्टी को काटते हुए गहरी अवनलिकाएँ बनाता है, जिनके अन्दर से बहता हुआ पानी मिट्टी का कटाव तेजी से करता है। पवन द्वारा मैदानी तथा ढाल वाली भूमि से मिट्टी उड़ाकर ले जाने की प्रक्रिया से भी मृदा अपरदन होता है।

प्रश्न : मृदा अपरदन या भू-क्षरण को रोकने के चार उपाय बताएँ।

उत्तर : मृदा अपरदन या भू-क्षरण को नियंत्रित करने के उपाय :

(1) पर्वतीय क्षेत्रों में सीढ़ीनुमा खेती द्वारा मृदा अपरदन की मात्रा को कम किया जा सकता है।

(2) मरुस्थलीय भाग के चारों ओर वृक्ष लगाकर, मृदा अपरदन को रोका जा सकता है।

(3) अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में छोटे-छोटे पौधें तथा घास आदि लगाकर मृदा अपरदन को नियंत्रित किया जा सकता है।

(4) एक ही भूमि पर बदल-बदल कर विभिन्न फसलों की खेती से भी मृदा अपरदन/भूमि क्षरण पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

(5) उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषित जल को बाहर निकालने के लिए पृथककारी छन्ना का प्रयोग कर भू-क्षरण को नियंत्रित किया जा सकता है।

प्रश्न : पहाड़ी क्षेत्र में मृदा अपरदन को रोकने के लिए क्या कदम उठाने चाहिए?

उत्तर : पहाड़ी क्षेत्र में मृदा अपरदन को रोकने के लिए निम्नांकित कदम उठाये जाने चाहिए-

(i) सीढ़ीनुमा कृषि पद्धति को अपनाना चाहिए।

(ii) खेत के चारों ओर घास या छोटे पौधे उगाने चाहिए।

(iii) पहाड़ी भागों में पशुओं की चराई पर रोक लगाया जाना चाहिए।

(iv) पर्वतीय ढालों पर बाँध बनाकर जल प्रवाह को रोकने का प्रयास करना चाहिए।

प्रश्न : मिट्टी संरक्षण के उपायों को बताइए।

उत्तर : मिट्टी संरक्षण या मृदा संरक्षण के उपाय निम्नलिखित हैं -

(1) वनारोपण और चरागाहों का उचित प्रबन्धन

(2) पशुचारण नियंत्रण

(3) रेतीले टीलों पर काँटेदार झाड़ि‌याँ लगाना

(4) खनन नियंत्रण करना।

(5) बाल बाली भूमि पर जुताई समोच्च रेखाओं के समानान्तर करना।

(6) पेड़ों को कतारों में लगाकर रक्षक मेखला बनाकर पवनों की गति कम करके।

(7) ढाल वाली भूमि पर सोपान बना कर सीढ़ीदार कृषि करना।

(8) मिट्टी को नुकसान पहुंचाने वाले रसायनों का कम प्रयोग करना।

(9) औद्योगिक जल एवं कचरों का उचित प्रबंधन।

वन और वन्य जीव संसाधन

Q. निम्नलिखित में से कौन लुप्त प्रजातियाँ हैं?

(1) एशियाई चीता

(2) गुलाबी सिर वाली बत्तख

(3) पहाड़ी उल्लू

(4) इनमें से सभी

Q. पेरियार बाघ रिजर्व किस राज्य में स्थित है?

(1) उत्तर प्रदेश

(2) केरल

(3) मध्य प्रदेश

(4) कर्नाटक

Q. निकोबारी कबूतर किस जातियों की श्रेणी में आता है?

(1) सामान्य जातियाँ

(2) दुर्लभ जातियाँ

(3) स्थानिक जातियाँ

(4) लुप्त जातियाँ

प्रश्न : संकटग्रस्त जातियाँ क्या होती हैं?

उत्तर : संकटग्रस्त जातियाँ वे वन्य जीवों की वे जातियाँ हैं जिनकी संख्या विषम परिस्थितियों के कारण इन कम होती जा रही है तथा उनके लुप्त होने का खतरा है।

प्रश्न : दुर्लभ जातियाँ किसे कहते हैं?

उत्तर : दुर्लभ जातियों की संख्या बहुत कम है या वे सुभेद्य हैं और यदि इनको प्रभावित करने वाली विषम परिस्थितियाँ नहीं परिवर्तित होती तो यह संकटग्रस्त जातियों की श्रेणी में आ सकती हैं।

प्रश्न : लुप्त जातियाँ किसे कहते हैं?

उत्तर : लुप्त जातियाँ वन्य जीवों की वे जातियाँ हैं जो इनके रहने के आवासों में अनुपस्थित पाई गई हैं अर्थात, ये उपजातियाँ स्थानीय क्षेत्र, प्रदेश, देश, महाद्वीप या पूरी पृथ्वी से ही लुप्त हो गई हैं; जैसे - एशियाई चीता और गुलाबी सिरवाली बत्तख शामिल हैं।

प्रश्न : भारत में जैव-विविधता को कम करने वाले प्रमुख कारक कौन-से हैं?

उत्तर : वन्य जीव के आवास का विनाश, जंगली जानवरों को मारना व शिकार करना, पर्यावरणीय प्रदूषण, दावानल आदि।

प्रश्न : 'प्रोजेक्ट टाईगर' क्या है? इसे कब शुरू किया गया?

उत्तर : 'प्रोजेक्ट टाईगर' विश्व की बेहतरीन वन्य जीव संरक्षण परियोजनाओं में से एक है, इसकी शुरुआत 1973 में हुई।

प्रश्न : वन संरक्षण की दृष्टि से वनों को किन प्रमुख वर्गों में बाँटा गया है?

उत्तर : (क) आरक्षित वन

(ख) रक्षित वन

(ग) अवर्गीकृत वन

प्रश्न : आरक्षित वन क्या होते हैं?

उत्तर : आरक्षित वनों को सर्वाधिक मूल्यवान माना जाता है, जिन्हें इमारती लकड़ी या वन उत्पादों को प्राप्त करने के लिए स्थायी रूप से सुरक्षित रखा गया है।

प्रश्न : रक्षित वन क्या होते हैं?

उत्तर : रक्षित वन वेवन होते हैं जिन्हें और अधिक नष्ट होने से बचाने के लिए इनकी सुरक्षा की जाती है।

प्रश्न : अवर्गीकृत वन से आप क्या समझते हैं?

उत्तर : अन्य सभी प्रकार के बन और बंजरभूमि जो सरकार, व्यक्तियों और समुदायों के स्वामित्व में होते हैं, अवर्गीकृत वन कहे जाते हैं।

प्रश्न : राष्ट्रीय उद्यान क्या होते हैं?

उत्तर : राष्ट्रीय उद्यान विस्तृत सुरक्षित वन-क्षेत्र होते हैं जहाँ जानवर स्वच्छन्द विचरण करते हैं, इन क्षेत्रों में एक या अनेक परितंत्र पाये जाते हैं और जहाँ जीव-जन्तु, पेड़-पौधे, भू-आकृतिक स्थल और आवास विशेष रूप से शैक्षिक और मनोरंजक रुचि के होते हैं।

प्रश्न : वनों एवं वन्य जीवन का संरक्षण क्यों आवश्यक है?

उत्तर : वनों एवं वन्य जीवन के संरक्षण से पारिस्थितिकी विविधता बनी रहती है। इससे हमारे जीवन के मूलभूत संसाधन जल, वायु और मृदा उपलब्ध होते हैं।

इससे विभित्र जातियों में बेहतर जनन के लिए बनस्पति और पशुओं में जींस (जेनेटिक) विविधता को भी संरक्षण मिलता है।

प्रश्न : जैव विविधता क्या है? जैव विविधता मानव जीवन के लिए क्यों महत्त्वपूर्ण है?

उत्तर : पृथ्वी पर अनेक प्रकार के प्राणी, वन्यजीव और पेड़-पौधे पाये जाते हैं, इन सब में अनेक प्रकार के जैविक और संरचनात्मक विभिनता पायी जाती है जीवों के बीच पायी जाने वाली विभित्रता को 'जैव विविधता' कहते हैं।

विभिन्न प्रकार के प्राणी और पेड़-पौधे आदि मिलकर एक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करते हैं, सभी एक दूसरे पर निर्भर हैं और एक दूसरे के लिए उपयोगी हैं इस प्रकार, जैव विविधता प्रकृति और पर्यावरण के संतुलन बनाये रखता है जो मानव जीवन के लिए आवश्यक है।

जल संसाधन

Q. अधिकांशतः जल की कमी किन कारणों से होती है?

(1) अतिशोषण

(2) अत्यधिक प्रयोग

(3) असमान वितरण

(4) इनमें से सभी

Q. निम्नलिखित में से कौन सुमेलित नहीं है?

(1) महानदी-हीराकुंड परियोजना

(2) टाँका-भूमिगत जल टैंक

(3) इल्तुतमिश-हौजखास

(4) गंगा-भाखड़ा नंगल परियोजना

Q. सरदार सरोवर बाँध किस नदी पर बनाया गया है?

(1) गंगा

(2) यमुना

(3) नर्मदा

(4) गोदावरी

Q. जल और उर्वरकों के अधिक और अविवेकपूर्ण प्रयोग से किस प्रकार की समस्याएँ पैदा हो गयी हैं?

(1) जलाक्रांतता

(2) लवणता

(3) सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी

(4) इनमें से सभी

प्रश्न : नदियों में बाँध क्यों बनाये जाते हैं?

उत्तर : बाँध सामान्यतः नदियों में बहते जल को रोकने, दिशा बदलने या बहाव पर नियंत्रण करने की एक युक्ति है। इसके परिणामस्वरूप जलाशय, झील या जलभरण बनता है जिसके जल का उपयोग आवश्यकता के अनुसार किया जाता है।

प्रश्न : जल किस प्रकार एक दुर्लभ संसाधन है?

उत्तर : विश्व में जल के कुल आयतन का मात्र 2.5 प्रतिशत भाग ही अलवणीय है। अलवणीय या उपयोग योग्य पानी हमें वर्षा, नदियों, तालाबों या भूमिगत जल से ही प्राप्त होता है। वर्षा भी अनिश्चित होती है। बढ़ती जनसंख्या, नगरीकरण और औद्योगीकरण के कारण जल का अतिशोषण, अत्यधिक प्रयोग प्रदूषण और असमान वितरण के कारण जल की कमी होती जा रही है। इस प्रकार जल एक दुर्लभ संसाधन है।

प्रश्न : भारत की सबसे बड़ी नदी घाटी परियोजना कौन है? यह किस नदी पर है? इससे किस क्षेत्र को आर्थिक विकास में मदद मिली है?

उत्तर : भारत की सबसे बड़ी नदी घाटी परियोजना भाखड़ा नंगल परियोजना है। यह सतलज नदी पर बनायी गयी है।

इस परियोजना से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर राज्यों को लाभ मिला है। इससे कृषि और उद्योगों में क्रांतिकारी परिवर्तन आये हैं। इस परियोजना से 15 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई कर देश में हरित क्रांति लाने में मदद मिली है। जल विद्युत उत्पादन के द्वारा उन राज्यों में लघु एवं कुटीर उद्योग का जाल बिछ गया है।

कृषि

Q. झारखंड में 'झूम' खेती को क्या कहा जाता है?

(1) कोमान

(2) कुरुवा

(3) पोडु

(4) लदांग

Q. मणिपुर में कर्तन धन प्रणाली कृषि को किस नाम से जाना जाता है?

(1) झूम

(2) दीपा

(3) स्थानांतरित

(4) पामलू

Q. निम्नलिखित में से कौन-सा उस कृषि प्रणाली को दर्शाता है जिसमें एक ही फसल लंबे-चौड़े क्षेत्र में उगाई जाती है?

(1) स्थानांतरी कृषि

(2) बागवानी

(3) रोपण कृषि

(4) गहन कृषि

Q. चाय, कॉफी, रबर, गन्ना, केला आदि किस तरह की फसलें हैं?

(1) दलहन फसलें

(2) तेलहन फसलें

(3) रोपण फसलें

(4) मोटे अनाज

Q. चाय किस प्रकार की कृषि का उदहारण है?

(1) जीवन निर्वाह कृषि

(2) प्राम्भिक कृषि

(3) रोपण कृषि

(4) झूम कृषि

Q. रबी फसलों को किस ऋतु में बोया जाता है?

(1) ग्रीष्म

(2) शीत

(3) वर्षा

(4) उपर्युक्त सभी

Q. भारत में रबी फसलों की बुआई किन महीनों में होती है?

(1) अक्तूबर से दिसंबर

(2) सितंबर-अक्तूबर

(3) मई- जून

(4) मार्च-अप्रैल

Q. भारत की दो प्रमुख खाद्य फसलें कौन-सी हैं?

(1) मूँग, चना

(2) गेहूं, चावल

(3) चाय, कॉफी

(4) जौ, बाजरा

Q. किस फसल को सुनहरा रेशा कहा जाता है?

(1) गन्ना

(2) रेशम

(3) जूट

(4) कपास

Q. रेशम उत्पादन के लिए रेशम के कीड़ों के पालन को क्या कहा जाता है?

(1) सेरीकल्चर

(2) हॉर्टीकल्चर

(3) सिल्कल्चर

(4) फ्लोरीकल्चर

Q. सरकार इनमें से कौन-सी घोषणा फसलों को सहायता देने के लिए करती है?

(1) अधिकतम सहायता मूल्य

(2) न्यूनतम सहायता मूल्य

(3) मध्यम सहायता मूल्य

(4) प्रभावी सहायता मूल्य

प्रश्न : विभिन्न प्रकार के कृषि का नाम बताइए।

उत्तर : कृषि के प्रकार

(i) आत्मनिर्वाह कृषि

(ii) झूम या स्थानांतरित कृषि

(iii) रोपण कृषि

(iv) गहन कृषि

(v) शुष्क तथा आर्द्र कृषि

प्रश्न : भारत में झूम खेती किए जाने वाले चार राज्यों के नाम लिखें।

उत्तर : झूम खेती उत्तर-पूर्वी राज्यों असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड तथा मणिपुर में की जाती है। (इस खेती को छत्तीसगढ़ और अंडमान-निकोबार में 'दीपा' और झारखण्ड में 'कुरुवा' कहा जाता है।)

प्रश्न : भारत की तीन कृषि ऋतुओं का नाम दें साथ ही उन ऋतुओं में उपजाई जानेवाली फसलों को लिखें।

उत्तर :

(i) रबी: गेहूँ, चना, सरसों, मटर आदि।

(ii) खरीफ : चावल, कपास, मक्का, मूँगफली आदि।

(iii) जायद : सब्जियाँ, खीरा, तरबूज आदि।

प्रश्न : रबी फसलों की बुआई और कटाई किन महीनों में होती है?

उत्तर : रबी फसलों (गेहुँ, जौ, मटर, चना और सरसों) को शीत ऋतु में अक्तूबर से दिसंबर के मध्य बोया जाता है और ग्रीष्म ऋतु में अप्रैल से जून के मध्य काटा जाता है।

प्रश्न : भारत की तीन प्रमुख रबी फसलों के नाम बताएँ।

उत्तर : भारत की तीन प्रमुख रबी फसलें हैं- गेहूँ, जौ और चना।

प्रश्न : खरीफ फसल किसे कहते हैं?

उत्तर : भारत में मानसून के आगमन के समय बोयी जाने वाली फसलों को 'खरीफ फसल' कहते हैं। उदाहरण - चावल, कपास, मक्का, मूँगफली आदि।

प्रश्न : जायद ऋतु फसलें क्या होती हैं?

उत्तर : रबी और खरीफ फसल ऋतुओं के बीच ग्रीष्म ऋतु में बोई जाने वाली फसल को जायद कहा जाता है। जायद ऋतु में मुख्यतः तरबूज, खरबूजे, खीरे, सब्जियों और चारे की फसलों की खेती की जाती है।

प्रश्न : भारत की तीन नकदी फसलों के नाम बताएँ।

उत्तर : भारत की तीन नकदी फसलें हैं गन्ना, तम्बाकू और रबर।

प्रश्न : भारत में उपजाए जाने वाले किन्हीं चार रोपण फसलों के नाम लिखें।

उत्तर : चाय, कॉफी, गन्ना, केला, रबड़ आदि।

प्रश्न : भारत की दो प्रमुख रेशेदार फसलें कौन-सी हैं? प्रत्येक फसल के उत्पादक राज्यों के नाम बताइए।

अथवा, भारत के दो प्रमुख जूट उत्पादक राज्य कौन-से हैं?

उत्तर : जूट और रेशम, भारत की दो प्रमुख रेशेदार फसलें हैं।

जूट का प्रमुख उत्पादक राज्य पश्चिम बंगाल तथा रेशम का प्रमुख उत्पादक राज्य कर्नाटक है।

प्रश्न : रबर उत्पादक दो राज्यों के नाम लिखें।

उत्तर: केरल और तमिलनाडु।

प्रश्न : भारत में उगाए जाने वाले मुख्य मोटे अनाज कौन-से हैं?

उत्तर : ज्वार, बाजरा और रागी।

प्रश्न : उन राज्यों का नाम लिखें जहाँ हरित क्रांति हुई।

उत्तर : पंजाब और हरियाणा में हरित क्रांति हुई।

प्रश्न : भारत की दो प्रमुख खाद्य फसलों तथा उनके प्रमुख उत्पादक राज्यों के नाम बताइए।

उत्तर : चावल और गेहूँ, भारत की दो प्रमुख खाद्य फसलें हैं।

चावल के प्रमुख उत्पादक राज्य- पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश तथा तमिलनाडु हैं।

गेहूँ के प्रमुख उत्पादक राज्य- पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश हैं।

प्रश्न : भारत की दो प्रमुख पेय फसलें कौन-सी हैं? प्रत्येक फसल के प्रमुख उत्पादक राज्य का नाम बताइए।

उत्तर : चाय और कहवा (कॉफी) भारत की दो प्रमुख पेय फसलें हैं।

चाय का प्रमुख उत्पादक राज्य- असम तथा कहवा का प्रमुख उत्पादक राज्य कर्नाटक है।

प्रश्न : भारतीय कृषि पर वैश्वीकरण के प्रभाव पर टिप्पणी लिखें।

उत्तर : भारतीय कृषि पर वैश्वीकरण के प्रभाव -

(1) वैश्वीकरण के कारण भारतीय किसान अपने यहाँ अधिक होने वाले कृषि उत्पाद को विश्व बाजार में बेचकर अच्छे दाम प्राप्त कर सकते हैं।

(2) विश्व की माँग के अनुसार नकदी एवं कीमती फसलों की खेती में वृद्धि

(3) ढाँचागत सुधार, प्रौद्योगिकी में परिवर्तन, बाजार सुविधा तथा साख का विस्तार।

(4) बहुराष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा कृषि क्षेत्र में निवेश में वृद्धि से किसानों को लाभ।

(5) कृषि वैज्ञानिकों के सहयोग से देश में नये फसलों का विकास। जेनेटिक इंजीनियरिंग द्वारा फसलों के उत्पादन में वृद्धि।

(6) प्रमुख कृषि उत्पादों को निर्यात की स्वतंत्रता दी गई है। बाजार सुविधा, क्रेडिट कार्ड का विस्तार आदि के कारण आधुनिक निवेशों में वृद्धि हुई है।

(7) जब भिन्न फसलों की माँग विश्वभर में बढ़ेगी तो माँग बढ़ने से चीजों का उत्पादन भी अधिक होगा और किसानों की स्थिति में सुधार होगा।

खनिज और ऊर्जा संसाधन

Q. निम्न में से कौन दो ज्वलनशील गैसों हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का यौगिक है तथा वह ऊर्जा का मुख्य स्त्रोत बन सकता है?

(1) कोयला

(2) पेट्रोलियम

(3) जल

(4) इनमें से कोई नहीं

Q. मैग्नेटाइट खनिज की विशेषता क्या होती है?

(1) यह सर्वोत्तम प्रकार का लौह अयस्क है

(2) इसमें 70% लोहांश पाया जाता है

(3) इसमें सर्वश्रेष्ठ चुम्बकीय गुण होता है

(4) इनमें से सभी

Q. छत्तीसगढ़ के बस्तर जिला में बैलाडीला पहाड़ी श्रृंखलाओं में अति उत्तम कोटि का निम्न में से कौन-सा खनिज पाया जाता है?

(1) यूरेनियम

(2) हेमेटाइट

(3) अभ्रक

(4) कोयला

Q. मोनाजाइट रेत में निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज पाया जाता है?

(1) खनिज तेल

(2) यूरेनियम

(3) थोरियम

(4) कोयला

Q. झारखण्ड के गुआ और नोवामुंडी में कौन-सा खनिज पाया जाता है?

(1) लौह अयस्क

(2) कोयला

(3) ताँबा

(4) अभ्रक

Q. किस प्रकार के कोयले को सर्वोत्तम गुण वाला कठोर कोयला माना जाता है?

(1) लिग्नाइट

(2) एंथ्रेसाइट

(3) बिटुमिनस

(4) पीट

Q. निम्नलिखित में से किसका परिवहन पाइपलाइन द्वारा होता है?

(1) पानी

(2) कच्चा तेल

(3) पेट्रोल उत्पाद

(4) उपर्युक्त सभी

Q. वायु प्रदूषण निम्न में से किस पर अपना दुष्प्रभाव डालता है?

(1) मानव स्वास्थ्य

(2) पशु-पक्षी

(3) पेड़-पौधे

(4) इनमें से सभी

प्रश्न : खनिज क्या है?

उत्तर : खनिज प्राकृतिक रासायनिक यौगिक हैं, जो संरचना और संघटन में समान होते हैं। ये प्रकृति में चट्टानों एवं अयस्कों के घटक के रूप में उपस्थित होते हैं। खनिजों की उत्पत्ति पृथ्वी की भूपर्पटी के अन्दर लम्बे समय में विभिन्न भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं के द्वारा होती है।

प्रश्न : खनिज के दो प्रमुख वर्ग कौन-से हैं?

उत्तर : खनिज के दो वर्ग (1) घात्विक खनिज (2) अघात्विक खनिज ।

प्रश्न : धात्विक और अधात्विक खनिजों में अन्तर बतलाइए।

उत्तर : घात्विक और अघात्विक खनिजों में अन्तर :

धात्विक खनिज

अघात्विक खनिज

1. खनिज जिनमें धातु अंश की प्रधानता पाई जाती है, घात्विक खनिज कहलाते हैं।

1. वे खनिज जिनमें धातु अंश नहीं पाया जाता है, अधात्विक खनिज कहलाते हैं।

2. लौह अयस्क, मैंगनीज, निकल, ताँबा, जस्ता, सीसा, टंगस्टन व कोबाल्ट आदि धात्विक खनिज हैं।

2. अभ्रक, पोटाश, नमक, सल्फर, चूना पत्थर, संगमरमर, बलुआ पत्थर आदि अधात्विक खनिज हैं।

3. धात्विक खनिज ताप व विद्युत के सुचालक होते हैं।

3. अधात्विक खनिज ताप एवं विद्युत के कुचालक होते हैं।

4. यह खनिज प्रायः आग्नेय शैलों में पाये जाते हैं।

4. यह खनिज प्रायः अवसादी शैलों में पाये जाते हैं।

प्रश्न : भारत के चार महत्वपूर्ण लौह अयस्क उत्पादक राज्यों के नाम बताएं?

उत्तर : झारखंड, छत्तीसगढ़, उड़ीसा और गोवा।

प्रश्न : लौह खनिज तथा अलौह खनिज में अंतर बताइए।

अथवा, लौह खनिज तथा अलौह खनिज का एक-एक उदाहरण दीजिए।

उत्तर :

लौह खनिज

अलौह खनिज

(1) लौह खनिजों में कठोरता पायी जाती है।

(1) अलौह खनिजों में कठोरता नहीं पायी जाती है।

(2) लौह खनिज प्रायः भूरे रंग के होते हैं।

(2) अलौह खनिज कई रंगों के होते हैं।

(3) उदाहरण: लोहा, मैगनीज, बॉक्साइट आदि लौह खनिज के उदाहरण हैं।

(3) उदाहरण: जस्ता, सीसा, सोना, अभ्रक आदि अलौह खनिजों के उदाहरण हैं।

प्रश्न : लौह अयस्क उत्पादन के लिए प्रसिद्ध दो राज्य कौन-से हैं?

उत्तर : लौह अयस्क उत्पादक राज्य

(1) झारखंड      (2) उड़ीसा ।

प्रश्न : भारत के चार महत्वपूर्ण मैगनीज अयस्क उत्पादक राज्यों के नाम बताएं?

उत्तर : महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उड़ीसा और आंध्र प्रदेश।

प्रश्न : भारत के चार बॉक्साइट उत्पादक राज्यों के नाम बताएं?

उत्तर : झारखंड, उड़ीसा, गुजरात, महाराष्ट्र।

प्रश्न : भारत के प्रसिद्ध अश्वक उत्पादक राज्यों के नाम बताएं?

उत्तर : झारखंड, बिहार, आंध्र प्रदेश, राजस्थान ।

प्रश्न : भारत के महत्वपूर्ण कोयला उत्पादक राज्यों के नाम बताएं?

उत्तर : झारखंड, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़

प्रश्न : प्रमुख ऊर्जा खनिज कौन-कौन से हैं?

उत्तर : प्रमुख ऊर्जा खनिज

(i) कोयला

(ii) पेट्रोलियम

(iii) प्राकृतिक गैस ।

प्रश्न : उन दो राज्यों के नाम बताएँ जहाँ कोयले के सबसे बड़े भंडार हैं।

उत्तर : झारखंड एवं पश्चिम बंगाल में कोयले के सबसे बड़े भंडार स्थित हैं।

प्रश्न : उच्चकोटि के कोयले का नाम बताइए?

उत्तर : बिटुमिनस व एंथ्रेसाइट।

प्रश्न : बॉक्साइट किस धातु का अयस्क है?

उत्तर : बॉक्साइट एल्युमिनियम धातु का अयस्क है।

प्रश्न : जीवाश्म ऊर्जा के उदाहरण दें।

उत्तर: कोयला, पेट्रोलियम।

प्रश्न : घरों में उपयोग किए जाने वाले दो ऊर्जा संसाधनों के नाम लिखें।

उत्तर : एल. पी. जी., केरोसिन, कोयला, लकड़ी आदि।

प्रश्न : ऊर्जा के गैर-परंपरागत साधन कौन-कौन से हैं?

उत्तर : पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा।

प्रश्न : पवन और सौर ऊर्जा संसाधनों की बहुतायत भारत के किस राज्य में अधिक पायी जाती है?

उत्तर: राजस्थान में।

प्रश्न : ज्वारीय ऊर्जा किस प्रकार का ऊर्जा संसाधन है?

उत्तर : गैर-पारंपरिक ऊर्जा ।

प्रश्न: भारत में दो तेल क्षेत्रों के नाम लिखें।

उत्तर : भारत के प्रमुख तेल क्षेत्र निम्नलिखित हैं -

(1) मुंबई हाई

(2) असम

प्रश्न : भारत में लौह अयस्क के किन्हीं तीन वितरण क्षेत्र के नाम लिखें।

उत्तर : भारत में लौह अयस्क का वितरण निम्नलिखित प्रमुख लौह अयस्क पेटियों में है -

(1) ओडिशा-झारखंड पेटी- इनमें उच्च कोटि का हेमेटाइट किस्म का लौह अयस्क पाया जाता है। इस पेटी में ओडिसा के मयूरभंज व केंदूझर जिलों में बादाम पहाड़ खदान, झारखंड के सिंहभूम जिले में गुआ तथा नोआमुंडी आदि खनन क्षेत्र आते हैं।

(2) दुर्ग-बस्तर-चन्द्रपुर पेटी- इन खनन क्षेत्रों में अति उत्तम कोटि का हेमेटाइट पाया जाता है। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में बेलाडिला पहाड़ी श्रृंखला इस पेटी का प्रमुख खनन क्षेत्र है।

(3) बल्लारि-चित्रदुर्ग, चिकमंगलूरु-तुमकूरु पेटी- कर्नाटक की इस पेटी में लौह अयस्क की बड़ी मात्रा संचित है। कर्नाटक में पश्चिमी घाट में अवस्थित कुद्रेमुख इस पेटी का प्रमुख खनन क्षेत्र है।

(4) महाराष्ट्र-गोआ पेटी- यह पेटी गोआ तथा महाराष्ट्र राज्य के रत्नागिरी जिले में स्थित है। यहाँ का लोहा कम गुणवत्ता वाला है।

प्रश्न : भारत में कोयले के वितरण पर प्रकाश डालें ।

उत्तर : एन्थ्रासाइट तथा बिटुमिनस- उच्च कोटि के कोयला माने जाते हैं क्योंकि इनमें कार्बन का प्रतिशत अधिक होता है। इनके जलने से धुआँ कम निकलता है।

एन्थ्रासाइट जम्मू एवं कश्मीर में पाया जाता है।

बिटुमिनस गोंडवाना क्षेत्र- झारखंड, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश में मिलता है। लिग्नाइट मध्यम श्रेणी का कोयला है। इसे भूरा कोयला भी कहते हैं। भारत के लिग्नाइट में कोयले की अपेक्षा राख का प्रतिशत कम होता है। लिग्नाइट कोयला राजस्थान, तमिलनाडु, असम जम्मू-कश्मीर में मिलता है।

पीट सबसे निम्न कोटि का कोयला होता है। इसमें धुआँ अधिक और ताप कम होता है। यह झारखंड एवं छत्तीसगढ़ में प्रमुखता से पाया जाता है।

प्रश्न: पवन ऊर्जा पर टिप्पणी लिखें।

उत्तर : पवन ऊर्जा, ऊर्जा का एक अपारंपरिक स्रोत है। हवा में गति रहने के कारण उसमें गतिज ऊर्जा होती है, जिसे पवन ऊर्जा कहते हैं। पवन ऊर्जा द्वारा पवन चक्कियों को चला कर विद्युत पैदा की जाती है।

पवन ऊर्जा एक नवीकरणीय और समाप्त नहीं होने वाली ऊर्जा है। पवन ऊर्जा से प्रदूषण नहीं होता अर्थात् इसमें धुआँ, हानिकारक गैस या हानिकारक विकिरण नहीं होता।

विनिर्माण उद्योग

Q. लोहा तथा इस्पात उद्योग को किस प्रकार के उद्योग के रूप में भी जाना जाता है?

(1) कृषि आधारित उद्योग

(2) खनिज विक्रय उद्योग

(3) आधारभूत उद्योग

(4) इनमें से सभी

Q. विनिर्माण कैसी क्रिया है -

(1) प्राथमिक

(2) द्वितीयक

(3) तृतियक

(4) चतुर्थ

Q. निम्नांकित में से कौन एक आधारभूत उद्योग है?

(1) चीनी उद्योग

(2) लोहा इस्पात उद्योग

(3) सूती वस्त्र उद्योग

(4) उर्वरक उद्योग

प्रश्न : विनिर्माण क्या है?

उत्तर : कच्चे पदार्थों को मूल्यवान उत्पादों में परिवर्तित करने तथा अधिक मात्रा में उनका उत्पादन करने की प्रक्रिया को वस्तु का निर्माण या विनिर्माण कहा जाता है।

प्रश्न : उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले तीन भौतिक कारकों के नाम बताएं!

उत्तर : (1) कच्चे माल की उपलब्धि

(2) शक्ति के विभिन्न साघन

(3) अनुकूल जलवायु

प्रश्न : उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले किन्ही तीन मानवीय कारकों के नाम बताएं

उत्तर : (1) सस्ते श्रमिकों की उपलब्धि

(2) संचार एवं परिवहन के साधन

(3) पूंजी एवं बैंक की सुविधाएं।

प्रश्न : उद्योग पर्यावरण को कैसे प्रदूषित करते हैं?

उत्तर : उद्योग पर्यावरण को निम्न तरीकों से प्रदूषित करते हैं -

(1) वायु प्रदूषण : सल्फर डाइआक्साइड तथा कार्बन मोनोआक्साइड जैसे गैसों के अधिक मात्रा (अनुपात) में उपस्थिति वायु प्रदूषण के कारण है।

(2) जल प्रदूषण : उद्योगों द्वारा कार्बनिक और अकार्बनिक अवशिष्ट पदार्थों के नदी में छोड़ने से जल प्रदूषण फैलता है।

(3) भूमि प्रदूषण : उद्योगों से निकलने वाली गन्दगी, कूड़ा-कर्कट जो मृदा को अनुपजाऊ बनाता है। वर्षाजल के साथ ये प्रदूषक भूमिगत जमीन तक पहुँचकर उसे भी प्रदूषित करते हैं।

(4) ध्वनि प्रदूषण: अनचाही ध्वनि जो औद्योगिक तथा निर्माण कार्य, जेनरेटर, लकड़ी चीरने के कारखाने, विद्युत ड्रील, मोटर गाड़ियाँ एवं वाहन अधिक शोर उत्पन्न करते हैं जो ध्वनि प्रदूषण के कारण बनते हैं।

प्रश्न : प्रौद्योगिक और आर्थिक विकास के कारण संसाधनों का अधिक उपयोग कैसे हुआ है?

उत्तर : संसाधनों का अधिक उपयोग प्रौद्योगिक और आर्थिक विकास से सीधे संबंधित है। प्रौद्योगिकी के विकास के कारण संसाधनों का दोहन भारी पैमाने पर संभव हुआ तथा आर्थिक विकास के लिए अधिक से अधिक संसाधनों की आवश्यकता पड़ी।

जैसे-जैसे प्रौद्योगिकी का विकास होता गया संसाधनों का दोहन भारी पैमाने पर किया जाने लगा। जितना अधिक संसाधनों का दोहन हुआ आर्थिक विकास भी उतना आगे बढ़ा।

औपनिवेशिक काल में संसाधनों का दोहन बड़े पैमाने पर हुआ क्योंकि साम्राज्यवादी देशों ने अपनी उच्च प्रौद्योगिकी के माध्यम से संसाधनों का दोहन किया। इससे साम्राज्यवादी देशों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई, भले ही इसका लाभ उपनिवेशों को प्राप्त नहीं हुआ।

प्रश्न : उद्योगों द्वारा पर्यावरण निम्नीकरण को कम करने के लिए उठाये गये उपायों की चर्चा कीजिए।

उत्तर : उद्योगों द्वारा पर्यावरण निम्नीकरण को कम करने के उपाय निम्नलिखित हैं -

(1) ताप संयंत्रों से विद्युत उत्पादन के लिए उत्तम कोटि के कोयले के प्रयोग की व्यवस्था।

(2) कारखानों की स्थापना नगरीय परिवेश से बाहर किये जाने संबंधी कानून बनाये गये हैं।

(3) उद्योगों से निकलने वाले दूषित जल को बाहर निकालने के पहले शोधन की व्यवस्था की गयी है।

(4) वायु प्रदूषण को कम करने के लिए कारखानों में ऊँची चिमनियों को लगाने के निर्देश दिये गये हैं।

(5) औद्योगिक कचरे को नदियों तथा कृषि योग्य भूमि में निपटान की मनाही।

(6) ऊर्जा संरक्षण करने वाले उद्योगों को बढ़ावा।

राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ

Q. निम्न में से कौन-सा साधन परिवहन की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है?

(1) सड़क परिवहन

(2) वायु परिवहन

(3) रेल परिवहन

(4) जल परिवहन

प्रश्न : सीमांत सड़कों का महत्त्व बताइए।

उत्तर : (1) सीमांत सड़कों का निर्माण सीमावर्ती क्षेत्रों में किया गया है।

(2) ये सड़कें सैनिकों तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में निवास करने वाले लोगों के लिए महत्त्वपूर्ण रूप से उपयोगी हैं।

(3) ये सड़कें सीमावर्ती क्षेत्रों को देश की अन्य सड़कों से जोड़ती हैं।

(4) देश की सुरक्षा के दृष्टिकोण से इन सड़कों का व्यापक महत्त्व है। ये सड़कें सीमावर्ती क्षेत्रों में सैनिकों के आवागमन को आसान बनाती हैं।

(5) सीमावर्ती क्षेत्र के निवासियों के कृषि, व्यापार और देश के अन्य क्षेत्रों से उनके जुड़ाव में सीमांत सड़कें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

प्रश्न : रेल परिवहन के गुण-दोष बताएँ।

उत्तर : रेल परिवहन के गुण -

(1) रेल परिवहन द्वारा भारी मात्रा में यात्री और सामान ढोये जाते हैं।

(2) रेल परिवहन उद्योगों के विकास में महत्त्वपूर्ण ढंग से सहायक है।

(3) लंबी दूरी के लिए रेल एक उत्तम साधन है।

रेल परिवहन के दोष -

(1) यह सभी स्थानों पर नहीं बनाया जा सकता है।

(2) इससे यात्रियों एवं वस्तुओं को घर तक नहीं पहुँचाया जा सकता है।

प्रश्न : पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के परिवहन में पाइप लाइन कैसे लाभदायक हैं?

उत्तर : (i) पाइप लाइनों द्वारा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस को सीधे तेल शोधक केन्द्रों अथवा उर्वरक कारखाने तक कम समय में पहुँचाया जा सकता है।

(ii) इससे मार्ग में होने वाली बर्बादी नहीं होती।

प्रश्न : देश में पाईपलाइन परिवहन के तीन प्रमुख जालों का उल्लेख करें।

उत्तर : (1) उत्तरी असम के तेल क्षेत्रों से गुवाहाटी, बरौनी एवं इलाहाबाद के रास्ते कानपुर तक।

(2) गुजरात में सलाया से बीरमगाँव, मथुरा, दिल्ली एवं सोनीपत के रास्ते पंजाब में जालंधर तक।

(3) गुजरात में हजीरा से लेकर उत्तरप्रदेश में जगदीशपुर तक।

परीक्षोपयोगी मानचित्र

Class 10 Social Science All Subjects Model Question Answer 2025-26

Class 10 Social Science All Subjects Model Question Answer 2025-26
Class 10 Social Science All Subjects Model Question Answer 2025-26
Class 10 Social Science All Subjects Model Question Answer 2025-26
Class 10 Social Science All Subjects Model Question Answer 2025-26

नागरिकशास्त्र

सत्ता की साझेदारी

Q. इनमें से कौन लोकतांत्रिक देश है?

(1) सउदी अरब

(2) नाइजीरिया

(3) भारत

(4) इनमें से कोई नहीं

Q. सरकार को उत्तरदायी बनाने में निम्न में से कौन अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है?

(1) जनता

(2) राष्ट्रपति

(3) स्थानीय सरकार

(4) इनमें से सभी

Q. बेल्जियम कहाँ का एक छोटा-सा देश है?

(1) यूरोप

(2) फ्रांस

(3) जर्मनी

(4) अमेरिका

Q. श्रीलंका में अधिकांश सिंहली भाषी लोग किस धर्म को मानने वाले हैं?

(1) हिंदू

(2) मुसलमान

(3) बौद्ध

(4) इनमें से कोई नहीं

Q. श्रीलंकाई तमिलों ने अपनी एक राजनीतिक पार्टी बनाकर किस प्रकार की माँगों को लेकर संघर्ष किया?

(1) तमिल को राजभाषा बनाने

(2) शिक्षा और रोजगार में समान अवसर प्राप्त करने

(3) क्षेत्रीय स्वायत्तता हासिल करने

(4) इनमें से सभी

Q. 1998 में ब्रिटेन की सरकार और नेशनलिस्टों के बीच किस प्रकार का समझौता हुआ जिसमें दोनों पक्षों ने हिंसक आंदोलन बंद करने की बात स्वीकार की?

(1) जल समझौता

(2) व्यापार समझौता

(3) कृषि समझौता

(4) शांति समझौता

प्रश्न : सत्ता की साझेदारी से आप क्या समझते हैं?

उत्तर : जब किसी देश की शासन व्यवस्था में, समाज के सभी समूहों अथवा वर्गों को प्रतिनिधित्व दिया जाता है, तो इस व्यवस्था को सत्ता की साझेदारी के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न : बहुसंख्यकवाद क्या होता है?

उत्तर : इसके अंतर्गत बहुसंख्यक समुदाय अपने मनचाहे ढंग से देश का शासन कर सकता है और इसके लिए वह अल्पसंख्यक समुदाय की जरूरत या इच्छाओं की अवहेलना कर सकता है; जैसा श्रीलंका में किया गया।

प्रश्न : अल्पसंख्यक किसे कहते हैं?

उत्तर : धर्म, भाषा के आधार पर किसी राज्य में रहने वाले लोगों का वह समूह जो बहुमत या बहुसंख्या में कम होते हैं उसे अल्पसंख्यक कहते हैं।

प्रश्न : सत्ता का क्षैतिज वितरण क्या होता है?

उत्तर : सरकार के विभिन्न अंग, जैसे विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच सत्ता का बँटवारा 'सत्ता का क्षैतिज वितरण' कहलाता है।

प्रश्न : सत्ता का ऊर्ध्वाधर वितरण क्या होता है?

उत्तर : सरकार के विभिन्न स्तर जैसे केंद्रीय, प्रांतीय और स्थानीय सरकारों के बीच सत्ता का बँटवारा 'सत्ता का ऊर्ध्वाधर वितरण' कहलाता है।

प्रश्न : भारतीय संदर्भ में सत्ता की हिस्सेदारी का एक उदाहरण देते हुए इसका एक युक्तिपरक तथा एक नैतिक कारण बताएँ।

उत्तर : भारत में सत्ता के क्षैतिज वितरण के अन्तर्गत एक ही स्तर की सत्ता को सरकार के तीन अंगों -कार्यपालिका, व्यवस्थापिका और न्यायपालिका में विभाजित कर दिया गया है तथा ऊर्ध्वाधर वितरण के अन्तर्गत सत्ता को केन्द्र सरकार और राज्यों की सरकारों के बीच बाँट दिया गया है।

इसके साथ ही सत्ता में विभिन्न सामाजिक समूहों की हिस्सेदारी भी सुनिश्चित की गयी है। इस हेतु अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिलाओं तथा अन्य पिछड़े वर्गों की आरक्षण की व्यवस्था के द्वारा सत्ता में हिस्सेदारी निश्चित की गई है। आरक्षित चुनाव क्षेत्र इसी तरह के सत्ता-विभाजन का एक उदाहरण है।

इस प्रकार भारत में सत्ता की हिस्सेदारी का क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर वितरण इसका नैतिक तर्क है। दूसरी ओर, आरक्षण की व्यवस्था द्वारा विभिन्न सामाजिक समूहों को सत्ता में साझेदारी देकर समूहों के बीच टकराव को कम करने का युक्तिपरक कारण है।

प्रश्न : बेल्जियम में डच भाषी बहुसंख्यकों ने फ्रेंच भाषी अल्पसंख्यकों पर अपना प्रभुत्व जमाने का प्रयास किया क्या आप सहमत हैं? स्पष्ट करें।

अथवा, बेल्जियम में डच-भाषी तथा फ्रेंच भाषी समुदायों के बीच तनाव के क्या कारण थे? बेल्जियम में भाषाई विवाद को किस प्रकार हल किया गया?

उत्तर : बेल्जियम में अल्पसंख्यक फ्रेंच भाषी लोग तुलनात्मक रूप से बहुसंख्यक डच-भाषी लोगों से अधिक समृद्ध तथा शक्तिशाली थे। स्वाभाविक रूप से डच-भाषी समुदाय इस स्थिति से नाराज था। डच-भाषी लोग संख्या में अधिक थे परन्तु धन-समृद्धि के मामले में कमजोर थे। दोनों समुदायों के बीच तनाव का यही मूल कारण था।

परन्तु बेल्जियम में डच-भाषी बहुसंख्यकों ने फ्रेंच भाषी अल्पसंख्यकों पर अपना प्रभुत्व जमाने का प्रयास किया - इस बात से सहमत नहीं हुआ जा सकता। क्योंकि -

(1) बेल्जियम में विभिन्न समूहों को सत्ता में भागीदार बनाते हुए राष्ट्रीय एकता का प्रयास किया गया। भाषाई विवाद को हल करने के लिए केन्द्रीय सरकार में सभी भाषा-समूहों को समान प्रतिनिधित्व दिया गया।

(2) कुछ विशेष कानून तभी पारित हो सकते थे जब विभिन्न भाषा समूहों में उस विषय पर सहमति हो। किसी एक भाषा विशेष को राजकीय भाषा नहीं घोषित किया गया। अलग-अलग भाषा समूहों को अपनी सरकार बनाने का अवसर प्रदान किया गया।

(3) इस सरकार को सामुदायिक सरकार कहा गया जो केन्द्र तथा राज्य के बाद तीसरे स्तर पर कार्य करती थी। इसे संस्कृति तथा भाषा संबंधी महत्त्वपूर्ण निर्णय लेने के अधिकार प्रदान किये गये।

इन सभी प्रयासों के माध्यम से बेल्जियम में डच-भाषी बहुसंख्यकों ने फ्रेंच भाषी अल्पसंख्यकों के भाषाई विवाद को हल करने का प्रयास किया गया जो पूर्णतया सफल रहा।

संघवाद

Q. संयुक्त राज्य अमेरिका में किस प्रकार की शासन प्रणाली है?

(1) संसदीय

(2) अध्यक्षात्मक

(3) सैनिक

(4) तानाशाही।

Q. लोकतंत्र के एक बुनियादी सिद्धान्त के रूप में राजनीतिक शक्ति का स्त्रोत किसे माना जाता है?

(1) संसद

(2) जनता

(3) राज्य

(4) न्यायालय

Q. निम्न में से किस प्रकार की व्यवस्था में केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार को कुछ खास करने का आदेश नहीं दे सकती ?

(1) एकात्मक

(2) संघीय

(3) निरंकुश

(4) इनमें से सभी

Q. शिक्षा, वन, विवाह, गोद लेना, उत्तराधिकार आदि विषय किस सूची के अन्तर्गत आते हैं?

(1) संघ सूची

(2) राज्य सूची

(3) समवर्ती सूची

(4) इनमें से सभी।

Q. कार्यपालिका और विधायिका पर अंकुश कौन रखता है?

(1) राष्ट्रपति

(2) मंत्रीमंडल

(3) न्यायपालिका

(4) मीडिया

Q. विभिन्न स्तर की सरकारों के बीच अधिकारों के विवाद की स्थिति में कौन अधिनिर्णायक की भूमिका निभाता है?

(1) संविधान

(2) सर्वोच्च न्यायालय

(3) स्थानीय सरकार

(4) मंत्रिपरिषद

Q. संविधान और विभिन्न स्तर की सरकारों के अधिकारों की व्याख्या करने का अधिकार किसे है?

(1) न्यायालय

(2) राष्ट्रपति

(3) संसद

(4) प्रधानमंत्री

Q. भारत की लोकतांत्रिक राजनीति के लिए लिए पहली और एक कठिन परीक्षा निम्न में से क्या थी, जिसके आधार पर प्रांतों का गठन करना था?

(1) भाषा

(2) धर्म

(3) जाति

(4) इनमें से सभी

Q. भारतीय संघ में इस समय हैं-

(1) 25 राज्य और 6 संघीय क्षेत्र

(2) 28 राज्य और 8 संघीय क्षेत्र

(3) 26 राज्य और 7 संघीय क्षेत्र

(4) 28 राज्य और 6 संघीय क्षेत्र

प्रश्न : संघ सूची क्या है?

उत्तर : संघ सूची में राष्ट्रीय महत्त्व के विषय आते हैं जिन पर कानून बनाने का अधिकार सिर्फ केन्द्र सरकार को है, जैसे- प्रतिरक्षा, विदेशी मामले, बैकिंग आदि।

प्रश्न : अवशिष्ट शक्तियों से क्या अभिप्राय है?

उत्तर : संघ सूची, राज्य सूची तथा समवर्ती सूची से अलग बचे हुए विषयों पर विधि निर्माण की शक्ति को अवशिष्ट शक्ति के नाम से जाना जाता है। भारत में यह शक्ति केन्द्र को प्राप्त है।

प्रश्न : सरकार के प्रमुख अंग कौन-कौन हैं?

उत्तर : सरकार के तीन प्रमुख अंग होते हैं विधायिका, कार्यपालिका तथा न्यायपालिका।

प्रश्न : संघात्मक शासन प्रणाली वाले चार देशों के नाम बताएँ।

उत्तर : संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, मैक्सिको, ब्राजील, भारत, जर्मनी, स्विट्जरलैंड।

प्रश्न : एकात्मक शासन प्रणाली वाले चार देशों के नाम बताएँ।

उत्तर : इंग्लैंड, फ्रांस, इटली, चीन, जापान, कोरिया और श्रीलंका।

प्रश्न : नेपाल में किस तरह की शासन व्यवस्था है?

उत्तर : संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य।

प्रश्न : गठबंधन सरकार क्या होती है?

उत्तर : गठबंधन सरकार एक ऐसी सरकार होती है जो एक से अधिक राजनीतिक पार्टियों द्वारा साथ मिलकर बनाई गई हो। साधारणतया गठबंधन में सम्मिलित दल एक राजनीतिक गठजोड़ करते हैं और एक साझा कार्यक्रम स्वीकार करते हैं।

प्रश्न : स्थानीय शासन से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: भारत में, संघीय व्यवस्था के अन्तर्गत शासन की शक्तियों का विभाजन तीन स्तरों पर किया गया है - केंद्रीय सरकार, राज्य सरकार तथा स्थानीय सरकार। तीसरे स्तर के शासन को स्थानीय शासन के नाम से जाना जाता है। स्थानीय सरकार, राज्य सरकार के अधीन होती है।

प्रश्न : शासन के संघीय और एकात्मक स्वरूपों में क्या-क्या मुख्य अंतर है? इसे उदाहरण के माध्यम से स्पष्ट करें।

उत्तर : संघीय शासन व्यवस्था तथा एकात्मक शासन व्यवस्था में अंतर :

(1) संघीय शासन व्यवस्था में सरकार का निर्माण दो स्तरों पर होता है- केंद्रीय स्तर तथा राज्य स्तर। दोनों प्रकार की सरकारों का अपना अलग-अलग अधिकार क्षेत्र होता है। जबकि एकात्मक शासन व्यवस्था में सरकार एक ही स्तर पर कार्य करती है।

(2) संघीय शासन व्यवस्था में राज्य सरकारें केंद्रीय सरकार के अधीन नहीं होती, बल्कि दोनों स्तर की सरकारें अपने स्तर पर लोगों के प्रति उत्तरंदायी होती हैं। उदाहरण भारत।

एकात्मक शासन व्यवस्था में राज्य सरकारें केंद्रीय सरकार के अधीन होती हैं एवं राज्य सरकारें, केंद्रीय सरकार के प्रति उत्तरदायी होती हैं। जैसे इंग्लैंड, फ्रांस, श्रीलंका आदि।

(3) संघीय शासन व्यवस्था में केंद्रीय सरकार राज्यों को आदेश जारी नहीं कर सकती। जबकि, एकात्मक शासन व्यवस्था में केन्द्रीय सरकार राज्य अथवा स्थानीय प्रशासन को आदेश जारी कर सकती है।

(4) संघीय शासन व्यवस्था में संविधान प्रायः कठोर होता है। केन्द्रीय सरकार अपनी मर्जी से परिवर्तन नहीं कर सकती। एकात्मक शासन व्यवस्था में केन्द्रीय सरकार अपनी मर्जी से संविधान में परिवर्तन कर सकती है।

(5) संघीय शासन व्यवस्था में देश की विविधताओं एवं क्षेत्रीय आकांक्षाओं को उचित स्थान प्राप्त होता है। एकात्मक शासन व्यवस्था में इन मुद्दों की अनदेखी होती है।

जाति धर्म और लैंगिक मसले

Q. विश्व में किस प्रकार की विभिन्नता आज बड़ी व्यापक हो चली है?

(1) राजनीतिक

(2) धार्मिक

(3) जातीय

(4) इनमें से सभी

Q. निम्न में से कौन देश धार्मिक और जातीय विभाजन के आधार पर हुई राजनीतिक होड़ में कई टुकड़ों में बँट गया?

(1) ब्राजील

(2) जापान

(3) यूगोस्लाविया

(4) इंग्लैंड

प्रश्न : सामाजिक विषमता के तीन मुख्य आधार कौन-से हैं?

उत्तर : सामाजिक विषमता के तीन मुख्य आधार जाति, धर्म और लिंग हैं।

प्रश्न : लैंगिक असमानता से क्या अभिप्राय है?

उत्तर : सामाजिक भूमिकाओं, राजनीतिक भागीदारी तथा धार्मिक अवधारणाओं के आधार पर महिलाओं को पुरुषों के समकक्ष नहीं मानने को लैंगिक असमानता के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न : लैंगिक विभाजन का क्या अभिप्राय है?

उत्तर : समाज द्वारा स्त्री और पुरुष को दी गयी असमान भूमिका को 'लैंगिक विभाजन' कहते हैं।

प्रश्न : पितृ प्रधान समाज तथा मातृ प्रधान समाज क्या है?

उत्तर : जिस समाज में पुरुषों का प्रभुत्व होता है उसे पितृ प्रधान समाज तथा जिस समाज में महिलाओं का प्रभुत्व होता है उसे मातृ प्रधान समाज के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न : पारिवारिक कानून क्या होता है?

उत्तर : विवाह, तलाक, गोद लेना और उत्तराधिकार जैसे परिवार से जुड़े मसलों से संबंधित कानून पारिवारिक कानून होते हैं। हमारे देश में सभी धर्मों के लिए अलग-अलग पारिवारिक कानून हैं।

प्रश्न : 'पितृप्रधान' से क्या अभिप्राय है?

उत्तर : 'पितृप्रधान' से अभिप्राय है समाज अथवा परिवार में पुरुषों को महिलाओं की अपेक्षा अधिक महत्त्व, शक्ति, अधिकार आदि प्राप्त होना।

प्रश्न : नारीवादी आंदोलन क्या है?

उत्तर : नारीवादी आंदोलन वह आंदोलन होते हैं जो पुरुषों और महिलाओं के समान अधिकारों और अवसरों के पक्ष में चलाए जाएँ।

प्रश्न : धर्मनिरपेक्ष राज्य से आप क्या समझते हैं?

उत्तर : वह राज्य जिसमें सभी धर्मों को समान महत्व दिया जाता है। राज्य के प्रत्येक व्यक्ति को कोई भी धर्म को मानने की स्वतंत्रता होती है। उसे धर्मनिरपेक्ष राज्य कहते हैं। धर्मनिरपेक्ष राज्य द्वारा किसी भी धर्म को राजकीय धर्म के रूप में स्वीकार नहीं किया जाता है।

प्रश्न : सांप्रदायिक राजनीति का आधार क्या होता है?

उत्तर : धर्म ही सामाजिक समुदाय का निर्माण करता है और एक विशेष धर्म में आस्था रखने वाले लोग एक ही समुदाय के होते हैं।

प्रश्न : सांप्रदायिक राजनीति के दो रूपों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर : धार्मिक समुदाय द्वारा राजनीतिक प्रभुत्व स्थापित करने का प्रयत्न और सांप्रदायिक आधार पर राजनीतिक गोलबंदी।

प्रश्न : भारतीय समाज में जाति से संबंधित एक विशेषता का उल्लेख कीजिए।

उत्तर : जाति पर आधारित विभाजन भारतीय समाज की एक विशेषता है जो अन्य देशों में नहीं है।

प्रश्न : वर्ण-व्यवस्था का उल्लेख कीजिए।

उत्तर : वर्ण-व्यवस्था जाति समूहों का पदानुक्रम है जिसमें एक जाति के लोग हर हाल में सामाजिक पायदान में सबसे ऊपर रहेंगे तो किसी अन्य जाति समूह के लोग क्रमागत रूप में उनके नीचे।

प्रश्न : जातिगत भेदभाव से मुक्त समाज व्यवस्था बनाने का प्रयत्न वाले प्रमुख नेता कौन थे?

उत्तर : ज्योतिबा फुले, महात्मा गाँधी, डॉ. अंबेडकर और पेरियार रामास्वामी नायकर।

प्रश्न : राजनीति में जाति किस प्रकार के रूप ले सकती है?

उत्तर : चुनाव के लिए उम्मीदवारों का चयन जाति के आधार पर, वोट प्राप्त करने के लिए जातिगत भावनाओं को उकसाना, और जाति के आधार पर दलों की स्थापना करना।

राजनीतिक दल

1. दो दलीय व्यवस्था किस देश में है?

(1) भारत

(2) चीन

(3) अमेरिका/ब्रिटेन

(4) पाकिस्तान।

Q. भारत में राजनीतिक दलों को मान्यता कौन देता है?

(1) राष्ट्रपति

(2) संसद

(3) उच्चतम न्यायालय

(4) चुनाव आयोग

प्रश्न : लोकतन्त्र में राजनीतिक दल की क्या आवश्यकता है?

अथवा, राजनीतिक दल के प्रमुख कार्य बताइए।

उत्तर : लोकतन्त्र में जबाबदेह या उत्तरदायी सरकार हेतु राजनीतिक दलों की आवश्यकता है। राजनीतिक दल चुनाव लड़ते हैं। ये अलग-अलग नीतियों एवं कार्यक्रमों को जनता के समक्ष रखते हैं। राजनैतिक दल सरकार बनाते व चलाते हैं या विपक्ष में रह कर सरकार पर अंकुश लगाते हैं। ये देश के कानून निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

प्रश्न : राष्ट्रीय दल को परिभाषित कीजिए ?

उत्तर : ऐसे राजनीतिक दल जो पूरे देश में फैले होते हैं, या यदि कोई राजनीतिक दल लोकसभा चुनाव में कुल बोट का 6% मत हासिल करता है या चार राज्यों के विधानसभा चुनाव में कुल बोट का 6% मत हासिल करता है तो वैसे दल को राष्ट्रीय दल कहते हैं।

प्रश्न : किसी दो राष्ट्रीय राजनीतिक दल का नाम बताएँ।

उत्तर : भारतीय जनता पार्टी, भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस।

प्रश्न: क्षेत्रीय दल किसे कहते हैं?

उत्तर : क्षेत्रीय दल किसी प्रांत या क्षेत्र के स्थानीय मुद्दों में ज्यादा रुचि लेते हैं। इनका विस्तार एक या कुछ राज्यों तक सीमित होता है। तेलुगू देशम पार्टी, झारखण्ड मुक्ति मोर्चा, असम गण परिषद् आदि क्षेत्रीय राजनीतिक दल के उदाहरण हैं।

प्रश्न : विपक्षी दल सत्तारूढ़ दल को किस प्रकार नियंत्रित करता है?

उत्तर : विपक्षी दल विधायिका में सत्ता पक्ष से प्रश्न पूछकर उन्हें कटघरे में खड़ा करते हैं।

ये विभिन्न मुद्दों को जनता के समक्ष ले जाते हैं। वे जनसभा, प्रदर्शन और आंदोलन के द्वारा सरकार के गलत निर्णयों के विरोध में जन-जागरूकता को बढ़ाते हैं।

इस प्रकार वे सत्तारूढ़ दल को निरंकुश होने से रोकते हैं तथा उसे यथासंभव नियन्त्रण में रखते हैं।

प्रश्न : भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस की स्थापना कब हुई थी और इसके संस्थापक कौन थे?

उत्तर : भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस की स्थापना 1885 ई. में हुई थी। इसके संस्थापक ए. ओ. ह्यूम थे।

प्रश्न : बहुदलीय व्यवस्था पर संक्षेप में लिखें।

उत्तर : बहुदलीय व्यवस्था में अनेक दल चुनाव और जनमत के आधार पर सत्ता के लिए होड़ में होते हैं। इसमें दो दलों से ज्यादा दलों के अपने दम पर या दूसरों से गठबन्धन करके सत्ता में आने के ठीक-ठाक  अवसर होते हैं। बहुदलीय व्यवस्था वाले देश में अनेक पार्टियाँ चुनाव लड़ने और सत्ता में आने के लिए आपस में हाथ मिला लेती हैं और विजयी होने पर गठबन्धन सरकार बनाती हैं। भारत में भी ऐसी ही बहुदलीय व्यवस्था है।

जब देश या क्षेत्र की सामाजिक और भौगोलिक विविधताओं को समेट पाने में एक या दो पार्टियाँ अक्षम होती हैं तो बहुदलीय व्यवस्था विकसित होती है। बहुदलीय प्रणाली में विभिन्न हितों और विचारों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल जाता है। हालाँकि, कई बार बहुदलीय प्रणाली देश को राजनीतिक अस्थिरता की तरफ भी ले जा सकती है।

प्रश्न : राजनीतिक दल के प्रमुख कार्य क्या हैं?

उत्तर : राजनीतिक दल के प्रमुख कार्य :

(1) सत्ता प्राप्त करने या सत्ता में भागीदारी के लिए चुनाव लड़ना।

(2) अपनी नीतियों और कार्यक्रमों को मतदाता के सामने रखना।

(3) कानून निर्माण में राजनीतिक दल के सदस्यों की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है।

(4) सरकार का निर्माण करके अपनी नीतियों एवं कार्यक्रमों को क्रियान्वित करना।

(5) विपक्ष के रूप में सरकार की आलोचना करना एवं दबाव बनाना।

प्रश्न : राजनीतिक दलों के सामने क्या मुख्य चुनौतियाँ हैं?

उत्तर : राजनीतिक दलों के सामने निम्नलिखित चुनौतियाँ हैं -

(1) आंतरिक लोकतंत्र का अभाव राजनीतिक दलों में प्रायः आंतरिक लोकतंत्र का अभाव होता है। इसका अभिप्राय यह है कि दल की सम्पूर्ण शक्ति उसके शीर्षस्थ नेताओं के हाथ में सिमट जाती है। शीर्षस्थ नेताओं द्वारा सामान्य कार्यकर्ता को अंधेरे में रखा जाता है तथा पार्टी के नाम पर सारे फैसले वे स्वयं ले लेते हैं। उनसे असहमति रखने वाले व्यक्ति के पास पार्टी छोड़ने के अतिरिक्त कोई अन्य मार्ग नहीं होता है। सिद्धांतों के स्थान पर नेता ही महत्त्वपूर्ण हो जाते हैं।

(2) वंशवाद की चुनौती: अधिकांश दलों में नेताओं द्वारा अपने परिवार के लोगों को आगे बढ़ाने की प्रवृत्ति होती है, जिसके परिणामस्वरूप एक सामान्य कार्यकर्ता के नेता बनने के आसार खत्म हो जाते हैं। दूसरे इससे अनुभवहीन तथा बिना जनाधार वाले लोग शीर्ष पद पर पहुँच जाते हैं।

(3) पैसा और बाहुबल का बढ़ता प्रभाव : राजनीतिक पार्टियों का मुख्य उद्देश्य चुनाव जीतना होता है, अतः इसके लिए वे पैसे और बाहुबल के प्रयोग से नहीं हिचकते हैं। इससे पार्टी पर अमीर लोगों तथा अपराधी तत्त्वों का प्रभाव बढ़ने लगता है तथा पार्टी के सिद्धांत पृष्ठभूमि में चले जाते हैं। एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह एक बहुत बड़ी चुनौती है।

(4) जाति एवं सम्प्रदाय की बाध्यता : कई दलों में किसी खास जाति या सम्प्रदाय का प्रभुत्व होता है। अपने सिद्धान्तों को व्यापक जनाधार तक ले जाने के लिए राजनीतिक दल इन तत्वों से छुटकारा पाने में चाह कर भी असमर्थ होते हैं।

(5) सत्ता के लिए विचारों से समझौता : आज गठबंधन की राजनीति में राजनीतिक दल सत्ता के लिए एकदम विपरीत विचारधारा वाले दलों से समझौता कर लेते हैं। इसके कारण मतदाता और समर्पित कार्यकर्ता अपने-आप को ठगा सा महसूस करते हैं।

लोकतंत्र के परिणाम

प्रश्न : लोकतांत्रिक सरकार के दो गुण लिखें?

उत्तर : (1) सरकार का चुनाव लोगों द्वारा किया जाता है।

(2) सरकार जनता की इच्छा अनुसार कार्य करती है।

प्रश्न : लोकतंत्र की कोई दो चुनौतियों को लिखें।

उत्तर : (1) लोकतंत्र को वास्तविक रूप में कायम रखने और मजबूत करने की चुनौती।

(2) लोकतांत्रिक व्यवस्था का सभी वर्गों, समूहों और इलाकों तक विस्तार की चुनौती।

प्रश्न : लोकतान्त्रिक अधिकार से आप क्या समझते हैं? प्रमुख लोकतान्त्रिक अधिकारों का उल्लेख करें।

अथवा, भारत में लोकतान्त्रिक अधिकारों की चर्चा करें।

उत्तर : लोकतान्त्रिक अधिकारों का अभिप्राय उन अधिकारों से है जो कि नागरिकों को राज्य की ओर से अपने प्रतिनिधियों को चुनने, सरकार के कार्यों का आकलन करने एवं शासन में भाग लेने के उद्देश्य से प्रदान किये जाते हैं। 'लोकतान्त्रिक अधिकार से तात्पर्य उन व्यवस्थाओं से है जिनमें नागरिकों को शासन कार्य में भाग लेने का अवसर प्राप्त होता है।

प्रजातंत्रीय शासन-व्यवस्था में इन अधिकारों का और भी अधिक महत्त्व है। इससे नागरिकों को राजनीतिक प्रशिक्षण प्राप्त होता है। निर्वाचन में भाग लेने से राजनीतिक कार्यों को करने की क्षमता तथा उत्तरदायित्व की भावना का विकास होता है।

प्रमुख लोकतान्त्रिक अधिकार हैं-

(1) मतदान का अधिकार,

(2) निर्वाचित होने एवं राजनीतिक पद पाने का अधिकार,

(3) प्रार्थना पत्र देने का अधिकार,

(4) कानून के समक्ष समता का अधिकार,

(5) सरकार की आलोचना करने का अधिकार इत्यादि।

प्रश्न : 'लोकतंत्र अपने नागरिकों के बीच की असमानता को कम नहीं कर सकता।' इस कथन के पक्ष या विपक्ष में तर्क दें।

उत्तर : पक्ष में तर्क :

(1) यद्यपि एक लोकतांत्रिक व्यवस्था समानता के सिद्धान्त पर आधारित होती है परन्तु व्यवहार में यह देखा गया है कि लोकतंत्र अपने नागरिकों के बीच की असमानता को कम करने में असफल रहा है।

(2) लोकतंत्र के अन्तर्गत जनता को राजनीतिक क्षेत्र में तो परस्पर बराबरी का दर्जा मिल जाता है. परन्तु आर्थिक तथा सामाजिक क्षेत्र में गंभीर असमानताओं का अस्तित्व बना रहता है।

(3) मतदाताओं में गरीबों तथा सामाजिक रूप से पिछड़े लोगों की संख्या अधिक है, प्रत्येक राजनीतिक दल इन्हें अपना वोट बैंक बनाना चाहता है अतः इसके लिए यह आवश्यक हो जाता है कि असमानताओं को बनाये रखा जाय। यह लोकतंत्र का एक दुर्भाग्यपूर्ण पहलू है।

(4) नैसर्गिक क्षमता एवं व्यवसाय की लाभ-हानि पर लोकतन्त्र एक सीमा से अधिक अंकुश नहीं लगा सकता। इसके कारण अपनी क्षमताओं के अनुसार कोई आगे बढ़ता है और कोई पीछे रह जाता है।

(5) लोकतन्त्र व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का हनन नहीं कर सकता। इस व्यवस्था में किसी की आर्थिक या सामाजिक प्रगति को रोकना संभव नहीं है।

प्रश्न : भारतीय लोकतंत्र पर निरक्षरता का क्या प्रभाव हैं?

उत्तर : निरक्षरता निम्नांकित कारणों से लोकतंत्र के सफल संचालक में बाधक है-

(1) लोकतंत्र में जनमत का महत्त्वपूर्ण स्थान है। एक स्वस्थ जनमत के निर्माण के लिए जनता का शिक्षित होना बहुत जरूरी है। निरक्षरता राष्ट्रीय हितों को समझने में बाधक है।

(2) अशिक्षा के कारण व्यक्ति अपने अधिकारों व कर्त्तव्यों से अनभिज्ञ रहता है। अशिक्षा के कारण व्यक्ति अपने मताधिकार का गलत प्रयोग कर सकता है, जिससे अयोग्य प्रतिनिधियों के चुने जाने की संभावना बनी रहती है।

(3) अशिक्षा संकीर्ण मानसिकता को जन्म देती है, जिससे क्षेत्रवाद, भाषावाद, संप्रदायवाद इत्यादि जैसी समस्याओं का जन्म होता है।

(4) निरक्षरता के कारण नागरिकों की राजनीतिक सहभागिता कम हो जाती है, जिससे राजनीतिक संस्कृति तथा राजनीतिक विकास प्रभावित होता है।

(5) निरक्षरता के कारण लोग सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं से अनभिज्ञ होते हैं और उनका समुचित लाभ नहीं ले पाते हैं।

अर्थशास्त्र

विकास

Q. सामान्यतः किसी देश का विकास किस आधार पर निर्धारित किया जा सकता है?

(1) प्रति व्यक्ति आय

(2) औसत साक्षरता दर

(3) लोगों की स्वास्थ्य स्थिति

(4) उपर्युक्त सभी

Q. किसी देश की राष्ट्रीय आय को उसकी कुल जनसंख्या से भाग देने पर निम्नलिखित में से क्या प्राप्त होता है?

(1) प्रति व्यक्ति आय

(2) सकल घरेलू उत्पाद

(3) मानव विकास सूचकांक

(4) सकल राष्ट्रीय उत्पाद

Q. राष्ट्रीय आय के अंतर्गत क्या शामिल है?

(1) वस्तुओं का मूल्य

(2) सेवाओं का मूल्य

(3) वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य

(4) इनमें सभी

Q. केरल में शिशु मृत्यु दर कम होने का एक कारण निम्नलिखित में से कौन-सा है?

(1) सार्वजनिक वितरण प्रणाली का सही क्रियान्वयन

(2) उत्तम परिवहन व्यवस्था

(3) शिक्षा एवं स्वास्थ्य जैसी मौलिक सुविधाओं की पर्याप्त उपलब्धता

(4) उच्च प्रतिव्यक्ति आय

प्रश्न : सामान्यतः किसी देश का विकास किस आधार पर निर्धारित किया जाता है?

उत्तर : प्रति व्यक्ति आय के आधार पर ।

प्रश्न : औसत आय क्या होती है?

उत्तर : देश की कुल आय को जनसंख्या से भाग कर निकाली गई आय औसत आय होती है। इसको प्रतिव्यक्ति आय भी कहा जाता है।

प्रश्न : हम औसत का प्रयोग क्यों करते हैं?

उत्तर : किसी समूह में व्यक्ति की स्थिति अलग-अलग होती है। एक समूह की तुलना दूसरे समूह से करने के लिए हम औसत का प्रयोग करते हैं। उदाहरण के लिए, किसी देश में व्यक्तिगत आय अलग-अलग होते हैं। सम्पूर्ण जनसंख्या की औसत आय जान कर हम दूसरे देश की औसत आय से तुलना कर सकते हैं।

प्रश्न : सकल घरेलू उत्पाद (जी.डी.पी.) क्या है?

उत्तर : एक देश के भीतर किसी विशेष वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य सकल घरेलू उत्पाद (GDP) होता है। जी.डी.पी. अर्थव्यवस्था की विशालता प्रदर्शित करता है।

प्रश्न : विकास मापने का यू.एन.डी.पी. (संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम) का मापदंड किन पहलुओं में विश्व बैंक के मापदंड से अलग है?

उत्तर : विकास को मापने के लिए, जहाँ विश्व बैंक सिर्फ प्रतिव्यक्ति आय पर विचार करता है वहीं यू.एन.डी.पी. प्रतिव्यक्ति आय के अतिरिक्त साक्षरता दर तथा स्वास्थ्य स्तर पर भी विचार करता है।

प्रश्न : मानव विकास का क्या उद्देश्य है?

उत्तर : मानव विकास का उद्देश्य ऐसी परिस्थितियों का विकास करना है, जिसमें व्यक्ति आर्थिक, सामाजिक, शारीरिक, मानसिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से उच्चतर स्थिति को प्राप्त कर सके। इसका उद्देश्य मानव को एक सम्मानजनक तथा सृजनात्मक जीवन के पथ पर अग्रसर करना है।

प्रश्न : साक्षरता दर को पारिभाषित करें।

उत्तर : 7 वर्ष और इससे अधिक आयु के लोगों में साक्षर जनसंख्या के अनुपात को 'साक्षरता दर' के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न : 'शिशु मृत्यु दर' से क्या अभिप्राय है?

उत्तर : किसी वर्ष में पैदा हुए 1000 जीवित बच्चों में से एक वर्ष की आयु से पहले मर जाने वाले बच्चों के अनुपात को 'शिशु मृत्यु दर' कहा जाता है।

प्रश्न : हमारे देश के विकासात्मक लक्ष्य क्या होने चाहिए?

उत्तर : उच्च प्रतिव्यक्ति आय, उच्च साक्षरता दर तथा स्वास्थ्य स्तर, पूर्ण रोजगार एवं उत्तम संरचनात्मक सुविधाएँ।

प्रश्न : पर्यावरण में गिरावट के कुछ उदाहरण बताएँ जो आप अपने आस-पास देखते हैं?

उत्तर : (i) पेड़ों की बेरोकटोक कटाई

(ii) प्लास्टिक से बनी वस्तुओं का प्रयोग

(iii) कारखानों से निकलते धुएँ

(iv) शहरों की नालियों को नदियों या तालाबों में बहाना

प्रश्न : मानव विकास सूचकांक क्या है? इसमें किन बातों को शामिल किया जाता है?

उत्तर : किसी देश के नागरिकों के समग्र विकास की वास्तविक स्थिति को अभिव्यक्त करने के लिए, प्रयुक्त सूचकांक को मानव विकास सूचकांक कहा जाता है। इसमें निम्नांकित बातों को शामिल किया जाता है-

(i) प्रति व्यक्ति आय, अमरीकी डॉलर में।

(ii) जन्म के समय संभावित आयु या औसत आयु।

(iii) 15 वर्ष से ऊपर के आयु की जनसंख्या की साक्षरता दर।

(iv) प्राथमिक, माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा स्तर पर सकल नामांकन अनुपात।

(v) शिशु मृत्यु दर।

प्रश्न : 'धारणीय विकास' क्या है?

अथवा, धारणीयता का विषय विकास के लिए क्यों महत्त्वपूर्ण है?

उत्तर : धारणीयता का विषय विकास के लिए विशेष महत्त्व रखता है। विकास ऐसा होना चाहिए जिससे, भावी पीढ़ी के सामने संसाधनों की कमी की समस्या नहीं उत्पन्न हो तथा पर्यावरण भी सुरक्षित रहे। संसाधनों की कमी तथा पर्यावरण का ह्रास भावी पीढ़ी के समक्ष गंभीर परिणामों को जन्म देगा। अतः विकास के क्रम में यह आवश्यक है कि संसाधनों का न्यायसंगत प्रयोग किया जाय तथा पर्यावरण की शुद्धता का ध्यान रखा जाय।

भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक

Q. निम्नलिखित में से किसे संगठित क्षेत्र में नियोजित कहा जा सकता है?

(1) कृषि मजदूर

(2) बहुराष्ट्रीय कंपनी का स्थायी कर्मचारी

(3) लघु उद्योग के श्रमिक

(4) कबाड़ीवाला

Q. रोजगार के अधिक अवसर उत्पन्न करने के लिए निम्न में से कौन-से उपाय किए जाते हैं?

(1) सिंचाई की सुविधा में वृद्धि

(2) विद्यालय एवं अस्पताल की स्थापना

(3) खाद्य प्रसंस्करण इकाई की स्थापना

(1) केवल 1

(2) 1 तथा 2

(3) 2 तथा 3

(4) 1,2 तथा 3

Q. कृषि क्षेत्र में किस प्रकार की बेरोजगारी पायी जाती है?

(1) स्वैच्छिक बेरोजगारी

(2) अल्प बेरोजगारी

(3) संरचनात्मक बेरोजगारी

(4) चक्रीय बेरोजगारी

Q. वर्ष 2005 में भारत सरकार द्वारा रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कौन-सा कार्यक्रम शुरू किया गया?

(1) जवाहर रोजगार योजना

(2) राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना

(3) सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना

(4) इनमें से कोई नहीं

Q. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम कब अस्तित्व में आया?

(1) 2005 ई.

(2) 2006 ई.

(3) 2007 ई.

(4) 2008 ई.

Q. भारत किस वर्ग के देशों में आता है?

(1) निम्न मध्यम आय

(2) गरीब

(3) विकसित

(4) कम जनसंख्या

Q. जी.डी.पी. का क्या अर्थ है?

(1) सकल घरेलू उत्पाद

(2) प्रति व्यक्ति आय

(3) कुल आय

(4) सकल लाभ

Q. निम्न में से कौन अर्थव्यवस्था की विशालता को प्रदर्शित करता है?

(1) सकल घरेलू उत्पाद

(2) विश्व व्यापार संगठन

(3) विश्व स्वास्थ्य संगठन

(4) विश्व बैंक

प्रश्न : बेरोजगारी से क्या अभिप्राय है?

उत्तर : योग्य एवं सक्षम व्यक्तियों को काम करने की इच्छा के बावजूद काम नहीं मिलना बेरोजगारी कहलाता है। ऐसे व्यक्ति किसी उत्पादक गतिविधि में संलग्न नहीं होते हैं।

प्रश्न : स्वामित्व के आधार पर आर्थिक क्षेत्रक को कितने वर्गों में विभाजित किया गया है?

उत्तर : (1) सार्वजनिक क्षेत्र

(2) निजी क्षेत्र।

प्रश्न : खुली बेरोजगारी क्या होती है?

उत्तर : खुली बेरोजगारी वह है जहाँ योग्य और सक्षम व्यक्ति को कार्य करने की इच्छा के बावजूद काम नहीं मिलता है।

प्रश्न : कृषि क्षेत्रक में अल्पबेरोजगारी तथा प्रच्छन्न बेरोजगारी क्यों है?

उत्तर : कृषि क्षेत्र में अभी आवश्यकता से अधिक लोग संलग्न हैं लेकिन किसी को भी पूर्ण रोजगार प्राप्त नहीं है। इसलिए से कहा जाता है कि कृषि क्षेत्रक में अल्प बेरोजगारी अथवा प्रच्छन्न बेरोजगारी है।

प्रश्न : क्षेत्रक किसे कहते हैं?

उत्तर : आर्थिक गतिविधियों को महत्त्वपूर्ण मानदंडों के आधार पर जिन विभिन्न समूहों में वर्गीकृत किया जाता है उन समूहों को क्षेत्रक कहते हैं। आर्थिक गतिविधियों को तीन क्षेत्रकों में वर्गीकृत किया जाता है - प्राथमिक क्षेत्रक, द्वितीयक क्षेत्रक और तृतीयक क्षेत्रक (सेवा क्षेत्रक)।

प्रश्न : संगठित तथा असंगठित क्षेत्रक से आप क्या समझते हैं?

अथवा, संगठित और असंगठित क्षेत्रक के बीच आप विभेद कैसे करेंगे? अपने शब्दों में व्याख्या करें।

उत्तर : रोजगार की परिस्थितियों के आधार पर आर्थिक गतिविधियाँ दो भागों में वर्गीकृत की जाती

(1) संगठित क्षेत्रक: वैसे उद्यम अथवा कार्य-स्थान जहाँ रोजगार की अवधि नियमित होती है तथा लोगों के पास सुनिश्चित काम होता है, संगठित क्षेत्रक के अन्तर्गत आते हैं। संगठित क्षेत्रक के उद्यम सरकार द्वारा पंजीकृत होते हैं तथा उन्हें सरकारी नियमों एवं विनिमयों का अनुपालन करना पड़ता है। इस क्षेत्र के कर्मचारियों को रोजगार-सुरक्षा का लाभ मिलता है।

(2) असंगठित क्षेत्रक : वैसे उद्यम अथवा कार्य स्थान जहाँ रोजगार की अवधि अनियमित होती है तथा लोगों के पास सुनिश्चित काम नहीं होता, असंगठित क्षेत्रक के अन्तर्गत आते हैं। ऐसे उद्यमों का सरकार द्वारा पूँजीकरण नहीं किया जाता है। इस क्षेत्रक के नियम और विनियम तो होते हैं, परन्तु उनका अनुपालन नहीं किया जाता है।

प्रश्न : खुली बेरोजगारी तथा प्रच्छन्न बेरोजगारी के बीच विभेद कीजिए।

उत्तर : खुली बेरोजगारी तथा प्रच्छन्न बेरोजगारी के बीच निम्नलिखित अन्तर हैं-

खुली बेरोजगारी वह है जहाँ योग्य और सक्षम व्यक्ति को कार्य करने की इच्छा के बावजूद काम नहीं मिलता है। इसके विपरीत प्रच्छन्न बेरोजगारी वह है जहाँ लोग प्रत्यक्ष रूप से काम में लगे दिखाई देते हैं परन्तु उन्हें पूर्ण रूप से रोजगार प्राप्त नहीं होता है तथा उनमें से कुछ लोगों के काम से हट जाने पर उत्पादन प्रभावित नहीं होता है।

खुली बेरोजगारी तथा प्रच्छन्न बेरोजगारी के बीच निम्नलिखित अन्तर हैं -

खुली बेरोजगारी

प्रच्छन्न बेरोजगारी

1. खुली बेरोजगारी वह है जहाँ योग्य और सक्षम व्यक्ति को कार्य करने की इच्छा के बावजूद काम नहीं मिलता है।

1. प्रच्छन्न बेरोजगारी वह है जहाँ लोग प्रत्यक्ष रूप से काम में लगे दिखाई देते हैं परन्तु उन्हें पूर्ण रूप से रोजगार प्राप्त नहीं होता है तथा उनमें से कुछ लोगों के काम से हट जाने पर उत्पादन प्रभावित नहीं होता है।

2. इसके अन्तर्गत काम करने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को काम नहीं उपलब्ध होता है।

2. इसके अन्तर्गत किसी काम में लोग आवश्यकता से अधिक संख्या में लगे होते हैं।

3. इस प्रकार की बेरोजगारी औद्योगिक क्षेत्रों में अधिक पायी जाती है।

3. प्रच्छन्न बेरोजगारी कृषि क्षेत्र में अधिक पायी जाती है।

4. इस प्रकार के बेरोजगार लोगों की गणना स्पष्ट रूप से की जा सकती है।

4. इस प्रकार के लोगों की गणना स्पष्ट रूप से नहीं की जा सकती है।


मुद्रा और साख

Q. निम्नलिखित में से कौन महत्वपूर्ण मध्यवर्ती भूमिका प्रदान करके आवश्यकताओं दोहरे संयोग की जरूरत को समाप्त कर देती है?

(1) मुद्रा

(2) विदेश व्यापार

(3) निर्यात

(4) विकास

Q. निम्नलिखित में से कौन-सी एजेंसी भारत सरकार की ओर से करेंसी नोट जारी करती है?

(1) भारत के वित्तमंत्री इन्हें जारी करते हैं

(2) भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी होता है

(3) देश के सभी बैंक करेंसी नोट जारी करते हैं

(4) विश्वबैंक करेंसी नोट जारी करता है

प्रश्न : 'विनिमय का माध्यम' किसे कहा जाता है?

उत्तर : जिस माध्यम द्वारा वस्तु या सेवाओं का क्रय-विक्रय या लेन-देन होता है उसे विनिमय का माध्यम कहा जाता है। उदाहरण मुद्रा, करेंसी नोट, चेक, ड्राफ्ट, एटीएम आदि।

प्रश्न : वस्तु विनिमय किसे कहते हैं?

उत्तर : किसी वस्तु के बदले वस्तु द्वारा आवश्यकता की वस्तुओं के लेन-देन को वस्तु विनिमय कहते हैं। उदाहरण: किसान द्वारा लोहार को धान देकर हल या कुदाल लेना।

प्रश्न : वस्तु विनिमय प्रणाली से आप क्या समझते हैं?

उत्तर : वह प्रणाली जिसमें मुद्रा का उपयोग किये बिना लोग अपनी आवश्यकता की वस्तुओं की पूर्ति वस्तुओं के विनिमय (अर्थात वस्तु के बदले वस्तु) के माध्यम से करते हैं, वस्तु विनिमय प्रणाली के नाम से जानी जाती है। यह प्रणाली उस समय प्रचलित थी जब मुद्रा का प्रचलन प्रारंभ नहीं हुआ था।

प्रश्न : 'वस्तु विनिमय प्रणाली' के दोष/कठिनाइयाँ बताएँ।

उत्तर : वस्तु विनिमय प्रणाली के दोष अथवा कठिनाइयाँ निम्नलिखित हैं -

(1) आवश्यकताओं के दोहरे संयोग की कमी

(2) मूल्य के समान मापन की कमी

(3) स्थगित भुगतान के मानक की कमी

(4) मूल्य संचय की कमी

प्रश्न : मुद्रा के कोई दो कार्यों को लिखें।

उत्तर : मुद्रा के दो मुख्य कार्य हैं-

(i) विनिमय का माध्यम

(ii) मूल्य का मापक।

प्रश्न : मुद्रा के प्रयोग के दो तरीके या ढंग बताएँ।

उत्तर : विनिमय एवं मूल्य-संचय।

प्रश्न : मुद्रा को विनिमय का माध्यम क्यों कहा जाता है?

उत्तर : मुद्रा को विनिमय का माध्यम कहा जाता है, क्योंकि मुद्रा के बदले आसानी से किसी भी प्रकार की वस्तु या सेवा का विनिमय संभव होता है। इसमें आवश्यकताओं के दोहरे संयोग की जरूरत नहीं होती है।

प्रश्न : मुद्रा के आधुनिक रूप कौन से हैं?

उत्तर : मुद्रा के आधुनिक रूप -

(i) करेंसी नोट तथा सिक्के।

(ii) बैंकों में निक्षेप अथवा जमा।

(iii) क्रेडिट कार्ड एवं इंटरनेट बैंकिंग।

प्रश्न : बैंक मुख्यतः कितने प्रकार के होते हैं?

उत्तर : बैंक मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं

(1) व्यावसायिक बैंक

(2) केन्द्रीय बैंक

प्रश्न : व्यावसायिक अथवा व्यापारिक बैंक किसे कहते हैं?

अथवा, वाणिज्यिक बैंक से क्या तात्पर्य है?

उत्तर : व्यावसायिक बैंक वह संस्था है जो लाभ के उद्देश्य से मुद्रा के जमा, लेन-देन तथा ऋण की सेवाएँ प्रदान करता है। इसके लिए वह जनता, फर्मों तथा सरकार से जमा स्वीकार करता है। उनके चेक या आदेश पर भुगतान (आहरण) करता है। जमा का प्रयोग ऋण या निवेश के लिए करता है।

प्रश्न : 'केन्द्रीय बैंक' से क्या अभिप्राय है? हमारे देश के केन्द्रीय बैंक का नाम लिखें।

उत्तर : देश की मौद्रिक व्यवस्था के शीर्ष पर स्थित बैंक को केन्द्रीय बैंक कहा जाता है, जिसका मुख्य कार्य देश की मौद्रिक नीतियों की रचना, संचालन, नियमन, निर्देशन और नियंत्रण होता है। हमारे देश के केन्द्रीय बैंक का नाम - रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया है।

प्रश्न : चेक क्या है?

उत्तर : चेक एक विशिष्ट कागजी दस्तावेज होता है, जिस पर बैंक को निर्देश दिया जाता है कि वह चेक देने वाले व्यक्ति या संस्था के खाते से निर्देशित व्यक्ति को भुगतान करे।

प्रश्न : एक अर्थव्यवस्था में मुद्रा की भूमिका की विवेचना कीजिए।

उत्तर : किसी अर्थव्यवस्था में मुद्रा का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण और मुख्य कार्य वस्तुओं तथा सेवाओं के विनिमय को व्यावहारिक रूप से सरल बनाना है अर्थात् खरीद-बिक्री के एक सरल माध्यम के रूप में कार्य करना है। व्यापारिक गतिविधियों के संचालन के लिए वस्तुओं अथवा सेवाओं के मौद्रिक मूल्य का निर्धारण आवश्यक होता है। यह कार्य मुद्रा के द्वारा होता है।

मजदूरी, पेंशन आदि का भुगतान एक समय के बाद होता है। इस तरह से आर्थिक क्रियाओं में मुद्रा के माध्यम से स्थगित भुगतान विश्वसनीय तरीके से होता रहता है। किसी अर्थव्यवस्था की स्थिति लोगों की क्रय-शक्ति तथा प्रति व्यक्ति आय से मालूम होती है। इसके आकलन में मुद्रा की प्रमुख भूमिका होती है।

प्रश्न : अतिरिक्त मुद्रा वाले लोगों और जरूरतमंद लोगों के बीच बैंक किस प्रकार मध्यस्थता करते हैं?

उत्तर :- साधारणतया दो श्रेणी के लोग बैंक जाते हैं, एक वे जिनके पास अतिरिक्त घन होता है और दूसरे वे जिन्हें घन की आवश्यकता होती है।

- बैंक इन दोनों प्रकार के लोगों को मध्यस्थता प्रदान करता है।

- जिनके पास अतिरिक्त घन होता है उस जमाकर्ता को बैंक सूद देते हैं और जिन्हें धन की जरूरत होती है उनसे बैंक सूद प्राप्त करता है।

इस प्रकार बैंक में जो अतिरिक्त धन बच जाता है उससे बैंक निजी काम चलाता है। बैंक की मध्यस्थता से सभी वर्गों का कल्याण होता है।

प्रश्न : ऋण की शर्तों में किन बातों को शामिल किया जाता है?

उत्तर : ऋण की शर्तों में निम्नलिखित बातों को शामिल किया जाता है -

(i) व्याज दर

(ii) समर्थक ऋणाधार

(iii) आवश्यक कागजात

(iv) भुगतान के तरीके

(v) ऋण की अवधि

प्रश्न : उधारदाता उधार देते समय समर्थक ऋणाधार की माँग क्यों करता है?

उत्तर : उधारदाता उधार देने समय समर्थक ऋणाधार की माँग, ऋण-वापसी की सुनिश्चित करने के लिए करता है। यदि निर्धारित समय सीमा के अंदर, कर्ज दाता, समर्थक ऋणाधार को बेचकर अपना पैसा वापस प्राप्त कर लेता है।

प्रश्न : ऋण के औपचारिक एवं अनौपचारिक स्रोतों के अंतर को स्पष्ट करें।

उत्तर : साख के प्रमुख स्रोत हैं औपचारिक एवं अनौपचारिक स्रोत।

इनमें प्रमुख अन्तर निम्नलिखित हैं:

(1) बैंकों तथा सहकारी समितियों द्वारा दिये गये ऋण को औपचारिक ऋण तथा साहूकार, व्यापारी, मालिक, रिश्तेदार, मित्र आदि द्वारा दिये गये ऋण को अनौपचारिक ऋण कहा जाता है।

(2) औपचारिक ऋणदाता कर्जदार से समर्थक ऋणाधार की माँग करते हैं जबकि अनौपचारिक ऋण में किसी प्रकार के समर्थक ऋणाधार की आवश्यकता नहीं पड़ती।

(3) औपचारिक ऋणदाता एक निश्चित तथा निम्न ब्याज दर पर ऋण देते हैं जबकि अनौपचारिक ऋणदाता मनमानी तथा उच्च ब्याज दर पर ऋण देते हैं।

(4) औपचारिक ऋण देने वाली संस्थाओं का नियंत्रण एवं अधीक्षण रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा किया जाता है जबकि अनौपचारिक क्षेत्रक में ऋणदाताओं की गतिविधियों की देखरेख करने वाली कोई संस्था नहीं है। इस कारण से अनौपचारिक ऋणदाताओं द्वारा कर्जदारों का शोषण होता है।

(5) औपचारिक ऋण आकार में बड़ा होता है जबकि अनौपचारिक ऋण छोटा।

प्रश्न : वस्तु विनिमय की कठिनाइयों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर : वस्तु विनिमय प्रणाली के दोष अथवा कठिनाइयाँ निम्नलिखित हैं -

(1) वस्तुओं तथा सेवाओं के मूल्यमान के इकाई का अभाव, अर्थात यदि एक व्यक्ति को पाँच मीटर कपड़े की आवश्यकता है तथा उसे वह अपने पास के गेहूँ से बदलना चाहता है, तब प्रति मीटर कपड़े के लिए उसे कितना गेहूँ देना होगा निश्चित नहीं कर पाता।

(2) वस्तु विनिमय प्रणाली आवश्यकता के दोहरे संयोग पर आधारित प्रक्रिया है अर्थात् एक व्यक्ति, किसी ऐसे दूसरे व्यक्ति की तलाश में रहता है जो वही चीज बेचना चाहता है, जिसे पहला व्यक्ति खरीदना चाहता है। यह विनिमय को अधिक जटिल तथा समय लेने वाली बना देती है।

(3) ऐसा विनिमय जिसमें भुगतान, भविष्य में किया जाना होता है, वस्तु विनिमय प्रणाली के गंभीर दोष को व्यक्त करता है। भविष्य में दी जाने वाली वस्तु के मूल्यमान में उतार-चढ़ाव का जोखिम बना रहता है, जिससे किसी एक पक्ष को हानि की संभावना बनी रहती है।

(4) वस्तु विनिमय प्रणाली में मूल्य या धन संचय का कोई स्थान नहीं होता। इसमें सिर्फ वस्तुओं का भंडारण किया जा सकता है। अतः वस्तुओं के खराब होने की संभावना बनी रहती है।

प्रश्न : देश की अर्थव्यवस्था में बैंकों की भूमिका का वर्णन करें।

अथवा, देश की अर्थव्यवस्था में बैंको की क्या भूमिका रहती हैं?

उत्तर : देश की अर्थव्यवस्था में बैंकों की भूमिका -

(1) बैंकों में लोग अपनी बचत को जमा करते हैं जहाँ उस पर ब्याज भी प्राप्त होता है तथा पैसा सुरक्षित भी रहता है।

(2) बैंक, अतिरिक्त मुद्रा वाले लोगों और जरूरतमंद लोगों के बीच मध्यस्थता का कार्य करता है। बैंक जरूरतमंदों को ऋण देकर उनके आर्थिक विकास का मार्ग प्रशस्त करता है।

(3) बैंक देश में मुद्रा के परिचालन को नियंत्रित करते हैं। व्यावसायिक बैंक व्यापारिक लेन-देन की प्रक्रिया को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाते हैं।

(4) रिजर्व बैंक देश की मौद्रिक नीति बनाता है। अन्य बैंकों को उनका पालन करना अनिवार्य होता है। इसके द्वारा देश में तेजी और मंदी पर नियन्त्रण किया जाता है।

(5) ब्याज-दर, बैंक दर, नकद रिजर्व अनुपात (C.R.R), रेपो रेट इत्यादि का निर्धारण रिजर्व बैंक के द्वारा किया जाता है।

(6) बैंकों में अधिक लोग काम में लगे होते हैं। इस प्रकार बैंक बेरोजगारी की समस्या को हल करने में भी मदद करते हैं।

प्रश्न : आर्थिक विकास में ऋण की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर : (1) प्रति व्यक्ति आय एवं राष्ट्रीय आय में वृद्धि : देश के आर्थिक विकास में ऋण एक महत्त्वपूर्ण सकारात्मक भूमिका निभाता है। व्यापारी, उद्यमी, किसान तथा आम जनता बैंकों से ऋण लेकर अपना आर्थिक विकास करने का प्रयास करते हैं। उनके आर्थिक विकास से प्रति व्यक्ति आय तथा राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती है।

(2) रोजगार के सृजन तथा लघु एवं कुटीर उद्योगों के विकास में सहायक: ऋण लेकर व्यापारी अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने का प्रयास करता है, उद्यमी नये कारखाने लगाता है जिसमें लोगों को रोजगार प्राप्त होता है।

(3) कृषि एवं कृषि आधारित आर्थिक गतिविधियों के विकास में सहायक : किसान अपने उत्पादन को बढ़ाता है इससे देश के खाद्यान की जरूरतों की पूर्ति होती है।

(4) आम जनता अपनी छोटी-मोटी आवश्यकताओं को पूर्ण करती है : आय बढ़ाने तथा आवास खरीदने के लिए लोग बैंकों से ऋण लेते हैं।

(5) उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के लिए सफल छात्रों को अपनी शिक्षा को पूर्ण कर उत्तम रोजगार पाने में आज बैंक ऋण बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।

इस तरह ऋण आर्थिक विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

प्रश्न : हमें भारत में ऋण के औपचारिक स्रोतों को बढ़ाने की क्यों जरूरत है?

उत्तर : निम्नलिखित कारणों से, हमें भारत में ऋण के औपचारिक स्रोतों को बढ़ाने की जरूरत है-

(1) औपचारिक स्रोतों से मिलने वाला ऋण अनौपाचारिक स्रोतों से मिलने वाले ऋण की अपेक्षा सस्ता होता है, क्योंकि इस पर कम दर से ब्याज लगायी जाती है।

(2) आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को औपचारिक स्रोतों से ऋण मिलने से उनकी आय बढ़ेगी तथा बहुत से लोग अपनी विभिन्न जरूरतों के लिए सस्ता कर्ज ले सकेंगे।

(3) देश के विकास के दृष्टिकोण से सस्ता और सामर्थ्य के अनुकूल कर्ज आवश्यक है।

(4) औपचारिक स्रोतों से दिये गये ऋणों का पर्याप्त लेखा-जोखा रखा जाता है, जिससे कर्ज लेने वाला बेवजह परेशानी में नहीं पड़ता।

(5) औपचारिक स्रोतों पर ब्याज दर पूरे देश के लिए एक समान होती है। इससे यह ऋण सभी लोगों को प्राप्त होता है।

वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था

Q. विभिन्न देशों के बाजारों को जोड़ने या एकीकरण में निम्न में कौन सहायक होता है?

(1) बैंक

(2) विदेशी व्यापार

(3) उद्योग

(4) कृषि

Q. घरेलू अर्थव्यवस्था और विश्व अर्थव्यवस्था को जोड़ना कहलाता हैः

(1) वैश्वीकरण

(2) राष्ट्रीयकरण

(3) उदारीकरण

(4) निजीकरण

प्रश्न : विदेशी निवेश से क्या तात्पर्य है?

उत्तर : विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा व्यापार के लिए परिसंपत्तियों, जैसे- भूमि, भवन, मशीन तथा अन्य उपकरणों की खरीद में व्यय की गयी मुद्रा को विदेशी निवेश कहा जाता है।

विदेशी निवेश से देश की आय एवं रोजगार में वृद्धि होती है।

प्रश्न : उदारीकरण से आपका क्या तात्पर्य है?

उत्तर : अर्थव्यवस्था को अधिक प्रतियोगी बनाने के लिए आर्थिक नीतियों में ढील अथवा अवरोधों एवं प्रतिबंधों को हटाये जाने की प्रक्रिया उदारीकरण कहलाता है। उदारीकरण से तात्पर्य है, सरकार द्वारा लगाये गये प्रत्यक्ष या भौतिक आर्थिक नियंत्रणों से अर्थव्यवस्था को मुक्त करना।

प्रश्न : 'आयात शुल्क' से आप क्या समझते हैं?

उत्तर : एक देश द्वारा दूसरे देशों से आने बाली चीजों पर लगाया गया शुल्क आयात शुल्क के नाम से जाना जाता है। इस शुल्क का भुगतान बंदरगाहों, सीमाओं हवाई अड्डों आदि जैसे स्थानों पर किया जाता है जहाँ से दूसरे देशों की चीजें स्थानीय बाजारों में प्रवेश करती हैं।

प्रश्न : विदेशी व्यापार का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर : विदेशी व्यापार का मुख्य उद्देश्य है, अपने देश में उत्पादित अधिशेष को विदेशों में पहुँचाना, जहाँ उसकी अधिक माँग है तथा अपने देश में जिस वस्तु की कमी है उसे विदेशों से आयात करना।

प्रश्न : व्यापार अवरोधक से क्या तात्पर्य है?

उत्तर : किसी देश में, बाहर से आयात की गयी वस्तुओं पर, सरकार द्वारा लगाये गये आयात कर को 'व्यापार अवरोधक' के नाम से जाना जाता है। इसका प्रयोग सरकार द्वारा, आयातों को हतोत्साहित करने के लिए किया जाता है।

प्रश्न : सरकारें अधिक विदेशी निवेश आकर्षित करने का प्रयास क्यों करती हैं?

उत्तर : सरकार के द्वारा विदेशी निवेश आकर्षित किये जाने के निम्नलिखित कारण हैं -

(1) अधिक राजस्व की प्राप्ति

(2) देशी तकनीक का विकास

(3) स्थानीय कंपनियों के विकास का अवसर

(4) रोजगार के अवसरों में वृद्धि

(5) वैश्वीकरण को प्रोत्साहन।

प्रश्न : व्यापार और निवेश नीतियों का उदारीकरण, वैश्वीकरण प्रक्रिया में कैसे सहायता पहुँचाती है?

उत्तर : व्यापार और निवेश नीतियों का उदारीकरण वैश्वीकरण प्रक्रिया में निम्नलिखित प्रकार से सहायता पहुँचाती हैं-

(1) व्यापार में उदारीकरण की नीतियों से वैश्वीकरण की प्रक्रिया सुदृढ़ होती है- उदारीकृत व्यापार नीति के कारण विदेशी माल पर आयात शुल्क या मात्रात्मक प्रतिबंध हटा दिया जाता है इससे मुक्त व्यापार का वातावरण बनता है।

(2) व्यापार अवरोधक समाप्त हो जाने से आयात और निर्यात में आसानी होती है।

(3) निवेश की नीति में उदारीकरण के कारण विदेशी निवेश पर कोई प्रतिबंध नहीं लगता है। विदेशी पूँजीपति भारत में तथा भारतीय पूँजीपति विदेशों में बिना किसी प्रतिबंध के निवेश कर सकते हैं। विदेशी निवेश के उदारीकरण से वैश्वीकरण की प्रक्रिया को बढ़ावा मिलता है।

(4) बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ कई देशों में अपने उद्योग और कार्यालय खोल पाती हैं इससे सभी देशों के लोगों को रोजगार और आर्थिक लाभ मिलता है।

(5) व्यापार और निवेश नीतियों के उदारीकरण से पूरी दुनिया एक बाजार बन जाती है जहाँ हर देश अपनी वस्तु या सेवा बेच सकता है। इससे दुनिया के बाजार में देशों की प्रतिस्पर्धा क्षमता का विकास होता है और वस्तु या या सेवा की गुणवत्ता में सुधार होता है।

प्रश्न : वैश्वीकरण की प्रक्रिया में बहुराष्ट्रीय कंपनियों की क्या भूमिका है?

उत्तर : (1) बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ प्रायः विश्व में ऐसे स्थानों की तलाश में रहती हैं जहाँ उनके उत्पादन की लागत कम हो ताकि अधिक से अधिक लाभ कमाया जा सके।

(2) विभिन्न देशों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के निवेश में लगातार वृद्धि हो रही है। इसके साथ ही विभिन्न देशों के बीच विदेश व्यापार में भी वृद्धि हुई है।

(3) विदेश व्यापार का एक बड़ा भाग बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा नियंत्रित एवं संचालित होता है।

(4) इस प्रकार, बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ, विभिन्न देशों के बीच संबंधों को तेजी से बढ़ा रही हैं।

(5) इसके कारण विभिन्न देशों के बाजारों एवं उत्पादनों का भी तेजी से एकीकरण हो रहा है।

अतः कहा जा सकता है, बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ वैश्वीकरण की प्रक्रिया में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही

उपभोक्ता अधिकार

Q. हालमार्क किस प्रकार की वस्तुओं की गुणवत्ता का प्रमाणक चिह्न है?

(1) खाद्य तेल

(2) हेलमेट

(3) आभूषण

(4) कपड़ा

Q. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत कौन शिकायत कर सकता है?

(1) उपभोक्ता

(2) विक्रेता

(3) विदेशी व्यक्ति

(4) इनमें से कोई नहीं

Q. भारत सरकार ने सूचना का अधिकार (RTI) नामक कानून कब लागू किया?

(1) अक्टूबर 2005

(2) अगस्त 2006

(3) जनवरी 2005

(4) नवम्बर 2007

प्रश्न : उपभोक्ता जागरूकता क्यों आवश्यक हैं?

अथवा, उदाहरण देकर उपभोक्ता जागरूकता की जरूरत का वर्णन करें।

उत्तर : (i) उपभोक्ता की सुरक्षा के लिए सिर्फ नियमों एवं विनियमों का निर्माण ही काफी नहीं है बल्कि, इन नियमों के प्रति उपभोक्ता को जागरूक भी रहना चाहिए, तभी उसकी सुरक्षा वास्तविक रूप से हो सकती है।

(ii) उपभोक्ता जागरूकता से उत्पादकों तथा विक्रेताओं द्वारा उपभोक्ताओं के शोषण पर लगाम लगायी जा सकती है। माप-तौल में गड़बड़ी, गलत सामान या गलत सूचना देकर सामान बेचने की स्थिति में उपभोक्ता को अपने यथोचित अधिकारों का प्रयोग करना चाहिए।

(iii) उपभोक्ता के जागरूक होने से ही उपभोक्ता सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा तथा विक्रेताओं के अनैतिक एवं अनुचित व्यवस्था शैली पर रोक लगेगी। उपभोक्ता आंदोलन की सफलता के लिए उपभोक्ताओं का जागरूक होना आवश्यक है।

प्रश्न : उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम-1986 के निर्माण की आवश्यकता क्यों पड़ी?

अथवा, उपभोक्ता सुरक्षा कानून 1986 क्यों बनाया गया?

उत्तर : उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम-1986 के निर्माण की आवश्यकता निम्नांकित कारणों से पड़ी -

(1) उत्पादकों तथा विक्रेताओं द्वारा उपभोक्ताओं का शोषण।

(2) उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए सरकारी स्तर पर कानूनी संस्थाओं का अभाव।

(3) उपभोक्ता आंदोलनों का दबाव।

(4) उपभोक्ता सुरक्षा को बढ़ावा तथा विक्रेताओं के अनैतिक एवं अनुचित व्यवस्था शैली पर रोक लगाना।

प्रश्न : उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम के तहत स्थापित त्रिस्तरीय न्यायिक तन्त्र को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर : उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम के तहत उपभोक्ता विवादों के निपटारे के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तरों पर एक त्रिस्तरीय न्यायिक तन्त्र स्थापित किया गया है।

- जिला स्तर का न्यायालय 20 लाख तक के दावों से सम्बन्धित मुकदमों पर विचार करता है।

- राज्य स्तरीय अदालत 20 लाख से 1 करोड़ रुपये तक के मुकदमे देखती है।

-राष्ट्रीय स्तर की अदालत 1 करोड़ से ऊपर के मुकदमे देखती है।

यदि कोई मुकदमा जिला स्तर से खारिज कर दिया जाता है तो उसकी अपील राज्य स्तर तथा उसके पश्चात् राष्ट्रीय स्तर पर अपील की जा सकती है।

प्रश्न : 'सूचना का अधिकार' से आप क्या समझते हैं?

उत्तर : 2005 में देश की संसद ने एक कानून पारित किया जिसे सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के नाम से जाना जाता है। इस अधिनियम के द्वारा कोई भी नागरिक, किसी भी सरकारी विभाग से जानकारी प्राप्त कर सकता है। इस अधिकार का मूल उद्देश्य नागरिकों को सशक्त बनाना, सरकार के कार्य में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को बढ़ावा देना, भ्रष्टाचार को नियंत्रित करना और वास्तविक अर्थों में हमारे लोकतंत्र को लोगों के लिए कामयाब बनाना है।

प्रश्न : भारत में उपभोक्ता आंदोलन की प्रगति की समीक्षा करें।

अथवा, भारत में उपभोक्ता आंदोलन की शुरुआत किन कारणों से हुई? इसके विकास के बारे पता लगाएँ।

उत्तर : बड़े पैमाने पर खाद्यान्नों एवं खाद्य पदार्थों की कमी, जमाखोरी, कालाबाजारी, खाद्य पदार्थों में मिलावट जैसी समस्याओं के समाधान के एक प्रयास के रूप में, व्यवस्थित रूप से, भारत में, उपभोक्ता आंदोलन का उदय 1960 के दशक में हुआ।

इस आंदोलन का उद्देश्य उत्पादकों तथा विक्रेताओं के अनैतिक और अनुचित व्यवसाय कार्यों पर रोक लगाना तथा उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना था।

1970 के दशक में अनेक उपभोक्ता संगठनों का गठन किया गया। इन संगठनों द्वारा बृहत् स्तर पर उपभोक्ता अधिकार से संबंधित आलेखों का लेखन और प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।

आगे चलकर, सड़क यात्री परिवहन में अत्यधिक भीड़-भाड़ तथा राशन दुकानों में होने वाले अनुचित कार्यों पर नजर रखने के लिए उपभोक्ता दल बनाया गया।

यह उपभोक्ता आंदोलन का ही परिणाम था कि 1986 ई. में भारत सरकार द्वारा उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम लागू किया गया जो सामान्य रूप से COPRA के नाम से जाना जाता है।

यह अधिनियम उपभोक्ताओं की सुरक्षा की ओर उठाया गया एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

प्रश्न : भारत में उपभोक्ता आन्दोलन की शुरुआत किन कारणों से हुई?

अथवा, भारत में उपभोक्ता आंदोलन की शुरूआत किन कारणों से हुई? इसके विकास के बारे में पता लगाएँ।

उत्तर : उपभोक्ता आंदोलन की शुरुआत एवं उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम-1986 के निर्माण की आवश्यकता निम्नांकित कारणों से पड़ी -

(1) उत्पादकों तथा विक्रेताओं द्वारा उपभोक्ताओं का शोषण।

(2) उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए सरकारी स्तर पर कानूनी संस्थाओं का अभाव।

(3) उपभोक्ता सुरक्षा को बढ़ावा तथा विक्रेताओं के अनैतिक एवं अनुचित व्यवस्था शैली पर रोक लगाना।

इन कारणों को लेकर भारत में 1960 के दशक से कई संगठन आन्दोलनों, लेखन और प्रदर्शनियों के द्वारा सरकार पर दबाव बना रहे थे। अन्ततः 1986 में संसद में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम पारित किया गया।

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