DUMKA PRE BOARD EXAMINATION ANSWER KEY - 2026-27
Class - XII GEOGRAPHY
सामान्य
निर्देश :-
प्रश्न
संख्या 1 से 25 तक बहुविकल्पीय प्रश्न हैं। प्रत्येक प्रश्न के चार विकल्प हैं।
सही विकल्प चुनकर उत्तर पुस्तिका में लिखें। प्रत्येक प्रश्न 1 अंक का है।
प्रश्न
संख्या 26 से 34 तक अति लघुउत्तरीय प्रश्न हैं। किन्हीं सात प्रश्नों के उत्तर
दें। प्रत्येक प्रश्न के लिए 1 अंक निर्धारित है।
प्रश्न
संख्या 35 से 42 तक लघुउत्तरीय प्रश्न हैं। किन्हीं छः प्रश्नों के उत्तर दें।
प्रत्येक प्रश्न के लिए 3 अंक निर्धारित है।
प्रश्न
संख्या 43 से 48 तक दीर्घ उत्तरीय प्रश्न हैं। किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दें।
प्रत्येक प्रश्न के लिए 5 अंक निर्धारित है।
Section – A 25 x 1 = 25
बहुविकल्पीय
प्रश्न (Multiple Choice Type Question)
1. नव नियतिवाद की संकल्पना
किसने प्रस्तुत की ?
(A)
फ्रेडरिक रेटजेल
(B) ग्रिफिथ टेलर
(C)
ब्लाश
(D)
सेम्पल
2 'एन्थ्रोपोज्योग्राफी' पुस्तकं किसने लिखी ?
(A)
इरेटॉस्थनीज
(B)
हम्बोल्ट
(C) फ्रेडरिक रेटजेल
(D)
जीन बुंश
3 निम्न में कौन सर्वाधिक जनसंख्या वाला महाद्वीप है ?
(A)
अफ्रीका
(B) एशिया
(C)
यूरोप
(D)
उत्तर अमेरिका
4 निम्न में कौन प्रवास का प्रतिकर्ष कारक नहीं है ?
(A)
जलाभाव
(B)
बेरोजगारी
(C) शैक्षिक सुविधाएँ
(D)
महामारी
5 विश्व में सर्वाधिक जनसंख्या केन्द्रित है -
(A)
पर्वतीय भूमि में
(B)
पठारी भूमि में
(C) मैदानी क्षेत्रों में
(D)
मरूस्थलीय भूमि में
6 विश्व में उच्चतम मानव विकास सूचकांक वाला देश कौन है ?
(A) नार्वे
(B)
स्विटजरलैंड
(C)
भारत
(D)
जापान
7 भारत में कार्यशील जनसंख्या का आयु वर्ग क्या है ?
(A) 15-59 वर्ष
(B)
15-64 वर्ष
(C)
20-40 वर्ष
(D)
15-65 वर्ष
8. संभययाद शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम किस फ्रांसीसी विद्वान ने किया
?
(A)
ब्लाश
(B) लुसियन
फेब्रै
(C)
जीन ब्रुश
(D)
फ्रांसिस बेकन
9 विश्व की 90% जनसंख्या कितने भाग पर निवास करती है ?
(A)
5%
(B) 10%
(C)
20%
(D)
40%
10 सर्वाधिक लिंगानुपात वाला देश है
(A)
चीन
(B)
कनाडा
(C) लाटविया
(D)
फ्रांस
11 ग्रामीण जनसंख्या किस प्रकार के व्यवसाय में संलग्न होते हैं ?
(A)
उद्योग
(B)
शोध कार्य
(C) कृषि
(D)
व्यापार
12 मानव विकास सूचकांक का प्रतिपादन
किसने किया था ?
(A)
डॉ अमर्त्य सेन
(B) डॉ महबूब उल हक
(C)
मार्शल (Marshall)
(D)
इनमें से कोई नहीं
13 रोपण कृषि के अंतर्गत निम्न में कौन सी फसल उगाई
जाती है ?
(A)
गेहूँ
(B)
मक्का
(C)
चावल
(D) चाय
14 भारत के किस भाग में झूम कृषि की जाती है ?
(A)
उत्तर भारत
(B) उत्तर-पूर्वी भारत
(C)
दक्षिण भारत
(D)
पश्चिम भारत
15 निम्न में किस महाद्वीप में जनसंख्या वृद्धि दर सर्वाधिक हैं ?
(A) अफ्रीका
(B)
एशिया
(C)
दक्षिण अमेरिका
(D)
उत्तर अमेरिका
16 वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व
वाला राज्य है
(A)
पश्चिम बंगाल
(B)
उत्तर प्रदेश
(C) बिहार
(D)
केरल
17 भारत का न्यूनतम जनसंख्या घनत्व वाला राज्य है
(A)
मिजोरम
(B)
सिक्किम
(C) अरूणाचल प्रदेश
(D)
गोवा
18 भारत का सबसे बड़ा भाषाई परिवार है ?
(A)
द्रविड़
(B)
ऑस्ट्रिक
(C)
चीनी-तिब्बती
(D) भारतीय-आर्य
19 भारत में पुरुष प्रवास का मुख्य कारण क्या है ?
(A)
शिक्षा
(B) रोजगार और काम
(C)
विवाह
(D)
स्वास्थ्य
20 निम्न में कौन धार्मिक नगर
है ?
(A)
जमशेदपुर
(B) देवघर
(C)
भिलाई
(D)
राउरकेला
21 निम्न में कौन सा तृतीयक क्रियाकलाप है ?
(A)
खेती
(B) व्यापार
(C)
बुनाई
D)
आखेट
22 भारत में हरित क्रांति की शुरूआत हुई -
(A)
1950 के दशक में
(B) 1960 के दशक में
(C)
1970 के दशक में
(D)
1980 के दशक में
23 बुशमैन प्रजाति समूह कहाँ पाये जाते हैं?
(A)
अमेरिका
(B) अफ्रीका
(C)
यूरोप
(D)
एशिया
24 प्रर्वतीय प्रदेशों में किस प्रतिरूप के अधिवास पाये जाते हैं ?
(A)
आयताकार
(B) सीढ़ीनुमा
(C)
पंखानुमा
(D)
तारा
25 शुष्क कृषि के अंतर्गत किस प्रकार की फसल उगायी जाती है?
(A)
जूट
(B)
गन्ना
(C) बाजरा
(D)
धान
Section - B (विषयनिष्ठ प्रश्न) 7x1=7
प्रश्न
संख्या 26 से 34 तक अति लघुउत्तरीय प्रश्न हैं। किन्हीं सात प्रश्नों के उत्तर दें।
प्रत्येक प्रश्न के लिए 1 अंक निर्धारित है।
26 मानव भूगोल को परिभाषित कीजिए
।
उत्तर:
रैटजेल के अनुसार, “मानव भूगोल मानव समाजों और धरातल के बीच सम्बन्धों का
संश्लेषित अध्ययन है।”
27 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में सर्वाधिक साक्षरता दर वाला राज्य
कौन है ?
उत्तर:
2011 की जनगणना के अनुसार भारत में सर्वाधिक साक्षरता दर वाला राज्य केरल है।
28 लिंगानुपात क्या है ?
उत्तर:
जनसंख्या में स्त्रियों और पुरुषों की संख्या के अनुपात को लिंग अनुपात कहा जाता है।
29 प्रवास के अपकर्ष कारक का एक उदाहरण दें।
उत्तर:
प्रवास के अपकर्ष कारक का एक प्रमुख उदाहरण रोजगार के बेहतर अवसर है।
30 ऋतुप्रवास से क्या समझते हैं ?
उत्तर:
मौसम या ऋतु के बदलने पर लोगों द्वारा अपने पशुओं के साथ एक स्थान से दूसरे अनुकूल
स्थान पर जाने और फिर मौसम बदलने पर वापस अपने मूल स्थान पर लौटने की प्रक्रिया को
ऋतु प्रवास कहते हैं।
31 ग्रामीण बस्तियाँ क्या है ?
उत्तर:
ग्रामीण बस्तियाँ वे मानवाधिकार क्षेत्र या आवास समूह हैं जहाँ के निवासी मुख्य रूप
से प्राथमिक आर्थिक गतिविधियों जैसे कृषि, पशुपालन, मछली पालन, खनन और वानिकी से जुड़े
होते हैं।
32 दो. नकदी फसलों के नाम बताएँ।
उत्तर:
गन्ना, कपास
33 साक्षरता से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
साक्षरता का अर्थ है साक्षर होना अर्थात पढने और लिखने की क्षमता से संपन्न होना ।
34 जनसंख्या घनत्व क्या है ?
उत्तर:
प्रति वर्ग किमी. क्षेत्रफल पर निवास करने वाले लोगों की संख्या को जनसंख्या घनत्व
कहा जाता है।
Section - C 6 x 3=18
प्रश्न
संख्या 35 से 42 तक लघुउत्तरीय प्रश्न
हैं। किन्हीं छः प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक प्रश्न के लिए 3 अंक निर्धारित है।
35 स्थानांतरी कृषि की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
(i)
पेड़ों को काट कर तथा जलाकर भूमि के टुकड़े को साफ किया जाता है।
(ii)
इस प्रकार की कृषि प्रायः मानसून, मृदा की प्राकृतिक उर्वरता तथा अन्य पर्यावरणीय परिस्थितियों
की उपयुक्तता पर निर्भर करता है।
(iii)
प्रति हैक्टेयर उत्पादन बहुत कम होता है क्योंकि किसान उर्वरक, खाद अथवा अन्य आधुनिक
तकनीकों का प्रयोग नहीं करते।
(iv)
दो-तीन वर्षों के बाद भूमि के उस टुकड़े को छोड़ दिया जाता है क्योंकि मृदा अपरदन तथा
मृदा की उर्वरता के कम होने से उत्पादन भी कम हो जाता है।
36 भारत में हरित क्रांति की उपलब्धियों का वर्णन करें।
उत्तर:
1960
के दशक के मध्य में उच्च उपज देने वाले बीजों (HYV), रासायनिक उर्वरकों और आधुनिक सिंचाई
तकनीकों के प्रयोग से शुरू हुई हरित क्रांति ने भारतीय कृषि परिदृश्य को बुनियादी रूप
से बदल दिया।
1. खाद्यान्न उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि
- गेहूं और चावल के उत्पादन में भारी उछाल दर्ज किया गया, जिसके कारण इसे
आरंभिक दौर में 'गेहूं क्रांति' भी कहा गया।
- प्रति हेक्टेयर उत्पादकता में कई गुना वृद्धि हुई, जिससे भारत की कुल कृषि
पैदावार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।
2. खाद्य सुरक्षा और आत्मनिर्भरता
- भारत विदेशी खाद्यान्न सहायता (जैसे अमेरिकी PL-480 कार्यक्रम) पर निर्भरता
समाप्त कर खाद्यान्न उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर बना।
- भारतीय खाद्य निगम (FCI) के माध्यम से आपात स्थितियों और सार्वजनिक वितरण
प्रणाली (PDS) के लिए विशाल बफर स्टॉक बनाना संभव हुआ।
3. कृषि का आधुनिकीकरण एवं यंत्रीकरण
- पारंपरिक तकनीकों की जगह ट्रैक्टर, थ्रेशर, हार्वेस्टर और ट्यूबवेल जैसी
आधुनिक मशीनों का व्यापक उपयोग शुरू हुआ।
- रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों और उन्नत बीजों के प्रयोग से वैज्ञानिक एवं
सघन कृषि को प्रोत्साहन मिला।
4. किसानों की आय में वृद्धि
- उत्पादन बढ़ने से किसानों के पास बिक्री योग्य अधिशेष (Marketable
Surplus) बढ़ा, जिससे विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के
किसानों की वित्तीय स्थिति और जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
37 ग्रामीण अधिवास के चार प्रतिरूपों की विवेचना करें।
उत्तर:
भारत की ग्रामीण बस्तियों को मुख्य रूप से चार भागों में
बाँटा जाता है
1.
गुच्छित, संहत अथवा केन्द्रित बस्तियाँ – इस तरह की बस्तियों में ग्रामीण घरों के संहत
खण्ड पाए जाते हैं। घरों की दो कतारों को सँकरी, तंग तथा टेढ़ी-मेढ़ी गलियाँ पृथक्
करती हैं। सामान्यत: इन बस्तियों का एक अभिन्यास होता है, जो रैखिक, आयताकार, ‘L’ आकृति
अथवा कभी-कभी आकृतिविहीन होता है।
2.
अर्द्धगुच्छित या विखण्डित बस्तियाँ – किसी सीमित क्षेत्र में समूहन प्रवृत्ति या समेकित
प्रादेशिक आधार के परिणामस्वरूप ही अर्द्धगुच्छित या विखण्डित बस्तियाँ बनती हैं। प्रायः
किसी बड़े संहत गाँव के पृथक्करण या विखण्डन के परिणामस्वरूप ही ऐसे प्रतिरूप उभरते
हैं। इस उदाहरण में ग्रामीण समाज का एक या एक से अधिक वर्ग स्वेच्छा या मजबूरी से मुख्य
गुच्छित बस्ती से कुछ दूरी पर अलग बस्ती बनाकर रहने लगता या लगते हैं।
3.
पुरवे – जाति व्यवस्था के कारण उत्पन्न सामाजिक विलगाव, कभी-कभी गुच्छित बस्तियों को
विखण्डित कर देता है। बस्तियों की ये गौण इकाइयाँ पान्ना, पाड़ा, पल्ली, नंगला या ढाणी
कहलाती हैं।
4.
परिक्षिप्त या एकाकी बस्तियाँ – इस तरह की बस्ती में छोटे-छोटे हैमलेट एक बड़े क्षेत्र
पर दूर-दूर बिखरे होते हैं। इसका कोई अभिन्यास नहीं होता, क्योंकि इन बस्तियों में
केवल कुछ ही घर होते हैं। सामान्यत: ये बस्तियाँ सुदूर वनों में एकाकी झोपड़ी या कुछ
झोपड़ियों के समूह के रूप में पायी जाती हैं। ऐसी बस्तियाँ छोटी पहाड़ियों पर भी होती
हैं, जिनके आस-पास के ढालों पर खेत अथवा चरागाह होते हैं।
38 प्रकृति का मानवीकरण क्या है ?
उत्तर:
प्रकृति का मानवीयकरण-मनुष्य भौतिक वातावरण और तकनीकी सहायता से प्रकृति पर प्रभाव
डालता है। प्रकृति मानव को प्रभावित करती है तो मनुष्य अपनी तकनीक से प्रकृति को
प्रभावित करता है। इसलिए इस बात का महत्त्व होता है कि मानव ने किस तकनीक और उपकरण
के साथ प्रकृति पर विजय प्राप्त की है।
उदाहरण
– घर्षण व ताप से आग की खोज हुई। उसी तरह डी०एन०ए० के ज्ञान से कई तरह के वंशानुगत
रोगी की जानकारी प्राप्त हुई। तकनीकी ज्ञान मनुष्य पर प्रकृति की पकड़ को कमजोर
करता है। प्रारम्भ में मानव प्रकृति से अधिक प्रभावित था लेकिन अब उसने उपकरणों
तथा तकनीक की सहायता से प्रकृति को अपने अनुकूल बना लिया है।
39 ग्रामीण एवं नगरीय बस्तियों में मुख्य अंतर क्या है ?
उत्तर:
ग्रामीण बस्तियां- ग्रामीण बस्तियों में निवास करने वाले लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि,
पशुपालन, आखेट, लकड़ी काटना, खनन करना जैसे प्रमुख प्राथमिक व्यवसाय होते हैं। गांव
में सेवाओं का स्तर निम्न होता है। ग्रामीण बस्तियों में जनसंख्या कम निवास करती है
तथा जनघनत्व कम पाया जाता है अधिकांश ग्रामीण बस्तियों प्रकीर्ण एवं एकांकी होती है।
नगरीय
बस्तियां- नगरीय बस्तियों के निवासी द्वितीय व तृतीय व्यवसाय में जैसे निर्माण उद्योग,
परिवहन, वाणिज्य एवं व्यापार सेवाएं तथा प्रशासन आदि से जुड़े होते हैं। नगरीय बस्तियों
में उच्च सेवाएं जैसे उच्च शिक्षा के स्तर, अस्पताल पुलिस व्यवस्था आदि पाया जाता है।
नगरों में जनसंख्या घनत्व ज्यादा होती है तथा नगरीय बस्तियां सघन बस्तियां होती है।
40 मानव भूगोल के उद्देश्यों का वर्णन करें ?
उत्तर:
मानव भूगोल का उद्देश्य मानव, वातावरण तथा मानवीय क्रियाओं के सम्बन्ध का विज्ञान
है।
41 मानव विकास को परिभाषित करें।
उत्तर:
मानव विकास स्वस्थ भौतिक पर्यावरण से लेकर सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्वतंत्रता
तक सभी प्रकार के मानव विकल्पों को सम्मिलित करते हुए लोगों के विकल्पों में विस्तार
और उनके स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, तथा सशक्तीकरण के अवसरों में वृद्धि की प्रक्रिया
है।
42 नियतिवाद एवं संभववाद में क्या अंतर है ?
उत्तर:
नियतिवाद और
सम्भववाद में अन्तर
|
नियतिवाद |
सम्भववाद |
|
1.
नियतिवाद की विचारधारा के अनुसार मनुष्य के प्रत्येक
क्रियाकलाप को पर्यावरण से नियन्त्रित माना जाता है। |
1.
सम्भववाद की विचारधारा के अनुसार मनुष्य अपने पर्यावरण में परिवर्तन करने में समर्थ
है तथा वह प्रकृतिदत्त अनेक सम्भावनाओं का अपने लाभ के लिए इच्छानुसार उपयोग कर सकता
है। |
|
2.
नियतिवाद सामान्यतः मानव को एक निष्क्रिय कारक
समझते हैं, जो पर्यावरणीय कारकों से प्रभावित होता है। |
2.
सम्भववादी सामान्यतः प्रकृति की तुलना में मनुष्य को महत्त्वपूर्ण स्थान देते हैं
और उसे सक्रिय शक्ति के रूप में देखते हैं। |
|
3.
इस विचारधारा को मानने वाले मानव के आचरण, निर्णय क्षमता, कार्यकुशलता तथा जीवन पद्धति
आदि को भी पर्यावरण के भौतिक कारकों द्वारा प्रभावित मानते हैं। |
3.
इस विचारधारा के अनुसार निश्चयवाद का यह सिद्धान्त कि मनुष्य प्रकृति का दास है,
अस्वीकृत कर दिया गया। |
|
4.
नियतिवाद विचारधारा के अनुसार प्राकृतिक पर्यावरण
सर्वप्रमुख है जो मानव के समस्त क्रियाकलापों को नियन्त्रित करता है। |
4.
सम्भववादी विचारधारा के अनुसार इस बात पर बल दिया गया है कि मनुष्य प्रकृति के तत्त्वों
को अपने लाभ के लिए चुनने के लिए स्वतन्त्र होता है और इस दृष्टि से मनुष्य को उसके
भौतिक पर्यावरण की अपेक्षा महत्त्वपूर्ण स्थान दिया जाता है। |
|
5.
हिप्पोक्रेट्स, अरस्तू, हेरोडोटस, स्ट्रैबो आदि रोम और यूनानी विद्वानों ने नियतिवाद का समर्थन किया। रैटजेल, रिटर, हम्बोल्ट, काण्ट आदि
ने भी इसी विचारधारा का समर्थन किया। |
5.
लूसियन फैब्रे, पॉल विडाल डी-ला ब्लाश आदि ने व्यवस्थित तरीके से इस विचारधारा का
प्रसार-प्रचार किया। |
Section - D 4x5=20
प्रश्न
संख्या 43 से 48 तक दीर्घ उत्तरीय प्रश्न हैं। किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दें।
प्रत्येक प्रश्न के लिए 5 अंक निर्धारित है।
43 विश्व में जनसंख्या वितरण को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन
करें।
उत्तर:
विश्व जनसंख्या वितरण और घनत्व को प्रभावित करने वाले कारक
विश्व जनसंख्या वितरण और घनत्व को प्रभावित करने वाले कारकों को सामान्यत तीन
वर्गों में रखा जाता है
1. भौगोलिक कारक
(i) जल की उपलब्धता- जल की उपलब्धता
मानवीय जीवन के विविध कार्यों के लिए सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण मानी जाती है यही कारण
है कि विश्व की नदी घाटियाँ जहाँ जल की पर्याप्त उपलब्धता मिलती है विश्व के
सर्वाधिक सघन बसे क्षेत्र है।
(ii) भू-आकृति- विश्व के समतल मैदानी भाग सामान्यतया सघन बसे मिलते हैं,
क्योंकि यह क्षेत्र कृषि फसलों के उत्पादन, सड़क निर्माण तथा उद्योगों की स्थापना
के लिए अनुकूल दशाएँ रखते हैं. जबकि पहाड़ी तथा पर्वतीय क्षेत्र इस दृष्टि से अधिक
उपयुक्त नहीं होते हैं।
(iii) जलवायु- मृदुल जलवायु दशाएँ रखने वाले क्षेत्र जिनमें
अधिक मौसमीय परिवर्तन नहीं होते हैं, सघन रूप से बसे मिलते हैं जबकि अति ठण्डे, अति
गर्म मरुस्थलीय क्षेत्र, अधिक वर्षा या विषम जलवायु रखने वाले क्षेत्रों में बहुत कम
जनसंख्या मिलती है।
(iv) मुदाएँ- कृषि की दृष्टि से उपजाऊ मिट्टियों वाले क्षेत्र
अधिक जनसंख्या को आकर्षित करते हैं, जबकि कम उपजाऊ मिट्टी रखने वाले क्षेत्रों में
विरल जनसंख्या मिलती है।
II. आर्थिक कारक
(i) खनिज- खनिज संसाधनों से सम्पत्र क्षेत्र खनन कार्य के साथ
साथ अनेक उद्योगों को भी अपनी ओर आकर्षित करते है जिसके कारण ऐसे क्षेत्रों में जनसंख्या
का अधिक जमाव देखने को मिलता है।
(ii) नगरीकरण- अच्छी नागरिक सुविधाएँ, रोजगार को अधिक साधन तथा
नगरीय जीवन के आकर्षण में बड़ी संख्या में ग्रामीण जनसंख्या नगरीय क्षेत्रों में आकर
बस जाती है।
(iii) औद्योगीकरण- औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में रोजगार
के अवसर के अवसर सृजित होते हैं जिसके कारण यह क्षेत्र सघन जनघनत्व वाले क्षेत्र हो
जाते हैं।
III. सामाजिक एवं सांस्कृतिक कारक
धार्मिक तथा सांस्कृतिक महत्त्व रखने
वाले क्षेत्र अधिक सघन बसे होते हैं जबकि सामाजिक व राजनीतिक अशान्ति रखने वाले क्षेत्रों
में जनसंख्या घनत्व विरल हो जाता है।
44 कार्यात्मक दृष्टिकोण से भारतीय नगरों का वर्गीकरण करें।
उत्तर:
विशेष कार्यों के आधार पर भारतीय नगरों को प्रमुख रूप से निम्नलिखित वर्गों में बांटा
गया है
प्रशासनिक
नगर - राष्ट्रों तथा राज्यों की राजधानियाँ जहाँ केंद्रीय सरकार या प्रांतीय सरकार
के प्रशासनिक कार्यालय होते हैं, उन्हें प्रशासनिक नगर कहा जाता है जैसे-नई दिल्ली
(भारत), केनबेरा (ऑस्ट्रेलिया), बीजिंग (चीन) इत्यादि ।
औद्योगिक
नगर- वैसे नगर जहां किसी विशेष प्रकार के उद्योगों का विकास किया जाता है, कच्चे माल
की प्राप्ति क्षेत्रों में यह उनके निकट ऐसे औद्योगिक नगरों का विकास होता है। उदाहरण
स्वरूप जमशेदपुर राउरकेला, दुर्गापुर भद्रावती, कुल्टी भिलाई में भारत का लौह इस्पात
उद्योग है। मुंबई कानपुर अहमदाबाद मोदीनगर, सोलापुर, कोयंबटूर में वस्त्र उद्योग स्थापित
है।
परिवहन
नगर- वैसे नगर जो मुख्यतः आयात और निर्यात की गतिविधियों में संलग्न होने के कारण पतन
नगर के रूप में विकसित होते हैं उन्हें परिवहन नगर विकास है जैसे मुंबई, कोलकाता, कांडला.
चेन्नई, कोझीकोड, विशाखापट्टनम, कोच्चि, कालीकट आदि ।
वाणिज्य
नगर- वाणिज्य और व्यापार में विशिष्ट स्थान प्राप्त रखने वाले शहरों और नगरों को वाणिज्य
नगर कहा जाता है। जैसे- कोलकाता, सहारनपुर, मुंबई दिल्ली, चेन्नई, बेंगलुरु आदि ।
पर्यटन
नगर- उत्तम जलवायु तथा नैसर्गिक प्राकृतिक सुंदरता के कारण कुछ नगरों का विकास पर्यटक
नगर के रूप में होता है। इन नगरों का प्रमुख आर्थिक कार्य पर्यटन व्यवसाय होता है।
जैसे- नैनीताल, शिमला, मसूरी, पंचमढ़ी, जोधपुर, माउंट आबू, जैसलमेर आदि ।
धार्मिक
तथा सांस्कृतिक नगर- कुछ नगरों का विकास वहां पर प्राचीन काल से ही नगर मस्जिद, मंदिर
चर्च आदि बने होते हैं ऐसे नगर तीर्थ यात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं
और अपनी सभ्यता संस्कृति धर्म एवं अध्यात्मिक के लिए प्रसिद्ध हो जाते हैं तो ऐसे नगर
धार्मिक और सांस्कृतिक नगर के रूप में जाने जाते हैं। जैसे बनारसी, मथुरा, अमृतसर,
पुरी, मदुरै, पुष्कर, तिरुपति, उज्जैन, हरिद्वार आदि।
गैरिसन
(छावनी) नगर- जिन नगरों में सैनिकों का आवास, प्रशिक्षण एवं खेलकूद की स्थलों की व्यवस्था
होती है तथा उन क्षेत्रों में सैनिकों का बसाव पाया जाता है, वह गैरिसन नगर कहलाता
है। जैसे -पठानकोट अंबाला, मऊ, बबीना, उधमपुर आदि ।
खनन
नगर- जिन क्षेत्रों में खनिजों की अधिकता पाई जाती है उन क्षेत्रों में खनन नगरों का
विकास होता है जैसे -रानीगंज, सिंगरौली, झरिया, हजारीबाग, गिरिडीह कोडरमा आदि।
45 चाय अथवा कपास उत्पादन के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाओं का वर्णन करें।
उत्तर:
⇒
कपास उत्पादन के लिए आवश्यक अनुकूल दशाएँ निम्न है-
(1)
तापमान 20°-30°C उपर्युक्त है।
⇒ साल में कम से कम 200 दिन पाला रहित
होने चाहिये।
⇒ पकते समय तेज धूप होना चाहिये।
(2)
वर्षा 50-100 cm उपयुक्त है।
(3)
भूमि - समतल होना चाहिये
(4)
मिट्टी - उपजाऊ काली मिट्टी सर्वोत्तम है।
(5)
मजदूर - सस्ते एवं पर्याप्त होने चाहिये
(1)
अन्य कारक - उन्नत बीज, ऊर्वरक, कीटनाशक दवाएँ, सिंचाई सुविधा, पूंजी, परिवहन सुविधा
होनी चाहिये।
46 ग्रामीण बस्तियों की प्रमुख समस्याओं का वर्णन करें।
उत्तर:
ग्रामीण बस्तियों की समस्याएँ ग्रामीण बस्तियों की प्रमुख
समस्याएँ निम्नलिखित हैं
1. पेयजल का अभाव संसार के अधिकतर गाँवों में पेयजल की
गम्भीर समस्या है। महिलाओं व बच्चों को कई-कई किमी दूर से पानी लाना पड़ता है।
रेगिस्तानी और पर्वतीय भागों में पेयजल की समस्या अत्यधिक गम्भीर है।
2. जलवाहित रोग - पेयजल की गुणवत्ता ठीक न होने से जलवाहित
रोग जैसे हैजा, पीलिया आदि फैलते हैं।
3. बाढ़ और सूखा - दक्षिण एशिया के देशों के गाँव बाढ़ और
सूखे दोनों की ही मार सहने को अभिशप्त हैं। सिंचाई के अभाव में सूखा पड़ने पर
फसलों को भारी हानि होती है।
4. शौचालयों और कचरे की समस्या- गाँव में शौचालयों के न
होने से महिलाओं को अधिक कठिनाई उठानी पड़ती है। वे इसी कारण अनेक रोगों का शिकार
हो जाती हैं। गाँवों में कचरे की निपटान की कोई सुचारु व्यवस्था नहीं है।
5. मानव और पशु एक साथ पशुओं को और उनके चारे को अपने घर
में या घर के अति निकट घेर में रखना किसान की मजबूरी है, लेकिन इससे अनेक रोगों के
फैलने का खतरा बना रहता है।
6. परिवहन और संचार साधनों का अभाव - गाँव में पक्की सड़कों
का अभाव है। टेलीफोन सविधा सभी गाँवों में नहीं है, अतः आपातकाल में गाँव शेष
दुनिया से कट जाते हैं। अनेक गाँव वर्षा ऋतु में सम्पर्कविहीन बने रहते हैं।
7. स्वास्थ्य और शिक्षा का अभाव गाँवों में स्वास्थ्य और
शिक्षा का अभाव है। यदि कहीं सुविधा है भी तो उसका स्तर बहुत घटिया है।
47 वर्षा जल संग्रहण के प्रमुख उपायों का वर्णन करें।
उत्तर:
वर्षा जल संग्रहण का अर्थ है बारिश के पानी को एकत्र करके
भविष्य में उपयोग के लिए सुरक्षित रखना। इसके प्रमुख उपाय हैं—
1. छत से वर्षा जल संग्रहण — घरों की छत पर गिरने वाले पानी
को पाइप द्वारा टंकी या भूमिगत टैंक में जमा किया जाता है।
2. रिचार्ज पिट बनाना — वर्षा के पानी को गड्ढे में पहुँचाकर
जमीन के अंदर उतारा जाता है, जिससे भूजल स्तर बढ़ता है।
3. तालाब और पोखर — वर्षा के पानी को तालाबों, पोखरों और
जलाशयों में एकत्र किया जाता है।
4. चेक डैम और बाँध — बहते हुए वर्षा जल को रोककर उसका संग्रहण
किया जाता है तथा भूजल पुनर्भरण में सहायता मिलती है।
5. कुएँ और बोरवेल का पुनर्भरण — वर्षा जल को उचित फिल्टर
के माध्यम से कुएँ या बोरवेल में पहुँचाया जाता है।
6. खेतों में जल-संरक्षण — खेतों में मेड़बंदी और छोटे जलाशय
बनाकर बारिश के पानी को रोका जाता है।
48 दिये गये संसार के मानचित्र पर निम्न को दर्शाए -
(A)
ईरान
(B)
अर्जेन्टीना
(C)
जापान
(D)
भूमध्यसागर
(E)
श्रीलंका
उत्तर:

हजारीबाग प्री बोर्ड 2026–27 इंटरमीडिएट परीक्षा–01
सामान्य
निर्देश :
1.
परीक्षार्थी यथासंभव अपने शब्दों में उत्तर दें।
2.
सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
3.
कुल प्रश्नों की संख्या 48 है।
4.
प्रश्न संख्या 01 से 25 तक बहुविकल्पीय प्रश्न हैं। प्रत्येक प्रश्न के चार विकल्प
दिए गए हैं। सही विकल्प का चयन कीजिए। प्रत्येक प्रश्न के लिए 01 अंक निर्धारित है।
5.
प्रश्न संख्या 26 से 34 तक अति लघु उत्तरीय प्रश्न हैं, जिनमें से किसी 6 प्रश्नों
का उत्तर देना अनिवार्य है। प्रत्येक प्रश्न का मान 1 अंक निर्धारित है।
6.
प्रश्न संख्या 35 से 42 तक लघु उत्तरीय प्रश्न हैं, जिनमें से किसी 6 प्रश्नों का उत्तर
देना अनिवार्य है। प्रत्येक प्रश्न का मान 3 अंक निर्धारित है।
7.
प्रश्न संख्या 43 से 48 तक दीर्घ-उत्तरीय प्रश्न हैं, जिनमें से किसी 4 प्रश्नों का
उत्तर देना अनिवार्य है। प्रत्येक प्रश्न का मान 5 अंक निर्धारित है।
खण्ड–क
कुल
25 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं। प्रत्येक प्रश्न का मान 1 अंक निर्धारित है।
1. नव-नियतिवाद (रूको और जाओ निश्चयवाद) की अवधारणा किसने प्रस्तुत
की?
(क)
एलेन सी. सेम्पल
(ख) ग्रिफिथ टेलर
(ग)
विडाल डी ला ब्लाश
(घ)
पोल नॉक्स
2. विश्व में सबसे अधिक जनसंख्या वृद्धि दर किस महाद्वीप की है?
(क)
एशिया
(ख) अफ्रीका
(ग)
यूरोप
(घ)
उत्तरी अमेरिका
3. मानव विकास सूचकांक (HDI) की गणना में किस घटक का उपयोग नहीं किया
जाता है?
(क)
जीवन प्रत्याशा
(ख)
शिक्षा के औसत वर्ष
(ग)
प्रति व्यक्ति आय
(घ) शिशु मृत्यु दर
4. संग्रहण और आखेट की क्रियाएँ किस प्रकार की आर्थिक गतिविधि के उदाहरण
हैं?
(क) प्राथमिक
(ख)
द्वितीयक
(ग)
तृतीयक
(घ)
चतुर्थक
5. कुटीर निर्माण उद्योग की मुख्य विशेषता है—
(क)
भारी पूँजी निवेश
(ख) स्थानीय कच्चे माल और पारिवारिक श्रम का उपयोग
(ग)
कच्चे माल का भारी आयात
(घ)
उन्नत स्वचालित मशीनें
6. 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत के किस राज्य का जनसंख्या घनत्व
सर्वाधिक है?
(क)
पश्चिम बंगाल
(ख) बिहार
(ग)
उत्तर प्रदेश
(घ)
केरल
7. उत्तर भारत के उपजाऊ जलोढ़ मैदानों में सामान्यतः किस प्रकार की
बस्तियाँ पाई जाती हैं?
(क) गुच्छित (संहत) बस्तियाँ
(ख)
प्रकीर्ण बस्तियाँ
(ग)
पल्ली बस्तियाँ
(घ)
अर्ध-गुच्छित बस्तियाँ
8. वह भूमि जो 5 वर्ष से अधिक समय तक बिना जुताई के छोड़ी जाती है,
कहलाती है—
(क)
पुरातन परती भूमि
(ख) कृषि योग्य व्यर्थ भूमि
(ग)
वर्तमान परती भूमि
(घ)
बंजर व व्यर्थ भूमि
9. भारत में कुल जल उपयोग में सबसे अधिक हिस्सा किस क्षेत्र का है?
(क) कृषि
(ख)
औद्योगिक
(ग)
घरेलू
(घ)
विद्युत उत्पादन
10. भारत में पाए जाने वाला सबसे उत्तम श्रेणी का लौह अयस्क कौन-सा
है?
(क) मैग्नेटाइट
(ख)
हेमेटाइट
(ग)
लिमोनाइट
(घ)
सिडेराइट
11. अनुसंधानकर्ता द्वारा सीधे क्षेत्र से एकत्र किए गए आँकड़ों को
क्या कहा जाता है?
(क)
द्वितीयक आँकड़े
(ख) प्राथमिक आँकड़े
(ग)
प्रकाशित आँकड़े
(घ)
प्रतिदर्श आँकड़े
12. व्यवस्थित आँकड़ों के मध्य मान को कौन-सा सांख्यिकीय माप दर्शाता
है?
(क)
माध्य
(ख) माध्यिका
(ग)
बहुलक
(घ)
परिसर
13. वृत्त आरेख का उपयोग दर्शाने के लिए किया जाता है—
(क)
निरंतर समय श्रृंखला
(ख) कुल भाग के आनुपातिक हिस्से
(ग)
भौगोलिक प्रवाह
(घ)
उच्चावच
14. कर्तन एवं दहन प्रथा किस कृषि प्रणाली में प्रचलित है?
(क) आदिमकालीन निर्वाह कृषि
(ख)
वाणिज्यिक अनाज कृषि
(ग)
रोपण कृषि
(घ)
मिश्रित कृषि
15. भारत में मैंगनीज का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य कौन-सा है?
(क) ओडिशा
(ख)
मध्य प्रदेश
(ग)
महाराष्ट्र
(घ)
झारखण्ड
16. वर्षा जल संचयन संरचना ‘टांका’ किस राज्य से संबंधित है?
(क)
तमिलनाडु
(ख) राजस्थान
(ग)
गुजरात
(घ)
कर्नाटक
17. भारतीय जनसंख्या वृद्धि के किस चरण को ‘जनसंख्या विस्फोट’ की अवधि
माना जाता है?
(क)
1901–1921
(ख)
1921–1951
(ग) 1951–1981
(घ)
1981–2011
18. ‘मानव विकास’ की अवधारणा किसके द्वारा प्रस्तुत की गई थी?
(क) डॉ. महबूब-उल-हक
(ख)
प्रो. अमर्त्य सेन
(ग)
एलेन सेम्पल
(घ)
थॉमस माल्थस
19. राजस्थान का खेतड़ी क्षेत्र किस खनिज के लिए प्रसिद्ध है?
(क)
लोहा अयस्क
(ख) ताँबा
(ग)
बॉक्साइट
(घ)
कोयला
20. द्वितीयक क्रियाएँ कच्चे माल का मूल्यवर्धन करती हैं—
(क)
निष्कर्षण से
(ख) प्रसंस्करण एवं निर्माण से
(ग)
परिवहन से
(घ)
व्यापार से
21. भारत की जनगणना प्रकाशन आँकड़ों का स्रोत है—
(क)
प्राथमिक आँकड़े
(ख) द्वितीयक आँकड़े
(ग)
प्रयोगात्मक आँकड़े
(घ)
व्यक्तिगत अवलोकन
22. भारत में सबसे कम नगरीय जनसंख्या का प्रतिशत किस राज्य में है?
(क) हिमाचल प्रदेश
(ख)
बिहार
(ग)
असम
(घ)
ओडिशा
23. पंजाब और हरियाणा में भूमि निम्नीकरण का मुख्य कारण क्या है?
(क)
अतिपशुचारण
(ख)
वनों की कटाई
(ग) अति-सिंचाई
(घ)
खनन
24. कृषि से प्राप्त कच्चे माल पर निर्भर उद्योग को क्या कहते हैं?
(क) कृषि आधारित उद्योग
(ख)
खनिज आधारित उद्योग
(ग)
वन आधारित उद्योग
(घ)
रसायन आधारित उद्योग
25. दंड आरेख दर्शाने के लिए सबसे उपयुक्त होते हैं—
(क) विभिन्न श्रेणियों के पृथक आँकड़े
(ख)
निरंतर वर्षा का वितरण
(ग)
कुल भाग का प्रतिशत
(घ)
निरंतर ऊँचाई में परिवर्तन
खण्ड–ख
प्रश्न
संख्या 26–34 अति लघु उत्तरीय प्रश्न हैं। इनमें से किन्हीं सात प्रश्नों के उत्तर
दीजिए। प्रत्येक प्रश्न का मान 1 अंक निर्धारित है।
26. पर्यावरणीय निश्चयवाद को सरल शब्दों में परिभाषित कीजिए।
उत्तर-
प्रकृति के अनुसार अपने को ढालने की कोशिश करना ही पर्यावरण निश्चयवाद कहलाता है।
27. जनसंख्या घनत्व ज्ञात करने का सूत्र लिखिए।
उत्तर-
प्रति इकाई क्षेत्रफल में रहने वाले लोगों की संख्या को जनसंख्या घनत्व कहते हैं।
जनसंख्या
घनत्व = कुल जनसंख्या ÷ कुल क्षेत्रफल
28. मानव विकास के किन्हीं दो स्तंभों के नाम लिखिए।
उत्तर-
मानव विकास के चार प्रमुख स्तंभ हैं—
समानता, सततता, उत्पादकता और सशक्तीकरण।
29. वाणिज्यिक डेयरी फार्मिंग क्या है?
उत्तर-
विस्तृत घास भूमि पर आधुनिक वैज्ञानिक तरीके से किया जाने वाला व्यवस्थित एवं पूंजी
प्रधान व्यवसाय है।
30. भारत में दो गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के नाम लिखिए।
उत्तर-
भारत में दो प्रमुख गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोत सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा हैं।
31. ‘निवल बोया गया क्षेत्र’ को परिभाषित कीजिए।
उत्तर-
किसी क्षेत्र में एक कृषि वर्ष के दौरान वास्तव में जितने क्षेत्र में फसल बोई जाती
है, उसे निवल बोया गया क्षेत्र कहते हैं।
32. प्राथमिक और द्वितीयक आँकड़ों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
प्राथमिक आँकड़ों को अनुसंधानकर्ता या शोधकर्ता द्वारा अपने अनुसंधान के लिए पहली बार
एकत्रित किया जाता है।
जबकि
द्वितीयक आँकड़ें वे आंकड़े होते हैं जिनका अनुसंधानकर्ता अपने अनुसंधान के लिए प्रयोग
करता है जो पहले से दूसरे व्यक्ति या संस्था द्वारा संग्रहित या संशोधित किया जाता
है।
33. ‘गुच्छित (संहत) बस्ती’ किसे कहते हैं?
उत्तर-
गुच्छित बस्तियाँ उन ग्रामीण बस्तियों को कहते हैं जहाँ मकान एक-दूसरे के बहुत पास-पास
और सटे हुए निर्मित होते हैं।
इस
प्रकार की बस्ती में पूरा गाँव एक घने और संकुचित क्षेत्र में बसा होता है। रहने का
आवास क्षेत्र (आवासीय क्षेत्र) कृषि योग्य खेतों, खलिहानों और चरागाहों से पूरी तरह
अलग और स्पष्ट होता है। गलियाँ प्रायः संकरी होती हैं और गाँव के मध्य में कोई साझा
स्थान (जैसे मंदिर, चौपाल या कुआँ) होता है।
34. जलसंभर प्रबंधन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर-
जल संभर प्रबंधन से तात्पर्य, मुख्य रूप से, धरातलीय ओर भौम जल संसाधनों के दक्ष प्रबंधन
से है। इसके अंतर्गत बहते जल को रोकना और विभिन्न विधियों, जैसे- अंतः स्रवण तालाब,
पुनर्भरण, कुओं आदि के द्वारा भौम जल का संचयन और पुनर्भरण शामिल हैं। जल संभर प्रबंधन
का उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों और समाज के बीच संतुलन लाना है।
खण्ड–ग
प्रश्न
संख्या 35–42 लघु उत्तरीय प्रश्न हैं। इनमें से किन्हीं छह प्रश्नों के उत्तर
दीजिए। प्रत्येक प्रश्न का मान 3 अंक निर्धारित है।
35. पर्यावरणीय निश्चयवाद और संभववाद के बीच तीन प्रमुख अंतर स्पष्ट
कीजिए।
उत्तर-
निश्चयवाद तथा संभववाद में निम्नलिखित अन्तर हैं-
|
निश्चयवाद |
संभववाद |
|
1.निश्चयवाद
के अनुसार मनुष्य के समस्त कार्य पर्यावरण द्वारा निर्धारित होते हैं। |
1.संभववाद के अनुसार मानव अपने पर्यावरण में परिवर्तन करने का सामर्थ्य रखता है। |
|
2. इस विचारधारा के समर्थक रेटज़ेल व हंटिंगटन थे। |
2. इस विचारधारा के समर्थक विडाल डी ला ब्लाश व फैव्रे थे। |
|
3. यह जर्मन विचारधारा है। |
3. यह फ्रांसीसी विचारधारा है। |
36. वृद्धि और विकास में तीन प्रमुख अंतर लिखिए।
उत्तर-
वृद्धि तथा विकास दोनों समय के संदर्भ में परिवर्तन को प्रदर्शित करते हैं, लेकिन इनमें
निम्नवत् अंतर होते हैं
1.
एक ओर जहाँ वृद्धि धनात्मक एवं ऋणात्मक दोनों हो सकती है वहीं विकास के अंतर्गत गुणवत्ता
में सकारात्मक परिवर्तन होता है।
2.
वृद्धि मात्रात्मक होती है तथा इसका मूल्य निरपेक्ष होता है जबकि विकास गुणात्मक होता
है तथा उसका मूल्य सापेक्ष होता है।
3.
विकास उस समय तक नहीं हो सकता जब तक कि वर्तमान दशाओं में सकारात्मक या धनात्मक परिवर्तन
न हो, जबकि वृद्धि में यह आवश्यक नहीं है।
इस
तथ्य को निम्न उदाहरण द्वारा समझा जा सकता है किसी निश्चित समयावधि में यदि किसी नगर
की जनसंख्या एक लाख से बढ़कर दो लाख हो जाती है तो उसे नगरीय जनसंख्या की वृद्धि कहा
जाएगा लेकिन नगर में हुई जनसंख्या वृद्धि के सापेक्ष यदि आवास सुविधाएँ, मूलभूत सुविधाएँ
तथा अन्य विशेषताओं में वृद्धि नहीं होती तो इस वृद्धि को विकास नहीं कहा जाएगा।
37. कुटीर या घरेलू उद्योगों की तीन विशेषताएँ बताइए।
उत्तर-
कुटीर उद्योगों की तीन विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –
1.
यह निर्माण की सबसे छोटी इकाई है जो स्थानीय कच्चे माल का उपयोग करती हैं।
2.
ये उद्योग कम पूंजी तथा दक्षता से परिवार के सदस्यों द्वारा ही चलाये जाते हैं।
3.
इससे दैनिक जीवन के लिए उपयोगी वस्तुओं का उत्पादन किया जाता है।
38. छोटे पैमाने के उद्योगों और बड़े पैमाने के उद्योगों में तीन बिंदुओं
में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
छोटे पैमाने के उद्योग और बड़े पैमाने के उद्योगों में अंतर
|
आधार |
छोटे पैमाने के उद्योग |
बड़े पैमाने के उद्योग |
|
1. पूँजी |
कम पूँजी की आवश्यकता होती है। |
बहुत अधिक पूँजी की आवश्यकता
होती है। |
|
2. उत्पादन |
उत्पादन
की मात्रा कम होती है। |
उत्पादन
की मात्रा बहुत अधिक होती है। |
|
3.श्रम एवं तकनीक |
अपेक्षाकृत कम श्रमिक और सरल तकनीक का प्रयोग होता है। |
अधिक श्रमिक तथा उन्नत मशीनों और तकनीक का प्रयोग होता है। |
39. भारत में जनसंख्या वितरण को प्रभावित करने वाले तीन भौतिक कारकों
की व्याख्या कीजिए।
उत्तर- भारत में जनसंख्या वितरण को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण
कारक निम्नलिखित हैं-
(1) उच्चावच - भारत में जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करने
वाले कारकों में यह सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। देश के पूर्वोत्तर राज्य, जम्मू-कश्मीर,
हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड आदि जो उच्चावच की दृष्टि से विषम हैं, में जनसंख्या का
अल्प जमाव मिलता है, जबकि उत्तरी मैदान में स्थित उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल,
पंजाब, हरियाणा आदि में जनसंख्या का वृहद् जमाव मिलता है। इसी तरह देश के पठारी राज्यों
आन्ध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखण्ड, कर्नाटक आदि में जनसंख्या का वितरण मध्यम स्तर
का है।
(2) जलवायु - अनुकूल जलवायु मानव को क्षेत्र विशेष में रहने
को आकर्षित करती है। भाबर, तराई, गंगा का निम्न डेल्टा आदि क्षेत्रों में दलदल व वनों
की अधिकता तथा आर्द्र जलवायु के कारण विषैले कीड़े-मकोड़े तथा जीवों एवं बीमारी के
कारण बहुत कम घने बसे हैं, जबकि भारत के मैदानी क्षेत्रों में अच्छी जलवायु के कारण
सर्वत्र अधिक जनसंख्या पायी जाती है।
(3)
कृषि योग्य भूमि की उपलब्धता कृषि योग्य भूमि की उपलब्धता भारत में जनसंख्या वितरण
को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक है। भारत में जलोढ़ मिट्टी तथा काली मिट्टी
वाले उपजाऊ भागों में जनसंख्या सघन रूप में बसी है जबकि कृषि की दृष्टि से अनुपजाऊ
मिट्टी, पर्वतीय मिट्टी तथा लैटेराइट मिट्टी वाले भू-भाग अपेक्षाकृत विरल रूप से बसे
हैं। कृषि की दृष्टि से भारत का वृहद मैदानी भाग उपजाऊ है।
40. भारत में पाई जाने वाली प्रकीर्ण (एकाकी) बस्तियों की तीन विशेषताएँ
लिखिए।
उत्तर- प्रकीर्ण
या एकाकी अधिवासों में निम्नलिखित विशेषताएँ देखने को मिलती हैं –
1.
अधिवासों में आवास एक-दूसरे से दूर होते हैं।
2.
इन अधिवासों में व्यक्ति एकाकी रूप में रहते हैं।
3.
व्यक्ति स्वतंत्र जीवन-यापन के आदि होते हैं।
4.
इनके निवासियों में एक-दूसरे के सहयोग की भावना कम होती है।
5.
ऐसे अधिवासों के अन्दर कृषि में संलग्न जातियों में ऊँच-नीच की भावना होती है।
41. भारतीय नदियों में जल प्रदूषण को रोकने के लिए तीन प्रभावी उपाय
सुझाइए।
उत्तर- नदी जल प्रदूषण को कम करने के लिए निम्नलिखित शमन उपाय किए
जा सकते हैं:
1. अपशिष्ट
जल उपचारः उद्योगों और शहरों से निकलने वाले अपशिष्ट जल को नदियों में बहाने से
पहले उसका उचित उपचार किया जाना चाहिए।
2. स्वच्छ
भारत अभियानः इस अभियान के तहत नदियों की सफाई और स्वच्छता पर ध्यान केंद्रित किया
जा रहा है।
3. नियमन
और निगरानीः प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों द्वारा उद्योगों और अन्य स्रोतों से होने
वाले प्रदूषण पर कड़ी निगरानी रखी जानी चाहिए और नियमों का उल्लंघन करने वालों के
खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
4. जागरूकता
अभियानः लोगों को जल प्रदूषण के खतरों के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए और
उन्हें जल संरक्षण के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।
5. पर्यावरण
अनुकूल प्रौद्योगिकियों का उपयोगः उद्योगों को पर्यावरण अनुकूल प्रौद्योगिकियों का
उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
42. प्रवास के पुश और पुल कारकों में क्या अंतर है? एक-एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर - प्रवास के कारणों को दो मुख्य श्रेणियों में बांटा
जाता है: प्रतिकर्ष (Push) कारक और अपकर्ष (Pull) कारक। ये दोनों कारक प्रवास को
प्रभावित करते हैं, लेकिन इनके प्रभाव और स्वरूप में अंतर होता है।
|
प्रतिकर्ष (पुश) कारक |
अपकर्ष (पुल) कारक |
|
1. जो कारक जनसंख्या को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं, 'प्रतिकर्ष
कारक' कहलाते हैं। |
1. जिन कारणों की वजह से जनसंख्या अन्य क्षेत्रों की तरफ पलायन/प्रवास
करती है, 'अपकर्ष कारक' कहलाते हैं। |
|
2. प्रमुख प्रतिकर्ष कारक- बेरोजगारी, रहन-सहन की निम्न दशाएँ,
राजनीतिक उपद्रव, प्रतिकूल जलवायु, प्राकृतिक आपदाएँ, महामारियाँ आदि। |
2. प्रमुख अपकर्ष कारक रोजगार के अवसर, रहन-सहन की अच्छी दशाएँ,
शान्ति एवं स्थायित्व, जीवन व सम्पत्ति की सुरक्षा, उत्तम जलवायु आदि। |
|
3. प्रतिकर्ष कारकों से किसी क्षेत्र की जनसंख्या का आकार
छोटा होता जाता है। |
3. अपकर्ष कारकों से किसी क्षेत्र की जनसंख्या का आकार बड़ा
होता जाता है। |
खण्ड–घ
प्रश्न
संख्या 43 से 48 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न हैं। इनमें से किन्हीं चार प्रश्नों के
उत्तर दीजिए। प्रत्येक प्रश्न का मान 5 अंक निर्धारित है।
43. जनांकिकीय संक्रमण सिद्धांत की तीनों अवस्थाओं की स्पष्ट बिन्दुओं
में व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
जनांकिकीय संक्रमण सिद्धांत का उपयोग किसी क्षेत्र की जनसंख्या के वर्णन तथा भविष्य
की जनसंख्या के पूर्वानुमान के लिए किया जा सकता है। यह सिद्धांत हमें बताता है कि
जैसे ही समाज ग्रामीण, खेतिहर और अशिक्षित अवस्था से उन्नति करके, नगरीय औद्योगिक एवं
साक्षर बनता है, तो उस क्षेत्र की जनसंख्या उच्च जन्म दर और उच्च मृत्यु दर से परिवर्तित
होकर निम्न जन्मदर और निम्न मृत्यु दर हो जाती है। ये परिवर्तन अवस्थाओं में होते हैं।
जिन्हें सामूहिक रूप से जनांकिकीय चक्र के रूप में जाना जाता है।
संक्रमण
सिद्धांत की तीन अवस्थाएं ।
(क)
प्रथम अवस्था : इस अवस्था में उच्च जन्मदर एवं उच्च
मृत्युदर होती है। अधिकांश जनसंख्या कृषि कार्यों में संलग्न है, जहाँ बड़े परिवारों
को संपत्ति मानी जाती है। अधिकांश लोग निरक्षर होते हैं।, अतः मृत्युदर की क्षति पूर्ति
के लिए अधिक पुनरुत्पादन करते थे अर्थात जन्मदर अधिक है। उनके प्रौद्योगिकी का स्तर
निम्न होते हैं। महामारियों, और भोजन की अपर्याप्त आपूर्ति, तथा जीवन प्रत्याशा (जीवन
जीने के इच्छा) में कमी के कारण उच्च मृत्युदर होती है। 200 वर्ष पूर्व विश्व के सभी
देश इसी अवस्था में थे।
(ख)
द्वितीय अवस्था : इस अवस्था के प्रारंभ में उच्च जन्म
दर रहती है, परंतु समय के साथ इसमें कमी आती जाती है। स्वास्थ्य संबंधी दशाओं एवं स्वच्छता
में सुधार के कारण मृत्यु दर में कमी आती है। फलस्वरूप उच्च जन्म दर एवं निम्न मृत्यु
दर के अंतर के कारण शुद्ध योग अर्थात वृद्धि उच्च होता है।
(ग) तृतीय अवस्था : इस अवस्था में जन्मदर एवं मृत्युदर दोनों अधिक घट जाती है। जनसंख्या नगरीय एवं शिक्षित होती है। उनमें विज्ञान एवं तकनीकी का ज्ञान हो जाता है। लोग विचारपूर्वक परिवार के आकार को नियंत्रित करती है तथा स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं का उपयोग करती है। अतः जनसंख्या या तो स्थिर हो जाती है या वृद्धि मंद हो जाती है। वर्तमान में विभिन्न देश जनांकिकीय संक्रमण की विभिन्न अवस्थाओं में है।
44. बड़े पैमाने के निर्माण उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने
वाले पाँच प्रमुख कारकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर - उद्योगों की अवस्थिति (स्थानीयकरण) को प्रभावित
करने वाले कारकों में निम्नलिखित कारक उल्लेखनीय हैं
1. कच्चा माल सामान्यतः उद्योग उन्हीं स्थानों पर स्थापित
किए जाते हैं, जहाँ कच्चा माल उपलब्ध होता है। मुख्य रूप से जिन उद्योगों में भार
ह्रास वाले कच्चे माल प्रयुक्त किए जाते हैं वे उद्योग कच्चे माल के स्रोतों के
समीप स्थापित होते हैं। ऐसे उद्योगों में चीनी मिलें, लुग्दी उद्योग, ताँबा प्रगलन
तथा पिग आयरन उद्योग सर्वप्रमुख हैं।
2. शक्तिः किसी भी उद्योग की स्थापना से पूर्व उद्योग की
मशीनों के संचालन हेतु शक्ति की आपूर्ति सुनिश्चित कर ली जाती है। शक्ति के प्रमुख
साधन-कोयला, पेट्रोलियम, जलविद्युत, प्राकृतिक गैस एवं परमाणु ऊर्जा आदि हैं। लौह
इस्पात उद्योग कोयले पर निर्भर करता है। इसलिए यह उद्योग कोयले की खानों के निकट
ही स्थापित किया जाता है। एल्यूमिनियम उद्योग तथा कृत्रिम नाइट्रोजन उद्योग जैसे
अधिक शक्ति उपयोग करने वाले उद्योगों की स्थापना भी शक्ति स्रोतों के समीप की जाती
है।
3. बाजारः बाजार औद्योगिक उत्पादों के लिए निर्गम उपलब्ध
कराते हैं। भारी उत्पाद वाले उद्योगों (जैसे भारी मशीन, मशीन के औजार तथा भारी
रसायन) की स्थापना उच्च माँग क्षेत्रों के समीप की जाती है इसलिए इन उद्योगों को
बाजार अभिमुख (Market oriented) उद्योग कहा जाता है। सूती वस्त्र उद्योग में कपास
जैसे शुद्ध (जिसमें भार ह्रास नहीं होता) कच्चे माल का उपयोग किया जाता है, इसी
कारण यह उद्योग भी बाजार अभिमुख होता है। खनिज तेल शोधनशालाओं की स्थापना में भी
बाजार की समीपता महत्वपूर्ण मानी जाती है। बाजार की निकटता से यातायात खर्च कम हो
जाता है तथा उपभोक्ताओं को औद्योगिक उत्पाद सस्ती कीमतों पर मिलते हैं। शीघ्र नष्ट
होने वाली वस्तुओं को तो अधिक दूर तक ले जाना दुष्कर ही होता है।
4. परिवहनः सामान्यतया परिवहन मार्गों को जोड़ने वाले
केन्द्र-बिन्दुओं पर उद्योगों की स्थापना को वरीयता प्रदान की जाती है क्योंकि
यहाँ कच्चे माल की आपूर्ति तथा निर्मित उत्पाद के लिए बाजार की सुलभता हो जाती है।
सस्ते परिवहन के कारण रेल परिवहन की सुविधा उद्योग की अवस्थिति को अधिक प्रभावित
करती है। परिवहन मूल्य एक बड़ी सीमा तक कच्चे माल और निर्मित उत्पादों की प्रकृति
पर निर्भर करता है।
5. श्रमः उद्योगों में श्रम बल की आवश्यकता पड़ती है! सस्ते
व तकनीकी रूप से कुशल श्रमिकों की पर्याप्त उपलब्धता उद्योगों की स्थापना के लिए
एक महत्त्वपूर्ण आकर्षण होता है। यद्यपि वर्तमान आधुनिक युग में स्वचालित मशीनों
एवं कम्प्यूटर जैसे यंत्रों का प्रचलन बढ़ा है फिर भी औद्योगिक विकास में श्रम का
महत्व लगातार बना हुआ है।
45. भारतीय कृषि की मुख्य विशेषताओं की चर्चा कीजिए तथा इसकी तीन प्रमुख
समस्याओं का विवरण दीजिए।
उत्तर- भारतीय कृषि की मुख्य विशेषताएँ निम्न हैं -
1. मानसून
पर अत्यधिक निर्भरता: भारतीय कृषि का एक बड़ा हिस्सा आज भी सिंचाई सुविधाओं के
अभाव में केवल मौसमी वर्षा (मानसून) पर निर्भर करता है। इसलिए भारतीय कृषि को
'मानसून का जुआ' भी कहा जाता है।
2. खाद्यान्न
फसलों की प्रधानता: देश की विशाल जनसंख्या के पेट भरने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित
करने के लिए भारतीय कृषि में चावल, गेहूं, दालें और मोटे अनाजों जैसी खाद्यान्न
फसलों के उत्पादन को प्राथमिकता दी जाती है।
3. निर्वाह
मूलक कृषि: भारत में अधिकांश किसान छोटे पैमाने पर खेती करते हैं। उनका मुख्य
उद्देश्य व्यापार करने के बजाय अपने और अपने परिवार का भरण-पोषण (जीवन निर्वाह)
करना होता है।
4. जोतों
का छोटा व बिखरा आकार: भारत में पारिवारिक बँटवारे और जनसंख्या के बढ़ते दबाव के
कारण किसानों के पास खेतों का आकार बहुत छोटा और अलग-अलग जगहों पर बिखरा हुआ है।
5. फसलों
की विविधता: भारत की विविध जलवायु (उष्ण और समशीतोष्ण) और अलग-अलग प्रकार की
मिट्टियों के कारण यहाँ एक साथ कई तरह की फसलें (जैसे- खरीफ, रबी और जायद) उगाई
जाती हैं।
भारतीय कृषि की तीन प्रमुख समस्याएँ निम्न हैं -
1. अनियमित
और अनिश्चित मानसून: भारत में वर्षा का समय और मात्रा दोनों अनिश्चित रहते हैं।
कभी अत्यधिक बारिश से बाढ़ आ जाती है तो कभी बारिश न होने से सूखे की स्थिति बन
जाती है। यह अनिश्चितता हर साल किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुँचाती है।
2. निम्न
उत्पादकता: अंतरराष्ट्रीय स्तर की तुलना में भारत में प्रति हेक्टेयर फसलों का
उत्पादन बहुत कम है। इसके मुख्य कारणों में कृषि की पुरानी व पारंपरिक तकनीकें,
उन्नत बीजों की कमी और आधुनिक कृषि यंत्रों (मशीनीकरण) का सीमित उपयोग शामिल हैं।
3. कृषि
जोतों का विखंडन: पीढ़ी-दर-पीढ़ी ज़मीन के बँटवारे के कारण खेतों का आकार लगातार
छोटा होता जा रहा है। इतने छोटे और बिखरे हुए खेतों पर आधुनिक मशीनों (जैसे
ट्रैक्टर, हार्वेस्टर) का उपयोग करना और सिंचाई नेटवर्क का विकास करना आर्थिक रूप
से व्यावहारिक नहीं हो पाता, जिससे लागत बढ़ती है और मुनाफा घटता है।
46. सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए भारत
में गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर- गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोत वे नवीकरणीय और पर्यावरण-अनुकूल
साधन हैं जो कभी समाप्त नहीं होते, जिनमें भारत में सौर और पवन ऊर्जा का विशेष
महत्व है। इन्हें 'अक्षय ऊर्जा स्रोत' भी कहा जाता है क्योंकि ये असीमित मात्रा
में उपलब्ध हैं। भारत जैसे उष्णकटिबंधीय देश में इनका विकास तेजी से हो रहा है।
1. सौर ऊर्जा- भारत एक उष्णकटिबंधीय देश है, इसलिए यहाँ वर्षभर
प्रचुर मात्रा में धूप मिलती है। सौर ऊर्जा का दोहन सूर्य के प्रकाश से किया जाता है।
• फोटोवोल्टाइक तकनीक: इस तकनीक द्वारा सूर्य के प्रकाश को
सीधे बिजली में बदला जाता है।
• संभावना क्षेत्र: भारत के पश्चिमी भाग विशेषकर गुजरात और
राजस्थान में सौर ऊर्जा के विकास की अपार संभावनाएं हैं।
• उपयोग: इसका उपयोग घरों में रोशनी, पानी गर्म करने (सोलर
हीटर), फसल सुखाने, और खाना पकाने (सोलर कुकर) के लिए किया जाता है।
• प्रमुख उदाहरण: भुज के पास माधापुर में भारत का सबसे बड़ा
सौर ऊर्जा संयंत्र है, जहाँ दूध के डिब्बों को कीटाणुरहित करने के लिए इसका उपयोग
होता है।
2.
पवन ऊर्जा- पवन ऊर्जा पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त और नवीकरणीय ऊर्जा का स्रोत है। यह
बहती हुई हवा की गतिज ऊर्जा का उपयोग करके पवनचक्कियों के माध्यम से उत्पन्न की जाती
है।
• कार्यप्रणाली: तेज हवा चलने
पर पवनचक्की के ब्लेड घूमते हैं, जिससे टरबाइन के जरिए बिजली बनती है।
• अनुकूल परिस्थितियाँ: भारत
में तटीय क्षेत्रों और खुले पठारी भागों में तेज हवाएँ चलती हैं, जो पवन ऊर्जा उत्पादन
के लिए अनुकूल हैं।
• लाभ: यह पर्यावरण को नुकसान
नहीं पहुँचाती और एक बार संयंत्र स्थापित होने के बाद इसका रखरखाव आसान व सस्ता होता
है।
3.
अन्य गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोत- सौर और पवन ऊर्जा के अलावा भारत में कुछ अन्य स्रोत
भी विकसित किए जा रहे हैं:
• बायोगैस: ग्रामीण क्षेत्रों
में पशुओं के गोबर और कृषि अपशिष्ट का उपयोग करके खाना पकाने और रोशनी के लिए गैस बनाई
जाती है।
• भू-तापीय ऊर्जा: जमीन के अंदर
की गर्मी (ताप) का उपयोग करके बिजली उत्पन्न करना।
• ज्वारीय और तरंग ऊर्जा: समुद्र
की लहरों और ज्वार-भाटे की शक्ति का उपयोग करके ऊर्जा बनाना।
47. मानव विकास के उपागमों का विस्तार से वर्णन कीजिए।
उत्तर-
मानव विकास के उपागम मानव विकास की अवधारणा गतिशील है। मानव विकास का किस रूप में अध्ययन
किया जाए या अध्ययन का आधार क्या हो, मानव विकास उपागम कहलाता है। इस समस्या के प्रति
सभी लोगों का एक समान दृष्टिकोण नहीं है। इसीलिए मानव विकास के उपागम भी भिन्न-भिन्न
हैं। इसके चार महत्त्वपूर्ण उपागम निम्नलिखित हैं
1.
आय उपागम – आय उपागम मानव विकास का सबसे प्राचीन उपागम है। इस उपागम में मानव विकास
को आय के सम्बन्ध में देखा जाता है। इस उपागम में यह माना जाता है कि यदि किसी व्यक्ति
की आय अधिक है तो उसका विकास स्तर भी उच्च होगा। अर्थात् आय का स्तर व्यक्ति द्वारा
उपभोग की जा रही स्वतन्त्रता या अवसरों के स्तर को परिलक्षित करता है।
2.
कल्याण उपागम – यह उपागम सरकार द्वारा मानव कल्याणकारी कार्यों में अधिकतम व्यय करके
मानव विकास के स्तरों में वृद्धि करने पर बल देता है। इससे लोगों को अधिक-से-अधिक लाभ
प्राप्त करने के अवसर प्राप्त होते हैं। इस उपागम में लोग केवल निष्क्रिय प्राप्तकर्ता
के रूप में होते हैं अर्थात् इसमें मानव को लाभार्थी या सभी विकासात्मक गतिविधियों
के लक्ष्य के रूप में देखा जाता है। अतः कल्याण उपागम मानव विकास के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य,
सामाजिक सुरक्षा और सुख-साधनों पर उच्चतर सरकारी व्यय का पक्षपाती है।
3.
आधारभूत आवश्यकता उपागम – इस उपागम को अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने प्रस्तावित
किया था। इसमें छह न्यूनतम आधारभूत आवश्यकताओं; जैसे-स्वास्थ्य, शिक्षा, भोजन, जलापूर्ति,
स्वच्छता और आवास की व्यवस्था पर जोर दिया गया है। अत: यह उपागम मानव विकल्पों के प्रश्नों
की उपेक्षा करता है और परिभाषित वर्गों की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति को महत्त्वपूर्ण
मानता है।
4.
क्षमता उपागम – इस उपागम को प्रो० अमर्त्य सेन ने महत्त्वपूर्ण स्थान दिया है। इस उपागम
में संसाधनों की मानव तक पहुँच की क्षमता में वृद्धि करने पर जोर दिया जाता है। अर्थात्
मानव विकास की कुंजी मानव की संसाधन प्राप्त करने की क्षमता में वृद्धि करने में निहित
है।
48. प्रदत्त संसार के मानचित्र में निम्नलिखित को दिखाएँ—
(A)
श्रीलंका
(B)
नॉर्वे
(C)
मेडागास्कर
(D)
जापान
(E) अलास्का

