हजारीबाग प्री-बोर्ड -01 इंटरमीडिएट परीक्षा 2026-27
कक्षा - 12वीं विषय - हिंदी (ऐच्छिक)
सामान्य
निर्देश:
इस
प्रश्न पत्र में कुल 52 प्रश्न हैं जो खंड क, ख, ग, एवं घ चार खण्डों में विभाजित
हैं।
खण्ड
'क': प्रश्न सं. 1 से 30 तक सभी वस्तुनिष्ठ प्रश्न अनिवार्य हैं (प्रत्येक 1 अंक)।
खण्ड
'ख': प्रश्न सं. 31 से 38 अति लघु उत्तरीय प्रश्न, किन्हीं 6 प्रश्नों के उत्तर दीजिए
(प्रत्येक 2 अंक)।
खण्ड
'ग': प्रश्न सं. 39 से 46 लघु उत्तरीय प्रश्न, किन्हीं 6 प्रश्नों के उत्तर दीजिए
(प्रत्येक 3 अंक)।
खण्ड
'घ': प्रश्न सं. 47 से 52 दीर्घ उत्तरीय एवं रचनात्मक प्रश्न, किन्हीं 4 प्रश्नों के
उत्तर दीजिए (प्रत्येक 5 अंक)।
खण्ड 'क' (वस्तुनिष्ठ प्रश्न)
1. 'कार्नेलिया का गीत' के रचयिता कौन हैं?
क) जयशंकर प्रसाद
ख)
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
ग)
सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला
घ)
केदार नाथ सिंह
2. 'कांपा अधरों पर थरथर थर' में कौन-सा अलंकार है?
क) पुनरुक्ति प्रकाश
ख)
रूपक
ग)
उत्प्रेक्षा
घ)
उपमा
3. 'मैंने देखा एक बूंद' कविता के कवि कौन हैं?
क)
केदार नाथ सिंह
ख)
डॉ. सच्चिदानंद हीरानंद
ग)
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
घ) वात्स्यायन अज्ञेय
4. 'दिशा' कविता का मूल भाव क्या है?
क) बच्चे यथार्थ को अपने ढंग से देखते हैं
ख)
बच्चों को दिशा का ज्ञान देना आवश्यक है
ग)
बच्चों को व्यावहारिक ज्ञान देना आवश्यक है
घ)
अपनी जिज्ञासा का समाधान स्वंय करना चाहिए
5. 'तोड़ो' कविता में कौन-सी शैली अपनाई गई है?
क)
रागात्मक शैली
ख) उदबोधन शैली
ग)
द्वंदात्मक शैली
घ)
उपर्युक्त में से कोई नहीं
6. 'बनारस' कविता के कवि का नाम क्या है?
क)
जयशंकर प्रसाद
ख) केदारनाथ सिंह
ग)
महादेवी वर्मा
घ)
सुमित्रा नंदन पंत
7. 'बसंत आया' कविता के कवि कौन हैं?
क)
जयशंकर प्रसाद
ख) विष्णु खरे
ग)
केदारनाथ सिंह
घ)
रघुवीर सहाय
8. 'यह दीप अकेला' कविता में कवि व्यक्ति को किससे जोड़ना चाहता है?
क) समाज से
ख)
व्यक्ति से
ग)
सपनों से
घ)
परिश्रम से
9. 'यह दीप अकेला' कविता किस काव्य संग्रह से ली गयी है?
क) बावरा अहेरी
ख)
हरी घास पर क्षण भर
ग)
नदी के द्वीप
घ)
कितनी नावों में कितनी बार
10. 'मैंने देखा, एक बूंद' की विधा कौन-सी है?
क)
कहानी
ख)
एकांकी
ग) कविता
घ)
उपन्यास
11. बनारस में किसकी खड़ाऊँ आज भी ज्यों की त्यों यथास्थान रखी हुई
है?
क)
कालिदास
ख)
कबीरदास
ग) तुलसीदास
घ)
संत रैदास
12. कवि के प्रश्न पर बच्चे के 'उतर-उतर' कहने का क्या अभिप्राय है?
क) पतंग की उडान की दिशा
ख)
उत्तर दिशा
ग)
पूर्व दिशा
घ)
ज्ञान न होने का संकेत
13. 'वसंत आया' कविता में कवि की चिंता क्या है?
क)
पलास के जंगलों में लगी आग
ख)
पेड़ों से पत्तों का झड़ना
ग) मनुष्य का प्रकृति से रिश्ता टूटना
घ)
नव निर्माण करना
14. तुलसीदास के राम स्वभाव से कैसे हैं?
क)
कठोर
ख)
चंचल
ग)
कोमल
घ) अति कृपालु
15. तुलसीदास के आराध्य कौन थे?
क)
कृष्ण
ख)
शिव
ग)
विष्णु
घ) राम
16. बारहमासा में नागमती का वियोग वर्णन किस माह से प्रारंभ हुआ?
क) अगहन
ख)
पूस
ग)
माघ
घ)
फाल्गुन
17. राधा का मन अपने साथ कौन ले गया है?
क)
गोपियाँ
ख)
उद्धव
ग) कृष्ण
घ)
कुब्जा
18. कवि नायिका को कृष्ण के किस मास तक वापस आ जाने की सांत्वना देते
हैं?
क)
पूस
ख) सावन
ग)
भादो
घ)
कार्तिक
19. 'कुसुमित कानन, कोकिल-कलरव' में कौन-सा अलंकार है?
क)
रूपक
ख)
उपमा
ग) अनुप्रास
घ)
श्लेष
20. 'सुजान सागर' किसकी रचना है?
क) घनानंद
ख)
केशवदास
ग)
विद्यापति
घ)
तुलसीदास
21. लेखक
रामचंद्र शुक्ल की आयु बढ़ने के साथ-साथ उनकी रुचि किसके प्रति बढ़ने लगी?
क) सिनेमा के प्रति
ख) हिंदी साहित्य के प्रति
ग) लेखन के प्रति
घ) नाटक के प्रति
22. 'सुमिरिनी
के मनके' के 'बालक बच गया' के अनुसार बालक ने इनाम में क्या माँगा?
क) पेंसिल
ख) किताब
ग) लड्डू
घ) चॉकलेट
23. फणीश्वर
नाथ रेणु द्वारा रचित सबसे लोकप्रिय उपन्यास कौन-सा है?
क) मैला आँचल
ख) परतीपरिकथा
ग) कितने चौराहे
घ) पलटू बाबू रोड
24. 'बिस्कोहर
की माटी' पाठ के लेखक कौन हैं?
क) केशवदास
ख) विश्वनाथ त्रिपाठी
ग) विष्णु शर्मा
घ) प्रभाष जोशी
25. कोइयाँ
का दूसरा नाम क्या है?
क) जूही
ख) सरसों
ग) बबूल
घ) कुमुद
26. निबंध
का अंतिम भाग कहलाता है -
क) परिचय
ख) निष्कर्ष
ग) विषय-विस्तार
घ) प्रस्तावना
27. अधिसूचना
का प्रकाशन कहाँ होता है?
क) सोशल मीडिया पर
ख) तार पत्र
ग) समाचार पत्र
घ) राजपत्र (गजट)
28. रेडियो
समाचार की आधारभूत बात क्या है?
क) सुंदर चित्र
ख) श्रोताओं की संख्या
ग) सुनने योग्य भाषा
घ) लंबी खबरें
29. टीवी
के लिए खबर लिखते समय सबसे महत्वपूर्ण क्या है?
क) भारी-भरकम शब्द
ख) दृश्यों के अनुकूल लेखन
ग) बड़े अनुच्छेद
घ) विदेशी भाषा
30. कविता
बनने के लिए सबसे आवश्यक क्या है?
क) केवल कल्पना
ख) केवल छंद
ग) जीवन का अनुभव
घ) संवेदना
खण्ड 'ख' (अति लघु उत्तरीय प्रश्न)
किन्हीं 6 प्रश्नों के उत्तर दीजिए (प्रत्येक 2 अंक):
31. देवसेना
की हार या निराशा के क्या कारण हैं?
उत्तर-
देवसेना की हार या निराशा के पीछे अनेक कारण रहे हैं, जैसे- हूणों का आक्रमण में देवसेना
के भाई व परिवार के अन्य सभी सदस्यों का वीरगति को प्राप्त हो जाना। पूरे परिवार में
वह अकेली ही बची थी। वह अपने भाई के स्वप्न को साकार होते देखना चाहती थी, लेकिन वह
चाहकर भी कोई विशेष प्रयत्न नहीं कर पाई। देवसेना स्कंदगुप्त से प्रेम करती थी, जबकि
स्कंदगुप्त स्वयं धनकुबेर की पुत्री विजया पर आसक्त था। इस तरह देवसेना को प्रेम में
भी असफलता ही हाथ लगी। देवसेना स्वयं को उपेक्षित जानकर निराशा से भर उठी। देवसेना
को वृद्ध पर्णदत्त के आश्रम में गीत गा कर भिक्षा तक मांगने को विवश होना पड़ा।
32. "जहाँ
पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा" पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए?
उत्तर-
इन पंक्तियों का आशय यह है कि भारत वर्ष सभी की आश्रय स्थली है। यहां न केवल पक्षी
बल्कि, अनजान लोग भी सहारा पाते हैं। तात्पर्य यह है कि भारतवासी इतने विशाल हृदय के
स्वामी हैं कि भारत में आकर सभी को आत्मिक सुख व संतोष मिलता है। अनजान लोगों तक को
सहारा देना भारतीयों की विशेषता है। यही भारतीयता की विशेष पहचान है।
33. कवि
निराला को 'सरोज-स्मृति' कविता में अपनी स्वर्गीया पत्नी की याद क्यों आई?
उत्तर-
संतान के विवाह के अवसर पर यदि माता-पिता में से किसी एक का अभाव है तो उनका स्मरण
आना स्वाभाविक बात है । कवि निराला ने अपनी पुत्री सरोज को माता-पिता दोनों का प्यार
दिया। अपनी पुत्री के विवाह आयोजन पर अपनी पत्नी की याद आना स्वाभाविक था। साथ ही सरोज
में उन्हें अपनी पत्नी की ही प्रतिमूर्ति दिखलाई पड़ती है। सरोज के वधू रूप को देखकर
उन्हें अपने यौवन की प्रथम गीति याद आ गई, जिसे उन्होंने अपनी प्रिया के साथ गाया था।
34. 'गीत'
और 'मोती' की सार्थकता किससे जुड़ी है?
उत्तर-
‘गीत’ की सार्थकता उसके गायन के साथ जुड़ी है। गीत तभी सार्थक होता है जब लोग उसे गाएँ।
गीत चाहे कितना भी अच्छा क्यों न हो, पर जब तक कोई उसे गाएगा नहीं तब तक वह निरर्थक
है। ‘मोती’ की सार्थकता उसके गहरे समुद्र से बाहर निकालकर लाने वाले गोताखोर के साथ
जुड़ी है। समुद्र की गहराई में चाहे कितने भी कीमती मोती भरे पड़े हों, पर वह गोताखोर
(पनडुब्बा) द्वारा बाहर निकालकर लाया जाता है, तभी वह मोती सार्थक बनता है अन्यथा वह
निरर्थक बना रहता है।
35. 'सूने
विराट के सम्मुख... दाग से!' पंक्तियों का भावार्थ स्पष्ट कीजिए?
उत्तर-
इस संसार में हर वस्तु नश्वर है। तात्पर्य है कि हर वस्तु को एक दिन समाप्त हो जाना
है। इस के डर से मनुष्य भयभीत रहता है। मगर जब बूँद सागर से क्षणभर के लिए अलग होती
है, तो उसे नष्ट होने का डर समाप्त हो जाता है। मुक्ति का अहसास उसके हृदय में भर जाता
है। यह वह क्षण होता है, जब वह स्वयं के जीवन को या अस्तित्व को सार्थक कर देती है।
मधुर मिलने से प्राप्त प्रकाश इस कलंक को धो डालता है कि मनुष्य जीवन भी एक दिन समाप्त
हो जाएगा। प्रकाशित वह क्षण ही उसके जीवन को सार्थकता प्रदान कर देती है। कवि उस बूँद
में उस विशालता के दर्शन के करता है, जो उसे सागर की अथाह जल राशि को देखकर भी प्राप्त
नहीं होता है। उस अहसास होता है कि वह अपने समाप्त होने वाले शरीर से भी ऐसे कार्य
कर सकता है, जो उसके छोटे से जीवन को सार्थकता प्रदान करता है। वह ऐसा साधक बन जाता
है, जिसे सभी पापों से छुटकारा मिल गया है।
36. बनारस
में धीरे-धीरे क्या होता है? 'धीरे-धीरे' से कवि क्या कहना चाहता है?
उत्तर-
कवि के अनुसार बनारस में कोई आपा-धापी भाग-दौड़ नहीं है। यहाँ मनुष्य और प्रकृति के
सारे क्रिया-कलाप धीरे-धीरे सम्पन्न होते हैं। यहाँ धूल धीरे-धीरे उतरती है। इस 'धीरे-धीरे
का मतलब इस शहर की आपाधापी से मुक्त जीवन की शांत और सुस्त चाल से है।
37. बचपन
में लेखक रामचंद्र शुक्ल के मन में भारतेंदु जी के संबंध में कैसी भावना जगी रहती थी?
उत्तर-
बचपन में लेखक के पिता उन्हें भारतेंदु जी के नाटक पढ़कर सुनाया करते थे। इस कारण लेखक
के बाल मन में मधुर भावना भारतेंदु के प्रति जगी रहती थी। वे राजा हरिश्चंद्र तथा कवि
भारतेंदु हरिश्चंद्र में अंतर नहीं कर पाते थे। इसलिए लेखक के मन में बचपन से ही भारतेंदु
जी के संबंध में एक अपूर्व मधुर भावना जगी रहती थी।
38. विद्यापति
के काव्य भाषा की विशेषताएँ बताएँ?
उत्तर- उत्तर-
विद्यापति ने मैथिली भाषा को काव्यभाषा के रूप में चुना है। - उन्होंने पदों में
आंचलिक शब्दों का भी खुलकर प्रयोग किया है। विभिन्न अलंकारों का सहज एवं स्वाभाविक
चित्रण किया है। पदों को प्रभावी बनाने के लिए चित्रात्मक भाषा का भी प्रयोग किया
है। कई शब्दों की पुनरावृति भी की है।
खण्ड 'ग' (लघु उत्तरीय प्रश्न)
किन्हीं 6 प्रश्नों के उत्तर दीजिए (प्रत्येक 3 अंक):
39. 'मैं
स्वीकार करूँ मैंने पहली बार जाना हिमालय किधर है' प्रस्तुत पंक्तियों का भाव स्पष्ट
कीजिए?
उत्तर-
अपने प्रश्न हिमालय किधर है' के उत्तर में बालक द्वारा अपनी पतंग के उड़ने की दिशा
की ओर संकेत करना कवि को दुविधा में डाल देता है। वह सोचता है कि भले उस बच्चे ने अज्ञानतावश
गलत बताया है परन्तु उसके इस उत्तर में उसका भोलापन, निर्दोषिता, कोमलता एवं अपना यथार्थ
है। प्रत्येक व्यक्ति का अपना एक सत्य होता है। हम उसे गलत नहीं ठहरा सकते हैं। यह
बालक के बाल मनोविज्ञान का सच है और इसे झुठलाया भी नहीं जा सकता।
40. 'प्रकृति
मनुष्य की सहचरी है' इस विषय पर विचार करते हुए आज के संदर्भ में इस कथन की वास्तविकता
पर प्रकाश डालें?
उत्तर-
यह सच है कि प्रकृति मनुष्य की सहचरी है। उसने मानव विकास में अपना पूरा योगदान दिया
है। उसने मनुष्य को सभी सुख-सुविधाएं प्रदान की है। मनुष्य ने प्रकृति की गोद में रहकर
ज्ञान प्राप्त किया है। आज वह चांद पर पहुंच गया है। प्रकृति के पास सभी उत्तम साधन
हैं, मनुष्य के पास अपना कुछ नहीं है। लेकिन जब से मनुष्य धरती पर निवास करने लगा तब
से अपना साम्राज्य फैलाना शुरू कर दिया। विकास के नाम पर चारों ओर कल कारखाने लगाकर
प्रकृति का दोहन करने लगा। प्रकृति के साधन सीमित हो रहे हैं। आज प्रकृति भी हम सब
का साथ छोड़ रही है।
41. कवि
की मन की भूमि और धरती में क्या-क्या समानताएँ दिखाई पड़ती हैं?
उत्तर-
तोड़ो कविता के अनुसार कवि रघुवीर सहाय को धरती और मन की भूमि में कुछ समानताएँ दिखती
हैं। उन्होंने इन समानताओं को इस प्रकार व्यक्त किया है-
धरती
और मन दोनों में बंजरपन का गुण होता है। धरती पर पत्थरचट्टानें रुकावटें बनती हैं जबकि
मन में खीज और उब मन के विकास में बाधक हैं। धरती और मन के सभी बंधन झूठे हैं। जिस
प्रकार धरती में रस होने पर बीज उगाने की क्षमता होती है, वैसे ही मन में रस होने से
विचार-भाव पैदा करने की क्षमता होती है।
42. 'हारे
हूँ खेल जितावहिं मोही' भरत के इस कथन का क्या आशय है?
उत्तर-
तुलसीदास जी ने रामचरितमानस के इस प्रसंग में प्रभु श्री राम के छोटे भाई भरत का श्रीराम
के प्रति गहन विश्वास प्रकट किया है। भरत भ्राता राम के प्रति विश्वास एवं प्रेम व्यक्त
करते हुए कहते हैं कि भ्राता राम का मुझ पर विशेष सेह रहा है। बचपन में जब खेल में
मैं हार जाता था, तो मुझे ही विजयी घोषित करते थे। भरत का ऐसा कहने का तात्पर्य यह
है कि भ्राता राम खेल में भी कभी अपने अनुजों का हृदय व्यथित नहीं कर सकते।
43. 'रहि
चकि चित्र लिखी-सी' पंक्ति का मर्म अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए?
उत्तर-
इस पंक्ति का मर्म यह है कि राम का स्मरण करके माता कौशल्या चित्रवत् मनःस्थिति में
आ जाती हैं। वह इधर-उधर हिलती-डुलती तक नहीं। वह चकित-सी रह जाती हैं। जिस प्रकार चित्र
में कोई आकृति स्थिर रहती है, वही दशा कौशल्या की हो गई। जो कौशल्या अभी तक राम की
वस्तुओं को देखकर और राम के बचपन का स्मरण करके मुग्धावस्था में थी, वही राम के वन-गमन
को याद करके स्थिर चित्र-सी हो जाती है।
44. विरहिणी
नागमती अपनी व्यथा का संदेश परदेशी पति के पास कैसे पहुँचाना चाहती है? अपने शब्दों
में वर्णन करें?
उत्तर-
मलिक मुहम्मद जायसी कृत पद्मावत की नायिका नागमती का पति राजा रत्नसेन परदेश चला गया।
उसके वियोग में नायिका जल रही है। इस रचना में बारह महीनों में से चार महीनों अगहन,
पूस, माघ, फागुन का विरहोद्दीपक रूप का वर्णन हुआ है। इन चार महीनों में अगहन की शीत
ऋतु उसके लिए अत्यन्त दाहक प्रतीत होती है। अगहन का शीत विरहाग्नि में जलती नागमती
भरें और काम के माध्यम से अपने प्रिय के पास अपनी करुण दशा का संदेश भेजती है। वे उनसे
अनुरोधपूर्वक कहती है कि वे उनके प्रियतम के प्रवास में जाकर कह दें कि उनकी प्रिया
विरहाग्नि में जल मरी है। उसी की चिता के धुआँ लगने से हम काले हो गये हैं। नागमती
के विरह का चरमोत्कर्ष यहाँ दिखलाई पड़ता है।
45. विद्यापति
की पदावली के अनुसार प्रियतमा के दुख के क्या कारण हैं?
उत्तर-
विद्यापति की पदावली से उद्धृत पद में नायिका के दुख के अनेक कारण हैं। मुख्य रूप
से वह विरहिणी है और उसी कारण शोकाकुल होकर वह अपने भाव व्यक्त करते हुए बताती है
कि सावन मास में प्रियतमा का दुख बढ़ जाता है। यह पीड़ा उसके लिए असहनीय है। वह
प्रिय के परदेश चले जाने से अकेली जीवन व्यतीत कर रही है। नायिका का प्रिय उसके
दिल को चुराकर अपने साथ ले गया है। अब नायिका को लगता है कि उसके प्रिय का मन उसकी
ओर नहीं है। बल्कि अन्यत्र है। वह अपने प्रिय से उपेक्षित हो रही है।
46. संपादकीय
लेखन का क्या अर्थ है?
उत्तर-
संपादकीय लेखन का शाब्दिक अर्थ समाचार पत्र के संपादक के अपने विचार से है।
प्रत्येक समाचार पत्र में संपादक प्रतिदिन ज्वलंत विषयों पर अपने विचार व्यक्त करते
हैं। संपादक प्रतिदिन किसी ज्वलंत समस्या या प्रमुख समसामयिक घटनाक्रम पर संपादकीय
लेखन करता है। इस लेख में समाचार पत्रों की नीति, सोच और विचारधारा को प्रस्तुत
किया जाता है।
अथवा
पत्रकार कितने तरह के होते हैं? उनके बारे
में लिखिए?
उत्तर-
पत्रकार तीन तरह के होते हैं।
1.
पूर्णकालिक पत्रकार इस श्रेणी के पत्रकार किसी समाचार संगठन में नियमित वेतन भोगी कर्मचारी
होते हैं।
2.
अंशकालिक पत्रकार इस श्रेणी के पत्रकार किसी समाचार संगठन के लिए एक निश्चित मानदेय
पर एक निश्चित समय अवधि के लिए कार्य करते हैं।
3.
फ्रीलांसर पत्रकार- इस श्रेणी के पत्रकारों का संबंध किसी विशेष समाचार पत्र से नहीं
होता बल्कि वे भुगतान के आधार पर अलग-अलग समाचार पत्रों के लिए लिखते हैं।
खण्ड 'घ' (दीर्घ उत्तरीय एवं रचनात्मक प्रश्न)
किन्हीं 4 प्रश्नों के उत्तर दीजिए (प्रत्येक 5 अंक):
47. जनसंचार
के प्रमुख कार्य कौन-कौन से हैं?
उत्तर-
जनसंचार के प्रमुख कार्य इस प्रकार है।
सूचना
देना- जनसंचार माध्यमों का एक प्रमुख कार्य सूचना
देना है। हमें उनके जरिए भी दुनियाभर से सूचनाएं प्राप्त होती हैं। हमारी जरूरतों का
बड़ा हिस्सा जनसंचार माध्यमों के जरिए ही पूरा होता है।
शिक्षित
करना- जनसंचार माध्यम सूचनाओं के जरिए हमें जागरूक
बनाते हैं। यहां शिक्षित करने से आशय उन्हें देश दुनिया के हाल से परिचित कराने और
उनके प्रति सजग बनाने से है।
मनोरंजन
करना- जनसंचार माध्यम मनोरंजन के प्रमुख साधन है।
सिनेमा, टीवी, रेडियो, संगीत के टेप और किताबें आदि मनोरंजन के प्रमुख माध्यम है।
एजेंडा
तैयार करना- किसी भी घटना या मुद्दे को चर्चा का विषय बना
कर जनसंचार माध्यम सरकार और समाज को उस पर अनुकूल प्रतिक्रिया करने के लिए बाध्य कर
देते हैं।
निगरानी
रखना- अगर सरकार कोई गलत कदम उठाती है या संगठन
/ संस्थान में कोई अनियमितता बरती जा रही है, तो उसे लोगों के सामने लाने की जिम्मेवारी
जनसंचार माध्यम पर है।
विचार-विमर्श
के मंच- जनसंचार विभिन्न विचार लोगों के सामने पहुंचाते
हैं। जैसे किसी समाचार पत्र के संपादक के पृष्ठ पर किसी घटना या मुद्दे पर किसी विचार
रखने वाले लेखक अपनी राय व्यक्त करते हैं। इसी तरह संपादक के नाम चिट्ठी स्तंभ में
आम लोगों को अपनी राय व्यक्त करने का मौका मिलता है।
अथवा
संपादकीय लेखन की पूरी प्रक्रिया को स्पष्ट
कीजिए.
उत्तर-
संपादकीय लेखन की प्रक्रिया को निम्नलिखित चरणों में बांटा जा सकता है-
(1)
विषय का चयन : ज्वलंत व सामाजिक विषय को संपादकीय लेखन
के लिए चुना जाता है । विषय प्रादेशिक, राष्ट्रीय या अंतराष्ट्रीय महत्व का हो सकता
है।
(2)
विषयानुरूप सामग्री का संकलन : विषय निर्धारण के उपरांत
सामग्री का संकलन किया जाता है। संपादक दिन-प्रतिदिन के घटनाओं पर पैनी नजर रखते हुए
विभिन्न संदर्भ सामग्री के माध्यम से विषय वस्तु का संकलन करता है।
(3)
विषय प्रवेश एवं विस्तार : संपादकीय के विषय प्रवेश
में समस्या की ओर ध्यानाकर्षण किया जाता है। तदुपरांत तार्किक ढंग से विचारों एवं तर्क
को प्रस्तुत करते हुए विषय वस्तु का विस्तार किया जाता है।
(4)
विषय का निष्कर्ष : संपादकीय के अंतिम भाग में संपादक विषय,
घटना या मुद्दे पर अपनी राय अथवा विचार रखता है। यह राय अथवा विचार पाठक के मस्तिष्क
को उद्वेलित करने वाला होता है।
(5)
शीर्षक: संपूर्ण लेखन के बाद संपादक अपने लेख के शीर्षक
का निर्धारण करता है। शीर्षक निश्चय ही किसी लेख के लिए अति महत्वपूर्ण होता है। अतः
संपादकीय का शीर्षक पाठक को प्रभावित करने वाला व विषय समग्रता को अपने आप में समाहित
करने वाला होना चाहिए।
48. सप्रसंग
व्याख्या कीजिए -
रकत ढरा माँसु गरा, हाड़ भए सब संख।
धनि सारस होइ ररि मुई, आइ समेटहु पंख।
उत्तर-
प्रसंग प्रस्तुत काव्यांश जायसी की महाकाव्यात्मक कृति 'पद्मावत' नागमती वियोग
खंड से संकलित अंश बारहमासा से अवतरित है। इस काव्यांश में विरह का अतिशयोक्तिपूर्ण
वर्णन हुआ है।
व्याख्या-
रतनसेन के वियोग में नागमती मरणदशा को पहुँच चुकी है। वह अपने प्रियतम को सम्बोधित
करते हुए कहती हैं है प्रिय तुम्हारे विरह में मेरी आँखों के आँसू नही बल्कि हृदय और
शरीर का रक्त बह गया है। शरीर का रक्त ही आँसू बनकर आँखों से अनवरत बह रहे हैं तथा
रक्त के बह जाने से शरीर का माँस भी गल गया है। अब केवल हड्डी ही बच गई है जो उजले
शंख की भाँति दिखाई पड़ रही है। मैरी दशा मृत सारस की जोड़ी के समान हो गई है। अतः
मुझ मृत सारंस रूपी वियोगिनी के पंख अब तो आकर समेट लो।"
विशेष-
वियोग का यह वर्णन अत्यन्त कारुणिक तथा अतिशयोक्तिपूर्ण है। विरह की मरण दशा का चित्रण,
भारतीय वियोग वर्णन में मिलता है, परन्तु रक्त के आँसू बनकर बह जाने मांस के गल जाने
पक्षी समान मृत देह के पंख समेट लेने के लिए प्रिय से निवेदन करना फारसी काव्य की मसनवी
बोली का प्रमाण है। भाषा अवधी अतिशयोक्ति अलंकार, छंद दोहा, रस विप्रलंभ श्रृंगार,
आलम्बन रत्नसेन, आश्रय नागमती, नायिका प्रोषितपतिका।
अथवा
बारहमासा के प्रथम छंद में से अलंकार छाँट
कर लिखिए और उनसे उत्पन्न काव्य-सौंदर्य पर टिप्पणी कीजिए.
उत्तर-
कवि ने अनुप्रास, उपमा, विरोधाभास, उत्प्रेक्षा और स्वर मैत्री अलंकारों का प्रयोग
किया है। इस काव्य अलंकरण से कविता सुंदर बन गई है। दीपक और बाती के दृष्टांत के माध्यम
से कवि ने नायिका को वियोग की ज्वाला में उसी प्रकार जलता हुआ दिखाया है, जिस प्रकार
दीपक की बत्ती निरंतर जलती रहती है। फिर-फिर में यमक अलंकार है। पहले फिरे में राजा
रत्नसेन के वापस आने का तथा दूसरे 'फिरै में 'शारीरिक सौंदर्य के पुनः लौटने की ओर
संकेत है। सिपरी अग्नि में विरोधाभास है। प्रेम की अग्नि वह अग्नि है, जो बाहरी लोगों
को दिखाई नहीं देती पर प्रेमी जन विरह की अग्नि में निरंतर जलते रहते हैं।
दूसरे
छंद में उत्प्रेक्षा, अनुप्रास, पुनरुक्तिप्रकाश आदि अलंकारों का स्वाभाविक प्रयोग
किया गया है। अनुप्रास अलंकारों के प्रयोग से काव्य में निरंतरता व प्रवाहमयता का गुण
विद्यमान है। घर-घर और कँपि-कँपि में पुनरुक्तिप्रकाश के प्रयोग से शब्दों पर बल पड़ा
है। इससे सर्दी की अधिकता का बोध होता है। सौर सुपेती आवै जुड़ी में विरोधाभास है।
रजाई में गर्मी प्रदान करने का गुण विद्यमान है, परंतु विरहिणी को रजाई सर्दी ही देती
है। पंखी में श्लेष अलंकार है, जो प्रिय प्रवास का बोध कराता है। विरह संचान में रूपक
अलंकार है। वियोग बाज पक्षी के समान है।
49. पठित
पदों के आधार पर सिद्ध कीजिए कि तुलसीदास का भाषा पर पूरा अधिकार था.
उत्तर-
हमने ‘गीतावली’ के
दो पद पढ़े हैं। इन पदों को पढ़कर पता चलता है कि तुलसी का भाषा पर पूरा अधिकार है।
उन्होंने जहाँ ‘रामचरितमानस’ में अवधी भाषा का प्रयोग किया है वहीं गीतावली में ब्रज भाषा
का प्रयोग हुआ है। तुलसीदास का अवधी और ब्रज-दोनों भाषाओं पर समान अधिकार था। ‘गीतावली’ की
रचना उन्होंने पद-शैली में की है।
गीतावली के पदों की भाषा में ब्रजभाषा का माधुर्य उभर कर
आया है। उन्होंने इन पदों की भाषा में अलंकारों का सटीक प्रयोग किया है।
उदाहरणार्थ : उपमा अलंकार – चित्रलिखी-सी, सिखी-सी
अनुप्रास अलंकार – बंधु बोलि, चकि चित्रलिखी
उत्रेक्षा अलंकार – “मनहु कमल हिम मारे
तुलसी की भाषा में भावों की गहराई है
अथवा
भरत और राम के प्रेम को वर्तमान के लिए आप
कितना प्रासंगिक मानते हैं? स्पष्ट करें.
उत्तर-
भरत और राम का प्रेम वर्तमान के लिए प्रासंगिक है और आवश्यक भी। आज रिश्तों का महत्व
समाप्त होता जा रहा है, या यूं कहें कि सारे रिश्ते खोखले होते जा रहे हैं। बाहर से
दिखावा और अंदर से नाम मात्र की भी मजबूती नहीं। भौतिकता के पीछे भागते भागते मनुष्य
वास्तविक सुख और आनंद से वंचित होता जा रहा है। वास्तव में सच्चा सुख और आनंद आपसी
प्रेम से ही मिलता है। समाज में यदि भरत और राम के समान भाइयों में प्रेम व्यवहार हो
तो जीवन की अनेक समस्याएं एवं बुराइयां स्वयं समाप्त हो जाएंगी।
50. 'प्रेमघन
की छायास्मृति' पाठ में कुछ रोचक घटनाओं का उल्लेख है, ऐसी तीन घटनाएँ चुनकर उन्हें
अपने शब्दों में लिखिए.
उत्तर-
ये रोचक घटनाएं निम्नलिखित है-
बद्रीनारायण
चौधरी प्रेमघन' की बातचीत का ढंग उनके लेखों के ढंग से एकदम निराला होता था। नौकरों
तक के साथ उनका संवाद सुनने लायक होता था, अगर किसी नौकर के हाथ से कभी कोई गिलास वगैरह
गिरा तो उनके मुंह से यही निकला कि 'कारे बचा त नाहीं । उनके प्रश्नों के पहले क्यों
साहब अक्सर लगा रहता था।
मिर्जापुर
में पुरानी परिपाटी के एक बहुत ही प्रतिभाशाली कवि रहते थे। जिनका नाम था वामन आचार्य
गिरि एक दिन वे सड़क पर चौधरी साहब के ऊपर एक कविता जोड़ते चले जा रहे थे। अंतिम चरण
रह गया था कि चौधरी साहब अपने बरामदे में कंधों पर बाल छिटकाए खंभे के सहारे खड़े थे
। उनको खंभे के साथ खड़े देखकर वह भी पूरा हो गया। उसका अंतिम पद था खंभा टेकी खड़ी
जैसे नारि मुगलाने की।
एक
दिन चौधरी साहब के एक पड़ोसी उनके यहां पहुंचे | देखते ही सवाल हुआ क्यों साहब एक बात
मैं अक्सर सुना करता हूं, पर उसका ठीक अर्थ समझ में आया नहीं। आखिर घनचक्कर के क्या
मायने हैं। पड़ोसी ने कहा वाह! यह क्या मुश्किल बात है, एक दिन रात को सोने के पहले
कागज कलम लेकर सवेरे से रात तक का जो-जो काम किए हो सब लिख जाइए और पढ़ जाइए।
एक
दिन लोग बैठे बातचीत कर रहे थे कि इतने में एक पंडित जी आ गए। चौधरी साहब ने पूछा
"कहिए क्या हाल है ? पंडित जी बोले " कुछ नहीं आज एकादशी थी कुछ जल खाया
है और चले आ रहे हैं।" प्रश्न हुआ- जल ही खाया है कि कुछ फलाहार भी पिया है।
अथवा
चौधरी साहब किस स्वभाव के व्यक्ति थे? साथ
ही, उनकी भाषा और बात करने की शैली को पाठ के आधार पर स्पष्ट करें.
उत्तर-
लेखक ने चौधरी साहब के व्यक्तित्व के निम्नलिखित पहलुओं को उजागर किया है-
उनके
बात करने का ढंग निराला था, उसमें विलक्षण वक्रता रहती थी। वे लोगों को बनाया करते
थे, वे विलक्षण व्यक्तित्व के स्वामी थे। चौधरी साहब खासे हिंदुस्तानी रईस थे. उनके
घर पर त्यौहार पर उत्सव मनाया जाता था. तथा उनकी हर अदा से रियासत तथा तबीयतदारी टपकती
थी ।
51. लेखक
के पिता 'भारत जीवन प्रेस' की पुस्तकें छिपाकर क्यों रखते थे तथा लेखक ने पुस्तकें
पढ़ने के लिए कौन-सा मार्ग अपनाया?
उत्तर-
लेखक के पिता साहित्य प्रेमी थे। उन्हें भारतेंदु हरिश्चंद्र बहुत प्रिय थे। उनके संस्कारों
का प्रभाव लेखक पर भी पड़ा. जिस कारण उनका हिंदी साहित्य के प्रति झुकाव बढ़ता गया।
लेखक के घर भारत जीवन प्रेस से पुस्तकें आती थीं, लेकिन लेखक के पिता उन पुस्तकों को
छिपाकर रखने लगे, क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं लेखक का ध्यान स्कूल की पढ़ाई से हट
न जाए तथा वह बिगड़ न जाए। लेखक ने पुस्तकें पढ़ने के लिए पंडित केदारनाथ जी पाठक द्वारा
खोले गए पुस्तकालय में जाकर वहां से पुस्तकें लाकर पढने का मार्ग अपनाया ।
अथवा
पाठ के आधार पर लेखक रामचंद्र शुक्ल के घर
का वातावरण और मित्र मंडली के बारे में अपनी राय व्यक्त करें.
उत्तर-
लेखक रामचंद्र शुक्ल के घर का वातावरण
*
साहित्यिक माहौल: रामचंद्र शुक्ल के घर का वातावरण पूरी तरह साहित्यिक और सांस्कृतिक
था। उनके पिता को फारसी और हिंदी कविता का बहुत शौक था।
*
पारिवारिक पठन-पाठन: उनके पिता अक्सर रात के समय पूरे परिवार को इकट्ठा करके रामचरितमानस,
रामचंद्रिका या भारतेंदु के नाटक पढ़कर सुनाते थे।
*
भाषा के प्रति प्रेम: बचपन से ही इस तरह के माहौल में रहने के कारण शुक्ल जी के मन
में हिंदी साहित्य और भाषा के प्रति गहरा प्रेम और झुकाव पैदा हो गया।
जब
लेखक रामचंद्र शुक्ल 16 वर्ष की अवस्था तक पहुँचे, तब उन्हें हिंदी-प्रेमियों की एक
खासी मित्र-मंडली मिल गई। इस मित्र मंडली में काशी प्रसाद जायसवाल, भगवानदास हालना,
पं० बद्रीनाथ गौड़, पं० उमाशंकर द्विवेदी प्रमुख थे। इस मंडली में हिंदी के नए-पुराने
लेखकों के बारे में चर्चा बराबर होती रहती थी। तब तक शुक्ल भी स्वयं को एक लेखक मानने
लगे थे। इन हिंदी-प्रेमियों की बातचीत प्रायः लिख्रने-पढ़ने की हिंदी में हुआ करती
थी। इस बातचीत में ‘निस्संदेह ‘ शब्द का बहुत प्रयोग होता था। कुछ उर्दू प्रेमियों
ने उन लोगों का नाम ‘निस्संदेह’ ही रख छोड़ा था।
52. "जहाँ
धर्म पर कुछ मुट्ठी भर लोगों का एकाधिकार धर्म को संकुचित अर्थ प्रदान करता है, वहीं
धर्म का आम आदमी से संबंध उसके विकास एवं विस्तार का द्योतक है।"
तर्क सहित व्याख्या कीजिए.
उत्तर-
लेखक का मानना है कि धर्म पर कुछ लोगों ने अपना एकाधिकार बना लिया है। धर्म को संकुचित
अर्थ प्रदान कर वे अपना मतलब साधते हैं। ऐसे लोग सामान्य मनुष्य को धर्म के गूढ़ रहस्यों
से परिचित होने देना नहीं चाहते। धर्म मनुष्य की स्वाभाविक प्रवृत्तियों के नवीन चेतना
को जगाने का माध्यम है। धर्म तभी सार्थकता तथा व्यापकता को प्राप्त कर सकता है, जब
वह संकुचित स्वार्थ वाले मुट्ठी भर लोगों के एकाधिकार से मुक्ति प्राप्त कर सच्चे अर्थ
में अपनी प्रवृत्तियों का विस्तार करे।
अथवा
घड़ी समय का ज्ञान कराती है। क्या धर्म संबंधी
मान्यताएँ या विचार अपने समय का बोध नहीं कराते? स्पष्ट करें.
उत्तर: जिस प्रकार घड़ी से समय ज्ञात होता है, उसी प्रकार धर्म संबंधी मान्यताएं एक धर्म का बोध कराती है। समय की मांग के अनुसार धर्म का स्वरूप परिवर्तित व निर्मित होता है। उसी के अनुरूप धार्मिक नियम गढे जाते हैं ताकि समाज उसे सरलता से स्वीकार कर सके। समय बदलने के साथ ही पुराने नियम अप्रासंगिक हो जाते हैं और अप्रासंगिक नियमों को बदल देना ही उचित है।
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